1. BkHin-RamadasaAgarvala-tabalA-tAla-sangraha-1925-0007
Page 1
॥ श्री ।
तबला ताल संग्रह
लेखक
रामदास श्रगवाल
प्रकाशक,
द्वारका प्रसाद भग्रवाल
सर्वाधिकार स्वरक्षित
यस बार ५००], सन १६२५ [मूल्यं )
Page 2
तबला ताल संग्रह
लेखक :- रामदास शग्रवाल
कूंचा श्यामदास बादशाही मंडी ] इलाहाबाद
प्रकाशक,
द्वारका प्रसाद मग्रवाल
-: 0:
सर्वाधिकार स्वरक्षित
प्रथम वार ५०० ] सन् १६२५ [ मूल्य १।)
Page 3
॥ श्री गगाशायनमः ।।
प्रस्तावना संगीत विद्या के प्रेमियों! कोटिशः धन्यबाद उस करुणामय जगदीश्वर को है जिसकी अपार कृर्पा से आज मुझे इस बात का अवसर मिला है कि मैं एक नवीन "तबला ताल संग्रह" नामक पुस्तक आप लोगों की सेवा में अर्पण कर के कृतार्थ होऊं। तबला वाद बजाने का प्रचार प्रति दिन कम होता देख कर विचार करने से प्रतीत हुआ कि इस वाद्य में जो बजने वाले बोल हैं वह ठीक लयकारी में नहीं लिखे जाते, जिसकी सहायता से लाग ताल, लय, मात्रा और तबले की चीज़ों की शुद्ध लिपि करने की उत्तम रीति सीखते और इसी कारण इस विद्या का प्रचार कम देख कर मैंने इस वाद्य में बहुत सा समय लगा कर उसका बजाना सीखने की अति सुगम रीति निकाली है। आज कल प्रायः जिन जिन लोगों ने तबले की पुस्तकें बनाई हैं उन में इसी बात की न्यूनता होने से कठिन बोलों के हर एक अक्षर ठीक ठीक नहीं लिखे जाते, इस लिये उन पुस्तकों से सीखने वालों को लय-कारी का उचित ज्ञान नहीं होता। इस पुस्तक में तबला किस रीति से बजाना और कौन सा हाथ किधर रखना और उंगलियों को किस प्रकार उठाना और उन से काम लेना, चित्र सहित विस्तारा पूर्वक लिखा है, और आज कल जो ताल बजाये तथा वर्ते जाते हैं उन के ठेके और ठंके की गतें, कायदे, दोहरे, पलटे मुहरे इत्यादि भी थोड़े २ दिये हैं। इस पुस्तक के अनुसार यदि कोई मनुष्य अभ्यास करेगा तो मैं निश्चय से कहता हूँ की उन को तबला अच्छी रीति से बजाना आयेगा, साथ ही साथ लय-कारी का भी जञान होगा, इस्से महल मार्ग कोई नहीं है।
Page 4
( : ) आशा है कि जिन जिन सज्जनों को इस विद्या के सीखने की अभिलापा है वह इस पुस्तक द्वारा अभ्यास कर के मेरे परिश्रम को सुफल करेंगे। मैं हारमोनियम प्रोफेसर लक्षमन दास जी अग्रवाल (उप नाम मुनीम जी) को धन्यवाद देता हूँ जिन के संगीत पाठशाले में जाकर मै ने बहुत कुछ इस विद्या के बारे में सीखा। जिन २ महाशयों की बनाई हुई पुस्तक द्वारा मुझे पुस्तक लिगने में सुगमता हुई है उन का मैं अनुग्रहीत हूँ। विज्ञवर महाशयों से प्रार्थना है कि इस पुस्तक के लिखने में यदि काई त्रुटि हो गई हो उसे क्षमा करेंगे।।
निवेदक-
रामदास भग्रवाल
Page 5
oe
DE
रामदास अरग्रवाल
रचयिता "तघला ताल संग्रह"
Agarwal Printing Works, Allaha bad.
Page 6
विषय सूची पज वयान तबला तबला स्वर में मिलाने की रोनि ... २ बयान उगलियां के नम्बरो का तादाद बोलों की जा इस पुस्तक में आयेंगे 3 बयान ताल और मात्रा का ... खुले बार्य और बन्द बायें की परिभाषा इत्यादि ... .. (तथा बोल अदा करने का नरीका) ... .. परिभाषा :- ठेका, कायदा, दोहरा, पलटा, गन इत्यादि, ३४ ठंका धोमा तीताला जल्द तीताला ... ३६ पंजाबी या ठुमरी का ठेका '.६ तिरम्बा मारूफ निलवाड़ा ... टप्पा
श्रध्धा एक ताला ... .. " चौताला ६१
" आड़ा चौताला ६२ भ्रमरा .. ६४.
" धमाल .. ६७ रूपक .. चाचर ७० पज़तू तेवरा भपताला सूलफ़ाख़ता दादरा ७६ कहरवा ... कौवाली फरोदस्त क़ंद ८0 सवारी ८१ अ्स्टमंगल ... लक्षमी ८२ बिराम
रुद्र ८३ गणाश
"' सुरुसती ..
Page 7
चित्र नम्बर १. यांयां दांया
..- i.
नं० १-स्याही; नं०२-मैदान; नं० ३-चांटी; नं० ४-गजरा; नं०५-बध्धी; नं० ६-गट्टा नं० ७-इनडोई बयानतबला बयान तबला दाया। कड़ी के कूडी का नाम तबला है जो कि खास तरह की होती है। और जो खाल उस पर मिढ़ी जाती है, उसको पूड़ी कहते हैं; और पूड़ी के किनारे करीब डेढ़ अंगुल के चौड़ा चमड़ा लगाते हैं उसको गोट कहते है। और चाटी भी उसे कहते हैं। और गेोट से मिला हुआ रस्सी की तरह कुछ बल दिये हुये जो चमड़ा लगाते हैं उसे गजरा या शंगर कहते हैं। और तबले की पेंदी में एक गोल हलका चमड़े का होता है उसका नाम इनडोई है और आध उङ्गल चौड़ा चमड़ा ज कई ग़ज लम्बा जो की गज़रे और इनडे,ई में तबले के चारों तरफ़ फंसा रहता है उसे बध्धी कहते हैं। और आठ टुकड़े लकड़ा के गोल करोब छः छः उङ्गल के जो खींचने और ढीला करने को नरज़ से रव्या में फँताये जाते हैं उसको गट्टा कहते हैं और जो काले रङ्ग का मजाला पूड़ां के बोव में तरह २ की आवाज़ अदा करने की ग़रज़ से लगाया जाता है उनके स्याहा कहतेह प्रौंर
Page 8
स्याही और चाटी के बीच में हलकः बन जाता है उसको मैदान कहते हैं। क्योंकि इस तवले को दांये हाथ से बजाते हैं इस कारण इसको दांया भी कहते हैं। इसका सुर हमेशा बांया से ऊंचा रहता है। बयान बांया इसमें गट्टे नहीं होते, बाकी सव वही चीज़े जो कि तबले में बयान की गई है इसमें भी होती है और इसकी कूड़ी दूसरे तरह की होती है और शम तौर से मिट्टी की होती है और खास तौर से तांबे या पीतल की शर खास इस कूड़ी का नाम बांया है और इसमें की स्याही बीच से ज्यादा हटी हुई लगाई जाती है क्यों कि इसे हथेली को बीच में रखकर बजाते हैं। इसका सुर हमेशा तबले से नीचा रहता है। और इसका चित्र नं० १ देखो और ख्याल करके समझो। तबला सवर में मिलाने की रीत इसके मिलाने की यह रीति है कि जब ऊंचे खवर में मिलाना हो तो हथौड़ी से गट्टों को नीचे की तरफ ठोकते हैं, जब थोड़ी सी कसर सब तरफ से वह आवाज़ होने में जिस खर में की मिलाना हो रह जाती है तो गजरे को ठोक ठोक कर उस खर में मिलाते हैं और आवाज़ करते जाते हैं। यदि चढ़ाना होता है तो नीचे की तरफ ज़रब लगाते है और यदि उतारना होता है तो उलटी ज़र्ब नीचे की तरफ से ऊपर को लगाते हैं शर जब खर में मिल जाता है तो थाप देकर देखते हैं कि अच्छी तरह से मिल गया या नहीं थाप लगाने का यह कायदा है कि पट हाथ को किसी कदर तिरछा करके सब उगलियां सीधी रखते हैं और पांचवी उगली यानी छंगुलियां से तबले के मैदान में आधी स्याही दबाकर ज़र्ब लगाते हैं श्रर हाथ उठा लेते हैं। इस आवाज़ को थाप की ता कहते हैं। चित्र नं० १४ देखो। तबला बांया, दांया की तरह कोई सवर में मिलाया नहीं जाता सिर्फ इतना खींच लेते हैं कि उतरा हुआ न रहे ताकिआवाज़ गू'जूदार निकलती रहे शर जब यह डीला हो जाता है तो चारो तरफ इसके गजरे को हथाड़ी से ठोक देते हैं। और क्योंकि इसे बायें हाथ से लोग बजाते हैं इस लिये इसे बावां कहते हैं। बयान उंगलियों के नम्बरों का क्यों कि उगलियेों ही से काम लिया जायेगा इस कारण पहले दोनो हाथो की ड गलियों के नंबर क्रायम किये जाते हैं :- अंगूठे से पहिला नंबर शुरू होकर छंगुलिया पर पांचवा नम्वर ख़तम होगा और हाथ की सूरत पट रहेगी दांया हाथ हो या बायां, तबला या दांया, के साथ
Page 9
( ३ ) जहां कहीं उङ्गलियों का ज़िकर आयेगा वहां दांया हाथ लिखने की, कोई आवश्य- कता नहीं है क्योंकि तबला-दांये हाथ से ही वजाया जाता है और बायें के साथ बांया हाथ लिखने की ज़रूरत नहीं है क्यों कि बांया-बांये हाथ से बजाया जाता है। और हर उगलियों के पहली पोढ़ का नाम सिरा रक्खा गया है। नोट :- बयान दांये हाथ की उङ्गलियों का, पहली और दूसरी उङ्गली की घाई अकसर आपस में मिली रहती है। दूसरी उङ्गली से बहुत कुछ काम लिया जाता है। तीसरी उङ्गली अकसर तबले से ऊची दूसरी उङ्गली के साथ इस इनतिज़ार में लगी रहती है कि जिस समय पर उस से काम लेने की ज़रूरत हो फौरन काम दे चौथी उङ्गली तबले के मैदान में किसी कदर टेढ़ी टिकी रहती है मगर बहुत हलकी इस लिये की तवले की आबाज़ बन्द न हो और हाथ की हरकत के साथ घटती बढ़ती रहती है और बाज़ समय पर तीसरी के साथ मिल कर काम देती है और कभी खुद भी काम देती है। पांचवीं उङ्गली हमेशा तबले की गोट पर रहती है और बाज़ मौके पर यह भी काम देती है।। तादाद बोलों की जो इस पुस्तक में आयेंगे। तिटि, दींना, तींना, दिन, तिन, दिन, दितिन, ताड़ि, नारि, तिई,तति, तत, तितिटि दिंदिं, दिंदिन, नन, तदिन. दिंनन, किन,गिन, तगि, नगि, कत, कित,तिंगि, दिंगि तगिन नगिन, तकिटि, नकिटि, तकु, दिंगिन, तिंगिन, दींगिन, दिनगिन, तिनगिन, तिनकि, गिदी, गिंदि, दींगि, तींगि, दिनगिन, तिंनगिन, किड़िदिन, किड़िदिं, किड़ितान, गिगि- नगि, किड़ि, किड़िनकि, गिड़िनगि, तिरिक; तिरिकिटि, किटि, किटितक, तिटिकत, तका, तगे, गिता, गिदिगिन, गिदिन,कधिटि, किड़ान, किड़िधा, किडिध, किड़िधान, किड़िधित, किड़ितकिटि, किड़िदिंदि, कितिरि, धिटि, धींना, धिन, धिन, धिनिन, धाड़ि, धिंई, धिई, धति, धध, धतिटि, घिन, धघि, नधि, घिंधि धींघि, धघिन, तघिन, धकिट, धिघिन, धींघिन, धिनघिन, धिनधिन,धिंनि,िदि, िदिघिन, किड़िघकिटि, कड़िधिन, किड़िधिं, धिंनन, घिघिनधि, घिड़िनघि, धिरिकिटि, घिधा, घिड़ान, घिदीं, घिनघि, घिना, तधिन, तर्धिन, तथा, नध, धर्विन, िधिन, धिधि, घीईड़ान, धी।।
Page 10
(४ ) बयान ताल और मात्रा का (१) वख्त या समय गिनने के वास्ते जो हाथ से ताली दी जानी है अधवा तवले से उसे ताल कहते हैं। (२) और ताल की गती को लय कहते हैं। (३) लय तीन किस्म की होती हैं। बिलंबित, मध्य, और द्रुत। परिभाषा, बिलंबित, मध्य और द्रुत की (१) बिलंवितः-याने बहुत धीमा लय (याने बहुत धोरे धीरे चलनं वाली लग) (२) मध्य :- याने बिलंवित से दुगनी चलने वाली लय। (३) द्रुत :-- मध्य से दुगुन चलने वाली लय को द्रुन कहते हैं। विषय मात्रा
मसलन ता बोल जो है इसे इतनी देर में अदा किया जाये कि तन्दुरम्त आदमी की नब्ज़ एक हरकत जितनी देर में करे। और एक मात्रे की लैकारी एक सेकड के बराबर होती है। ताल के बोलों के नीचे जो अलफ़ाज़ (शब्द) लिखे जाँयगे, जिनके माफिक वे बोल अदा किये जाँयगे, उनका नाम और मात्रा के भेद :- लघु, गुरू, प्लुत, द्रुत, अनद्गुत, तुरुत (अन अनद्रुत) विराम द्रुत, विरामलधु। परिभाषा
लघुः-एक मात्रे को लघु कहते हैं। गुरु :- दो मात्रे को गुरु कहते हैं, यह हर जगह एक मात्रे से लिखा जायेगा और इसके आगे एक मात्रे का ठहराव दिया जायेगा, क्यांकि इसमें एक मात्रे की ज़र्ब है और एक मात्रे का ठहराव है जैसे ता .... श्रा ज़र्ब ठहराव एक मात्रा एक मात्रा
Page 11
i
प्लुन :- तान मात्रे को प्लुत कहते हैं-यह हर जगह एक मात्रे से लिखा जायेगा और इसके आगे दो मात्रे का ठहराव दिया जायेगा क्योंकि इसमें एक मात्रे की ज़रब और दो मात्रे का ठहराव है जैसे :- ता. ज़रब ठहराव ठहराव एक मात्रा एक मात्रा एक मात्रा द्रुत :- आाधे मात्र का दरुत कहते हैं इसमें हमेशा एक हरकत होगी और यह हमेशा इस तरह लिखे जांयेगे जैले त, ध, दि, इत्यादि (याने द्रुत के वजन के बोल में दीघ मात्रे नहीं मिले रहेगें) या कई हरफ मिले हों जैसे तिटि घिटि, तकिटि इत्यादि। इस वास्ते ऐसा समझा दिया है कि जिस बोल के नीचे द्रुत लिखा हो उसे आधे मात्रे के मिज़ाज से अदा किया जाये। अनद्गुतः-पाव मात्र को अनद्रुत कहते हैं याने एक मात्रे का चौथाई हिस्सा को अनद्रुत कहते हैं। जिसके नीचे की अनद्धुत लिखा हो उसे पाव मात्रे के ही मिज़ाज से अदा किया जाये जैसे ति ..... रि बोल में ति और रि के नीचे अनद्रुत अनद्गुत अनद्रुत लिखा हुआ है तो दोनो बोल को याने ति और रि को पाव पाव मात्र केही मिज़ाज से अदा करो।। तुरुत या अन अनद्भुतः-आध पाव मात्र को अन अनद्रुत कहते हैं याने एक मात्र के आठवें हिस्से को अन अनद्दुत या तुरुत कहते हैं। जिस हरफ या बोल के नीचे अन अनद्रुत लिखा हो जैसे कि. ड़ि ..... ·न ... कि अन अनद्रुत अन अनद्ध त अन अनद्रुत अन अनद्धुत बोल में कि और डि और न और कि के नीचे अन अनद्धुत लिखा है तो इन बोलों कों आध पाव मात्रे के मिज़ाज से अदा करो। बिराम द्रुत :- पौन मात्र को बिराम द्रुत कहते हैं और यह दो तरह से अदा किया जाता है चाहे तीन हरकतें मुतसिल-(एक साथ) ज़ाहिर की जायें जैसे कि" ·ड़ि जैसे ति ... ई' "न या एक अनद्धुत और एक द्रुत अदा किया जाये ... या गि ......... दिं अनद्रुत द्रुत अनद्गुत द्ुत बिराम लघु :- डेढ़ मात्रे को विराम लघु कहते हैं। यह चारतरह का होता है-एक द्रुत और लघु के मिलाप से दूसरा तीन द्रुत के मिलाप से-तीसरा दो अन
Page 12
६ द्रुत और पक लघु के मिलाप से-चौथा दो अनद्धुत और द्रुत के मिलाप से और यह हमेशा एक मात्र और एक द्रुत सं या तीन द्ुत से या दो अनद्ुत और एक लघु से या दो अनद्रुत ओर दो द्रुत से लिखा जायेगा चाहे लघु पहले हा और दुन पोळे जैसे धा ...... न या द्रुत पहले हो और लघु पीछे जैसे गि ... ता लघु द्रुत द्ुत लधु या तीन हरकतें याने तीन द्रुत जैसे क.धि. टि या दा अनद्धुत और एक लघु
से जैसे कि ..... डि .... धी ओर या दो अनद्धुत और दो दुन से जैसे द्रुत द्रुत द्रुत
अ्नद्गुत श्रनद्रुत लघु किडि.दि .. दिं अनद्गुत अनद्गुत नीचे लिखे बोलों का बजाने का अभ्यास पहले करना चाहिये। द्रुत द्रुत तीं, ता, ना, तित, ड़ा, दो, धिन धीं, धा, धित, कत, के, गे, घे, दिन तिन दीं। खुनत वायें और बन्द बायें की परिभाषा।
खुला वांया उसको कहते हैं कि बायें हाथ की दूसरी या तीसरी उ'गली के खुला वायां। सिरे से या दोनों उगलियों के सिरे से वाँये के मैदान में ज़रब (चोट) लगाते हैं और उगलियों को फौरन उठा लें इस ग़रज़ से कि गूज दार आवाज़ पैदा ह।। और वह गूज दार आवाज़ जो बांये से निकले उसका नाम खुला बांया है और इस आवाज को घे कहते हैं चित्र नं० २ देखा :- चित्र नं० २, बाल :- घे
Page 13
( e )
बन्द बायां बन्द बायां उसको कहते हैं कि बाये हाथ की सब उगलिया टेढ़ीकर के बायें पर ज़रब (चोट) मारते हैं और उगलियां फौरन नहीं उठाते इस लिये कि आवाज़ बन्द रहे। और बगैर गूज की आवाज़ जो बायें से निकले उसका नाम बन्द बायां है और वह आवाज़ जो पैदा होती है उसे के व गे कहते हैं चित्र नं० ३ देखो। बोल :- के व गे हथली की तरफ़ भुकी रहती है और चित्र में में आ गई है। पहली उगंली याने अंगूठा दूसरी उँगली के आड़ चित्र नं०.३, नोट :- पहली उगली किसी कदर टेढ़ी हो कर
बोल :- दिन, तिन, दीं, तीं :- यह चारो बोल दूसरी उगंली के सिरे से उगली को सीधा करके तबले के मैदान में एक मात्रे के मिज़ाज से इस तरह अ्दा किये जाने हैं कि ज़रब मारते ही उगली उठा ली जाती है इस लिये कि सुरीली आवाज़ पैदा हो अगर उगली वहीं जमी रहेगी तो तबले की आवाज़ बन्दरहेगी, चित्र नं. ४ में उस जगह जहां ज़रब लगाई जाती है और हांथ की दूरत देखो
Page 14
चित्र नं०४ बोल :- दिन, तिन, और दी, ती,
बोल :- ता दूसरी उंगली के सिरे से चाटी पर ज़ोर से ज़रव लगाते हैं और उगली का पिरा गोट की हदसे तबले के मैदान की तरफ किसी कदर बाहर रहता है याने कुछ हिस्सा उगली केसिरे का मैदान में रहता है और बाकी चाँटी पर। चित्र नं०५ देखो चित्र नं० ५ बोल :- ता सिरा तवले :रान में हलका टिका हुआ है और वाकी भा उगलियां अलग हैं चांटी पर लाा हुआर है और चौथी उगली का नोट :- इम चित्र में दूसरी उगली का सिरा
Page 15
- W
बाल :- ना
चित्र नं० ६.
नोट :- इस चित्र में पांचवी उगली और उगलियों की आड़ में श्रा गई है।
-0- बाल :- तित
दूसरी-तीसरी और चोथी उंगजी को एक साथ मिलाकर किसी कदर टेढ़ी करके उगलियों के सिरे से स्याही के बीच में ज़रब मारते हैं और उङ्गलियां फौरन नहीं उठाने इस लिये कि आवाज़ बन्द रहे मग़र ड़यादा ज़ोर तीसरी उंगली पर रहता है। चित्र नं० ७ देखो।
Page 16
( १० ) वोल :- नित चित्र नं० ७ नोट :- तित को तिद भी कदने हैं।
बोल-ड़ा। चौथी उगली के सिरे से किसी कदर सीधी गरदिश के साथ स्याही की कगर पर यानी कुछ हिस्सा स्याही का दबाकर हलकी ज़रब एक मात्रे के मिज़ाज से लगाते हैं और उगली को फौरन नहीं उठाते इस लिये कि आबाज़ बन्द रहे चित्र नं० ८ देखो। बोल :- ड़ा चित्र नं०८
और बाकी सब : अलग हैं। नाट :-- सिफ चौथी उगली टिकी हुई है
Page 17
( ११ ) नोट: नं०१-डि को यदि एक मात्रे मिज़ाज से अदा करोगे तो ड़ा हो जाये- गा और द्रुत और अनद्रुत के मिज़ाज से अदा करोगे तो ड़ि रह जायेगी। २ नोट :- बोल ति और टि के लिये स्याही का बीच मुकर्र किया गया है याने ये वोल स्याही के बीच से अदा किये जायेंगे और इसकी आवाज़ खटकेदार है और रिऔर ड़के लिये स्याही का किनाराकर्रर है इनकी अवाज़ बनिस्वत उनके बहुत नर्म है, और उनका अदा करने का तरीका भी दूसरा है।
बोल :- दी
दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवी उंगली को एक साथ जोड़कर सीधा करके उगलियों के आखिरी हिस्से से जो हथेली से मिला हुआ है चांटी पर एक मात्रे के मिज़ाज से ज़रब लगाते हैं, इस तरह से कि मैदान में भी ज़रब लगे याने आखिरी हिस्सा का कुछ हिस्सा चांटी परऔर कुछ हिस्सा मैदान पर रहे। चित्र नं० ६ देखो। बोल :- दी
चित्र नं० ६
नोट :- चित्र में पांचवीं उगली और उंगलियों की आड़ में आ गई है और वह भी मिस्ल इनके सीधी है याने जिस प्रकार ये सीधी हैं इसी तरह पांचवीं उगली भी सीधी है।
Page 18
१२ बोल जो कि दायें और बायें से एक साथ अदा किये जायेंग :- घिन और धी :- ये बिलकुल तिन और तीं की तरह अदा किये जाते हैं, सिर्फ खुला बायां और हम ज़रब किया जाता है याने दांये, बायें पर दोनों हाथ की ज़रब साथ ही पड़ती है। नोट :- दायें में तिन व ती अदा करो और उसी के साथ बाये में घ बोल एक मात्रे के मिज़ाज से आदा करो तो दोनों एक साथ अदा करने से धिन और धीं, बोल की आवाज़ पैदा होगी। बोल :- धा। यह बोल बिलकुल ता की तरह अदा किया जाता है सिर्फ खुला बांया और हम ज़रब किया जाता है-जिस तरह ऊपर समझाया गया है। बोल :- धित यह भी बिलकुल तित की तरह अदा किया जाता है सिर्फ खुला वायां और हम ज़रब किया जाता है याने दायें में तित और बायें में घे एक साथ अदा करो एक मात्रे या एक लघु के मिज़ाज से, तो। दोनो बोलों के एक साथ शदा करने से जो आवाज़ पैदा होगी वह धित बोल होगा और इस बोल को घिद भी कहते हैं। बोल :- सिटि यह बोल इस तरह: से अदा किया जायेगा :- पहल तौसरी उंगली के सिरे से किसी क़दर सीधी गरदिश के साथ स्याही के बीच में ज़रब लगा के ति अदा करो और उगली को मत उठाओ-फिर दूसरी उगली के मिर से उलटी गरदिश दे कर ज़रब लगा कर टि अदा करो-तीसरी उगली हाथ की गरदिश से आप ही उठ जायेगी, यह बोल बराबर दो द्रुत के है याने ति बराबर एक द्रुत और टि बराबर एक द्रुत दोनो मिल कर कुल एक मात्रा के बराबर हुआ। बोल के दोनो द्रुत एक रफ़तार से अदा करो। चित्र नं० १० व ११ देखो।।
Page 19
१३ ) बोल :- ति चित्र नं० १०
नोटः इस चित्र में पांचवीं उगली और उगलियों की आड़ में छिप गई है। बोंल :- टि चित्र नं० ११
दूसरा नरीका, तिट-बोल अदा करने का इसके अदा करने का यह तरीका है मगर जब कि यह बोल कई एक एक साथ आवें जैसे तिटि तिटि या तिटि तिटि तिटि या इस्से भी ज़्यादा बोल एक साथ आवं तो इस प्रकार अदा करो :-
Page 20
( १४ ). पांचों ठगलियां वाहम 'एक साथ) जोड़ कर हथेली के दायें और वायें रुख से रगड़ के साथ अदा करते हैं लेकिन गरदिश वही रहती है जा कक पहले तरीके में बता चुके। नोट :- तिटि, तति, कत, तकिटि, तकु, तका, तिरिक, तिर्रििटि, किटितक, तिटिकत, कितिरि, घति, "धिन, तधिंन वधा, ततिटि, धर्तिटि, किढितकिटि, तित इन सब के पहले के १८ बोलों में और बाद के एक बोल में जितने ति है सब स्याही पर वे अदा की जाती हैं- सिर्फ तति की पहली त चांटी पर अदा कि जायेगी, और ता, तदिन, तगि, तगिन, गिता, तत, कित, किड़तान, तति, इन सब बोलां की त चांटी पर अदा की जायेगी, सिर्फ तति की दूसरी त स्याही पर शदा की जाती है। तिन, तीं, तींना, तिंन, तिंई, तिंगि, तिंगिन, तिंनगिन, तिनकि, तींगि, तिंनगिन :- इन सब वोलों की ति जो है उस पर अंग का मात्रा है तो यह ति तबले के मैदान में अदा की जाती है-और ताड़ि, तगे, की त मैदान तबला में निस्क (शधी) स्याही दवा कर थाप से अदा की जाती है। बोल :- दींना व तीना :- दूसरी उंगली के सिर से तबले के मदान में जिस तरह दी अदा किया जाता है उसी प्रकार दीं अदा करो-फिर चांटी पर उसी उ'गली के सिरे से जिस प्रकार ना अदा किया जाता है ना अदा करो दोनां मात्रे एक रफतार से। पहले के चित्र नं०४ और चित्र नं० ६ देखो। बोल :- दिंन व तिंन ::- ये बोल दिलकुल दींना और तींना की तरह शदा करो, सिर्फ फर्क इतना है कि वह दो दो मात्र के बोल हैं और यह दो दो दूत के, वे लघु के मिज़ाज से अदा किये जायेंगे और यह द्रुत के िंज़ाज से। नोट :- यह बात याद रक्खो कि जिस बोल को जिस मात्र के मिज़ाज सं अदा करोगे वही उसकी हक़ीकृत होगी और बोल उसी प्रकार अदा किये जायेंगे जिस प्रकार चित्र से समझ चुके हो। यानी यदि वोल को लघु के मिज़ाज से श्रदा
Page 21
( १५ ) करोगे तो लघु, और द्रुत के मिज़ाज से आदा करोगे तो द्रुत, और अनद्धुत के मिज़ाज से अदा करोगे तो अनद्रुत, और अन अुद्धुत के मिज़ाज से अदा करोगे तो अनअन दूत उसकी हक़ीफ़त हो जायेगी। बोल :- दिन, पहले दूसरी उद्गली के सिरे से उलटी गरदिश देकर तबले के मयदान में फिसलवां उठती हुई ज़रब लगा के दि बोल को अदा करो फिर तीसरी उङ्गली के सिरेसे सीधी गरदिश के साथ उसी जगह फिसलवां उठती हुई ज़र्ब( चोट) लगा के न बोल को अदा करो, दोनों द्रुत एक रफ़तार से अदा करा, यह दोनों द्रुत मिल कर एक मात्रे के बरापर हुआ चित्र नं० १२ और १३ देखो।
बोल :- दि
चित्र नं० १२
नोट :- इस चित्र में सब उङ्गलियां अलग हैं सिर्फ दूसरी उगली का सिरा तवले के मैदान में टिका हुआ है।
Page 22
( १६ i बोल :- न चित्र नं० १३
नोट :- इस चित्र में तीसरी उंगली का सिरा तबले के मैदान में टिका हुआ है और बाकी सब उ गलियां अलग हैं। नोट :- १ न बोल को असल में चोटी पर अदा किया जाता है परन्तु लांग आसांनी की ग़र्ज़ से तबले के मैदान में भी अदा करते हैं। १ २ ३ ५ ६ cc दिन, दिनिन, दिनगिन, तिनगिन, दिंगिन, दींगिन, तगिन, ८ १० ११ १२ १३ १४ तघिन, नगिन, धघिन, गिदिगिन, घिन, धिनिन, धिनघिन, १५ १६ धिंघिन, धीघिन, घिदिघिन, । बोल नम्बर २, व ३, व ४ व १३ व
१४ का पहिला न और बोल नम्बर ५व ६ व ६य१्५ वश्द का आमीरी न.और वोल जम्बर १ व ७ व ८ व १० व ११ व १२ व ६७ का न तबले के मैदान में छड़ा करना चाहिये। मग़र बोल गिदिगिन और बिदिधिन का न चौथी उङ़ली के सिरे से तबले के मैदान में अदा किया जाता है कनोंकि आसानी इसी में है लेकिन गरदिश वही रहेगी जो तीसरी उगली की है। बोल :- दिनिन इस वोल को तबले के मैदान में जिस जगह और जिस तरांके से दिन अदा किया था बिलकुल उसी जगह और उसी प्रकार दिनि अदाकरो और आख़ोर
Page 23
( १७ ) की न चांटी पर अद्ा करो, तीनों बोल जो कि एक एक द्रुत के बराबर हैं, एक रफ़तार से अदा करो जो कि तीनों द्रुत मिलकर डेढ़ मात्रे के बराबर हुआ। चित्र नं० १२ और १३ और चित्र नं० ६ देखो। जिनका बयान आगे बता चुके हैं। बोल :- ताड़ि इस बोल को इस प्रकार तदा करो, पांचवीं उगली से तबले की आधी हिस्स के करीब स्याही दबा कर ज़र्व लगाओ, यानी इस प्रकार ज़र्ब लगाओ कि आधी स्याही पर ज़र्ब पड़े। हाथ की भोंक से चौथी उगली की ज़रब आप ही से मैदान तबला में लगेगी; और ज़र्ब लगाते ही हाथ उठा लो जिस्से कि आवाज़ बन्द न हो ; यह ज़र्ब एक मात्रे के मिज़ाज से लमाओ और वोल, ता, अदा करो फिर दूसरी उङ़गली के सिरे से स्याही का किनारा बायें तरफ का दबाकर एक द्ुस के वज़न से ज़र्ब लगा के ड़ि बोल को अदा करो। दोनों बोल के दोनों मात्र मिल कर डेढ़ मात्र के बराबर हुआ। चित्र नं० १४ और:१५ देखो। -0- बोल :- ता चित्र नं० १४
इस ता को थाप की ता कहते हैं। नोट :- थाप लगाने का यह तरीका है कि पट हाथ को कुछ तिरछा करके सब उङ्गलियां सीधी रखते हैं और पांचवीं उङ्गली से आधी स्याही दबा कर तबले के मैदान में तिरछी ज़र्व लगाते हैं और हाथ उठा लेते हैं।
Page 24
( १८ )
बोल :- ड चित्र नं० १५
पर टिक्की हुई है और वाकी उङ्गलियां सब अलग हैं। नोट :- इस चित्र मेंदूसरी उङ्गली स्याही
बोल :- नारि पहले चांटी पर दूसरी उड्डली के सिरे से चित्र नं०६ के अनुसार एक लघु के मिज़ाज से ज़र्ब लगा कर न अदा करो, फिर चित्र नं० ८ की तरह तीसरी उङगली के सिरे से स्याही की कगर पर एक द्ुत के वज़न से ज़र्ब लगा कर रि श्रदा करो। दनों बोल के दोनों मात्रे मिल कर डेढ़ मात्रे के बराबर हुआ। बाल रि और दिये एक: ही तरह अदा किये जाते हैं। बोल :- ति ई' इस बोल को तबले के मैदान में बिलकुल तीं की[तरह श्दा करते हैं, सिर्फ इतना फर्क है कि वह एक मात्रा के बराबर है और यह डेढ़ मात्रे के बराबर है। इस प्रकार से कि पहले एक द्रुत की जर्ब चित्र नं०४ की तरह लगाओ्रो कर एक मात्रे का ठहरांव दो। बोल :- तिंइं यह बोल बिलकुल तिह की तरह अदा किया जाता है।
Page 25
( १६ ) सिर्फ फ़र्क इतना है कि बोल ति'ई बराबर है डेढ़ मात्रे के और यह बराबर है बिराम द्रुत के. इस लिये पहले एक अनद्रुत के मिज़ाज से बोल ति अदा करो फिर एक द्रुत के वज़न का ठहराव दो. कुल पौन मात्रे के बराबर हुआ। बाल :- तति पहिले चित्र नं० ५ की तरह एक द्रुत के मिज़ाज से-फिर चित्र नं० १० की तरह एक द्रुत के वज़न से ज़र्ब लगाओ-कुल एक लघु या बराबर एक मात्र के हुआ। बोल :- तत यह बोल में चित्र नं० ५ की तरह दो जर्ब एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ जो कुल एक मात्रा हुश। बोल :- तटिति पहिले चित्र नं० ११ की तरह एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से फिर चित्र नं० १० की तरह याने चित्र नं० १० के कायदे की तरह एक ज़र्ब एक दुत के मिज़ाज से फिर चित्र नं० ११ के कायदे की तरह एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ. कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल ति और टि ये एक ही तरह और एक ही मुकाम पर अदा किये जाते हैं। बोल :- दिंदिं
यह बोल में चित्र नं० ४ के कायदे से दो ज़र्य एक एक द्रुत के मिज़ाज स लगाओ, कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- दि दिन
यह बोल में चित्र नं० ४ के कायदे से दो जर्ब एक एक द्रुत के मिज़ाज से, फिर चित्र नं०६ के कायदे से एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुश। बोल :- नन यह बोल में चित्र नं० ६ के कायदे से दो जर्ब एक एक द्ुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक लघु या एक मात्रा हुआ।
Page 26
( २० ) बोल :- तदिन यह बोल में चित्र नं० ५ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्ुत के मिज़ाज से-फिर चित्र नं०४ के कायदे से एक जर्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाशं। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- दिंनन यह बोल में चित्र नं०४ के कायदे से एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से-फिर चित्र नं० ६ के कायदे से दो जर्ब गक २ द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। वे बोल जो कि कुछ बाये और कुछ दायें से अदा किये जाते हैं। बोल :- किन व गिन यह वोल अदा करने का यह तरीका है कि पहले बन्द बांयां एक द्रुत के मिज़ाज से लगा कर कि शदाकरो फिर दूसरी उङ्गली के सिर से चांटी पर न बोता को एक द्रुत के मिज़ाज से अदा करो, दोनों दुन एक वज़न से. अदा करो। कुल एक लघु (मात्रा) हुआ। चित्र नं०३ और चित्र नं०६ देखो। इसी प्रकार गिन भी शदा किया जाता है। बोलः-तगि, यह बोल में चित्र नं० ५ के क़ायदे से पहिले एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ-फिर चित्र नं० ३ के कायदे से एक ज़र्ब मक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- नगि, यह बोल में चित्र नं० ६ के क़ायदे से पहिले एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ-फिर चित्र नं०३ के क़ायदे से दूसरी ज़र्ब एक दृत के भिज़ाज से लगाओ। कुल दोनों द्रुत मिल कर एक मात्रा या एक लघु हुआ। बोल :- कत, यह बोल में पहिले चित्र नं० ३ के क़ायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० १० के क़ायदे अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ औड दोनों द्रुत बग़ैर गरदिश के एक रफ़तार से अदा करो। कुल एक मात्रा हुआ।
Page 27
( २१ )
बोल :- कित, यह बोल में पहिले ।चित्र नं० ३ के कायड़े से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्रनं० ५ के कापड़े से एर ज़र्ब एर दुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- तिंगि व दिंगि, यह बोल में पहिले चित्र नं० ४ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ३ के कायडे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुश। बोल :- तगिन, यह बोल में पहिले चित्र नं० ५ के कायदे से एक ज़र्ब फिर चित्र नं० ३ के कायदे से एक ज़र्ब फिर चित्र नं० १३ के कायदे से एक ज़र्ब लगाओ, तीनों जरबें एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- नगिन, यह बोल में पहिले चित्र नं० ६ के कायदे से एक ज़र्ब फिर चित्र नं०३ के कायदे से एक ज़र्ब फिर चित्र नं १५ के कायडे से एक ज़र्व, एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। -बोल :- तकिटि, यह बोल में पहिले चित्र नं० ११ के कायदे से एक ज़र्ब फिर चित्र नं० ३ के कायदे से पक ज़र्ब फिर चित्र नं० १० के कायहे से एक ज़र्ब तीनों एक एक द्रुत के मिजाज से लगाओ। कुल एक बिराम लघु या डे! मात्रे के बराबर हुआ। चूकि ति और टि एर ही मुकाम पर अदा किये जाते हैं इस लिये बाज़ मौके पर ति को दूसरी उंगली के सिरे से और टि को तोसरो उगली के सिरे से अरदा कर लिये जाते हैं। बोल :- नकिटि, यह बाल में पहिले वित्र नं०६ के कायडे से एक ज़र्ब फिर चित्र नं० ३ के कायडे से एक ज़्ब फिर चित्र जं०१० के कायड़े से एक ज़र्ब बौर गरदिश, सब एक, एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- तकु, तीसरी उङ्गली के सिरे से बगैर गरदिश, चित्र नं० १०के काय दे से एक ज़र्ब एक द्रुत के बराबर लगा कर त अदा करो फिर बन्द बायां लगाओ, इस की भी ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से हो। कुल एक मात्रा हुआ। चित्र नं० १० और : चित्र नं०३ देखो। बोल :- दिंगिन और तिंगिन, यह वोल में पहिले चित्र नं० ४ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ३ के कायदे से एर ज़र्ब
Page 28
( २२ ) एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं ६ के कायदे से मक ज़य पक दुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुश। . नोट-त और द् यह बोल एक ई तह से अदा किये जाते हैं। बोल :- दींगिन, यह बोल में पहिले चित्र नं० ४ के कायदे से एक ज़र्ब एक लघु (मात्रा) के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ३ के कायदेसे और फिर चित्र नं। ६ के कायदे से, एक एक ज़र्ब एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। तीनों ज़बें की मात्रा मिलाकर दो मात्रे के बरावर हुश। बोल :- दिनगिन और तिनगन, इस बोल में पहिले चित्र नं० १२ के अनुसार एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं०६३ के अनुसार एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं०३ के अनुसार एक ज़ब एक द्ुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं0 ६ के अनुसार एक अर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल दो मात्रा हुआ। बोल :- तिंनकि, इस बोल में पाहले चित्र नं० ४ के कायदे से फिर चित्र नं० ६ के कायदे से और फिर चित्र नं० ३ के कायदे से तीन ज़र्ब एक एक द्रुत के मिजाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- गिदी, यह बोल में चित्र नं० ३ के कायदे से पहिले एक ज़र्ब एक द्ुत के रफ़ृतार से लगाओ-फिर चित्र नं० ६ के कायदे से एक ज़र्य एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- गिदि, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नम्बर ३ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ६ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओों। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- दींगि, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नं० ४ के . कायदे से एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं०३ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- तींगि, यह बोल भी बिलकुल बोल दींगि की तरह अदा किया जाता है।. बोल :- दिंनगिन व तिनगिन, इस बोल में पहिले चित्र नं० ४ के कायदे के अनुसार फिर चित्र नं० ६ के कायदे के अनुसार फिर चित्र नं० ३ के कायदे के अरनु-
Page 29
( २३ ) सार फिर चित्र नं० ६ के कायदे के अनुसार चार ज़बें एक एक द्रुत के मिज़ाज़ से लगाओ। कुल दो मात्रा हुआ। बोल :- किडिदिन, इस बोल में चित्र नं० ३ के अनुसार फिर चित्र नं० ८ के अनुसार दो ज़बें एक एक अनद्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ४ के अनुसार एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- किड़ितान, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नं०३ के कायदे से एक ज़र्ब एक अनद्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ८ के कायदे से एक ज़र्ब एक अनदुत के रफ़तार से लगाओ फिर चित्र नं० ५ के कायदे से एक ज़र्ब एक मात्रे के रफ़तार से लाओ फिर चित्र नं० ६ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल दो मात्रा हुआ। बोल :- गिगिनगि, इस बोल में पहिले चित्र नं० ३ के कायदे से दो ज़र्बें एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ६ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं ३ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ्! कुल बराबर दो मात्रे के हुआ। बोल :- किडि, इस बोल में पाहले चित्र नं० ३ के अनुसार एक ज़र्ब एक अनद्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ८ के अनुसार एक ज़र्ब एक अनद्दुत के मिज़ाज; से लगाओ। कुल आधे मात्रे या एक द्रुत के बरावर हुआ। बोल :- किडिनकि और गिड़िनगि, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नं०३ और फिर चित्र नं ८ और फिर चित्र नं०६ और फिर चित्र नं० ३ के कायदों के अनुसार चार ज़बें एक एक अनद्धुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- तिरिक, इस बोल में पहिले चित्र नं० १० के कायदे से एक जर्ब एक अनद्धत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० १५ के कायदे से एक ज़र्ब एक अनद्गुत के मिज़ाज से लगाओ बग़ैर गरदिश के फिर चित्र नं० ३ के कायदे से थक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुश। बोल :- तिरिकिटि, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं० १० के कायदे से एक ज़र्ब एक अनद्रुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० १६ के कायदे से एक ज़र्ब एक अनद्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ३ के कायदे से एक जर्ब एक अनद्गुत के मिज़ाज से लगाओ-फिर चित्र नं० १० के
Page 30
( २४ ) कायदे से एक ज़र्ब एक अनद्धुत के मिजाज में लगाओ। चारी/अनदुत मिल कर एक मात्रा हुआ। बोल :- रि
चित्र नं. १६
बोल :- किटि, यह बोल में पहिले चित्र नं०३ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ११ के कायद से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ, कुल एक मात्रा है। बोल :- किटितक, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नं० ३ के अनुसार फिर चित्रनं० ११ के अनुसार फिर चित्र नं० १० के अनुसार फिर चित्र नं०. ३ के अनुसार चार ज़रबे एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाश्ं.। कुल दो मात्रे हुये। बोल :- तका, इस बोल में पहिले चित्र नं० १० के कायदे से एक ज़र्य एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ या चित्र नं० ११ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से, जैसा मौक़ा हो फिर चित्र नं० ३ के कायदे से एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ।
Page 31
( २५ )
बोल :- तगे, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नं. १४ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के वज़न से लगाओ फिर चित्र नं० ३ के कायदे से एक ज़र्ब एक लघु के वज़न से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुश। बोल :- गिता, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं० ३ के कायदे के अनुसार, एक ज़र्ब एक द्रुत के भिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ५ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ मात्रा हुआ। बोल :- गिदिगिन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र मं० ३ के कायदे से एक अ़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ-फिर चित्र नं० १ के कायडे से एक ज़र्ष एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ फिर चित्र नं० ३ के अनुसार एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ. फिर चित्र नं० १३ के अनुसार एक ज़ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ-कुल दो मात्रे हुये। बोल :- गिदिंन, इस बोल को इस तरह से अदा करो कि पहिले चित्र नं० ३ के कायदे अनुसार एक जर्ब एक अनद्धुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० ४ के कायदे अनुसार एक ज़र्ब एक दुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ६ के कायदे अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल सवां मात्रा हुआ। बोल :- कघिटि, इस बोल को इस प्रकार से अदाकरो कि पहिले बन्द बांया एक ह्ुत के मिज़ाज से याने चित्र नं० ३ के कायदे से लगाओ फिर चित्र नं० १० और चित्र नं०२ के कायदों अनुसार एक साथ एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगा कर ध बोल अदा करो, फिर चित्र नं० ११ के कायदे से एक ज़र्ब मक दुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- किड़ान, इस बोल को इस तरह अदा करो कि पहिले चित्र नं० ३ के कायदे अनुसार एक ज़र्य एक हुस के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं०८ के कायदे अनुसार एक ज़ब़ एक लघु के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० ६ के कायदे अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल देो मात्र हुये। बोल :- किडिधा, इस बोल को इस प्रकार से आदा करो कि पहिले चित्र नं० ३ के कायदे से एक जर्ब एक अनद्दुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं०८ के
Page 32
( २६ ) कायदे से एक जर्ब एक अनद्गुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं०५ और चित्र नं०२ के कायदों से एक ज़र्ब दोनों में एक साथ एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- किड़िध, इस बोल को बिलकुल किडिधा बोल की तग्ह श्रदा करो सिर्फ बोल धा को एक द्रुत के मिज़ाज से अदा कगो। कुल एक मात्रा छुश्। बोल :- किडिधान, इस बोल को इस प्रकार सं अदा करों कि पहिल किड़िधा की तरह से बिलकुल बोल किडिध। अदा करो। फिर चित्र नं०६ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; कुल दो मात्र हुये। बोल :- किड़िधित, इस बोल को इस प्रकार से अदाकरो कि पहिले जिस प्रकार से कि ऊपर के बोलों में किडि शरदा कर चुके हो बिलकुल उसी प्रकार श्रदा करके फिर चित्र नं०७ और चित्र नं० २ के कायदे से एक ज़र्ब दांये शर बांये में एक साथ एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- किड़ितकिटि, इस बोल को इस प्रकार अदा करों कि पहिले बोल किडि को जिस प्रकार ऊपर अदा कर चुके हो किड़ि अदा करो फिर बाल तकिटि को जिस प्रकार ऊपर अदा कर चुके हो तकिटि को शदा करा। तो दो अनद्ठुत और तीन ह्रुत मिलकर दो मात्रा हुआ। बोल :- किड़िदिं दि, बोल किड़ि और दि 'दि को पहिले ऊपर अलग २ अदा कर चुके हो, यहां पर दोनों बोल को एक सांथ अदा करो। कुल दो अनद्धुत और दो द्रुत मिलकर; डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- कितिरि, इस बोल को इस प्रकार से शदा करों कि पहिले चिन्न नं० ३ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं० ६० के कायदे से एक ज़र्ब एक अनद्ठुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं० १६ के कायदे से पक ज़र्ब एक अनद्ुत के भिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- घिटि, इस बोल को बिलकुल बोल तिटि की तरह अद्ा करो, सिर्फ ति के साथ खुला बांया और लगा दो यानी चित्र नं० १० और चिंत्र नं० २ का अमल साथ कर दो। कुल एक मात्रा या एक लघु हुश। - .
Page 33
२७ बोल :- धींना, इस बोल को बिलकुल, बोल तींना की तरह अदा करो, सिर्फ तीं बोल के साथ खुला बांया और लगा दो। कुल दो मात्रे हुये। बोल :- धिंन, इस बोल को बिलकुल, बोल तींना बोल की तरह अदा करो। उसको लघु के मिज़ाज़ से अदा किया था, इसको द्रुत के रफ़तार से अदा करो! कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- धी, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि चित्र नं० ५ और चित्र नं० २ के अनुसार एक ज़र्ब दोनों में एक साथ एक लघु के मिज़ाज से लगाओ याने दांये में से ता और बांये में से घे बोलों को एक साथ अदा करो। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- धिन, इस बोल को बिलकुल दिन की तरह अ्ा करो सिर्फ पहिले द्रुत के साथ ;याने बोल दि के साथ) खुला बायां और हम ज़र्ब कर लो। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- धिनिन, इस बोल को बिलकुल दिनिन की तरह अदा करो सिर्फ पहिले बोल के साथ (याने दि के साथ) जो कि द्रुत के वज़न का है उसके साथ खुला बायां और हम ज़र्ब करलो। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धाड़ि, इस बोल को बिलकुल ताड़ि की तरह से अदा करो-सिर्फ बोल ता के साथ खुला बायां और लगा दो। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धिंई, इस बोल को बिलकुल बोल तिंडे की तरह से अदा करो सिर्फ ति के साथ खुला बायां और हम ज़र्ब करला। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धिंइ', इस बोल को बिलकुल ति'इ की तरद अदा करो, सिर्फ बोल ति' जो कि एक द्रुत के वज़न का है, इसके साथ खुला बायां और लगा दो। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- धति, इस बोल को बिलकुल बोल तति की तरह से अदा करो सिर्फ बोल त के साथ जो कि एक द्रुत के वज़न का है खुला बायां और हम ज़र्ब कर लो। कुल एक मात्रा हुआ।
Page 34
( २८ )
बोल :- धध, इस बोल को बिलकुल बोल तत की तरह शदा करो। सिफ दोनों बोल के साथ जो कि द्रुत के वज़न के हैं याने बाल तत के साथ खुला बायां और लगा दो; कुल एक मात्रा हुश। बोल :- धतिटि, इस बोल को बिलकुल ततिति की तरह शदा करी-सिर्फ पहिले त के साथ (जो कि द्रुत के वज़न का है) खुला बायां और दमज़र्ब कर लो: कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बाल .- घिन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं०२ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ-फिर चित्र नं०६ के कायदे अनुसार एक ज़र्य एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुश। बांल .- घंघि, इस बोल को इस प्रकार से अदा करों कि पहिले चित्र नं०५के अनुसार और चित्र नं०२ के अनुसार साथ ही एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०२ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- नघि, इस बोल को इस प्रकार अदा करो, कि पहिल चित्र नं०६ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज़ से लगाओ; फिर चिन्र नं० २ के कायदे सें एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाभ। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- धिघि, इस बोल को बिलकुल बोल ति गि की तरह अदा करो सिर्फ पहिले द्रुत के साथ (ति के साथ) खुला बायां और लगादो। कुल एक मात्रा हुश। बोल :- धींघि, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं०५ और चित्र नं० २ के अनुसार से एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से दायें, बायें में एक साथ लगाओ। फिर चित्र नं० २ के कायदे से एक ज़य एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धघिन, इस बोल में पहिले च्ित्र नं० ५ के कायदे अनुसार एक ज़य एक द्रुत के मिज़ाज़ से लगाओ और इसी के साथ खुला बायां भी हम ज़य कर लो फिर चित्र नं• २ के कायदे अमुसार एक ज़ब' एक द्रुत के मिज़ाज से लगाभो, फिर चित्र नं० १३ के कायदे अनुसार एक ज़र्य एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ।
Page 35
२६ बोल :- तघिन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चांटी पर दूसरी उङ्गली के सिरे से ज़र्ब लगा कर बोल, त, को अदा करों फिर खुला बायां लगा कर बोल, घि, अदा करो। फिर तबले के मैदान में तीसरी उङ्गली के सिरे से ज़रब लगा कर कर बोल, न, अदा को। तीनों ज़बे एक एक द्रुत के वज़न की हों। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धकिटि, इस बोल को बोल, तकिटि की तरह अदा करो सिफ पहले द्रुत के त के साथ खुला बायां और हम ज़र्ब कर लो। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धि'घिन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो, पहिले चित्र नं०४ के कायदे अनुसार और चित्र नं० २ के कायदे अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से दाये और बायें में एक साथ लगाओ, फिर चित्र नं० २ के कायदे अनुसार पक ज़ब एक हुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० १३ के कायदे अनुसार एक ज़ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धींघिन, इस बोल को बिलकुल धि'घिन बोल, की तरह से अदा करो। सिर्फ इतना फर्क है कि बोल धिघिन में धि की ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाया था यहां पर वह ज़र्ब (याने चित्र नं० ४ और चित्र नं० २ का शमल एक साथ) एक लघु के मिज़ाज से करो। कुल दो मात्रे हुये। बोल :- धिनघिन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं० १२ के अनुसार और चित्र नं० २ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से दांये और बांये में एक साथ लगाओ; फिर चित्र नं० १३ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०२ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ६ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। चारों द्रुत मिलकर दो मात्रे हुये। बोल :- धिंनघिन, इस बोल को इस प्रकार. से अदा करो कि पहिले चित्र नं० ४ और चित्र नं०२ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से दांये और बांये में एक साथ लगाओ; फिर चित्र नं०६ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज
Page 36
( ३० ) से लगाओ; फिर चित्र नं० २ के अनुसार एक ज़र्ब एक दुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं० ६ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। फुल दो मात्रे हुये। बोल :- धिंनघि, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहले चित्र नं०४ और चित्र नं०२ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से दायें और वायें में एक साथ लगाओ; फिर चित्र नं०६ के कायदे से एक ज़र्य एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०२ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से अगाओ; तीनों द्रुत एक रफ़तार से अदा करो। कुल डेढ़ मात्रा हुश। बोल :- घिदि, इस बोल को इस प्रकार से अद्ा करो कि पहिले चित्र नं २ के अनुसार एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ६ के अनुमार एक ज़रब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल एक मात्रा हश। बोल :- घिदिघिन, इस बोल में पहिले चित्र नं० २ के अनुमार एक अर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ६ के अनुसार एक ज़र्य एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० २ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० १३ के सनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल दो मात्रे हुये। बोल :- किड़िधकिटि, इन दोनों बोलों को ऊपर अनग २ शका कर चुके हो (याने बोल, किडि को और घकिटि को) यहां दोनों को जोड़ दो। पहिले किड्ि को दो अनद्धुत के मिज़ाज से शदा करो; फिर धकिटि को तीन द्ुन के मिज़ाज से शदा करो। कुल दो मात्र हुये। बोल :- किडिधिन, इन दोनों बोलों को भी (याने किडि और धिन) को ऊपर अलग २ अदा कर चुके हो। यहां पर दोनों को जोड़ दो। किड़ बोल को दो अनद्गुत के रफ़तार से अदा करो और धिन बोल को एक लघु के मिज़ाज से अदा करो। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- किड़िधिं इस बोल को बिलकुल किड़धिन की तरहसे श्दा करो सिर्फ फर्क यह है कि ऊपर के बोल धिन को लघु के मिज़ाज से शदा किया है और इस में द्रुत के मिज़ाज से अदा करो, द्रुत के मिज़ाज से अदा करने से घिं रह गया। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :- धिनन, इस बोल को इस प्रकार अदा करो कि पहिले चित्र नं ४ और चित्र नं०२ का अमल एक साथ एक द्रुत के रफ़तार से करो। फिर चित्र नं०६ के अनुसार दो ज़बैं एक एक द्ुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुश।
Page 37
( ३१ ) बोल :- घिघिनघि, इस बोल को इस प्रकार से अद करो पहिले चिन् नं० २ के अनुसार दो ज़बें एक एक दुत के मिज़ाज से लगाओं।( फिर चित्र)न०। अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०२ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; चारों द्रुत एकं रफ़तार से अदा करो। कुल दो मात्रे हुये। बोल :- घिड़िनघि, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो, कि पहिले चित्र नं०२ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०८ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०६ के अनुसार एक जर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं २ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। चारों द्रुत एक रफ़तार से अदा करो। कुल दो मात्रे हुये। बोल :- धिरिकिटि, इस बोल को बिलकुल बोल तिरकिट, की तरह अदा करो, सिर्फ पहिले बोल ति के साथ जो कि एक अनद्रुत के वज़न का है इसके साथ खुला बायां और लगा दो। चारों अनद्रुत एक रफ़तार से अदा करो। कुल एक मात्रा हुआ। बोल :-- घिधा, इस को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं० २ के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० ५ के अनुसार और चित्र नं0२ के अनुसार एक साथ एक ज़र्ब दायें और बायें में एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- घिड़ान, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं० २ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं०८ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र ६ के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज़ से लगाओ। कुल दा मात्रे हुए। बोल :-- घिदीं, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं०२ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के सिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० ४ के कायदे से एक ज़र्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- घिनघि, इस बोल को इस तरह से अदा करो कि पहिले चित्र नं० २ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं०६ के
Page 38
( ३२ ) कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं०२ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- घिना, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो, पहिले विन्र नं०२ के कायदे अनुसार एक अर्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० ६ के कायदे अनुसार एक जर्ब एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुश। बोल :- तधिन, इस बोल को इस प्रकार से शदा करो पहिले चित्र नं0 १० के कायदे अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाश, फिर चित्र नं० १२ और २ के कायदों से एक ज़र्ब एक साथ दाये' और बाय' में एक द्ुत के मिज़ाज से लगाओ, फिर चित्र नं० १३ के कायदे से एक ज़र्ब एक दुन के मिज़ाज सें लगाश्री तीनों द्रुत को एक रफ़तार से अदा करो। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- तर्धिन, इम बोल को इस प्रकार से अदा करो, पहिले चिन नं० १० के कायदे से पक ज़र्व एक दुन के मिज़ाज मे बगर गरदिश के लगाश, फिर चित्र नं० ४ और चित्र नं० २ के कायदे से एक ज़र्य दाये और बाये में एक साथ एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। फिर चित्र नं०६ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। तीनों द्रुत को एक ही रफ़नार से अदा कग। कुल डेढ़ मात्रा हुश। बोल :- तधा, इस वोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं १० के कायदे के अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०५ शर चित्र नं० २ के कायदों अनुसार एक ज़र्ब एक साथ दाये और बाये में एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- नधा, इस बोल को इस प्रकार से अद्ा करो कि पहिले चित्र नं०६ के कायदे से एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ५ श्ीर चित्र नं० २ के कायदों से एक ज़र्ब एक साथ दाये और बाये में एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ। बोल :- धधिन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो, पहिले चित्र नं० ५ श्रर चित्र नं० २ के कायदों से एक ज़र्ब एक साथ दायें और बायें में एक द्रुत के रफ़तार से लगाओ; फिर चित्र नं०४ और चित्र नं०२ के कायदों से एक ज़र्ब दायें और बायें पर एक साथ एक लघु के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुआ।
Page 39
(. ३३ )
बोल :- विंधिंन, इस बोल को इस प्रकार से अदा करो कि पहिले चित्र नं० ४ और चित्र नं० २ के कायदों अनुसार दो ज़र्बे एक साथ दायें और बाये पर एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ : फिर चित्र नं० ६ के कायदे अनुसार एक ज़र्ब एक द्रुत के मिज़ाज से लगाओ। कुल डेढ़ मात्रा हुश। बोल :- घिंधिं, इस बोल को इस प्रकार अदा करो, चित्र नं०४ और चित्र नं० २ के कायदां अनुसार दो ज़यें, मक साथ दायें और बाये पर एक एक द्रुत के मिज़ाज से लगाश। कुल पक मात्रा हुश। बोल :- घीनड़रान, इम बांल को इस प्रकार से अदा करो, पहिले चित्र नं० २ के कायदे से एक ज़र्य एक लघु के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं०६ के कायदे से एक ज़र्य एक दुत के मिज़ाज से लगाओ; फिर चित्र नं० ८ के कायदे से एक ज़ब पक लघु के मिज़ाज से लगाओः फिर चित्र नं०६ के कायदे से एक ज़र्य एक दुत के मिज़ाज से लगाओ। फुल तीन मात्रे हुए। (१) नोट :- पहिले ऊपर के लिखे हुये बोलों को खूब अच्छी तरह से अदा करने का अभ्यास कर लेना चाहिये, जब तक कि बोल साफ न निकले बराबर उनका पभ्यास करते रहो। (२) नोट :- ठेकों के गती और कायदों इत्यादि के बोलों के नीचे जगह कम होने के कारण से द्रुत और अनद्दुत और अनभनद्रुत निम्न लिख्त प्रकार से लिखे जाये गे।
दुन इस प्रकार लिखा जायेगा
अनद्भुत "प०द्रु०
श्रनश्ननद्ुत अर०अ०द्र० 55
(३) नोट: गतीं और कायदों उत्यादि में जिस जगहों पर इस तरह का, फूल हो () वह गत या कायदे इत्यादि बराबर के टुकड़े करने की ग़र्ज़ से है। जैसे १२ अदद के दा टुकड़े करने हो तो इस तरह किये जाये गे कि ६ अदद पहिले रहेंगे और ६ आखीर में और बीच में फूल रहेगा जैसे :- १, २ ३,४, ५, ६,#७, ८, ६ १०, ११, १२,
Page 40
( ३४ ) परिभाषा :- ठेका; कायदा; दोहरा; पलटा; गत; मुहरा; टुकड़ा; पेशकार; परन और साथ की। ठेका :- उसको कहते हैं कि जो ताल जितने मात्रे की हा उसके पैमाइश (नाप) ऐसे बोलों से की जाय कि उस ताल के कुल मात्रे और मुल़ामात अ़र्ब ताल और खाली साफ तौर से ज़ाहिर हो जाय। कायदा :- उसको कहते हैं कि दो फिकरे बराबर के सम्मिलित कर के जिस में पहिला फिकरा खुला हो और दूसरा बन्द, और किसी ताल के मात्रीं के दो हिस्से बराबर के करके पहिले हिस्से को सम के मुकाम से खुले फिकरे से नापे और दूसरे हिस्से को खाली के मुक्ाम से बन्द फिकरे से नापें। जैस धीमा तीवाला सोलह मात्रे की ताल है इसका पहिला आधा हिस्सा सम से तीसरी ताल की खाली तक आठ मात्रे का हुआ, इसकी पैमाइश खुले फिकरे सं करें जो कि १६ द्रुत के बरावर होगा और खाली से पहली ताल की ख़ालिशीं तक दूसरा हिस्सा ८ मात्रे का हुआ, इसकी नाप बन्द फिकरे से करें, यह भी १६ दुत के बराबर होगा। खुले फिकरे में खुला बायां ज़यादा लगाया जाता है; और बन्द फिकरे में बन्द बायां ज्यादा लगाते हैं और आगाज बन्द बोल से होता है, इस लिये बन्द फिकरा कहते हैं। चाहे वह कायदा लघु और द्रुत; या लघु शर द्रुत और गुरु इत्यादि से सम्मिलित हो। दोहरा :- इसकी यह तारीफ़ है कि कायदे के सब बोल वुहराये जायें, यानी जिस कायदे से जो बोल ३२ द्रुत के बराबर हा उसके दुहरे के वही बोल ६४ द्रुत के बराबर होने चाहिये! और विदित हो कि दुहरे में एक सम बीच में भी होता है। पलटा :- उसको कहते हैं कि किसी कायदे या दुहरे इत्यादि के बाज़ २ बोल पलट कर बजाये। इसी वजह से इसका नाम पलटा है। यदि कायदे में बाज़ बोलों की सूरत पलट दी है तो कायदे का पलटा कहलायेगा। यदि दोहरे के बाज़ बोलेों की सूरत पलट दी है तो दुहरे का पलटा कहलायेगा। यदि पलटे के बाज़ बोलों की सूरतं बदली जायेगी तो पलटे का पलटा कहलायेगा। याने जिस चीज़ के. बोल पलट कर बजायें गे उसी का पलटा कहलायेगा और बिलकुल उसी के बराबर होगा।
Page 41
३५ )
गत :- गत उसको कहते हैं कि जिस ताल के बोल १६ मात्रे के बराबर है। उस ताल की गत कम से कम ६४ द्रुत के बराबर ह। और जिसके दो हिस्से बराबर के; ३२-३२ द्रुत के बराबर हैो और पहिले हिस्से की तरतीब उ़यादा खुले बोलों से हो, और दूसरे हिस्से के पहले हिस्से के बोल करीब आधे बोल के बन्द ह और बाको खुले है। और पहिला खुला हिस्सा ३२ के द्रुत के बराबर बजा कर जब दूसरा हिस्सा शुरू करें तो बन्द बोल पर सम ज़ाहिर हो, छोटी गत में एक सम बीच में ज़रूर होता है यानी दूसरे हिस्से के पहिले बोल पर ; और बड़ो बड़ी गतों में कई कई सम बीच में आते हैं; और खुले और बन्द बोल साथ ही बजते जाते हैं।
मुहरा :- उसको कहते हैं कि ठेके के सम या सम के बाद किसी दूसरे मुकाम से कोई फिकरा मुर्तिब करके ( बना कर) के सम पर आये; बीच में कोई सम न आये।
टुकड़ा :- उसको कहते हैं कि ठेके के सम के पहिले या बाद के किसी मुकाम से कोई फिकरा मुर्तिब करके सम पर आये, मगर फिकरा कम से कम इतना बड़ा ज़रूर हो कि ठेके का एक सम फिकरे के किसी मुकाम पर ज़रूर आ जाये। पेशकार :- यानी आगाज कार (शुरू करना, इसकी यह तरीफ है कि जो ताल जितने मात्रे की हो उसके आधे हिस्से के बराबर दो फिकरे बना ले जिसमें पहिला फिकरा खुले बोल से शुरू किया जाये और उसमें खुले बोल ज्यादा हा और दूसरा बन्द बोल से और उसमे बन्द बोल ज्यादा है। औरसम से शुरू करेंतो दो बार बजाने के बाद सम आये। याने जो छोटे २ टुकड़े ठेके के शुरू करने के पहिले बजाये जाते हैं उनको पेशकार कहते हैं।
परन :- इसकी यह तारीफ है कि कोई फिकरा सम से या किसी और मुकाम से शुरू करके ज़ब तक तीन या चार बार न बजा लें सम पर न आ सके। साथ :- इसकी यह तारीफ है कि जिस बंदिश के बोल गाने वाला या किसी साज़ में बजाने वाला बजाये। उसी बंदिश के बोल तघले बायें इत्यादि से अदा किये जायें। जैसे डिड़ डा डिड्र डा ड़ा डा डा ड़ा (साज का बोल) किड़ घा तक धीं ना दीं ना ना (तबले का बोल )
Page 42
( ३६ ) १. नोट :- ठेके या गते या कायदे इत्यादि के जिस बोलों के पेस्तर एक लाइन खड़ी होगी और उसके ऊपर इस प्रकार का निशान ( x) होगा तो उस बोल पर सम समझना। और यदि इस प्रकार का निशान (0) होगा तो उस पर खाली समझना। २. नोट :- पढ़ने के आसानी के लिये जो कि कई बोल मिलकर एक लम्बा बोल बनेगा उसके ऊपर एक लम्बा डैस होगा ता कि पढ़ने में बहुत आसानी हो। जैसे :- ति टि क त गिदि गि न घा; इस में पहिले चार भोल अलग अलग लिखे हुये हैं। ति, टि, क, त, फिर इसी प्रकार चार बोल अलग अलग गि, दि, गि, न लिखे हुये हैं और फिर बोल धा लिखा है वे चार चार बोल अलग २ नहीं पढ़े जायेंगे, इसी कारए पहिले के चारों बोल के ऊपर ति से लेकर त तक एक लम्बा डैश है और दूसरे बारो बोल के ऊपर गि से लेकर न बोल तक एक लम्बा डैश है ताकि ये चार चार बोल एक साथ पढ़े जायें और बोल धा अलग, इस प्रकार से :- तिटिकत, गिदिगिन, धा। ३. नोट :- ठेकों और कायदों और गतों इत्यादि के बोलों के नीचे भी मान्रे लिख दिये गये हैं। इस लिये कि जिस बोल के नीचे जो मात्रा लिखा हो वह बोल उसी मात्रे के मिज़ाज से शदा किये जायें।
Page 43
(. ३७ )
ठेका धीमा तिताला मात्रा १६
विदित हो कि इस ठेके का कद खालह मात्रे का है। और इस में चार तालें हैं, यानी पहली, दूसरी तीसरी और खाली। चौथी ताल को खाली कहते हैं। तीन तालें भरी यानी आवाज़ दार जहां ज़बं लगाते हैं और एक खाली यानी खामोश जहां ज़र्ब नहीं लगाते और हाथ से भोंक दिखाते हैं। सोलह मात्रों में से चार मात्रे चारों ताल की ज़र्ब के लिये मुकर्रर हैं। और बारह मात्रे जो कि लय के भरती के वास्ते हैं उन में से तीन तोन माने हर ताल की खालियां कहलाती हैं। यानी पहली ताल की तीन खालियां और दूसरा ताल की तीन खालियां और तीसरी ताल की तीन खालियां और खाली की तीन खालियां; और हर तीन मात्रे के बाद ताल की जगह है। इस ठेके का सम दूसरी ताल पर है। मुकामात ज़र्ब ताल इत्यादि ठेके के बोलों में देखकर समझो।
२ तीसरी की दूसरी खाली N X तीसरी की तीसडी खांली सम की दूसरी खाली तीसरी की पहली खाली सभे की पहली खाली
बोल धा घिन षिन ध घिन घिन धा -. सम की तीसरी खाली AU
मात्रा लघु लघु लघु लघु लघु लध
. .
O पहली की दूसरी बाला धा िन. खाली की पहची खाली खाली की तीसरी खाली तिन तिन ता मखाली की दूसरी खायी म पहली की पहली खाली
लघु लघु लघु लधु लघु द इ पहली की तीसरी खाली
Page 44
( ३८ )
धीमे तीताले के ठेके की सूरलें खंब सूरती के लिये। नं० १. सम से; सोलह मात्र के बराबर तुत, य, अनधुत और लपु सें सम्मिलित हैं।
X
बोल धा ति रि क घिन था।धा दिन दिन ता
मात्रा लघु बण्दु. प्र०दु० द० लघु लघु लघु लघु लषु लघु 0 2- ता ति रि क बिन था भा पिन पिन भा
लघु अ०दु. अ्र०द्ु. दु० लघु लघु। लघु लघु लघु लष्ु नं० २. सम से सोलह मात्रे के बरांबर द्रुत, अनद्धुत और लघु से सम्मिशित है। X N धा ति रि क धिन धिन धा धा तिन तिन
भ्र०मु० प्र०दु० द्ु० लघ् लघु लघु
ता ति रि क षिन न धा धा धिन पिन
लघु अ्र०दु० अ०दु. दू० लघु लघु लघु लघु लधु नं० ३, स्म से सलह मात्रे के बराबर, दुत, अनद्रुत, लघु और शुद से सम्मिलित है। X.
धा-भा कि ड़ि षिं घा भा दिन दिन ता
भ्रणदु. भ्रणदु. पु० लधु लघु लभु
2- ता- आा कि दि षिं धा धा चिन न धा
गुर- ग्रहु० अ्र.डु० हु० लंघु .लघु लघु लघु
Page 45
( ३६. )
नं० ४, सम से; सोलह.मात्रे के बराबर; तुत, अनपुत और लघु से सम्मिलित है।
बोल धा न पिन धा तद् धा ति रि.फ चिन
मात्रा लघु लघ लघु लघु, लघु, अण्दु. ब्र०डु. ु. लघु
पा दि न दिन ता तद घा ति रिकिन
लघु लघु लघु लघु लघु लघु अणदु० अ०दु० दु० लघु नं० ५, सम से1 सोलह मात्रे के बराबर; लघु और दुत से सम्मिलित है।
X २ बोल धा घे घे ना किड़ि े ना ता ना घे -io
मात्रा लघु लघु लघ
ना डि
ल नोट :- हर सूरत के चक्कर जितनी ज़ितनी बार जी चाहे बांप सकते हो .; औौर फिर जब असली ठेका सुरू करना हो सम से शुड्.कर हो। ठेका जल्द तीताला मात्रा १६. यह केका मात्रे में बिलकुल धीमें तीताले के बराबर (हैं। सिर्फ बाल और बाल में फर्क है। ..
& X बोल धा धा 9 तीसरी की दूसरी खाली 5 तीसरी की पहली खाली खाली की दूसरी थाली 2 तींसरी की तीसरी वाली 5, सम की पली लाली 2 खाली की पहली खाली सम की दूसरी झाला 2 तम की तीसरी साला 21 बाली की तींसरी थाली
मात्रा लघ लघु ल लघु लघु लघ 65
Page 46
पहली की दुसरी थाली पहली की तीसरी बाला पहली की पहली साली धा भीं धा
लघु लंघु लघु लधु धीमे तीताले के कायदे और दुहरे और पलटे। कायदा नम्बर, १, सम से ३२, द्ुत के बराबर है जो कुल १६ मात्रें के सगाबर हुआ। X
बोल धघि नघि दिंन किन धघि नघि दिंन किन मात्रा द्ु०दु० डु० द्ु० दु० ड्रु० दु० द्ु० द्व० दु० दु० द० इ० दू० डु० ड०
तगि नगि दिंन किन घघि नवि दिंन किन - द्रु० दु० दु०डु. दुव द्ु० दु० दु. पु० द्रु० दु० दु० दु० द्ृ० द्रु० पु. २ ३ धा विन धिन धा धा धिन धिन धा लघु लघु लघु नधु लघ लघु लघु लघ
धा तिन तिन त ता धिन धिन धा लघ: लघु : लघु लघु लघु लघ्टु लघु नोट :- जिस रफ़तार में पहले ठेका शुरू करो उस से दूनी रफ़तार में लघु
कायदा या दोहरा या। पलटा ठेके के सम से शुररू कर के सब बोल बजा करके ठेका उसी पहली रंफ़तार में सम से शुरू कर दो; जिस तरह कायदा मत्मे
Page 47
( ४१ ) करके ठेका बड़े टाइप से सम से शुरू करके दिखाया है। यह भी याद रक्खो कि हर जगह कायदे इत्यादि खत्म करने के बाद असली ठेके का सम बड़े टाइप से लिखा रहेगा इस के यह माने हैं कि यहां से ठेका पहले की रफ़तार में सम से शुरू होगा। हर ताल के वास्ते ऐसा ही कायदा होगा।
नोट :- नं०२; असल में द्रुत के रफ़तार में कायदा इत्यादि बजाने के।' चराबर की लय कहते हैं; और इसकी दुगुन को जो कि अनद्रुत लय में हो जायगी उसे दुगुन कहते हैं। जब कि कायदे इत्यादि की दुगुन करोगे तो दो बार बजाने से सम पर आओोगे।
-::
दोहरा सम से ६४ द्रुत के बराबर; और यह कायदे के बाद बजाया जाता है।
२ ३ बोल धघि नघि धघि नघि । दिंन किन धघि नघि
मात्रा दु०ड्रु० दु० द्ु० द्रु० द्रु० ड्रु० ट्रु0 द्रु० द्रु० द्रु० द्ु० द्ु० ट्रु० द्ु० द्रु०
धघि नघि दिंन किन धघि नघि दिंन किन* - दु० द्ु० टु० ट्रु० ट्रु० द्रु०- ट्रु० ट्रु० दु०ट्रु० डु०ट्रु० द्रु० ट्रु० द्रु० ट्रु०
X N- ३ तगि नगि तगि नगि । दिंन किन धघि नघि
द्ु० द्रु० द्ु० द्रु० द्रु० ट्रु० ट्रु० ट्र० ।दु० द्ु० दु० डु० द्रु० द्रु० ट्रु० द्ु०
Page 48
( ४२ )
X W- १ धघि नघि दिंन किन।धघि नघि दिन किन धा - द्रु० द्रु० द्रु० ट्ु० द्रु० द्रु० द्रु० ड्ु०। ट्रु० द्रु० द्रु० द्रु० दरु० द्रु० द्रु० छ्० लघु
कायदा नम्बर, २, सम से ३२, द्रुत के बराबर, सिर्फ द्रुत से सम्मिलित है।
X2- X २ ३ बोल धघि तिटि धघि तिटि धघि नघि दिंन किन
मात्रा द्रु०द्रु० द्रु०द्रु० दु०द्ु० द्रु० द्ु० दु०द्वु द्रु.्टठु० द्रु०द्रु० द्रु.द्रु० 0 X
तगि तिटि तगि तिटि। धघि नघि दिंन किन १ धा ड्ु० डु० दु.डु० ट्रु० डु० द्रु० ट्रु० द्ु्द्रु० द्रु.ट्वु० दु०द्वु० द्रु०द्वु० लघु
दोहरा सम से; ६४ द्रुत के बराबर; सिर्फ़ द्रुत से सम्मिलित है।
X ३ बोल धधि तिटि धघि नघि दिन किन धघि तटि
मात्रा द्ु०ट्रु० ट्रु० ट्रु० दु० ट्रु० द्रु० ट्ु० द्ु०ट्रु० हु०द्रु० ट्रु० द्रु० द्ु०द्रु० : } 02- 1 धघि नघि दिंन किन धघि नघि दिंन किन
- द्रु्टु० द्र०्ट्ु० द्रु०्ट्रु० द्र० द्रु० दु.दु० दु.्द्रु० द्ु०्ट्रु० दु०ट्ु० x २ ३ तगि ,तिटि तगि नगि दिन किन धघि तिटि
हु.डु० द्ु०दु० डु०टु० इ्०द्रु० दरुद्द्रु० द्रु०्ट्रु० द्रु०द्रु० द्रु०द्रु०
Page 49
(. ४३ )
X
धघि नघि दिंन किन धघि नधि दिंन किन धा
दु० द्रु० ट्र०ट्रु० ट्ु० ट्रु० टु० ट्रु० द्रु० ट्रु० ड्रु० द्रु० ट्रु० ट्रु० द्रु० ड्रु० लघु
कायदा; नं० ३. सम से ३२ द्रुत के बरोबर द्रुत, और अनद्ठुत से सम्मिलित है।
X २
बोल ध ति टि क त ध कत घिन
मात्रा द्ु० अ० द्ु० अ० द्ु० अ०द्ु० अ० दट्रु० द्रु० द्ु० ट्रु० द्रु० द्रु०
0 2 - ३ कत- घिन दिंन किन*| त ति टि क त
ट्रु०ट्रु० ट्रु० ट्रु० द्रु० टु० द्रु० ट्रु० द्ु० अ०द्रु०अ्०द्ु०अ० दु०अ०द्ु०
X
१ २ त कत घिन कत घिन र्दिन किन धा
द्रु० ट्रु० ट्रु० ट्रु० द्रु० टु० टु० डु०ट्रु० द्रु० ट्रु० ट्रु० ट्रु० लघु
दोहरा सम से: ६४ द्रुत के बराबर, द्रुत और अन द्रुत से सम्मिलित है।
X
२ घिन बोल ध ति टि क त ध कत
मात्रा अ्र.द्धु० अ०द्ु० अ०द्ु० अ्०द्ु० द्रु० द्रु०्टु० द्रु.्टु०
३ कत घिन कत घिन
द्रु० ट्रु० द्ु० ट्रु०. द्ु० ट्रु० द्रु० टु०
Page 50
( ४४ )
O .
ध ति टि क त कत घिन
दु० अ०द्ु० श्र०द्ु० भ्र०ड्रु० श्र०द्वु० दुदु० X १ २ कत घिन दिंन किन त ति टि क त
दु.्द्रु० द्ु०्द्रु० द्रु०्द्रु० द्रु०द्रु० दु० अ०द्ु० श्र०द्ु० अर०द्ु० अ०द्रु० ३ त कत घिन कत घिन कत घिन
द्व० द्रु.ड्रु० द्रु०ड्रु० ड्रु० द्रु० दु० द्रु० द्रु०ड्गु० द्रु.द्ु. 0 20 - ध ति टि क त ध कत घिन e
दु० अ० द्ु० श्र० द्रु० श्० दु० अ्र० द्ु० दु. द्ु०द्ु० द्रु०द्ु० -
X Y_ X २ कत घिन दिंन किन धा
दु.्द्रु० दु०्दु० द्ु०्द्ु० द्ु०द्रु० लघु पलटा सम से; ६४ द्रुत के बराबर, द्रुत और अनद्रुत और लघु से सम्मिलित है। X 2- बोल ध ति टि क त ध केत घिन मात्रा द्रु०अ०टु० श्र० ट्रु० श्र० द्ु० अ्र०'द्ु० द० द्रु० द्रु० O
कत धा कत घिन ध ति दि क त . . द्रु.ट्रु० लघु दु०ट्ु० दु.ट्ु० द्ु० श०द्वु० अ.द्रु० अ०द्रु० अ्०द्ु०
Page 51
४५
कर घिन कत चिन दिन ककिन ...-
द्0 दु०ड्रु० द्रु०डु० द्ु्टु० डु.्डु० दुगङ्रु० द्रु०द्वु० : X २ ति टि क त ल कत गिन
अ्र.द्वु० श्र.दवु० त्र०द्रु० दु० दुबदु० दुग्डु०
0 त- कत ता कत घिन ध ति टि क त
द्ुब्डु० लघु द्रु०ड० द्र०्द्वु० द्ु० अ.द्ु० अ०द्ु० त्०दु० अ्०टु० x a- 1
ध कत घिन कत घिन दिंन किन धा -
द्ुट्ु० द्रु०द्रु० दु०टु० दुट्ट० द्रु०दु० द्रुदु० लघु
पलटे का पलटा; सम से ६४ द्रुत के बरावर, ह्रुत और अनद्रुत से सम्मिलित है।
X २ बांल ध ति टि क त कत घिन
मात्रा द्ु० श्र.ट्रु० अ०द्रू० अ्र०द्ु० द्रु० डु०डु०
दिन किन घ ति टि क त
द्रु०्ट्रु० दुदु० द्रु• ! अणद्ठु० अ्णद्वु० अ्०द्वु० श्र०द्ु० इु०
कत घिन दिंन किन। कत घिन दिंन किम
द्ुष्दु. दु.द्वु० द्रु.द्रु. दुष्ट्ठ' दु.ट्रु० द्ु०ट्रु- द्रु०
Page 52
( ४६ ) X २ 3. त ति टि क त कत गिन दिंन किन
द्ु० अ्र०दु० अ.ट्ठु. अ्०द्ु० अ०्द्रु. दु० दु.द्रु० दु०घ्रु. दु०पु० दु०कु०
ध ति टि क त ध कत घिन दिंन किन दु० अ०ट्रु०अर.द्वु० अ.द्वु० अ०द्रु. द्रु. दु्दु० दु०द्ु० दु.द्ु० हु०्घु० X I- कत घिन दिन किन धा - दुषदु० दु०दु० दु०दु० द्ु०द्र० लघु कायदा नम्बर ४. सम से; ३२ द्रुत के बराबर लघु और द्रुत से सम्मिलित है। X 2- X २ ३ बोल धा ति टिक त धा घिड़ि नघि तीं ना
मात्रा धु लघु द्ु०द्ु० दु्द्ु० लघु लघु 99
X २ ता ति टिव त धा। घड़ि नघि तीं ना धा लघु दु० डु० दु० दु० लघु। इु्डु० दु०्टु० लघु लघु लघु देहरा, सम से; ६४ दुत के बरावर, लघु और द्रुत से सम्मिलित है। X 2- m- धा टिक त धा ति टि क त धा धा
मात्रा लघु द्ु० द्ु० ड्रु० दु० लघु ट्रु० द्रु० द्ु० द्रु० लघु लघु
धा ति टि क त धा. घिड़ि नघि तीं ना* लतु द्रु० ड्ु० लघु द्ु.ट्ु० द्व०द्र० लघु लघु
Page 53
( 8७ )
२ ता ति टि त ताति टि क त धा धा
लधु ह्ु० द्ु० द्रु० दु० लघु द्ु० हु० दु० दु० लघु लघु
X १ २ धा ति टि त धा घिड़ि नघि तीं ना धा
लघु द्रु० डु० द्ुट्वु० द्ु.दु० लघु लघु ल
कायदा; नं० ५. सम से, ३२ द्रुत के बरोबर, लघु, द्रुत और गुरु से सम्मिलित है।
३ X N - बोल धा ति टिकत धा-शा धा तीं ना #
मात्रा लघु दु० द्रु० गुरु लघु लघु लघु
१ O 3 X २ ता ति टिक त धा-भाधा ना धा
लघु हु० द्ु० द्रु० टु० गुरु। लघु लघु लघु लघु
दोहरा, सम से; ६४ द्रुत के बराबर, लघु, द्रुत और गुरू से सम्मिलित है।
X N- ३
बोल धा ति टि क त धा ति टे क त धा धा
मात्रा लघु दु० ड्ु० द्ु० दु० लघु द्ु० द्रु० द्वु० लघु लघु - . १
धा ति टि क त धा-मा धा तीं ना *
लघु द्रु० . दु० द्रु० .गुरु लघु लघु लघु
Page 54
( ४< )
- २ ता ति टि ता ति टि क स धा धा
लघु डु० य्ु० दु० इु० लप् लघु 39
२
धा ति टि क त धा-मा धा ती ना धा
लंघु द्रु. द्ु० द्० गुरु लघु लघु लघु लघु कायदा नम्बर ६. सम से; ३२ द्रुत के बराबर, लघु और द्रुत से सम्मिलित है। X २
ल धा ति टि क त धा धो धा तीं ना
दु० लघ लहा लबु लघु लघ मात्रा X Y O X. १ ता ति टि क त धा धा धा तीं धा
लघु दु० द्र० लघु लघु लघ्ु लघु दोहरा सम से; ६४ द्रुत के बराबर, लघु और द्रुत से सम्मिलित है। X Y- पा. ति टि क त भा ति दि क त धा धा
मात्रा लघु द्रु० द्रु० द्ु० ड्र० लघु द्वु० द्ु० दु० लघु लघु
धा ति टि क त धा धा धा तीं ना
लघु द्ु० द्रु० दु० द्ु० लघु लघ लघु लघु लघु
ता ति छि ता वि टि क त धा धा - लघु दु० हु० द्रु० लघु । द्ु० डु० दु० हु० लघु लघु
Page 55
)
धा ति टि त धा धा धा 16 तीं ना धा लघु द्रु० द्ु० ट्रु० द्रु० लघु लघु लघु लघु लघु कायदा नम्बर ७, सम से; ३२ द्रुत के बराबर, द्रुत और लघु से सम्मिलित है। X 21 x २ बोल घिड़ि नधि धा तिटि घिड़ि नघि दीं ना# मात्रा द्ु.्ट्ट० दु.टु. लघु दु.्टु० दु०डु० द्रुद्रु० लघु लघु -0 20 X x & किड़ि नगि ता तिटि घिड़ि नघि दीं ना धा द्रु.दव० दु्द्वु० लघु द्रु.डु० दु०टु० ड्ु.टु० लघु लघु लघु दोहरा सम से; ६४ द्रुत के बराबर, द्रुत और लघु से सम्मिलित है। X Y- X २ ३ बोल घिड़ि नधि धा तिटि घिड़ि नघि धा तिटि -मात्रा दु०द्रु० द्र्द्ु० लघु द्रुद्वु0 दु०ट्ु० दु्टु० लघु इ.्दु०
घिड़ि नघि धा तिटि घिड़ि नधि दीं.ना *
दु०हु० दुद्द्ु० लघु द्रु्द्रु० दु.द्रु० द्ु०्ट्र.खघु लघु
किडि नमि ता तिटि किडि नगि ता विंटि .-. दु.द्रु० द्रु०्द्रु० लघु द्रु.्द्रु० दुद्रु० द्ु०्द्ु० लघु द्दुष्ड.। : १ घिड़ि नघि धा तिटि घिड़ि नघि दींना धा दडु० दु.ट्रु० लधु द्रु्द्वु० द््डद्ु० द्रु्द्ु० लघु. लघ ल घ
Page 56
( ५० ) ॥ धीमे तीताले की गतें ॥ गत, नम्बर (१) सम से ६४ द्रुत के बराबर, द्रुत और अनद्धुत से सम्मिलित है। X Y बोल धघि दिन किन घघि दिंन किन धघि तिटि
मात्रा ०दु० द्ु.टु० द्रु०द्वु० द्रु०द्वु० दृण्दु० दु्ड्व० दु्दु० दृ०्दू० 000 धघि दिन किम धघि ति रि क धिन दिन किन#
द्ु.्द्रु० द्रु०्ट्रु० द्ु०्ट्रु० द्रु.्द्वु० अ्०द्रु०अ०द्वु० द्वु० द्रु०द्ु० द्रु.द्रु० द्ृ०द्व०
दिंन किन तगि ३ दिंन किन तगि तिटि
दु०डु० दु०्द्ु० द्र०्द्र० द्ु०ट्रु० दु.ट्ु० दु०्द्ु० दृ०्दु० दु०्ड०
8 धगि दिन किन धघि १ ति रि क घिन
दुषटरु० द्ष्ट्वु० द्ु०द्रु० द्०द्व० प्र०दु. भ्र०ड्रु० दु० दु०दु० X २ दिन किन धा
दु०ट्रु० द्०ट्रु० लघु गत, नम्बर (२) सम से; ६४ दत के बरावर, द्रुत और अनद्गुत से सम्मिलित है। X.Y- बोल ध ति रि क ध घि न धघि
मात्रा अ्र.ड्वु० श्र०द्ु० दु० द्० दिन किन तगि. ति रि क
द्रु.्टु.
Page 57
५१. )
र्दिन किन ध ति रिकध घिन दु.्दु० दु.दु० दु० अ्०द्ु० अ०द्रु० द्रु० डु० द्.द्रु० X . धघि दिन किन *। त ति रि क
द्रुद्रु० दु०द्ु० द्रु०्ट्रु० द्रु० अ्र०द्रु० अ०द्रु द्रु०
३ त गि न तगि दिंन किन तगि ति रि क
द्ु० दु० दु० द्रु०्द्ु० दुट्रु० द्रु.्द्रु० दु०्द्रु० अ.द्ु०अ्.द्ु० ट्र०
दिंन किन ध ति रि क ध घिन
द्वुद्रु० द्ु० अ्०द्वु० त्र०द्वु० द्ु० द्ु० दु.द्रु० X 2- धघि दिंन किन धा
दु्दु० द्ु्ट्ु० द्रु०ट्वु० लघु
।। धीमे तीताले के मुहरे॥
मुहरा नम्बर (१) पहली ताल से; ८ द्रुत के बराबर, द्रुत और अनद्गुत से सम्मिलित है।
बोल कि डि न गि ति रि कि टि 1
मात्रा प.द्वु० अ०द्ु० अ्र०द्दु० अ.दु० अ्र०द्० अ्र०द्ु०] अ्र०द्ु० भ्र०द्रु०
Page 58
( 袋 )
x
त ...... कु धिं ति टि क त घा
अ०्दु० अ०्दु० द्ु० त्र०द्रु० अ्र०द्वु० श्र०द्वु० भ.्ड्व० लघ
शुहरा नम्वर (२) खाली से. १६ द्रुत के बराबर, द्रुत और लघु से सम्मिलित है।
१
धिदू ते टि ति टि कि डि। न कि
लघु द्ु० दरु० द्रु० द्ु० द्व० दु०
त म त कि टि घा
द्ु० लघु दु० द्रु० इ० लघु
॥ धीमे तीताले का टुकड़ा॥ खाली की पहली खाली से; ४६ दुत के बराबर, लघु और बिराम लघु-हुत और अनद्गुत से सम्मिलित है। खाली की पहली छाली
बोल धध कि टित क ता कत र्घीं ड़ा न
मात्रा दु्डु० अ्.द्रु०अ.द्वु० अ.द्ु.अ्र०ट्रु० लघु। द्षद्वु० लघु बिरामलघु द्ु. -x8-5- गे घित तगि घित घि दी कत त धा
दुष्डु लघु 'दुब्कु० लघु लघु लघु द्ु० लघु
ति टि क त घि दि घि न धा
प्र०द्व० अ्र०द्वू० अ०द्वु. अ्णद्ु० अ०द्रु० अ०द्रु० श्र०द्रु० लघु
Page 59
( ५३ )
ति टि क त घि दि घि न धा
अ.द्ु० अ.द्ु० अ.ड्ु०अ.द्ु० लघु X
ति टि क त घि दि घि न धा 4 लघु ॥ धीमें तीताले का पेशकार ॥ सम से; १६ द्रुत के बराबर। इसको दो बार कहोगे तो सम आयेगा। यानी पहले बार सम से शुरू होकर तीसरी की तीसरी खाली पर खतम होगा; और दूसरी मरतबा खाली से शुरूहो कर पहली की तीसरी खाली पर खतम होगा। फिर समआजायेगा। खुला फिकरा बन्द फिकरा पहली बार
बोल धिंघिन धघि दिंनन तिगिन धघि दिंनन
मात्रा द्ु०ट्ु० W X N -02 - दूसरी बार
- विंघिन धघि दिंनन तिंगिन घघि दिनन धा
द्रु.द्रु.द्रु० द्र.ट्रु० द्रु.द्रु.द्रु.। द्रु.्द्रु.द्रु० द्रु.्ट्ठु० द्रु०द्रु.ट्रु. लघु- - ॥ धीमें तीताले की परन ॥ यह ४० द्रुत के बराबर, द्रुत, अनद्ठुत ओर लघु और विरामलघु से सम्मिलित है। सम से शुरूकरने से चार बार बजाने के बाद सम आयेगा-और तीसरी ताली से शुरू करने से तीन बार बजाने से सम आयेगा। सम से पहली बार X N- बोल ति रि क धिदु घिटि तिटि घि डि न घि
मात्रा अ.द्दु०अ्.द्रु.द्रु .. लघु द्रु्ट्ु० दुण्ड्व० डु. द्रु० द्रु० ट्रु० .
Page 60
५४
O 20
तिटि घि ड़ि न घि धि .. टि ति ..... टि
प्र०द्वु० श्र०ड्वु० भ्र.दु० भ्र०्दु० १
घि ड़ि न घि त कि। टिधा घि.डा न
प्र०द्रु० प्र०द्वु० अ्र०दु० अ०द्वु० दु० दु० हु० लघु विरामलघु दृ X
२ - कि ति रि कि टि त क
TO प्र०दु० अर०द्वु. अ्०डु.
- धा धा
लघु पु - दूसरी बार m- 3 ति रि क षदु घिटि तिटि
मात्रा लघु
१
घि ड़ि न घि तिटि घि ड़ि न घि धि ..... टि
द्० द्ु० दु० द्व० द्ु०्द्रु० द्र० द्० द० दु० अण्डु० झ०डू० x २
ति .... टि घि ड़ि न घि त कि टि
प्र.दु० प्र०ड्व० प्०द्दु० अ्र०द्ु० प्रकद्ु० अ०डु०
Page 61
( ५५ )
- धा घि ...... डा न कि ति रि
लघु बिरामलघु दु० अ०द्वु०
कि टि त क धा डि धा
प्र०द्वु० अ्र०द्वु० अ०द्ु० अ०द्वु० लघु द्रु० लघु
तीसरी बार C 2 बोल तेरि क धिदु घिटि तिटि घिड़िन घि मात्रा भ्र.ड्ु. लघु द्ु०्दु० दु०डु० दु० दु० द्रु० दु०
X
२
तिटि घि ड़ि न घि धि .. टि ति .... टि
दु.्दु० द्ु० छु० श्र०द्ु० अ.द्रु० अ्०द्ु० श्र०द्वु०
३
घि डि न घिति टि धा घिड़ा न
प्र०द्वु० अ०द्ु० अ०द्वु० श्र०द्ु० द्ु० द्र० लघु बिरामलघु द०
0 D
कि। ति रि कि टि त क धा ड़ि धा
1 डु० प्र०द्ु० भ्र०द्रु० अ्र०द्ु० अ्०दु० अ्०दु० अ्ं०डु० लघु दु· लघु
Page 62
( ५६ ) चौथी बार X १ २
बोल ति रि क धिदु घिटि तिटि।घि डि न घि
मात्रा प्र०दु०श्र०द्रु० द्रु० लघु द्रुष्ट्व० द्०्द्रु० दु० द्रु० दु० द्ु० o nY
तिटि घि ड़ि न घचि धि.टि तिटि
द्ु्टु० द्रु० द्रु० द्ु० पर०दु० अ०दु० श्र०द्ु० भ्०ड्ु. C 20
घि ड़ि न घि त कि टि धा घि .. ड़ा न
द्वु० ड्रु० लघु घिरामल घु ड्ु० XN- १
कि ति रि कि टि त क धा ड़ि धा धा द्रु० अ०द्रु० अ.द्रु० अ०द्ु० अ.द्रु०अ०द्ु० श्०द्र० लघु द्रु० लघ लघु
।ठेका पजाबी या ठुमरी का ठेका मात्रा १६ ॥ *)- विदित हो कि इस ठेके में भी वही सब ज़रबात और खालियां धीमे तीताले वाली मौज हैं, सिर्फ खुली मुंदी और रफ़तार का फर्क है। इसके बोलों की वंदिस लघु और बिरामलघु से की है। इस तरह से कि औवल एक लघु फिर दो बोल आड़े यानी दो बिराम लघु फिर एक लघु फिर दो बिराम लघु फिर एक लघु फिर दो बिराम लघु फिर एक खघु फिर दो बिरामलघु-कुल आठ बिराम लघु और चार लघु हैं, सब मिल कर १६ मान्रे के बराबर हुये, इस सबब से इसका कद भी धोमें तीताले के बराबर है। सिर्फ रक़तार का फर्क है। X N - m- बोल धा धिंईं घिधा धातिंइं गिता मात्रा लंघु बिरामलघु बिरामलंघु लघु बिरामलघु बिरामलघु
Page 63
( ५s )
ता तिंई घिधा धा घिंईं घिधा
लघु बिरामलघु बिरामलघु लघु विरामलघु बिरामलघु ।। ठेका तिरम्बा मारूफ तिलवाड़ा मात्रा १६ ॥। विदित हो कि इस ठेके में भी सब वही ज़रवात ताल और खालियां हैं जो धीमे तीताले में हैं सिर्फ फर्क इतना है कि धीमे की वन्दिश लघु से करके १६ मात्रे पूरे किये हैं और इसकी बन्दिश लघु और गुरु से कर के १६ मात्रे पूरे किये हैं। इस ठेके पर ख्याल गाते हैं इस सबब से यह ख्याल का ठेका मशहूर है। ३ XY- बोल धिन .इन ता घिन इन ता दिन· ... इन
मात्रा गुरु ....... लघु गुरु ... .. लघु गुरु
0 १
ता के ता धिन "इन ता धिन. .. इन
लघु लघु लघु गुरु ... लघु गुरु .. .... ।। ठेका टप्पा मात्रा १६॥
विदित हो कि इस ठेके में भी वही सब ज़रबात ताल और खालियां हैं जो धीमे तीताले में हैं सिर्फ रफ़तार का फर्क है यानी धीमे की बन्दिश लघु से की है और इसकी लघु और गुरु से की है।।
२
बोल धिन घिन धिन घिन ता घिन .. इन 식
मात्रा लघु लघु लघु लघु लघु लघु गुरु ......... 102 -- धा घे दिन ·इन घिन ता धिन घिन
लघु लघु गुरु ... .... लघु लघु लघु लघु
Page 64
( ५८ )
नोट :- धीमा तीताला और पंजाबी और सिलवार और टप्पे का ठेका, मात्रों और ज़र्बात और खालियों में बराबर हैं सिर्फ लैकारी दिखाने के लिये रफ़तार (चाल) बदल कर ज़ाहिरी सूरत में फर्क डाल दिया है और हक़ीकत में एक हैं, इसी सबब से जो चीज़ धीमे तीताले में गाई बजाई जाती है इन सब में भी उसी तरह दुरस्त आती हैं, और जो इन में दुरस्त आती हैं वह धीमे तीताले में दुरस्त आती हैं। ज़ाहिरी फर्क बर-ताव का यह और कर रक्खा है कि खयाल और टप्पे और पंजाबी के ठेके का ज्यादा ठाह में बजाते हैं। यह सब ठेके चूकि पैमाइश में बराबर हैं, इस वास्ते धीमे के कुल कायदे वगैरा इन सब में दुरस्त आते हैं।
। ठेका ऋध्धा मात्रा ८ ॥
विदित हो कि अध्धा धीमे तीताले का निस्फ है यानी आठ मात्रे के बराबर है और इसमें भी तीन तालें भरी और एक खाली है। यह शठ द्रुत और चार लघु से मुरक्कब (सर्मिलत) है जो कि कुल आठ लघु के बराबर हुआ। यह दूगुन के मौके पर बजाया जाता है। X ३ ध घिन न ध धिन न त तिन न
मात्रा द्रु० लघु दु० द्रु० लघु द्ु० लघु
घ घिन न
लघु द्रु०
॥ ठेका एकताला मात्रा १२॥
विदित हो कि यह ताल बारह मात्रे की है और तीनों ज़रबें एक ही मिज़ाज से हैं और पहली ज़र्ब पर इसका सम है, और ज़रबात के मुक़ाबिल की खाली मिश्ल धीमे तीताले वगैर: के इसमें नहीं है।
२ धी ना ति रि क ल तू ना कत ता
मात्रा लघु लघु लघु अदु०अं.ड्ु० द्ु० लघु लघु लघु लघु
Page 65
५६ )
३ धी ति रि क धी ना
लघु अ्णद्ु० ऋ्र.द्ु० द्रु० लघु लघु एकताले के कायदे सम से, हर कायदा २४ द्रुत के बराबर कायदा नम्वर १ सिर्फ द्रुत से मुरक्कब (सम्मिलित) है। X
बोल धघि तिटि धघि नघि दिंन किन * तगि तिटि
मात्रा दुबद्रु० द्ुष्द्वु० द्रु०द्वु० द्रु०द्वु० दु०द्ु० दु०द्ु० द०दु० द्रु०द्ु0 - xa- ३ धघि नघि दिंन किन धी
द्ु.द्रु० द्रु०्द्ु० द्रु०्ट्रु० द्रु०्ट्रु० लघु
कायदा नम्बर २ द्रुत व अनद्गत से सम्मिलित है। X २ वोल धघि तिटि धघि ति रि क दिंन किन *तगि तिटि
मात्रा दु्द्रु० द्रुद्रु० द्रु.द्रु०अ०द्वु० अ.द्वु० द्रु० द्रु्द्रु० द्रु.द्रु० दु०्द्व० द्रु.ट्रु०
X
धघि ति रि क दिंन किन धी
द्द्रु० अ्०्दु० अ०द्ु० द्ु० द्वु०द्वु० द्रु०द्वु० लघु
कायदा नम्बर ३ द्रुत व अनद्रुत से सम्मिलित है।
X २
बोल धघिनध ति रि क धिन। दिंन किन*त गिनत
दु.द्ु० द्रु०द्रु० द्रु० द्रु० ट्रु०ट्ु० मात्रा. द्रु०द्रु०द्रु० द्रु. अ.द्रु०अर.दु० दु०ट्रु.ट्रु०
Page 66
(६० )
X w ति रि क धिन दिन किन धी
अ्र०दु० अ्०द्रु० द्रु० द्रु०द्रु० द्रु०द्दु० द्रु०्व० लघु । एकताला की गत ॥ सम से ६६ द्रुत के बराबर द्रुत व अनद्गुत और विरामलघु से सम्मिलित है। X *- ।बोल धघि लिटि धघि दिन २ तगि तिटि किड़ि ध ति टि मात्रा दु०ट्रु० द्ु०ट्रु० द्रु०द्वु० द्रु०ड्रु०। दु.्ट्रु० द्.द्रु० श०द्रु०श्र.द्वु० द्रु० दु० द्रु०
धघि दिन तगि तिटि घि ... ड़रा न तगि तिटि द्ु०ट्रु० द्ु०ट्रु० दु०द्रु० दु०द्रु० बिराम लघु द्ु० द्रु०दु० दु०द्रु०
२ धघि तिटि घिदि घिन ३ धघि ति रि क दिंन किन दु.ड्रु० दु०द्रु० द्रु०ट्रु० द्रु०्द्रु० दु.द्दु० श्र०द्दु०श०द्र० द्ु० दुद्ु० द्रु.द्रु० x a- तगि तिटि तगि दिन २ तगि तिटि किड़ि ततिटि दु०्डु० द्रु०्ट्रु० द्ु०्ट्रु० द्रु०द्रु० दु०द्ु० द्ु०द्रु० अ०द्ु० अ०दु० द्ु० दु० द्दु०
X a- धघि दिन तगि तिटि घि.ड़ा न तगि तिटि विरामलघु द्रु० द्ु०्ड्वु० द्रुष्ट्रु०
Page 67
(६१) २ धघि तिटि घिदि घिन ३ धघि ति रिक्
द्रु.दु० दु०्द्ु० द्ु०द्रु० द्रु०द्ु० द्रु.टु०
दिंन किन घीं
द्रु.द्रु० द्रु.द्रु० लघु ॥ ठेका चौताला मात्रा १२॥ विदित हो कि यह ताल भी मिस्ल पकताले के १२ मात्रे की है सिर्फ एक ज़रबात का फर्क है और इस में चार ज़रबें हैं और चौथो ज़र्ब पर सम है, कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है, सिर्फ लघ के भरती का खालियं हैं जा कि हर ठेके में होती हैं। X
बोल धा धा दिन ता कित धा दिन ता ति टि क त X मात्रा लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु -द्रु० ट्० हु० ट्र० m- घि दि घि न
डु० दु० दु० द्रु० ।ठे का चौताले का कायदा॥ सम से कायदा नम्बर १ x30- बोल धघि तिटि धघि वघि दिन किन तगि तिटि - मात्रा द्ु्द्रु० द्रु०द्रु० द्रु०द्रु० द्रु०ट्रु० दु०टु० द्रु०ट्रु० द्ुट्रु० दुद्ु० X 2' २ ३ धघि नघि दिन किन धां - 1 द्व०द्व० द्व०्द्व० लघ
Page 68
( ६२ )
सम से कायदा नम्बर २।
ति टि क् त ध कत घिन दिंन किन बाल
मात्रा दु० अ०द्रु०अ०द्ु०अ०द्वु० अ०द्रु० दु० दु०द्रु० द्रु०द्रु० दु.दु० द्रुद्ु० x २ ३ त ति टि क त त कत घिन। दिंन किन धा
दु० अ०द्ु० प्०द्वु०श्र०द्वु० अ.द्रु० द्रु० दु०दु० द्रष्द्रु० लघु
।। ठेका आाड़ा चौताला मात्रा १४॥
विदित हो कि यह ताल १४ मात्रे की है और इस में चार ज़रबें हैं। पहली दूसरी चौथी जर्ब एक मिज़ाज से और तीसरी जर्ब बर बिलाफ और इस का सम तीसरी ताल पर है कोई मुकाबिल की खाली नहीं है। X M- बोल धीं ति रि क घिन ना दिन ना कत ता घिन
मात्रा लघु अ०द्ु० अ्र०द्ु० द्रु० लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु
२ - धिन। ना घिन घिन ना
लघु लघु लघु लघु लघु ॥ आाड़े चौताले का कायदा॥ सम से २८ द्रुत के बरादर, द्रुत और अनद्दुत से सम्मिलित है। x m- बोल ध घि नध ति रि क धति धघि दिंन १ किन*
मात्रा द्रु० ट्रु० द्रु० ट्रु० अ्र०द्ु० श्र०ट्रु० द्रु० दु०द्ु० द्रु.ट्रु० द्द०ट्र० दु०द्ु०
Page 69
(६३ )
X W. तगिनत ति रि क/ २ धति धघि दिंन किन धी द्रु० द्रु० द्रु० दु० श्र०द्ु०अ्.द्रु०द्रु० द्ु.ट्रु० द्व.द्वु० ट्रुट्रु० द्रु०द्रु० लघु
दोहरा :- सम से ५६ द्रुत के बराबर; द्रुत व अनद्रुत से सम्मिलित है। x m- 20- बोल ध घि न ध ति रि क धति धघि दिंन
मात्रा द्रु० द्रु० दु० द्ु० श्र.द्रु० अ०द्ु० द्रु० ट्ु०टु० द्र०ट्रु० "दु.्दु०
किन ध घि न ध ति रि क धति धघि दिंन किन
द्ु०्द्रु० ट्रु० द्रु० द्रु० द्रु० अ.द्वु०अ०द्रु० द्ु० द्ु्ट्रु० दु०द्रु० द्रु.द्रु० द्ट०द्रु०
त गि न त ति रि क तति तगि दिंन
द्ु० ट्र० प्र०दु० अ.द्रु० द्रु० द्र०ट्रु० द्ुटु. द्रु.ट्र०
किन ध घि न ध ति रिक्त धति धघि
दु.्ड्रु० द्रु० द्रु० दु० द्ु० अ.द्ु० श०द्वु० द्दु० दु.द्रु० द्रु.ट्वु० X
दिंन किन। धी ३
द्वट्रु० द्रु.ट्रु. लघु ॥ ऋाड़े चौताले की गत॥ सम से ५६ द्रुत के बराबर x m- ३
वोल घघि तिटि धघि ति रि क दिंन किन
मात्रा द०द्रु० द०ड्ठ० दु-द्ध० अण्डु० श०ट्रु० दु०
Page 70
(६४ )
धघि तिटि धघि तिटि। धघि ति रि क दिंन किन २
द्रु.द्रु० द्रु.द्रु० दु०ट्रु० द्रु०द्रु० द्ु.द्रु० श्र०द्वु० अ्र०द्रु० द्रु० द्रु०द्रु० द्रु०द्रु० X
तगि तिटि तगि ति रि क दिंन किन धघि
दु.दु० ट्रु०द्रु० द्रु.द्रु०अ०द्रु० अर०द्रु० द्रु० दु०द्ु० द्रु०द्रु० दरु०दु० Xm X
तिटि धघि तिटि। धघि ति रि क दिंन किन ३ धी
डुटरु० द्ु०द्रु० द्रु०द्रु०। द्रु.्द्रु० अ्र०द्रु० श्र०द्रु० द्रु० द्ु.द्रु० द्रु०द्रु० लघु ।। ठेका भूमरा मात्रा १४॥ विदिस हो कि यह ताल भी चौदह मात्रे की है। इस में और ठेका आाड़े चौताले में सिर्फ ज़रबात ताल और बन्दिश का फर्क है। मात्रों मे दोनो बराबर हैं। और इस में तीन मुकामात ज़र्ब ताल के हैं, और एक मुकाबिल की खाली है; और इस की ज़बं ताल के दो मिज़ाज यानी पहली और तीसरी ताल का एक मिज़ाज है और दूसरी ताल और खाली का एक मिज़ाज हैं, यह दोनों ताले पहली और तीसरी ताल से छोटी हैं। इस का सम दूसरी ताल पर है। Xr- m बोल धी धी ना धी ति रि कधीना ती ती ना
मात्रा लघु लघु लघु लघु अव्द्ु०अ०द्रु० द्रु० लघु लघु। लघु लघु लघु
धी ति रि क धी ना
लघु प्र०द्ु० प०द्रु० द्रु० लघु लघु । ठेका भूमरा का कायदा ॥ सम से २८ द्रुत के बराबर XN- बोल ध घि नं ध ति रि क धति धघि दिंन किन त्रा ह दु० दुद्रु० अ०द्ु०अ.दु०दु०) ट्.द्रु० द्रु.्ट्टु०. द्रु०्ट्ठु० द्रु०द्रु०
Page 71
(६५ )
XN . त गिनत ति रि क धति धघि दिंन किन धी दु० ड्ु० हु० द्रु० भ.द्रु०अ०द्ु० द्रु० द्रु०द्रु० द्रु०्द्वु० टु०ट्रु० द्रु.ट्र० घु
दोहरां :- सम से ५६ द्रुत के बराबर X W - ध घि न ध ति रि क धति धघि दिंन किन
मात्रा दु० द्रु० दु० द्रु० अ०द्रु०शर०द्रु० द्रु० दुदु० द्ुगट्रु० द्रु०्द्रु० द्रु०द्रु.
ध घि नध ति रि क धति धघि दिन किन*
दु० दु० दु० द्ु० अ्र०द्रु० श्र०द्वु० द्रु० दु.्दु० दु०द्रु० दुब्द्रु० द्ु.्ड्ू.
X W- त गि न त ति रि क तति तगि दिंन किन
द्ु० डु० दु० डु० अ०ड्रु.भ०द्रु० द्ु०1 पु०पु० मुन्दु० दुन्डु० इु.्दु०
O १ घ घि न ध ति रि क ध -&o
कु० द्रु० द्ु० श्र०द्० अ्र०ड्ु० ङ्०
XY- दिन किन
डु.दु० द्ु०्ट्ट०
Page 72
( ६६ )
॥ भूमरे ठेके की गत॥ सम से ५६ द्रुत के बराबर, द्रुत और अमद्ुत से सम्मिलित है।
X N - ध ति टि क त धध घ घिन दिंन बोल 1
मात्रा डु० श०द्ु० अ०द्वु० श्०द्वु० अ्र०द्ु० दु०द्रु० दु० दु०द्ु० दु.द्ु.
C 3
किन ध ति टि क त घध ध घिन
दुष्द्रु० दु० अ०द्रु० श्०द्रु० श्र०द्वु०अ०द्रु० द्रु०द्रु० द्रु० दु०दु०
X n- धध घिन दिंन किन त ति टि व क
द्ु.द्रु० द्रु.द्रु० द्रु.द्रु० द्ु०द्रु० द्ु० अ०द्ु० अ्बद्रु० अ०द्रु० श्र०ड्ु.
३ तत त गिन दिंन किन ध
ड्रु द्ु.टु. द्रु०
C 2
ति टि क त धध ध घिन
प्रदु० भ्र०डु. अ्र०ड्वू० अ्र०नु० दु०डु० द्रु०डु०
X २ धध घिन दिन किन र्ध
दु.टु० दु.ट्ु० द्द्र० द्रु०द्रु० लघु
Page 73
( ६७ )
॥ ठेका धमाल मात्रा ७॥।
विदित हो कि यह ताल सात मात्रे की है और इस में तीन ज़रबात ताल है और इस का सम पहली ताल पर है, और इसमें कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है।
बोल क धि टि घिटि धा घिदिइं दीं ता
मात्रा द्ु० दु० दु० द्रु०द्रु० लघु बिरामलघु लघु लधु
कायदा :- नम्बर १ सम से १४ द्रुत के बराबर सिर्फ द्रुत से सम्मिलित है।
X २ ध दिगि धध दिंगि * त दिंगि ३ बोल धध दिंगि क
मात्रा द्ु० द्रु०द्रु० द्रु०द्रु० दु·द्ु० दु० दु०ट्वु० द्ु.द्वु० दु.ट्वु०
कायदा :- नम्बर २ सम से २८ द्रुत के बराबर; द्रुत और अनद्ठुत से सम्मिलित है।
२ X a वव घि न ध ति रि क घिन धघि बोल
मात्रा दु० दु० दु० दु० अ०द्ु० श्र०द्व० द्र०दु० दु.दु०
X २
दिंन किन *। त गि न त ति रि क
द्ु.द्ु. द्रु० द्रु० द्रु० द्ु० अ०द्ु०अ.ड्०। द्ु० C19
X r- X ३ १ षिन धघि। दिंन किन क
दु०्टु० द्ु.द्रु० दु.द्रु०
Page 74
(६८ )
। ठेका धमाल की गत॥
सम से ५६ द्रुत के बरबर ह्रुत और अनदुत से सम्मिलित है।
२ xr- बोल धघि तिटि ध घि ति रि क दिंन
मात्रा द्रु.द्रु० दु०्ट्रु० द्रु० द्ु० अद्ु० भ्र.द्ु० डु० द्रु०डु०
२
किन घघि तिटि ति टि
द्व०पु० डु.डु० द.्डु०
घघि ति रि क दिंन किन *
अ्र०डू० प्र०ड०
२
त्गि तिटि त गि ति रि क दिंन किन
द्वु.्टु० दु०्दु० द्रु० दु० अ०द्ु० अ०द्ु० दु० दु.ड्ट०
२
घघि तिटि धघि ति टि धघि ति रि क
दुट्ु. न दुण्डु० द्० द्ु· दुष्टु० अ०द्ु० अ०दु० द्रु.
दिंन किन
दु.डु० दु० ड्ु०
Page 75
( ६६ )
। ठेका रूपक मात्रा ७॥ विदित हो कि यह ताल भो सात मात्रे को है ; और इस में दो ज़र्ब ताल की हैं; और एक मुकाबिल की खालो है; और खाली पर इस का सम है।
X0- तिन ना ति रि क २ बोल घिन ना घिन ना
मात्रा लघु लघु श्र०द्रु०श्र०द्वु० टु० लघु लघु लघु लघु
दूसरा ठेका रूपक का X C X २ बोल ती ती ना। धी ति रि क धी ना
मात्रा लघु लघु लघु लघु अ०द्धु०अर०द्ु० द्रु० लघु लघु
।। रूपक ठेके की गत॥
सम से ५६ द्रुत के बराबर द्रुत और अनद्गुत से सम्मिलित है।
x c- २ - ---- बोल धघि तिटि धधि ति रि क हिंन / किन धघि
मात्रा दु्दु० दु०्दु० दु०्दु० अ्०द्वु०श्र०द्वु० द्रु० द्रु०ड्रु० दु०्द्रु०दु०ड्रु.
x o- तिटि धघि तिटि धगि ति रि क
द्ु.डु० द्र०ट्वु० श्र०द्ु० अट्ु० द्ु० x 0 दिन किन*। तगि तिटि तगि ति रि क दिंम
इ.ट्ट० द्व०ड्व० इु०ड्ु० दु०द्ु० ट्ु०्डृ. अण्दु.श्र.द्वु. ट्र. ट्रु.ड्व०
Page 76
७० )
X
तिटि 1 किन धघि धघि तिटि
दु.ट्ु० द्ु.डु० द्रु.द्रु. द्रु.द्वु. दु.दु० X २ धघि ति रि क दिंन किन (तिन) (ती)
द्ु०द्ु०अर.द्ु० अ०द्वु० ट्रु० द्रु०द्वु० ॥। ठेका चाचर या दीपचन्दी या होली का मात्रा ७। विदित हो कि यह ताल भी सात मात्रे की है। इस में चार ताले हैं तीन भरी और एक खाली मुकाबिल की। इसका सम दूसरी ताल पर है।।
X २ बोल ध. दि.न धा दिन त ... दि ... न धा दिन
मात्रा बिराम ... लघु लघु लघु बिराम .... लघु लघु लघु
दूसरा ठेका
X IY- of - ३ बोल ध धि न ध धि न त ति न ध ध धि न
मात्रा दु० ड्ु० डु० द्ु० द्रु० द्वु० द्ु० दु० दु० द्ु० दु० दू० द्ु० दु०
ठेका चाचर के कायदे॥
नम्बर १ सम से १४ द्रुत के बराबर सिर्फ द्रुत सें सम्मिलित है। X X - M- बोल ध घिन दिंन किन# त घिन दिन किन ध ...
मात्रा दु० द्रु०ड्ु० दु०दु० इ०ड्ु० दु० दृ०द्रु० दषद्रु० द०्डु०
Page 77
(श)
नम्बर २ सम से १४ द्रुत के बराबर; द्रुत और अनद्धुत से सम्मिलित है।
X Y- X २
बोल ध ति रि क धि न घि न *
मात्रा दु० अ०द्रु० अ०द्रु० द्रु० द्रु० ड्ु० दु०
X २ त ति रि क धि न ध न घ ..
दु० प्र०द्ु० श्र०द्ु० द्रु० द्रु० द्रु० द्रु० ड्रु०
। ठेका चाचर की गत ॥
सम से २८ द्रुत के बराबर; द्रुत और अनद्रुत से सम्मिलित है।
C 20 X2- X २ ३
बोल ध.घि .. न ध ति रिक् ध ति धघि
-- --- मात्रा। द्ु० द्रु० ड्रु० द्ु० श०द्वु० अ०द्रु० द्रु० द्रु० द्ु० द्रु्द्ु०
३ दिंन किन # त. गि न त ति रि क
द्ु०द्ु० टु०डु० द्ु० द्ु० द्रु० प्र०दु० श्र०ट्वु० ङु०
X 0 20 २
घ ति धघि दि न किन घ ...
ड्ु० द्रु.द्रु० द्ु.द्र०
Page 78
(७२ )
॥ ठेका पज़तू मात्रा ६ ॥ विदित हो कि यह ताल ६ मात्रे की है और इस में दो ज़य ताल की हैं, आर एक खाली मुक़ाबिल की है। इस का सम खाली पर है। अकशर लोग इम ठेके पर गज़ल गाते हैं इस लिये यह गज़ल का ठेका विख्यात है।
बोल ति ई.कि तकु धि.ईं .. घि धा धा
मात्रा बिराम ... लघु द्रु०ट्रु. बिराम लघु लघु लघु
।ठेका तेवरा मात्रा ७। विदित हो कि यह ताल भी रूपक की तरह सात मात्रे की है, और इस के और रूपक के कुल मुक़ामात ज़ब ताल और खालियां बिलकुल एक ही तरह हैं। सिर्फ इतना फर्क है कि रूपक में दो ज़र्ब ताल की हैं और खाली पर सम है और इस में तीन ज़र्ब ताल की हैं और तीसरी ताल पर सम है, और इस में कोई खाली मुक़ाबिल की नहीं है।
X m- बोल घिन घिन ना धिन ना घिन ना
मात्रा लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु
। ठेका तेवरा की गत॥ सम से २८ द्रुत के बराबर; द्रुत और अनद्रुत से सम्मिलित है। x m- बोल घ ति रि क ध टि घिन घघि मात्रा दु० अ्र०द्ु०श्र०द्रु० दु० द्रु० द्व० दु.दु० दु०्डृ0 X २ दिन किन त ति रि क स कि टि
द्ु.डु० द्रु०ट्ु० द्ु० अ्र०द्वु० त्र०द्ु० द्रु० दु० दु० द्रु०
Page 79
घिन धघि दिंन किन धिन
दुष्द्रुर द्रु०द्रु० द्रु.द्ु० द्रु०ड्ु० लघु
। ठेका तेवरा का मुहरा॥
सम से १४ द्रुत के बराबर; लघु; द्रुत और अनद्रुत से सम्मिलित है।
X m- २
दीं तगि दिंन कि तिंन कि ड़ि बोल न : गि -. मात्रा लघु द्ुष्द्रु० दु.छ्व० डु० द्ु०दु०अ०दु० अ०द्ु० प्र.द्वु० ग्र.दु.
X M-T त.कु ति टि क त। घिन
अणदु०श्र.द्रु० अ०्दु० अ०द्ु० अ.द्रु०अ०ड्व० लघु
। ठेका भपताला मात्रा १०॥
विदित हो कि यह ताल १० मात्रे की है और ठेके के बोल लघु वज़न के बंधे हुये हैं और इस में तीन ज़र्ब ताल की हैं और एक मुक़ाबिल की खाली है। सम इस ठेके का दूसरी ताल पर है; और पहली और तीसरी ताल का बाहम एक मिज़ाज है और दूसरी और खाली का बाहम एक मिज़ाज है।
बोल: ी ना ती.ना धी धी नां 4
.. ...-. लघु लघु लघु लघु लघ। मात्रा.
Page 80
98 )
।। ठेका अपताले का कायदा॥
सम से २० दुत के बराबर ; द्रुत और अनदुत से सम्मिलित है।
X n- m- बोल षिं घि नि ध ति रिक घिनघिन #
मात्रा दु० दु० द्रु० द्ु० श्र०द्रु०अ्र०द्० दु० दु० द्रृ० दरु० पृ०
दिं गि नि त ति रि कषिनघिन धी
ड्० द्ु० ड्ु० द्ु० अ्र०द्रु० प्र०दु० दु० दु० दु० द्ु० द्० लघु
।। ठेका भपताले की गत॥
सम से ८० द्रुत के बराबर ; द्रुत और अनद्धत से सम्मिलित है।
२
लि धघि तिटि धघि दिन तगि तिटि
मातरा द्ु.डु० द्ु.द्ु. दु.दु. दु०्ड०
X I- ध घि न ध ति रि क घिन घिदि घिन
द्ु० दु०अ्०द्ु० श०द्रु० द्रु०द्र.द्रु. दु०डु० दु्डु.
O
घ घि न ध घिदि घिन धघि
दु० दुं० दु० डु० दु.द्रु० इु.ट्ु० द्रु.डु०
Page 81
xr- X २ ति रि क हिंन किन # तांग तिटि
प्०द्रु० अ्र०ड्ु. ड्ु० दु०डु० डु.द्रु. द्ु.डु० द्ु.ड्व. 02- ३ तगि दिन तगि तिटि ध घि न
दु.दु० दुब्दु० द्ु०द्ु० द्रु०दु० द्ु० द्ु० दु० X २ ति रि क घिन घिदि घिन
अ्र०द्रु० ऋ्०डु० ह० ड्ु०डु० डु.ड. दु०्टु०
ध घि न ध घिदि घिन धघि। ति रि क -AU
दु० दु० दु० द्र० द्रु० द्रु० द्रु.्दु० द्रु०ट्र०। अ.द्रु० अ्०ड्ु० द्रु.
X २ दिंन किन धी
दु.टु० दु.द्घु० लघु
। ठेका सूलफ़ाखता मात्रा ५।।.
बिदित हो कि यह ताल पांच मात्रे की है और इस में तीन जरबें ताल की हैं अर्थातु तीन ताल भरी की हैं और मुक़ाबिल की खाली नही है और इस ठेके का सम पहली ताल पर है। X २ षिन ना धिंन धिं दिं न ति रि क बोल
: मान्रा लघु लघु द्ु.डु०
Page 82
( ' )
। सूलफ़ाखता का कायदा । सभ, से १० द्ुत के बराबर; सिर्फ द्रुत से सम्मिलित है। X २
बाल ध घिन सि न * त धिन तिन धिन
मात्रा टरु० द्ु०ट्ु० ६० डु० ड्रु० दु०्ट्ुद्रु.द्रु० लघु ।। सूलफ़ारवता की गत ॥ सम से २० द्रुत के बराबर; दरुत और अनद्रुत से सम्मिलित है। X
बोल ध. ति टि क स घिन दिंन किन -AU
मात्रा दु० ऋ०दु० श०द्वु० अ०द्रु० अ०द्वु०द्रु० दु०्डु० दु०दु० दु०्दु०
ति टि २ क त त घिन
द्ु० श्र०द्रु० श्०ड्रु० अण्द्ु० अ्०द्ु. X १ न किन धिन
द्रु-ट्रु० लघु
। ठेका दादरा मात्रा ६ ॥ विदित हो कि यह ताल भी ३ मात्रे की है; और इस के सब मात्र एक ही बज़न के हैं और एक ही रफतार से बजाये जाते हैं और इस में दो भरी ताल हैं इस का सम दूसरी ताल पर है। X R- बोल धा चिन ना. धा तिन ना
मात्रा बधु. लघु लघु लघु
Page 83
।। ठेका दादरे के कायदे॥
नम्बर १) सम से १२ द्रुत के बराबर द्रुत से सम्मिलित है। X Y- X2- X २ बोल धघि दिंन किन तगि धिन घिन धा
मात्रा द्ु.द्रु० द्ु०द्रु० द्रु.द्रु० दु्द्ु० द्रु.द्रु० द्रु.ट्रु० लघु
नम्बर (२) सम से १२ द्ुत के बराबर; द्रुत से सम्मिलित है।
XN बोल घि न घि ध तिन* ति न कि ध तिन घा
मात्रा द्रु० दु०द्ु० द्ु० दु०द्रु० द्रु० द्रु०द्रु० द्रु० द्रु०ड्र० लघु नम्बर (३, सम से १२ द्रुत के बराबर; द्रुत और अनद्रुत से सम्मिलित है। X W- बोल धि घि नि त ति क* दि गि नि ध
प्राता द्रु० द्रु० द्ु० दु० अ्०द्ु० श्र०द्ु० द्र० ड्रु० द्ु० द्रु० दु० X २ ति रि क धा
अ्र०दु० श०द्रु० डु० लघु
नोट: - दादरा के कागद एक ताले में पेरकार का काम देते हैं।
॥ ठेका दादरे के मुहरे ॥ नम्बर (१) सम से १२ द्रुत के बराबर; द्रुत शर अनद्रुत से सम्मिलित है। X N बोल तगि दिंन कि डरि न गि घि.टि तिटि 2
त्रा
Page 84
()
X २ क ..... तु त ति टि क त धा
लघु
नम्बर (२) सम की डूसूरी खाली से आाठ द्ुत के बराबर: हुत और अनद्रुत से सम्मिलित है।
बोल कि ड़ि न गि ध दि कि टि तकु
मात्रा अ्र०द्रु० अ०द्रु० अ०द्ु० श्र०द्रु. श्र ०द्ु० श्र०दु० श्र०द्रु० शर०दृ० प्र०द्वु०भ्र०द्रु.
२ त ति टि क त घा
लघु
॥ ठेका कहरवा मात्रा ८ ॥
विदित हो कि यह ताल आठ माने की है और इस में दो भरी ताल और हफ़ादिल की कोई खाली नहां है और इस ठेके के बोल सब एक वज़न के है, सम इस का पहली ताल पर है। X
- बोल धा घिन ना तिन ता ता धिन ना
मात्रा लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु
।। ठेका कहरवे के मुहरे॥ नम्बर (१) सम से १६ द्रुत के बराबर; ह्रुत और लघु से सम्मिलित है। X x २ बोल धं कि टि त कि टि ता।ति टि क त घि दि घि न /धा १
मात्रा इ० द्व० द्रु० द्ु० दु० द्ु० लघु। दु० डु० दु० ड्रु. हु० द्रु० दु०लघु
Page 85
(७६)
नम्बर (२) सम से १६ द्रुत के बराबर; लघु और बिरामलघु और द्रुत से सम्मिलित है। X or- X
ताडि ता डिता। तिटिकत घि दि घिन २ बोल धा
मात्रा बिरामलघु बिरामलघु लघ। दु० डु० ड्रु० ट्रु० द्रु० द्रु० द्रु० द्रु० लघु
॥ ठेक। कौवाली मात्रा ८ ॥ विदित हो कि यह ताल आठ मात्रे की है, इस में दो भरी ताल हैं और सम पहली ताल पर है, कोई मुक़ानिल की खाली नहीं है, और यह ताल बिलकुल कहरवे की तरह है, सिफ ठेके की बन्दिश दूसरी तरह की है जिससे दूंसरी सूरत मालम होती है। जिस प्रकार की धीमे तीताले और पंजाबी इत्यादि में बन्दिश का फर्क है और मात्रा बरावर है,।
२
बोल धा घा धा दिन। ता धा धा धिन
मात्रा लघु लघु लघु लघु। लघु लघु लघु लघु
बदला हुआ ठेका
X N1 २
बोल धा कतु धा घिन ता कतु ता धिन
लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु मात्रा ।। ठेका फ़रोदृस्त मात्रा १४ ॥ विदित हो कि यह ताल भी मिस्ल भूमरे और आड़े चौताले की तरह चौदह (१४) मात्रे की है, लेकिन सुकामात ज़ब ताल और खालियां बिलकुल इन तालों से अलग हैं। सिर्फ मात्रे बराबर हैं। इसमें पांच ज़र्ब ताल की हैं याने पांच भरी ताल हैं। सम इस ठेके का पांचवी ताल पर है।
Page 86
X
बोल षिन धिन धा धा दीं दीं ता तित मात्रा लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु oc 1 ध ति रिकधिंनकिध ति रिकघिंनकि दु० अ०द्रु० श्र०द्ु०दु० द्रु०/द्व० द्र० दु० श०द्रु० श०द्रु० दु० द्व०द्रु० द्रु० ।। ठेका फ़रोदस्त की गत॥ x सम से ५६ द्रुत के बराबर; सिर्फ द्रुत से सम्मिलिस है। ५ १ बोल घिटि तिटि घिन कत।रदिन किन घिटि तिटि मात्रा दषटु० द्०ट्रु० दु०दु० दु०द्रु० दु०दु० दु.द्ु० दु.्द्वु० द्रु.द्ु० 2-x5- २ ४ तिटि तिदि घिन कत दिंन किन द्ु०डु० दु.डु० ५ तिटि तिटि गिन कत २ दिन किन घिटि तिटि द्ु.ड्र० दु०दु० दु०दु० दु०द्ट० दु०द्वु० दु्दु० दरु०द्वु० - x २ तिटि तिटि घिन कत।दिन किन धिन द्ु.्दु. द्ुद्ु०दु०्दु० दु.्ट्रु. हु.्द्रु० हद्रु० लघु । ठेका कैद मात्रा १०॥ विदिक' होकि।यह ताल 'भी मिस्ले कपताले के दस मात्रे की है, लेकिन मुकासरात ज़रब में फर्क है। इस में तीन भरी ताल हैं, और कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है, और ताल का सम पहली ताल प हैं।
Page 87
( <)
XM- X २ बोल धा घिन ना। धो तिटि किटि ।घिन घिन ना ना
-मात्रा लघु लघु लघु लघु द्ु.दु० दु०टु० लघु लघु लघ।
।। ठेका सवारी मात्रा १५॥
विदित हो कि यह ताल १५ मात्रे की है, और इस का सम पहली ताल G X a पर है और इस में चार भरी ताले हैं; कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है।
२ बाल घिन ना धि धिं।ना धि धिं न घि धिं न
मात्रा लघु लघु द्रु० द्ु० लघु द्रु० द्रु० द्रु० द्रु० द्रु० द्रु०
३ दिंइं कि डि दिदिंन ति रि क तिंन
कित ति रि क धिंन धिं धि न
द्ु० द्ु०अ०अ०द्ु०अ०अदु•अ०द्रु० द्ु० द्रु० दु० द्रु० द्रु० । ठेका त्र्प्रस्टमंगल मात्रा १४॥ विदित हो कि यह ताल भी चौदह मात्रे की है और इस ठेके में आठ ज़र्व ताल की हैं याने आठ भरी ताल है कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है। सम इस ताल का पहली साल पर है।
बोल षिंधिं नन षिंन षिंधिं नन षिंन
मात्रा दु.डु० दु.डु० दु.ड्रु. दु.डु० दु०डु० -S- तिं ..... इं गि दिंन ति रि क घिन
श्र०धु० दु०मर०दु० द०ड्ड० अ्०न्र०डु० श्र०श०ड0 द्ु०टु.
Page 88
( (2)
८ घिं धिं न क त धिंधिं न.न
दु० दु० द्ु० दु० दु०। द्रु० द्ु० दरु द्रु० ।। ठेका लक्षमी माघा १७॥। विदित हो कि यह ताल सत्तरह (६७) मात्रे की है और इस में १८ जबैं ताल की हैं याने १८ भरी ताल हैं और अठारवीं ज़रब पर याने अठारवीं ताल पर इस ठेके का सम है। लोग अठारह मात्रे की ताल कहते हैं पर यह बात ग़ल्त है। 5 X DY १८ २ बाल धा धिन धिन ना-भा घि' न कि टित क
मात्रा लघु लघु लघु गुरु द्रु० श०द्रु० अ०द्ु०नर.दु०अ.द्रू० १३ १० ११ १२ w- धा-शा धिन ना िन ना घिन १४ धि कत्
गुरु .. लघु लघु लघु लघु दु० द्ु०ड्ट० दु०पु० १७ १५ ६ कि टि त क
श्र०द्ु० श्र०द्वु० - । ठेका बिराम मावा १४॥ विदित हो कि यह ताल चौदह मात्रे की है और इस में दस ज़न्ब ताल की हैं याने दस भरी ताल हैं और कोई मुफ़ाबिल की खाली नही है। सम इस का पहलो ताल पर है। X m' - २ ५ बोल िंधिं धध। धिंन दि'दि तत।धिन/धिन दिंदिं तत
नात्रा द्ु०दु० दु०द्ु० दु.डु० दु.्टु० द्ु०द्रु. द्ु०्द्रु० द्०ड्र० इु.्दु० ट्रु०ट्ु0
Page 89
द३ )
w V १० 6 धिं धि न धिं । घिं न ।दिं ति रि क दिंन
दु० द्रु०। ट्रु० ट्रु० द्रु० डु०। द्ु० श्र०अ.द्रु०स०अ०द्रु० अ०द्वु० द्दु०द्रु. नोट :- ठेका क़ैद, सवारी, अस्टमंगल, लक्षमी और ठेका बिराम यह ठेके की चीज़े कम बरती जाती हैं इस कारण से सिर्फ ठेके के बोल ही लिखे गधे हैं।। । ठेका रुद्र मात्रा १६ ॥ विदित हो कि यह ताल धीमे तीताले की तरह सोलह मात्रे की है लेकिन ज़रबों में फर्क है। इस में ११ मुक़ामात ज़रब ताल के हैं याने ११ भरी ताल हैं कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है। सम इस ठेके का पहली ताल पर है। X
बोल घिंधिं धध धिन धिंधिं धध धिंधिं धध ५ धिन
मात्रा द्.ट्रु० द्र०ड्ु0 द्रु.ट्रु० दु्ड्रु० द्रु०ट्र० दु०द्ु० द्व०ड्रु० - ११ द्ु०दु०-
9- १०- V W धिन धिंधिं धध धिन धिन त घिं न धि धिंन
द्रु.ट्ु० द्रु.द्रु० द्रु.ट्रु० द्ु.द्रु. द्ु.टु० द्ु० द्रु० द्रु० द्रु० द्०ट्रु०
ठेका गणोंश मात्रा ११ ।। विदित हो कि यह ताल ११ मात्रे की है और इस में सात भरी तालें हैं और कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है। इस ताल का सम पहली ताल पर है। X १ ५ बोल घिधि धध घिन घिंधिं धध घिन घिन
मात्रा द्ु०द्रु० द्रु.द्ु० द्रु०टु० द्ु.द्रु० द्ु०्द्रु० द्रु.दु० द्रु.ट्रु०
त घि न क त धिं घिं न - 6
ट्र० द्रु० द्ु० द्द० द्ु० ड्वु. द्रु० डु०
Page 90
( ८ )
॥। ठेका सुरुसती मात्रा १४॥ विदित हो कि यह ताल भी चौदह मात्रे की है। इस ठेके की ज़रब ताल और चौदह मात्रे वाली तालों से अलग है। इस मे नौ (६) भरी ताल हैं श्रर कोई मुक़ाबिल की खाली नहीं है। सम इस ठेके का सम तीसरी ताल पर है। X A' 9- 5- बोल धिन धिन घिंधिं घध घिन घिंधि धध
मात्रा द्ु.द्ु० द्रु०द्रु० दु०टु० द्रु०ड्ु० दु.ट्ु० दरु.दु० द्रु०द्वु०
V- दिन कित घि घि न धि धि न दिंदिं नन
दु०दु० दु०ट्रु० द्रु० दु० दु० द्रु० डु० दु० दु०्ट्रु० द्रु०द्वु०
सूचना-ठेका रुद्र और ठेका गोश और ठेका सुरुसती यह ठेके बहुत प्राचीन हो गये हैं और आज कल इस्तमाल में नहीं लाये जाते इसी कारण इसके कायदे और गते इत्यादि नहीं लिखी गईं।
॥ इति शुभम् ॥
Page 91
जब आपको टोपी खरीदना हो सीधे मेरे दूकानपर चले आइये यहां आप को कुल माल थोक व कुटकर बड़ी किफायत से मिलेगा। स्टाक में विलायती तथा स्वदेशी फेल्ट्र इत्यादि हर एक प्रकार की टोपियां मौजूर रहती हैं। पता :- द्वारका प्रसाद रामदाल कैपमरचेन्ट चोक इलादाबान संगीत दिग्दर्शन प्रथम गुच्छ इस में भैरवी रागी का अपूर्ष संग्रह है, इस में सरगम, तराने भजन, सिंतार तथा हारमोनियम पर बजाने की गत, सभी बीज़ों का उत्तम संगह है। स्वर लिपि बहुत सरल मि० विष्युनरायरा भारत खंडे की चलाई हुई है, संगीत प्रेमियेो के लिये एक अपूर्व संग्रह है, लेखक लंक्षमन दास मुनीय प्रयाण, मूल्य I संगीत समुच्चय प्रथम खंड इस में नामी नामी उस्ताद गायकों की अपूर्व चीड़ो का मतुलनीय संग्रह है, घ्र पद, धमार, ख्याल, सरगम, अलाप, सभी कुछ सरल स्वर लिपि में वही मि० भारत खंडे के नोटेशन पर दिया हुआ है, संब्रंह ऐेसा भ्पूर्ष है की संगीत भमी एक बार इसे देकष कर ह्दय से फड़क उठेंगे। सूल्य २।) दोनों पुस्तक, मिलने का पता :- (१) मंत्री-भारत कला परिषद काशी। (२) बाबू बेशेलाल हारमोनियम भेकर एम मीररगंअ स्लाहाषाव ।
इस पुस्तक के मिलने का पता :- मेसर्स, दारका प्रसाद रामदास