Books / Bhrigu-Prashna

1. Bhrigu-Prashna

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श्री गणशायनमः क तात्कालिक भृगु प्रश्न

-: अर्थात :-

प्रश्न कल्प वृत्त

-: जिसको :-

पं हरदेव सहाय मेरठ निवासी ने प्राचीन पुस्तक से देश भाषा में अपनुवाद करके पुस्तक बतलाने वालों के लभार् ग

-: प्रकाशक :-

पंडित लक्ष्मीभृषण शिवभरोसे

ज्ञान सागर प्रेम, महोजन पाड़ा

मेरठ -शहर।

मूल्य प्रति पुस्तक तीन रुपये

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ज़रूरी सृचना १-इस पुस्तक से प्रश्न बतलाने वालों को ईश्वर चाहे तो शीघ्र लाभ होने लगता है इघर प्रश्न बतलाने आरभ्भ करो उघर दक्षिया बटुवे में डालना शुरु करलो भैया अरब् ईश्वर चाहे तो प्रश्न बतलाने वालों के गहरे हो जायेगे और पुस्तक तो खरीदे ही होंगे परन्तु ऐसी पुस्तक एक ना मिली होगी। २-यह बात ध्यान में रखनी चाहिये कि इस पुस्तक से मो स्त्री या पुरुष प्रश्न बूझे तो शुद्ध चित्त से प्रथम पुस्तक की पूजा श्रद्धा प्रमाण फल फूल या मिष्टान दक्षिणा से करे खाली हाथ प्रश्न बूझना और बताता दानों को ग्रशुभ है। ३-नीति शास्त्र में कहा है परिडत के पास गणिका के पास वैद्य के पास बहन बेटी अर्थात् मान ध्यान के पास किसी कार्य को जाय तो खाली जाने से ग्रशुभ है कार्य की सिद्धी नहीं होती है। ४-इस पुस्तक से जरूरी कार्य जो जो प्रश्न हैं मो बूझो परन्तु परीक्षा या पुस्तक का इम्तहान लेने के वास्ते जो प्रश्न बूझे और बतलावेगा उन दोनों के वास्ते तशुभ फल जानों। निवेदन इम पुस्तक का सर्वाधिकार एक्ट २५ सन् १८६७ के अ्रनुकूल यन्त्राधीश प्रकाशक के श्र्ाधीन संरक्षित है इसलिये यह पुस्तक कोई महाशय बिना प्रेसाध्यक्ष की त्राज्ञा के नछापें।

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(ग) 2 7

प्रश्न बताने की रीति इम पुस्तक मे प्रश्न बताने की बहुत सुगम यह रीति है प्रश्न बृझने वाला शुद्ध चित्त से हाथ पैर धोकर जब प्रश्न बूझे तो फून, पान, दक्षिणा लेकर यवे तब उमको पूर्व को मुख करके बठलावे और उससे कहै कि भृगु जी महाराज का ध्यान घर कर जो जो प्रश्न तुम्हें बूझने हों अपने चिन्त में मोचलो जब वह सोचले तब उससे विष्णु भगवानका श्ोराधन करा कर कहै यह जा प्रश्न चक्र है इसके किसी कोठे में अक की संख्या पर उंगली धरो जब वह उंगली घरे तो उंगली धग्ने वाली संख्या में प्रच्छक के नाम के श्रक्षर और भुगु जी क नाम के तक्षर गिन कर जोड़ लो फिर श्रक्षर जोड़ने से जो संख्या हो बम उसी तक संख्या का पत्रा अर्थथात् पुस्तक का वही (पृष्ट) खोल कर प्रश्न पढ़ कर प्रच्छक को सुना दो ईश्वर चाहे तो वही प्रश्न निकलेगा जो प्रच्छक ने विचारा है यदि प्रश्न कम मिले तो फिर श्रक्षर ठीक ठीक समझकर जोड़ो प्रच्छक फन सुना दो।

आपका शुर्भचिंतक- पंडित लक्ष्मी भृषण शिव भरोसे ज्ञान सागर प्रेस, महोजन पाड़ा मेरठ - शहर

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प्रश्न चक्रम

१ 2 3 ४ ५

११ १२ १३ १५ १६ १७ 20

28 22 23 26 24 28 २130

38 32 ३३ 38 ३५ ३६ 135 ३६

88 6.2 3

५१ ५2 Y3 ५४ 父 で ६०

६१ ६२ ६३ ६४ ६५ 33 ६६

62 63 68 by

72 T3 ८५ ६०

६३ ६४ ६५ 300

१०१ 802 803

१११ ११३ 888 996 ११६ 820

१२१ ?24 १२३ १२४ १२५ 328 826 $28 220

838 १३२ ₹33 938 १३५ १३६ १३७ १३८/१३६ 880

१४२ 883 ९४५ १४६

९५१ १५४

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  • श्रीगऐोश्ञायन: ह प्रथ हरदेव का तात्कालिक भृगु प्रश्न भाषा पर्थात प्रश्न कल्पवृक्ष।। हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है जो हो गया सो हो गया त्रपब खुशी की वार्ता होने वाली है खोटे दिन बीत गये श्रेष्ट त्राने वाले हैं तराराम होगा कार्य सफल होगा जिमकी चाहना है वह मिलेगा तर यह जो तुमने चित्त में काम विचारा है देर से होगा दिन तुमको बहुत दिनों से मध्यम चल रहे हैं मर्जी के माफिक ल'भ नहीं होता है। नेष्ट दशा में रंज क्लेश पीड़ा गप्त चिंता शत्रुता होती है सो अपनी रास पर जो दो तीन ग्रह नाकिस हैं उनका दान म्त्र जाप कराने से घर में आानन्द तरर मंगला- चार होगा और जीव की प्राप्ति होगी। यात्रा से लाभ होगा कार्य सफल होंगे ुप्त प्राप्ति होगी तुम्हारे शरीर पर व्रण यानी फोड़े फुन्सी का निशान है तरलस्य रहता है नई नई बात का चिंतवन करते हो।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न २

हे प्रच्छक तुम को पिछले दिन बहुत नाकिस फिक्र से गुजरे औरर खर्च विशेष होता रहा नाभ मध्यम होता था सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा ब्याधा और रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होगा चित्त की चिंता चित्त में समा जाती है। समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं सो वृथा जाती हैं। एक जीव में चित्त बहुत अधिक रहता है। अब ईश्वर चाहे तो कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान और सुबह शाम शिवजी का भजन किया करो औ्रर यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई अब राख रही कोई काम काबू से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरासा करो काम में सफलता शीघ्र प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृयु प्रश्न 3 2 हे प्रच्छक तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। प्रथम दशा न्यून थी, अब दशा श्रेष्ट त्रप्राने वाली है। जीव की चिंता बनी रहती है। त्रर लाभ का उद्योग विशेष सोचते हो परन्तु लाभ अधूरा होता है। और यह जो तरप्रव फिक्र है तर्प्रौर खर्च सा दूर होगा। आ्रराम होगा गुप्त वो भी मिलेगा सफलता प्राप्त होगी कष्ट नष्ट होगा। कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पञ्चाङ्ग में देखो सा अब उन ग्रहों का उपाय विधि पूर्वक पंडित से कराओ्रप्रो। औरर विनादान के कार्य सिद्ध देर मे होगा। इस कारण चावल, मिष्टान, स्वेतवस्त्र, रजनित, अर्थात श्रद्धा प्रमाण चांदी दान का करना बहुत श्रेष्ट मन की कामना पूर्ण होगी अचानक लाभ की सूरत बनने वाली है चित्त स्थिर करके किसी काल ईश्वर का भजन किया करो प्रश्न श्रेष्ट है अन्जाम कुशल है तीर्थ यात्रा श्रेष्ट है

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ता्कालिक भृगु प्रश्न ४

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है कार्य त्रधीन से बाहर अर्थात काम काबू से बाहर है चिंता कष्ट कई जीव शत्र ता गुप्त करे हैं परन्तु उनसे कुछ हो नहीं सकता एक जीव में चित्तबहुत रहता है दशा मध्यम के कारण त्र्प्रनेक प्रकार की हीन वार्तालाप सोचते हो समुद्र की लहर सी उठती है नई नई बात का चिन्तवन होकर निर्फल होता है कई फिक्र भारी लगे हुचे हैं जीव की प्राप्ति होगी सफ ता प्राप्त होगी और चंगा होगा और यह जो तब चिंता है सब द्वर हो जायगी पीत दान करो चने की दाल हल्दी पेला वस्त्र पेले पुष्प स्वर्ण श्रद्धानुसार पप्त चिंता दूर होगी कार्य में सफलता होगी मनबांछित फल प्राप्त होगा दशा न्यून के कारण फिक्र रहता है गृह में क्लेश होता है रब दशा श्रेष्ठ त्राने वालो है यह कार्य होकर नवीन कृत्य करोगे।।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५ 7. हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न चिंता रूपी कष्ट का है खर्च विशेष होगा जीव की लालसा जीव चिंता बनी रहती है तरह तरह के उदवेग चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है दूसरे आदमियों को भी बहुत फिक्र है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं परन्तु अभी कार्य में विलस्ब है कामना पूर्ण तो होगी परन्तु पाप ग्रहों का पूजन विधि पूर्वक बटुक भैरव का मन्त्र भी जपवात्ररो (मंत्र) उों ऐ हीं श्रीं बटुक भैर्वाय आपदुद्धारणाय सर्वविध्न निवारणाय ममरक्षा कुरु कुरु स्वाहा। इस मन्त्र के जाप से मनो- कामना पूर्ण होगी और यह जो चित्त को दीर्घ चिंना हैं सो काम होगा और मिलेगा खर्च विशेष है एक जीव में चित्त भी बहुत रहता है लाभ अधूरे होते हैं नई नई वार्ता का चिन्तवन रहता है परन्तु अन्त में कुशलता है॥

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ६

हे प्रच्छक तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की वार्ता होने वाली है मिलेगा मर्जी के माफिक कार्य होगा चित्त उस बिना व्याकुल सा रहता है दशा न्यून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्च अधिक हो रहा है जीव का दुख रहता है काम दवमरे के काबू में है बनता बनता रुक जाता है और दो तीन ग्रह तुर्म्हारी रास पर कैड़े हैं पंचाङ्ग में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थिर चित्त करके पंडित जी से करातरप्रो उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा त्रर यह जो फिक्र है सो दूर होगा और कई फिक्र खर्च के त्ररा रहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी प्राप्ति होग परन्तु विलम्ब है पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गुप्त लाभ होगा तरब अन्जाम अच्छा दीखता है कार्य में भी लाभ होगा अ्गर हो सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो।

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सात्कालिक भृगु. प्रश्न ७

इस समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठीक बैठेगा या न बैठेगा इज्जत का भय हो जाता है ऐमी दशा में गवन भी होता है गप्त चिंता रहती है कभी चित्त में कुछ आता है कभी कुछ आता है ऐसी दशा में खर्च विशेष होता है एक गुप्त मनोर्थ है सो कब तक आराम होगा सो तरप्रब न्यून दशा बीचने वाली है और श्रेष्ट त्रराने वाली है परन्तु काम में देर है। इष्ट देव को पृजन करना चाहिये पित्रों के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ट है कई महीने से भाग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति होगी तरर जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो अब बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के माफिक होगा काम काबू से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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तात्कालिक भृगुप्रर्श्न ८ 2227 हे प्रच्छक तुम्हारी रास पर तरराजकल कई ग्रह नाकिस हैं पञ्चांग खोलकर देखो जब ऐसे ग्रह रास पर आाते हैं तो लाभ कम होता है शत्रु उत्पन्न होते हैं मित्र व प्यारों से जुदाई होती है कष्ट और रंज होते हैं त्रमदनी होती हंती रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो अधूरा होता हैं एक जीव लालसा की आस लगो रहती है व्यय दीघ लाभ मध्यम होता है काम होने को हो तो फिर तार भंग हो जाता है सो अबे मध्यम ग्रहों का दान जाप करात्र आप भी यह मंत्र जपो उों ऐं हीं कीं श्रीं वासुदेवाय नमः बटुक भैरवाय ताप दुद्धारणाय मम रक्षा कुरु कुरु स्वाहा दान मंत्र जाप करने से यह जो तुम्हारे मन की कामना है पूर्ण होगी प्राप्ति होगी कष्ट दूर होकर पुत्रोंका लाभ होगा राज्यसे सफलता मित्र से प्रीत विशेष इतने उपाय न बनेगा दशा मध्यम रहेगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १

हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न, किया है अरब दशा श्रेष्ट तराने वाली है कामना पूर्ण होगी जो काम चित्त में धारण करा है वह सफल होगा चिंना दूर होगी मनो कामना पूर्ण होंगी मित्रों से प्रोन होगी कष्ट पीड़ा नष्ट होगी जो कार्य चित्त में विचारा है काम ठीक बंठेंगे दशा बहुत दिनों से मध्यम चल रही थी व्यय विशेष हुवा जोव की प्राप्ति होगी ऋण की न्यूनता हो प्रश्न श्रेष्ट है उद्योग व उपाय पहले तुमने बहुतेरे करे पर निर्फल गये काम काबू से बाहर है पर तरप्रब ईश्वर आनन्द खुश ख़बरी की वार्ता करेंगे गुप्त लाभ होगा यह जो प्रश्न विचारा है इसके वास्ते श्री देवी दुर्गा लक्ष्मी का पूजन करात्र्प्रो चावल चांदी स्वेत वस्त्र स्वेत फूल का दान कराओ। तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं सो उनका उपाथ करने से शीघ्र मन की कामना पूर्ण होगी और मन में एक जीव का ध्यान रहता है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न 2 हे प्रच्छक तुम्हारा काम काब से बाहर है और धन का व्यय विशेष है त्रकस्मात् यह मामला है और जीवकी चिंता बनी रहती है औरर आदमी को भी चिंता बहुत है इज्जत का खूयाल है बड़े २ खर्च दीखते हैं तरर तुम परोपकारी सत्य वार्ता को पसंद करते हो छल छिद्र के काम को पसंद नहीं करते तुम्हारा प्रश्न जीव और धन का है और इज्जत का भय होता है अ्रनेक प्रकार की वार्ता सोचते हो पर निर्फल हो जाती है पता नहीं लगता जतन भी करे अव नवग्रहां का दान मंत्र जाप करात्र यह काम ईश्वर "चाहे तो ठीक होने वाला है और आदमी भी सहायता करेंगे कई शत्रु हैं ग्रह इष्ट देव का पूजन जाप कराने से मनोकामना पूर्ण होगी और मिलेगा वंश की वृद्धि होगी जीव की प्राप्ति भी होगी और लक्ष्मी का चमत्कार भी प्राप्त होगा और तराम होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न करने का यह मामला है स्वर दुस्वभाव है घर में चमत्कारी हो क्लेश आदि मिटे व्याधा टले जिसका प्रश्न है वह चीज मिलेगी या न मिलेगी मंगलाचार कब तक होगा लाभ खुशी कब तक होगी ऐसी दशा कब तक रहेगी जीव की चिंता रहती है वंश की वृद्धि हो आाजकल तुम जो सोचते हो कुछ उसमें होता है कुछ दो तीन ग्रह रास पर नाकिस आरहे हैं सो उन का उपाय दान पुएय जाप कराने से चित्त का मनोरथ सिद्ध होगा खुशी प्राप्त होगी काम पराये आधीन है अब तुम चींटीनाल जिमाओ्ररो श्रेष्ट है भृखों को भोजन दो कार्य सिद्ध होगा दशा उतरने वाली है मनोरथ पूर्ण होंगे त्रनेक प्रकार की लाभ की सुरत और यह जो ऊपर से फिक्र दीखते हैं सो सब कांटा सा निकल जायगा दशा मध्यम है

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सात्कालिक भृगु प्रश्न १२

इस समयजो आपने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद्ध होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग साचार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चांदना हो आरराम हो कब तक दिन कैड़े हैं गुष्त लाभ भी होगा यह भगड़ा कब तेक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन अच्छे त्ररावेंगे ब्राह्मण को दही लडइ मिप्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी तर तुम्हें अपने इष्ट देव का पूजन घर में पित्र पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से तबके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे शत्रु रूपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई - २ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निर्फल हो जाती हैं लेकिन अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तालालिक भृगु प्रश्न १३

इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यिति धन न्यूनं दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य दृष्टयः ग्रहपीड़ो च प्राप्नोति भृगुणा परिभाषितः मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता कब तक पूर्णं होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी त्रराज कल दिन नाकिम हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य अब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुरहारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पत्रा देखो नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप छाया दान कराने से अब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से बाहर है मामला ईश्वर के आधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में और है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा अन्त में अच्छा है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १४

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंना का है कार्य पराधीन काबू से बाहर हो गया बहुतेरे यत्न करते हा बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार विद्या की सिद्धि धन की जीत श्रेष्ट दशा में होती है अव जो तुम्हें यह चिन्ता बनी है और लालसा जाव की है सो काम में विलंब है परन्तु मलेगा औरर सफल होगा अ्रतः जतन उपाय से इच्छा पृणं होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं आराम की सूरत होगी जीव प्राप्ति होगी इज्जत का काम हो संदेह मिटेगा धन का मनार्थ पूर्ण होगा देवी का पूजन कराओ और अपने हाथ से वृत खांड चावल चांद का दान करो इश्वर चाहै तो उपाय करते ही इच्छा पूर्ण होगी औ्र्रौर तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो तसत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि घृणा करते हो

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १५

हे प्रच्छक चित्त चिंता भविष्यति गृह क्लेश न संशयः धनमानम हानि पीड़ा देह दीर्घता मंगलाचारक योगं वंशवृद्धि च प्राप्तये राजद्वारकं न्याय धन हानि विलम्बता इस प्रश्न का फल यह है तरह २ को वार्ता लाभ की सोचते हो काम काबू से बाहर दशा कई महींने से मध्यम है न्यून दशा में धन हानि विशेष व्यय लाभ मध्यम चिंता और क्लेश नुकसान होते हैं राजदवार में भ काम मर्जी के माफिक नहीं होते सो काम कब तक होगा जो घर में चादना और चमत्कारी हो वंश की और इज्जत की वृद्धि हो औरर वह मिले एक जीव में चित्त विशेष रहता है सो शिवजी का पूजन करना चींटीनाल देना श्रेष्ट है और अपने हाथ से गुड़ गेहूं लाल वस्त्र लाल पुष्प आदि दान करके किसी ब्राह्मण को दो ईश्वर चाहे तो अब काम शीघ्र ही बन जावेगा और कामना पूर्ण होगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १६ 2 हे प्रच्छक गुप्त चिंता शरीरेन धन हानि च दृश्यते ग्रह पीड़ा मविष्यति दृश्यते भांग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगला चार हर्षकं धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्तये इस समय दुस्वभाव स्वर है इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगलाचार राजद्वार में न्याय किसी प्यारे की चिंता विद्या का लाभ रोजगार क्रत्य पीड़ा का यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारी रास पर आजकल नाकिस चल रहे हैं पत्रे में देखो नाकिस हैं या नहों जरूर हैं इन नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप कराओ जिससे भाग्य की वृद्धि का ताला खुले और उच्च पदवीं प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगलाचार के कार्यों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्र हो अंजाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त हागा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३७

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव रूप लक्ष्मी का है चिंता दीर्घ है और स्वर दुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शेका तलग हो जाना और दूसरा रोजगार मध्यम होना चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की जालसा बनी रहती है जनन भी करते थे परन्तु वृथा चले जाते थे चिंता और इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है अब के भी काम होगा अथवा नहीं सजद्वार की उच्च पदवी की आाशा हे अब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आरधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भाग्य उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है तपरब तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगीं। कई ग्रह रास पर कैड़ेंहैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट और बाधा नष्ट होकर लाभ की सूरत अच्छी बनेगी वह मिलेगी

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नातकालिक भृयु प्रश्न १८

हे प्रच्छक दीर्घचिंता च प्राप्नोति जीव प्राप्ति न दृश्यते भयभीत हृदा पराधीनोपि क्रत्यया राजद्वारकंकार्यं धनव्यय भविष्यति त्रन्तकार्य महा सिद्धि भृगणापरिभापतः । तुम पर बहुत दशा न्यून थी। अनेक प्रकार के फिक्र, जीव चिंतो और धन का जाना तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में सत्पर लगा रहता है। नई नई वार्ता लाभ के लिये सोचते हो परन्तु वृथा चली जाती है अब रोजगार की सूरत होगी यह जो जीव की लालसा बनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलंब है देर से विजय प्राप्त होगी काम में लाभ होगा छाया दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्ए दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी और दूसरा लाभ का कार्य भी सिद्ध होगा काम देव की उनमत्तता में नीच बुद्धि हो जाती है सो ग्रह का प्रभाव है अन्त में कुशलता है। और भूमि का लाभ भी होगा।

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तात्कालिक भृपु प्रश्न ११ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा काम काबू से बाहर है दिन रात विचित्र तरह २ की वार्ता और लाभ सोचते रहते हो बनकर काम की त्र्रानन्द की सूरत मध्यम सी हो गई है ऐसी त्वस्था में गुप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथाधन का चI जाना और मित्र का ख़्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याघा हो खोटी दशा में बहुत बातों का ख्याज होता है तुम पत्तियों को त्रन्न बाजरा भोजन दो और श्री बटुक भैरव का पृजन करात्् यह मंत्र जपो उों ऐं ही क्लीं श्री विष्णुभगवान मम अपराध क्षमाय कुरु कुरु सर्व विध्न विनाशाय ममकामना पूर्ण कुरु कुरु स्वाहा। मंत्र के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ट होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार मं विजय होती हे गई हुई लक्ष्मी फिर वापिस आती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शांति प्राप्त होने लगते हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न २० 7 हे प्रच्छक तुम्हारा काम बन जायगा स्वर दाहिना चलता है इस समय के प्रश्न का यह फल है कि चिंता और फिक्र मिटेगा गई सो गई तररब राख रही जिसने उत्पन्न किया है वही विजय करेगा और जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से लाभ होगा खुशी होगी घर में मंगलाचार होगा एक मित्र में विशेष मन रहता है वह तुम्हारे आधीन रहेगा भूमि लाभ होगा दशा बहुत दिन से मध्यम चल रही थी अब दशा बदलने वाली है कामदेव की प्रवलता में न्यून बुद्धि हो जाता है तब जो तुम्हारी रास पर ग्रह मध्यम चल रहे हैं उनका दान निश्चय करके करातरपर उसके बाद में सर्वसिद्धि होगी। काम होता २ रुक जाता है शत्रु हानि करते है काम और के तधीन है कई आरदमियों से मिलके काम होगा तब दशा अच्छी आने वाली है यह जो और काम है सो उस कार्य में भी विजय प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न २१

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम मालूम होता है ऐसी अवस्था में पुत्र की लाभ सगाई रोजगार मध्यम दशा में मुशकिल होते हैं अथात् होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान और धन हरणा होता है राजद्वार से सफल होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है त्रर गप्त शत्रु भांजी मार देते हैं एक मनोर्थ बहुत दिन से सोच रक्खा है ईश्वर चाहे तब हो तब इष्टदेव औरप्रर घरके पित्रों के निमित्त कुछ जप दान आदि कराओ जिससे मनोर्थ सिद्ध हो जिसकी चाहना है वो मिले जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में अधिक लाभ होगा और राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मङ्गल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न २२

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न उत्तम श्रेणी का है जिससे तब तुम्हारा मनोर्थ सिद्ध होगा। श्रेष्ट दशा आरने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ, अन्न से लाभ और जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, य्षेत्रा में लाभ औप्रौर मन का मनोर्थ मी सिद्ध होगा तरब तुम्हारी रास पर दो ग्रह नाकिस और बाकी हैं पत्रा देखो उनका उपाय जरा और श्रद्धा से करा दो त्र्प्रौर शाम को और चींटीनाल जब तक बने जिमाया करो दशा उत्तम आरने वाली है पिछूजे दिन बहुत फिक्र से बीचे सो अब तुम उपरोक्क कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे तरप्रास पूरी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चत्त विशेष कर रहता है उसमें भी सफलता प्राप्त होगो सो आनन्द में बीतेगी कामदेव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून भी हो जाती है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न २३ 7 हेप्रच्छरक अब क्या फिक करते हो तुम्हें खुश खबरी प्राप्त होने वाली है गई सो गई अब राख रही तब बहुत देगा वह मनोर्थ पूर्ण होंगे परन्तु एक फ़िक्र भारी दीखता है ऊपर से खर्च आवे है औरर पास धन विशेष नहीं दीखता परन्तु चिंता मत करना क्यों कि तुम्हारा काम बड़ी इज्जत के साथ बनेगा और कई जगह से लाभ होगा करने वाला तर है वही फिक्र कर रहा है तप्रब विशेष लाभ की सूरत होगी मित्र में चिन बहुत रहता है वो भी चित्त से प्यार करे है त्ररगर तुम शीघ्र इस काम की सिद्धि चाहते हो तो श्री गंगा जी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमात्ररा औरर सट्टी चावल दही दान करो जिसके करने से तुम्हारा काम शीघ्र सिद्ध होगा औरर गुप्त लाभ होगा घर में चांदना होगा और एक काम तुम से गुप्त से गुप्त नाकिस बना था सो भी नष्ट होगा सो ईश्वर का ध्यान रक्खा करो कुशलता रहेगी

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तात्कालक भृग. प्रश्न २४

हे प्रच्छक तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लाभ की सूरत में हानि पंदा होगई गप्त शत्रु बुराई करते हैं तब एक और खुशी की बात तुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन माल का निकल जाना पीड़ा का घर मेंबास होना इज्जत का भय होना हुवा हुबाया मंगलाचार का हट जोना औरर राजद्वार की चिंता होनो यह सब बात नाकिस दशा में होती हैं तब तुम सायंकाल को वृत का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो और जलका लोटा भर के शिवजी को औरर पीपल पर चढ़ाया करो और इतवार को ब्राह्मण जिमाओ्र अथवा वृत किया करो कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पत्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यून हो जायगा जो उपरोक्क कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्णं होगी और कुशलता प्राप्त होगी।

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तात्कालिक भृय प्रश्न २५

हे प्रच्छक अब तुम्हारे खोटे दिन व्यतीत हो गये। अच्छे आने वाले हैं तब तक तुम पर बहुत नाकिस दशा चल रही थी। नाकिस दशा में ही ऐसे काम होते हैं। जो फिक्र तुम पर है। बहुत नुकसान उठाया और लाभ कम रहा पीड़ा रूपी क्लेश में धन खर्च हुआ और चीज निकल गई। इज्जत का भय हुवा परन्तु तुम्हें तब अपने इष्ट देव का पूजन पितृ पीड़ा का जतन और क्रूर ग्रह का दान निश्चय करके कराना चोहिये। फिर यत्न के कराने से तुम्हें जल्दी और नये लाभ होंगे। जीव की प्राप्ति होगी मित्र से मुला- कात जो है विशेष होगी ग्रह की पीड़ा नष्ट होगी। शत्रु का नाश होगा और ये जो मन की कामना सो पूर्ण होगी और बड़े २ फिक्र जो ऊपर से खर्च के दीख रहे हैं। सो सब आनन्द में कांटा सा निकल जायगा कुशलता प्राप्त होगी, काम सिद्ध होगा।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न २६ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा इस समय का प्रश्न बहुत श्रेष्ट दीखता है बुरे दिन गये और तच्छे आने वाले थे सो तुम्हारी रास पर दो तीन ग्रह मध्यम आ गये हैं और तुमने उनका दान जप कराया नहीं है इस कारण ऐसे फिक्र चिंता उठाई लाभ कम रहा खर्च विशेष है पीड़ा की चिंता चित्त में, भयसा होना, काम उम्दा लाभ का अभी नहीं बना, जीव की चिंता है, वंश की वृद्धि और मंगलाचार होना एक अपना प्यारा है उसी में चित्त बहुत रहता है राजद्वार का चता है अब छाया दान और चने की दाल पेला वस्त्र हल्दी स्वर्णदान श्रद्धानुसार कराना चाहिये ऊपर के दान पुन्य के कराने से ईश्वर चाहे तो मन की. कामना पूर्ण होगी उच्च पदवी मिलेगी जीव की प्राप्ती होगी लाभ का रास्ता खुलेगा भूमि से लाभ और पीड़ा नष्ट होगी और राजद्वार से भी काम में सफलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृयु प्रश्न २७ 172272272222 हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न मध्यम है त्भी तुम्हारी मर्जी के अनुसार काम होने में देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं तगर कभी कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गप्त है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगला चार में देर है एक जीव की भी अभिलाषा है अप्रब तुम नवग्रह का पूजन दन करो उसके कराने से दशा न्यून बदलेगी श्रेष्ट आरयेगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लाभ होगा गई हुई चीज फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से काम सिद्ध होगा ग्रप्त चिंता मिटेगी चित्त में त्र्प्रनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्तकी वार्ता चित्तमें समा जाती है तब शीघ्र ही खुशी की वार्ता सुनने में आर्रावेगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५२८

हे प्रच्छक जब दशा जीव पर नाकिस त्राती है और नाकिस ग्रह चौथे आठवे बारहवें में हो जाते हैं तब ऐसे ही काम होते हैं। खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है और एक जीव का बहुत ध्यान रहता है सो आराम मिलेगा और हाथ से निकला हुआर धन दैर से प्राप्त होगा। जिस काम को करना विचारते हो, सो समझ कर करना अभी भाग्य उदय होने में किंचत विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढ़ेगी और नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की रास पर कैड़े हैं उनका पत्रा देख कर यत्न करात नहीं तो विशेष क्लेश होगा दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें आराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा। विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूलो मत।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न २१

हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि भ्रमण रहती है। ईश्वर को सत्य नहीं मानते हो जिसने इतना बड़ा किया है और बराबर रत्ता करी है सो वह कहीं चला नहीं गया है बराबर रक्षा करेगा उसका भजन किया करो अरन्त में आशा पूर्ण होगी और गई सो गई अब राख रही और वो मिलेगा मौजूद है चिंता मत करो आराम की सुरत होने वाली है एक काम में विशेष लाभ होगा परन्तु तब मंगल के ब्रत किया करो और पत्तियों को बाजरा भोजन डाल दिया करो बड़ा पुन्य का काम है क्रूर ग्रहों का 万 西 行 印 जप दान कराते रहा करो ऐसा उपाय कराते रहने से मन वांदित फल मिलेगा। कार्ज सिद्ध होंगे जो बड़े खर्च के काम समझ रक्खे हैं वोभी कांटा सा होकर आनन्द में निकल जायगा काम देव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून हो जाती है चिंता न करो उसने चाहा तो शीघ्र ही कुशलता प्राप्त होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३० 7 1 हे प्रच्छक तुम्हारे इस समय के प्रश्न का यह फल है कि तुमने जो प्रश्न विचार है सो काम सिद्ध होगा और लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी और आराम की सूरत नज़र आती है पिछले साल कुछ महीने मध्यम रहे खर्च विशेष रहता था औररर आ्रमदनी न्यून होती थी उसने चाहा तो अव भाग्य उदय होगा और काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो और धृत सांभर श्रद्धा अरनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे से तानन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यून बन गया सो ईश्वर भी जाने है तप्रब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी और बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगसी चित्त में उठती हैं और समा जाती हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३१

हे प्रच्छकतुम्हारे कार्य में विलंब है काम अभी ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखा सोचते हो कुछ और होता है कुछ। कई वार्ता की चता बनी हुई है। जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रूपी क्लेश की। परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने को पसंद करते हो भ्रूंट से क्रोधित होते हो पराये काम मन मे प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो। तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि त्ररकल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की भूंट सत्य का परीक्षा समगलेते हो एक काम न्यून बनगया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमात्रो ऐसा कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा तरर लाभ होगा। तुमने अपने ऊपर बड़ा जो फिक्र समझ रक्खा है सब कामआ्रानन्द में हो जायगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३२ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न शगुण इस बक्क बहुत श्रेष्ट है। तुम्हें बिना कारण दिंता फिक्र भयसा उत्पन्न हों जाता है। बुद्धि भ्रमण हो जाती है। गया सो गया फिर आयेगा मिलेगा क्या मिलेगा, आराम मिलेगा धन की प्राप्ति होगी, घर में मंगला चार होगा पीड़ा का नाश होगा जीव की खुशी और प्राप्ती होगी अकस्मात खुश खबरी सुनने को मिलेगी तुम अपने इष्ट देव मित्र देवताओरं के निमित्त वस्त्र मिष्टान्न, कच्चा दूध, मावश्या को पिलाते रहा करो इस प्रकार दान पुन्य कराने से रोजगार बढ़ेगा उच्च पदवी पाने में सफल होगे एक जीव का ध्यान बना रहता है मित्र के ध्यान में चित्त बहुत रहता है तुम्हें विद्या मध्यम है परन्तु अकल बुद्धि तेज हैं किसी का बुरा नहीं चाहते हो सत्य वार्ता को पसन्द करते हो खर्च है अन्जाम कुशल है राजद्वार से अन्त में विजय है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३३ 7 हे प्रच्छक तुम्हारे खोटे दिन गये तब श्रेष्ट तरने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रक्खा है उसे देख भाल कर सोच समभ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं त्ररब आागे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन जोप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा आयेगी लाभ की सूरत होगी तुग्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यून रहा मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है ऐसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तभ दशा आने पर लाभ अधिक होगा मित्रों से प्रीति बढ़ेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चीज वापस मिलेगी। तुम रामनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बड़ा श्रेष्ट काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३४

हे प्रच्छक इस समय तुम्हारी रास पर कई ग्रह नाकिस मौजूद हैं ऐसी अवस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, तमदनी होती २ रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो वहां पर अध्रूग भी नहीं होता है ऐसी दशा में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लालसा बनी रहती है जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बोहर है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय कराओप्र उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्चात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है दूर होगी तुम सर्दी में कम्बल अथवा गर्म वस्त्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरुर करात् यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३५

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता है। प्रश्न दो तरह के से हैं गई चीज मिलना दूसरा लाभ प्राप्ति है तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको गप्त चिंता लगी रहती है और इज्जत का विशेष ध्यान रहता है मन के माफिक लाभ नहीं होता है एक जीव में ध्यान विशेष रहता है तुम पर दशा मध्यम चल रही हे पञ्चांग में देखकर उपाय करात्र्प्रो। उपाय के कराने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा लाभ कार्य होगा तुम गऊ सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को त्रन्न मिष्टान मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रति शीघू तुम्हारी दशा बदलेगी और प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घरमें चांदना सा ।देखाई देगा अर्थात सर्व प्रकार से त्र्प्रानन्द होगा

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तात्कालिक भृय प्रश्न ३६

हे प्रच्नक़ जो हो गया सो हो गरा त्ररब तुम्हें कार्य चतुराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नासिक दशा चल रही है तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय कराओ उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ त्रौर मङ्गलाचार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यून हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रुपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पृजन किया करो बन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सब प्रकार का आ्ररानन्द होगा तम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३७ 7 7 हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है तु पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुवा लाभ कम हुआ्र अब तुमको दशा श्रेष्ट आने वाली है तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा है काम ठीक बैठेगा तुम्हारा प्रश्न उत्तम है तुमको भाग्य की वृद्धि होगी घर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की तरांशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारण तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय करात्रर उपाय होने पर शीघ्र दशा अच्छी त्र्प्रावेगी अच्छी दशा के आने पर लाभ की नई नई सूरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का वृत रक्खा करो और अनाथों की सहायता किया करो इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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नात्कालिक भगु प्रश्न ३८ 7 2 हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किमी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यून चल रही है ऐसी दशा में चिंता क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है त्रनेक लाभ कार्य संचते हो लेकिन इच्छ्रा के त्रनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता २ रुक जाता है तुमको एक जीव की चिंता भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तम्हारा दान पुरय में भी चित्तनहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये तगर जो बन सके तुम दान अवश्य किया करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय तप्रवश्य करात्र्प्रो उपाय पूजन दान पुरय करनेसे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३१ 2 हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न श्रेष्ट है जो हो गया सो हो गया तब चिंता और फिक्र मिटेगा तुम्हारा कार्य सफल होगा जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी और भूमि से लाभ होगा मंगलाचार और प्रसन्नता होगी तम्हारा एक जीव में चित्त बहुत रहता है तुम तरह २ की वार्ता का चतवन करते हो तुम्हारा चित्त चलायमान रहता है तुमको बहुत दिन से दशा मध्यम चल रही थी तरप्रब दशा बदलने वाली है तुम जो काम सोचते हो उसमें तारभंग हो जाता है गुप्त शत्रु तुमको नुकसान पहुंचाते हैं अर्थात ऊपर से तुमसे मीठी २ बात करते हैं और अन्दर से काट करते हैं तुमने एक काम बहुत दिनों से सोचरक्खा है ईश्वर चाहे तो तवश्य होगा इष्टदेव पित्रों के निमित्त दान पूजन करातप्र उपाय न कराने से कार्य सिद्ध देर से होगा पूर्णमासी को सत्य नारायण का व्रत रक्खा करो कथा कराओ इसके कराने से मनोकामना पूर्ण होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४०

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ट है तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा तुमको जीव और लाभ की चिंता बनी रहती है तुमने लाभ का उद्योग किया परन्तु लाभ कम होता है सो तब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा कष्ट व्याधा रंज आदि नष्ट होंगे। घर में खुशी होगी तुम तरह २ का उद्योग सोचते हो परन्तु। चत्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है पीड़ा की चिंता चित्त में भय रहता है काम उत्तम लाभ का अभी नहीं बना तरोर एक जीव में चित्त विशेष रहता है राजद्वार का भी ध्यान बना रहता है दशा मध्यम चल रही है उसका श्रद्धानुसार उपाय करो औरर बन सके तो शिव मन्दिर में नित्य धृत का दीपक जलाया करा सवेरे ही मन्दिर की सफाई किया करो अरथवा सोमवार का व्रत किया करो ईश्वर चाहे तो मनो कामना पूर्ण होगी बाधायें नष्ट कष्ट आरदि समाप्त होंगी उच्च पदवी मिलेगी जीव प्राप्ति होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४१

हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है जो हो गया सो हो गया तब खुशी की वार्ता होने वालीं है खोटे दिन बीत गये श्रेष्ट त्राने वाले हैं आराम होगा कार्य सफल होगा जिसकी चाहना है वह मिलेगा और यह जो तुमने चित्त में काम बिचारा है देर से होगा दिन तुमको बहुत दिनों से मध्यम चल रहे हैं मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता है।। नेष्ट दशा में रंज क्लेश पीड़ा गुप्त चिंता शत्रुता होती है सो अपनी रास पर जो दो तीन ग्रह नाकिस हैं उनका दान मंत्र जाप कराने से घर में आरानन्द और मंगला- चार होगा और जीव की प्राप्ति होगी। यात्रा से लाभ होगा कार्य सफल होंगे गप्त प्राप्ति होगी तुम्हारे.शरीर पर व्रण यानी फोड़े फुन्सी का निशान है तलस्य रहता है नई नई बात का चिंतवन करते हो।

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तात्कालिक भूयु प्रश्न ४२ 7 हे प्रच्छक तुम को पिछ्रले दिन बहुत नाकिस फिक्र से गुजरे त्र्प्रौर खवर्च विशेष होता रहा लाभ मध्यम होता था सो तब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा व्याधा औरर रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होगा चित्त की चिंता चित्त में समा जाती है। समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं सो वृथा जाती हैं। एक जीव में चित्त बहुत अधिक रहता है। अब ईश्वर चाहे तो कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान तर सुबह शाम शिवजी का भजन किया करो त्रर यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई अब राख रही कोई काम काबू से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरासा करो काम में सफलता शीघ्र प्राप्त होगी

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तातालिक भृयु प्रश्न ४३ 7 2 2 हे प्रच्छक तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। प्रथम दशा न्यून थी, अब दशा श्रष्ट आरने वाला है। जीव की चिंता बनी रहती है। और लाभ का उद्योग विशेष सोचते हो परन्तु लाभ अधूरा होता है। और यह जो त्रपरब फिन्र है तरप्रर खर्च सो दूर होंगा। आरराम होगा गुप्त वो भी मिलेगा सफलता प्राप्त होगो कष्ट नष्ट होगा। कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पञ्चाङ्ग में देखो सो अब उन ग्रहों का उपाय विधि पूर्वक पंडित से करात्र्रो। औरर पिनादान के कार्य सिद्ध देर से होगा। इस कारण चावल, मिष्टान, स्वेतवस्त्र, रजनित, अर्थात श्रद्धा प्रमाण चांदी दान का करना बहुत श्रेष्ट मन की कामना पूर्ण होगी अचानक लाभ की सूरत बनने वाली है चित्त स्थिर करके किसी काल ईश्वर का भजन किया करो प्रश्न श्रेष्ट है अन्जाम कुशल है तीर्थ यात्रा श्रेष्ट है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४४

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है कार्य त्रधीन से बाहर अर्थात काम काबू से बाहर है चिंता कष्ट कई जीव शत्र ता गुप्त करे हैं परन्तु उनसे कुछ हो नहीं सकता एक जीव में चित्तबहुत रहता है दशा मध्यम के कारण त्र्प्रनेक प्रकार की हीन वार्तालाप सोचते हो समुद्र की लहर सी उठती है नई नई बात का चिन्तवन होकर निर्फल होता है कई फिक्र भारी लगे हुवे हैं जीव की प्राप्ति होगी सफलता प्राप्त होगी और चंगा होगा और यह ज तरब चिंता है सब द्वर हो जायगी पीत दान करो चने की दाल हल्दी पेला वस्त्र पेले पुष्प स्वर्ण श्रद्धानुसार गप्त चिंता दूर होगी कार्य में सफलता होगी मनबांछित फल प्राप्त होगा दशा न्यून के कारण फिक्र रहता है गृह में क्लेश होता है तरपरब दशा श्रेष्ठ त्रप्रने वाली है यह कार्य होकर नवीन कृत्य करोगे।।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न ४५ 1. 2 हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न चिंता रूपी कष्ट का है खर्च विशेष होगा जीव की लालसा जीव चिंता बनी रहती है तरह तरह के उदवेग चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है दूसरे आदमियों को भी बहुत फिक्र है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं परन्तु तभी कार्य में विलम्ब है कामना पूर्ण तो होगी परन्तु पाप ग्रहों का पूजन विधि पूर्वंक बटुक भैरव का मन्त्र भी जपवात्रर (मंत्र) उों ऐ हीं श्रीं बटुक भैर्वाय आपदुद्धारणाय सर्वविध्न निवारणाय ममरक्षा कुरु कुरु स्वाहा। इस मन्त्र के जाप से मनो- कामना पूर्ण होगी और यह जो चित्त को दीर्घ चिंता हैं सो काम होगा और मिलेगा खर्च विशेष है एक जीव में चित्त भी बहुत रहता है लाभ अधूरे होते हैं नई नई वार्ता का चिन्तवन रहता है परन्तु अन्त में कुशलता है॥।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४६ 2 हे प्रच्छक तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की वार्ता होने वाली है मिलेगा मर्जी के माफ़िक कार्य होगा चित्त उस बिना व्याकुल सा रहता है दशा न्यून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्च अधिक हो रहा है जींव का दुख रहता है काम दवूसरे के काबू में है बनता बनता रुक जाता है और दो तीन ग्रह तुर्म्हारी रास पर कैड़े हैं पंचाङ्ग में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थिर चित्त करके पंडित जी से करातर उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा त्र यह जो फिक्र है सो दूर होगा तर कई फिक्र खर्च के त्रा रहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी प्राप्ति होगा परन्तु विलम्ब है पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गुप्त लाभ होगा तब अन्जाम अच्छा दीखता है कार्य में भी लाभ होगा अगर हो सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४७ 7 इस समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठीक बैठेगा या न बैठेगा इज्जत का भय हो जाता है ऐमी दशा में गवन भी होता हे गुप्त चिंता रहती है कभी चित्त में कुछ आता है कभी कुछ आता है ऐसी दशा में खर्च विशेष होता है एक गुप्त मनोर्थ है सो कब तक आराम होगा सो तरप्रब न्यून दशा बीचने वाली है और श्रेष्ट ताने वाली है परन्तु काम में देर है। इष्ट देव को पृजन करना चाहिये पित्रों के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ट है कई महीने से भाग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति होगी और जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो अब बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के माफिक होगा काम काबू से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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तात्कालिक भृयुप्रश्न ४८ 2 हे प्रच्छक तुम्हारी रास पर आजकल कई ग्रह नाकिस हैं पञ्चांग खोलकर देखो जब ऐसे ग्रह रास पर आराते हैं तो लाभ कम होता है शत्रु उत्पन्न होते हैं मित्र व प्यारों से जुदाई होती है कष्ट तरर रंज होते हैं तरमदनी होती होती रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो तधूरा होता है एक जीव लालसा की आस लगी रहती है व्यय दीर्घ लाभ मध्यम होता है काम होने को हो तो फिर तार भंग हो जाता है सो अब मध्यम ग्रहों का दान जाप कराओ तप भी यह मंत्र जपो उों ऐं हीं कीं श्रीं वासुदेवाय नमः बटुक भैरवाय आप दुद्धारणाय मम रक्षा कुरु कुरु स्वाहा दान मंत्र जाप करने से यह जो तुम्हारे मन की कामना है पूर्ण होगी प्राप्ति होगी कष्ट दूर होकर पुत्रोंका लाभ होगा राज्यसे सफलता मित्र से प्रीत विशेष इतने उपाय न बनेगा दशा मध्यम रहेगी

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नात्कालिक भुगु प्रश्न ४१ 2 हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है अब दशा श्रेष्ट आने वाली है कामना पूर्ण होगी जो काम चित्त में धारण करा है वह सफल होगा चिंता दूर होगी मनो कामना पूर्ण होंगी मित्रों से प्रोन होगी कष्ट पीड़ा नष्ट होगी जो कार्य चित्त में विचारा है काम ठीक बठेंगे दशा बहुत दिनों मे मध्यम चल रही थी व्यय विशेष हुवा जोव की प्राप्ति होगी ऋण की न्यूनता हो प्रश्न श्रेष्ट है उद्योग व उपाय पहले तुमने बहुतेरे करे पर निर्फल गये काम काबू से वाहर है पर त्रपरब ईश्वर आनन्द खुश ख़बरी की वार्ता करेंगे गुप्त लाभ होगा यह जो प्रश्न विचारा है इसके वास्ते श्री देवी दुर्गा लक्ष्मी का पृजन करात्र्प्रो चावल चांदी स्वेत वस्त्र स्वेत फूल का दान कराओ। तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं सो उनका उपाय करने से शीघ्र मन की कामना पूर्ण होगी और मन में एक जीव का ध्यान रहता है।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न ५० 2 हे प्रच्छक तुम्हारा काम काबू से बाहर है औ्रर धन का व्यय विशेष है तकस्मात् यह मामला है तर जीवकी चिंता बनी रहती है और तदमी को भी चिंता बहुत है इज्जत का रूयाल है बड़े २ खर्च दीखते हैं तरर तुम परोपकारी सत्य वातो को पसंद करते हो छल छिद्र के काम को पसंद नहीं करते तुम्हारा प्रश्न जीव और धन का है तर इज्जत का भय होता है त्र्प्रनेक प्रकार की वार्ता सोचते हो पर निर्फल हो जाती है पता नहीं लगता जतन भी करे अब नवग्रहां का दान मंत्र जाप कराओ यह काम ईश्वर चाहे तो ठीक होने वाला है और आदमी भा सहायता करेंगे कई शत्रु हैं ग्रह इष्ट देव का पूजन जाप कराने से मनोकामना पूर्ण होगी और मिलेगा वंश की वृद्धि होगी जीव की प्राप्ति भी होगी और लक्ष्मी का चमत्कार भी प्राप्त होगा और आराम होगा।

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तात्कालिक भमु प्रश्न ५१ l. 3 हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न करने का यह मामला है स्वर दुस्वभाव है घर में चमत्कारी हो क्लेश आदि मिटे व्याधा टले जिसका प्रश्न है वह चीज मिलेगी या न मिलेगी मंगलाचार कब तक होगा लाभ खुशी कब तक होगी ऐसी दशा कब तक रहेगी जीव की चिंता रहती है वंश की वृद्धि हो आजकल तुम जो सोचते हो कुछ उसमें होता है कुछ दो तीन ग्रह रास पर नाकिस आरहे हैं सो उन का उपाय दान पुरय जाप कराने से चित्त का मनोरथ सिद्ध होगा खुशी प्राप्त होगी काम पराये त्रधीन है अरव तुम चींटीनाल जिमात्र श्रेष्ट है भृखों को भोजन दो कार्य सिद्ध होगा दशा उतरने वाली है मनोरथ पूर्ण होंगे तनेक प्रकार की लाभ की सुरत और यह जो ऊपर से फिक्र दीखते हैं सो सब कांटा सा निकल जायगा दशा मध्यम है

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तात्कालक मृणु प्रश्न ५ू२ 7 इस समयजो आपने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद्ध होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग आाचार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चांदना हो आराम हो कब तक दिन कैड़े हैं गुष्त लाभ भी होगा यह भगड़ा कब तक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन अच्छे आरवेंगे ब्राह्मण को दही लडड मिष्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी और तुम्हें अपने इष्ट देव का पूजन घर में पित्र पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से अबके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे शत्रु रूपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई-२ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निर्फल हो जाती हैं लेकिन अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५३ 7 इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यिति धन न्यूनं दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य दृष्टयः ग्रहपोड़ा च प्राप्नोति भृगुणा परिभाषितः मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता कब तक पूर्ए होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी आरज कल दिन नाकिस हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य अब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुग्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पत्रा देखो नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप छाया दान कराने से अब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से बाहर है मामला ईश्वर के आधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में और है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा अन्त में अच्छा है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५४: 36 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंना का है कार्य पराधीन काबू से बाहर हो गया बहुतेरे यत्न करते ही बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार विद्या की सिद्धि धन को जीत श्रेष्ट दशा में होती है अब जो तुम्हें यह चिन्ता बनी है तर लालसा जाव की सो काम में विलंब है परन्तु मिलेगा और सफल होगा अरतः जतन उपाय से इच्छा पूएं होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं आराम की सूरत होगी जीव प्राप्ति होगी इज्जत का काम हो संदेह मटेगा धन का मनोर्थ पूर्ण होगा देवी का पूजन कराओ और अपने हाथ से वृत खांड चावल चांद का दान करो इश्वर चाहै तो उपाय करते ही इच्छा पूर्ण होगी श्रौर तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो असत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि घृण करते हो

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५५ 2 हे प्रच्छक चित्त चिंता भविष्यति गृह क्लेश न संशयः धनमानम हानि पीड़ा देह दीर्घता मंगलाचारक योगं वंशवृद्धि च प्राप्तये राजद्वारकं न्याय धन हानि विलम्बता इस प्रश्न का फन यह है तरह २ को वार्ता लाभ की साचते हो काम काबू से बाहर है दशा कई महींने से मध्यम है न्यून दशा में धन हानि विशेष व्यय लाभ मध्यम चिंता और क्लेश नुकसान होते हैं राजद्वार में भ काम मर्जी के माफिक नहीं होते सो काम कब तक होगा ज घर में चादना और चमत्कारी हो वंश की और इज्जत की वृद्धि हो त्रर वह मिले एक जीव में चित्त विशेष रहता है सो शिवजी का पूजन करना चींटीनाल देना श्रेष्ट है और अपने हाथ से गुड़ गेहूं लाल वस्त्र लाल पुष्प आदि दान करके किसी ब्राह्मण को दो ईश्वर चाहे तो अब काम शीघ्र ही बन जावेगा और कामना पूर्ण होगी।

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तात्कालिक भृग प्रश्न ५६ 2 7 1 हे प्रच्छक गप्त चिंता शरीरेन धन हानि च दृश्यते ग्रह पीड़ा मविष्यति दृश्यते भाग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगला चार हर्षक धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्तये इस समय दुस्वभाव स्वर है इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगला चार राजद्वार में न्याय किसी प्यारे की चिंता विद्या का लाभ रोजगार क्रत्य पीड़ा का यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारी रास पर आजकल नाकिस चल रहे हैं पत्रे में ढेखो नाकिस हैं या नहों जरूर हैं इन नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप करात्र जिससे भाग्य की वृद्धि का ताला खुले और उच्च पदवीं प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगलाचार के कार्यों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्त हो तरंजाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५७

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव रूप लक्ष्मी का है चिंता दीर्घ है और स्वर दुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शैका अलग हो जाना और दूसरा रोजगार मध्यम होना चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की लालसा बनी रहती है जतन भी करते थे परन्तु वृथा चले जाते थे चिंता और इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है अब के भी काम होगा अथवा नहीं राजद्वार की उच्च पदवी की ताशा है तरपरब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भाग्य उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है तब तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगीं। कई ग्रह रास पर कैड़ेहैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट तर बाधा नष्ट होकर लाभ की सूरत अच्छी बनेगी वह मिलेगी

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मारालिक भृगु प्रश्न ५८ हे प्रच्छक दीर्घचिंता च प्राप्नोति जीव प्राप्ति न दंश्यते भयभीत हृदा पराधीनोपि क्रत्यया राजद्वारकंकार्यं घनव्यय भविष्यति त्रन्तकार्य महा सिद्धि भृगुणापरिभापतः। तुम पर बहुत दशा न्यून थी। अनैक प्रकार के फिक्र, जीव चिंता और धन का जाना तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में तत्पर लगा रहता है। नई नई वार्ता लाभ के लिये सोचते हो परन्तु वृथा चली जाती है अब रोजगार की सूरत होगी यह जो जीव की लालसा बनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलंब है देर से विजय प्राप्त होगी काम में लाभ होगा छाया दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्ण दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी और दूसरा लाभ का कार्य भी सिद्ध होगा काम देव की उनमत्तता में नीच बुद्धि हो जाती है सो ग्रह का प्रभाव है अन्त में कुशलता है। और भूमि का लाभ भी होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५ूर

हे प्रच्छक तुम्हारा काम काबू से बाहर है दिन रात विचित्र तरह २ की वार्ता और लाभ सोचते रहते हो बनकर काम की त्नन्द की सूरत मध्यम सी हो गई है ऐसी त्ररवस्था में गुप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथाधन का च्र जाना औपरौर मित्र का ख्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याघा हो खोटी दशा में बहुत बातों का ख्याल होता है तुम पत्ियों को अ्रन्न बाजरा भोजन दो तर श्री बटुक भैरव का पृजन करात्र््र,यह मंत्र जपो उों ऐं हीं क्लीं श्री विष्एभगवान मम अपराध क्षमाय कुरु कुरु सर्व विध्न विनाशाय ममकामना पूर्ण कुरु कुरु स्वाहा। मंच्र के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ट होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार मं विजय होती है गई हुई लक्ष्मी फिर वापिस आती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शांति प्राप्त होने लगते हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ६०

हे प्रच्छक तुम्हारा काम बन जायगा स्वर दाहिना चलता है इस समय के प्रश्न का यह फल है कि चिंता और फिक्र मिटेगा गई सो गः अब राख रही जिसने उत्पन्न किया है वही विजय करेगा और जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से लाभ होगा खुशी होगी घर में मंगलाचार होगा एक मित्र में विशेष मन रहता है वह तुम्हारे आधीन रहेगा भूमि लाभ होगा दशा बहुत दिन से मध्यम चल रही थी अब दशा बदलने वाली है कामदेव की प्रबलता में न्यून बुद्धि हो जाता है अब जो तुम्हारी रास पर ग्रह मध्यम चल रहे हैं उनका दान निश्चय करके कर प्र उसके बाद में सर्वसिद्धि होगी। काम होता २ रुक जाता है शत्रु हानि करते है काम और के आधीन है कई आदमियों से मिलके काम होगा तब दशा अच्छी आने वाली है यह जो और काम है सो उस कार्य में भी विजय प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ६१

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम मालूम होता है ऐसी अवस्था में पुत्र की लाभ सगाई रोजगार मध्यम दशा में मुशकिलि होते हैं अथात् होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान और धन हरण होता है राजद्वार से सफल होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है तरर गुप्त शत्रु भांजी मार देते हैं एक मनोर्थ बहुत दिन से सोच रक्खा है ईश्वर चाहे तब हो तरब इष्टदेव और घरके पित्रों के निमित्त कुछ जप दान आदि कराओ जिससे मनोर्थ सिद्ध हो जिसकी चाहना है वो मिजे जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में अधिक लाभ होगा और राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मङ्गल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालक भूगु प्रश्न ६२

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न उत्तम श्रणा का है जिससे अब तुम्हारा मनोर्थ सिद्ध होगा। श्रेष्ट दशा आने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ, अन्न से लाभ और जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, यात्रा में लाभ औ्रर मंन का मनोर्थ मी सिद्ध होगा तब तुम्हारी रास पर दो ग्रह नाकिस और बाकी हैं पत्रा देखो उनका उपाय जरा और श्रद्धा से करा दो तरर शाम को और चींटीनाल जब तक बने जिमाया करो दशा उत्तम आने वाली है पिछ्ले दिन बहुत फिक्र से बीचे सो अब तुम उपरोक्क कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे त्ररास पूरी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चत्त विशेष कर रहता है उसमें भी. सफलता प्राप्त होगो सो आनन्द में बीतेगी कामदेव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून भी हो जाती है।

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ताबालिक भृगु प्रश्न ६३

हेप्रच्छक झब क्या फिक् करते हो तुम्हें खुश खंबरी प्राप्त होने वाली है गई सो गई अब राख रही अब बहुंत देगा वह मनोर्थ पूर्ण होंगे परन्तु एक फिक्र भारी दीखता है ऊपर से खर्च औींवे है और पास धन विशेष नह दीखता परन्तु चिंता मेत करना क्यों कि तुम्हारा काम बड़ी इज्जत के साथ बनेगा और कई जगह से लाभ होगा करने वाला और है वही फिक्र कर रहा है तब विशेष लाभ की सूरत होगी मित्र में चि बहुत रहता है वो भी चित्त से प्यार करे है अरगर तुम शीघ्र इस काम की सिद्धि चाहते हो तो श्री गंगा जी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जि त्रो और सट्टी चावल दही दान करो जिसके करने से तुम्हारा काम शीघ्र सिद्ध होगा और गुप्त लाभ होगा घर में चांदना होगा और एक काम तुम से गुप्त से गुप्त नाकिस बना था सो भी नष्ट होगा मो ईश्वर का ध्यान रक्खा करो कुशलता रहेगी

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तात्काालिक भृग प्रश्न ६४ 2 हे प्रच्छक तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लाभ की सुरत में हानि पेदा होगई गप्त शत्रु बुराई करते हैं तब एक और खुशी की बात सुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन माल का निकल जाना पीड़ा का घर मेंबास होना इज्जत का भय होना हुवा हुबाया मंगलाचार को इट जाना और राजद्वार की चिंता होनो यह सब बात नाकिस दशा में होती हैं अब तुम सायंकाल को घृत का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो और जलका लोटा भर के शिवजी को तरर पीपल पर चढ़ाया करो और इतवार को ब्राह्मण जिमाओ अथवा वृत किया करो कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पत्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यून हो जायगा जो उपरोक्त कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्ण होगी और कुशलता प्राप्त होगी।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न ६५

हे प्रच्छक अब तुम्हारे खोटे दिन व्यतीत हो गये। अच्छे आने वाले हैं तब तक तुम पर बहुत नाकिस दशा चल रही थी। नाकिस दशा में ही ऐसे काम होते हैं। जो फिक्र तुम पर है। बहुत नुकसान उठाया और लाभ कम रहा पीड़ा रूपी क्लेश में धन खर्च हुआ और चीज निकल गई। इज्जत का भय हुवा परन्तु तुम्हें तब अपने इष्ट देव का पूजन पितृ पीड़ा का जतन और क्रूर ग्रह का दान निश्चय करके कराना चाहिये। फिर यत्न के कराने से तुम्हें जल्दी और नये लाभ होंगे। जीव की प्राप्ति होगी मित्र से मुला- कात जो है विशेष होगी ग्रह की पीड़ा नष्ट होगी। शत्रु का नाश होगा और ये जो मन की कामना सो पूर्ण होगी और बड़े २ फिक्र जो ऊपर से खर्च के दीख रहे हैं। सो सब आनन्द में कांटा सा निकल जायगा कुशलता प्राप्त होगी, काम सिद्ध होगा।

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तात्कालिंक भृयु प्रश्न ६६

हे प्रच्छक तुम्हारा इस समय का प्रश्न बहुत श्रेष्ट दीखता है बुरे दिन गये और अच्छे आने वाले थे सो तुम्हारी रास पर दो तीन ग्रह मध्यम आ गये हैं और तुमने उनका दान जप कराया नहीं है इस कारण ऐसे फिक्र चिंता उठाई लाभ कम रहा खर्च विशेष है पीड़ा की चिंता चित्त में, भयसा होना, काम उम्दा लाभ का अभी नहीं बना, जीव की चिंता है, वंश की वृद्धि और मंगलाचार होना एक अपना प्यारा है उसी में चित्त बहुत रहता है राजद्वार का चता है अब छाया दान और चने की दाल पेला वस्त्र हल्दी स्वर्णदान श्रद्धानुसार कराना चाहिये ऊपर के दान पुन्य के कराने से ईश्वर चाहे तो मन की कामना पूर्ण होगी उच्च पदवी मिलेगी जीव की प्राप्ती होगी लाभ का रास्ता खुलेगा भूमि से लाभ और पीड़ा नष्ट होगी और राजद्वार से भी काम में सफलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृय प्रश्न ६७

हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न मध्यम है त्रभी तुम्हारी मर्जी के अनुसार काम होने में देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं अगर कभी कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गप्त है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगला चार में देर है एक जीव की भी तभिलाषा है अररब तुम नवग्रह का पूजन दान करो उसके कराने से दशा न्यून बदलेगी श्रेष्ट त्रप्रयेगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लोभ होगा गई हुई चीज फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से काम सिद्ध होगा ग्प्त चिंता मिटेगी चित्त में त्र्प्रनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्तकी वार्ता चित्तमें समा जाती है तब शीघ्र ही खुशी की वार्ता सुनने में आवेगी

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तात्काालक भृगु प्रश्न ६८

हे प्रच्छक जब दशा जीव पर नाकिस त्र्राती है और नाकिस ग्रह चौथे आठवे बारहवें में हो जाते हैं तब ऐसे ही काम होते हैं। खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है औरर एक जीव का बहुत ध्यान रहता कै सो आराम मिलेगा और हाथ से निकत्ता हुआ्रा धन देर से प्राप्त होंगा। जिस काम को करना विचारते हो, सो समझ कर करना तभी भाग्य उदय होने में किंचित विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढ़ेगी और नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की रास पर कैड़े हैं उनका पता देख कर यत्न करातरर नहीं तो विशेष क्लेश होगा दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें आराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा। विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूलो मत।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ६१

हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि भ्रमणा रहती है। ईश्वर को सत्य नहीं मानते हो जिसने इतना बड़ा किया है और बराबर रक्षा करी है सो वह कहीं चला नहीं गया है बराबर रक्षा करेगा उसका भजन किया करो अन्त में आशा पूर्ण होगी और गई सो गई अब राख रही और वो मिलेगा मौजूद है चिंता मत करो आराम की सुरत होने वाली है एक काम में विशेष लाभ होगा परन्तु तरपरब मंगल के ब्रत किया करो और पत्तियों को बाजरा भोजन डाल दिया करो बड़ा पुन्य का काम है क्रूर ग्रहों का जप दान कराते रहा करो ऐसा उपाय कराते रहने से मन वांछित फल मिलेगा। कार्ज सिद्ध होंगे जो बड़े खर्च के काम समझ रक्खेहैं वोभी कांटा सा होकर आनन्द में निकल जायगा काम देव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून हो जाती है चिंता न करो उसने चाहा तो शीघ्र ही कुशलता प्राप्त होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७०

हे प्रच्छक तुम्हारे इस समय के प्रश्न का यह फल है कि तुमने जो प्रश्न विचारा है सो काम सिद्ध होगा और लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी और आराम की सूरत नज़र आती है पिछले साल कुछ महीने मध्यम रहे सर्च विशेष रहता था तरौर आमदनी न्यून होती थी उसने चाहा तो तरब भाग्य उदय होगा औरर काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो और धृत सांभर श्रद्धा त्रप्रनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे से आनन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यून बन गया सो ईश्वर भी जाने है अरब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी और बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगसी चित्त में उठती हैं और समा-जाती हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७? 7. हे प्रच्छक तुम्हारे कार्य में विलंब है काम अभी ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखा सोचते हो कुछ और होता है कुछ। कई वार्ता की चता बनी हुई है। जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रूपी क्लेश की। परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने को पसंद करते हो भ्ूंट से क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो। तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि त्रकल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की भूंट सत्य का परीक्षा समभलेते हो एक काम न्यून बनगया था सो ईश्वर की भक्कि विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमात्र ऐसा कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा तरर लाभ होगा। तुमने अपने ऊपर बड़ा जो फिक्र समझ रक्खा है सब कामआरानन्द में हो जायगा।

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तात्कािक भृगु प्रश्न ७२ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न शगए इस बक्क बहुत श्रेष्ट है। तुम्हें बना कारण रिंता फिक्र भयसा उत्पन्न हो जाता है। बुद्धि भ्रमण हो जाती है। गया सो गया फिर आयेगा मिलेगा क्या मिलेगा, आराम मिलेगा धन की प्राप्ति होगी, घर में मंगला चार होगा पीड़ा का नाश होगा जीव की खुशी और प्राप्ती होगी अकस्मात खुश खबरी सुनने को मिलेगी तुम अपने इष्ट देव मित्र देवताओ्रं के निमित्त वस्त्र मिष्टान्न, कच्चा दूध, मावश्या को पिलाते रहा करो इस प्रकार दान पुन्य कराने से रोजगार बढ़ेगा उच्च पदवी पाने में सफल होगे एक जीव का ध्यान बना रहता है मित्र के ध्यान में चित्त बहुत रहता है तुम्हें विद्या मध्यम है परन्तु त्रप्रकल बुद्धि तेज हैं किसी का बुरा नहीं चाहते हो सत्य वार्ता को पसन्द करते हो खर्च है अन्जाम कुशल है राजद्वार से अन्त में विजय है

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तात्कालिक भुय प्रश्न ७३ 2 हे प्रच्छक तुम्हारे खोटे दिन गये अब श्रेष्ट आ्रराने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रक्खा है उसे देख भाल कर सोच समभ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं त्रब त्ररागे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी रासपर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन जोप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा आयेगी लाभ की सूरत होगी तुम्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यून रहा मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है ऐसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तम दशा आरनं पर लाभ अधिक होगा मित्रों से प्रीति बढ़ेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चीज वापस मिलेगी। तुम रामनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बड़ा श्रेष्ट काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७४

हे प्रच्छक इस समय तुम्हारी रास पर कई ग्रह नाकिस मौजूद हैं ऐसी अवस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, आमदनी होती २ रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो वहां पर अधूरा भी नहीं होता है ऐसी दशा में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लालसा बनी रहती है जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय कराओ उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्चात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है द्वर होगी तुम सर्दी में कम्बल अथवा गर्म वस्त्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरुर कराओ यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७५

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता है। प्रश्न दो तरह के से हैं गई चीज मिलना दूसरा लाभ प्राप्ति है तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको गप्त चिंता लगी रहती है और इज्जत का विशेष ध्यान रहता है मन के माफिक लाभ नहीं होता है एक जीव में ध्यान विशेष रहता है तुम पर दशा मध्यम चल रही है पञ्चांग में देखकर उपाय करात्प्र। उपाय के कराने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा बाभ कार्य होगा तुम गऊ सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को अन्न मिष्टान मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रति शीघू तुम्हारी दशा बदलेगी और प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घरमें चांदना सा।देखाई देगा अर्थात सर्व प्रकार से आर्रानन्द होगा

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वात्कालिक भृगु प्रश्न ७६

हे प्रच्छक जो हो गया सो हो गया तरब तुम्हें कार्य चतराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नासिक दशा चल रही है तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय करातरप्रो उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ औरर मङ्गलाचार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यून हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रुपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पुजन किया करो बन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सब प्रकार का आ्नन्द होगा तम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७७ 2 हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है तुम पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुवा लाभ कम हुआप्र अब तुमको दशा श्रेष्ट आने वाली है तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा है काम ठीक बैठेगा तुम्हारा प्रश्न उत्तम है तुमको भाग्य की वृद्धि होगी घूर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की आशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारणा तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय करात्र उपाय होने पर शीघ्र दशा अच्छी त्ररावेगी अच्छी दशा के आाने पर लाभ की नई नई सुरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का वृत रक्खा करो और अनाथों की सहायता किया करो इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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नात्कालिक भगु प्रश्न ७८

हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किमी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यून चल रही है ऐसी दशा में चिंता क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है अनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता २ रुक जाता है तुमको एक जीव की चता भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तम्हारा दान पुएय में भी चित्तनहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये अगर जो बन सके तुम दान अवश्य किया करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय तपरवश्य करातरर उपाय पृजन दान पुरय करनेसे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७१ 2 हे प्रच्छूक तुम्हारा प्रश्न श्रेष्ट है जो हो गया सो हो गया अब चिंता आर फिक्क मिटेगा तुम्हारा कार्य सफल होगा जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी और भृमि से लाभ होगा मंगलाचार और प्रसन्नता होगी तम्हारा एक जीव में चित्त बहुत रहता है तुम तरह २ की वार्ता का च तवन करते हो तुम्हारा चित्त चलायमान रहता है तुमको बहुत दिन से दशा मध्यम चल रही थी तपरब दशा बदलने वाली है तुम जो काम सोचते हो उसमें तारभंग हो जाता है गुप्त शत्रु तुमको नुकसान पहुंचाते हैं अर्थात ऊपर से तुमसे मीठी २ बात करते हैं और अन्दर से काट करते हैं तुमने एक काम बहुत दिनों से सोचरक्खा है ईश्वर चाहे तो अवश्य होगा इष्टदेव पित्रों के निमित्त दान पूजन कराओ उपाय न कराने से कार्य सिद्ध देर से होगा पुर्णमासी को सत्य नारायण का व्रत रक्खा करो कथा करातर इसके कराने से मनोकामना पूर्ण होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८०

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ट है तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा तुमको जीव और लाभ की चिंता बनी रहती है तुमने लाभ का उद्योग किया परन्तु लाभ कम होता है सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा कष्ट व्याधा रंज आदि नष्ट होंगे। घर में खुशी होगी तुम तरह २ का उद्योग सोचते हो परन्तु।चत्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है पीड़ा की चिंता चित्त में भय रहता है काम उत्तम लाभ का अभी नहीं बना तरर एक जीव में चित्त विशेष रहता है राजद्वार का भी ध्यान बना रहता है दशा मध्यम चल रही है उसका श्रद्धानुसार उपाय करो और बन सके तो शिव मन्दिर में नित्य घृत का दीपक जलाया करा सवेरे ही मन्दिर की सफाई किया करो तथवा सोमवार का व्रत किया करो ईश्वर चाहे तो मनो कामना पूर्ण होगी बाधायें नष्ट कष्ट आ्रादि समाप्त होंगी उच्च पदवी मिलेगी जीव प्राप्ति 'होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८१ 7 हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है जो हो गया सो हो गया तब खुशी की वार्ता होने वालीं है खोटे दिन बीत गये श्रेष्ट त्राने वाले हैं आराम होगा कार्य सफल होगा जिसकी चाहना है वह मिलेगा और यह जो तुमने चित्त में काम बिचारा है देर से होगा दिन तुमको बहुत दिनों से मध्यम चल रहे हैं मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता है। नेष्ट दशा में रंज क्लेश पीड़ा गप्त चिंता शत्रुता होती है सा अपनी रास पर जो दो तीन ग्रह नाकिस हैं उनका दान मंत्र जाप कराने से घर में तानन्द और मंगला- चार होगा और जीव की प्राप्ति होगी। यात्रा से लाभ होगा कार्य सफल होंगे गुप्त प्राप्ति होगी तुम्हारे शरीर पर व्रण यानी फोड़े फुन्सी का निशान है आलस्य रहता है नई नई बात का चिंतवन करते हो।

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नात्कालिक भृगु प्रश्न ८२ 2 हे प्रच्छक तुम को पिछ्रले दिन बहुत नाकिस फिक्र से एजरे शरर खर्च विशेष होना रहा लाभ मध्यम होना था सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा व्याधा और रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होगा चित्त की चिंता चित्त में समा जाती है। समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं सो वृथा जाती हैं। एक जीव में चित्त बहुत अधिक रहता है। अब ईश्वर चाहे तो कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान और सुबह शाम शिवजी का भजन किया करो और यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई अब राख रही कोई काम काबू से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरोसा करो काम में सफलता शीघ्र प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८३ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। प्रथम दशा न्यून थी, अब दशा श्रेष्ट त्रने वाला है। जीव की चिंता बनी रहती है। औरर लाभ का उद्योग विशेष सोचते हो परन्तु लाभ अधूरा होता है। और यह जो त्रब फित्र है तरप्रौर खर्च सो दूर होगा। आ्रराम होगा गुप्त वो भी मिलेगा सफलता प्राप्त होगी कष्ट नष्ट होगा। कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पञ्चाङ्ग में देखो मो तब उन ग्रहों का उपाय विधि पूर्वक पंडित से कराओ्र। औरर विनादान के कार्य सिद्ध देर से होगा। इस कारण चावल, मिष्टान, स्वेतवस्त्र, रजनित, अर्थात श्रद्धा प्रमाण चांदी दान का करना बहुत श्रेष्ट मन की कामना पूर्ण होगी अचानक लाभ की सूरत बनने वाली है चित्त स्थिर करके किसी काल ईश्वर का भजन किया करो प्रश्न श्रेष्ट हे अन्जाम कुशल है तीर्थ यात्रा श्रेष्ट है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८४ 227 हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है कार्य आधीन से बाहर अर्थात काम काबू से बाहर है चिंता कष्ट कई जीव शत्र ता गुप्त करे हैं परन्तु उनसे कुछ हो नहीं सकता एक जीव में चित्तबहुत रहता है दशा मध्यम के कारण त्र्प्रनेक प्रकार की हीन वार्तालाप सोचते हो समुद्र की लहर सी उठती है नई नई बात का चिन्तवन होकर निर्फल होता है कई फिक्र भारी लगे हुचे हैं जीव की प्राप्ति होगी सफलता प्राप्त होगी और चंगा होगा और यह जी तरब चिंता है सब द्वर हो जायगी पीत दान करो चने की दाल हल्दी पेला वस्त्र पेले पुष्प स्वर्ण श्रद्धानुसार युप्त चिंता दूर होगी कार्य में सफलता होगी मनबांछित फल प्राप्त होगा दशा न्यून के कारण फिक्र रहता है गृह में क्लेश होता है तब दशा श्रेष्ठ आरने वाली है यह कार्य होकर नवीन कृत्य करोगे।।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८५ 7 i 2 हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न चिंता रूपी कष्ट का है खर्च विशेष होगा जीव की लालसा जीव चिंता बनी रहती है तरह तरह के उदवेग चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है दूसरे आदमियों को भी बहुत फिक्र है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं परन्तु तभी कार्य में विलम्ब है कामना पूर्ण तो होगी परन्तु पाप ग्रहों का पूजन विधि पूर्वंक बटुक भैरव का मन्त्र भी जपवाओ्र (मंत्र) उों ए हीं श्रीं बटुक भैर्वाय आपदुद्धारणाय सर्वविध्न निवारणाय ममरक्षा कुरु कुरु स्वाहा। इस मन्त्र के जाप से मनो- कामना पुर्ण होगी और यह जो चित्त को दीर्घ चिंता हैं सो काम होगा और मिलेगा खर्च विशेष है एक जीव में चित्त भी बहुत रहता है लाभ अधूरे होते हैं नई नई वार्ता का चिन्तवन रहता है परन्तु अन्त में कुशलता है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८६ 1 हे प्रच्छक तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की वार्ता होने वाली है मिलेगा मर्जी के माफ़िक कार्य होगा चित्त उस बिना व्याकुल सा रहता है दशा न्यून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्च अधिक हो रहा है जीव का दुख रहता है काम दवूसरे के काबू में ह बनता बनता रुक जाता है और दीं तीन प्रह तुम्हारी रास पर कैड़े हैं पंचाङ्ग में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थर चित्त करके पंडित जी से करातर उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा तरर यह जो फक्र है सो दूर होगा तर कई फिक्र खर्च के आरहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी नाप्ति होगा परन्तु विलम्ब है पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गप्त लाभ होगा अब अन्जाम प्रच्छा दीखता है कार्य में भी लाभ होगा अगर हो सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो.।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८७

इम समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठीक बैठेगा या न बैठेगा इज्जत का भय हो जाता है ऐमी दशा में गवन भी होना है गुप् चिंता रहती है कभी चित्त में कुछ आता है कभी कुछ आता है ऐसी दशा में सर्च विशेष होता है एक गुप्त मनोर्थ है सो कब तक आराम होगा सो अब न्यून दशा बीचने वाली है और श्रेष्ट त्राने वाली है परन्तु काम में देर है। इष्ट देव को पृजन करना चाहिये पित्रों के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ट है कई महीने से भाग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति होगी और जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो तब बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के माफिक होगा काम काबू से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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तात्कालिक भृयुप्रश्न ८5 227 हे प्रच्छक तुम्हारी रास पर आजकल कई ग्रह नाकिस हैं पञ्चांग खोलकर देखो जब ऐसे ग्रह रास पर आते हैं तो लाभ कम होता है शत्रु उत्पन्न होते हैं मित्र व प्यारों से जुदाई होती है कष्ट तर रंज होते हैं आ्रमदनी होती होती रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो अधूरा होता है एक जीव लालसा की आस लगी रहती है व्यय दीर्घ लाभ मध्यम होता है काम होने को हो तो फिर तार भंग हो जाता है सो अब मध्यम ग्रहों का दान जाप कराओ आप भी यह मंत्र जपो उों ऐं हीं कीं श्रीं वासुदेवाय नमः बटुक भैरवाय आप दुद्धारणाय मम रक्षा कुरु कुरु स्वाहा दान मंत्र जाप करने से यह जो तुम्हारे मन की कामना है पूर्ण होगी प्राप्ति होगी कष्ट द्वूर होकर पुत्रोंका लाभ होगा राज्यसे सफलता मित्र से प्रीत विशेष इतने उपाय न बनेगा दशा मध्यम रहेगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ८8 2 हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है अरब दशा श्रेष्ट आने वाली है कामना पूर्ण होगी जो काम चित्त में धारणा करा है वह सफल होगा चिंता दूर होगी मनो कामना पूर्ण होंगी मित्रों से प्रीत होगी कष्ट पीड़ा नष्ट होगी जो कार्य चित्त में विचारा है काम ठीक बठेंगे दशा बहुत दिनों से सध्यम चल रही थी व्यय विशेष हुवा जोव की प्राप्ति होगी ऋण की न्यूनता हो प्रश्न श्रेष्ट है उद्योग व उपाय पहले तुमने बहुतेरे करे पर निर्फल गये काम काबू से बाहर है पर त्रप्रब ईश्वर आनन्द खुश ख़बरी की वार्ता करेंगे गुप्त लाभ होगा यह जो प्रश्न विचारा है इसके वास्ते श्री देवी दुर्गा लक्ष्मी का पृजन करात्र चावल चांदी स्वेत वस्त्र स्वेत फूल का दान कराओ। तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं सो उनका उपा- करने से शीघ्र मन की कामना पूर्ण होगी और मन में एक जीव का ध्यान रहता है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १० 2 2 हे प्रच्छक तुम्हारा काम काब से बाहर है और धन का व्यय विशेष है तकस्मात् यह मामला है और जीवकी चिंता बनी रहती है तरर आदमी को भी चिंता बहुत है इज्जत का ख्याल है बड़े २ खर्च दीखते हैं और तुम परोपकारी सत्य वातें को पसंद करते हो छल छिद्र के काम को पसंद नहीं करते तुम्हारा प्रश्न जीव और धन का है और इज्जत का भय होता है त्रनेक प्रकार की वार्ता सोचते हो पर निर्फल हो जाती है पता नहीं लगता जतन भी करे अव नवग्रहां का दान मंत्र जाप कराओ यह काम ईश्वर चाहे ता ठीक होने वाला है और आदमी भो सहायता करेंगे कई शत्रु हैं ग्रह इष्ट देव का पूजन जाप कराने से मनोकामना पूर्ण होगी और मिलेगा वंश की वृद्धि होगी जीव की प्राप्ति भी होगी तरर लक्ष्मी का चमत्कार भी प्राप्त होगा औररर आप्रराम होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न करने का यह मामला है स्वर दुस्वभाव है घर में चमत्कारी हो क्लेश आदि मिटे व्याधा टले जिसका प्रश्न है वह चीज़ मिलेगी या न मिलेगी मंगलाचार कब तक होगा लाभ खुशी कब तक होगी ऐसी दशा कब तक रहेगी जीव की चिंता रहती है वंश की वृद्धि हो आजकल तुम जो सोचते हो कुछ उसमें होता है कुछ दो तीन ग्रह रास पर नाकिस आरहे हैं सो उन का उपाय दान पुरय जाप कराने से चित्त का मनोरथ सिद्ध होगा खुशी प्राप्त होगी काम पराये तरप्रधीन है अव तुम चींटीनाल जिमात्रो श्रेष्ट है भूखों को भोजन दो कार्य सिद्ध होगा दशा उतरने वाली है मनोरथ पूर्ण होंगे त्रप्रनेक प्रकार की लाभ की सूरत और यह जो ऊपर से फिक्र दीखते हैं सो सब कांटा सा निकल जायगा दशा मध्यम है

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तात्कालक भृगु प्रश्न ह२

इस समयजो आपने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद् होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग ।चार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चांदना हो आराम हो कब तक.दिन कैड़े हैं गुष्त लाभ भी होगा यह भगड़ा कब तक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन अच्छे आवेंगे ब्राह्मण को दही लडड मिष्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी और तुम्हें अपने इष्ट देव का पूजन घर में पित्र पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से अबके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे शत्रु रूपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई -२ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निर्फल हो जाती हैं लेकिन अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३ 7 इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यिति धन न्यूनं दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य दृष्टयः ग्रहपीड़ा च प्राप्नोति भृगुणा परिभाषितः मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता कब तक पूए होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी आज कल दिन नाकिस हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य अब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुग्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पत्रा देखो नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप छाया दान कराने से अब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से वाहर है मामला ईश्वर के आधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में और है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा अन्त में अच्छा है।

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तात्कालिंक भृगु प्रश्न ६४ 7 2 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंना का है कार्य पराधीन काबू से बाहर हो गया बहुतेरे यत्न करते हा बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार विद्या की सिद्धि धन की जीत श्रेष्ट दशा में होती है अब जो तुम्हें यह चिन्ता बनी है और लालसा जीव की है सो काम में विलंब है परन्तु मिलेगा और सफल होगा अतः जतन उपाय से इच्छा पुर्ण होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं आराम की सूरत होगी जीव प्राप्ति होगी इज्जत का काम हो संदेह मटेगा धन का मनोर्थ पूर्ण होगा देवी का पूजन कराओ और अपने हाथ से वृत खांड चावल चांदी का दान करो इश्वर चाहै तो उपाय करते ही इच्छा पूर्ण होगी त्रर तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो तसत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि घृणा करते हो

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तात्कालिक भुयु प्रश्न १५ 2 हे प्रच्छक चित्त चिंता भविष्यति गृह क्लेश न संशयः धनमानम हानि पीड़ा देह दीर्घता मंगलाचारक योगं वंशवृद्धि च प्राप्तये राजद्वारकं न्याय धन हानि विलम्बता इस प्रश्न का फल यह है तरह २ को वार्ता लाभ की साचते हो काम काबू से बाहर है दशा कई महीने से मध्यम है न्यून दशा में धन हानि विशेष व्यय लाभ मध्यम चिंता और क्लेश नुकसान होते हैं राजद्वार में भी काम मर्जी के माफिक नहीं होते सो काम कब तक होगा जो घर में चादना और चमत्कारी हो वंश की तरर इज्जत की वृद्धि हो त्रर वह मिले एक जीव में चित्त विशेष रहता है सो शिवजी का पूजन करना चींटीनाल देना श्रेष्ट है त्रपरर अपने हाथ से गुड़ गेहूं लाल वस्त्र लाल पुष्प आदि दान करके किसी द्राह्मण को दो ईश्वर चाहे तो अब काम शीघ्र ही बन जावेगा और कामना पुरण होगी।

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तात्कालिक भृंगु प्रश्न १६ 2 2 हे प्रच्छक गुप्त चिंता शरीरेन धन हानि च दृश्यते ग्रह पीड़ा मविष्यति दृश्यते भाग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगला चार हर्षक धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्तये इस समय दुस्वभाव स्वर है इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगला चार राजद्वार में न्याय किसी प्यारे की चता विद्या का लाभ रोजगार क्रत्य पीड़ा का यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारीं रास पर आजकल नाकिस चल रहे हैं पत्रे में ढेखो नाकिस हैं या नहों जरूर हैं इन नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप करात् जिससे भाग्य की वृद्धि का ताला खुले और उच्च पदवीं प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगलाचार के कार्यों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्त हो अंजाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १७

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव रूप लक्षमी का है चिंता दीर्घ है और स्वर द्ुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शैका अलग हो जाना और दूसरा रोजगार मध्यम होना चित् की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की लालसा बनी रहती है जतन भी करते थे परन्तु वृथा चले जाते थे चिंता औौर इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है तब के भी काम होगा तथवा नहीं राजद्वार की उच्च पदवी की आाशा है तब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भाग्य उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है तरप्रब तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगीं। कई ग्रह रास पर कैड़ेहैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट और बाधा नष्ट होकर लाभ की सूरत अच्छी बनेगी वह मिलेगी

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नात ग्ञालक भुयु प्रश्न. १८ 2 ह प्रच्छक दीर्घचिंता च प्राप्नोति जीव प्राप्ति न दृश्यते भयमीत हृदा पराधीनोपि क्रत्यया राजद्वारकंकार्य धनव्यय भविष्यति अ्रन्तकार्य महा सिद्धि भृगुणापरिभाषतः । तुम पर बहुत दशा न्यून थी। अनेक-प्रकार के फिक्र, जीव चिंता और धन का जानी तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में तत्पर लगा रहता है। नई नई वार्ता लाभ के लिये सोचते हो परन्तु वृथा चली जाती है अब रोजगार की सूरत होगी यह जो जीव की लालसा बनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलंब है देर से विजय प्राप्त होगी काम में लाभ होगा छाया दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्ए दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी और दूसरा लाभ का कार्य भी सिद्ध होगा काम देव की उनमत्तता में नीच बुद्धि हो जाती है सो ग्रह का प्रभाव है अन्त में कुशलता है। और भूमि का लाभ भी हागा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न२६

हे प्रच्छक तुम्हारा काम काबू से बाहर है दिन रात विचित्र तरह २ की वार्ता और लोभ सोचते रहते हो बनकर काम की त्रनन्द की सूरत मध्यम सी हो गई है ऐंसी तवस्था में गुप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथाधन का चत जाना औपर मित्र का ख़्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याधा हो खोटी दशा में बहुत बातों का ख्यान होता है तुम पत्तियों को त्रन्न बाजरा भोजन दो और श्री बटुक सैरव का पृजन कराओ्र यह मंत्र जपो उों ऐं ही क्लीं श्री विष्णुभगवान मम तरप्रपराध क्षमाय कुरु कुरु सर्व विघ्न विनाशाय ममकामना पूर्ण कुरु कुरु स्वाहा। मंत्र के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ट होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार मं विजय होती है गई हुई लक्ष्मी फिर वापिस आती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शांति प्राप्त होने लगते हैं

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तात्कालिक भृयु प्रश्न १०८

हे प्रच्छक तुम्हारा काम बन जायगा स्वर दाहिना चलता है इस समय के प्रश्न का यह फल है कि चिंता और फिक्र मिटेगा गई सो गः अब राख रही जिसने उत्पन्न किया है वही विजय करेगा और जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से लाभ होगा खुशी होगी घर में मंगलाचार होगा एक मित्र में विशेष मन रहता है वह तुम्हारे आधीन रहेगा भृमि लाभ होगा दशा बहुत दिन से मध्यम चल रही थी अब दशा बदलने वाली है कामदेव की प्रबलता में न्यून बुद्धि हो जाता है अब जो तुम्हारी रास पर ग्रह मध्यम चल रहे हैं उनका दान निश्चय करके कर प्र उसके बाद में सर्वसिद्धि होगी। काम होता २ रुक जाता है शत्रु हानि करते है काम और के आधीन है कई आदमियों से मिलके काम होगा अब दशा अच्छी आने वाली है यह जो और काम है सो उस कार्य में मी विजय प्राप्त होगी

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तास्कालिक भृगु प्रश्न १०१

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम सालूम होता है ऐसी अवस्था में पुत्र की लाभ सगाई रोजगार मध्यम दशा में मुशकिल होते हैं अथात् होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान और धन हरण होता है राजद्वार से सफल होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है त्रर गुप्त शत्रु भांजी मार देते हैं एक मनोर्थ बहुत दिन से सोच रक्खा है ईश्वर चाहे तब हो अब इष्टदेव और घरके पित्रों के निमित्त कुछ जप दान आदि कराओ जिससे मनोर्थ सिद्ध हो जिसकी चाहना है वो मिने जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में अधिक लाभ होगा और राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मङ्गल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृयु प्रश्न १०२ 2 7 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न उत्तम श्रेणी का है जिससे अब तुम्हारा मनोर्थ सिद्ध होगा। श्रेष्ट दशा आने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ, अ्न्न से लाभ और जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, रात्रा में लाभ और मन का मनोर्थ मी सिद्ध होगा अब तुस्हारी रास पर दो ग्रह नाकिस और बाकी हैं पत्रा देखो उनका उपाय जरा और श्रद्धा से करा दो और शाम को और चींटीनाल जब तक बने जिमाया करो दशा उत्तम आरने वाली है पिछले दिन बहुत फिक्र से बीचे सो अब तुम उपरोक्क कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे आस पूरी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चत्त विशेष कर रहता है उसमें भी सफलता प्राप्त होगो सो आानन्द में बीतेगी कामदेव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून भी हो जाती है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १०३ 26 ? 7 हेप्रच्छक अब क्या फिक करते हो तुम्हें खुश खबरी प्राप्त होने वाली है गई सो गई अब राख रही अब बहुंत देगा वह मनोर्थ पूर्ण होंगे परन्तु एक फिक भारी दीखता है ऊपर से खर्च आाबे है और पास धन विशेष नहीं दीखता परन्तु चिंता मत करना क्यों कि तुम्हारा काम बड़ी इज्जत के साथ बनेगा और कई जगह से लाभ होगा करने वाला और है वही फिक्र कर रहा है तब विशेष लाभ की सूरत होगी मित्र में चिन बहुत रहता है वो भी चित्त से प्यार करे है अगर तुम शीघ्र इस काम की सिद्धि चाहते हो तो श्री गंगा जी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिर शर और सट्टी चावल दही दान करो जिसके करने से तुम्हारा काम शीघ्र सिद्ध होगा और गुप्त लाभ होगा घर में चांदना होगा और एक काम तुम से ग्ुप्त से गुप्त नाकिस बना थ सो भी नष्ट होगा सो ईश्वर का ध्यान रक्खा करो कुशलता रहेगी

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नात्कालिक भूग प्रश्न १०४ 2 हे प्रच्छक तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लोभ की सुरत में हानि पंदा होगई गुप्त शत्रु बुराई करते हैं तब एक और खुशी की बात तुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन माल का निकल जाना पीड़ा का घर मेंबास होना इज्जत का भय होना हुवा हुबाया मंगलाचार का हट जाना और राजद्वार की चिंता हानो यह सब बात नाकिस दशा में होती हैं तब तुम सायंकाल को वृत का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो औ्रर जलका लोटा भर के शिवजी को त्रर पीपल पर चढ़ाया करो और इतवार को ब्राह्मण जिमाओर अथवा वृत किया करो कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पत्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यून हो जायगा जो उपरोक्क कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्ण होगी और कुशलता प्राप्त होगी।

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तात्कालिक भृय प्रश्न १०५

हे प्रच्छक अरब तुम्हारे खोटे दिन व्यतीत हो गये। अच्छे आरने वाले हैं अब तक तुम पर बहुत नाकिस दशा चल रही थी। नाकिस दशा में ही ऐसे काम होते हैं। जो फिक्र तुम पर है। बहुत नुकसान उठाण और लाभ कम रहा पीड़ा रूपी कलेश में धन खर्च हुआ और चीज निकल गई। इज्जत का भय हुवा परन्तु तुम्हें तव अपने इष्ट देव का पूजन पितृ पीड़ा का जतन तरर क्रूर ग्रह का दान निश्चय करके कराना चाहिये। फिर यत्न के कराने से तुम्हें जल्दी तरर नये लाभ होंगे। जीव की प्राप्ति होगी मित्र से मुला- कात जो है विशेष होगी ग्रह की पीड़ा नष्ट होगी। शत्रु का नाश हीगा और ये जो मन की कामना सो पूर्ण होगी और बड़े २ फिक्र जो ऊपर से खर्च के दीख रहे हैं। सो सब आनन्द में कांटा सा निकल जायगा कुशलता प्राप्त होगी, काम सिद्ध होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १०६ 2 हे प्रच्छक तुम्हारा इस समय का प्रश्न बहुत श्रेष्ट दीखता है बुरे दिन गये और अच्छे आने वाले थे सो तुम्हारो रास पर दो तीन ग्रह मध्यम आरपरा जये हैं औरर तुमने उनका दान जप कराया नहीं है इस कारण ऐसे फिक्र चिंता उठाई लाभ कम रहा खर्च विशेष है पीड़ा की चिंता चित्त में, भयसा होना, काम उम्दा लाभ का अभी नहीं बना, जीव की चिंता है, वंश की वृद्धि और मंगलाचार होना एक अपना प्यारा है उसी में चित्त बहुत रहता है राजद्वार का चता है तब छाया दान और चने की दाल पेला वस्त्र हल्दी स्वर्णदान श्रद्धानुसार कराना चाहिये ऊपर के दान पुन्य के कराने से ईश्वर चाहे तो मन की कामना पूर्ण होगी उच्च पदवी मिलेगी जीव की प्राप्ती होगी लाभ का रास्ता खुलेगा भूमि से लाभ और पीड़ा नष्ट होगी और राजद्वार से भी काम में सफलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृयु प्रश्न ११७

हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न मध्यम है तभी तुम्हारी मर्जी के अनुसार काम होने में देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं तरगर कभी कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गप्त है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगला चार में देर है एक जीव की भी अभिलाषा है अपरब तुम नवग्रह का पूजन दान करो उसके कराने से दशा न्यून बदलेगी श्रेष्ट त्रप्रयेगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लोभ होगा गई हुई चीज फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से काम सिद्ध होगा ग्प्त चिंता मिटेगी चित्त में त्र्प्रनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्तकी वार्ता चित्तमें समा जाती है तब शीघ्र ही खुशी की वार्ता सुनने में आरावेगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १०८

हे प्रच्छक जब दशा जीव पर नाकिस त्राती है और नाकिस ग्रह चौथे आठवे बारहवें में हो जाते हैं तब ऐसे ही काम होते हैं। खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है औप्रर एक जीव का बहुत ध्यान रहता है सो आराम मिलेगा और हाथ से निकला हुआप्र धन देर से प्राप्त होगा। जिस काम को करना विचारते हो, सो समझ कर करना अरभी भाग्य उदय होने में किंचत विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढ़ेगी और नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की रास पर कैड़े हैं उनका पत्रा देख कर यत्न करात्र्प्रो नहीं तो विशेष क्लेश होगो दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें आराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा। विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूलो मत।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १०१

हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि भ्रमण रहती है। ईश्वर को सत्य नहीं मानते हो जिसने इतना बड़ा किया है और बराबर रन्ता करी है सो वह कहीं चला नहीं गया है बराबर रक्षा करेगा उसका भजन किया करो अ्रन्त में आशा पूर्ण होगी और गई सो गई अब राख रही और वो मिलेगा मौजूद है चिंता मत करो आराम की सुरत होने वाली है एक काम में विशेष लाभ होगा परन्तु अब मंगल के ब्रत किया करो और पत्तियों को बाजरा भोजन डाल दिया करो बड़ा पुन्य का काम है क्रूर ग्रहों का जप दान कराते रहा करो ऐसा उपाय कराते रहने से मन वांछित फल मिलेगा। कार्ज सिद्ध होंगे जो बड़े खर्च के काम समझ रक्खेहैं वोभी कांटा सा होकर आनन्द में निकल जायगा काम देव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून हो जाती है चिंता न करो उसने चाहा तो शीघ्र ही कुशलता प्राप्त होंगी।

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तात्कानिक भृगु प्रश्न ११०

हे प्रच्छक तुम्हारे इस समय के प्रश्न का यह फल है कि तुमने जो प्रश्न विचार है सो काम सिद्ध होगा और लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी और आराम की सूरत नज़र आती है पिछले साल कुछ् महीने मध्यम रहे सर्च विशेष रहता था और आमदनी न्यून होती थी उसने चाहा तो त्रब भाग्य उदय होगा और काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो और धृत सांभर श्रद्धा अनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे से आनन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यून बन गया सो ईश्वर भी जाने है तप्रब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी औरर बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगसी चित्त में उठती हैं और समा जाती हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १११ 2272277 हे प्रच्छक तुम्हारे कार्य में विलंब है काम अभी ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखा सोचते हो कुछ और होता है कुछ। कई वार्ता की चता बनी हुई है। जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रूपी क्लेश की परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने का पसंद करते हो भ्रूट से क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो। तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि त्कल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की भूंट सत्य का परीक्षा समगलेते हो एक काम न्यून बनगया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमात्रो ऐसा कराने से तुम्हें मनवांछ्ित फल मिलेगा त्रर लाभ होगा। तुमने अपने ऊपर बड़ा जो फिक्र समझ रक्खा है सब कामआरनन्द में हो जायगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११२ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न शगुण इस बक्क बहुत श्रेष्ट है। तुम्हें बिना कारण रिंता फिक्र भयसा उत्पन्न ह। जाता है। बुद्धि भ्रमण ह जाती है,। गया सो गया फिर आयेगा मिलेगा क्या मिलेगा, आराम मिलेगा धन की प्राप्ति होगी, घर में मंगला चार होगा पीड़ा का नाश होगा जीव की खुशी तरर प्राप्ती होगी तकस्मात खुश खबरी सुनने को मिलेगी तुम अपने देव मित्र देवताओरं के निमित्त वस्त्र मिष्टान्न, कच्चा दूध, मावश्या को पिलाते रहा करो इस प्रकार दान पुन्य कराने से रोजगार बढ़ेगा उच्च पदवी पाने में सफल होगे एक जीव का ध्यान बना रहता हें मित्र के ध्यान में चित्त बहुत रहता है तुम्हें विद्या मध्यम है परन्तु त्रप्रकल बुद्धि तेज हैं किसी का बुरा नहीं चाहते हो सत्य वार्ता को पसन्द करते हो खर्च है अन्जाम कुशल है राजद्वार से अन्त में विजय है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११३ 2 हे प्रच्छक तुम्हारे खोटे दिन गये तब श्रेष्ट आरराने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रक्खा उसे देख भाल कर सोच समभ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं तप्रब आरागे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन .जाप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा तयेगी लाभ की सूरत होगी तुम्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यून रहा मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है ऐसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तम दशा तानं पर लाभ अधिक होगा मित्रों से प्रीति बढ़ेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चीज वापस मिलेगी। तुम रामनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बड़ा श्रेष्ट काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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तात्कालक भृगु प्रश्न ११४

हे प्रच्छक इस समय तुम्हारी रास पर कई ग्रह नाकिस मौजूद हैं ऐसी अवस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, आमदनी होती २ रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो वहां पर तधूग भी नहीं होता है ऐसी दशां में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लालसा बनी रहती हे जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बोहर है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय करातरर उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्चात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है दूर होगी तुम सर्दी में कम्बल अथवा गर्म वस्त्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरुर करात्र यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११५

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता है। प्रश्न दो तरह के से हैं गई चीज मिजना दूसरा लाभ प्राप्ति है तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको गप्त चिंता लगी रहती है और इज्जत का विशेष ध्यान रहता है मन के माफिक लाभ नहीं होता है एक जीव में ध्यान विशेष रहता है तुम पर दशा मध्यम चल रही हे पञ्चांग में देखकर उपाय करात्र्प्रो। उपाय के कराने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा लाभ कार्य होगा तुम गऊ सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को तन्न मिष्टान मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रति शीघू तुम्हारी दशा बदलेगी औरर प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घरमें चांदना सा ।देखाई देगा तर्थात सर्व प्रकार से त्र्प्रानन्द होगा

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तात्कालिक भृयु प्रश्न ११६ 2 हे प्रच्छक जो हो गया सो हो गरा अररब तुम्हें कार्य चतुराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नासिक दशा चल रही है तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय करातर उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ त्रप्रौर मङ्गलाचार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यून हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रुपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पृजन किया करो बन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सब प्रकार का त्ररानन्द होगा तम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११७ 7 हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है तुम पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुवा लाभ कम हुत्रा अब तुमको दशा श्रेष्ट आाने वाली है तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा है काम ठीक बैठेगा तुम्हारा प्रश्न उत्तम है तुमको भाग्य की वृद्धि होगी घर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की आशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारण तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय कराओ्रो उपाय होने पर शीघ्र दशा अच्छी त्र्रावेगी अच्छी दशा के आने पर लाभ की नई नई सुरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का वृत रक्खा करो और अनाथों की सहायता किया करो इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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नात्कालिक भगु प्रश ११८

हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किमी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यून चल रही है ऐमी दशा में चिंना क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है त्रनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता २ रुक जाता है तुमको एक जीव की चता भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तम्हारा दान पुएाय में भी चित्तनहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये अगर जो बन सके तुम दान तप्रवश्य किया करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय तरप्रवश्य कराओर्प्र उपाय पूजन दान पुराय करनेसे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १११

हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न श्रेष्ट है जो हो गया सो हो गया अब चिंना आर फिक्र मिटेगा तुम्हारा कार्य सफल होगा जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी और भूमि से लाभ होगा मंगलाचार और प्रसन्नता होगी तम्हारा एक जीव में चित्त बहुत रहता है तुम तरह २ की वार्ता का चतवन करते हो तुम्हारा चित्त चलायमान रहता है तुमको बहुत दिन से दशा मध्यम चल रही थी तरप्रब दशा बदलने वाली है तुम जो काम सोचते हो उसमें तारभंग हो जाता है गुप्त शत्रु तुमको नुकसान पहुंचाते हैं अर्थात ऊपर से तुमसे मीठी २ बात करते हैं और अन्दर से काट करते हैं तुमने एक काम बहुत दिनों से सोचरक्खा है ईश्वर चाहे तो त्ररवश= होगा इष्टदेव पित्रों के निमित्त दान पूजन कराओर उपाय न कराने से कार्य सिद्ध देर से होगा पूर्णमासी को सत्य नारायण का व्रत रक्खा करो कथा करात्र्प्रो इसके कराने से मनोकामना पूर्ण होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२० 7 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ट है तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा तुमको जीव और लाभ की चिंता बनी रहती है तुमने लाभ का उद्योग किया परन्तु लाभ कम होता है सो तब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा कष्ट व्याधा रंज आादि नष्ट होंगे। घर में खुशी होगी तुम तरह २ का उद्योग सोचते हो परन्तु।चत्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है पीड़ा की चिंता चित्त में भय रहता है काम उत्तम लाभ का अभी नहीं बना तर एक जीव में चित्त विशेष रहता है राजद्वार का भी ध्यान बना रहता है दशा मध्यम चल रही है उसका श्रद्धानुसार उपाय करो औप्रर बन सके तो शिव मन्दिर में नित्य घृत का दीपक जलाया करा सवेरे ही मन्दिर की सफाई किया करो अथवा सोमवार का व्रत किया करो ईश्वर चाहे तो मनो कामना पूर्ण होगी बाधायें नष्ट कष्ट त्रादि समाप्त होंगी उच्च पदवी मिलेगी जीव प्राप्ति होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२१ 7 हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है जो हो गया सो हो गया तब खुशी की वार्ता होने वाली है खोटे दिन बीत गये श्रेष्ट त्रराने वाले हैं आराम होगा कार्य सफल होगा जिसकी चाहना है वह मिलेगा और यह जो तुमने चित्त में काम बिचारा है देर से होगा दिन तुमको बहुत दिनों से मध्यम चल रहे हैं मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता है। नेष्ट दशा में रंज क्लेश पीड़ा गप्त चिंता शत्रुता होती है सा अपनीं रास पर जो दो तीन ग्रह नाकिस हैं उनका दान मंत्र जाप कराने से घर में त्र्प्रानन्द और मंगला- चार होगा और जीव की प्राप्ति होगी। यात्रा से लाभ होगा कार्य सफल होंगे गुप्त प्राप्ति होगी तुम्हारे शरीर पर व्रण यानी फोड़े फुन्सी का निशान है आलस्य रहता है नई नई बात का चिंतवन करते हो।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२२ 2 2 हे प्रच्छक तुम को पिछ्ले दिन बहुत नाकिस फिक्र से गुजरे और सर्च विशेष होता रहा लाभ मध्यम होना था सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा व्याधा और रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होंगा चित्त की चिंता चित्त में ममा जानी है। समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं स वृथा जाती हैं। एक जीव में चित्त बहुत अधिक रहता है। अब ईश्वर चाहे ता कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान और मुबह शाम शिवजी का भजन किया करो और यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई अब राख रही. कोई काम काबू से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरोसा करो काम में सफलता शीघ्र प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२३ 7 7 हे परच्छक तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। प्रथम दशा न्यून थी, अव दशा श्रेष्ट त्रराने वाला है। जीव की चिंता बनी रहती है। औ्रर लाभ का उद्योग विशेष सोचते हो परन्तु लाभ अधूरा होता है। और यह ज अव फिव है और खर्च सो दूर होगा। आराम होगा गुप्त वो भी मिलेगा सफलता प्राप्त होगी कष्ट नष्ट होंगा। कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पश्चाङ्ग में दसो सो अप्रब उन ग्रहों का उपाय विधि पूर्वक पंडित से कराता। और विनादान के कार्य सिद्द देर से होगा। इस कारण चावल, मिष्टान, स्वेतवस्त्र, रजनित, अर्थात श्रद्धा प्रमाण चांदी दान का करना बहुत श्रेष्ट मन की कामना पूर्ण होगी अचानक लाभ की सूरत बनने वाली है चित्त स्थिर करके किसी काल ईश्वर का भजन किया करो प्रश्न श्रेष्ट है अन्जाम कुशल है तीर्थ यात्रा श्रेष्ट है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२४ ? हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल है कार्य आधीन से बाहर अर्थात काम काबू से बाहर है चिंता कष्ट कई जीव शत्र ता गुप्त करे हैं परन्तु उनसे कुछ हो नहीं सकता एक जीव में चित्तबहुत रहता है दशा मध्यम के कारण त्र्प्रनेक प्रकार की हीन वार्तालाप सोचते हो समुद्र की लहर सी उठती है नई नई बात का चिन्तवन होकर निर्फल होता है कई फिक्र भारी लगे हुवे हैं जीव की प्राप्ति होगी सफलता प्राप्त होगी और चंगा होगा और यह जी तव चिंता है सब द्वूर हो जायगी पीत दान करो चने की दाल हल्दी पेला वस्त्र पेले पुष्प स्वर्ण श्रद्धानुसार गप्त चिंता दूर होगी कार्य में सफलता होगी मनबांछित फल प्राप्त होगा दशा न्यून के कारण फिक्र रहता है गरह में क्लेश होता है तरब दशा श्रेष्ठ आने वाली है यह कार्य होकर नवीन कृत्य करोगे॥।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न १२५ 7 2 हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न चिंता रूपी कष्ट का है खर्च विशेष होगा जीव की लालसा जीव चिंता बनी रहती है तरह तरह के उदवेग चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है दूसरे आदमियों को भी बहुत फिक्र है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं परन्तु अभी कार्य में विलम्ब है कामना पूर्ण तो होगी परन्तु पाप ग्रहों का पूजन विधि पूर्वंक बटुक भैरव का मन्त्र भी जपवाओ (मंत्र) उों ऐ हीं श्रीं बटुक भैर्वाय आपदुद्वारणाय सर्वविघ्न निवारणाय ममरक्षा कुरु कुरु स्वाहा। इस मन्त्र के जाप से मनो- कामना पुर्ण होगी और यह जो चित्त को दीर्घ चिंता हैं सो काम होगा और मिलेगा खर्च विशेष है एक जीव में चित्त भी बहुत रहता है लाभ अधूरे होते हैं नई नई वार्ता का चिन्तवन रहता है परन्तु अन्त में कुशलता है॥

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तार्त्कालिक भृगु प्रश्न १२६

हे प्रच्छक तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की वार्ता होने वाली है मलेगा मर्जी के माफिक कार्य होगा चित्त उस बिना व्याकुल सा रहता है दशा न्यून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्च अधिक हो रहा है जीव का दुख रहता है काम दूसरे के काबु में हे बनता वनता रुक जाता हे और दो तीन ग्रह तुर्म्हारी रास पर कैड़े हैं पंचाङ्ग में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थिर चित्त करके पंडित जी से कराओ उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा और यह जां फिक्र है सो दूर होगा और कई फिक्र खच के श्रा रहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी प्राप्ति होगा परन्तु विलम्ब हे पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गुप्त लाभ होगा अब अन्जाम ऋच्छा दीखता है कार्य में भी लाभ होगा तगर हो सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२७ 7 इम समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठीक चैठेगा या न वैठेगा इज्जत का भय हा जाता है ऐमी दशा में गवन भी होता है गुप्त चिंता रहती है कमी चित्त में कुद्ध आता हे कभी कुछ आता है ऐसी दशा में सर्च विशेष होता है एक गुप्त मनार्थ है सो कब तक आराम होगा सो तरप्रव न्यून दशा वीचने वाली है और श्रेष्ट ताने वाली है परन्तु काम में देर है। इष्ट देव का प्रजन करना चाहिये पित्रों के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ट है कई महीने से भाग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति हागी और जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो अब बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के माफिक होगा काम काबू से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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तात्कालिक भृयुप्रश्न १२८

हे प्रच्छक तुम्हारी रास पर तरजकल कई ग्रह नाकिस हैं पञ्चांग खोलकर देखो जब ऐसे ग्रह रास पर आते हैं तो लाभ कम होता है शत्रु उत्पन्न होते हैं मित्र व प्यारों से जुदाई होती है कष्ट और रंज होते हैं आरमदनी होती होती रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समते हो अधूरा होता है एक जीव लालसा की आस लगी रहती है व्यय दीर्घ लाभ मध्यम होता है काम होने को हो तो फिर नार भंग हो जाता है सो अब मध्यम ग्रहों का दान जाप कराओ आप भी यह मंत्र जपो उों ऐं हीं कीं श्रीं वासुदेवाय नमः बटुक भैरवाय आप दुद्धारणाय मम रक्षा कुरु कुरु स्वाहा दान मंत्र जाप करने से यह जो तुम्हारे मन की कामना है पूर्ण होगी प्राप्ति होगी कष्ट दूर होकर पुत्रोंका लाभ होगा राज्यसे सफलता मित्र से प्रीत विशेष इतने उपाय न बनेगा दशा मध्यम रहेगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२१

हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है अरब दशा श्रेष्ट आने वाली है कामना पूर्ण होगी जो काम चित्त में धारण करा है वह सफल होगा चिंता दूर होगी मनो कामना पूर्ण होंगी मित्रों से प्रीन होगी कष्ट पीड़ा नष्ट होगी जो कार्य चित्त में विचारा है काम ठीक बठेंगे दशा बहुत दिनों से मध्यम चल रही थी व्यय विशेष हुवा जोव की प्राप्ति होगी ऋण की न्यूनता हो प्रश्न श्रेष्ट है उद्योग व उपाय पहले तुमने बहुतेरे करे पर निर्फल गये काम काबू से बाहर है पर तपरब ईश्वर आनन्द खुश ख़बरी की वार्ता करेंगे गुप्त लाभ होगा यह जो प्रश्न विचारा है इसके वास्ते श्री देवी दुर्गा लक्ष्मी का पृजन कराओ्र चावल चांदी स्वेत वस्त्र स्वेत फूल का दान करातर। तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं सो उनका उपा- करने से शीघ्र मन की कामना पूर्ण होगी और मन में एक जीव का ध्यान रहता है।

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तात्कालिक भूयु प्रश्न १३० 2 हे प्रच्छक तुम्हारा काम काबृ से बाहर है और धन का व्यय विशेष है तकस्मात् यह मामला है और जीवकी चिंता बनी रहती है तप्रर आरदमी को भी चिंता बहुत है इज्जत का ख्याल है बड़े २ खर्च दीखते हैं और तुम परोपकारी सत्य वीे को पसंद करते हो छल छिद्र के काम को पसंद नहीं करते तुम्हारा प्रश्न जीव और धन का है और इज्जत का भय होता है अ्नेक प्रकार की वार्ता सोचते हो पर निर्फल हो जाती है पता नहीं लगता जतन भी करे अब नवग्रहां का दान मंत्र जाप करात यह काम ईश्वर चाहे तो ठीक होने धाला है और आदमी भी सहायता करेंगे कई शत्रु हैं ग्रह इष्ट देव का पूजन जाप कराने से मनोकामना पूर्ण होगी और मिलेगा वंश की वृद्धि होगी जीव की प्राप्ति भी होगी तर लक्ष्मी का चमत्कार भी प्राप्त होगा औरर आराम होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३१

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न करने का यह मामला है स्वर दुस्वभाव है घर में चमत्कारी हो क्लेश आदि मिटे व्याधा टले जिसका प्रश्न है वह चीज मिलेगी या न मिलेगी मंगलाचार कब तक होगा लाभ खुशी कब तक होगी ऐसी दशा कब तक रहेगी जीव की चिंता रहती है वंश की वृद्धि हो आराजकल तुम जो सोचते हो कुछ उसमें होता है कुछ दो तीन ग्रह रास पर नाकिस आारहे हैं सो उन का उपाय दान पुराय जाप कराने से चित्त का मनोरथ सिद्ध होगा खुशी प्राप्त होगी काम पराये त्रधीन है अरब तुम चींटीनाल जिमात्रो श्रेष्ट है भृखों को भोजन दो कार्य सिद्ध होगा दशा उतरने वाली है मनोरथ पूर्ण होंगे त्रप्रनेक प्रकार की लाभ की सुरत और यह जो ऊपर से फिक्र दीखते हैं सो सब कांटा सा निकल जायगा दशा मध्यम है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३२ 7 इस समयजो आपने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद्ध होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग ॥चार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चांदना हो आरराम हो कब तक दिन कैड़े हैं गुष्त लाभ भी होगा यह भगड़ा कब तक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन अच्छे त्र्ावेंगे ब्राह्मण को दही लडड मिष्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी और तुम्हें अपने इष्ट देव का पूजन घर में पित्र पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से तरबके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे शत्रु रूपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई -२ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निर्फल हो जाती हैं लेकिन अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३३

इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यिति धन न्यूनं दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य दृष्टयः ग्रहपीड़ो च प्राप्नोति भृगुणा परिभाषितः मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता कब तक पूर्ण होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी आज कल दिन नाकिस हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य अब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पत्रा देखो नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप छाया दान कराने से अब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से बाहर है मामला ईश्वर के आधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में और है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा अन्त में अच्छा है।

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तात्कालक भृगु प्रश्न १ ₹४,'

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंना का हे कार्य पराधीन काबू से बाहर हो गया बहुतेरे यत्न करते हा बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार विद्या की सिद्धि धन की जीत श्रेष्ट दशा में होती है अब जो तुम्हें यह चिन्ता बनी है और लालसा जीव की है सो काम में विलंब है परन्तु मिलेगा और सफल होगा अतः जतन उपाय से इच्छा पूर्णं होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं आराम की सूरत होगी जीव प्राप्ति होगी इज्जत का काम हो संदेह मटेगा धन का मनोर्थ पूर होगा देवी का पूजन कराओ और अपने हाथ से वृत खांड चावल चांदी का दान करो इश्वर चाहै तो उपाय करते ही इच्छा पूर्ण होगी, और तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो असत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि घृणा करते हो

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३ ५

हे प्रच्छक चित्त चिंता भविष्यति गृह क्लेश न संशयः धनमानम हानि पीड़ा देह दीर्घता मंगलाचारक योगं वंशवृद्धि च प्राप्तये राजद्वारकं न्याय धन हानि विलम्बता इस प्रश्न का फज यह है तरह २ को वार्ता लाम की साचते हो काम काबू से बाहर है दशा कई महीने से मध्यम है न्यून दशा में धन हानि विशेष व्यय लाभ मध्यम चिंता और क्लेश नुकसान होते हैं राजद्वार में भो काम मर्जी के माफिक नहीं होते सो काम कब तक होगा जो घर में चादना और चमत्कारी हो वंश की और इज्जत की वृद्धि हो तरर वह मिले एक जीव में चित्त विशेष रहता है सो शवजी का पूजन करना चींटीनाल देना श्रेष्ट है और अपने हाथ से गुड़ गेहूं ल्ाल वस्त्र लाल पुष्प आदि दान करके किसी ब्राह्मण को दो ईश्वर चाहे तो अब काम शीघ्र ही वन जावेगा और कामना पुर्ण होगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न . १३६

हे प्रच्छक गप्त चिंता शरीरेन धन हानि च दृश्यते ग्रह पीड़ा मविष्यति दृश्यते भाग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगला चार हर्षक धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्तये इस समय दुस्वभाव स्वर है इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगलाचार राजद्वार में न्याय किसी प्यारे की चिंता विद्या का लवाभ रोजगार क्रत्य पीड़ा का यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारीं रास पर आरजकल नाकिस चल रहे हैं पत्रे में देखो नाकिस हैं या नहों जरूर हैं इन नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप कराओ जिससे भाग्य की वृद्धि का ताला खुले और उच्च पदवीं प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगलाचार के कार्यों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्त हो अंजाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३७

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव रूप लक्ष्मी का है चिंता दीर्घ है और स्वर दुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शका अलग हो जाना और दूमरा रोजगार मध्यम होना चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की लालसा बनी रहती है जनन भी करते थे परन्तु इथा चले जाते थे चिंता और इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है अब के भी काम होगा अथवा नहीं राजद्वार की उच्च पदवी की आशा है अब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आ्रधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भाग्य उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है तरप्रब तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगीं। कई ग्रह रास पर कैड़ेहैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट तरर बाधा नष्ट होकर लाभ की सूरत अच्छी बनेगी वह मिलेगी

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नातालिक भृगु प्रश्न १३८

हे प्रच्छकु दीर्घचिंता च प्राप्नोति जीव प्राप्ति न दृश्यते भयभीत हृदा पराधीनोपि क्रत्यया राजद्वारकंकार्य धनव्यय भविष्यति त्रन्तकार्य महा सिद्धि भृगुणापरिभापतः। तुम पर बहुत दशा न्यून थी। अरनेक प्रकार के फिक्र, जीव चिंता और धन का जाना तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में तत्पर लगा रहता है। नई नई वार्ता लाभ के लिये सोचते हो परन्तु वृथा चली जाती है अब रोजगार की सूरत होगी यह जो जीव की लालसा वनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलंब है देर से विजय प्राप्त होगी काम में लाभ होगा छाया दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्एं दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी और दूसरा लाभ का कार्य भी सिद्ध होगा काम देव की उनमत्तता में नीच बुद्धि हो जाती है सो ग्रह का प्रभाव है अन्त में कुशलता है। और भूमि का लाभ भी हागा।

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तात्कालिक भतु प्रश्न १३१ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा काम काबू से बाहर है दिन रात विवित्र तरह २ की वार्ता और लाभ सोचते रहते हो बनकर काम की आर्रानन्द की सूरत नध्यम सी से गई है ऐसी अवस्था में एप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथाधन का चIा जाना और मित्र का ख्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याधा हा खोटी दशा सें बहुत बातों का ख्यान होता है तुम पत्तियों को अन्न बाजरा भोजन दो और श्री बटुक भैरव का पृजन कराओ यह मंत्र.पो उों ऐं हीं क्लीं श्री विष्ुभगवान मम तरपरपराध क्षमाय कुरु कुरु सर्व विध्न विनाशाय ममकामना पूर्ण कुरु कुरु स्वाहा। मंत्र के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ट होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार मं विजय होती हे गई हुई जक्ष्मी फिर वापिस आती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शांति प्राप्त होने लगते हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १४८

हे प्रच्छक तुम्हारा कोम बन जायगा स्वर दाहिना चलता है इस समय के प्रश्न का यह फल है कि चिंता और फिक्र मिटेगा गंई सो गइ त्रप्रब राख रही जिसने उत्पन्न किया है वही विजय करेगा और जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से लाभ होगा खुशी होगी घर में मंगलाचार होगा एक मित्र में विशेष मन रहता है वह तुम्हारे आधीन रहेगा भूमि लाभ होगा दशा बहुत दिन से मध्यम चल रहीं थी तब दशा बदलने वाली है कामदेव की प्रबलता में न्यून बुद्धि हो जाता है तब जो तुग्हारी रास पर ग्रह मध्यम चल रहे हैं उनका दान निश्चय करके करता उसके बाद में खर्वसिद्धि होगी। काम होता २ रुक जाता है शत्रु हानि करते है काम और के आधीन है कई आ्रदमियों से मिलके काम होगा तब दशा अच्छी आने वाली है यह जो और काम है सो उस कार्य में मी विजय प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १४१ 7 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम मालूम होता है ऐसी अवस्था में पुत्र की लाभ सगाई रोजगार मध्यम दशा में मुशकिल होते हैं अथात् होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान और धन हरण होता है राजद्वार से सफज होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है त्रौर गुप्त शत्रु भांजी मार देते हैं एक मनोर्थ बहुत दिन से सोच रक्खा है ईश्वर चाहे तब हो अब इष्टदेव औरप्रर घरके पित्रों के निमित्त कुछ जप दान आदि कराओ जिससे मनोर्थ सिद्ध हो जिसकी चाहना है वो मिचे जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में अधिक लाभ होगा और राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मङ्गल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृयु प्रश्न १४२

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न उत्तम श्रेणी का है जिससे अब तुम्हारा मनोर्थ सिद्ध होगा। श्रेष्ट दशा आपराने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ त्रन्न से लाभ और जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, यात्रा में लाभ और मन का मनोर्थ भी सिद्ध होगा अब तुरहारी रास पर दो ग्रह नाकिस और बाकी हैं पत्रा देखो उनका उपाय जरा औरर श्रद्धा से करा दो त्रर शाम को और चींटीनाल जब तक बने जिमाया करो दशा उत्तम आने वाली है पिछजे दिन बहुत फिक्र से वीचे सो अब तुप उपरोक्क कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे तर्रास पूगी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चत्त विशेष कर रहता है उसमें भी सफलता प्राप्त होगो सो आनन्द में बीतेगी कामदेव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून भी हो जाती है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १४३ 7 7 हेप्रच्छक अब क्या फिन करते हो तुम्हें खुश खबरी प्राप्त होने वाली है गई सा गई तरब राख रही तपरब बहुत देगा वह मनोर्थ पूर्ण होंगे परन्तु एक फिंक्र भारी दीखता है ऊपर से खर्च आरवेहै औरर पास धन विशेष नहीं दीखता परन्तु चिंता मत करना क्यों कि तुम्हारा काम बड़ी इज्जत के साथ बनेगा और कई जगह से लाभ होगा करने वाला और है वही फिक्र कर रहा है अपरब विशेष लाभ की सूरत होगी मित्र में चिन बहुत रहता है वो भी चित्त से प्यार करे है तरप्रगर तुम शीघ्र इस काम की सिद्धि चाहते हो तो श्री गंगा जी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिर त और सट्टी चावल दही दान करो जिसके करने से तुम्हारा काम शीघ्र सिद्ध होगा तरर गुप्त लाभ होगा घर में चांदना होगा और एक काम तुम से गुप्त से गुप्त नाकिस बना थ सो भी नष्ट होगा सो ईश्वर का ध्यान रक्खा करो कुशलता रहेगी

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नात्कालिक भृगु प्रश्न १४४ 7 हे प्रच्छक तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लाभ की सुरत में हानि पंदा होगई गप्त शत्रु बुराई करते हैं तब एक और खुशी की बात तुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन माल का निकल जाना पीड़ा का घर मेंबास होना इज्जत का भय होना हुवा हुशाया मंगलाचार को हट जाना और राजद्वार की चिंता हानो यह सब बात नाविस दशा में होती हैं अब तुम सायंकाल को घृत का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो और जलका लोटा भर के शिवजी को औररर पीपल पर चढ़ाया करो और इतवार को ब्राह्मण जिमाओर अथवा वृत किया करो कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पत्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यून हो जायगा जो उपरोक्क कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्ण होगी और कुशलता प्राप्त होगी।

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तात्काालक भूय प्रश्न १४५

हे प्रच्छक अब तुम्हारे खोटे दन व्यतीत हो गये। अच्छे आने वाले हैं अब तक तुम पर बहुत नाकिस दशा चल रही थी। नाकिस दशा में ही ऐसे काम होते हैं। जो फिक्र तुम पर है। बहुत नुकसान उठाया और लाभ कम रहा पीड़ा रूपी क्लेश में धन खर्च हुआ और चीज निकल गई। इज्जत का भय हुवा परन्तु तुम्हें तब अपने इष्ट देव का पूजन पितृ पीड़ा का जतन और क्रूर ग्रह का दान निश्चय करके कराना चाहिये। फिर यत्न के कराने से तुम्हें जल्दी और नये लाभ होंगे। जीव की प्राप्ति होगी मित्र से मुला- कात जो है विशेष होगी ग्रह की पीड़ा नष्ट होगी। शत्रु का नाश होगा और ये जो मन की कामना है सो पूर्ण होगी और बड़े २ फिक्र जो ऊपर से खर्च के दीख रहे हैं। सो सब आानन्द में कांटा सा निकल जायगा कुशलता प्राप्त होगी, काम सिद्ध होगा।

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तात्कालिक भृयु प्रश्न १४६

हे प्रच्छक तुम्हारा इस समय का प्रश्न बहुत श्रेष्ट दीखता है बुरे दिन गये और अच्छे आने वाले थे सो तुम्हारी रास पर दो तीन ग्रह मध्यम आरा गये हैं तरप्रौर तुमने उनका दान जप कराया नहीं है इस कारण ऐसे फिक्र चिंता उठाई लाभ कम रहा खर्च विशेष है पीड़ा की चिंता चित्त में, भयसा होना, काम उम्दा लाभ का अभी नहीं बना, जीव की चिंता है, वंश की वृद्धि और मंगलाचार होना एक अपना प्यारा है उसी में चित्त बहुत रहता है राजद्वार का चता है अब छाया दान और चने की दाल पेला वस्त्र हल्दी स्वर्णादान श्रद्धानुसार कराना चाहिये ऊपर के दान पुन्य के कराने से ईश्वर चाहे तो मन की कामना पूर्ण होगी उच्च पदवी मिलेगी जीव की प्राप्ती होगी लाभ का रास्ता खुलेगा भूमि से लाभ और पीड़ा नष्ट होगी और राजद्वार से भी काम में सफलता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृयु प्रश्न १६७

हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न मध्यम है त्रभी तुम्हारी मर्जी के अनुसार काम होने में देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं अगर कभी कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गप्त है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगला चार में देर है एक जीव की भी अभिलांषा है अरब तुम नवग्रह का पूजन दान करो उसके कराने से दशा न्यून बदलेगी श्रेष्ट तप्येगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लोभ होगा गई हुई चीज फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से काम सिद्ध होगा ग्रप्त चिंता मिटेगी चित्त में त्र्प्रनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्तकी वार्ता चित्तमें समा जाती है तपरब शीघ्र ही खुशी की वार्ता सुनने में त्र्रावेगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १४८

हे प्रच्छक जब दशा जीव पर नाकिस त्राती है और नाकिस ग्रह चौथे आठवे बारहवें में हो जाते हैं तब ऐसे ही काम होते हैं। खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है और एक जीव का बहुत ध्यान रहता है सो आराम मिलेगा और हाथ से निकला हुआ धन देर से प्राप्त होगा। जिस् काम को करना विचारतें हो, सो समभ कर करना त्भी भाग्य उदय होने में किंचित विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढ़ेगी और नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की रास पर कैड़े हैं उनका पनरा देख कर यत्न कराओर नहीं तो विशेष क्लेश होगो दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें आराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा। विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूलो मत।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १४१

हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि भ्रमण रहती है। ईश्वर को सत्य नहीं मानते हो जिसने इतना बड़ा किया है और बराबर रक्षा करी है सो वह कहीं चला नहीं गया है बराबर रक्षा करेगा उसका भजन किया करो अन्त में आशा पूर्ण होगी और गई सो गई अब राख रही और वो मिलेगा मौजूद है चिंता मत करो आराम की सुरत होने वाली है एक काम में विशेष लाभ होगा परन्तु अब मंगल के ब्रत किया करो और पत्तियों को बाजरा भोजन डाल दिया करो बड़ा पुन्य का काम है क्रूर ग्रहों का जप दान कराते रहा करो ऐसा उपाय कराते रहने से मन वांछित फल मिलेगा। कार्ज सिद्ध होंगे जो बड़े सर्च के काम समझ रक्खेहैं वोभी कांटा सा होकर आनन्द में. निकल जायगा काम देव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून हो जाती है चिंता न करो उसने चाहा तो शीघ्र ही कुशलता प्राप्त होंगी।

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तात्कानिक भृगु प्रश्न १.० 7 7. हे प्रच्छक तुम्हारे इस समय के प्रश्न का यह फल है कि तुमने जो प्रश्न विचार है सो काम सिद्ध होगा और लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी और आराम की सूरत नज़र आती है पिछले साल कुद् महीने मध्यमरह खर्च विशेष रहता था और आ्रमदनी न्यून होती थी उसने चाहा तो तब भाग्य उदय होगा औ्रौर काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो औरर घृत सांभर श्रद्धा अनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे से आनन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यून बन गया सोईश्वर भी जाने है अब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी और बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगसी चित्त में उठती हैं और समा जातीं हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १५१

हे प्रच्छक तुम्हारे कार्य में विलंब है काम अभी ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खाल कर देखा सोचते हो कुछ और होता है कुछ। कई वार्ता की चता बनी हुई है। जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रूपी क्लेश की परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने का पसंद करते हो झूट से क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो। तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि त्रकल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की झूंट सत्य का परीक्षा समगलेते हो एक काम न्यून बनगया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमाओ्रो ऐसा कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा तरर लाभ होगा। तुमने अपने ऊपर बड़ा जो फिक्र समझ रक्खा है सब काम तरानन्द में हो जायगा।

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तात्कालिक सृगु प्रश्न १५२ 2 हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न शगुप इस बक्क बहुत श्रेष्ट है। तुम्हें बिना कारण चिता फिक्र भयसा उत्पन्न हो जाता है। बुद्धि भ्रमण हो जाती है। गया सो गया फिर आरयेगा मिलेगा क्या मिलेगा, आराम मिलेगा धन की प्राप्ति होगी, घर में मंगला. चार होगा पीड़ा का नाश होगा जीव की खुशी और प्राप्ती होगी अकस्मात खुश खबरी सुनने को मिलेगी तुम अपने इष्ट देव मित्र देवताओं के निमित्त वस्त्र मिष्टान्न, कच्चा दूध, मावश्या को पिलाते रहाकरो इस प्रकार दान पुन्य कराने से रोजगार बढ़ेगा उच्च पदवी पाने में सफल होगे एक जीव का ध्यान बना रहता है मित्र के ध्यान में चित्त बहुत रहता है तुम्हें विद्या मध्यम है परन्तु त््रकल बुद्धि तेज हैं किसी का बुरा नहीं चाहते हो सत्य वार्ता को पसन्द करते हो खर्च है अन्जाम कुशल हैं राजद्वार से अन्त में विजय

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १७३ 2 हे प्रच्छक तुम्हारे खोटे दिन गये तब श्रेष्ट आरराने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रक्खा है उसे देख माल कर सोच समभ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं त्रब आगे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन जोप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा आयेगी लाभ की सूरत होगी तुम्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यून रहा मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है ऐसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तम दशा आराने पर लाभ अधिक होगा मित्रों से प्रीति बढ़ेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चीज वापस मिलेगी। तुम रामनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बड़ा श्रेष्ट काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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तात्काालिक भृगु प्रश्न १५४ 2 हें प्रच्छके इस समय तुम्हारी रास पर कई ग्रह नाकिस मौजूद हैं ऐसी अवस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, तमदनी होती २ रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो वहां पर अधूरा भी नहीं होता है ऐसी दशा में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लाल्सा बनी रहती हे जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय कराओ उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्चात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है द्वर होगी तुम सर्दी में कम्बल अथवा गर्म वस्त्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरुर कराओ यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १५५

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता है। प्रश्न दो तरह के से हैं गई चीज मिलना दूसरा लाभ प्राप्ति है तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको गुप्त चिंता लगी रहती है और इज्जत का विशेष ध्यान रहता है मन के माफिक लाभ नहीं होता है एक जीव में ध्यान विशेष रहता है तुम पर दशा मध्यम चल रही हे पञ्चांग में देखकर उपाय करातर्प्र। उपाय के कराने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा बाभ कार्य होगा तुम गऊ सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को त्रन्न मिष्टान मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रति शीघू तुम्हारी दशा बदलेगी और प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घरमें चांदना सा देखाई देगा अर्थात सर्व प्रकार से आरनन्द होगा

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तात्कालक भृयु प्रश्न १७६ 2 हे प्रच्छक जो हो गया सो हो गरा अब तुम्हें कार्य चतुराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नासिक दशा चल रही है तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय कराओ उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ त्र्रौर मङ्गलाचार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यून हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रुपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पृजन किया करो बन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सब प्रकार का आ्र्प्रानन्द होगा तम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १७७

हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न का यह फल हैं तुम पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुवी लाभ कम हुआ अब तुमको दशा श्रेष्ट आने वाली है तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा है काम ठीक बैठेगा तु्म्हारा प्रश्न उत्तम है तुमको भाग्य की वृद्धि होगी घर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की आरशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारण तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय कराओ्र उपाय होने पर शीघ्र दशा अच्छी त्र्प्रावेगी अच्छी दशा के ताने पर लाभ की नई नई सूरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का वृत रक्खा करो और अनाथों की सहायता किया करो इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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नात्कालिक भगु प्रश १५८ 2 2 हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किमी कार्य में मन नहीं लंगता है तुम्हें दशा न्यून चल रही है ऐसी दशा में चिंता क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है अ्रनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता २ रुक जाता है तुमको एक जीव की चता भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तम्हारा दान पुरय में भी चित्तनहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये तरगर जो बन सके तुम दान अरवश्य किया करो और भक्ति पूर्बक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय तपवश्य करातर उपाय पृजन दान पुएय करनेसे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १ ५१

हे प्रच्छक तुम्हारा प्रश्न श्रेष्ट है जो हो गया सो हो गया अब चिंना आर फिक्र मिटेगा तुम्हारा कार्य सफल होगा जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी और भृमि से लाभ होगा मंगलाचार और प्रसन्नता होगी तम्हारा एक जीव में चित्त बहुत रहता है तुम तरह २ की वार्ता का तक्न करते हो तुम्हारा चित्त चलायमान रहता है तुमको बहुत दिन से दशा मध्यम चल रही थी तरब दशा बदलने वाली है तुम जो काम सोचते हो उसमें तारभंग हो जाता है गुप्त शत्रु तुमको नुकसान पहुंचाते हैं तर्थात ऊपर से तुमसे मीठी २ बात करते हैं और अन्दर से काट करते हैं तुमने एक काम बहुत दिनों से सोचरक्खा है ईश्वर चाहे तो तवश्य होगा इष्टदेव पित्रों के निमित्त दान पूजन कराश उपाय न कराने से कार्य सिद्ध देर से होगा पुर्णमासी को सत्य नारायण का व्रत रक्खा करो कथा कराओर इसके कराने से मनोकामना पूर्ण होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १८०

हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ट है तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा तुमको जीव और लाभ की चिंता बनी रहती है तुमने लाभ का उद्योग किया परन्तु लाभ कम होता है सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा कष्ट व्याधा रंज आादि नष्ट होंगे। घर में खुशी होगी तुम तरह २ का उद्योग सोचते हो परन्तु।चत्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है पीड़ा की चिंता चित्त में भय रहता है काम उत्तम लाभ का अपभी नहीं बना ओर एक जीव में चित्त विशेष रहता है राजद्वार का भी ध्यान बना रहता है दशा मध्यम चल रही है उसका श्रद्धानुसार उपाय करो औरर बन सके तो शिव मन्दिर में नित्य वृत का दीपक जलाया करा सवेरे ही मन्दिर की सफाई किया करो अथवा सोमवार का व्रत किया करो ईश्वर चाहे तो मनो कामना पूर्ण होगी बाधायें नष्ट कष्ट आरदि समाप्त होंगी उच्च पदवी मिलेगी जीव प्राप्ति होगी