1. Akhyata Siromani Vyakhya of Raghunatha Bhatta (Pothi or Oblong)
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आख्यातस्पयल्नोवाच्य:
प.शि-री श्रीगशोज्ञायनमः।।प्रताभ्यनीरसपाममुदम गुशानटिं आरणातवादसघ्ारवारघुदेवेनपते १ नैयायि क-परमतनिरा कर्तखमत प्वस्छापयते।शरमानस्मति यलोवादनेयल लविरिद्टोवाच।यल लशका ताव घेद्क मितियावतायथामुतेय लूप मा पा रोतर्गत लेन व्यापा सव्ाकि वाहेमतव्पव छेद्ापतीते:शक तावछेदक्वा रम्ात ले नते रुरिसे वधेनारमातपद् वत। यहिचरू दिस ब धेनाख्मान पद्य लेलकार घेवान नियु क्ा नात त्रेवा रमान पर प्रयागाता तथाव पद ल सादाव पिक्कतिबो धापनि।ा पिल का रस्कनिश् त्राहेश नरू हि संबे धेनासमतपट्वतोलकारस सत्वा दिति विभाअत। तटा विशिष्य तिस्वतस्वाहि कमेवशतातावछेद के वो धसतनदशुलकारसाधार शाल समवशा कतार घोट क मि तिपरासं। नसप क्याभा वा न भाविवापचेनिसा टावयिक्कतिवोधा पत्तरिति तथा चय तत्वावद्विन्नविद्यय कश्ञाबूबुदित्वावव्विन्प्रतिय लतवावछिन्वि्मराम
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रूटि संबंध घटिता रमातपद्वत्वावाहन्विरु पित त्तिविष यदज्ञानजनोसछि तित नहतुकसनीय नितिध्ये या ननपदर्शितकार्यकारसा भाव कल्प ने मुदमातपराघल विषयक ज्रादबोधा पतिरि तिवतो सभ स वसवं यरिपाकाघनु कल यलविषयकश्रावबुद्ित्वावछिनश तिवारि पद निष्यप वोदिधात्व मवहितो तरलव रूपानुप जानसहतुलनकल्पतवस्ुतःभुद्धारथ्ा तपटनमयलापष्ठि तिकालेपा को यल प्र तिनिराका क्षेवा वंराता काद मलय लविषय कज्ाकवा धवारणायतादनाकार्यकारसा भावकल्पनायावपकत्व न यरर्जितास्मात वहनिरूपितन्ा तिज्ञानज न्यलो पास सायल शाद वो धे जननीये पचती साहा तु वौज्ञानेस्वस्तह कारित्व कल ने नेद के वलाख आतमहातयल विषयक शाोधदारश सेभवात के चित्रुा मा रमात सयलचाचक तेपाद गोचरनित साहमयल काल वैत्र:पचनी तिप्रचोस योम्यलापत्तिमुद्रावयाते तन्भ्रद्धीमहि पतृत्ममा वा तिरि क निद् लारम मलेमाना भावात. वस्तुतातुनिदृलाखमय लागीकारेपिनक्ष
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भा-शिटी. तिनयमःपव तीतिवा व्यात् पाकातु कूलरु तेरे शा हबोधोम्पसानिवसारमयलकालेपाकानुकलकतरमा वात्तहानींताद शप्रयो गस्पतथा विधनमात्मक वौधाजनकतया योगपतवेसपपाश मेवेतिथत पर ्शितापु भु त्ञिमियाप्रव त्ित्व मेवारमात पटन्ा काता व छेटकों पवर्रायिति ति दामतेइष्ट पाधनताज्तानारिजसता वछे इक कोटि प्रविष्ट खेनसि हाया9 प्रदृत्ति त्जाते रीघ्व रीयक तिसा धा रशात्वमाना भवनेघवरविंदवक्ती तिवाक्रा व्छाद्वोधा निवाह-परिचिंतनी यः।नवतत्रा खव्यातस्प क तौल क्षतायाना नुपप त्तिरितिवाचे।उपदर्शिती साता दृत्र वाव्चजन्नाववोध स्पज्ञा तये व निवी ह लक्षणदा सना या त्ा न्पाय्म तातननचारमातएपय ल तविशि छश्राका तेवन-पव तीसारिवदीश्वा: पवती ति.प्रयोगवारसायावयमारमातए्प प्रवृत्ति तविशिष शाताल मुपगतव्पुमितिवाच्ी सातापचनी प्ाटिप्र योगक्त स्पापि वा रणा समवाना तधाहि। शरारमात ए यलते 1
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विशिष्टवाच कले आात्मा पचती साहिम योगपतिरिसत्रेतथा विधन्र योगत दार्थसथा विध्ता दोवातथा विधजन्ता दपमात्मक वोधोवा्नाघनकंठता ल्वाभिध्यान रूपरादकारशासलेननथा विवन् देशषा पत्तेनास-तिथा विधशा दवोघस्पापाटकाभावाता योग्यृताज्ञानमे वार्पादक मितिनुना शाकनी ये।यतसथा विधश्ा दवो धाप सिध्या तोहरशाव धोध प्रतिता त्रायोग्यताज्ञान ते नहेतुल्व कॅस नस्म तिष्प्रयोन्तन कुत्वाताननुपाकाजुक लल तिमाश्वेतर सादिजा ठ वो धू प्रतित तस मौकारयो ग्पॅताज्ञा नएम घर्मि ताव छेट कमेदे नहेतुते गौर यान/समान धर्मि. ताथ छेर कताप साप सेवत था विघयोग्पताज्ञान शाववोधयो हे नु हे तुम द्राकतथावपाकानुकुल कतिप्रका रता निर पित वित्रोममताव केदकृता सव धेनजादेत्वाव छिन्न प्रतिपा का नुकूलकतिप्रकारता निरूपितविशेष्यता वछेद कता सवर्थ नज्ञान लेन हेतुत्वमिति योभ्पतात्ता न शाद्बोध यहितुहेतुभद्रावेजवबव
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श्रा-शिर्री तनाहवा संवधन पाकानुक लल निज्ञानस्पात्मेसत्वा ततता दशावोथाप तौ कियमार याफलतकानु पाका ३ कूल रु तिमाना त्ेति न व् योधा यतिरितित माश किय्ा:आाव छेह काता सवे धाव छम्तता शक तिप्रकार करेंप दवो थंप तित था विधयोग्पताज्ञान सपहे तुनाया-कल्पनीय नया ऋरात्मा पवती साद विश्ेषर र्शिनाता हशयोग ताज्ञान विरहेणा तथा विष प्रमात्मकश्रादवोधापतरजकप लान एवंचेश्वरपवती तिवा कच जन्पतादशवी भाप निवारणस्यापितुलम लवातानवेव सतिईभोवेंदव की तिपयोगा हो धामु पपतिःई घरे अव छेदक ता सवधे नह तेह भावाहि तिवा मोतत्र समवायसे बधे नवादृश क तिंप्रकार क बोध प्रतितथा विधान पूर्वोज्ञानसपरेत तवक स्पनानाईश्वरःपवनीसारित-तथाविध काा ववो घस्मानुस्हनतथाक सना यात्र संभवान कजवसतुका एम त्सापच तिई श्वर-पवनी त्पादिवाका नन्पतथा विधवेध पीष्ायतिमगीकर्वती सलमधि कनाननयतत्वविजर ₹
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पयतिपाक करी तीतियला येक क रोतिनास वोख्पाल स्यावे यर ला लाव्य य हारादय वाध कं विनाविवरशाा दपि एम तथा व्ुत्तः= हे शरारमातपर स्पश क्रो कि प्रभाणामत आहापवती सादि किक रोती सनंतर कमेणो तिरोष-सर्वारमातवि वरशदितिा दत्रालकारा एगग खर्थ कथ नादि सर्थ:1पर वो रित बा कष स्पो ततर वा वधे नार्थी क थन विव र सामिसस् नतक्षणा लमिति भावनननु विवरतास् कथत्राक्तयाहक लेन्ना विधयानुमानविध याना।नाघनपाक करी तीतिवा कास्पपाक विषय कय लमा त्रुबोधकुत्वेनपुत आर म्ातश पयवोघ कतयातस्पचक्तय हे शदविध या प्रमाशत्वास भवाता नास:।साध्यते तुप्रयोगा सभवाहि तिचेला ऋा ख्यातयंद्यलत्वविशिष्ेत्रा कावा धकेविनायल तवविशि हार्थ कक रे तिप्रतिया दितार्थ क लातः पाक लविशिष्शक्पाकपटपतिाहि तार्थ कपच् धातुवता यघ्दि वष्ट वो ध पद प्रतिया हितार्थ क तृत्त विशि देश्र कमितिप्ामान्यम्ा स्माविवर शास्पापिशकि या हक त्व सेभ वाता ननु उयदर्शिता नुमा नमप्र या जक मतचाह।व्वहा रास्विति।वाधके
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श्रा.शिरे विनान्रन्पलम्यत्वप्रतिसंधान विना/ इदतुधर्मितिश्रारम्ातसपज्रात्तिअवछेदार्थम क युसत्ेरिति जक्रियु हसभवादिसर्थ:तथाच विचुर शााितुका तमानसन्ातययार कतेतुसयु तज अवहा रहे तुकानुमानहपवि. वातचयाह कतयाघट तवाहि विशिष्टेघर परा दर विश्कि विलो पप् स गइतिभाव: मनु विवुरश तत्रैवशकियाहक यत्रनामल भ्यत्वप्रति सधानवातो प्रकतेतुपाक:युलूनमःपार्कत्वाटिस नुमाना? पियलस्पूलाभूसमवे नान्पलभ्पत्वाता अन्पलम्पूसप सारमतपट्शक ले किमपराऊ धर्मिशोत्तश्राल कि करोती साहियल प्रश्नेयतत्वविश्िष्टे नित्ता पित से वै धवोधकजाद प्रयोगे। पवती एतरस्पाउत्तर काल भा विपचनीतिवा कचेउपह ्जिति पश्र निवर्तक लसाय तार्थक त्वविनावय तृत विशिष्टेया कमवे धवोध विना।ऋ्रायभकाय पर्मविशिष्टेया मविछि लास सबंध: यत्राभावा वचांीयतेत मे विशि द्े त हर्म याघ्मधर्माव छिन्तस एम किंक रोतीतियल प्रश्नेय चवती त्पुत्तर स्पयलत्रार्थ क लंदन्ता ड्ा नुपपन।
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स्त वघवोध उत्तरवाव्यात््रुतीयतेत दातउत्तर वाक्यतन्प्र भ्रनिवर्त कं भवति। यथाघरत्वगिष्षेजित्ञा सतप्रवध बोध केवस्मा हर छ तिप्र श्रे घट लविशिष्टे रेडनजन्पत्व वोधकटडा इटसत्तखवाकय निवर्स ल। प्ररुतेचाख्या तस्पयत्र त्वविशिष्टावाच क ले व्यापारश स्थाप वती तिवा का सा कानुकलममायार वोधा पुपामय लत्वविशरिष्टेपा कस बंध वोधाभावात्त हा का सपयलत्व विशिष्ट निज्ञा पित सेव धवोधक किक रोतीति प्रश्नवावचनिवर्त कत्वानुप पसाम्रन्पलम्यतवेपि=्पारमात स्पयत्ृत्व विशिष्टेशाक्ति रावजपकीनतर योग छती सा दै्री ख्यात एपयल बोधकत्वा सभवेन आपा रेशक्तिरव उपकी सतन्तराहाऋ्राचेतनर ति। श्रचेतनार्थ मुख्यु विशष्म क वोधजनक वाकेरसर्थ:।नुकलव्यापारत।ऋत्रानुक ललोली र्त नेतुग मन स्पतेन संववेम व्यापारे: व्वयस्फोरएावया नतुनददतभीवेना पिलक्षरणीयता।अर्थ तवातामत्र अचितनरयोगछत्तीसादो चामु कूल व्यापारेलक्षरततिप्रांचः=
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अन्यदीयगमनान कूलनाद नादिम ततिगछनीत प्रयोगातरयागछतिजानाति इछ्नियनत छैl वि व धतनिद्ाती तादो श्रा शिरी-रामनस्पान्येपहार्थ:पदार्थेनानवेतिनतुपदार्थवारेशे तिव्युस्पत्ति वि रोधा द्ातत्रम्ापारेलक्षरगवा दिम तं5ू षयत अन्पदीयेति। रथगमनाव कल नोद नारय सयोमादिम तिनिश्लपुरुषे: येपुरुषागछती सप्रयोगहिसर्थःतधाचारआतश्प व्यीपार वाटिम नताट श्ञति शवलपु रु षियिगमनानुक ल नोदनाख् संयोगाहिरु पमापारवतयापुरु घोगधतीसा हि प्रयोगापत्तिरिति भावः ननु ताह शपुरु षेताा वि धप्रयोगपति ना मतथ्या विधवाव्यजन् प्रमात्मकवोधा पतिः सावताहशापुरु वूसप निभ्लताह शायाउड्राक्ति: नयहावासे छापत-।ऋधितत्का लातमवेन वादरशादी धाप्रस घ्ामापलस भवुत्तश्ाह रथो॥ छती साहि। के चित्त सामानाधिकर एपसबधेनवर्ने मानग मृत विशिष्टे प्पापा रम्राख्यात स्पलक्ष रा कल्पनान्ो पर तिना पत्तिरिसत श्राहगिछती सादी ताङ्। कतिव्ापार यो एम रयो करियानुकूल वततिव्यापाश्यारप्रनीते :=
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सादि कचि त्ह तिवा धेग्रापारलक्षरा कल्पना मोर वाम्पा क विद्यकति ापा रयोवधिन कतिव्यापार ना योःप्रती ससे भवािसर्थ:ननोतीसाहावाभयलेतराखव्मातस्पल क्षरणाकलनचेत्रो घटंजाना ा तीतिप्र योगकालेघे, ज्ञानव तिमेन्रेमेत्रो घरंजानानी तिप्रयोगामतिःएककालीनत्व सेव धाव छिन्ततराथ् युत्वस्पत दानी मेत्रे पिसत्वाता ततत्सव धाव छछनाश्रय तेलक्षरणाकल्पनेपुनाती समवाय= क् वगौशवातरयैया मापारेलक्षणाकल्पन मेवन्यायोति संगसपनपुर शितरीलावारशीय लाता यरिवा रमांत स्पाश्रपत्वेलेनाभ यत्वपामा मल क्ष एातज्ञा नानी साही चाश्रयततनर पेासमवायु पंव धाव छिन्ताथ्र यूत् सपैववोधतथे वकार्यकार ाणभावकल्पनाततथापिया पारलक्ष रायक्षयागीरवापत्रिसत-व्व्ाह गसादिम ततिआरिनाताना रिपरिय। मात्रपटन
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हि-१. आयारमव छेस-तथावानुभवा नु रोधेनाणसानत्त सेवंधाव ना भ्रयतेलक्षराणातथाविघउरुतरका र्यकारणभावोवाकसमपतइ तिमा व:के वित्ुा ननुउपरर्शितस्छ लेखु आयारसवाभ्रयतस्पा्ाप्रती तेरलंतत्रलक्षाय सतत्राहा मसाहि मलेती साङ। नुनु-प्राामातरममु रार्थवाध स्छले प्रवता मयत्वेल क्षतक लपन नस भवति।यटोनतपती पादीनततीस सभवात घटस्पनषलेनना नगश्रय त्वाभावाता प्रतियोगिता सवुधेननाशत्वावछिन्नपतिपतियो गिनलादा नपसयर्थ नहे तुत्ा तुरोधन नमु सा पिप्रति योगिता सेब धेनना शाम््र यत्वोगीकारेपुतर्लाघवात्ा तियोति लएवलक्षराणकलपन ऐमे वोचितत्वाहि सत आाहा नपती साराव ति। निह टेतिऋनारिसि सर्धानन परर्द्ितबद्ग प्रयोगस तेतत्रश किरेव क मितिनकलपनइ ति चेन्ापलतरुपल एम
आश्रयलेनश्यती तादी प्रतियो मिवेनिसन्ढल क्षरण=
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सुशक्ाताव छे ट्रक संभवेनत सबंधघरिताश्रयत्व त्वावछिने जक्त कसनेगोरवत्तानूपप्रति वेधकएम् तजलाज लि. प्रप्त सेत/नवाश्र यत्वत्वस्पा तिरिक्त तवमुपलतद वछि नेजलि कलने वाधका भावइति वामातर्हि आ्यारत म्म तिरित्त म भुपे सतद्व चछ क्रेत् े कल्पतसपा चिन त्वात न वेष्ा पत्ति:पथास ति विनिगमका भावानाऋानंततत्तरमावाछ लेशकिकल्पताम येश्यलंघ्यवान कस्त यलत्वावाछ ले एवा रसात समन्राकि कल्प नवाघका भावातू। एतेनप्रम वार्यतम तित कंस्वी कसतर वदि ने शारम्ातएम तिन समनल सुरेस: पारता उपटरीत विनिश मना विशहेशा तत दननध मावा छलनेजाकि कल्पनाप्रयुक्त गौरवस्पनाग रूक त्वारिस धिक मग्रेव क्मामनननुचै त्राजा नानी सा हो आ्राश्रयतवेनिरूप्तक्षरणा कल्पन निरधक मेव ित्रा
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मडुल: पचत चैत्र:मैत्र:प च्पनेतंडुल इत्पन्वयाबोधे नधालथे प्रादिप निकार्थयार्मे देनसासादवय
म्ावरी भ्यतासबं धे नचैत्रेज्ञान रूपधात्वर्थसमान्वयेनैवापुदर्तितान्वयवोधो पपत्तेतत्राभ्त्वप्रकारका मेत्र=पच् जुभवर्वत्ति & एवेति विं तामाशी का मतेद षरणम्राह।चत्र: पचनी सादि।अन्वया वो घारि तिचेत्र-पवति ने उलइ साधिक मना सं वधेनपकित डुलए्पाबामम ति न कुल इसत पा के कर्न ता सव धे न मै त्रसानया ननुभवादिसर्थ:धात्वर्थप्रातियदिकार्थ योरिसा दि। पात्वर्थ नामार्थ योरमेदा तिरित्त साक्षा ब धेनान्वयवो धस्पादुमनतयूसर्थुन।ऋन्ना के पचती सा हो ऋनेहसवंधेन धातर्थ नामार्थतो कस्मान्वयात सुसत्तिमंग-ऋातो श्रभेदातिरि केति नूतु तत्र विशेषए विभ क रेव श्र र र्ः- तत्रै वचत्तो क स्पा न्योऽभुपे यते तथा चतत्राले दा तिो कल विश्ो वराणनुयादातेपि नदीबन एभ बाधस्थाव्युनत्तयासंबंध विद यात ज्रान स्या संभ वादितितुनव्या
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क त्वासं भवात नूएयात मेदार्थक लेपिल शु विभतेर लुसंधान मोक पाकुश तादाव भेद सवधन पाकेष्नेका न्यवो धस्थानुभवसि उ तयातत्रैवा मे हातिरिकतव विशेषशा व्यानतिदान सभवातातत्रलुप विना
विभकेरनुसंधान विना शादवोधान मीका रेगतराजयु रु डत्पा से एजपूर सराजपव धे तिलक्षरा योतत्रा पितधाव कुंश्ञ्यत्वाहि तित इलयचनी स्वादा माके न इलकर्म त्स् वकर्मता सेव धेनत उलता पिवो धोस सानत्रमु सत्ति भंगप्रसगवाररायसाक्षाहिति/ना मार्थ घातर्थो भया निते विभ तचर्थातरि के सर्थ:ननुतधा पिनक लजमक्षयेहि सत्रवि घ्र्थवलवदनिसा ननुव धि त्वविशिष्टेप्टता ध नलवा न्िते
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प्रा.शिरी ननुर्थाभा्वस्प वात्वर्थेक लजभक्षरणटाक्वपानत्रवमुस त्तिमंगपुरिहार।:स काइति चेनियातार्घ तेरिचत्व विशेषशीयास्वी कुरुना वानन पद स्पाभाववतिल क्षा। तएपश् भेदसंवं घेनतत्रधात्वर्थेनयर सेवंधम याद्येसादि विय्ीजानाती सादीधा तवर्यना मार्थयो- सपगम यदिया आाश्रयत्वस्पभाना स मवाहिसर्थभत थचेताश्ा मु तल-चुरोधेननामार्थनिष्ठश्रमे दा निरिक्त संवेधावधिन् प्रकारतानिरु पितबिजे ष्यताबक हकतास वंधेनशादबु हित्वावछि न्ं प्रति विभकति पट विरुतितवृत्िज्ञानन पोपस्छित प्रकार तातवध नहे हेतुतेकल्पनीय। एवं धा खूर्घतिघप्रकारता निहुवित विशेष्मता वछेरवातात घेन आाद्वु द्रि त्वायछछि लेप्र पीतिनवैत्रो जा नाती साटी आम्यता सबघेन धात र्थज्ञानसपनामार्थचयतोधसं भुवर तिभाव :! । ात्र चिंत्तामणिकारमनातुया थिन:चित्र-पव तिनइलतादो कर्मना सब धेनते इलस्पपाके नवयव एम
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वारराय नामार्थनिध्वतथा विधप्रकारतानि रुपित विश्रोध्वपनाव छेद कता संव धेन शा दयु दवित्वावछि न् प्ति िम कके पदति रूपित वत्तिजानजु न्वो यस्छि ते: प्रका रतासे व धेनहे तुत्च क ल्पतम तु। धस्वर्थनिद्प्रकार ना निरू पित वि च शेष्यताव ेदकता संब धनशा देबुदि त्ावछन प्रतितथा विद्वाप स्थि त तकल्प नेवु निष्रामणिकतमा नादहणी मे। तथावैत्रोता नाती सारा प्राम्रपता सेव धेन घातर्थए नामार्थे ्रन् यवो धेबाधुका भावादाश्रय लेश्रार्पानर्स्थन हुटल क्षाणणा कलन किमितिनजानी महे/ननवार मातामाश्रयलल क्षसाानेशिका रेजानाती स्ारावाश्रयलप्रकारक वोधातु भूवायला यह तिचेन। प्रायः समात्रानुभवब लातथा ना धक सदावयती स्पाऊमत्विवदुतेवरु व:ाजाना ती सादावा समातएपघ रादो खारसिक लक्ष णगा ज्ञान का लसा नी योछटा श्री तिजादवो घोपर्पलर्थ घ यरि विश्ेष्मकतानप्रका रकवुदित्वीवछिन्प्रतितता धानुसमभिय्योआा हतर
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श्राशिरी रखातपरतनघटाघुपस्छितततुत कलमपनेघरत् परत्वा दिले देनानंतकार्यकारसभायकसनापसागो खानयक्ष्म तहनिये उपज्ञान निष्यु प्रकारना नि रुषित्रोष्यताव छेटकता सवधन त्राद बुदधित्वावद्न प्रतिशारमनपरनिहुपित पित इत्तिज्ञानज मोपस्छ् ते:प्रकारता संब चे नहेतत क सने वन्पा यसी। तथाचनारसक पका राणभा वान वाथ चैत्रो जानाती सा दी म्रााम्म्रयता सवधन वैत्रेत्ता घालर्थ स्पान्च य तित तारमातसाश्रय ते लक्षराव रप की ति यनुघट त्वपट त्वाटिक मनिवेउपतथा विध कार्यकाराग भावक सने ज्ञानी योघरतियोम्पताज्ञानवलातया विधारया तय दत्तानज मय यघुपस्थित हशाया ज्ञानी यो घ निशाव नो धस्पसमायसंब धनाल न्पायतिर्डबार।यदि वविशे मनाव छेर क निध प्सा सप्ाशाउ बुदियोग्यता तानयोर पिका ्यकारसाभावतिय्याविमिन्न विवयकानु मितिसाम ्म्र भाय रूप का रशाव लानदात घा विध सावचोधा यत्ेतत्मनिवल शोपिड-समाधेय ने सव उपंघ टत्व एम
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परत्वारिकं निवेपपतथा विधसमुमि व्याहार ज्ञानज सो पस्छिति शाद वोधयो:कार्यका रणभावक ल्पनमम तिकिं वाधक चित्रो जानानी सा देवित्रे आर्राश्र्रयता सं बधेनत्तानसमान् यहतितन्ा उपद ्तरित वाव बोधपर जयोपष्छि सोर्विषय भेदन कार्यकाशणभावक ल्पनतत्ह षय कतवे विनिगमना विरहेशाकार्यकार साभावान साता का रणातावछे ट्ूक गोरबाद्यातस्य्पघरत्वारिव त्ति विधयता सव धेनज्ञा नत्वावछ त्रे प्रतिघट त्वारिवित्ति विषयता सव धेन ज्ञान तेनहत लवातर कत्पनस्प सम्पकृत या श्राम सभा वा तात थाहि वि रोधि सामय्यभावेन ज्ञानीयोघ्यर इति शायवोध जननी येताधान समभि व्य हताम्यातयदन नोप स्छिति विशिष्ट घर लप्रकार क जञानार- सहकांतत्वेक ल्पनी यौघ्य खप् कारक ज्ञाननथा वि धोय सछिितिवेशिहप च प्र कारताप् व धेनय न्वाधिक रगातलरू पितविषयता पवधावछि न्र सतित रुप्सा
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मा-शरी मानाधिकारय संब धेनातथा चताह शारखातय द्रज्ञानजसयरायुपस्छिति कालेतथाविधपामान।धिकर १० राय सेबे धे नता हम्रमातयद त्ञानन न्ो प्छतिवि शिष्टे यत घटत्वज्ञानत स्वरूपकार्य भावेन वरा धिसामग्रभाव रूपकार सावलातन आाम्मनित्ता नी यो घटशति शादवोधाय तिः नव तथा यिपुरुवांतर स्वा रथा सह तपर ज्ञान जन्पय राधयुस्द्तिकाले पुरुषानहत्मननि विशोधिसामन्य भाव रुप कारशा वलात् ज्ञानी याय तित्रा इवोधापुत्तिईवरिवे तिवा मोपकातम समवेतस्पा न्यातमनि श्रामन्तिवाएगयितदा त्समवेन लाव छिम प्रति ना दा तप सबधेनन रात् तिना पिहेतुृत्वाव रपक तयानत्ततपुरुषीयोपद र्शिता रमात्पर ताननमो पास्छिति विशिष्ट तुत्तमुरुषीयघटतवज्ञान लावा छोन विकिष्ट तदान विशिष्य विरोधिता मय्यभावस्पत्तानी घोधटपति पादवीधसा मग्री त्वायुय मे न कथभ प्यतुपपस भावात।घटत् ज्ञान सव छछिन्वेशिशषचतत्त राम
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दातम निएक कालीनत्व संव धेन विरो धिसा मय्यभावेत्तत्तहा तवैशिशि एपंच ताटा तय विशे बसातो भयघरितसामाना धिक शाप सवधे नवो ध्तथाचज्ञानत्वावछित्तप्रकारता निरु पितव जेष्पताब छेदकना संव धेन जाव पुदिलाय छे नपतिप का रतां वुध नतथा विधारमातपदन न्ोप सते है तुलवैस्पनिर्ड षतयातादश्रहेत भावात् वैत्राता नाती सादी चकेम्राश्त यतासंवुधेन जानान्च्य बोधास भवेनत नार आातसणाम्र यतवेल क्षरणाबरप कीतिसर। के चित्ता चेत्रोजा नानी सा देचिते साश्रयता संवधेन ज्ञाना न्वथा भुपग मेत्रस्छित माखखा तस्पद तिज्ा ता पि चैत्र:पचता सासाव पिस्वानुकृलल तिमत्वसबधेन चेज्े याका न्वयवोधसव कुमुचित तात। यरिबधात्वर्थस्प नामार्थ:चय वोधो:यु सन्नइतितथा विधवोधस्पास भवेनारख्ानस्प हिशकएव उपकी तिवि भामने।तदाजाना तीसा दाब
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नपटा कुर यो:कृताकृतइतिव्यवहारात शा-श-टी. पिश्वाम्यत्वेल क्षरातकलनमाव नप क मिसाऊम नन पदर्शित विवरशारिव लारा ातसपयलवाचकल तरैवायाति यहि लनोय लार्थ क लेन देवतुकुत स्स्प वपारत विशिष्ेत्रक कलप ने वाधकाभावातहस तश्राहहान भवे सा हि कि यानन्पत्वेतिसयो गरू पम्मापा रत्न सपति स धाना वित्रोषेपीसर्थ:तथाचक धातोआरपारार्थक ते पो कुशही व्या पार जन्पत् प्रति स धान काले र तिन स त्व प्रति सधा नाप्रति प्धा नाभ्पापट-कृत म्रंकुरोनछतइति अवहार-सर्वानुभवसिह्ञान स्पातातन्मतेत दाश्र कुरव्ययारनन तवज्ञानपतेन व्यापारजन्प त्रूपत्यवह त व्याता ज्ञाना भावा रितिभाव:कुधानो र्य लाथक तैसुचन रमाहा ज्ञाना हिव दिति/ताता इम्पादी यधाज्माश्रयत्ववोघकत्वूपट सम भिव्याहतेपरा न ज्ञाना भ्रय शेत्र इति बोधलद्षन क नाइ सन्रा वितरराश्रयवोधकतचूपद सम भिव्याह तल थानु पदात्साभ्रयइति एम सञाना दिवदाशयपरत्रिजन कतपदस्यकृत्याभ्वय बोचकलसभवात्= झाचानु:
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वोघउत्पध्यतोसच छथातोर्य लार्थ कत्वेविनान संभवनीतित एय लार्थकलमाव उपक मितिभाव:इद मत्रवो धो।त.जारिपूर एकर्तर्येव ताक्तिय मवला घवा जा रि पटस्प हजौश् किरंगीकक्रियत इतिवो सातया सतिपत्ताा वे त्रह साद वन्रेत वप हार्थसते-समवा य सवेधेना न्य वोधासभवातनामार्थु धात्वर्थयोरिवनामार्थ योरपित्ममेदातिरिक्त सवंधेना न्वयवोध स्पाुसन्लान न्रमथाघट:कर्म लमिसा दिनि ए काक्षवा क्यादृ् पिक म् ता या माघे यता संवेधेन घ टान्च पवोधप सेगात।स्रजनचौनाम लेना स्ीतितु न सेभा वनीयस्वाद्ये त त्ेन त स्पावि ना मत्वात। तहाड रम युक्तानस्वाद्य तमिह नामेहै मिसारिज्ञाताइसा दातु रुते ती नानु कूल ता भा वेन ज्ञानानुकुलकसा श्रय बोधा सेभवाता से विषय कधातु सम मिक्माहार र्हले नय ााश्चिय लेल क्ष शामशप की ति न नु ज्ाता इसा दोन वोल क्षराणागी
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क्रियाया: क्रियानुकूलव्यापारस्पवाक मथे ेक्रियाशय:कारकमात्रंबाक नपदस्पार्थ:स्यानू।। म्रारी. कारेपिकर्तेस्पततचः शत्तीव झसाम्रयवोधोख कि धातोर्यलन्ा त्तचाइतिचेन तथा सतिक तेसतधातुवेय १२ ध्यीपत्तेः। तस्पवे यर्थ्पे आ्रामारान कल लला थ्रयर तिवोधापत्ते थनवतत्रम् धातुपर ता सर्यग्राह कमिति त वायप्रथ लर्थाचित सवार्थ वोधक त्वेप्रसयानामिति मुसते रिति। ननु कर्न पटो तक साभ् य बोध मोस भवतित दैवुछनोय लार्थ क तमाया ति त देवनातत दात क्रिया म्रय सतरय कु ल व्ापाराश्रयुबोम ऐप पे वांगीका रा हिसत म्राए/ क्रियायाइ साहिऊपातो:करियार्थक लममपुस करिपदान् कियाभ्रयवा धांगी कारे किया श्र यमा त्रे कर्त व्यवहार-स्थाना तु सक्रियानकल आपारार्थ क लमभपल कर्तपदात्ताह क रवयाआयाराभ्रयवो धागी का रेचकार मात्रे चूकर्त व् वहार:स्पाताकार कुमात्र एवं व तथा वि घुम्यापारा, श्रयत्वानश तिभावनहजो व्यापारशी किवाहिमी मोल कः पसव ति द्ठते।अधति। शकुर-कतइ तिन्र यो एम अयरयोग ळततिग मनकरोतीतिबीजा दिना अंकुरःकनइ तिविनापिय लंकज: प्रमोगानतस्पयलबा चकलंी
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गसकजोय लार्थकत्वे पिडे चरीयक् तिमादाय पंभवेनतसप व्यापाराभ्र्यता साधक तायोगात् आहबीजा रिनेतितथाचलती व्यापारार्थ क त्वे विनावी जा दिकरणा क व्यपार जका शरा कु रह तियो धजन के सप बीजा हिनाश्री कुरकृतइ तिप्रयोग स्याल्षेभ वात्त स्पतद मिधाय कु त्व माव तपक मितिभाव:ननुत थास विकार कमाते कर्त सवहार-अजा कच परिहाएहर सत=्र्मराह। कर्त पह्चेति/ातष घ्र्थसप्त मीत स्पाश्वयट कत्व मर्थः।पहपर्चवा का पर नथाच कर्त रूपवा वघट कस्प हनषसर्थ:यदी ति वस्वुतः कारक मात्र वार्त पदार्थ ते क्षति विरर:विवक्षात:कार का (ा भ वंती तिजा दि क लुम तेरे वाति प्रसग भं गत्वाहिति भावःानतुकधातोर नेतपपो।। विभाग रूप वापा रत्त्ात्वापे क्ष यालाघवाद्यतेन् क तमेवाबिन। उपहप्रिति स्छलेवम्मोपारल क्षराा गो कारा न्तानुप पत्ति शितिचेन व पुस्छालेषुत धोम योगाभावे नत
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ए.वं चाचेतनेपिप चनीतिप्रयोगातक आनुकूलव्यापार प्रततिबोध कंविनागोशालायोगान् जनकव्याबार एवा श्री-नि.री.वशाक्ति ग्राह कामावातात्रसथापद यहाल क्षसाया कदा चित घर बोघ संभूवेनत स्पापितत्रशकि कसना स्पारितिन ककविदेतत् कधातो वि पारबच कलवे वाव स्घाप्पारव्यातस्पा पित दाचकत्व म्वस्छापयति। एवंचे तिक धानो मापा रश कतवे क रोती ति विकर ाादर्य लव विशि े ऋारमात पसाकिकल कताभावेचे सर्थ-।ऋावितने पी ति कास्यादावपी सुर्धन वांध के विनेति/व्यापार शा खव्यातस्प शिकल्प नेवाध क विने सर्थ- गोशात्वायोगाहि ति। व्यपार ाल्मातस्पलक्ष सााकल्पना यान् माय्मवारिसये। जन क व्यापारे ति श्ाकाताव छेटक को टोजन के ला जा निवेन्ालुपचती साहि वाका जन्पशा दयोघेन नकत्वस्व प्रकार विधया माना नुभ वामि प्रायेणणा।तहर्थपति। शरख्पातपहार्थइसर्थेःनन्वनउह्तनक तभ पे संपर्व का लवत्ति मात्रंत काताव छोट क कोटा निवे ज्ञानीयलघवादिस न आ्राहत ड लेति तथाचो सव्यातार्थ: तंडुलक्यशादिश्वन माकादिननकमित्तिनात्तिप्रसंग॥
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कर्पतहिप चतीस्प त्रया कजनकय लानुभ वद तिवेत यला विनाभू त पा का दिना क्रिया विशेयेशाकार शस्ययल पदर्शिताप त्िवारशाथंग रुते पिश्रानन्पगतिकतथास्रानन् थासि नियत प्रवेह न्तित्व रूपजन कत्वसेव खरमातपदशका ताव छेट्द क को शै निवेत्ञानम चित्रमि तिभावनरतिमारमातस्प यतत्व विशिषवा चक त्वेह सर्थ-यत्ना विनोभते साहि यत्ज न्पत्व माओय: पाकारिकि या विशोषजेनहे तुनात त्वारसी मजयु लातु मानाहइिसथात्रत्र पा का टिक्ति या हेतुतो की तनव ता दात्मप्वधस स्पाय्पता घटकतमभुप सतथा चपावा:यलजन्पःपाकोहिसनुमाना सा के यतजन्पत्वसिहि कालेतुल् वित्तिवे द्यत याय लेपियाकजन कत्व प्रिध्यापवती साहोपा कज न कयलानु:।भवनर्वाह इतिभावम ननुखारयातस्म व्यपार वाच क ले पचतीतन तरपा कजन कय लवानि ति विव ररपलंग तरि सत प्राह। पदनीति। तात्पर्य विव रणा मिति ्ता सर्यविष यीभ तार्थविव रएातिसर्थ-Iनचयादेशवा कासपदातश स्यानुमानात्· यच नीतिया कजनका मत वानितितुता्त्पर्य विवरशी
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प्रतीयन- तस्पापदार्थलात्- भ्रारीरी किलक्षरणान्पतर रूपट साया: -्ार्थ वोघ-सरायतल्पतासर्यूविय यीभुतनप्रलतेचपच्ती सादिवा कप घुट १४ कीभूनप राह सायला वो घेकथंतच्रनत्ता स्र्य विषयुत्य मिति वाच्यघमोली तिवा कास्पतन्पयो उवॉवि नुमित्त एयीश तवन्धिताल र्यकत्ववनप्तृती सारि या का स्पापित्व प्रयो सासमिति विष मी भ तयलतासर्थंकत्व सेभवाताताम येच कास्मा च्छ दरितदर्थवो भो भवलि सारि वा कप ना मिल प्पमानाएत का छूप्यो उत्श् कार कएतदर्धवोधो से तीछा। ननुविवर सानपुर परातासर्य विषयी भतार्थपरत्वकत्मने पर्वत्र तथा पभरव नशकि ग्राह कमनु पपन्सवादत ऋह सथति।ऋन्पलम्पार्थस्पो पिविवर राच्ककल्पनेइलर्धात याचयन्ञान्य लम्पलमालित त्रव विव रणास्पश्रा कया कत्व माया एपनीतिभाव: एवमि ति तपरशि तानुमनि न याकजनकयता नुभ वनिवाह यी सर्थनयल स्पेति पाकज न कयत् एवें सरयतननुभनु माना ए
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अन्यत्रचालर्पेक्रियायां स्वार्थव्या घारेवालडादवमानादानुवकलस््ुनलाछ उवास्छितेनथा विधयले श्रा ख्यातोय सप पितवर्तमानत्व सपत्रप्रोत्तर का लिकजाद वोघोुपेयतरसता हतसपेति।ऋ परा र्थु लात/पदानु पस्छित ताल/तथाचपदी नुपस्छिता र्थ एव शाब वे धाविधयत्व नियमन तथाक सनार्थां ा सेभुवा रितिमावु ननुतत्रय लवो घपर मध्ा हार्य न घाविघ वो धोगकार्यइसत चार के पमन्ेति जा नािरबोग छती सा दौइसर्थ-अुसन्र त्वाहिति।शाववो ध्पर जन्पदार्थेपस्िसा ताहरी कार्यकार शाभाचस्पपि त्वा हिसर्थ पतथावजानाती सादी काश्यलव ते मोन ता नयवार शार्थविशेष्प ताव छेद कता पव धन आाभ्रयतो यस्काप कारजात पर निरुपित वृत्ति तान जन्पवर्तमाततेप्र कार कशाद वो धप्रतिघका रता सेव घेन जा घातु निह पितर तित्ानज न यास्छित हैतु त्वकल्पनेन रथा गछती सा दोघासर्थवर्तमानत्ानयवारसाय वि शेष्मतावछेटकत्वपव धेन आपारो पस्थापकारमातपर निरुपि
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नचपाकेजनकव तेमानव्यायारेएपाकजनकव्त मा यला नुमाने पलविगमेपिपा का नुछत:धर्मविशेख
तासंबंधेवहेतु त्वक लमननचतत्रा घा हृतप हार्थपतेवर्तमान तायवोधा से भवर त भाव:नवुद्ारिप स्थायु का रपातपहज्ञानजन्वव तेमातत्व प्रकारक शद वो घपतियपज सास्छे रपि विरेषम वछेदकता तो सबधेनातिरिक्हे तुना कल नानातुष यत्तिरिति चे देताह जतिरिक कार्यकार शा भाव कल्पनापे क्षयाश्रा खव्ातस्प यत्रत्व विशि ष्टशक्तिक ल्पनायाल घीयाचातानन्वयकाल:पाकजनकयतना नेयल्र वाज्पा कजनके वर्त मान व्यापारव लात इलनुमाना सयनी सा दौपा क ज नकू वर्तमानयत्ना जुमवोप पत्तिरि सा त्ो क निरा क रोति।नचे ति। य ल विगम यी तितधाच व्भेचाए घ्वातिग्रहासभवे नतथा विधानु मितिर्न पे वती ति भाव:नतुत थाविध वर्तमानवल विशेष्ट का लिकविदो ष सातासेव निष्नताचयलस्पन प्रतीयेत
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तद्धिकरशव्यापार स्यापिया कजक लालू- चैन न्या विनाभू नचैत्र ादिविशेषितिनतेन यलानुभा नमितिचेन- सेनताहज्ञा आ्पारस्पहेतुतमुंगी कार्य। का तोनो काल पपत्तिषि सत आाह धर्मविशदे ति चत्रादिव्यकिद तितववेसर्थ-ननुचेत्र-तथा विधुवर्तमान यलवानातथाविघ्यवर्त मान मा यार यत्वातइ सतु मानन चेत्रेवर्तमानयलान भूवनिर्वा हो भविष्यती सुतम्रालनघ धिकरोतित्था विधयलव् विकरण काशा रिया पार सपा पीसर्थ: चित न्पाविनाभतेति चितन्पव्ाप्पेसर्थ:1इदतु सरुप कथनपरनहेन तावछेटुू ककोटी नि विद्येत स्पतत्रतिवेश प्रयोजना भावा हिति। गोभ नादरिसाशिनच सौ दर्यापर पूर्याय शाभ नत्वविशि द्ृत था विध व्ापारस्पेवनतत था विध वर्तमानयलान मापकृत मुपपमरि तिवामं का छ्ादेरपि स रर्य सभवे नत थावि धयतविशि ष्टरुत सभवे व्पभिचार एपडर्वाित्वीताय लुनथाविधयल विशिष्ट सम वा यो हे हतुनाव घेद क पवधत्वामुप गमान् माम वारावकाराइतिग्न चेत्र साघ प्रतीतावपिशोमनः पचनी रादोशोभ नादे याकजनकय प्रतीततेरिति स्त्ं-
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तत्रा ख्यानस्पनय मले लाक्षशक लातमैव-जनकवया पारम पेक्ष्यलाघवेनजनकयव कीलान् श्रा-शी.0 सजातएव संवंधता योप्रमारणाभावाता पवतीलादो सर्वत्रनसेवंधघटित्तव्याक्षिय हुसतवेप्रभारणा भावाहा तत्राहम्यातस्पेतिपचती सादा वारमातस्पजन कमलेलक्षसा या श्री गीकार्यत्वारितिभा वम लाघवनेति। अनन्थासिह निय नोत्तरव ति त्वरूपजमपत्याल कस्प व्यापरत समम्रा रमातवदतोक्याताव छेदकलक सनागोर वात्तदपे भ्पकार्य पामा न्पजनकताव छेदक त्वेन सह्वायायलतजातेरवुनद काता बछेहक कोटिनिवेशन एकोचितत्व मितिभा वअननु सर्व मिह् समव तिजन् त्वस्पोल रूपते।त दवनानएपा तिरिक तागकारान/तमाचातिरिक्तजसत्यान के व्ीपारत एवारमातपदज वयाताव छे टेक को टिप्रविष्ट से न किविदाध कमुम उपाम:सा वर्क चर योग छा तीसा दालक्ष राया ऋकुल्पममितिचेत् ससा ट्यापारलह माख्मात पदशकातावछद कको.हि प्रपिष्टतवे ऋनेत स योग विभा गाहिरवेज मसा मा वऋमोत एम
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परत्र कात्वकसने गौरवात्तदपेक्ष्यल्रमात्रेत छक्ति कल्पने लाहा वसपानि सकुट तान मलस्ापिया पारतयातत्रश क्तिकस्न स म्ापारसामामय कि कु ल्पनेव्यावउप कत्वात के चित्र शारमातस्पसम वायमात्रेश् कि:।समवाय लेशकयातावेछ हको तजातिसक।मुरमन् यो गश्तर यो गु छूती सा दपवती साहीचननकय लोल झ्सखाङ-तदपिन सम्प कू/ऋानतस मवायेशकि कलप नेगो रवाता नवपम वायएपेक तयान गौर वायका शोलाधे ववान तन क क ल्पनापे क्या एफुट मेवे तिवा च्ये एक सिनु समवायेश्रा रमानशत कल्पनुकेव लचेन सपंघ टज्ानवुत्ताद शाया वेजो घटे जा नातीतिव क्षे त्रो युटे जानाती तिप्र योगा पति: भबुत्त माल त्वार समवायपक्षया ज्ानादिसमवायस्पव लक्षापा भाव न म्रात्मत्वाह समवा यव तिर्म त्रान्म निज्ञाना मावद शाया म पिज्ञान सर्म नें यसत्वानयि वा रातप
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मत्नं विह: जनक मात्रेश करिर स्. लाघवासू नथाचा चेननपि प्रयोगोमुख्य एवे तिचेन्ना्० अपचत्पि
दाशि री दार्थ समयायान्चयेततरात्म निरु मित तविशिषसु पसंवंधल मंगीलसोकवाधको दारःसंभा मन तया प्तित कस्षमवा यत्व मा हसातुपटन का ताव छटक मुत विश्रोष्यता सब धेननू नान् वि्रोध्य कज्ञानारि क मिस त्रवि निग मना विरहे शा गोर बं5रुहरमे वा यलश किवा दिमतेनुय लत् एव जाति तयातंदित रस्पयलूपा धारसाए गौरवे शा जा क्च ताव छटकत्व एण समवड तरि कतयाला घव स्पव्रप्त श प्यश वावारणीप ते मवे नसु धीमेरम्प नवयमत्राकतेयले विहा योति। लाघवा दिति जन कयत्तना क्िवा रिनाम विजन कानेश कि कलन सपावउप कत याजनकन कि वरि मते पतर तिर कशत्तय कल्पतलाघवसभवाहि तिमा वा घ्ाचे ति जन कमात्रश क्रिकल्पनेचे सर्थःऋ्रवतने पी साहि।र या ग सूती सादगमनजंत क नोटनाएम से योगाह-रघारी सत्ेनआ रमातस्पश सी वनथाप्रयोग सभवे ते त्राभ्रत्वाहदाल का कल्पनमविना ी ति भाव-ऋपचसपीति नचा साघी र पाकजनका टृ प्ठवतिपचतीति प्रयोगा पति:
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पाकजनका दृष्टजनकरूतश्वन याकजनकलं-मानाभावात्-अनरवक्ित्या देवकतिजन्यलेसाध्ेतज् र. एणजनकेश्र किहूँरोकरणी या। म्रटृष ससाधारसाकारणनयानत दतिया कथ न्यपु हुवेपच नी तिप्रयोोायत्ति रितिता सं गौरवा ता ननुपा कुजन का हृष् जन कक् तेरविपा कजन कत यो पोकारिमोवर कृति काले पिप चनीतिप्रयोगाप निरितिशंकावारर्याता पाकजन का टृष् नन केसादि। माना भावा हिनि तस्पपाकादिज नकादृछजनक लेनपाक प्रयोज कृतयाअन्यथा सिद्रलेनवाथा हिना ऋा तुमा ना दि प्रमा शा स्मानव तारा रिसर्थ:ऋतसवेति/नज्तनका दष्ठजनक तेश्ज्न क त्वेप्रमाशभा वादवेसर्थनससारे साहित्रि तिःसकर्ट का कार्यत्वारिती भ्वरानु माने:सर्थ:।तन्ज्नके ति ि साहि जनके सर्थ.।ऋी तरशसगोपीति। रहमायाततातत्रस कर्त कत्वस्पाटृ ष्ा दार करतिज न्पत्वा धर्कतवा स्प्प सृभावारिति नन रतोष सोधनताथा विधार्थवारि सोर लमनतज्तनकाद ष्टजन क हते स ज्जन कत्व एपवेद्वोधित लनऊरपनवत्वा नकादध्जन ककत्यादिना अरथोत्तर १संगोपिप्र्युक्र:
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१+ सादश कृतिवार सायतिनादश कृत्ति कालेत पवच
मराशि-ध त्कथमतितुसंगो डा एसत श्राहामावेवेति तज्ननकादध्ज नक कते सज्जनकतेप्रमा रासड्ावचेसर्थनेलयायीति जन कमानेत्र कि वारितापीसर्थननुजनकय तेमारखातएतततिक लवेज क्पताव छे दकगा र वातरयेक्व केवलयत्तत्वविशिधन्ाक्ति क लपनएप वोचित लानथेवा ए यलमात्रमिति यलत्वविभिप्टमात्रणीसर्थ-नचोया नस्पयलमात्रवाच क तेग्रारमातपशय तादयो:पर्याय यता पत्तिपतथ का ताव देद का व धनाक्तस तसयायपदार्थ ताहितिवा च्मेइष्टतवाता ननु विद यत्व स्पधालुर्थ स सर्ग ताभु यग मे पाकानुपधायक पाक गोचरयलवतिपु रुषे पच नी तिप्रयो गापृ त्तिरत ब्ाह जन कतवव ति फलोप धायक तवेसर्थन/ फ लोपधाय कूल चततघ्यक्ति खावछि न्जनक तवमतिरिक्त वे सन्य दे तन वियाक रसामतमा ह।कर्त कर्म शिति तकारवाये। शरारमातवाच्े। घनीति हस नेसर्थ : सा मो नाधि क सापाजु राधारिति नामारमातेयोरेक धार्मवोध कत्वरूपसा भविवाताहशक तिनिराकर रयअट श्याद्दार कलेन जनकतामा: लयापिवाच्यलात्.यलमनंशक्.विषयच जनकलंवासं सर्गम यादयाभा सइतिना:कर्त कर्मशीलकार वाच्येचैत्ःचतिमे च्पतइ तिसा मानी
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अन्यथायसादोकर्ततापच्तेसार्मिदितीयासास तोर िहि ता्विकारीय्यलान्
मानाधिक रएयवोधसमानभवसितवहिसर्थःन चेतादशानुभ वेमाना भावाहिसतम्राहत्रसथति कर्चारबात कर्माव्ातया:कर्म कर्म रामेर्नमिधायकत्वेश सर्थ-त यिति। दिती यारतीय योरिसर्थः।ऋ मिहितधिका रीयत वारिति।रकार वार मानु पि था कोस्माततमो म व्माहारे विहितत्वा रिसर्थयुत्रारम्यातेनक. ताना लिषीय नेनचन तीया यत्रा रमनेन कर्मे ना भिध्ीयततत्रद्विनोया मियुत्त सम ते तिभिाव-ननुभारमातत्पह् सममघा यकानमिधायकत्वएवद्ितीयातती ययोनियामके। नथाव अर्थमारमातसप कता घभिषायकत्वमेस घा तश्म्राह।कूस तिन सपति/ऋ्विशिष्टत्वासित ।कमाखव्यानसाधाररग त्वादिसर्थ:तथावनेयायिकनयेकमा आातस्पािक तिवा व तयातत नतीयाने एमाहि तिभावननचने पायिकनयेक मारम्ात कर्म लाथकतयाक स्प थमेतरिति वाच्य। प्रावीननयायिकन ये एव एन ह मिद्यानाल एकु रोम विष्य तिर्चनड परिषात् संकने क कत्विधानत्याविशिषलान्
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यत्रधातूजर प्रसयनकनेतसंख्याभिथीयतेतत्रक तरिनततीयापत्रकेत्यानाेीयर्तैन ग्राशि-श. र्मकर्म सादिनियम-पवितीथाननीयये।स्तद मा चये।मवनिय मुसर्थू मत्र वात थर्मनासरग्यमिथीय वसंरवाय स्थितिसं भ वेतति उननत विधा य कलव मित्तिबा च्छं ।।
१६ नेतत्र कर्म शिद्षितीया भवःततिनयत्रकर्मेराता सर आाला मिथी यतेतत्र कम ॥।। दिनीये तिभावःचित्रेसाट्षोय टइ साावितिनिव सुथ:सरम्यामिध्ाय क से चेजा रूपवानिसुद्दाकरसास रका चत्रेसाहसघ यतानुधावनमफल मितिवा चंान चक्रियारीहत वाक्यम सती ति न्याय नचैत्रो रूथवान इसाद ।गछतीअक्रिया मुध्या हसति डै.वसरवे त्रपरमावाघसमवेलंसुयः संखाभिधा्यक तन तित्रा का निरा करणस भयनसुप सरमा मिधा युक त्वेस कि यतथा विधवाका पर्यतान धावन फल स्पनि प्लपाति हिति पपशाक: सुपय वनिमव नम सूखमा कू सन्राक्ते=सथदादिसरथनतद भिधायकत्त मितिानतिए-सरम्ा मिधा यकत्वमि सर्थभत्तघावदेवद नोगधती सादव पितिड: सरमान मिधायक ल्ेनन तीया स्पाहि ति आववनादश राम
•कर्त कमगल मंखव्याले घी नान मिधानाम्यानियमः नव चेवे साढयोघटशतनी उ सख्या प्रताता कुसश के सपर
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सुपमिति। दित्वादिसंरमा बोध के सम्दमिसर्थ:दित्वादिम सयारिति तथा वन तह त्वादिवोध्ान्पथानुपपसानि डोपि सरमावाच के लमिसर्थ:नतुवेत्रा मे त्र्यगछतइसाद मैत्रपरोत्तर सुनिभक्रोदछि तारिलाक्षश कतया हित्वादिबोध सभवेतिए- सुरमाभिधायक लैनियुकिकमिति/ नद्भु हयं।बिनिगमना विरह पातव वैत्र पदोत्तर सुप विभ क्तरविलक्ष सायाहवित्ववोधक स्वस्ावशप कत्ववैतयमयंचप्रती यतायुत डर्वार त्वात्ा नत्रे कवंचनो पासछ तेक त्वान्वि तच त्रादो कथतिड-पस्छम्म दवित्वा देरव्यत तुनाशकनीयुमतत्रे क वष्पविव क्षि नत्वाहि ति। ननुत्तथाजुपरर्शित ुक्षा तिसे हित्वा मिधायकत्वमस्ताए कत्वामिधायकत्वे तुतस्प निर्यु कि क मित्पाशकामया कर्तु माह!लाघवादकवच ला न दिनवे ति तथार च कवचनत्व विशिष्ट सुख ऐपे कत्वजाक्त ताव छेद कत्व मपला यए कवचन तए व त्क ताब छेदकत्वकल्पनमुचितं।एकवचन लवाभयु चैत्रोमेत्रशगछत्तइ सादा विना पितादश पंहि ताद.प्रतयपात लाघवदिकवचनलादिना एकलादश तखा त्यपपिनास्ति कृत्तास् ख्यानभिधाना्:
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श्राशिटी. कैरेकवचन लवेन वारिभाषित ले.7aतिवादिसा वारगा मितितिवादेर प्मेकतवोधकत्वमक्षु सामितिभाद केवि २० तुपवती साद वा रमात पहाल्लक्षसाया ज्ञा नचावा क तर्वोधिपिन जनि यतएब राकत्व बोध एमानुमव सि हता तिपएक त्व वो ध त्मावतपक/नवतत्रा रमान ऐपे कत्व विशिष्ट कनीलक्षणतिवाम नियमत:पतीयमाने नशं प्पर्थेलक्षसाक लनेय तेप्पारमात शक्ति क ल्पनस्प निय कक क त्वेलक्षराथेवुनत्र यलवोधसभवादिसा ऊनकर्त कर्म सरम्यभिधानान लिधा नाम्पाइ सारम्पना सी सें काय्र थोपरिवैयाकरसा-समा धत्ते क से साहितथा चस धिभक्ि विना कलसय सपाव स्छाना समुवान कह यो तर सुपरावसरम्रावोधसभवरुतः सखम्ानाधकत्वनिर्यके के।नूय वितिगमना बिरहरति वा मोएकवचनत्ेनसुया त्रश्ा को रपनेक प्रत्ाता राम एवच चेताया में गतयानूरसा देव मि धातत्तरकम्पर सयस्पत रम्यान मिधाय कते नन्ती यापतेव्रल लोम २0
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रायेना चयबोध स्पनवारलात् किंचए कचच दिना हं रव्यभिधानननियमः पदार्थता वछदका वछिन्नस्याका क्षादिवशाक नक मे साधार
स्प ाक्चवारण त्वाहिति। नय यत्रा समातेनसं रमामिधी यनेतत्रप्रथमा। यत्वतेन का्यगत सुरानाभिघी यनेनबा ताये सादि तिय मोबा मत रुलय स्कलेव क ता दे मिध्ानान मिद्राना म्पातृथा नियमोवेम-तवको पिटोष रसत प्राए किचेति न नियमरतव र्तारमातेव कार्रगन स एमेवामि थी यनननुकर्मगत से रमा।एवंक मीरजा जेन कर्म गत सरसे वाभिधी पते नतुकनगत स रसे ति नि यमा लामड्स र्थ-नतुता ह न्ा नियमालाम का क्षतिरिमित श्राहम पटर्थतावधरकावदित् सपति एएकल लावछन स्पसर्थ:।आप्रराका क्षादिवज्ञानए त्रे केला वदिल निरुपित शकतिवराटिसर्थनतथाव चैनोगा मंगळनी सत्रारमातेनक मगतसरया वो धनेवाधका भवनत त्रापिक मणप्रथमास्याताएवं वैरोणहनःपव्यत इसताप्ाया ेनकनसें रवा चोधने वाध का मा वेनत जामि कर्तरिशथ मापते रिति भाव:ु कर्त्रे कवव नत्वा वदिन्सप क त्रकर्ल्ट
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कत्रेक लला देनाभिधानतुक त्रदेरप्यमिथेयचंश कोशकताशवातवेदकयोभगोरवमधिक
शाशिरी वंशकनाव छेट काएवं कर्मे कवचनत्वावुछिनसप कर्मे कल लं शम्वनावछेद कंवा ां तथाचश्राक्पताव छेहकश रतताव छेट कमेदा ल सरवत्र कर्त कर्म साकारपौक तवोघरसत भहाकतैक लत्ा दिना। अमिधाने बिशिक र्वेकल ताहिना क तें कतवे ता होकचें कव व नत्ा व छिलस-श्रक्तिक लने विसय-म्राहिना मैकत्वादि क च परिग्रहश्रमिषय तेन्नाकतावछैटक.कोरि प्रविष्ट तेश्ट मुपल क्षर क्त्री टिपट स्पा पिशक्तताव छेट्रककोरि प्रविष्ट त्व मिसपिवो छं।नतु एनेन कि मायात मस्पत आरामत शक्ता विसारि।शक्ता विसस गौर्वमिस ग्रेतनेना नय:तथा चकत्री रिघरित धर्मविशिष् ना किक सनेन् तुत्तइुटितधर्म स्पचक्व छेदकत्वकल्पतेन कचीरिपुर घपित धर्म सपत्नाक्तताव छेद कत्व सने नच मर ह रव नया पिक मते वि यामरशामनेतुएक त्वत्वा दिनाशसता एक वचन त्वाहिनाश कतेतिला घव मति स्कुर मितिभाव-विपा राम
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तस्मादार्ातत्वनकतरिक मे चालनपदलनएकवचन त्वादिनातत दमेशावाएक लादीशकि:पकप दो पात्तलाज सख्य यावाच्यगामिचा करणामतमुप संहरतिशत स्मादिति त त दूपेय विति। तिपत्वा हिना वेसर्थ:ननेवंस ति वैयांक:शामुतकथन कर्चाधारमा तस्छ लेकरमा रोसरआान्व येह सतन्रा हा। एकपदेति कर्ता रिसरमयोरका रमातय दोयस्का प्त्वादिसर्थ:।वाठ गामित्वमिति।क तरिआाता दिस्छ ले सरमाया-क चादि युश्रन्व पितव मिसर्थ: तथा चएक पदोयस्छा प्पानामर्था नामू स तिवा धकेए कतरापरा न्वय ति निय मेनएक त्वारि निन प्रकारता निरुषित कर्त विष्ठु वितोष्मतास बुघेन् कत्री रमात परत्तातजनशाठबुद्ित्वाय छन पति कर्चारमात पर्नमकर्तुपसस्कित विशेष्परतास वधे नहेतुत्वस्पाए क में कत्वारिनिय प्रका रता तिरु पितकर्मनिकवि शोषम तास वधेन कर्मा रमातपर त्तान जम शाठवु दवित्वाव शिल्तप्रति कमारगातपूर तानजमक भ पस्छितविशेष्पता सव धेनहतुतस्पच कल्पनीयतयानकत्राख्यात प्कलेक मा हो सर मान्वयवोधपति
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कनो कमेबो कलंचए कदा व्युत्यनतं अ्तोमेत्र:पच्पतसं डुलइस्पादयोनप्रयागा माव:ाननुकर्त रिआ््ारममनखेनकर्म शिचातमने यर लेननाकि कुसनेचैत्र:पमतेते हुल सादि प्रयोगापतिःत श्रा शिरी तारयातस्पारवाततेन कर्तरित्ा कतयाकर्तु रुपासछि ति सभवे नम्रातमते पर लेनवतस्प कर्मराोपित य 22 रविति से मवेनन योस्त तचैनतं उलाद) अभेद संवधेनाचय बोधेवा घकाभावा दिसन ्राहकर्त कर्मस हिएकदायुत्न मिति। एक तमिन्फलएक स्पा कू मिसर्घ:तथांच तदा रातपट् जन्पकर्तत्वप्रकार ककनवि षयक शाह् त्वाव धि न्पति क र्म तावोध गहीततास्पर्यकत दारमात परज सपत्तान ताहिना। सवंत हाख्यात पर जन् कर्मत प्रका र ककर्म विषयकत्राव वुद्दित्वाव छन्नंभति कार्त वो धग हीनताता जन्य र्यक तरारम्ातय सता नत्वाहरनावप्रतिव धक त्वस्प कल्पनीयत यानेक दाए कारम्ात पदात कर्त कम गवीधायत्तिरि तिभाव:1कवित्तुवहा शम्ीतमकर्ततप्रकारक कर्तविषयकशादवुदतविवनम राम
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निकर्मत्वबोधकसुिमक्तिसमभे व्ाहृत धातुक्षम भिमा हततदारात पटत्ञानजे कमांपस्छिने हेतुत् नप स्पकसपनी यतयानक दाएकारम्मात पददानकर्त कर्म रारवयवोध: चित्रेशातउल्च ब्राउुल-पक्ष्प तेडसादिप्रयोगविछा पत्ति्तत्र घुसान्व यवोधेक सपाप्पविवा राहिसा उ। नतुपदनितरीसामत्रपस् तेतइल रसाहिप्रयोगवार णोधिचैत्र: पच्मतेत इठर सारिपयोशा यूत्िईवा रैव ति वत्रकर्मतावोदृगही ततासर्यकारबात पटतानाभावात कमतावोधक सुधिम क्िप मभि व्योह तघात पममिव्या हतन दारता तपद्ज्ञानजमकर्च पस्छि तिसत्वाञ्चकर्त वोधेवाधकाभावादिसत शराह कतरिति तथाचकुर्त शादबु दिजन कताव छेहकको दै।-प्रारम्ातपदशयगाघप ममिह्म। हतुलम पितिवेशनी यान तिनापुट निति प्रयोगापतिरिति भाव:नियाजिक:प्सवति ष्ठते।नंत्रव हनी तिनिया यिकन येलाघविनलाततत्वादरद् क्तशिय को असाधु लातू- पच्पते मै त्रस्तं डुलइ त्याद मोपिकर्त रिनतिवैया कररणाः अनवदंति
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भावनाविशष्य संख्यायाअन्चय:समानपदीपातलन एकानितस्पोचित्तास् शा.शि-री.शक्चताव छेदकारम्ान यहाउक्तानुक विभागमुलीभनंकर्न,कर्मगतसंर व्याभिधा नानु मिधानविद्यातकंका २३ र्तू कर्मसा धा ररायनसखम्यावोधाया दननिरा कर्तुमाल भा वनाविशेष्पत समानपरोपात्तलनेति एकप दोपस्छाय लेनसर्थ:एकान्यि त्एपवा धक विना नियम सिडत्वारिसर्थनन वेकय टरायस्छाप्यानमिका र्यन्वयित्वनियमो प्रयोज्कत्वाउपेक्षराीयइतिवे नौवम्ा तथावि धनियमख्वीकार लाघ्यवस्वप्रयोज कतसभ वाता तथा हि। आारमातपु र। यस्छाप्यभावना रूपैकार्थस्पा न्वयवोघार्थ श्रवतपेपदार्थीतर
ぎ 9 नोपसानत्रभावना न्वय स्पान पमनतिथाच से हयायात्रपि वेत्ाघ न य त्वीकोरे पदाधांतरो पस्थिए तराक सनप्रयुता लाघवमतिएफुट मे वेति युत्तउत्त नियमननचो कनियमाभुपगमेपवे ने सादाक तिसाम राम २३
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तान्वितपा के सरमान्वयायुतिरि तिवामश्रार्यात्यद् ज्ञानजन पामाप्रकारकरगदबुद्धिखावछि न्ंप्रतिथ वारि पद न न्ारमतपदार्थ भावना विशेष्ो पस्कितेविशष्ता सव धेनहेतुलसकलपनीयनयाउपदनि तापत्तेरभावाता नवतथामुपदर्शितस्छ लेउप हर्शिन नियमभंगम सं गर ति वायं।अ्रमधा नुपपसाताहर नियम ह्ातिसाध्य ते धटप्ताधनत्वाद्य तिरिक्र त्वैवएकरोपस्ाम्सपवि शेयोय तवाहिति सारननुभाव निव कुत्रा न्ेति युतने सत्र किनियाम कंतत्रार।भाव नाया ््चेसाशि चैयोग्प तइ ति। तथाविधानय काय यंकारसाभावे. र्सर्थ-पतथाच यत्रक र्मोघनवरापध मातपद्ीपस्काप्पएवारमरातार्थ भावूना कार्यकारसाभावसिह्र सथान्चय तत्राहा तथवति। भवना निश्वपकार नाति रूपित विोष्परतास वधना
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शि-2- खव्ात पद्ज्ञा नज़न्पशादबु दित्वावछिन्नप्रति विशेष्म्रतासंब घेनारखात पट्टसम मिव्याहत प्रथमातनामपुर २४ ज्ञानजन् कर्मत्वायनवरमार्थ विशेष्म को पस्छि तित्वेने सर्थ:।साकाक्ष त्वाहिति जााव वोधपदजना पृस्छिसो कार्य कार शा भावक सपना िसर्थ:।तथा वर तादन कार्यका रशा भावव लात तथाविथप्रथमा तपदीय स्था प्पएव भावना याविश्रा प्मूले ता व यनि यम इ ति भाव: नन परर्शितकार्य कार शाभवकारण तावछेदक कोटे। कुर्म तायनवस त्ववी बुरंव्यर्थ यहिव कर्मत्वाघन वरु ऊ त्व विशेषण मतिवे उपन धाविषा न् यबुदि तिप्रथ मान पर ज मो पस्छित तुलचडव मुखम लोलादी प्रथमातपैस्छा पितविष यवरे साहनप दो
मिति वभाव नाया न्वयप्रस्त गसदापकृतु शाठ वेधरत रा विश्षणार्थ के कर्मल्वाघन वरु हु चवंतत्रकार साताव छेड कको टोनिवेश नीय विभामतातर्थ वितत्रप ेप्रथ माततवविशषा अर्थमेव। द्विती यातपर नम्पोपस्२४
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तिविषयी भतार्थस्पनाद वोधेकर्मत्वविशेषशातयाइतरविशेषणातया विशह दवनत्रभावनायाश्र न्वयवोधापत्िवारसा सं भवाता एतेन भावना विष्य भकारतानिर पित विशेष्यत संबधेना रमात पंदजमज्ञाववुद्दि त्वावछनं प्रतिप्थमा तपरजसोपस्छिते वित्रोष्मतासबंधेनहेतुत्े करप्पते नतुतत्रकं में त्वाघ नवरु त्वम पि.निवि जपतेत स्पतिर्व च ना शक्ाताता नवप्र कतुशाद वोधेश्तराविशेषणालर्मनन्! प्ररृत तंघ प्रथमाततसद्सतमितिवासं। वंद्रवमुखचद्रोराजतेइसोि वाककयज न्स मरलबन वोधच र्रे भाव ना न्वयानुपपत्रेःनचप्रथमांत परजमशाव वोधेविशेष्प लाभावव लेस तितथा विधवाद् वोधरतरा विश षसा तमेव तदितिवा मात घास सताद त धर्म स्पापरात तकारणाताव छे टक कोटोनिवेशेयर स्पर विशेषसा विश्ञेष्मशा वे विनि गमना विर हेशाकार्यकारणभाववाज
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शिश ल्पएणइम्मरिहरत्वानातथा विध्ानयतुमरिंअतिस्वीय वित्ोष्मत्वाभाव विशिष्टप्रकार तालबेधेनश्राद को 29 धरपैवमार्यकालवृ नितया प्रतिबंध कलवकसनमुचिताता हज्ा प्रतिवंधुकाभावकारणत्वकल्मकायु सति: कर्मत्वाघन वरु इत्पाहिय थे नहर्शिता वाहन सुसत्तीतथा विशेष रणातुषादनिताहाप्रति बधकाभाव समहेतु तापरा ह्या चद्रशव मुख्म स्ती सादी वद्रा हिपदार्थ भावना या त्रयप्र सगरतित पादानर सयि पशालताउ पदर्श्ितप्रति वंधकाभावस्म हेतु तपद जनपदार्था प स्छिति का रसातावधरकको टोप दाशेप्र युमात तविश्रे षणो वा रानस वर्थतयात त् पपाहानसं याद क तथा विधविशेषण स्पसुसत्तानिवेजो प्रयोज्ना भावारिति चे न्वमा तुन्त द निवेदोवित्तीया वि. मत्तच ना दतनेकपर वुतथा रम विधोपसछि तिनि श्ाकार याताव छद कत्व कल्प ने गौरवानेउस्मन तेप्रथमातपर्एवतत्कलपनमत 24
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लाघव ऐपवो पुद र्चिति का रणजाव छह क मोटौपरांशे अथमान तव निवेत्रासंयाद् कनयाउपदर्शितमुसत्ता वपितादत्रवि शेष शाए्पा वश्यक लाना त्रनमधातरनुसारे रोग पट नित वित्रोषणघुप्ति कार्यकारणभाव कलनाया श्रयोगाहि तिानृतुभावना याइसाहि यंथ एपी पट र्नितरीसामुस त्तिपर त्वेत धवेसार् य थस्म कार्थइ तिचे नमवुहि। तथे वे ति ता दासुस सन सारेशाननऊपेशवेसर्थ-तथा विधप्रति वं धकाभाव तवतादृजापट्ज सोयसस्खि तित्वा दिनव तितु तिर्गलितार्थसाकासलात्/कार्यकारगा भावस्याकाक्षा विषयत्वानाकलनीयत्वादि तियावतातथाचो कममुसलन सारेगोपदर्गितिकार्यकारणीभावक सयित्वाभावनायात्र चय नियमउपपाटनी यर ति भाव:।उपरत्रिन खसत किमान मितितुनाशकनी यो तत्रानुभवसवज्ञारणीक रशायलात।अ्रम्पथा मुप त्तिमात्र स्पवाछेदापत्ते रिनिपल वितेन
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चेत्र: पचतिय च्पतेइ सादी कर्त कमप्रथमांन पदोप स्था प्पनयाभावना विशेयय इतिनन्रे बच संख्या न्वय: चैननशासु शिटी नत्रैवचेति भावनाविशेष्ये कर्तरिकार मरिचिसर्फःननुभावता विशेष्े सखया न्वयसी काररेचत्रेशासु्पनइसाद रमान न्वयापतिः।तत्र भावनाविरहारनातत्रे षापत्ति माह चैत्रेणासुय्यत इसाहि न।। प्रथमा नपूा भावाहि सासभा वनाविशेष्यविरहादि सा घगि म त नेनसरा न्वय: न नुचैवेशासु व्पतइ साह धाबर्थएव भावना विशो व्मलना चेत तथावनत्रैवसं खा न्वय सभवे कि मर्थ मुप्दर्शित स्वलेस खवाघुन न्वयष्ा ृत्तिरिसतम्राह घात्र्स्ितिम सनचाहितिपतथाच भावना विव्वाषुरातनव धातर्था न्वय तिम सतिवलसA एपचेत स्वपिती साद सापिति छप्रकारतानिरु पितवशध्यतासवधे ननथाविध्वावचजन्पशादवुदित्वाव छि न्प्रति=ारजमात परजनभाव ने घस्वित विशेष्यता पब धनहेतुलकस्नात चत्रेशासु प्पतइतों होला पदि भावनाया विजेष्मलना वयवाधक रम लमितिभावमननुभावनायाविशषणालेनेवथा तर्थान्वय इतिु सते भीवारबान स्छलेपकाच:कल्पनीय। प्यतेगगनेन स्थीयने इत्यादी प्रथमांत पदाभा वा सूधातर्थस्यभावनायाविशेयएालिनेवान्चयस्प्पुसनाब २६
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भावारखातसछ लेव धात्वर्थ सेव माव नाविशेष्म लेनान पशतियुमसंत्तरमंगी। क सका र्यकारशाभावांतरकल्प यिलाउ पद त्रिात स्थले शा लर्ध विवोष्प कक्षावना प्रकारक वोधा गीकार क्षतिविस इसन आररार। आवनायाा ति चित त्ा सै चि त्रेशासु प्पतर सादी श्रा खमाताधात्रयत्व रूपभावनाया सवायवाधे नतत्रा व्यासभवारि सर्थ ननु निरूपवात् सवध नेवतत्रत स्पाश्रनय सभवतिइतिचेत। तथा सनिचै त्रे णा सुय्पन न मैत्रेशोसा दौनग्धीन व्यापतो-नचतत्रनि रूपक तृपबधावछिन्न प्रतियो गिता काश यत्वा मावस स्वपेश्रन्वय सभवात नतननुनर्था व्वयानुप पत्तिरितिवाच्याह सनिया मक संवंधसाभाव प्रति योगिता नव छ्दकतया निरुयकना संबधावछिन्त प्रति योगिताकाम्यत्ाभावस्पाली कतयाश्रप्त मव नाय दर्रिताप तेर्उवारत्वा नचत्रेणासुप्पतइसदिाएक कालीनत्व सबधेनावापेम्राभ् पत्वस्ान्वयरविनुनाशकास्पद मुवि्ततेन
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एक वचनंतुसाधु लार्े. अत्तरवस्वास्पद्विचव हुखेपेओ र्मिक मेककवनमेव एवं चयथायर्थवर्न
न्रि-टी संवंधेना श्रयलस्पान्वयेनिरा कां सलाना मैत्रस्पनायहमायाचित्ा श्रयत्वमाहा या पिचैत्रेशामुप्पतरति प्रयोगस वाज्ाननुतत्रएकवच नार्थ सरमा नवयेएकवच नमर्थ मिसतश्राल एक वचन तिसादि। पतएव मा वारा
स्प रखान्वयसवी कारेस्वापेदि बबद्र ेपिभावा समातस्छल दवि वचनबद, वच नामतेतब्ेषा पत्तिर्नसभवति। श्रभियु क्विरुद्सवाहि तिभाव: ननु भावारमातस्छल सरमा भावनयोरे नयभावतिअ न रर्थकच मिसतराह।एवच न तिभावा रव्यातस्छलेसखव्याभाव नयोरननवये वेसर्थःयथायुथमिसासिवर्तमानत्व लडर्थइघसान्त् लिस र्थुरसर्थ-।इष्साघनत्वाहि कमिशन्राहिपदम तीनत्वल निप्ता सालाघर्थ के ननुलिए- घेष्टसाधनत्वाह लसष्थी तीतव्वाह-कुत्रान्वयस्तत्रा। नस्े सहिलिए रथेष्टसाधन तलथीनीत स्ाहि कच सर्थ:ननुत रम मानल३ ४ साधन लादिक मर्थ: तव चाल भेरवन्चपत नपैयप्रसयाद्
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तदबोध कानाघमादीनांप्रयागसाधुनामात्र.भावनायाश्बक्तयोकपलेन कमेशा चुनर्पथान्चय: थान्वथेमानाभावइ सतश्रा हानथे वेति। लिा हि सभुभियाहरस् लेषा लर्थ विशेष्पकेषपाधनववप्रकार कवाध स्पवान मवासे पत्ादिसर्थः।इदमत्रावमे यचेवे शासप्यतरसा है वत्ति लत्तीयार्थ:1वर्तमानखभाव तिड र्थनधा तर्थ-स्ाप: चैत्रद्दत्ति वर्तमानस्वाप:।एवें चेत्रे शासुप्यतइसादी भावति :- रषसाधनतर्थ तथाचत्ैऋव तिखापइस साधनसतिसाध्य भे साकार कान्वयवाध:एवमन्पापि ्मति भिख्चितनी यातद बोधकानामिति वर्न मा नत्वायवोधुकानामिसर्थ।ननुभावनायाः प्रथमपदोपस्काप्कन सबधेनान्वय-ृनावदाभयता पबधन चेत्र साप मतेत इलई सतउले मारमाता घक तिरूपाया भाव नायावाधित्त्वादत प्रपराह।मावनाया क्वति माभयत्ना आश्रयत सबर्धनसर्थश्रनथेतिव स्माशा परंपरये सर्थनतथावसा क्षासरपर या भावना विजापयव संखव्यान्वय-इतिभावःनच सरवाघतिरिकरारव्या
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नव कर्त क जाभिधायक लव:व्ास्मा कमपितथान्चयबोध कलं शि.टी. तार्थस्पभावना पद्तावातयाकर्माख्यात स्छाले कर्मत्वसाखातार्थ तयापाकाद्रावना विशेषपेएवसखा चयोतत अालंवर परयेसस्पतिवे शेनेति वाचं। प्राची नमनेकर्मा रमातस्पा पिकसर्थतया कर्म लार्थक ला भावेन कर्म त्स्पभावनात्व विरहाउ पदर्तितायुत्तेरमावा दिति। ननुयथचत्रेशाय व्यतत उलस त्र नैया मि क मतेयरयरयाकमाछ्तेरन्वय- तेथा चैत्रे एायव तित डुलइततरा पिकथना न्व युबोघः।एव नैया थिक मतेचैत्र-पच तितं डुलमिसन्रेवचेतः यम्मते नेलमि सत्रा पिभाष्यता सवधेनकतरव्वयवोधा पतति एवं मे त्रेराापम ते तेडलहसनकथ नन्मते कर्न कर्म राार्य थो क रीसारतेरनीनयः।द नितिस्थालेघु सर्वतारमा तपदातहतेरुयस्छि तिस त्वातड साजा का मया कुतमा हात वे तिविया क रशासपुसर्थ-नथा नयुवो धकतमिति कर्न कर्म राोरिवद्वनेरवो धकत्व निसर्थ-।तथाच वियाकर शामते याह ररशादुद्रिलावि नप्रतियाद शानुभवी एम
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ज्ञानलेन का रशाता नैयायिक मूने पित्ताइशता हशशा इबु हित्र तितादज्ता दृर्ा नुर्वापंज्ञानत्वनहेनुलुक सना नानुपप तिरिति आाव।नथा विधकार्यका रगामावकलपनावी नस्वय मेवस्पष्ठति। त्रतपति तथा विधकार्य घ के कारसाभावकल्मनाहि सर्थ-नध् यो गाइति नताह ताहत्रा शाय बोघत नकारसर्थ-ननुभावनायाल तिहस त्ेनत विष्म सरवान्वयुनिय मागीकारथोगछतीसा दोक थरथे से समान्चय:भावनावि शेष त्ाभावारिसत ऋ्रराहा भावनचति। सरव्याघतिक्तारमाता वउत्तनियम घटकीभुतभावनापदाथ चत्: इसर्थ:।श्रचेततानुरोधा हितिरथोग छतीसा दौर थारीसामा न्यानरोघा दिसर्थ:।तथाचारवात एकर्त्रारिगत से रव्याभि ध्ानानमिधाना।्पा मव प्रथ मा ती यो पपत्तेनाख्पातुस्पकर्त्रा हिशक्तिम भुपग ध्ता वैयाकरएगा नाभ नमनाररशीय मेव।लयुर नित्रा किवा दिनयायिक मतब्रध धाने:सुधिभकति लक्षिका अचेतनानुरोभात् अतोमेत्रेशापचतिनं डल:नंडलंप च्यतमेत्र: मैतर:पच्ेलइसादयोनप्रयोगा: मीवनाचव्या पारमा
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विरभिन्ना्य स्पाम्यमिक धर्मिवोध कलवलक्षणांसामानाधिक रएयमासद्.समवदन्यादशनवार्यत
शि-टी. माव:ननुनैयायिक मते श्र्रारमान पट चैत्र पद योो विभिन्तरूपेणएक धर्मिवोघकलरूपसामाना िकरपण नभ वोषनपपन्ःथाचा नुभव कतविश्रा माणा कथतनमतममतमिसतश विभिन्नाम्पामिसाधि तथाचतादृज्ानुभव एवाप्ि प्रपति भाव:श्रिम्पादृज्ालिसारि।एक धर्मिनृतति मिन्न धर्मबोधकत्व रूपसा मानाधिकरपमिसर्थन।ऋत्र वैया करणमतानुया पिन-।शारम्तस्पकर्त्रा दिनकि कल्पने नैयाथि कमतमपे क्ष्पलाघव संभवान् थेवो चिता तथा हि। कतप्रकार कज्ञाना भावलीकिकप्रस पत्ाव नप्रति श्रारजात पट निरु पित्तशकिज्ञा ना दि घटितन व् बोधसामप्पा-प्र तिबेघक त्ाक स नेनतथा विधशाद वोधसामग्रीका ल कर्त प्रकार क ज्ञानाभा व्शयुक्त लाघवम तिस्फुट मेवान ययिक मतेता एम तथा विधशादवाधसा मग्रीका लेनाहशत्ानाभा व रूपनिश्ययप तवेनविनात था प्र तिव षपतिब धक 2
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भाव कल्पनतथा विध प्रसक्षवारणामत्राक्च मितितत्कल्पनेमर मौर वं नच वैयाकरणा मूते कति प्रकार कुज्ञाना आवप्रस्क्षप्रतितथ्ा विध शाक्वा घसामय्या-प्रति बुधक लकसुनावशरपक ते क नैयापिक मनमपेसप लाघवावकाश्र-नियायिक मततथा क ल्पना भावा हितिवाच्य वियाकरशामनेक र्तुरुपस्छिति कालेल तिप्रकार कज्ञान एपावइप कृत्वे नत थाविधशाद् वो धसामयीका ले विधया सत्तथ वकृति प्रकार कज्ा नाभावप्रसक्षवारय सभ वेनतथा विधन्तिबध् प्रतिबंधक भावकत्मनयोप दर्शितलाघवस्पा षला तायदिचनवीनो व्हाखलरीसा लसननिवा हा तत्रत धावि धनति बं धुकामा वहे तु त्ना धि कमितिम न्यतेतथापिताद प्रतिवध काभावेपसक्षे हे तुतप्तबध कल्प नाशी रव नैया पिका ना मिसा ऊव तद्थिनावे चारस हो गुरुवरी रयाकानु कलस साभ्यप्रकारक योग्यताज्ञाननथा विधद्यलाभय मेहत्ताना भोवलवात्व
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अयतंडुल पचर्तिभेनइस तराआायनपाचेत्रो अस्तुभा वना विशव्य: मे श्रेशनंडुल:च्पते इ स्नतंडुल कर्थ शिटी कवाधाभाव त्यारि रूप गरुध मो व दिन्नादि्घियपित श्ञा द्वो घसामथ्यभावेनेतय् टपटाहिप्रसक्षकारण! लस ३० बंधक लनेनवैययाकरशा मृत एव गौर्व स भवाहि सासता विश्तसन कथमिति। केनुसबे धेनभावनायावि शेषमइ सर्थ-सि ह्वानी क जकन वि घयत ये ति न ्वयश्रा सकथपार्थे करे शे भव ना विशोधेतथा च चैते या पच्मते त इलइत्पा दोतं इुले विषयता संव धेन भावना विशेष्णइसर्थ-सविषयव्यापारेति विषय मापा रानाम धानयलरसर्थ रथेनगम्पते ग्रा म रसादोनादनारम सयोगर पव्मापारता ष ख्ानार्थत या तसपच निरवियुतास वधेनग्रा माद्दावन्व या सवे नोयर शिंतरीतर सना सभवें क कनति दु भाव:चत्र निघ्पाक भावन ति मैत्रनिष्ठायापा कानुकलभाव नातवि षयलंडलरसर्थ।तइलेनथा विधमावनावित्रो हे विषयचतथादा ना एम ग्रा ह्य कर्मा (मातहटश्लिकर्म तप्रकार कक मीिताम्मकव। एम 30 विय्यत्तया इत्तिचेत् रथेनगम्पने ग्राम इत्ादीसविय्य यव्या यारा नमिधानकागत्ति अपंच मैतएाय च्पतेतंडल ३सदमै ्रनिए्ट
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व्यापारजन्यफलशाली ग्रामः परत्तीयन इततिव्यापारविशषा ग्रामइति.नव्पार मा वनदेरा ख्यातलम्पला धस्ानुभवसिक् लेनाचित्रनिष्ट ति।प्रतीयूतर नितादश वाद्यजमवोधेशते शेय:साकषा सर्यर यवेति।्ा वोपदर्श्ितवेोधद योर्विक सानरिधननथा विकलि को पादनमिति ओ यारथेन गभ्पते य्रामर सा दामभाव नायान्वयप्रकारमाह। रथेनगम्पतया म: साहि नातथाच कर्म रायाशयातुछ लभावनाया:श्ातर्थेनयन कचिद्धि वयतथा कु त्र चिज्ज सन याकर्म णतुपरंपरये तिभाव-पाचीतन नंहरषयन्ावीन मनद शयति।निव्ा सिवति नबुकमा रमात स्कलश्र्ाधेयत्वस्ततीयार्थ तिक त्रा रमातस्थ लेयत ावना विश्ेष्म खनाे तिकभीरमातस्छ लेसएव भावना या विशेषणाखती सनुमव लोयापापत्तिः। एवं तादशबा कोनतथावि घे घवोजू ननीयन्ती यादि निरु पितशकत ज्ञा नस्पु सह कारि त्वक सनेगौरववेसत आरहासंखव्या मात्रचेति मात्रपदे नाथय लअवछेदन।सबध-चैत्रभावनयो-सबधर सर्थ:वा क्चार्घइति तथा विधवा व्रानुप वीज्ञानव दधयचंतती यार्थारक संख्या मत्रवा संवषस्तुपचनी सा वा विववाव्ार्थ:अस्तचफ्रल कर्मरेश विसं तथा रताथा फलतुकस्पार्थः
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नचतदापेतथा प्रकारीभू यतासमानलानू.फलावछिनकक्रियाया: चालर्थे ेपि करियाजन्यफलालामान् विशेष्यविशेमरणध्रा. विप्ययस्पाशकालाले नस्मा तुलनात्मनयदार्थ: इस चारव्यानपदोपस्थार्पिताया शिरी लाच्छाद वोषेमासतइसर्थ:तथाव तथा विघश््ेनुभवल्तदास रामत्रतीयार्थनऋाधेयत् सवधम ३१ यदिया मासतुश तिभाव तथे ति। वाक्पार्थइसर्थ। तदपीति फलमपीसर्थ-तथे ति।वाक्यार्थस बेवरसथं=। ......- भासमान त्वादितिातथा च नामार्थ घात्वर्थ योर्भेद न्वयानमुय गमन कमारमानस्छलेफलप्ूकारकवी धालुभवायला पेन्चतत्रुफ लस्पसबंघ विधयाभाना सभ वादितिभावकियाजनफला मा वा दितिजन्प तासेवधेनकरि या विशिष्टफ लंत एपधातुतो: ला भाहिसर्थ:।विशेषर वित्रोष्पभावे सारि फलविशेष्म
मनमुयसहरति। तस्माहि ति।इछवेति। फल सवात्म नेपदार्थ लेचे सूर्थननलम्पतेतितथाचकमीरबातएछ लेफलविशेषम कनन्पताससर्गकक्र या विशष सावाधोनुभव सि। सचानुप पन्न तिभाक।भावनावि राम भावनाया क्रियाविदययिएया फनेअन्येफलस्य करिय: न्यर्वनल्यर्ावियक्रियायाफल
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अन्वयतिभाउपस्थापित्तमा वनाया किया विशेषससन अन्यन्नकुमाअ्यो्स्ा यकमावकर्मल दोगेकु पशके:सपोल ्याभा वनाया विश षाया क्रियाथा: फनेअन्वयः षयस्पचे तिभावना विष यीम ता या-क्ियाया मरेसर्थ:। फले:न्वये जन्पूतासंबधेनान् थे। त्रपप्पन वसति! कु कर्त्रारव्यातस्छ ले क्रतर सर्थ-तुथाचतत्रा रमाता धांतरवर्तमानत्वाशीवालर्थस्पान्वयापत्तिवार सर्थे धात्वर्थनि सप्रका रतानिर पित विशेष्यता से वंधेनशाद बुद्धित्वावधिन्तरंप्रति-ारआतपदतम्पलसुम सकितेवियय तास बंधनरेतृत् सपकल्पनान घासर्थ विशेषसा त्न ति र्थहतेर त्य ति भावनकसन मिश्ाय केमि लसन ाम धायुकी यो भा वकर म विहितलमसयस्तन्योे भावना क ता केती यारूपस पश्सर्थनसुमन्त्वाहिति चत्रे गागत मि सादि भावादि विहित कमसयस्छले रु प लािसर्थ:।तथावि धकुठसयस्छलसुबर्थक ति विष्ठ प्रकारतानिरु, पित विश्ष्मता सेव धैन शायवेधप्रतिधानुजनाय स्छिते विशेष्ता सव धेनहेतुत्कलनएप कृपत्वानसुवर्थकतिप्रका रक किया वित्रेष्मकवाघेवाघकाभाव सवर्थकते:क्रिया विशेवरालनेवान्यस्पयुसनलान्
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कल्े क मेवा कृ तिफल यो रि अभिधा नेनियमा नाति प्रसंगः नवापस्यतेनं हुल इसादयप्रयोगा:
शि.टी इतिभावननु आस्यातएक तिक मामिश्ायकतेचैव्रेसामच तित इल-तं डलपमतेवैच रसाहिप्र योगाय ३२ चिरिसत ऋराह। कर्त कर्मवदिति विया क रणामते युथा कर्त्रारम्ान सेकरश्ा ऋताव छेद कं/एवे करमी समात लेक मंत्रा कताव घेद कोतथानैया पिकमते मि कर्त्रा रमा ततेक तिज्ञा कता वछेद कंएवं कमा रमातत्वे कर्म लशक: ताव छेटक मिति।उपदर्शितस्छ ले कृति कर्म लयो वोधाभावान पुर र्शित प्रयोगा पत्िरितिभाव:कतिकर्मत्व यो-शकताव छेट केकत्रारमातत्व कर्मा रमातत्वे गरते सवापसंभकातर माहा नवेति।तधास निपस्ष्यते तंडुली मैनरसा दिप्रयोगा पततिर विडुर्वा रेवे तिमाव:केचित्तु मारम्या त त्वमेवकति शकताव छेदकलाघयात्ा नववमुक प्रयो गापतिकति वित्ोष्प का ख्ातपदन रूपितश क्रिजाने नकर्म तेवी धनीय वत्रे पा पन्मतेतेड लसाधा नुषयी ज्ञानसप सह कारि त्वकसना
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तिदु·पस्याप्याया:संख्याया: भावनामा दूवपथमात पदोयस्थापानेवानयाुस्पन:चैत्रोगंसा गताग्रममित्रा कव कीगतंपुरंभोक्ातप्त जोपदर्शिता पत्तेरमावा दिति। एव मन्पत्राय्याप तिशकापकोप्यानुपर्वीत्ञानसह कारित रुपसलिलगा धोरशीमिर पलपनीयर तिप्राट-।ननुक मीरिमान सचेत् तह सनामक भावनार्थ तनर्ह कु ता भावना न्यिनि सरा न्वय नि यम चित्रशाय मतेन इलइसा भाव ना नन्वयि नि तेड़ले सरा न्वयन अमिबाराद तम्राह तिइनपस्छाथायाइति। तथा च स रमाया-प्रथमाती यस्छाय्य एवाल्यनियमनतुभावनान मिनितसमा न्वयन यमू तिमाव:नन्वारया नाय स्छाय्ा नवपिमव सरयया अन्चयतियम कि नास पेयततधाप स पिक मारमातृस्छ ले: नुयपस भाव इ्रतिचनातथानियमागीका रेनस्पनी त्पारदीवर्तमान तववि शिष्टे सरमान्वयप्रस गारि ति।कर्तकर्मत्ववि हितारमातनाकि मपपाधुकर्तकम विहितललसयस्पना क्िमुपपादयति। चैत्रोगते सादि/शपपार्यतामिलतस्पकनकर्मशीह थायहसने
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पककानिमंडे पक्तालयसारयतामित्यादौसामानधिकर रायान्यधानुपत्कर्त कर्मशी नवच्े मो.री.नाचय:कर्त्रा दिविहितकत=कर्ताघवाचक तेचेजो गते ता रैसमान सिंग कल निर्देशाज वुपतेअसमान ३२ लिंगकस्छले:मेदाचय वो धस्ा नुभवसिद नया तएपा निवा हा रितिभाव:ननुता दशानुभमानाभाव वे सतश्राह।भो क्ावय्ती साहि। ऋत्रवलत्रसयस्पकत्री घुवा चक सेमीजनाकलक तिस्तण्पनीसा घन्नयवोध: स्पानसवु विश्ेवदर्शितामनयप न् विशञेषद र्शितातार शवाक्ा दोजनानुकलकतिमा नृतप्यती साधु न्वय वो धो पपसर्थकत्रीदि विहितकतवातीदिवा च क व माव तपक मितिभाव:सामा नाधिकर रापादी ति।न्र्रमे दान्यवो घादीसथ:।ऋाहिना मोक्तानव्पती साही भो जना नक लर्तिमा लप्पती साध वयनोधपरि ्रह:ननुकल्लय सक त्री दिवाचक ले गतेसादा वात्थ। न्यानुप ति-। क्त्रीर-क्वसा दि विशिष्ट रूपंत या ससाद-पदार्थ कदेश नताक लत्वार सव धेनधा त्थगमना रम
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चैत्र स्पन झ्रामैत्रादन्पोघटा ठ पक परोप रो बाइ तादा विव पदार्थता वछेद केनेवकृसादिनाधा वर्थानयः दैरन्वयासंभवाहिसत आहु चित्रएपन से साशिन तपदस्पजव्यपुरुष रूपपुत्र पुत्रवाचकतयाजन्पलसपुर् पदार्थकदेना तेपिन व वैत्र सपेति अतार्थस्प चै त्रस ब धि तस्पान्वयः। जनपुरुषनमपुरूष रूपन सृपरथचैत्र पबधित्वस्पान्व यचेतपुरे पिचत्र स्पन पूतेति प्रयोगपसंगाता तथावतत्रयथा पदाथ करेशे चय लथा चत्रे गते ला दीय दार्थे क दे-शोवो धागीकारे पिक्षति विरहाहिति भाव: ननुनसुपुरुष जन्पपुरु घत्वस्प तपून पद्गावा ता व छोटक ले विशिष्ट तकि क सने गौर वायु सातरपहा यज स्पत्व पुरुष वचेतिज काताव षट्क कषयर्भवत एपस म्पक तथाच चैत्र स्पनझ सारचित्र सब धित्वस्पनन्तवे बवय जम वसपपुरुव: चय-पुरुष सजमचे वय जन लूस्पुन: पुरुष:नुयइलेव री सचतर व धिज न्ता भूय पुहुषनमता भयपुरुषरस न्वय वोध विने कर जान्य मुपपत्।3 पदर्शितहष्टा सभव किक इत
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३४ थान्वयवोधा नतुभवीचा सतनानपट स्पा पिख इवाकिक सननिरस तथा च्म त्रादमरसा दैपंचम्पर्थ प्रतियोगिक त्वर्सम्परार्थ कदेश्रेमे दे यो विनैक देजानसी कारमनुपपन्न।एवघयमघसद पथ तके पंच म्पर्थाव धिम तवस्पा न्वयो पितथा तथे वघ टाहपरइसा ह नन वि रोधिय शावति लक्षराया परा रथेकदेशेयु सो यंवम्पर्थान्वयेनघटाव धिक परत्व विरोधि साता निसन्वयव।घो पिपिथा चे छिवलस् सय ए्छ ले पिए क देगा नयुखी कारेवा धका भावइ ति। नमु मोर्निसापभुरपभुरि सादी तिसत् पभुमिन्न त्योरन यवोधा यसा किं विपदार्थ निघ्युप्रकारता निरु पित विशेष्पतास बधनपरजमपरार्थायसन हेतुलस्पाकपक तयचत्र सपनपत सा दी पदार्थक हेजाज वेकथ वैत्र सेब वित्वस्पान्व यरसतपर्राह राम ३४
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यैवेतिकार्यताव छेद कसवंध वित्ोष्मनाया नर पदार्था धतिरिकव तित्वनिवेशो नेवेसर्थसाकां सला दिति। शाय् बोधपदार्थोपस्छिसो कार्यंकारसाभा वस्व क सनीयत्वादिसर्थ-।तंथावय रूरपि तेथाका र्यकारणाभाव सी क्रियतपति भाकमूनु चैत्र स्पनश क्ा दी खजम ता भ्रर्यपुरुषजन्पतुपसवघएव वअ्र्थ:तसपेवनपप हाथादजन पुरु षुजने नयःमतुपूदार्थेक देशेजसले चिजनिरू पित स्वरूपष हमर्थ सबधस्पान्वयः।तथासतु पदर्शितकार्य का रसा भावेनप्र यदार्थाघतिरित्त त ति स्पविशेषय ताया निवेशे गौर वातातथाच ने क् छांताना मवकाजाइसत
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शिटी नोपास्कितेक लाथितवैत्रा दो क्थति :- पस्थाप्पद्वित्वादेस्व यह तिनुनाशकनीय्मा तत्रे कलवस्पाविवसषित ३५ प्रवाहितिनमु तथा घुपेद ज््ितियु ्मा तिडे हित्याभिंध्यायुक तव्मस्ाएक त्वामिधायक वंतुतस्पनिर्यु किक मिताशका मपा कतु माहलाघवारकृवच त्ानदिमवे तित्तथा चेकवचनत विशिप्टस पस कवगा ताताव केट का मयता य एक वचनतव एवशक नाथ छेतकत्वकस न मु चिते। एक वचन त्वचाभियुत रेकव सन ते नवा रि मा वित्तत।नन तिवा हिसाधारणा मि तिति वाहस्य क तववो धकत मकु छामितिभ्पका के वित पचनी सादावी खातपदालक्षसायाज सावा करतु सेधपितत्र नियतएव एकत्वाबस्पा स्मवसिह्ध त्वतिय एकत्वोधलमाव शपक।नय तत्रारमात् सपक त् विशिष्ट कत रिललरत निवास िमन-प्रतीयमान प्पर्थलक्ष रोकलन यत्रे प्यरभात इक्त कलपन सपतियी त क तेल क्षराथिवतत्र एम ३4.
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(लवोध संभवा दिसादत कर्तक मतरया विधानान मिशाब पाइसाररपनालती से ननेको ग्र समासत्त कतसायि तथाचस चिभा के विना कृत् सयसयाव स्काना सभवात क सयो ततर सुयराव संवा वोघ विय्याकप
सषभवलत: सरजषा वेषक वनिरयसक नय विनिगामन विक इ तिवामा एकव चनत्वेन सपस्तवत्िरन तस लाना एव च वे त्ोयो मे शनवान् इस्सा दी 7 मिधाततरक मालयेस सरमान निघ्याय क चे ननदती या यिब तल्शाथ्श क्च वारए चा दिनि ननुयत्रा रमाजैन सं रव्ा मि धीयन तत्र प्रथमा यत्रच ते नकत गम सरमाना। वमेधी यतेनऋ त ये साहि निय मावाम्यमतापस्छ लयकव म धानान मिधा ताभ्पानद्याय म। वघा तत्रसको पिदाल इसत शाह कियुमन नियमपति कत्रीमतयकत गतस वेवामि धीय तनमु कर मगत तोखा। एवं कमा ख्ातैन कमिगन सरज वामि धी य नेन तुक ने गोव ससस्य तिनियमाजामर सर्थ-नुमाहात
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शे.री- घमोला भेकाक्षतिरत आह यदायतावक्रेदकावृद्धिन् स्पएक नवदिन सर्थशराका भारजाद ३ क वावाछ न्ति रुपित्र के बतारिसर्थ तथाववकया मे। छनो मत्रा ससात नक मगन सरव्या बोध नवाधेका भ नित तापिक मे िि वधमास्वान रवय ररिद्न:पच्तेर सतराप्या रातनकशन तुसमा विधनेवाथकाभव वत ज् थिकनर प्रयमाप नरि तिभाव-।मनकत्रेकववने लाव लए कचिकववत्वजव्चताव छेड कावक मेवावर आला म्रसुवेति रु लाहघरि त एवति खानुक लरा निमूता हिरूपप रपरा सव घुरावसट।कर्त्रा िनासममन्वयप्ति।सत सथार्थ क तदि पात््धगम नारियकास्क वधप्रकारतावछेदकसवघर सघ-तथाच्यधाम न्वयडत इसपास थार्थ कर्तद घात्र्थगम एम 'अस्तुवाक स्ादिघ टितएवक चरो िनासमच्य:
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मुख्यमा क साधार सास्य फला दलक्षसाकर मलस्पक सादिल क्षरण कर्तलस्प चान मि निदितीयादयः
नारिप्रकार क बधप्रकारताव छेदक सव धडसर्थतथाचुयथानपपदार्थेउददर्शितपरॅपरासव रूप वध्मर्थ सवानयसीकियते।यथा वावितादन्प रत्पादोसाभ्रयभेट्वत्वसंवधन मे दविविष्टवेत्र तियोगिक तवस्पान्वय:नतक हेगान् यो पित थु। शनेखवारावपिक चीरिरूपकन्प् सार थएवसवानु क लहा निमु त्वाहि रू यप रमश स व धे नग मना देरव्य न हार्थे क हेत्रीपीति भाव नन चु त्रे शागते। ग्ामइ साद कलस येन कमा हिगत सरआानमिद्यानात् द्वितीयाद्याप त्तीसत श्रा हामुखे साहि फलादी साहि यदेन विघयत्वारिपरिग्रहंसाहा साटियि टेनरथोगछानीसारा वामयलादियार ग्रहणद्विती याह्यह सादिनातती यादिपरिगरहनऋत्रव ति यत्रेशा गतोग्राम इसा दैविसर्ध:विशिषा भिध्ानशते कर्मताहि विशिष्ट स्यवोधनइ सर्घन नथाच छत्रन तव श रावि धयाविशष्ावे अऋच कता विशि पस्था भिद्ाने विशेयएस्थान मिधानान्
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पत्चुधानूजरप्रसयलनैवश कौश कि पाचका दि पदेतुसा मानाधिकर रायानुरोधान् वशिष्क्षरीति नम्र
शिटी घयावाकर्म त्वारिकनवोध्पतेतत्रद्दितीया थदंक तिएकोनियम: एवसारमातेनकर्मतवाहिकं नवोध्युननन पिद्दितीयाइस परोनियम: स्की कियते नतु कर्म दिवात सखव्ाना मिध्ानघातो पितियुम शत तोक्तातु पपन्ति रितिभावः।कस्पचिन्मत हययितु मनुवह ति। यत्वि साहि चातत्तरपसय तनह तौजा किरिति धात तरप्रत्य त्वमवक तिशकताव छेदकमिसर्थ:तथाचत्रा कतावछेदकलघवात सर्वज्रकतावे वश्त्त नतवारमातप्प कता शकि:कमपयस्पच कर्तरित्राकिर ्शिति तथा सति विभिन्न शाक्त ताव छेदकाटिक लपन गोरवारिति भाव ननुस लसयस्प कृतिवाचक ले देवदत्त:पाच क रसा रेखिवि दत्ताटि प दर्थपाचमा घर्थस्पकथममेदाव्य्वोधसत्रा भेदान्वयवोध सपवानभवसहत्तयां काातरस्पव कु मनराव्च त्वै सतश्राहपान काटिपर लिसाि पामानाधिक ररापानुरोधान श्रमदान् यवाधा नुरोधाता लक्षते ति रम
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भावक लोपिवाचक तापति: धातुवादिघ टित्ता तस्मादारव्यानस्पैवलघुला च् तथाचतवतथा न्वयानुभवस्परतःकर्तरिल सुणयैव निर्वाह त्रालतत्रक कल्पनय तिमान नावन ति।जात्ताताव छेद काव कन्सपत्ा का बोध कलनियुमाहि तिमा व ननु धात नरम सयस्प लेर तित्राकताकहे दक वे पिभा वक तान वति ोधक लतथा विधवधे भावकदादिमावृत्ता नुपर वी विशेम सपव नि यामकत्वा मुपगप्ता दि त्त त्राह। धानु लाटि्घि टित साहि। ऋ्रानिय दाम सय् त्वारि परिग्रहनतस्माता घानतर प्रसयचाताभवाघन तमतविनाधातत्त रत् स्पप्रकारा रेशानिर्व कुमत्राकेतएवभा समानान्यत खा मुचविनाप्रस् य लुस्पायी तितहपेक्ष यारुरि सवचे ना रमात पद् वतरुपारव्ात तस्पवलघा लाते न्ाकतावक्रेद कत्ाचित्व मतिभाव:। एते ना खमा तमात्रस्पकतिवाचक लेह सासय खवं कर्तजा कता वध हकमितिगो रमेतट् यक्षया एक सपेवधानत्तर प्रसयत्वस्प तिज्ा कुतावछो द क व मुचित्त मि सपिनि
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लक्षसाति तदप्पसत् पतो विनाजवेदकंरूपंश कालासं
नि.टी. राताप्रसयत्वस्पारानत्वकतघरित लेन लाघवानवुकाआारि निछतौ:किरिति कृतिविशिष्टे कर्त कृत ३८ शक्रि कल्पने:नंतकू तोत- क्यताव छेद कलक लने गेाएवं ऊतान कसनेतु कति तजा तेखनका ताव छेद कत्व क ल्पनेलाघ मितितत्रेव तृत्क सनम चित्तमितिभाव:।यतर साहिनाक्य त्वा सभवादिसत एगवा हिप दानो गोत्वविशिष्ष शा का मिस नेना व्वय:ननुगवादिपट सपगा त्वविशिष शक्तिक लपनस्पा न सूपक तया लाघ वात्त त्रे वत क सैम त्विति अत श्राह जात्व ताहि ने सादि गोवल स्ाववतशासमवे त तेप तिगोति घास्मो न्याभावप्रति या गितानवछेदकत रुप नया गो र वारितिभा व:शिशि ष्ातरा रागमिति!नाव् विशि छमर सविशि द्ाटीना मि सर्थ शाकात मिति।आाकाजायदमहसदादिशका तवमिसर्थ।तत्रापिश्व वारिवि शिष्टरा कि कसने पिश्नतशदारोशक्ताव छेटक खेली कारेगोसरा भवात्-गोलसाविनाश क्रो चालिगौरवात्• सस्तुबाग वादिप दानी गोला दिविशि देशक विशि दुंन द जी शशांशक् बं बिनायेत
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के वले विशेष शोखार सिक प्रयोग स्तुल्य एव-एवं चगतोग म्पलेइत्यादौफलस्परताख्यातानामेव दाहीतछ कच त्वकल्पनेतुनद् तादि जाति.आवपताव छेट कलवली कारेलाघव मितितत्रा पित्रा दादविव शानि कसनस्पाहि तिभाव:तुल्प सवति।कतासय स् लपित्र विशिद्ट सर्थ-तथाचयथा दादावा कशाहिपर एपस्वार सिक प्रयोगाभावाततरनतस्पाक्य तवंतथालतावपिकर्त.विहित कल्परसयएम स्वारसिक प्रयोगामा वात्तत्रा पिनतस्पश्क् त्वमिति भाव:कस्पचिनम तद षपितुदशियति। एवमि सारम्प के चिदिसतेनाएवं कर्म विित कदारा तया:फलबोधकलममव स्छापनेवेसर्थ:।लाघ वा दिति कलातुकूलत्वविशिषूज् कि कल्पनापेक्षयाश रीरलाघव सभवाटि सरथ. श्रूनम्पतम्पड़ तिसतेनानमल म्पोहित्रा ार्थ इतिनियमस्पापिनर्मंगरतिसु चित्राव्यापारविनाघमात्रमि ति मभन त्वादिवििध्टृभानमिसर्थ।मात्रपदे नफलमवछे द:1हति स्छितावितिाइ तिव्यवस्छिता विसध। लाभात लाघवा द्यातोर नन्वलभ्यव्यायारविशेषमात्रक मत्ि स्थनो
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ग्रा मगववततिग्रामस्पगतस्ाद, फलज्ञनकबलवर कमलमपा ह्िती यादे: फले वप्रलिप देकाघे विशेमणतजाचेते-फलमात्रेबाथोजनकंतुसंसगमयाद यालभ्यमितिके वित-तदप्यसत- ग्रामगछति शिरी नतुआयार मात्रस्पधात्वर्थ तग्रामंगछनीसार्दोकथंकर्मत्लाभर्सत आहा ग्रामगछातोसहितआा ३६ समानकत मेदेनो हाहरणइ ये। हिनीयाहेरिति।आात्ा दिनाया मस्वर्गताइसाहा वध्ा:परियहफलज नक त्वलक्षशामिति।फल त्वमत्रजन्य तडदमाफ लत विशिष्ट जनकस्पदिती याघरथ खेग्रामग छनी सपार्द परसमवेतथा त्र्थ जन्पफ लगालि ख लक्षणणकर्म तस्ष्म बोध प्रकारमाहा पलेवे साशिवे ्रस्पनसे सारा विविक देशान् यतीका रेतुतवित्ति व घ्यतयाउपदर्शित कर्मतस्पा पिवोधुइतिभा के। फलजनक तद्विती यादे-ना क्रिक ल्पने मार वात्तह मरायफ ल शक्ति:जनक त्वेतुसक्षगमर्यादयामा सतः सरपेवसम्प क त्वात थे वा हाफलमात्र वति। अन्पर विद्िषट वे सर्घ:फलसामाम लामे पाति जन्पत्वविशिसस्पलाभेयी सर्घननियतति।लक्षणापस्किवितिना॥मा काली नेसर्थ :सयोगधि एम
स्जती ता दौ द्विती या दित: फल सा मा् लभेपि नियत संयोग विभागा छलामात्
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तस्मा रफलविशेया वछिनव्यापार स्पैववालर्जलात्-अन्वधासजिंगामेपभतीना पर्यायनापतेतवापि
नतुलक्षशोपस्छिसा घभावका लेतथा विधवो धा भावेक्षतिविरह रसना ट्राघातरमाहा अ्रयेशि आपारमात्रएप धातुवामलरसर्थ:पयीयता पत्ते हिति। ए क शक्य तावछेहका वछिन्नानापद एपेवपर्याय त्ातइ तिमाव:। त्राक नेतवा पी सा हिस यो।। तादिविशिष्टावछन मोपारस्पधातुरश का तवाहिनोपीसर्थ:।स योगत्ालित्व मिसाहि। जन्पत्व रूपफ ल्वाय छिलस्पवुकर्मारयाना दिवान् तेन फलात रएवा विबोध संभुवा दि तिभाव ातहव द न्ेति। सयो गत्वादि विशिष्टाव छिम्मुर सरथ:ातथा वताह शलम मिद्याहार ह्पववि शेषकार्यनोव छेर कत्वाहिति भाव-सममिव्याहार बिशे गम्पत्ति ग्राम इत्यादो सष योगश लिबंकुतःप्रतीयत इत्तिचेन्- तदवछिन्नव्या पार वाचिधानुसमिव्याहा
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नराइट वनता बोधकाद्विधेरे वश्वर्गकामादिसममिव्याहाएत सवगोदिजनकलं प्रतीतिस्तु इ छ्ठफल नि-टी. सात् सामान्यधर्मा वदिलवोघ कृ पट सविश्रेषवो धक लेध्ानमाहयथलादि।श्र्पदेनहि तितथा ४० तत्रयदीष्ठ रूपेशासर्गबोधक ेत दा ममा पिफ ल त्रुपशास योगादिबोधकसृ/यदिवात त्ेष खर्ग योस्मेंदान्वयेनसगाहि रूपफ लवोधक ले तदा हाते स योशादि फलयोरमेदान्वयेनस योगा रिवोधक वपितिभावा ननु सामान्पधर्मावछि तवो धक पटा त्सामान रूपेश कियाथावोधूस भवशतिवाच्या इन विशेधरा लनोपास्टेनथ्यासन् वित्रोषशा लेना ये निएका क्ेननथा वित्र ववोध संभवे पिगम्पतयामइ सादी सयोग ताहिनासयेगस्प ग्रामवर्तिवोधाला भ्र संगनवस योगफलयोर मेदान्वयेनसयोगत्रूपेशान् या सभवीहिस्पतेश्रहात्र सतुवेतितथावयथावुर विशेषविध य तवरूप पा मान्य ध मन छ नत ादिय दात,घट लपर त्वाहि हुपविशे वरुपेरा पोरिछल फललाभ्पीखवर्गल सयोगम्पावेसन्पदेतत्.अस्कवाबुदिस्थ वाचकतदादेरे वतथाखुर षशादिवप्रभथतावेदक
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वोध-तथाप्रक्ृतेपिफलत्व रूपस्रामास धर्माव छिन्वक्तारम्ात पदात् सयोगलाहिरुपविशे रूपेश वोध:यहमव छिल्नेपर निरु पितत्राकिय्र स्ेन रपेणा पहसप एव रूपती वो धजनक त्मि तिनियमएम एतर तिरिक सछ लत्ा रि तिभावन1इट चनहा टिसर्वनाम पट स्पशा कातावछेह कवुद् विजोष विषय मेवजात्तिय हो पित हर्मा वूछि न् एव बोध सुघटोसपबुद्धिस्व रसाहित्ञानत हकृतातूबु म्रि विषयुल्तदाहि पहत्ाकाह तिज्ञानात् उघते रति प्रावीन मतालु सारणाया छानूनुघटारिपुर निरु पितन्रा /िज्ञानान जाति खेन यटत्वाहिप्रकारक पहोन रुरपतश क्ियहान सरूपना घर तवाहि प्रकारक वा धा यत्तिवार रााथ तिरव छछन्नप्रकारता सबंधेनजा
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नछालेवा च का श्यान कुतोर पिविशेवर्पेशबाधकतं-अपिच चालर्भत्ता वछोद ककल शाज कमख
शटी रवुत्रिप्रति निरवछ्धि न्प्रका रतासंबधेनय इनिरु पितना किज्ञानहेतुत्वकसनस्पावश्पकतयाकथ फलतव विशिष्ट आरम्ाता रिपदनि रु पितना शि ज्ञानान गाद वोधात रासयो गत्ापद र्शितस वधे नो पदर्शितकारसा विरहानानच वि षयभेदेन ताटना कार्य का रशा भाव कलमपन प्रहतस्छ लसनक स्पतइ तिवाम्याविद्ययमेहेन कार्यकाइशाभावकल्पने गोरवातु नवतट्ाहिपदात् विशि ष्पगा दवो घस्ानथानुपपलातथा कल्पनमाव उपक मितिवाच्या्रनंतकार्यकारशाभा वक ल्पनापेक्ष यातदादि्पदाना वि शिष्पनत्ति कल्पन स्पवोचितलान।इतिप्र कतेपिविशि प्पत्राकरा वप की समिप्रा येशप्र का रातरीशाकर्मत्व निर्वच नमुखेन व्यापारमात्रसपघावर्थ लेडषणमाह।ऋपि चति/धातर्थता व छेद्दक फ लेति धात्वर्थताव छेद कताव छ्वेह कविशिष्टक लसर्थ गप्रियसोकम
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सेसाशियात्रवधा तर्थग म नादि कि याजन्प विभा गरुपस फलस्प भर्वट शेपिसत्वातामिपसो-पर्वर जास्पापिक र्मत्वापति रस निक्रि याजन्पसे यो गरूप फलस्उत्तरहेशेसत्वातस्टिशस्णपिसज कर्मत्वापत्ति:तथा सवं हजम विभा मा हिजन्पृफुलस्पपर्वापरहेनायो-सत्वात् एप टरुम यत्र कर्मता पतिरतीनधा तर्थ जमफ ल ग्ालि तव कर्म लकिंतुधातर्यता वछेद कफलशालिलतनातत्रव नो पद ्शि तातु पप ति:उत्तरस योग रूपफल एपव धातर्थ ताव छेद कतयात एचपर्वहश र भावाताएवमध-सयोगस्म पतेश्व छेटक तानृतसमच पर्व हेशे त्र भावात्नगमिपसोसर्व देशोक मं ता पति:एव विभा गंस्पस जित्िया वुछेदकतयाते स्पोत्तरशेन्प्र भा वाललीत रहे दोसने वार्मलापतेः।सवटेआजाव देद्कफलाभावे ननी भयत्रक मेंत्वाप तीतिव्यापारमात्रसम वा
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शि.री वर्पतेग्रमंग छती सा रै। कर्म तववोधानुपपत्तिरे वदोषइ तितुभावार्धेवसेय ननुत ात्वर्थजन्पतत्तल ४२ वूालित्वमिसननुगत कर्म तमसु।श्रानुगतक मे त्व निर्व च नेप्रयोजनाभावादतो: नुगनकर्मत्वनिर्वच नप्रयोजनमाह फलावद्दि नेति। फलजन के सर्थ:।सकर्मकत्व मवहारहति।तथाचानुगत कर्मला निर्वचने नुगतकर्मूल मवार विलोपप्र संग:।ननवेवस तिकथंजानाती सा द कर्मतवम्वहारह सपतम्र्राहमभा का स्वेतिलाक्षणीकरसर्थ:।तथाचपद र्शि तसकर्मक चंमु रमेस्कर्मकलुम्मवहर नियाम क मिसता न दो घड तिभाकानरुअ्रननुपत मेव कर्म लमस्तुा शरगनुनम वहा रा भावेशषाप कर्मंकधातुयोगेकर्मप्रसयविधानस्पानेनुगत लवाप तेरिति भाव-ऋ्रक्टम वधेय। मद्यविधातुल पूर्वाथर यो:पसंगार. फलावानव्याधार बोध क लदिथाूनासकर्मकखव्पवहारमुख्य:मातक जाना सदे:ता हश थातुयो गेत्तत्र कर्मप्रसयात-
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तदर्थतावछेद कत्वएपचैक्याभावेनधात्वर्थताव छेद कफलशा लित्व रूपकर्मचम पिनानुगनाएंवंता दव्रास कर्म कतविरहे पिजानानी सा होयथातत्तक्ा, ्योगे कर्म विधाने तथा विशिषपगम्पादि विधाने पिकर्मप्रलय विधानसभव सेवातथा चतततुक्ष धुजन्पतत्तुल शालित्व रुपानुनुगतेकर्म त्वनिर्वचन पिनदोय: कर्मप्रसय विधाते अनुगतत्ञा दात रस्पप्रकारों तरेरणा पि से भवाहिति व्यापारमाचूस्पधात्वर्थ तवेसनिग म्ो:पर्या पता पत्तिदोमो3, रुदरएवे ति। ननु फला व छि नम्ापारमात्रसधात्वर्थ खेग्रा मगछ ती खा ही ग्रा माटिरु पना मार्थस्पकुत्रा नव यः।नताव दा त्वर्थ कटे शेफला नधातर्थ। नामार्थ वातर्थ योरमैेनानय वाधा नभुष गमाता आहतत्रवेति। ग्रामगुछ ती सादै विसर्थ।नच्ेतिा हिनी यार्थबति तववेसेर्थ:श्राकाक्षा दिव विआादि ति परार्थ-पदार्थ ना न्वतिनतुपरार्थकरे शेतिुमतसर्ाचक
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अतरव -चास्या: पदापोन्विताधेयता बोध कसप्मीतता मेदःअस्तवा क मार्यातस्यव दिनीयाय। अपि
शि-टी ४३ कर्मकारकस्पाधिक ररातिता न््यकर्म णा दितीया चे तिषथकरुत्रा सायनमनर्थकमे वससम्पधिकर रोचिसव द्वितीया सप म्पधिक रोवितिकररो निवनिर्बाह स्त आह।अनएवेतिधात्वर्थताव द्ोटकफले द्वितीयार्थब त्तित्वसपान्कयादेवेसर्थ/तथाच सपा््म धित नित्व स्पधातुशक्तिमुखविशेष्प न्वयवि तीयार्थहत्तित्वस्प धा तर्धक देशेफले :चय तिस चनार्यंतत्रथ्थकुमुत्प्रशायुन मितिभाव: नन्े दा वसतियदार्थ पे र्थिनेवा न्वेतिन तुपहार्थ क देजे एंताटन्रामुमतोमकोच कस्ूनेगोरवुमिस तश्नी ह ऋ्रसुवति! फल मर्थरति तथावफलावद्ित व्यापारस्प धात्वर्थ लेपिफलमेवदितियादतह रम जनकतास बधेनधात्वर्थ : न्वति/ऋ धेय लतुद्षि तीयार्ध फलकर्मकार क्योबधमया ४३
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आस्त्रावा फलव्या पारीषयगवचा सयाविशिषस्क्अन्वयवललम्प यामा सतेप्तथाचग्रामंग छती सादौया मविशिष्ट सं योगविशिष्ट सयोगा तुकलगमनानुकलक्ति मानिस न्वयवोधक तिभाव नतुतथा विधवा का जम शाद वो घे सयोगस्पवारदर्य भानमनुभव विरु्न मिसतश्रराहा लावेति। नवैवंग मिस ज्य:यर्यायतापत्तिरितिवाअ। ततपदनाव्यताव धेद कता म्रापक शक्चताव धेद कृता क वव यत्र तिही तित तस राना मेव पर्या यत्वारि तिभा वे:न नुफ लमवार यार्घा सर्थतेत्तत्र कथफ लज्ञन कव्ापारव धनिर्वाहइसत चहविन्िष्ट खिति। जनकता वधेन फलवि शिष मपारत्विसर्थ:ऋन्वयूबललम्पइ तिाफ लव्मापारयो: परसपरमन् या हम्फु तर्थतथावणु क रनिवैधि आात रोपदार्थयोरपिपर सरमन्वयंवोघस्वी कारेपि तथाविशिष्टानयवोघइतिभाव नूनुधात्वर्थताव छेद कपल शालितरु पस्पना में त्वरूप सेभमिंप्रयातिविहगइसादिवत्वात्मा नप्रथाति
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भू मित्रथातिवेहगाविज हातिम हीफहं नतुता-्आनम सादि प्रयोगत्वान्यवोधनः े यार्न्वायपर शि.टी- विरु गर सादि प्रयो गाप त्रिमतत्रसयो गाहिरुपफलस्पद्विछुत यास्वात्मनो पिताद ज्राफलाश्रयत्व सभवें ४४ नस्वात्मह निता ह आफ लालु कल म्ाधाराव कलक तिमान विहगह त्पाहिवद् बोध सभवारिसन प्ाह। भू मिंप्रयाती साहि क्रियान् यीति एतेनपर समवेत त्वस्पदवितीयार्थ लेपित स्पफ लेअ ये सेयोगाहिरूप फलस्पदि धनयास्वात्म हत्ति लेनतथा विधप्रयोगवारणा सभवह ति निरखत।ननुपर समवेतत्वमिसन किमपेक्ष्प पर तवं विव कषिताप्रसयार्थपक्षयेतिचेन्ा चव्े ात्मागम्पतइ तिपयो गापतेअ्र्नम्र हास घंगमनापेक्षया त्र्परात्मनःपरत्वारिसततश्राह इया/त्विति। विशेषमेवय सास्यतिपरतवमि सा रिना ति अरीसननारिना कर्मलसरियुस्व्थति सार्थाय म लतुसा म्रया पेक्षयसर्य.।इहचफलाव छि न्माया रदेर्धालर्थपक्षे फल व्यापार योर्धातवर्थत्वप क्षेतु भरमाना हरश्रयत्वाघर्थ कतयासार्थाभ्रयतवाभयपे रम पा पेक्षकं प्रसाय्यत
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घटंजा नालिछतिथचु रुते चैत्रो चैत्रे एगज्ञायने इ व्यते क्िियतेघट इसादेसविषय पदार्थमिथा यिदानु कये सथा वसय:तथाचय्रमृगछत्ीसादो्ा मान्वा त्तिर्मत्तियोनकलएप टनक लल तिमानिसन्वयवोध:।एवेयामोगम्पतः सादीग्रामान्पवृत्तिर्यायाम त्तिस योगानुकूल स्पुद्स ज्सफल वानतरा श्र्रयतावान्वाय्याम5्सन्चय वो वहति भाव:ननुसर्वत्रद्दितीया समति व्याहार स्हालेक लर्धाल र्धलेघ टज्ञानातीसा दिप्रुपो गोनुपपत: ज्ञानजनफलस्प घटाहाव त्ति तेनतत तद मावे नान्वय बोधाल भवात्ा एवेसर्वत्रप रसमवेतत्व क र्मूप्रसयार्थ-।इट्म प्पशुदे।आात्मानेजाना नी साहिप्रयोगानुपपजे: म्रात्मान्मवृत्तित्व स्पतानादावप्रप्िध्यातसपतत्रा न्वयुवाधास भवारि सत्तश्राह घटेजानातीसारि। विष पित्व मितित कर्त तिसु हिस्छाले दिती या र्थामिप्रायेरणा वि षयत्वम ति नुकर्ममात सछ लसरया ताथोमिप्राय शोक्तातनी येसस्व कर्मा रव्यातस्छ लेहला हितथाचस विषयकार्थ वो धकधालवक्म प्रमोगा कमप स्येनयथाय र्थविषायल चकततिडनआश्वयलं ततीयया चाथे य लंवो जते
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न्ब प्बोधेववं विशेव:यदेकलक तर्या जयतरात विता विेअन्पननकमी श.टी- मिव्या हत द्वतीयासम भिद्राहतधातु स्छले फलादेर्धो सर्थत्व नियम:एवंतादृशवातुस्छाल कर्मपूस ४५ यस्प्रपरक्षम वेत तमर्धाना न्पत्रे तिभाका/ तथाप ति त त्रतन्नान्वय ब्रोधप्रकारमाह।ऋ न्वयवा घेतिति। एक त्रेति/कर्त्रारमानस्छलेसर्थ:अ्रपन्नेति नन विषुयत्वारे:कर्मप्रसयार्थ त्वेज्ञाना घुटसतरवि षयलसघय है मिहान्यवो र्धसभकानायार्थ योर्भेदेनान्वयवोधानगीका राता नवा मेदाव्वय वोध:वाधाहिसत श्राहज्ञातइसा शितथाचारमान स्छोले कर्मप्रसयएविषयुत्वादिकमथुः।कर्म गोलम सय स्मृतु विष्यया हिक मर्थ:।तस्पच प्रथमां तार्थेश्र मेदान्वय नामा र्थयोरमेदान्यवोधसम
४५ विषयता ततकरिया तत्राधेय लंत त ति ज्ा तो ज्ाता नएइसादी कर्म कर्न वृत्तिविययाशयप्रनियोगि
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यत्तलइ सादीचय सादिना पस्थितेय ललादीविषय लेनानय: अपितूदेश्पलेन पदस्वामा व्यान् आहा यतत रसारितथाच य तिपदार्थातिरिक्त सविधय क धात्वर्थे पर्वत्र विघयत्ेनेतर पार्थान यःऋत्रत केतप ले नेतिभाव-।व्मतवेति यतोय तिप रार्थउेउपते नेवेत रपदार्धान्व योननुविुय चेनश्रतएवेसर्थ:।ऋभुंजानोपीसाशिम्र मधातत्रत दाभोज्नविष्ययकल्वस भावेननथाप्रयाण नुपपन्ति-। मडनमनपवयितु तन्मतरतीयातिधातो रर्थःफलमितितथाच फलानुकलम्री पारे धातो:आाकि वाहिमने पिफलेश कि फल्पनस्वावउपकतयातत्रेवत तल्पन मु चित मितिभाव न न्वेवंस निग छती साहीस यो गरूप्फ लातुकलआा पार बो ध स्पानु भव सिहस्पकथ तिर्वाहइस तमााशनुकूल म्ापार तिा पटार्थेकदेवासयान गीकारेताह व्यापारमानदतिन तुकबल आपार स्पारव्यांतार्थ तेगछनीसा दोघात्र्थ सयो गारव्पातार्थ आपारयो:कथन न्वजनेकभाव अत्तर मुंजनि पिभोजनाययतत इसाद योप्रयोगा:पल धातर्: अनुकूलव्यापारो व्यापारमा
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शिटी लाभस्तत्रा हाज म्पजनकमावइसाशि नतु सर्वत्रफ लस्प धात्वर्थलेगछ तियजेते सादी पयोग वर्गाहि रुप ४६ फले वर्तमानतेष साधन तादेश भावात्तन्वयानुप पत्तिरिसतश्राह लडा दी सा हिलाघ्थ। वर्तमान त्वारिका/लिसघर्थ:उष सा धनलाहिक मिसर्थःवर्तमानत्वाही सा हिना भ विष्मत्वाहियिय हाइट्रसाध नत्वाही सारिनाक तिसाध् तपरिग्रह।एकप दोया त लेतिएक पर न न्पोपास्छ्िति विष य लेसर्थ: तत्रे वेति। व्या पार एवेसरथः।तथाचारमातार्थमा के रेवर्तमानत्वाहेर यागीकारे स्राप सर्थवर्तमान तादेहपासव सत्तराकल्मनेलाथ व्रमिति भाव ननुफलस्पुधात्वर्थचे रोदनारिरू पपाकफुला नलतिद शा यातदवु क्लपाकाहि हुप म्यापार सत्व पा कीभ विठमती तिप्रयोगापूतिः।तत्र निरथ कघन सेममि व्या हत पंचूधातर्थ ओह नाहि रूप क लेव त मानप्राग भाव त्रति योगित रूपभवित्व। साधन लादि क मे कपदो पातलप्रत्यास त्ा तत्रे वान्वेति
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भावप्रसयस्पघ भादे:अनुकूलव्यायार मा त्रमवार्थःतेन व्यायार सलफलान त्ाददकयी पाकम स्मपत्वा हिसत र्राहा माव प्रस एपघज्रादेरिति भाव विहित सध नादिप्रसय सस थेऋ्र्रनुकलमापा रएवे ति तथावतत्रभाव विहितबनर्थस्वतादनाव्यापा रस्पसिद्ृत योतत्रवुर्तेमान प्रागभा व प्रतियागि व रुपभ विष्मत्वस्पवाधित से नतथा प्रयोगायस संभ वादि तिभाव-निवेति। भाव विहित थंत्र प्रसय स्पान कूल व्यापा रार्थक लेनेसर्थ:/फलानुसाहदगा या मिति। आदनादिर पफलानुसा द नायामिसर्धू:।ताहनाफ लो सा हर्जायातृतन्रवर्तमानपामभावप्रति योगि सवरुयभ विष्मत्वएय्र दनाहिरू पफले व् भारवनत ाप्र योगास भुवा तयेवो क मिति घजो: सुकलू म्ापारार्थक लेयु तचंतर माहा नवे ति। व्यापार विगमा पाकाहि रूप व्यापारविगमेरसर्थ:पाकोविद्यतपति!तनभत्व र्थे शरोद नाहि रू पफले वर्तमा नका लसवधि तव रूपविद्यमानत्व एपस सेनन थाप्रयो गापति सभवादि विम तिनप्रयोग: नवाव्याचार निगमे फलसलेवा को विदयनइत
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नापियटभूतलयामिय:सयोगजतिन :: योगमन मिसादिपयोग:प्रसयोपनीत परसमवेत्तव्यारपा शि.टी-तिभावन भाव विहित घन्नाहीसत्रा हिपर ग्रा हलुट प्रसय ए व्यापारार्थकतेयुक्तिमाहानापी साहि ४७ सत्रभावसुटप्रसय सतिरर्थकत्वे सयो गरूपफलमात् सगामूधात र्थलेत सपचघट भतला भेय वत्तितयाघट भूतल योर्मियोगमनमिति प्रयोगायत्ति ई बरिवे तितुस् व्याया रार्थक तवेमावशक मितिमावान न्वेतन्मते कर्मलेनधात्र्धना वछेद कफलगा लित्फ ल एमेव तन्मने घा त्वर्थतया था त्वर्थतावछदक त्ाभवेनतथालक्षुशाा स्पासंभवड किकत्ात! नादिपरसमुवेत व्यापार ज्म्धाल र्थ फ लज्ञा लितेनत! स्वा त्मानप्रयातिवि हगह ति प्रयोगा पत्त:विहगस्पावपराय स्ावयव:ततम तोय: खात्मक व्ापार-तज्जनधात्वर्थ सयो गोल् कफल शालि लारिसत ऋाल प्रस योपनीते ति E3 सयोपनीताय-परसमवेतव्ायार-तज्नयकार्थफलंत का लिलमेव्तना तेकर्मे। तादशएप रा रजन्पधासर्थफलशालि तंचकर्मत् फलनियाथतेहनी या दिन का पार निष्ठधेयंततीयाद नामिथीयते-एवचतं डुलं पचतत चेत्र इस्पस्प नंडलनफलवशयनकव्पापारवाश्ैस्पर्मैेशा
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व्ापारस्पप्रसयोपनीतत्वाभा वेननखवातानप्रयाति शथालिविर गह तिप्र सय प्रसगगनवातव्रायारप दंवर्थमितिवा ममंा व्यापार ले नप्रसयोयनीत त्वप्राप्येतस्पोपादानात प्रसथा वर्तमान त त्वादिना प्रसयोपनीताय- पूरसमवेतकालोपा धिस्तज्तन्पधात्वर्थ फलशालि लेन सवात्म नो पिकर्म तसभवा तखवात्मातंप्रयातिविह गध्टतिप्रती या पत्ते-न चतु थायि धात्वर्थतिव्ंथ।गष् ती साहा पूर्व देनास्या पिक मंत्ापूति:/तस्पा पिम्र सूयो पनीनोय:पर समव तम्मापार-तज्जम फुले विभाग सच्छालि त्वातत उपादृनिचनत घात्ापति:तस्वधातर्थत्ाभावा.ा मुत्रच परस मवेत तकर्म प्रसयार्थ:1तस्पचे वा त्रो रमातस्छ ने आरमाता र्थ आपारे। कमा रम्मात स्छलच निक हुमुतेत ती यार्थ व्राफाएवान् यशतिापर तुधा तर्प अधियता संवं धनयह न्वतिव्दवक्षणाधातर्योधिक रणालस वधनयत्राति
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फल ध्यापार योर्विशे षशा फलव्यापार ये विशेवर विशेय्यददिबकप्रसयव्वहाय:वस्ातस्त
शि-टी. तरपेक्षयाचवो म्ाइस्यंच पामंगछ तीसा दौग्रापहत्तिसयो गजनकग्रामभिन्तु समवेत व्पवार बथ्चयतच ४८ विराग्रामोगम्मतरतत्रचे त्रव त्तिया म् मिन्त समवेत्त मपा रजसस योगशाली य्रामइ ति वो घः नवुकत्री व्या रमातकर्मा रमातयो-या शारत्व रूपैकधर्माव छन्तवोधक वे केथम कत्रुकर्तप्रसय:।एकनक र्मप्स यह तिद्य वहार इसत म्राहा फल व्या पारयोरि तिा्तथा चफल एप विनोष रासम्ापारस्पविशेषलेकन् सयर तिमवहारनएव फलस्प बिश्ा ले आपा रस्प विशेवशाा लेच कर्मप्रसय ति व्यवहारइति भाव ननुक मारमातस्व लेघात्वर्थफ लस्पपाक्षा नामार्थन्यवो घाशिकारे नामार्थ घात्वथयो:।साया दे दान्वयवोधाना गीकि य: तह ति व्युसति भंग प्रसं गर सत ब्राहा वस्तुत स्विति।ऋ धिक रसात् मिसा हिपप्रथमातद यस्पपुर्वा क्ार्थरसननान्वयः। ननुकर्मारव्यातवत्कर्म हतोपिभाभ्रयलवोधक लेत रम आखध्यानस्वव ततीया याभपिव्या पारयवार्थःकमारव्यात्तस्पचधास र्थफ लनरपित्तमधिकररसा
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कमरत: फला क्रायः कर्त कृतण व्या पाराफाय कर्मकर्नसामा नाधिकर रयाननुरेधातू. जानाबी
तिपफलस सासि कर्त कतोपिय लाभ्रयबोध क ले एका का खवोधजनक तरक्षेरााथ ऋ्ररारत्यात सपोवि यलब विशिष्टना क् तापत्तिरिसत आ्रहाकर्त कतर साहि कर्त कर्मु सारि उपद ्शितोमयस्क लेकने कर्म भ्यासह रूम् सया थमे ान्वयबोधस्पानुभवत.इस्पाव राधा हिसर्थनजानाती साहि प्रयोगइति।शरारसात कर्मुरन कुता मितिशेष। पर्वोक्तरीति। आभ् यतविष्य लकर्तारमानकमी रसातये- आ्र्राश्रयविष्ययाच कर्त कर्मक्कतारर्थइलर्थ:।सुबर्थ एविसाहि। पअ्सत वायार स्पारमातार्थ त्ाभावात् फले वर्तमान त्ान्वय वोधागी कारे आाया रस त्वद तायाफल लतहया या म पिपम्मत इसाटिप्र योगापत्ति।एवंयक इसादआा मात भावेनतरदर्थ व्पारेनीत ्वस्मवो सादे: प्रयोगतुप्रूवो करी तश्नुसपरीया चैत्रेशाच्यते पक निसादाकबर्घेएवव्या परतदन्वय:
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एवास्तांथा व्या पाराकामोश नपो विशि ष् मचयवल लम्प शि-टी. घरतिव कुंमश्ा क्या तवेन था त्वर्थफले: तीत तस्पानयागीक्षा रेफलसत्वदशायोबी पारना प्रदशायापक लंलत ४६ प्रयोगा नुपयत्ति श्ेतिभाव:वर्तमानु लाही सादिना: तीन लाहिपरियहननुपचमानइसादीजानवप्सयार्थ कदे शेव्या पार एव तदर्थव र्तमान लदिरन्वयः खी कर्तमः।तथा चपदार्थ: पदार्थना चेति ननुय दार्थकदनाइत सयुम्पत्तिम गर स्ूत ऋराहा पच मानर साहितथाचप्रऊ्मत एछ लनाहना सुसत-स कोच: कल्प्पतइतिभावन सर्व वतादश सुस तति तकारे साहा सविति नव्वे वंस तितत्र आपाराभ्यताया:वोधस्पानुभ व सिह्रस्पलोपुप्र संगइ सत म्राह।विशिष्ट मिति।आाभूयता स वधन आयारविशिष्टाभ्यत्व मिसर्थ:अमूल भ्यमिति एकसदीय य स्कापिन योरथयो: परस्परम न्वयवोधांगीकरि शाकाक्षाका र्यकारशाभावसि, शादवोधविष्यय पर्थातथा चैकपदाय स्छाम्मयो: परस्परमन्वय योधे वाघ का भावेन ताटशनिर्णा यविशिष्टा धवो धेनानुप पनइतिभाव। ४8
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एवकार स्पेवान्य योगव्ययछोदौअन्ययोग प्रतयागिक व्यवछेदमात्रस्या तिप्रसकलात नव्वेक पदोपस्छाप्पयोरर्थयो=पर सरमन्वय वोघोुसत्तिति परतन्रमानामावरसतत्प्राहा एवका रसवतिायया एक पदीयस्खाप्मया रर्थयो-परस्मरम् न्यवो धानमीकारेपार्थ एवधनुर्धर सादियार्ीसयागया वछेदोन पपनः।एव कारस्पाध्य नयोग भव छे देचप स कत्रकिध्यस्वी का रेशा उपदर्शितानुयय त्तिगस्त्वा दितिभाबन ननुएवकारस्प मयनशक नरी कि यत किंत्व मयोगपीत योगिक त्वविशिष्ट ववछेदएवा तथाचापटि। तान्वयकेधोनुयप नरसततराह त्रनयोगे साहि अन्पयोगप्रतियोगिक तविशिष्ट मव छोद मातससे। गापत्ति:चित्रान्पयोगघ्यटीभयृत्व्यव छदसचे त्रान्पये। तियक स्पधनु धे विद्मा नत्वाहितिभावु: नन्वन्योगतावछन्तपतियो गिताक अव छेद एवएववास्त्राक्।तथावन चैत्र एवथतुर्ध रश साह प्रया
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शि-टी. गःयार्थरूपधनुर्ध रवत्रामपयोग स्विधयमा नना घनुर्धरत्ाव ्देनैनानयोगत्वावुद्दिनाभावसबाहनस ४० ऋदोषमाह।श्राययोग त्वाव छि ने साहि। शन्य योग ताव छिन् प्रतियोगिताक मवुछेदस्पत्ाक् त: न्पतादो तपत्वावुछिन्तप्रतियोगिमन छेहस्पत्राक्य ले। शक्चाय पिक्धिपार्थएव धनुर्धर रसादाअमनादातपत्वावाह नप्रतियोगिताका आवर पशक्या प्रपिक: एथिव्या मेव गंघइतादो त्र ससत मवेत्लवाव छिन् प्रतियोगिता काभाव रूप त्रा क्चा प्र सदिदाघान सवतिशसमव तेत एप प सिदिसमवानऋतसतत्रदोषमालावा वितल वैतिष्ि आाभव गध रसदेगघ: प्म वतत्वा भावस्पवाधित े च सर्थःननुतत्रगघे ससम वेतलवव छेद स्पवाधित लेपिष थिमन्पसमवतत्वामाव स्पतत्रावाधित लनबोधु सभवातएवयार्थयव च्यनुर्घरुत्प राम दै।शरसें.रात्पाप्रसिद्धाबवियार्थान्पतादा तपाभावस्व प्रसिक्किसभ वेनवाध सभवा रतोहष रापतामाहाया 46
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पार्थ एवे सादी पार्थान्ययो गका वदिन्व्यवछेदस्याप्रययप्रतंगाहतस्चालाू
र्घएवेसारावितितस्प पाथोम्मतादात्पत्वावछिन्प्रतियोगिता कव्पवछेदस्प/ततोमच्ाताएवकास्र क्यताव छेदकावछिन सपेवपराउप स्विवति संभवेन एव कारातपाथीमताहा म्पव्व छेदरपमस यासभव ३ तिभाव:ननुखा मनादा तय तावदिन्तप्रति योगिताकाभावा देएवकार सुनक्ति: कल्नी यातत्रखुं पप्ंयसद्सम भि आाह तविभक्ति समभिव्याह तुएव कारशुतस्तसर/तथा चनो प्दर्शितानुपपत्ति स्न्रदी बमाहासां सलाहिस्वत् साननु गमार सर्थष थित्वाहि साधारएासगत स्व लसो भावात पार्थीमम व छेददादो एवकारएनानावकक ल्पनश्सता नसे।तथाचा नंतश क्िक सन पिया अदर्नितिप्रकारो नादशी यह तिभाव:।ननुएवकारस्पान्पस्मि मोगेययवछे देचनाना न किवारि मतेक धपार्थएवध नुध र साटापार धीननाहातममव छ्ेद् वोधरसंनशाह। तस्माहि साहि।यधानी लोघटोनाली सादाघट सन्ययोगव्यवछेदलनशवय ले चर् त स्थाननुगतवातश हपा नर नीले घटो नासी तादे नील घर खा स्याभावस्यप्रतीतेः छिन्नथ्ये व पार्धान्ययागला वछिन्न
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समानंचे लत्तीकाला चन्वयवादि नां था लर्यानुकूल तावृदि नेनील समान्व येनघटत्वा वद्िलाभाव:प्रतीयते। नयापार्थएवे सादिएवकारार्थन्यिकदेशमेे पार्थस्वान्वयनास सपचयो गे तस्प अव्छोदे नवयेनपा र्धान्पतादातपा वछाद:पती य तति पमुदि तमे थार्थ नतुकर्त क दर्थ आयाराश्थेक दे शआ्यया रेवर्त मानत्वा न्वयसवी कारे मरन मनेपदार्ध:पदार्ध नान्वेति नतुप दुार्थि क देशेनेतिमु त्पत्ति से को चएव दोवः। व्यापाराभय योतत स्पुनाना शकचनानतज किक लनाबसतगइसतस्ाए समानचे तित्तिथाचार मातहम ह तित्वे नेवलू ताना करिवादिना पिकर्तक हर्थक साभ्रथकद श्रेहतीवर्नेमान त्वादरन्वयास पगमे:पहर्शित सुसततिमगःवर्तकतःदती भाष्र येवत्र किध्याचीका र।नंतन कि कल्पनाप्रे स मोव उपम ु पेया मत इ यपी ति भाव:1ननुभार मोतक्तक वा तोर्थी पारतदाखय यो: त्रा काते प्युन्पत संयुत्ता तादाव पित धेववत्रव्मत या युत्तधा नो: के सर्मकल्वा
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व्यापारविर हिशयषिम हीरू हादौन सज्यनेसं युक्त स सादिय्यवहाशनूनसंयोगवतमा त प्रतीने पत्तिःप्रसयोपनीतधातवर्थानुकूल म्ापा रज्न्पफलशालित रूपवार्मत्वस्पतत्तवुक्षादीसंभवाहिसपत श्राहाघात्वर्थसादि। तथाचतत्रंप्रसयस व्यापारार्थ कत्वेतथा विधम्मापा २विरहिशिवक्षेताप्रस योपपत्तिरितिभाव: नतु क दषवदात सं योगाहिरूप व्योपारस्पतत्रह् साद सर्वदास लेनतत्रतथा विध व्यापारविशहएवा सिदधतिसंयुन्पत इसादाप्रसय एव म्राया रार्ध कवनोक्ानुपपत्तिश्तो हुष रग तरमाहा सया गमचप तीतेक्ा मात्र पद्दन व्यापारमवुछह-। तथा सति तत्र व्यपारस्पा पिवाधस्पा दितिभावनस्वर्मकलमिति।वोपा रस्पप्रसया पनीतत्वाभा वे प्रत्योघनीतुता घजावायार जन्पफलशालितव रूपकर्मत्वस्मत्त्रका टमभा वालुसकर्मकत्ु मितरिभावः ननुघता दापाराथक. लेभावेद्यननसनुश्ञासन विरोध:तादशानुशासनन द्यजःप्रयोगसाधुत मत्र प्रतीतेरतसराह। सं नतत्रप्सयस्यव्यापारवा चितेनसकर्मकरलं सयोगइतादाथालर्थमानरप्रतीतेघेयोग 9 साधु तामात्रलमित्तिमंड न म ता नु
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पचती सा दौ पा कानु कू लय लानभ व प्रसंगातू फूला मुक लाट पुनस पिपचती सादेविभागानू पूवसयो गाि: ति लन् लादानपत्पजनिति प्रयोग सगा तलानुकू लतततव्या चार विशेष्व शि.टी. योगइसादा वितित थाचता हुमानुशासतंस्छ लाभि प्राय क मितिनदोषइ तिभावःतवे सादि।तन् लक्ष 42 रायातादृश्ानुभवोपपादनेतुलायवाद्य ेवमवारमयात्ा छेदकयुक्र मितिभावमन मनेदो बातरमाह।फलेति/तथा चपालानु कुल साधर एा व्यापा रा भा वव ति भ्रहस्टा दिुपुसा धारणा व्यापारव तिपुरुष पचती सादि प्रयोगप्रसे गोमंडन मतेड वी सति भावत नन्वसाधारसाजनक नाथ यव्मापारस्ारम्यातार्थ लेनो कदोयरसत तरराह विभा गारीति । लति रष्ापतिसभवति इसतानि छलादाविसुता।प्राभाकरमनमुपसस्प नत्र रषसाामाह। तत तत्रे साहिना। तत्रतन्। गछ ती साद। तत्तरफ लतिास योग विभागादी सर्थ: क्व विदाभथत्वादि कर्मपी तिभा वोरम्ात तवू ल आ्ाम्म्रयत्व दिशी रात वानक चिहिति।प्रपंगाहि ति/लक्षरादिनातादृ श्ञानुभवोपमाहनेतुलाघवसवरणीकररत। शवधालर्थःसवत्रधालर्थामयत्तमेव कर्तलसखव्यावर्तमान लादिक के विदाडमप्पा र्यातार्थ इति गुरुमत्तम चिता हशय लानुभवप्रसंगादनुपादेयममतति इस्ारव्पातयादः
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भांशिरी.यत्वारितिभावः॥। इतिशरीरयु हेवमहदिरवितारवातवादटिप्पशीक्ष मासा।।
राम