Books / Bhrigu-Prashna

1. Bhrigu-Prashna

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DAMAGE BOOK

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UNIVERSAL LIBRARY OU_186553 UNIVERSAL LIBRARY

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OUP--901--26-3-70--5,000

OSMANIA UNIVERSITY LIBRARY

Call No. H83.5 S13T Accession No. H4265

Author SHELLY Eard

Title C1l effid d Ed 281

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श्री गङेशायनमः

तात्कालिक भगु प्रश्न

—: श्रर्थात :—

प्रश्न कल्प वृत्त

—: जिसको :—

पं० हरदेव महाशय मेठ निवासी के प्राचीन पुस्तक से देशो॑ भापा में अनुवाद करके पुस्तक बतलाने वालों के लभोर्ष

—: प्रकाशक :—

पंडित लद्दमीभूषण शिवभरोसे

ज्ञान सागर प्रेम, महाजन पाड़ा

मेठ — शहर ।

मूल्य प्रति पुस्तक तीन रुपये

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जरूरी सूचना

१—इस पुस्तक से प्रश्न बतलाने वालों को ईश्वर चाहे तो शीघ्र लाभ होने लगता है इधर प्रश्न बतलाने प्रारम्भ करो उधर दक्षिणा बतुने में डालना शुरू करलो भैया भैया ईश्वर चाहे तो प्रश्न बतलाने वालों के गहरे हो जायेंगे और पुस्तक तो खरीदे ही होंगे परन्तु ऐसी पुस्तक एक ना मिली होगी।

२—यह बात ध्यान में रखनी चाहिये कि इस पुस्तक से जो स्त्री या पुरुष प्रश्न पूछे तो शुद्ध चित्त से प्रथम पुस्तक की पूजा श्रद्धा प्रमाण फल फूल या मिष्टान दक्षिणा मे करे खाली हाथ प्रश्न पूछना और बताना दोनों को अशुभ है।

३—नीति शास्त्र में कहा है परिडत के पास गणिका के पास बैद्य के पास बहन बेटी अर्थात् मान ध्यान के पास किसी कार्य को जाय तो खाली जाने से अशुभ है कार्य की सिद्धी नहीं होती है।

४—इस पुस्तक से जरूरी कार्य जो जो प्रश्न है सो पूछो परन्तु परीक्षा या पुस्तक का इम्तहान लेने के वास्ते जो प्रश्न पूछे और बतलावेगा उन दोनों के वास्ते अशुभ फल जानों।

निवेदन

इम पुस्तक का सर्वाधिकार एक्ट २५ सन् १८६७ के अनुकूल यन्त्राधीशा प्रकाशक के आधीन संरक्षित है इसलिये यह पुस्तक कोई महाशय बिना प्रसाधिक्ष की आज्ञा के न छापे।

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( ग )

प्रश्न बताने की रीति

इम पुस्तक मे प्रश्न बताने की बहुत सुगम यह रीति है प्रश्न बूभने वाला शुद्ध चित्त से हाथ पैर धोकर जब प्रश्न बूभे तो फूल, पान, दक्षिणा लेकर श्रावे तब उमको पूर्व को मुख करके बठलावे और उससे कहे कि भृगु जी महाराज का ध्यान धर कर जो जो प्रश्न तुम्हें बूभने हों ग्रपने चित्त में मोचनो जब वह सोचले तब उससे विष्णु भगवान्का ग्रोराधन करा कर कहे यह जो प्रश्न चक्र है इसके किसी कोठे में ग्रंक की संख्या पर उँगली धरे जब वह उँगली धरे तो उँगली धरने वाली संख्या में प्रचंडक के नाम के ग्रक्षर ग्रोर भृगु जी क नाम के ग्रक्षर गिन कर जोड़ लो फिर ग्रक्षर जोड़ने से जो संख्या हो वम उसी ग्रंक संख्या का पत्रा प्रर्थात पुस्तक का वही ( पृष्ट) खोल कर प्रश्न पढ़़ कर प्रचंडक को सुना दो ईश्वर चाहे तो वही प्रश्न निकलेगा जो प्रचंडक ने विचार है वादी प्रश्न कम मिलने तो फिर नम्बर ठीक ठीक समझ कर जोड़ो प्रचंडक फन सुना दो।

प्रापका शुम्रचिन्तक—

पंडित लदमी भूषए शिव भरोसे

ज्ञान सागर प्रेस, महाजन पाड़ा

मेरठ - शहर

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प्रश्न चक्रम्

१ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १०

११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९ २०

२१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९ ३०

३१ ३२ ३३ ३४ ३५ ३६ ३७ ३८ ३९ ४०

४१ ४२ ४३ ४४ ४५ ४६ ४७ ४८ ४९ ५०

५१ ५२ ५३ ५४ ५५ ५६ ५७ ५८ ५९ ६०

६१ ६२ ६३ ६४ ६५ ६६ ६७ ६८ ६९ ७०

७१ ७२ ७३ ७४ ७५ ७६ ७७ ७८ ७९ ८०

८१ ८२ ८३ ८४ ८५ ८६ ८७ ८८ ८९ ९०

९१ ९२ ९३ ९४ ९५ ९६ ९७ ९८ ९९ १००

१०१ १०२ १०३ १०४ १०५ १०६ १०७ १०८ १०९ १२०

१११ ११२ ११३ ११४ ११५ ११६ ११७ ११८ ११९ १२०

१२१ १२२ १२३ १२४ १२५ १२६ १२७ १२८ १२९ १३०

१३१ १३२ १३३ १३४ १३५ १३६ १३७ १३८ १३९ १४०

१४१ १४२ १४३ १४४ १४५ १४६ १४७ १४८ १४९ १५०

१५१ १५२ १५३ १५४ १५५ १५६ १५७ १५८ १५९ १६०

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हे प्रचण्ड़क तुम्हारा प्रश्न चिंता रूपी कष्ट का है खर्च विशेष होगा जीव की लालसा जीव चिंता बनी रहती है तरह तरह के उदवैग चित्त स्थिर नहीं रहता है काम कानून से बाहर है दूसरे श्रादमियों को भी बहुन फिक्र है जव दशा मध्यम होती हे श्रपने भी पराये हो जाते हैं परन्तु श्रभी कार्य में विलम्ब है कामना पूर्ति तो होगी परन्तु पाप ग्रहों का पूजन विधि पूर्वंक वटुक भैरव का मन्त्र भी जपवात्रो ( मन्त्र ) उं एं ह्रीं श्रीं वटुक भैर्वाय श्रापदुद्धारणाय सर्वविघ्न निवारणाय ममसिद्धौ कु रु कु रु स्वाहा । इस मन्त्र के जाप से मनो— कामना पूर्ण होगी । श्रौर यह जो चित्त को दीर्घ चिंता हैं सो काम होगा श्रौर मिलेगा खर्च विशेष है एक जीव में चित्त भी बहुत रहता है लाभ श्रधूरो होते हैं नई नई वार्ता का चिन्तवन रहता है परन्तु श्रन्त में कुफलता है ॥

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हे प्रचण्ड तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की वार्ता होने वाली है मिलेगा मर्ज़ी के माफ़िक़ कार्य होगा चित्त उस बिना ठ्याकुल सा रहता है दशा न्यूून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्च श्रधिक हो रहा है जीव का दुख रहता है काम द्रुमरे के काबू में है बनता बनता रुक जाता है और दो तीन ग्रह तुम्हारी रास पर कैड़े हैं पंचाङ्ग में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थिर चित्त करके पंडित जी से कराश्रो उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा और यह जो फिक्र है मो दर होगा और कई फिक्र खर्च के श्रा रहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी प्राप्ति होग परन्तु विलम्ब है पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गुप्त लाभ होगा श्रब ग्रनुसार दिखाई देता है कार्य में भी लाभ होगा श्रगर हो सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो।

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इस समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठीक बैठेगा या न बैठेगा इज्जत का भय हो जाता है ऐेसी दशा में गवन भी होना है गुप्त चिंता रहती है कभी चित्त में कुछ आता है कभी कुछ आता है ऐेसी दशा में खर्च विशेष होता है एक गुप्त मनोर्थ है सो कब तक पार होगा सो अब न्यून दशा वीचने वाली है और श्रेष्ठ ग्राने वाली है परन्तु काम में देर है। इष्ट देव को पूजन करना चाहिये पित्रो के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ठ है कई महीने से भाग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति होगी और जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो अब बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के मुताबिक होगा काम कष्ट से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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हे प्रचण्डक तुम्हारी राश् पर ग्राजकलं कई ग्रह नाकिस हैं पञ्चांग खोलकर देखो जब ऐसे ग्रह रास पर ग्राते हैं तो लाभ कम होता है शत्रु उत्पन्न होते हैं मित्र व प्यारों से जुदाई होती है कष्ट ग्रौर रंज होते हैं ग्रामदनी होती है,तो रूक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो ग्रधूरा होता है एक जीव लालसा की ग्रास लगो रहती है नयियं दीर्घ लाभ मध्यम होता है काम होने को हो तो फिर तार भंग हो जाता है सो ग्रप्रे मध्यम ग्रहों का दान जाप कराओ ग्रोप भी यह मंत्र जपो ओं ह्रीं वामदेवाय नमः बटुक भैरवाच ग्राप दुर्द्दारनाय मम रत्ना कुरु कुरु स्वाहा दान मंत्र जाप करने से यह जो तुम्हारे मन की कामना है पूर्ण होगी प्राप्ति होगी कष्ट दूर होकर पुत्रोंका लाभ होगा राज्यसे सफलता मित्र से प्रीत विशेष इतने उपाय न बनोगा दशा मध्यम रहेगी

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हे प्रचंडक यह जो तुमने प्रश्न किया है श्रेष्ठ दशा श्राने वाली है कामना पूर्ण होगी जो काम चित्त में धारणा करा है वह सफल होगा चिंता दूर होगी मनो कामना पूर्ण होंगी मित्रों से प्रीति होगी कष्ट पीड़ा नष्ट होंगी जो कार्य चित्त में विचारा है काम ठीक बंटेंगे दशा बहुत दिनों से मध्यम चल रही थी विशेष हुवा जोव की प्राप्ति होगी ऋण की न्यूूनता हो प्रश्न श्रेष्ठ है उद्योग व उपाय पहले तुमने बहुतेरे करे पर निर्फल गये काम कानू से बाहर है पर अब ईश्वर ज्ञानन्द खुश खबरि की वार्ता करेंगे गुप्त लाभ होगा यह जो प्रश्न विचारा है उसके वास्ते श्री देवी दुर्गा लदमी का पूजन करात्रो चावल चांदी स्वेत वस्त्र स्वेत फूल का दान करात्रो तुम्हारी राशि पर कई ग्रह मध्यम हैं सो उनका उपाय करने से शीघ्र मन की कामना पूर्ण होगी श्रोरे मन में एक जोव का ध्यान रहता है

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हे प्रच्छक इस समय के प्रश्न करने का यह मामला है स्वर दुस्वभाव है घर में चमत्कारी हो क्लेश आदि मिटे ठ्याधा टले जिसका प्रश्न है वह चीज मिलेगी या न मिलेगी मंगलाचार कब तक होगा लाभ खुशी कब तक होगी ऐेसी दशा कब तक रहेगी जीव की चिंता रहती है वंश की वृद्धि हो राजकलत तुम जो सोचते हो कुछ उसमें होता है कुछ दो तीन ग्रह रास पर नाकिस आरहे हैं सो उन का उपाय दान पुराय जाप कराने से चित्त का मनोरथ सिद्ध होगा खुशी प्राप्त होगी काम पुराये श्राभीन है श्रथ तुम चींटीनाल जिमात्रो श्रेष्ठ है भूखों को भोजन दो कार्य सिद्ध होगा दशा उतरने वाली है मनोरथ पूर्ण होंगे श्रनेक प्रकार की लाभ की सुरत और यह जो ऊपर से फिक्र दीखते हैं सो सब कांटा सो निकल जायगा दशा मध्यम है

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तक्‍सालोक भृगु प्रश्न १३

इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यति धन न्यूने दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य हस्तय: ग्रहगोड़ो च प्राप्तोति भृगुपा परिभाषित: मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता कब तक पूर्ण होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी ग्राज कल दिन नाक्षिम हैं वर में चांदना कब तक हो यह कार्य ग्रब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पन्ना देखो नाक्षिम ग्रहों का दान मंत्र जाप ग्राया दान कराने से ग्रब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से बाहर है मामलता ईश्वर के श्राधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में ग्रौर है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा ग्रन्र्त में ग्रच्छा है।

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हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंता का हे कार्य पराधीन काबू से बाहर हो गया बहुतेरे यत्न करते हे बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार विद्या की सिद्धि धन की जीत श्रेष्ठ दशा में होती है अब जो तुम्हें यह चिन्ता बनी हे और लालसा जाव की हे सो काम में विलंब हे परन्तु मलेगा और सफल होगा श्रत: जतन उपाय से इच्छा पूर्ण होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं आराम की सूरत होगी जीव प्राप्ति होगी इज्जत का काम हो संदेह मिटेगा धन का मनोर्थ पूर्र्ण होगा देवी का पूजन करात्रो और अपने हाथ से वृत्त खांड चावल चांद का दान करो इश्वर चाहे तो उपाय करते ही इच्छा पूर्र्ण होगी और तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो असत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि दुतना करते हो

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हे प्रच्छन्न दीर्घचिंता च प्राप्तोति जीव प्रप्रि न दृश्यते भयभीत हृदा पराधीनोपि कृत्यया राजद्वारकंकायां धननुयय भविष्याति प्रन्तकाय महा सिद्धि भगुपापरिभापत:। तुम पर बहुत दशा न्यून थी। अ्रनेक प्रकार के फितर, जीव चिंता अ्रौर धन का जाना तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में सत्पर लगा रहना है। नई नई वार्ता लाभ के लिये सोचते हो परन्तु वृथा चली जाती है अ्रब रोजगार की सुरत होगी यह जो जीव की लालसा बनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलंब है देर से विजय प्राप्त होगी काम में लाभ होगा अ्राया दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्ण दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी अ्रौर दूसरा लाभ को कार्य भी सिद्ध होगा काम देव की उनमत्तता में नीच बुद्धि हो जाती है सो ग्रह का प्रभाव है अ्रन्त में कुशलता है। अ्रौर भूमि का लाभ भी होगा।

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हे प्रचण्ड तुम्हारा काम काम से बाहर है दिन रात विचित्र तरह २ की बातों और लाभ सोचते रहते हो बनकर काम की ग्रानन्द की सुरत मध्यम सी हो गई है ऐेसी प्रवस्था में गुप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथा धन का च जाना और मित्र का ख्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याधा हो खोटी दशा में बहुत बातों का ख्यात होता है तुम पत्तियों को ग्रन्न वाजरा भोजन दो और श्री बटुक भैरव का पूजन कराओ यह मंत्र जपो उ ऐं हीं क्लीं श्री विष्णुभगवान मम अपराध नमाय करु करु सर्व विघ्न विनाशाय समकामना पूर्ण करु करु स्वाहा। मंत्र के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ठ होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार में विजय होती हे गई हुई जदमी फिर वापिस ग्राती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शान्ति प्राप्त होने लगते हैं

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हे प्रचंड तुम्हारा काम बन जायगा स्वर दाहिना चलता है इस समय के प्रश्न का यह फल है कि चिंता और फिक्र मिटेगा गई सौ ग्रह राख रही जिसने उत्पन्न किया है वही विजय करेगा और जीव को प्राप्ति होगी राजद्वार से लाभ होगा खुशी होगी घर में मंगलाचार होगा एक मित्र में विशेष मन रहता है वह तुम्हारे श्राधीन रहेगा भूमि लाभ होगा दशा बहुत दिन से मध्यम चल रही थी श्रब दशा बदलने वाली है कामदेव की प्रवलता में न्यूज बुद्धि हो जाता है श्रब जो तुम्हारी रास पर ग्रह मध्यम चल रहे हैं उनका दान निश्चय करके कराओ श्र उसके बाद में पूर्वमिद्धि होगी। काम होता २ रुक जाता है शत्रु हानि करते है काम और के श्राधीन है कई श्रादमियों से मिलके काम होगा श्रब दशा श्रच्छी ग्राने वाली है यह जो श्रौर काम है सो उसे कार्य में भी विजय प्राप्त होगी

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हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रशन उत्तम श्रेणी का है जिससे अब तुम्हारा मनोरथ सिद्ध होगा। श्रेष्ठ दशा ग्राने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ, ज्ञान से लाभ और जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, यात्रा में लाभ और मन का मनोरथ भी सिद्ध होगा अब तुम्हारी राशि पर दो ग्रह नाकिस और बाकी हैं पत्ता देखो उनका उपाय जरा और श्रद्धा से करा दो और शाम को और चिंटीनाल जब तक बने जिमाया करो दशा उत्तम ग्राने वाली है पिद्धे दिन बहुत फिक्र से बीचे से अब तुम उपरोक्त कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे ग्रास पूरी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चत्न विशेष कर रहता है उसमें भी सफलता प्राप्त होगा सो ग्रानन्द में बीतेगी कामदेव की उन्मादनता में बुद्धि न्यून भी हो जाती है।

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हेप्रचंड श्राप क्या फिक्र करते हो तुम्हें खुश खबरी प्राप्त होने वाली है गड़े सो गई श्राप राख रही श्राप बहुत देगा वह मनोर्थ पूर्ण होंगे परन्तु एक फिक्र भारी दीखता है ऊपर से खर्च श्रावे है श्रौर पास धन विशेष नहीं दीखता परन्तु चिंता मत करना क्यों कि तुम्हारा काम बड़ी इज्जत के साथ बनेगा श्रौर कई जगह से लाभ होगा करने वाला श्रौर है वही फिक्र कर रहा है श्रब विशेष लाभ की सूरत होगी मित्र में चिंता बहुत रहता है वो भी चित्त से प्यार करे है अगर तुम शीघ्र इस काम की सिद्धि चाहते हो तो श्री गंगा जी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमात्र श्रौर सटटी चावल दही दान करो जिसके करने से तुम्हारा काम शीघ्र सिद्ध होगा श्रौर गुप्त लाभ होगा घर में चांदना होगा श्रौर एक काम तुम से गुप्त से गुप्त नाकिस बना था सो भी नष्ट होगा सो ईश्वर का ध्यान रखवा करो कुशलता रहेगी

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हे प्रचण्ड तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लाभ की सुरत में हानि पदा हागइ गुप्त शत्रु बुराई करते हैं अब एक और खुशी की बात तुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन माल का निकल जाना पीड़ा का घर मेंबास होना इज्जत का भय होना हुवा हुयाया मंगलाचार का हिट जाना और राजद्वार की चिंता हानो यह सब बात नाकिस दशा में होती हैं अब तुम सायंकाल को घृत का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो और जलका लोटा भर के शिवजी को और पीपल पर चढाया करो और इतवार को ब्राह्मणो जिमाश्रो अथवा वृत किया करो कई ग्रह तुम्हारी राम पर नाकिस हैं पत्त्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यूून हो जायगा जो उपरोक्त कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्ण होगी और कुरालता प्राप्त होगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न २७

हे प्रचंडक तुम्हारा प्रश्न मध्यम है अभी तुम्हारी मर्जी के अनुसार काम होने में देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं अगर कभी कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गुप्त है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगला चार में देर है एक जीव की भी अभिलाषा है अब तुम नृसिंह का पूजन दान करोगे उसके कराने से दशा न्यूंन बदलेगी श्रेष्ठ आयेगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लोभ होगा गई हुई चीज़ फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से काम सिद्ध होगा गुप्त चिंता मिटेगी चित्त में अनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्तकी वार्ता चित्तमें समा जाती है अब शीघ्र ही खुशी की वार्ता सुनने में आवेगी

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हे प्रचंडक जब दशा जीव पर नाकिस ग्रातीं है और नाकिसग्रह चौथे ग्राठवे बारहवें मेंहो जाते हैं तब ऐसे ही काम होते हैं। खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है और एक जीव का बहुत ध्यान रहता है सो ग्राराम मिलेगा और हाथ से निकला हुग्रा धन देर से प्राप्त होगा। जिस काम को करना विचारते हो, सो समभ कर करना ग्रभी भाग्य उदय होने में किंचत विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढेगी और नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की रास पर कैड़े हैं उनका पता देख कर यत्न करात्रो नहीं तो विशेष क्लेश होगा दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें ग्राराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा। विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूलेो मत।

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हे प्रचण्डब तुमारी बुद्धि भ्रमणा रहती है। ईश्वर को सत्य नहीं मानते हो जिसने इतना बड़ा किया है ग्रौर बराबर रक्षा करी है सो वह कहीं चला नहीं गया है बराबर रक्षा करेगा उसका भजन किया करो ग्रान्त में ग्राशा पूर्ण होगी ग्रौर गई सो गई ग्रब राख रही ग्रौर वो मिलेगा मौजूद है चिंता मत करो ग्राराम की सुरत होने वाली है एक काम में विशेष लाभ होगा परन्तु ग्रष मंगल के व्रत किया करो ग्रौर पत्तियों को बाजरा भोजन डाल दिया करो बड़ा पुण्य का काम है कू ग्रहों का जप दान कराते रहा करो ऐसा उपाय करते रहने से मन वांछित फल मिलेगा। कर्ज सिद्ध होंगे जो बड़े स्वर्च के काम सम्भ रख्खे हैं वो भी कांटा सा होकर ग्रानन्द में निकल जायगा काम देव की उनमत्तता में बुद्धि न्यूनी हो जाती है चिंता न करो उसने चाहा तो शीघ्र ही कुशलता प्राप्त होगी।

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हे प्रचलक तुम्हारे इस समय के प्रशन का यह फल है कि तुमने जो प्रशन विचार है सो काम सिद्ध होगा श्रौर लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी श्रौर श्राराम की सूरत नज़र श्राती है पिछले साल कुछ महीने मध्यम रहे खर्च विशेष रहता था श्रौर श्रामदनी न्यूून होती थी उसने चाहा तो श्रब भाग्य उदय होगा श्रौर काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो श्रौर घृत सांभर श्रद्धा अनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे मे श्रानन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी श्रौर खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यूून बन गया सो ईश्वर भी जाने है श्रब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी श्रौर बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगो पित्त में उठती हैं श्रौर समा जातीं हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३१

हे प्रचण्ड तुम्हारे कार्य में विलंब है काम अभीष्ट ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखो सोषते हो कुछ और होता है कुछ । कई वार्ता को चता बनी हुई है । जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रूपी क्लेश की। परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने को पसंद करते हो भूत से क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो । तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि श्रकल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की भूंड़ सत्य का परिच्चन समझते हो एक काम न्यून बनाया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खंड के जिम्मात्रीऐसो कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा और लाभ होगा । तुमने अपने ऊपर बड़ा जो फिक्र समभ रखा है सब काम श्रानन्द में हो जायगा ।

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हे प्रचण्डक तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ठ इस बक़्क बहुत श्रेष्ठ है। तुम्हें बिना कारण चिंता फिक्र भयस्ता उत्पन्न हो जाता है। बुद्धि भ्रमण हो जाती है। गया सो गया फिर आयेगा मिलेगा क्या मिलेगा, आराम मिलेगा धन की प्राप्ति होगी, घर में मंगल चार होगा पीड़ा का नाश होगा जोव की खुशी और प्राप्ती होगी अकस्मात खुश खबरी सुनने को मिलेगी तुम अपने इष्ट देव मित्र देवताओं के निमित्त वस्त्र मिष्टान्न, कच्चा दूध, मावश्या को पिलाते रहा करो इस प्रकार दान पुण्य कराने से रोजगार बढ़ेगा उच्च पदवी पाने में सफल होगे एक जीव का ध्यान बना रहता है मित्र के ध्यान में चित्त बहुत रहता है तुम्हें विद्या मध्यम है परन्तु अकल बुद्धि तेज है किसी का बुरा नहीं चाहते हो सत्य वार्ता को पसन्द करते हो स्वर्च है ब्रन्जाम कुशल है राजद्वार से ज्ञात में विजय है

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हे प्रचंडक इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता है। प्रश्न दो तरह के से हैं गई चीज मिलना दूसरा लाभ प्राप्ति है तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको चित्त चिंता लगी रहती है और इज्जत का विशेष ध्यान रहता है मन के माफिक लाभ नहीं होता है एक जीव में ध्यान विशेष रहता है तुम पर दशा मध्यम चल रही है पन्नांग में देखकर उपाय कराओ। उपाय के कराने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा लाभ कार्य होगा तुम गुरू सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को अन्न मिष्टान्न मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रतिसे शीघ्र तुम्हारी दशा बदलेगी और प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घर में चांदना सा दिखाई देगा अर्थात सर्व प्रकार से आनन्द होगा

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हे प्रचंडक जो हो गया सो हो गया अब तुम्हें कार्य चतुराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नामिक दशा चल रही है तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय कराओ उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ और मझलाचार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यून हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रुपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पूजन किया करो बन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सब प्रकार का आनन्द होगा तुम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ३७

हे प्रचण्ड इस समय के प्रश्न का यह फल है तुम पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुआ लाभ कम हुवा अब तुमको दशा श्रेष्ठ ग्राने वाली है तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा है काम ठोक बैठेगा तुम्हारा प्रश्न उत्तम है तुमको भाग्य की वृद्धि होगी घर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की ग्राशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारण तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय कराग्रो उपाय होने पर शीघ्र दशा ग्रच्छी ग्रावेगी ग्रच्छी दशा के ग्राने पर लाभ की नई नई सुरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का वृत रक्खा करो और ग्रनाथों की सहायता किया करे इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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हे प्रचंडक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कमी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किमी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यूनी चल रही है ऐेसी दशा में चिना क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है अनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता २ रुक जाता है तुमको एक जीव की चिंता भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तुम्हारे दान पुराय में भी चित्तनहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये अगर जो बन सके तुम दान अवश्य किया करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय अवश्य करात्रो उपाय पूजन दान पुरय करोगे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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हे प्रचण्ड तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ठ हे तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा तुमको जीव ग्रौर लाभ की चिंता बनी रहती हे तुमने लाभ का उद्योग किया परन्तु लाभ कम होता है सो श्रभ प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा कष्ट व्याधा रंज श्रादि नष्ट होंगे। घर में खुशी होगी तुम तरह २ का उद्योग सोचते हो परन्तु ! चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है पीड़ा की चिंता चित्त में भय रहता है काम उत्तम लाभ का श्रभी नहीं बना श्रौर एक जीव में चित्त विशेष रहता है राजद्वार का भी ध्यान बना रहता है दशा मध्यम चल रही है उसका श्रद्धानुसार उपाय करो श्रौर बन सके तो शिव मन्दिर में नित्य घृत का दीपक जल्लाया करा सवेरे ही मन्दिर की सफाई किया करो श्रथवा सोमवार का व्रत किया करो ईश्वर चाहे तो मनो कामना पूरी होगी बाधायें नष्ट कष्ट श्रादि समाप्त होंगे उच्च पदवी मिलेगी जीव प्राप्ति होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४१

हे प्रच्छक यह जो तुमने प्रश्न किया है जो हो गया सो हो गया अब खुशी की वार्ता होने वाली है खोटे दिन बीत गये श्रेष्ठ ग्राने वाले हैं ऋाराम होगा कार्य सफल होगा जिसकी चाहना है वह मिलेगा और यह जो तुमने चित्त में काम विचारा है देर से होगा दिन तुमको बहुत दिनों से मध्यम चल रहे हैं मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता है नेष्ट दशा में रंज क्लेश पीड़ा गुप्त चिंता शत्रुता होती है सो अपनी राशि पर जो दो तीन ग्रह नाकिस हैं उनका दान मंत्र जाप कराने से घर में ग्रानन्द और मंगला चार होगा और जीव की प्राप्ति होगी यात्रा से लाभ होगा कार्य सफल होंगे गुप्त प्राप्ति होगी तुम्हारे शरीर पर ब्रण यानी फोड़े फुन्सी का निशान है आलस्य रहता है नई नई बात का चिंतवन करते हो

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हे प्रच्छक तुम को पिछले दिन बहुत नाकिस फिक्र से गुजरे और खर्च विशेष होता रहा लाभ मध्यम होता था सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा क्याधा और रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होगा चित्त की चिंता चित्त में समा जाती है। समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं सो वृथा जाती हैं। एक जीव में चित्त बहुत अधिक रहता है। अब ईश्वर चाहे तो कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान और सुबह शाम शिवजी का भजन किया करो और यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई अब रख रही कोई काम काबू से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरोसा करे काम में सफलता शीघ्र प्राप्त होगी

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हे प्रचण्ड तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की वार्ता होने वाली है मिलेगा मर्जी के माफ़िक कार्य होगा चिन्त उस बिना ठ्याकुल सा रहता है दशा न्यून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्च श्रध्दिक हो रहा है जीव का दुख रहता है काम दूसरे के काबू में है बनता बनता रुक जाता है और दो तीन ग्रह तुम्हारी रास पर कैड़े हैं पञ्चाङ्ग में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थिर चित्त करके पंडित जी से कराओ उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा और यह जो फिक्र है सो दर होगा और कई फिक्र खर्च के स्रा रहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी प्राप्ति होगा परन्तु विलम्ब है पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गुप्त लाभ होगा अब ग्रन्थोंमे श्रच्छा दीखता है कार्य में भी लाभ होगा अगर हो सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ४७

इस समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठीक बैठेगा या न बैठेगा इज्जत का भय हो जाता है ऐमी दशा में गवन भी होना है गुप्त चिंता रहती है कभी चित्त में कुछ ग्राता है कभी कुछ ग्राता है ऐमी दशा में खर्च विशेष होता है एक गुप्त मनोर्थ है सो कब तक ग्राराम होगा सो ग्रब न्यून दशा वीचने वाली है ग्रौर श्रेष्ठ ग्राने वाली है परन्तु काम में देर है। इष्ट देव का पूजन करना चाहिये पितरों के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ठ है कई महीने से भाग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति होगी ग्रौर जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो ग्रब बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के माफिक होगा काम कच्चे से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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इस समझजो ग्रापने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद्ध होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग जाचार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चांदना हो ग्राराम हो कब तक दिन कड़े हैं गुप्त लाभ भी होगा यह भगड़ा कब तक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन अच्छे ग्रावेंगे ग्रांह्मण को दही लड्डू मिष्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी ग्रौर तुम्हें ग्रपने इष्ट देव का पूजन घर में पितृ पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से ग्रापके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे शत्रु रूपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई - २ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निफल हो जाती हैं लेकin ब्रह्म में कुशालता प्राप्त होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५३

इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यति धन न्यूनं दिने दिने

मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य हस्त्य:

ग्रहपीडो च प्राप्तोति भृगुणा परिभाषित: मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं

मन की वार्ता कब तक पूरे होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी

श्राज कल दिन नाकिस हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य श्रव के भी सफल होगा

जिससे वंश की वृद्धि हो तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पत्त्रा देखो नाकिस ग्रहों का

दान मंत्र जाप ज़ाया दान कराने से श्रब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से

बाहर है मामलता ईश्वर के श्राधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में और है यह ग्रह का

प्रभाव है परन्तु तुम्हारा भन्त्त में ग्रहण्णा है।

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हे प्रच्छक गुप्त चिंता शारीरैन धन हानि च दर्शयते ग्रह पीड़ा मविष्यति दर्शयते भाग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगला चार हर्षकं धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्तये इस समय दुस्वभाव स्वर हे इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगला चार राजद्वार में न्याय किसी प्यारे की चिंता विद्या का लाभ रोजगार कृत्य पीड़ा को यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारी रास पर ग्राजकल नाकिस चल रहे हैं पत्रे में देखो नाकिस हैं या नहीं जरूर हैं इन नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप करात्रो जिससे भाग्य की वृद्धि का ताल्ला खुले और उच्च पदवी प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगताचार के कायों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्त हो अंजाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त होगा।

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हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रश्न जीव रूप लदमी का है चिंता दीर्घ है और स्वर दुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शंका अलग हो जाना और दुसरा रोजगार मध्यम होना चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की लालसा बनी रहती है जनन भी करते थे परन्तु ऋथा चले जाते थे चिंता और इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है ऋष के भो काम हौगे अथवा नहीं राजद्वार की उच्च पदवी की आशा है अब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भाय उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है ऋष तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगी। कई ग्रह रास पर कैदे हैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट और बाधा नष्ट होकर लाभ की सुरत अच्छी बनेगी वह मिलेगा

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हे प्रच्छलक दीर्घचिंता च प्राप्तनेति जीव.प्राप्ति न हर्षयते भयभीत हदा पराधीनोपि क्रत्यया राजद्वारकंकाय धनच्यय भविष्यति शन्तकाय महा सिद्धि भृगुपापरिभापत:। तुम पर बहुत दशा न्यून थी। श्रनेक प्रकार के फिक्र, जीव चिंता और धन का जाना तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में तत्पर लगा रहता है। नई नई वार्ता लाभ के लिये सोचते हो परन्तु वृथा चली जाती है। श्रथ रोजगार की सुरत होगी। यह जो जीव की तालाेसा बनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलम्ब है। देर से विजय प्राप्त होगी। काम में लाभ होगा। श्याया दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्ण दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी और दूसरा लाभ को कार्य भी सिद्ध होगा। काम देव की उनमत्तता में नीच बुद्धि हो जाती है। सो ग्रह का प्रभाव है। शन्त में कुशलता है। और भूमि का लाभ भी होगा।

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हे प्रचण्ड तुम्हारा काम काज से बाहर है दिन रात विभिन्न तरह की बातों और लाभ सोचते रहते हो बनकर काम की ग्रानन्द की सुरत मध्यम सी हो गई है ऐसी स्थिति में गुप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथा धन का चिन्ता जाना और मित्र का ख्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याधि हो खोटी दशा में बहुत बातों का ख्यात होता है तुम पत्नियों को अन्न वाजरा भोजन दो और श्री बटुक भैरव का पूजन कराओ यह मंत्र तपू उँ ऐं हीं क्लीं श्री विष्णुभगवान मम अपराध नमाय करु करु सर्व विघ्न विनाशाय समकामना पूर्ण करु कुर स्वाहा । मंच के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ठ होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार में विजय होती है गई हुई सद्मी फिर वापिस आती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शांति प्राप्त होने लगते हैं

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तास्त्रालिक भृगु प्रश्न ६१

हे प्रचण्डक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम मालूम होता है ऐसी अवस्था में पुत्र की लाभ सगाई रोजगार मध्यम दशा में मुशकिल होते हैं अर्थात होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान और धन हरण होता है राजद्वार से सफल होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है और गुप्त शत्रु भांजी मार देते हैं एक मनोर्थ बहुत दिन से सोच रखा है ईश्वर चाहे तब हो अब इष्टदेव और घरके पित्रो के निमित्तो कुछ जप दान आदिकराश्रो जिससे मनोर्थ सिद्ध हो

जिसकी चाहना है वो मिले जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में आधिक लाभ होगा और राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मझल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा अन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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हे प्रचंड ऋण तुम्हारे खोटे दिन व्यतीत हो गये। प्रचंडे ऋणाने वाले हैं ऋण तक तुम पर बहुत नाकिस दशा चल रही थी। नाकिस दशा में ही ऐसे काम होते हैं। जो फिक्र तुम पर है। बहुत नुकसान उठाया और लाभ कम रहा पीड़ा रूपी क्लेश में धन खर्च हुत्रा और चीज निकल गई। इज्जत का भय हुवा परन्तु तुम्हें ऋण अपने इष्ट देव का पूजन पितृ पीड़ा का जतन और ऋणू ग्रह का दान निश्चय करके कराना चोहिये। फिर यत्न के कराने से तुम्हें जल्दी और नये लाभ होंगे। जीव की प्राप्ति होगी मित्र से मुलाकात जो है विशेष होगी ग्रह की पीड़ा नष्ट होगी। शत्रु का नाश होगा और ये जो मन की कामना सो पूर्ण होगी और बड़े २ फिक्र जो ऊपर से खर्च के दीव रहे हैं। सो सब ग्रानन्द में कांटा सा निकल जायगा कुशलता प्राप्त होगी, काम सिद्ध होगा।

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हे प्रच्न्न्कू जब दशा जीव पर नाकिस ग्राती है ग्रौर नाकिसग्रह चौथे ग्राठवे बारहवें मेंहो जाते हैं तथ ऐसे ही काम होते हैं । खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है ग्रौर एक जीव का बहुत ध्यान रहता है सो ग्राराम मिलेगा ग्रौर हाथ से निकला हुग्रा धन देर से प्राप्त होंगा । जिस काम को करना विचारते हो, सो समभ कर करना ग्रभी भाग्य उदय होने में किंंचत विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढेगी ग्रौर नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की रास पर कैडे हैं उनका पत्त्रा देख कर यत्न करात्र्रो नहीं तो विशेष क्लेश होगा दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें ग्राराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा । विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूलो मत ।

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हे प्रचंडक तुम्हारे इस समय के प्रशन का यह फल है कि तुमने जो प्रशन विचार है सो काम सिद्ध होगा और लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी और आराम की सूरत नज़र आती है पिछले साल कुछ महीने मध्यम रहे खर्च विशेष रहते था और आमदनी न्यून होती थी उसने चाहा तो अब भाग्य उदय होगा और काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो और घृत सांभर श्रद्धा अनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे मे आनन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यून बन गया सो ईश्वर भी जाने है अब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी और बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगसी चित्त में उठती हैं और समा जाती हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७

हे प्रचंड तुम्हारे कार्य में विलंब है काम अभी ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखा सोच्चते हो कुछ और होता है कुछ । कई वार्ता की चिता बनी हुई है । जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रूपी क्लेश की । परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने को पसंद करते हो क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो । तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि श्रकल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की कूट सत्य का परोक्षा समझते हो एक काम न्यून बनगया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमात्रो ऐसो कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा और लाभ होगा । तुमने अपने ऊपर बढ़ा जो फिक्र सममें रखा है सब काम आनन्द में हो जायगा ।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७३

हे प्रचण्ड तुम्हारे खोटे दिन गये अब श्रेष्ठ आने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रक्खा है उसे देख माल कर सोच सम्भ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं अब आगे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी राशि पर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन जोप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा आयेगी लाभ की सूरत होगी तुम्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यून रहा मर्जी के मुताबिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है ऐसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तम दशा आने पर लाभ अधिक होगा मित्रों से प्रीति बढेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चोज वापस मिलेगी। तुम रमनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बडा श्रेष्ठ काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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हे प्रचंड इस समय तुम्हारी राशि पर कई ग्रह नाकिस मौजूद हैं ऐसी ष्टावस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, ग्रामदनी होती२ रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ सम्भफते हो वहां पर ऋधूरा भी नहीं होता है ऐसी दशा में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लालसा बनी रहती है जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है जब दशा मध्यम होती है ऋपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय ऋषाग्रो उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्रात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है दूर होगी तुम सर्दी में कम्बल ऋथवा गर्म वस्त्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरूर कराश्रो यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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हे प्रचंडक इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता हे । प्रश्न दो तरह के से हैं गई चीज मिलना दूसरा लाभ प्राप्ति हे तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको सदा चिंता लगी रहती हे और इज्जत का विशेष ध्यान रहता हे मन के माफिक लाभ नहीं होता हे एक जीव में ध्यान विशेष रहता हे तुम पर दशा मध्यम चल रही हे पन्नांग में देखकर उपाय कराओ। उपाय के करने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा लाभ कार्य होगा तुम गुरू सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को अन्न मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रति शीघ्र तुम्हारी दशा बदलेगी और प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घर में चांदना सा दिखाई देगा श्रियात सर्व प्रकार से श्रानन्द होगा

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हे प्रचण्ड जो हो गया सो हो गया अब तुम्हें कार्य चतुराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नामिक दशा चल रही है. तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय कराओ उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ और मझलाचार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यूंन हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रूपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पूजन किया करेो वन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सब प्रकार का आनन्द होगा तुम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी।

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हे प्रचण्ड इस समय के प्रश्न का यह फल हे तुम पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुआ लाभ कम हुया अब तुमको दशा श्रेष्ठ ग्रहों वाली हे तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा हे काम ठीक बैठेगा तुम्हारा प्रश्न उत्तम हे तुमको भाग्य की वृद्धि होगी घर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की आशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारण तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय कराओ उपाय होने पर शीघ्र दशा श्रच्ही लावेगी श्रच्ही दशा के ग्राने पर लाभ की नई नई सुरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का वृत रक्खा करो और ग्रनाथों की सहायता किया करो इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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हे प्रच्छक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किसी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यून चल रही है ऐसौ दशा में चिंता क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है अनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता २ रुक जाता है तुमको एक जीव की चतु भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है ऋत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तुम्हारा दान पुण्य में भी चित्त नहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये अगर जो बन सके तुम दान अवश्य कियी करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय अवश्य करात्रों उपाय पूजन दान पुण्य करोगे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७१

हे प्रचण्ड तुम्हारा प्रश्न श्रेष्ठ है जो हो गया सो हो गया अब चिंता श्रार फिक मिटेगा तुम्हारा कार्य सफल होगा जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी श्रौर भूमि से लाभ होगा मंगलाचार श्रौर प्रसन्नता होगी तुम्हारा एक जीव में चित्त बहुत रहता है तुम तरह २ की वार्ता का चिन्तवन करते हो तुम्हारा चित्त चलायमान रहता है तुमको बहुत दिन से दशा मध्यम चल रही थी श्रब दशा बदलने वाली है तुम जो काम सोचते हो उसमें तारभंग हो जाता है गुप्त शत्रु तुमको नुकसान पहुंचाते हैं श्रर्थात ऊपर से तुमसे मीठी २ बात करते हैं श्रौर श्रन्दर से काट करते हैं तुमने एक काम बहुत दिनों से सोच रखा है ईश्वर चाहे तो श्रवश्य होगा इष्टदेव पित्रो के निमित्त दान पूजन कराओ उपाय न कराने से कार्य सिद्ध देर से होगा

पूर्णमासी को सत्य नारायण का व्रत रख्खा करो कथा कराओ इसके कराने से मनोकामना पूर्ण होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न -१

हे प्रचंडक यह जो तुमने प्रश्न किया है जो हो गया सो हो गया श्रव खुशी की वार्ता होने वाली है खोटे दिन बीत गये श्रेष्ठ ग्राने वाले हैं श्राराम होगा कार्य सफल होगा जिसकी चाहना है वह मिलेगा श्रौर यह जो तुमने चित्त में काम विचारा है देर से होगा दिन तुमको बहुत दिनों से मध्यम चल रहे हैं मर्जी के मुताबिक लाभ नहीं होता है ।

नेष्ट दशा में रंज क्लेश पीड़ा गुप्त चिंता शत्रुता होती है सो अपनी राशि पर जो दो तीन ग्रह नाकिस हैं उनका दान मंत्र जाप कराने से घर में ग्रानन्द श्रौर मंगल— चार होगा श्रौर जीव की प्राप्ति होगी । यात्रा से लाभ होगा कार्य सफल होंगे गुप्त प्राप्ति होगी तुम्हारे शरीर पर ब्रण यानी फोड़े फुन्सी का निशान है ग्रालस्य रहता है नई नई बात का चिंतवन करते हो ।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ७२

हे प्रचंडक तुम को पिछले दिन बहुत नाकिस फिक्र से गुजरे श्रोंग स्वर्र्च विशेष होना रहा लाभ मध्यम होना था सो श्रव प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा व्याधा श्रौर रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होगी चित्त की चिंता चित्त में समा जाती है।

समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं मो वृथा जाती हैं। एक जीव में चित्त बहुत श्रधिक रहता है। श्रब ईश्वर चाहे तो कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान श्रौर सुबह शाम शिवजी का भजन किया करो श्रौर यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई श्रब रास्व रही कोई काम काबू से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरोसा करो काम में सफलता रास्व प्राप्त होगा

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हे प्रचंडक तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा । प्रथम दशा न्यून थी, श्रव दशा श्रेष्ठ श्राने वाला है । जीव की चिंता बनी रहती है । श्रोर लाभ का उद्योग विशेष सोचते हो परन्तु लाभ श्रधूरा होता है । श्रोर यह जो श्रव फिर है श्रोर खर्च सो दूर होगा । श्राराम होगा गुप्त तो भी मिलेगा सफलता प्राप्त होगी कष्ट नष्ट होगा । कई ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस हैं पन्नाज़ू में देखो मो श्रव उन ग्रहों का उपाय विधि पूर्वक पंडित से कराओ्रो । श्रोर विनादान के कार्य सिद्ध देर से होगा । इस कारण चावल, मिश्रीत, श्वेतवस्त्र, रजनित, श्रर्थात श्रद्धा प्रमाण चांदी दान का करना बहुत श्रेष्ठ मन की कामना पूर्ण होगी श्रचानक लाभ की सूरत बनने वाली है चित्त स्थिर करके किसी काल ईश्वर का भजन किया करो प्रश्न श्रेष्ठ है श्रनजान कुशल है तीर्थ श्राता श्रेष्ठ है

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हे प्रच्‍नक तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी खुशी की बातें होने वाली है मलेगा मर्जी के माफ़िक कार्य होगा चिंत उस बिना व्याकुल सा रहता है दशा न्यून थी जिसके कारण ऐसे काम हुए धन का खर्‍च श्रधिक हो रहा है जोव का दुःख रहता है काम दूसरे के काबू में है बनता बनता रुक जाता है और दो तीन ग्रह तुम्हारी रास पर केंदे हैं पंचाङ् में देखो उन मध्यम ग्रहों का पूजन दान मन्त्र स्थिर चित्त करके पंडित जी से कराओ उसके कराने से कार्य शीघ्र सिद्ध होगा और यह जो फर्क है सो दूर होगा और कई फिक्र खर्‍च के आ रहे हैं सो काम सिद्ध होंगे धन मिलेगा जीवकी प्राप्ति होगा परन्तु विलम्ब है पूजन दान से कार्य सिद्ध होगा गुप्त लाभ होगा श्रब श्रनजाम प्रच्‍छा दीखता है कार्य में भी लाभ होगा अगर हे सके तो शिवजी का पूजन नित्य किया करो।

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हे प्रचंडक यह जो तुमने प्रश्न किया है ऋण दशा श्रेष्ठ ऋणाने वाली है कामना पूर्ण होगी जो काम चित्त में धारणा करा है वह सफल होगा चिंता दूर होगी मनो कामना पूर्ण होगी मित्रों से प्रीन होगी कष्ट पीड़ा नष्ट होगीं जो कार्य चित्त में विचार है काम ठीक ठेंगे दशा बहुत दिनों से मध्यम चल रही थी ऋतय विशेष हुवा जोव की प्राप्ति होंगी ऋण की न्यूूनता हो प्रश्न श्रेष्ठ है उद्योग व उपाय पहले तुमने बहुतेरे करे पर निर्फल गये काम कावू से बाहर है पर अब ईश्वर आनन्द खुश खबरि की वार्ता करेंगे गुप्त लाभ होगा यह जो प्रश्न विचार है इसके वास्ते श्री देवी दुर्गा लदमी का पूजन करात्रो चावल चांदी स्वेत वस्त्र स्वेत फूल का दान करात्रो। तुम्हारी राशि पर कई ग्रह मध्यम हैं सो उनका उपा। करने से शीघ्र मन की कामना पूर्ण होगी और मन में एक जीव का ध्यान रहता है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ९१

हे प्रच्‍नक इस समय के प्रश्न करने का यह मामला है स्वर दुस्‍भाव है घर में चमत्कारी हो क्लेश श्‍त्रोद मिटे व्याधि टले जिसका प्रश्न है वह चीज मिलेगी या न मिलेगी मंगलाचार कब तक होगा लाभ खुशी कब तक होगी ऐेसी दशा कब तक रहेगी जीव की चिंता रहती है वंश की वृद्धि हो राजकत तुम जो सोचते हो कुछ उसमें होता है कुछ दो तीन ग्रह रास पर नाकिस श्रारहे हैं सो उन का उपाय दान पुराय जाप कराने से चित्त का मनोरथ सिद्ध होगा खुशी प्राप्त होगी काम प्रये श्राधीन है श्रथ तुम चींटीनाल जिमात्रो श्रेष्ठ है भूस्‍ों को भोजन दो कार्य सिद्ध होगा दशा उतरने वाली है मनोरथ पूर्ण होंगे श्रनेक प्रकार की लाभ की सुरत और यह जो ऊपर से फिक्र दिखते हैं सो सब कांटा सा निकल जायगा दशा मध्यम है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ५५

इस समय जो ग्रापने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद्ध होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग आचार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चांदना हो ग्राराम हो कब तक दिन कष्टे हैं गुप्त लाभ भी होगा

यह भगड़ा कब तक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन ग्रच्छे ग्रावेंगे ग्रांहणे को दही लड्डू मिष्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी ग्रौर तुम्हें ग्रपने इष्ट देव का पूजन घर में पित्र पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से ग्रबके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे

शत्रु रुपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई - २ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निर्फल हो जाती हैं लेकिन ग्रन्न में कुशलता प्राप्त होगी

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तत्कालिक भृगु प्रश्न १३

इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भष्यति धन न्यूने दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन ऋत्ययो राजद्वार कन्यायं सिथर कार्य दृष्ट्य: ग्रहपीडो च प्राप्तोति भृगुणा परिभाषित: मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता क़र तक पूरी होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी राज कल दिन नाक्षिस हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य अब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं। पत्ता देखो नाक्षिस ग्रहों का दान मंत्र जाप द्वाया दान कराने से अब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से बाहर है मामला ईश्वर के श्राधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में और है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा चित्त में चञ्चलता है।

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हे प्रच्छ्नक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंना का हे कार्य पराधीन काबू से बाहर हो गया बहुतेरे यत्न करते हे बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार विद्या की सिद्धि धन की जीत श्रेष्ठ दशा में होती हे अब जो तुम्हें यह चिन्ता बनी हे और लालसा जीव की हे सो काम में विलंब हे परन्तु मिलेगा और सफल होगा ऋत: जतन उपाय से इच्छा पूर्ण होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं आराम की सूरत होगी जीव प्राप्ति होगी इज्जत का काम हो संदेह मिटेगा धन का मनोर्थ पूर्ा होगा देवी का पूजन करात्रो और अपने हाथ से ऋत खांड चावल चांदी का दान करो इश्वर चाहे तो उपाय करते ही इच्छा पूर्ा होगी और तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो असत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि नापा करते हो

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हे प्रचंडक गुप्त चिंता शरीरेन धनं हानि च दर्शयते ग्रह पीड़ा मविष्यति दर्शयते भाग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगलाचार हर्षकं धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्तये इस समय दुस्वभाव स्वर है इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगलाचार राजद्वार में न्याय किसी प्यारे की चिता विच्या का लाभ रोजगार कृत्य पीड़ा का यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारी राशि पर आजकल नाकिस चल रहे हैं प्त्रे में देखो नाकिस हैं या नहों जरूर हैं इन नाकिस्म ग्रहों का दान मंत्र जाप करात्रो जिससे भाग्य की वृद्धि का ताल्ला खुले और उच्च पदवी प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगलोचार के कायों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्त हो शंंञाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त होगा।

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हे प्रचंडक तुम्हारा यह प्रश्न जौँव रूप लदमी का है चिंता दीर्घ है और स्वर. दुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शंका अलग हो जाना और दूसरा रोजगार मध्यम होना चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की जालसा बनी रहती है जनन भी करते थे परन्तु ऋृथा चले जाते थे चिंता और इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है ऋष के भी काम होगा अथवा नहीं राजद्वार की उच्च पदवी की आशा है अब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भाग्य उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है अब तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगी। कई ग्रह रास पर कैदेंहैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट और बाधा नष्ट होकर लाभ की सूरत अच्छी बनेगी वह मिलेगा

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ह प्रच्छक दीर्घचिंता च प्राप्तौति जीव प्रप्रि न दर्शयते भयभीती हृदा पराधीनोपि ऋत्यया राजद्वारककार्य धननाश्य भविष्यति ग्रन्तकाय महा सिद्धि भृगुपरिभापत:। तुम पर बहुत दशा न्यूने थी। अनेकों प्रकार के फिक्र, जीव चिंतो ग्रौर धन का जानो तथा गुप्त क्लेश रहा। तुम्हारा चित्त एक जीव में तत्पर लगा रहता है। नई नई बातों लाभ के लिये सोचते हो परन्तु ऋथा चली जाती है। जब रोजगार की सुरत होगी यह जो जीव की लालसा बनी है सो पूर्ण हो परन्तु विलंब, है देर से विजय प्राप्त होगी काम में लाभ होगा। दान गुड़ गेहूं लाल वस्त्र स्वर्ण दान के कराने से मन की कामना पूर्ण होगी ग्रौर दूसरा लाभ का कार्य भी सिद्ध होगा। काम देव की उनमत्ताता में नीच बुद्धि हो जाती है सो ग्रह का प्रभाव है। ग्रन्त में कुशलता है। ग्रौर अभि का लाभ भी होगा।

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हे प्रचंडक तुम्हारा काम कर्स्ट से बाहर हे दिन रात विभिन्न तरह ३ की वार्ता और लोभ सोचते रहते हो बनकर काम की ग्रानन्द की सुरत मध्यम सो हो गई है ऐंसी प्रवस्था में गुप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथा धन का चिन्ता जाना और मित्र का ख्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याधा हो खोटी दशा में बहुत बातों का ख्यात होता हे तुम पत्तियों को अन्न वाजरा भोजन दो और श्री बटुक शैव का पूजन करात्र्रो यह मंत्र जपो उं ऐं हीं क्लीं श्री विष्णुभगवान मम अपराध नमाय करु करु सर्व विध्न विनाशाय समकामना पूर्ण करु कुस स्वाहा । मंत्र के करने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ठ होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार में विजय होती हे गई हुई लदमी फिर वापिस आती है सर्व कामना सिद्ध होकर सुख शांति प्राप्त होने लगते हैं

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तास्त्रालिक भृगु प्रश्न १०१

हे प्रचण्डक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम मालम होता हैँ ऐसी श्रवस्था में पुत्र की लाभ सगाई रोजगार मध्यम दशा में मुशकिल होते हैं ऋथांत होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान और धन हरण होता है राजद्वार से सफल होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है और गुप्त शत्रु मांजी मार देते हैं एक मनोर्थ बहुत दिन से सोच रखा है ईश्वर चाहे तब हो अब इष्टदेव और घरके पित्रो के निमित्तो कुछ जप दान आदिकराश्रो जिससे मनोर्थ सिद्ध हो जिसकी चाहना है वो मिले जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में अधिक लाभ होगा और राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मझल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा सन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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हे प्रच्य्क तुम्हारा यह प्रशन उत्तम श्रेणी का है जिससे श्रव तुम्हारा मनोर्थ सिद्ध होगा। श्रेष्ठ दशा श्राने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ, ऋण्न से लाभ श्रौर जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, यात्रा में लाभ श्रौर मन का मनोर्थ मी सिद्ध होगा श्रब तुम्हारी राशि पर दो ग्रह नाकिस श्रौर बाकी हैं पत्त्रा देखो उनका उपाय जरा श्रौर श्रद्धा से करा दो श्रौर शाम को श्रौर चिंटीनाल जब तक बने जिमाया करो दशा उत्तम श्राने वाली है पिछले दिन बहुत फिक्र मे बीचे मो श्रब तुस उपरोक्त कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे श्रास पूरी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चन्न विशेष कर रहता है उसमें भी सफलता प्राप्त होगो सो श्रानन्द में बीतेगी कामदेव की उनमगातातों में बुध्दि न्ह्यून हो जानी है।

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हेप्रचंड ब्रब क्या फिक्र करते हो तुम्हें खुश खबरी प्राप्त होने वाली है गई सो गई ब्रब राख रही ब्रब बहुंत देगा वह मनोर्थ पूरण होगे परन्तु एक फिक्र भारी दीखता हे ऊपर से खर्च ब्राटे हे ब्रौर पास धन विशेष नहीं दीखता परन्तु चिंता मत करना क्यों कि तुम्हारा काम बड़ो इज्जत के साथ बनेगा ब्रौर कई जगह से लाभ होगा करने वाला ब्रौर हे वही फिक्र कर रहा हे ब्रव विशेष लाभ की सूरत होगी मित्र में चिन बहुत रहता है वो भी चित्त से प्यार करे हे ब्रगर तुम शीघ्र इस काम की सिद्ध चाहते हो तो श्री गंगा जी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जि: ब्रो ब्रौर सटटी चावल दही दान करों जिसके करने से तुम्हारा काम शीघ्र सिद्ध होगा ब्रौर गुप्त लाभ होगा घर में चांदना होगा ब्रौर एक काम तुम से गुप्त से गुप्त नाकिस बना थ सो भी नष्ट होगा हे ईर्ष्या का ध्यान रखा करो कुशलता रहेगी

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हे प्रचण्ड तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लोभ की सुरत में हानि पदा होगई गुप्त शत्रु बुराई करते हैं अब एक और खुशी की बात तुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन मल का निकल जाना पीड़ा का घर मेंबास होना इज्जत का भय होना हुवा हुया मंगलाचार का ह्रट जाना और राजद्वार की चिंता होना यह सब बात नाकिस दशा में होती हैं अब तुम सायंकाल को घृत का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो और जलका लोटा भर के शिवजी को और पीपल पर चढ़ाया करो और इतवार को ब्राह्मण जिमात्रो ऋथवा वृत किया करो कई ग्रह तुम्हारी राशि पर नाकिस हैं पत्त्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यून हो जायगा जो उपरोक्त कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्ण होगी और कुशलता प्राप्त होगी।

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हे प्रचंड ऋण तुम्हारे खोटे दिन व्यतीत हो गये। प्रचंड ऋण लेने वाले हैं अब तक तुम पर बहुत नाकिस दशा चल रही थी। नाकिस दशा में ही ऐसे काम होते हैं। जो फिक्र तुम पर है। बहुत नुकसान उठा! और लाभ कम रहा पीड़ा रूपी क्लेश में धन खर्च हुया और चीज निकल गई। इज्जत का भय हुवा परन्तु तुम्हें अब अपने इष्ट देव का पूजन पितृ पीड़ा का जतन और ऋण ग्रह का दान निश्वय करके कराना चाहिये। फिर यत्न के कराने से तुम्हें जल्दी और नये लाभ होंगे। जीव की प्राप्ति होगी मित्र से मुलाकात जो है विशेष होगी ग्रह की पीड़ा नष्ट होगी। शत्रु का नाश होगा और ये जो मन की कामना सो पूर्ण होगी और बड़े २ फिक्र जो ऊपर से खर्च के दीख रहे हैं। सोच आनन्द में कांटा सा निकल जायगा कुरालता प्राप्त होगी, काम सिद्ध होगा।

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तात्कालिक भवु प्रश्न १७६

हे प्रच्छक तुम्हारा इस समय का प्रश्न बहुत श्रेष्ठ दीखता है बुरे दिन गये और अच्छे ग्राने वाले थे सो तुम्हारी राशि पर दो तीन ग्रह मध्यम ग्रा मये हैं और तुमने उनका दान जप कराया नहीं है इस कारण ऐसे फिक्र चिंता उठाई लाभ कम रहा खर्च विशेष है पीड़ा की चिंता चित्त में, भयसा होना, काम उम्दा लाभ का ग्रंभी नहीं बना, जीव की चिंता है, वंश की वृद्धि और मंगलाचार होना एक अपना प्यारा है उसी में चित्त बहुत रहता है राजद्वार को चिता है अब ज्यादा दान और चने की दाल पेला वस्त्र हल्दी स्वर्णदान श्रद्धानुसार करना चाहिये उपर के दान पुण्य के कराने से ईश्वर चाहे तो मन की कामना पूर्ण होगी उच्च पदवी मिलेगी जीव की प्राप्ती होगी लाभ का रास्ता खुलेगा भूमि से लाभ और पीड़ा नष्ट होगी और राजद्वार से भी काम में सफलता प्राप्त होगी

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हे प्रचंड तुम्हारा प्रशन मध्यम है ऋभी तुम्हारी मर्जी के ऋनुसार काम होने में देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं ऋगर कभी, कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गुप्त है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगल चार में देर है एक जीव की भी ऋभिलाषा है अब तुम नवग्रह का पूजन दान करो उसके कराने से दशा न्यून बदलेगी श्रेष्ठ ऋायेगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लोभ होगा गई हुई चोज फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से काम सिद्ध होगा गुप्त चिंता मिटेगी चित्त में ऋनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्ताकी वार्ता चित्तमें समा जाती है अब राधे ही खुशी की वार्ता सुनने में ऋावेगी

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हे प्रचंडक जब दशा जीव पर नाकिस ग्राती है श्रोर नाकिसग्रह चौथे श्राठवे बारहवें मेंहो जाते हैं तब ऐसे ही काम होते हैं। खर्च विशेष होता है लाभ कम होता है श्रोर एक जीव का बहुत ध्यान रहता है सो श्राराम मिलेगा श्रोर हाथ से निकला हुग्रा धन देर से प्राप्त होगा। जिस काम को करना विचारते हो, सो समभ कर करना ग्रभी भाग्य उदय होने में किंचित विलंब है। एक मित्र में बहुत मन रहता है सो उससे प्रीत बढेगी श्रोर नया लाभ होगा दो तीन ग्रह तुम्हारे नाम की राशि पर कैडे हैं उनका पत्रा देख कर यत्न करात्र्रो नहीं तो विशेष क्लेश होगा दुख होगा तुम्हें उन ग्रहों का यत्न कराना चाहिये यत्न के कराने से तुम्हें श्राराम होगा उच्च पदवी प्राप्त होगी, काम में फायदा होगा एक जगह विशेष माल मिलेगा। विलंब से खातर जमा रखो तुम ईश्वर का भजन किया करो भूखो मत।

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हे प्रचण्डक तुम्हारी बुद्धि भ्रमणा रहती है। ईश्वर को सत्य नहीं मानते हो जिसने इतना बड़ा किया है और बराबर रक्षा करी है सो वह कहीं चला नहीं गया है बराबर रक्षा करेगा उसका भजन किया करो ग्रन्थ में श्राशा पूर्ण होगी और गई सो गई श्रव राख रही श्रौर वो मिलेगा मौजूद है चिंता मत करो श्राराम की मूर्त होने वाली है एक काम में विशेष लाभ होगा परन्तु ग्रव मंगल के व्रत किया करो श्रौर पत्तियों को बाजरा भोजन डाल दिया करो बड़ा पुण्य का काम है कूर ग्रहों का जप दान करेतेरहा करो ऐसा उपाय कराते रहने मे मन वांछित फल मिलेगा। कर्ज सिद्ध होंगे जो बड़े स्वर्च के काम सम्भ रक्खेहैं वो भी कांटा सा होकर ग्रानन्द में निकल जायगा काम देव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून हो जाती है चिंता न करो उसने चाहा तो शीघ्र ही कुशलता प्राप्त होगी।

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हे प्रच्छक तुम्हारे इस समय के प्रशन का यह फल है कि तुमने जो प्रशन विचार: है सो काम सिद्ध होंगा और लाभ की सूरत शीघ्र वनेगी और आराम की सूरत नज़र आती है पिछले साल कुछ महीने मध्यम रहे खर्च विशेष रहा था और आमदनी न्यून होती थी उसने चाहा तो शुभ भाग्य उदय होगा और काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब है लाभ की सूरत होकर हट जाती है ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो और वृत सांभर श्रद्धा अनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे मे आनन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यून वन गया सो ईश्वर भी जाने है अब भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी और बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन वार्ता की समुद्र की तरंगो सी चित्त में उठती हैं और समा जाती हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न?११

हे प्रचंड तुम्हारे कार्य में विलंब है काम ऋभी ठीक न होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखा सोचते हो कुछ और होता है कुछ। कई वार्ता की चिता बनी हुई है। जीव की धन की मंगल चार की कष्ट रूपी क्लेश की परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने का पसंद करते हो झूंट से क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो। तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि ऋकल बड़े विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की झूंट सत्य का परिज्ञा समझते हो एक काम न्यून बनाया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मण खीर खांड के जिमाग्रो ऐसा कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा और लाभ होगा। तुमने अपने ऊपर बड़ा जो फिक्र सम्भव रखना है सब काम आनन्द में हो जायगा।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११२

हे प्रचण्डक तुम्हारा यह प्रश्न श्रायुग्रा इस बक्र बहुत श्रेष्ठ है। तुम्हें बिना कारण चिंता फिक्र भयग्रा उत्पन्न हां जाता है। बुद्धि भ्रमग्रा हां जाती ह। गया सो गया फिर ग्रायेगा मिलेगा क्या मिलेगा, श्राराम मिलेगा धन की प्राप्ति होगी, घर में मंगल चार होगा पीड़ा का नाशा होगा जीव की खुशी ग्रौर प्राप्ती होगी ग्रकस्मात खुश खबरी सुनने को मिलेगी

तुम ग्रपने देव मित्र देवताग्रां के निमित्त वस्त्र मिष्टान्न, कच्चा दूध, मावश्या को पिलाते रहा करो इस प्रकार दान पुण्य कराने से रोजगार बढ़ेगा उच्च पदवी पाने में सफल होगे एक जीव का ध्यान बना रहता है मित्र के ध्यान में चित्त बहुत रहता है तुम्हें विद्या मध्यम है परन्तु ग्रकल बुद्धि तेज है किसी का बुरा नहीं चाहते हो सत्य बातों को पसन्द करते हो खर्च है

ग्रनजाम कुशाल है राजद्वार से ग्रन्न में विजय है

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तात्कालिक भृगु प्रश्न ११३

हे प्रचंड तुम्हारे खोटे दिन गये अब श्रेष्ठ आने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रखा है उसे देख माल कर सोच समभ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं अब आगे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन जप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा आयेगी लाभ की सूरत होगी तुम्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यून रहा मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है एैसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तम दशा आने पर लाभ अधिक होगा मित्रों से प्रीति बढेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चीज वापस मिलेगी। तुम रमनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बड़ा श्रेष्ठ काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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तात्कालक भृगु प्रश्न १ १ ४

हे प्रचंड इस समय तुम्हारी राशि पर कई ग्रह नाकिसे मौजूद हैं ऐसी श्रवस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, श्रीमदनो हानि २ रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो वहां पर श्रधूग भी नहीं होता है ऐंसी दर्शं में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है: चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लालसा बनी रहती है जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग आपका चित्त स्थिर नहीं रहता है काम कावू से बाहर है जब दशा मध्यम होती है श्रपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय कराश्रो उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्यात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है दूर होगी तुम सर्दी में कम्बल श्रथवा गर्म वस्त्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरूर कराश्रो यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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हे प्रचण्ड जो हो गया सो हो गया श्रव तुम्हें कार्य चतुराई बुद्धिमानी तथा सोच विचार के करना चाहिए क्यों कि तुम पर नामिक दशा चल रही है तुम्हें चिंता फिक्र बहुत रहता है ग्रहों का उपाय कराओ उपाय के कराने से दशा बदलेगी तत्पश्चात कार्य सिद्ध होगा राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी जीव की प्राप्ति होगी लाभ और मझला चार होगा तुम पर बहुत दिन से यह दशा चल रही है तुम इन ग्रहों का उपाय पहले से कर देते तो निहाल हो जाते कामदेव की प्रबलता में बुद्धि न्यून हो जाती है कार्य होते २ रुक जाता है कार्य में शत्रु रुपी ग्रह हानि करा रहे हैं जो कार्य सोचा है विलंब से होगा तुम श्री दुर्गा देवी का भजन पूजन किया करो वन सके तो हवन कराया करो ऐसा करने से नये २ लाभ होंगे कष्टवाधा नष्ट होगी तथा सव प्रकार का श्रानन्द होगा तुम्हारी मनोकामनायें पूर्ण होंगी ।

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हे प्रचंड तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किसी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यून चल रही है ऐसी दशा में चिंता क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है अनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता है रुक जाता है तुमको एक जीव की चतुर्थ भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तुम्हारा दान पुरषय में भी चित्त नहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये अगर जो बन सके तुम दान अवश्य किया करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय अवश्य करात्रों उपाय पूजन दान पुरषय करनेसे तुम्हारी दशा बदलेगी कार्य की सिद्धि होगी

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है प्रचंडक तुम को पिछले दिन बहुत नाकिस फिक्र से गुजरे और खर्च विशेष होना रहा लाभ मध्यम होना था सो अब प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा ब्याधा और रंज नष्ट होंगे घर में खुशी होगी चित्त की चिंता चित्त में ममा जानी है समुद्र की तरंग सी नई नई उठती हैं सो वृथा जाती हैं एक जीव में चित्त बहुत अधिक रहता है अब ईश्वर चाहे ता कहीं से खुशी की बात सुनोगे उच्च पदवी प्राप्त होगी नाकिस ग्रहों का दान और सुबह शाम शिवजी का भजन किया करो और यह जो तुमने प्रश्न किया है उस काम में भी सफलता प्राप्त होगी मिलेगा गई सो गई अब राख रही कोई काम कानून से बाहर है कार्य सिद्ध होगा ईश्वर का भरोसा करो काम में सफलता सविघ प्राप्त होगी

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हे प्रच्छक तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। प्रथम दशा न्यून थी, श्रव दशा श्रेष्ठ ग्राने बालती है। जीव की चिंता वनी रहती है। श्रौर लाभ का उद्योग विशेष सोचते हो परन्तु लाभ श्रधूरा होता है। श्रौर यह ज श्रव कित्र हे ग्रोर खर्च सो दूर होगा। श्राराम होगा गुप्त वंध में मिलेगा सफलता प्राप्त होगी कष्ट नष्ट होगां। कई ग्रह तुम्हारी राम पर नार्किस हैं पन्न्राज्ञ में देखो सो श्रव उन ग्रहों का उपाय विधि पूर्वक पंडित से करात्रों। श्रौर विनादान के कार्य सिद्ध देर से होगा। इस कारण चावल, मिष्टान, श्वेतवस्त्र, रजतित, श्रर्थात श्रद्धा प्रमाण चांदी दान का करना वहुत श्रेष्ठ मन की कामना पूर्ण होगी श्रचानक लाभ की सूरत वनने वाली हे चित्त स्थिर करके किसी काल ईश्वर का भजन किया करो प्रश्न श्रेष्ठ है श्रन्नाप कुशल है तीर्थ श्रेष्ठ हे

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२४ हे प्रच्‍नक इस समय के प्रश्न का यह फल है कार्य श्राधीन से बाहर श्रर्थात काम काबू से बाहर है चिंता कष्ट कई जीव शत्रु ता गुप्त करे हैं परन्तु उनसे कुछ हो नहीं सकता एक जीव में चित्त बहुत रहता है दशा मध्यम के कारण श्रनेक प्रकार की होन वार्तालाप सोचते हो समुद्र की लहर सी उठती है नई नई बात का चिन्तवन होकर निर्फल होता है कई फिक्र भारी लगे हुये हैं जीव की प्राप्ति होगी सफलता प्राप्त होगी श्रोंर चंगा होगा श्रौर यह जी श्रव चिंता है सब दूर हो जायगी पीत दान करो चने की दाल हल्दी पेला वस्त्र पेलें पुष्प स्वर्ण श्रद्धानुसार गुप्त चिंता दूर होगी कार्य में सफलता होगी मनवांछित फल प्राप्त होगा दशा न्यून के कारण फिक्र रहता है गृह में क्लेश होता है श्रब दशा श्रेष्ठ श्राने वाली है यह कार्य होकर नवीन उत्सय करेंगे॥

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२५

हे प्रचण्ड तुम्हारा प्रश्न चिंता रूपी कष्ट का है खर्च विशेष होगा जीव की लालसा जीव चिंता बनी रहती है तरह तरह के उदवeg

चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काबू से बाहर है दूसरे श्रादमियों को भी बहुत फिक्र है जब दशा मध्यम होती है अपने भी पराये हो जाते हैं परन्तु अभी कार्य में विलम्ब है

कामना पूर्ती तो होगी परन्तु पाप ग्रहों का पूजन विधि पूर्वंक बटुक भैरव का मन्त्र भी जपवात्रो ( मंत्र ) ॐ एं ह्रीं श्रीं बटुक भैर्वाय

आपदुद्धारणाय सर्वविघ्न निवारणाय मम रक्षां kuru kuru स्वाहा। इस मन्त्र के जाप से मनो—कामना पूर्ण होगी और यह जो चित्त को दीर्घ चिंता हैं सो काम होगा और मिलेगा खर्च

विशेष है एक जीव में चित्त भी बहुत रहता है लाभ श्रध्रूरे होते हैं नई नई वार्ता का चिन्तवन रहता है परन्तु शन्त में कुशलता है॥

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तत्कालिक भृगु प्रश्न १२७

इस समय के प्रश्न का फल यह है कि काम ठोक बैठेगा या न बैठेगा इज्जत का भय है या जाता है ऐसी दशा में गवन भी होना है गुप्त चिंता रहती है कभी चित्त में कुछ ज्ञाता है कभी कुछ ज्ञाता है ऐसी दशा में स्वचं विशेप होता है एक गुप्त मनार्थ है सो कब तक श्याराम होगा सो श्रव न्यून दशा वीचर्ने वाली है श्रौर श्रेष्ठ ज्ञाने वाली है परन्तु काम में देर है।

इष्ट देव को पूजन करना चाहिये पित्रो के निमित्त मिष्टान वस्त्र कच्चा दूध पीपल को जल देना श्रेष्ठ है कई महीने से भार्ग्य की हीनता यानी मध्यम है। पूजन करने से धन की प्राप्ति होगी श्रौर जीव का मिलना कष्ट रूपी रंज का दूर होना यह जो श्रव बहुत चिन्ता है काम जरा देर से मर्जी के माफिक होगा काम के कचू से बाहर हो गया दशा मध्यम है

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तास्त्रालिक भृगु प्रश्न १३०

हे प्रचंड तुम्हारा काम काबू से बाहर है और धन का व्यय विशेष है प्रकस्मात यह मामला है और जीवकी चिंता बनी रहती है और श्रादमी को भी चिंता बहुत है इज्जत का ख्याल है रडे २ खर्च दीखते हैं और तुम परोपकारी सत्य वो को पसंद करते हो बल दिद्र के काम को पसंद नहीं करते तुम्हारा प्रश्न जीव और धन का है और इज्जत का भय होता है अनेकों प्रकार की वार्ता सोचते हो पर निर्फल हो जाती है पता नहीं लगता जतन भी करे अन नवग्रहां का दान मंत्र जाप कराओ यह काम ईश्वर चाहे तो ठीक होने वाला है और श्रादमी भी सहायता करेंगे कई शत्रु हैं ग्रह इष्ट देव का पूजन जाप कराने से मनोकामनां पूर्ण होगी और मिलेगा वंश की वृद्धि होगी जीव की प्राप्ति भी होगी और लदमी की चमत्कार भी प्राप्त होगा और श्राराम होगा।

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इस समय जो आपने प्रश्न किया है ऐसे स्वर में यह वार्ता है कि गुप्त चिंता बनी हुई है एक जीव की लालसा बनी रहती है धन से ही सारे कार्य सिद्ध होते हैं रोजगार में मध्यम लाभ है सो प्राप्त होगी या नहीं मंग ताचार की यह सूरत कब तक होगी जिसमे घर में चंदन हो ञ्राराम हो कब तक दिन केड़े हैं गुप्त लाभ भी होगा यह भगड़ा कब तक मिटेगा दिन रात चित्त में चिंता क्लेश रहते हैं कब दिन अच्छे आवेंगे ञ्रापको दही लडडू मिष्टान भोजन देने से कार्य में सफलता प्राप्त होगी ञ्रौर तुम्हें अपने इष्ट देव का पूजन घर में पितर पीड़ा का उपाय शीघ्र करना चाहिये उपाय के कराने से ञ्रापके काम सिद्ध होगा इज्जत बढेगी सब से जीतोगे शत्रु रुपी ग्रह हानि कर रहे हैं दिन रात नई - २ वार्ता सोचते हो परन्तु सब निफल हो जाती हैं लेकिन ग्रनत में कुशलता प्राप्त होगी

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तास्कालिक भृगु प्रश्न १३३

इस समय के प्रश्न का यह फल है जीव चिंता भषियति धन न्यूयं दिने दिने मंगला चार विलम्बस्य पराधीन कृत्ययो: राजद्वार कन्यायं स्थिर कार्य दृष्टय: ग्रहपीडा च प्राप्नोति भृगुण परिभाषित: मध्यम दशा में मध्यम कार्य हो जाते हैं मन की वार्ता कब तक पूरे होगी मिलेगा या नहीं रोजगार की हानि है कब तक वृद्धि होगी ग्राज कल दिन नाक्षिस हैं घर में चांदना कब तक हो यह कार्य ग्रब के भी सफल होगा जिससे वंश की वृद्धि हो तुम्हारी रास पर कई ग्रह मध्यम हैं पन्ना देखो नाक्षिस ग्रहों का दान मंत्र जाप ग्राया दान कराने से ग्रब यह मनोरथ सिद्ध होगा। तुम्हारा काम काबू से बाहर है मामला ईश्वर के श्राधीन है परन्तु जो बात तुम्हारे चित्त में ग्रौर है यह ग्रह का प्रभाव है परन्तु तुम्हारा बुद्धि में ग्रह्ला है।

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १२४

है प्रचंडक तुम्हारा यह प्रश्न जीव की चिंता का हे कार्य पराधीन कानून से बाहर हो गया बहुत से यत्न करते हो बहुतेरी बात सोचते हो मंगलाचार खुशी और वंश की वृद्धि राजद्वार बिद्या की सिद्धि धन की जीत श्रेष्ठ दशा में होती है अब जो तुम्हें यह चिन्ता बनी है और लालसा जीव की है सो काम में विलंब है परन्तु मिलेगा और सफल होगा ऋत: जतन उपाय से इच्छा पूर्ण होगी घर में स्वप्न भी दीखते हैं ाराम की सूरत होगी जीव प्रापि होगी इज्जत का काम हो संदेह मटेगा धन का मनोर्थ पूर होगा देवी का पूजन कराओ और अपने हाथ से शत खांड चावल चांदी का दान करो इश्वर चाहे तो उपाय करते ही इच्छा पूर्ा होगी, और तुम परोपकारी हो सत्यवादी हो असत्य को पसंद नहीं करते हो बल्कि सच्चा करने हो

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १३५

है प्रचंड चित्त चिंता भविष्यति गृह क्लेश न संशय: धनमानम हानि पीड़ा देह दीर्घता मंगलाचारकं योगं वंशवृद्धौ च प्राप्त्ये राजद्वारकं न्याय धन हानि विलंबता

इस प्रश्न का फल यह है तरह २ को वार्ता लाभ को साचते हो काम काबू से बाहर है दशा कई महीने से मध्यम है न्यूं दशा में धन हानि विशेष व्यय लाभ मध्यम चिंता और क्लेश नुकसान होते हैं

राजद्वार में भी काम मर्जी के मुताबिक नहीं होते सो काम कब तक होगा जो घर में चादना और चमत्कारी हो वंश की और इज्जत की वृद्धि हो और वह मिले एक जीव में चित्त विशेष रहता है

सो शेवजी का पूजन करना चिंटीनाल देना श्रेष्ठ है और अपने हाथ से गुड़ गेहूं लाल वस्त्र लाल पुष्प आदि दान करके किसी ब्राह्मण को दो ईश्वर चाहे तो सब काम शीघ्र ही बन जावेगा और कामना पूर्ण होगी।

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हे प्रच्छक गुप्त चिंता शारीरेण धन हानि च दर्शयते ग्रह पीड़ा मविष्यति दर्शयते भाग्य मंदता जीव चिंता च माप्नोति मंगला चार हर्षकं धन नष्ट न संदेहो जीव प्रश्ने च प्राप्त्यये इस समय दुस्वभाव स्वर हे इसमें भाग्य की वृद्धि वंश की वृद्धि मंगला चार राजद्वार में न्याय किशी प्यारे की चिंता विद्या का लाभ रोजगार क्रत्य पीड़ा को यत्न दुस्वभाव स्वर में इस प्रकार के प्रश्न होते हैं सो तीन ग्रह तुम्हारी राशि पर ग्राजकल नाकिस चल रहे हैं पत्ते में देखो नाकिस हैं या नहीं जरूर हैं इन नाकिस ग्रहों का दान मंत्र जाप करात्रो जिससे भाग्य की वृद्धि का ताल्ला खुले और उच्च पदवी प्राप्त हो तथा जीव की प्राप्ति होकर मंगताचार के कायों में सफलता प्राप्त हो और गुप्त गई हुई चीज भी प्राप्त हो ग्राजाम कुशल है जिसे चाहोगे सो प्राप्त होगा।

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हे प्रचंडक तुम्हारा यह प्रश्न जीव रूप लदमी का है चिंता दीर्घ है और स्वर दुस्वभाव है प्रश्न दो तरह कैसे हैं एक शंका अलग हो जाना और दूमरा रोजगार मध्यम होना चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है घर में अंधेरा सा रहता है तथा जीव की जालसा बनी रहती है जनन भी करते थे परन्तु ऋथा चले जाते थे चिंता और इज्जत का ख्याल है और यह ख्याल है ऋष के भी काम होगा अथवा नहीं राजद्वार की उच्च पदवी की आशा है अब चिंता इस प्रश्न की है सो काम ईश्वर आधीन है दिन बहुत समय से मध्यम हैं भावय उदय होने को होता है लेकिन होते २ रुक जाता है अब तुम्हें पूजन श्री दुर्गादेवीजी का कराना चाहिए इसके कराने से शांति होगी। कई ग्रह राशि पर केटद्रहैं उनका उपाय कराना चाहिये काम में सफलता प्राप्त होगी कष्ट और बाधा नष्ट होकर लाभ की सुरत श्रेष्ठी बनेगी वह मिलेगी

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हे प्रचंडक तुम्हारा काम काजु से बाहर है दिन रात विवेक्त तरह २ की बातीं और लाभ मोचते रहते हो वनकर काम की ग्रानन्द की सुरत ग्रध्यम सो हो गई है ऐसी ग्रवस्था में उप्त चिंता और शत्रु का चित्त में भयसा तथा धन का चा जाना और मित्र का ख्याल बना रहता है रोजगार का मध्यम होना कष्ट व्याधि हाँ खोटी दशा में बहुत बातों का ख्यात होता है तुम पत्नियों को ग्रन्न वाजरा भोजन दो और श्री वटुक देव का पूजन कराओ यह मंत्र ॥पो उo एं ह्रीं क्लीं श्री विष्णुभगवान मम अपराध नमाय करु करु सर्व विद्न विनाशाय समकामना पूर्ण करु कुरु स्वाहा। मंत्र के कराने से वंश की वृद्धि होती है रोजगार श्रेष्ठ होता है जीव की प्राप्ति होती है राजद्वार में विजय होती है गई हुई सद्मी फिर वापिस ग्राती है सर्व कामना सिद्ध होकर शुभ शांति प्राप्त होने लगते हैं

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हे प्रच्छछक तुम्हारा यह प्रश्न जरा मध्यम मालूम होता है ऐस्ी ञ्रवस्था में पुत्र की लाभ सगइे रोजगार मध्यम दशा में मुशकिल होते हैं ञ्रथात होता २ लाभ रुक जाता है। धन का नुकसान ञ्रौर धन हर्रा होता है राजद्वार से सफल होना मुशकिल हो जाता है उच्च पदवी नहीं मिलती जीव की प्यारे की चिंता हो जाती है जो काम सोचते हो तार भंग हो जाता है ञ्रौर गुप्त शत्रु भांजी मार देते हैं एक मनोर्थे बहुत दिन से सोच रखा है ३श्वर चाहे तब हो ञ्रब इष्टदेव ञ्रौर घरके पित्रो के निमितो कुछ जप दान ञ्रादि कराश्रो जिस्मे मनोर्थ सिद्ध हो जिसकी चाहना है वो मिले जीव की प्राप्ति होगी रोजगार में ञ्रधिक लाभ होगा ञ्रौर राजद्वार में सफलता होगी गई चीज मिले मझल चार हो इतने पूजन न बनेगा कोई कार्य सफल न होगा काम मध्यम रहेगा ञ्रन्त में कुशलता प्राप्त होगी

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हे प्रच्छक तुम्हारा यह प्रशन उत्तम श्रेणी का है जिससे अब तुम्हारा मनोरथ सिद्ध होगा। श्रेष्ठ दशा ग्राने वाली है। उत्तम दशा गई। चीज का मिलना, रोजगार में लाभ, शत्रु से लाभ और जीव की प्राप्ति तथा राजद्वार में विजय घर में मंगलाचार कष्ट व्याधा नष्ट, यात्रा में लाभ और मन का मनोरथ भी सिद्ध होगा अब तुम्हारी राशि पर दो ग्रह नाकिस और बाकी हैं पत्ता देखो उनका उपाय जरा और श्रद्धा से करो हे; और शाम को और चींटीनाल जव तक बने जिमाया करो दशा उत्तम ग्राने वाली हे पित्रे; दिन बहुत फिक्र से बीचे सो अब तुम उपरोक्त कार्य शीघ्र करो ईश्वर चाहे तो काम पूर्ण होंगे ग्रास पूरी होगी मिलके लाभ होगा एक जीव में चत्त विशेष कर रहता हे उसमें भी सफलता प्राप्त होगा सो ग्रानन्द में बीतेगी कामदेव की उनमत्तता में बुद्धि न्यून भी हो जाती है।

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हे प्रचण्ड तुम पर बहुत दिनों से दशा नाकिस थी नहीं तो निहाल हो जाते लाभ की सुरत में हानि पदा होगई शत्रु बुराई करते हैं अब एक और खुशी की बात तुम्हें होने को हो रही है दशा नाकिस में धन माल का निकल जाना पीड़ा का घर में वास होना इज्जत का भय होना हुआया मंगलाचार का हट जाना और राजद्वार की चिंता हानो यह सब बात नाकिस दशा में होती हैं अब तुम सायंकाल को घृतं का दीपक शिवजी के मन्दिर में प्रज्वलित किया करो और जलका लोटा भर के शिवजी को और पीपल पर चढ़ाया करो और इतवार को ब्राह्मण जिमाओो अथवा वृत्त किया करो कई ग्रह तुम्हारी राम पर नाकिस हैं पत्रे में देखो सो नाकिस दशा का फल न्यून हो जायगा जो उपरोक्त कार्य करो उसके करने से जो तुम्हारी मनो कामना है वह पूर्ण होगी और कुशलता प्राप्त होगी।

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हे प्रचंडक तुम्हारा इस समय का प्रशन बहुत श्रेष्ठ दीखता है बुरे दिन गये और अच्छे जाने वाले थे सो तुम्हारी रास पर दो तीन ग्रह मध्यम श्रा गये हैं और तुमने उनका दान जप कराया नहीं है इस कारण ऐसे फिक्र चिंता उठाई लाभ कम रहा खर्च विशेष है पीड़ा की चिंता चित्त में, भंयसा होना, काम उम्दा लाभ का श्रभी नहीं बना, जीव की चिंता है, वंश की वृद्धि और मंगलाचार होना एक श्रपना प्यारा है उसी में चित्त बहुत रहता है राजद्वार को चता है श्रब लाया दान और चने की दाल पेला वस्त्र हल्दी स्वर्णदान श्रद्धानुसार करना चाहिये ऊपर के दान पुण्य के करने से ईश्वर चाहे तो मन की कामना पूर्ण होगी उच्च पदवी मिलेगी जीव की प्राप्ती होगी लाभ का रास्ता खुलेगा भूमि से लाभ और पीड़ा नष्ट होगी और राजद्वार से भी काम में सफलता प्राप्त होगी

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हे प्रचंडक तुम्हारा प्रशन मध्यम है झ्रभी तुम्हारी मर्जी के झ्रनुसार काम होने में.. देर है कष्ट रूपी रंज, क्लेश चिंता बहुत रही काम होता होता रुक जाता है ऐेसी सब बातें मध्यम दशा में ही होती हैं झ्रगर कभी कहीं गवन हो जाय तो भी ताज्जुब की बात नहीं एक मित्र से प्रीत बहुत है एक शत्रु गुप्त: है इस समय उसका प्राप्त होना कठिन प्रतीत होता है मंगला चार में देर है एक जीव की भी झ्रभिलाषा है झ्रब तुम नवग्रह का पूजन दान करो उसके कराने से दशा न्यून बदलेगी श्रेष्ठ झ्रायेगी सो सब काम उत्तम दशा में सफल होंगे जीव का लाभ होगा गई हुई चीज फिर प्राप्त होगी कष्ट बाधा नष्ट होगी, उच्च पदवी मिलेगी राजद्वार से कम सिद्ध होगा गुप्त चिंता मिटेगी चित्त में झ्रनेक प्रकार की वार्ता चितवन करतेहो चित्तकी वार्ता चित्तमें समा जाती है झ्रब शांष्ठ ही खुशी की वार्ता सुनने में झ्रावेगी

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तार्कालिक भृगु प्रश्न १०

हे प्रचण्ड तुम्हारे इस समय के प्रश्न का यह फल है कि तुमने जो प्रश्न विचार है सो काम सिद्ध होगा और लाभ की सूरत शीघ्र बनेगी और श्राराम की सूरत नजर श्राती है पिछले साल कुछ महीने मध्यम रहे स्वर्च विशेष रहा था और श्रारामदनी न्यूून होती थी उसने चाहा तो श्रन भाग्य उदय होगा और काम में सफलता प्राप्त होगी थोड़ा विलम्ब हे लाभ की सूरत होकर हट जाती हे ईश्वर का स्मरण चित्त लगाकर किया करो और घृत सांभर श्रद्धा श्रनुसार दान करो जिसके कराने से तुम्हें फिर नये सिरे से श्रानन्द का प्रबन्ध होगा चिंताएं मिटेंगी बाधाएं टलेंगी और खुशी प्राप्त होगी एक काम तुमसे न्यूून बन गया सो ईश्वर भी जाने हे श्रव भजन विशेष करने से कार्य की सिद्धि होगी और बहुत सी प्राप्ती होगी नवीन २ वार्ता की समुद्र की तरंगसी चित्त में उठती हैं श्रौर समा जाती हैं

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १५१

हे प्रचंडक तुम्हारे कायें में विलंघ है काम ऋभी ठीक न' होगा दशा नाकिस चल रही है कई ग्रह' नाकिस हैं पंचांग खोल कर देखो सोचते हो कुछ और होता है कुछ । कई वार्ता की चता बनी हुई है । जीव की धन की मंगला चार की कष्ट रुपी क्लेश की परन्तु तुम सत्यवादी हो सत्य बोलने का पसंद करते हो भूंंट से क्रोधित होते हो पराये काम मन से प्रीत लगा कर करते हो किसी का बुरा नहीं चाहते हो । तुम्हें विद्या कम है परन्तु बुद्धि ऋकल बडे विद्वानों से विशेष है हर एक की बात की भूंड़ मृत्यु का परोक्षा समझते हो एक काम न्यून बनगया था सो ईश्वर की भक्ति विशेष करो श्री गंगाजी के ५ ब्राह्मए खीर खांड के जिमात्रो ऐसो कराने से तुम्हें मनवांछित फल मिलेगा और लाभ होगा । तुमने अपने ऊपर बडा जो फिक्र समभ रखा है सब काम ग्रानन्द में हो जायगा।

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हे प्रच्छक तुम्हारे खोटे दिन गये श्रब श्रेष्ठ ग्राने वाले हैं। तुमने जो काम सोच रक्खा है उसे देख माल कर सोच सम्भ कर करना क्यों कि तुम पर नाकिस दशा चल रही हैं श्रब श्रागे को दशा बदलेगी जो ग्रह तुम्हारी रास पर नाकिस चल रहे हैं उनका पूजन जप विधि पूर्वक कराना चाहिए उसके करने के पश्चात उत्तम दशा श्रायेगी लाभ की सूरत होगी तुम्हारे पिछले दिन बहुत नाकिस दशा में गुजरे खर्च विशेष रहा लाभ न्यूंन रहा मर्जी के माफिक लाभ नहीं होता था यह सब नाकिस दशा का प्रभाव है इसी दशा में कार्य ठीक नहीं होता है उत्तम दशा ग्राने पर लाभ वृद्धि क होगा मित्रों से प्रीति बदेगी तथा जीव की प्राप्ति होगी गई हुई चीज वापस मिलेगी। तुम रामनाम की चून की गोली बना कर बहते जल में प्रवेश किया करो यह बड़ा श्रेष्ठ काम है इससे भी कार्य में सिद्ध होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १५४ हे प्रचंडेक इस समय तुम्हारी राशि पर कई ग्रह नाकिस मौजूद हैं ऐेसी ग्रवस्था में शत्रु उत्पन्न होते हैं, श्रमदनी होती रुक जाती है जहां पूर्ण लाभ समभते हो वहां पर श्रधूरा भी नहीं होता है ऐेसी दशा में लाभ कम होते हैं प्यारों से जुदाई होती है चिंता रुपी कष्ट रहता है जीव की लालसा बनी रहती है जीव चिंता तथा तरह २ के उद्वेग तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं रहता है काम काज से बाहर है जब दशा मध्यम होती है ग्रपने भी पराये हो जाते हैं तुमको कई भारी फिक्र लगे हुए हैं तुम पर नाकिस दशा चल रही है यत्न उपाय कराश्रो उपाय से शीघ्र दशा बदलेगी तत्पश्चात जीव की प्राप्ति होगी कार्य में सफलता प्राप्त होगी यह जो चिंता है दूर होगी तुम सर्दी में कम्बल ग्रथवा गर्म वस्र का दान करो इससे लाभ की सूरत होगी ग्रह उपाय जरूर कराश्रो यत्न उपाय से जीव लाभ होगा।

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हे प्रचण्ड इस समय के प्रश्नानुसार तुमको दीर्घ चिंता है। प्रश्न दो तरह के हैं गई चीज मिलना दूसरा लाभ प्राप्ति है तुम्हारे चित्त में दिन रात समुद्र की तरंग सी उठती हैं तुम जो विचारते हो वह होता नहीं तुमको व्यर्थ चिंता लगी रहती है और इज्जत का विशेष ध्यान रहता है मन के माफिक लाभ नहीं होता है एक जीव में ध्यान विशेष रहता है तुम पर दशा मध्यम चल रही है पन्नांग में देखकर उपाय कराओ। उपाय के कराने से शीघ्र दशा बदलेगी उसके बाद लाभ के कार्य होंगे जीव प्राप्ति होगी एक मित्र द्वारा लाभ कार्य होगा तुम गऊ सेवा किया करो बन सके तो संध्या समय गौत्रों को घास मिष्टान मिलाय रोटी बनवाय नित्य जिमाया करो ऐसा करने से शीघ्रति शीघ्र तुम्हारी दशा बदलेगी और प्रत्येक कार्य में लाभ होगा तथा घर में चांदनी सा दिखाई देगा अर्थात सर्व प्रकार से आनन्द होगा

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हे प्रचण्ड इस समय के प्रश्न का यह फल हैँ तुम पर दशा बहुत दिन से मध्यम थी खर्च विशेष हुवा लाभ कम हुवा अब तुमको दशा श्रेष्ठ ग्राने वाली है तुम्हारी कामना पूर्ण होगी तुमने जो काम विचारा है काम ठीक बैठेगा तुम्हारा प्रश्न उत्तम है तुमको भाग्य की वृद्धि होंगी घर में मंगलाचार होगा राजद्वार से न्याय की आशा तथा तुम्हें किसी प्यारे और धन की रोजगार की चिंता बनी रहती है जो सोचते हो सिद्ध नहीं होता इस कारण तुम्हारे ऊपर जो ग्रह दशा चल रही है उसका यत्न उपाय कराओ उपाय होने पर शीघ्र दशा अच्छी लावेगी अच्छी दशा के ग्राने पर लाभ की नई नई सुरत बनेंगी तथा वंश की वृद्धि होगी तुम ईश्वर का भजन किया करो मंगल का व्रत रखा करो और ग्रनाथों की सहायता किया करो इससे सर्व प्रकार के कार्य सिद्ध होंगे।

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हे प्रचंडक तुम्हारी बुद्धि चलायमान रहती है कभी कुछ सोचते हो और कभी कुछ बुद्धि स्थिर नहीं रहती है और तुम्हारा किसी कार्य में मन नहीं लगता है तुम्हें दशा न्यूम चल रही है ऐसी दशा में चिंता क्लेश फिकर कष्ट रहते हैं लाभ कम होता है खर्च विशेष रहता है अनेक लाभ कार्य सोचते हो लेकिन इच्छा के अनुसार लाभ नहीं होता है अर्थात होता रुका जाता है तुमको एक जीव की चतु भी लगी हुई है राज द्वार का मामला भी दीखे है कृत्य का भारी फिकर लगा है यह सब ग्रह दशा का प्रभाव है तुम्हारा दान पुरषय में भी चित्त नहीं है तुम्हें उधर ध्यान देना चाहिये अगर जो बन सके तुम दान अवश्य करो और भक्ति पूर्वक ईश्वर का भजन पूजन भी किया करो तथा नाकिस दशा का उपाय अवश्य करात्रों उपाय पूजन दान पुरषय करनेसे तुम्हारी दशा बदलेगी काया की सिद्वि होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १५१

हे प्रचंडक तुम्हारा प्रश्न श्रेष्ठ है जो हो गया सो हो गया अब चिंता और फिक्र मिटेगा तुम्हारा कार्य सफल होगा जीव की प्राप्ति होगी राजद्वार से खुशी प्राप्त होगी और भूमि से लाभ होगा मंगलाचार और प्रसन्नता होगी तुम्हारा एक जीव में चित्त बहुत रहता है तुम तरह २ की वार्ता का तद्न करते हो तुम्हारा चित्त चलायमान रहता है

तुमको बहुत दिन से दशा मध्यम चल रही थी अब दशा बदलने वाली है तुम जो काम सोचते हो उसमें तारभंग हो जाता है गुप्त शत्रु तुमको नुकसान पहुंचाते हैं अर्थात ऊपर से तुमसे मीठी २ बात करते हैं और अंदर से काट करते हैं तुमने एक काम बहुत दिनों से सोचरखा है ईश्वर चाहे तो अवश्य होगा इष्टदेव पितरों के निमित्त दान पूजन कराओ उपाय न कराने से कार्य सिद्ध देर से होगा

पूर्णमासी को सत्य नारायण का व्रत रख्खा करो कथा कराओ इसके कराने से मनोकामना पूरी होगी

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तात्कालिक भृगु प्रश्न १००

हे प्रचण्ड तुम्हारा यह प्रश्न श्रेष्ठ है तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा तुमको जीव. और लाभ की चिंता बनी रहती है तुमने लाभ का उद्योग किया परन्तु लाभ कम होता है सो श्रव प्राप्ति होगी जीव का लाभ होगा कष्ट व्याधा रंज श्रादि नष्ट होंगे। घर में खुशी होगी तुम तरह २ का उद्योग सोचते हो परन्तु चित्त की चिंता चित्त में ही समा जाती है पीड़ा की चिंता चित्त में भय रहता है काम उत्तम लाभ का श्रभी नहीं बना श्रोर एक जीव में चित्त विशेष रहता है राजद्वार का भी ध्यान बना रहता है दशा मध्यम चल रही है उसका श्रद्धानुसार उपाय करो और बन सके तो शिव मन्दिर में नित्य वृत्त का दीपक जल्लाया करा सवेरे ही मन्दिर की सफाई किया करो श्रथवा सोमवार का व्रत किया करो ईश्वर चाहे तो मनो कामना पूरी होगी बाधायें नष्ट कष्ट श्रादि समाप्त होंगी उच्च पदवी मिलेगी जीव प्राप्ति होगी