Books / isbn 979-8-88572-095-3

1. isbn 979-8-88572-095-3

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Content: प्रेम वह है जो अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। अपना सब कुछ देने को तैयार रहता है पर बदले में कभी कुछ नहीं मांगता।

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Content: प्र. प्रेम क्या है ?

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Content: यह छद्म रूप में साधारण प्रश्न है, परंतु देखें यह आपको कितनी गहराई तक ले जाता है!

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Content: जिसे सामान्यतः प्रेम कहते हैं वह हार्मोन की क्रियाशीलता से अधिक कुछ नहीं है । यह लोभ, भय, गुस्सा और ईर्ष्या की खींचा तानी के बीच में काम करता है । इस तरह के प्रेम में जीना जो हार्मोन और मन का खेल है एक नरक के समान है ।

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Content: परंतु हममें से अधिकतर लोग छोटे-छोटे मतलबी प्रेम जिसे हम जीवन भर देते व लेते आए हैं उनके बारे में कल्पना ही नहीं कर पाते । प्रेम के वास्तविक अर्थ को समझने के लिए, पहले हमें मनुष्य के स्वभाव को समझना होगा । मनुष्य कुछ सीमा तक तीन हस्ती वाला है, जो कि बुद्धि, भावना एवं अन्तरात्मा से बना है । सबसे भीतर का केंद्रीय भाग, आत्मन या स्वंय से परे है।

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Content: जब आत्मन की रोशनी बुद्धि को भर देती है, बुद्धि पर ऊर्जा की बरसात होती है-और प्रज्ञा में बदल जाती है।

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Content: जब आत्मन भावना के द्वारा कार्य करता है, भावना शुद्ध होती है और विश्वास के रूप में व्यक्त होता है । और जब आत्मन स्व का स्पर्श करता है, तो अन्तरात्मा प्रेम के रूप में खिलती है । अंततः चेतना के चरम रूप में खिलने को प्रेम कहते हैं । यहाँ हमारे पास मौजूद अंतिम संभावना है ।

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Content: प्र. क्या हम सभी एक ही तरह से प्रेम करते हैं, या प्रेम के अलग प्रकार हैं? प्रेम केवल एक ही होता है, परंतु उसके अभिव्यक्ति विभिन्न लोगों में भिन्न-भिन्न प्रकार से होती है। बौद्धिक प्रेम दिमाग द्वारा व्यक्त किया जाता है। दिमाग से इसका नजदीकी संबंध होने के कारण, यह प्रेम सबसे अधिक भ्रष्ट है। बौद्धिक प्रेम का अनुभव सौदे के रूप में करते हैं, कुछ सीमा तक ठेके जैसा। यह सख्ती से लेने-देने में विश्वास रखता है। इसका रबैय्या हिसाबी है "मेरे लिए इसमें क्या है ?" इस तरह के प्रेम का परिणाम हमेशा चाहत, अधिकार की भावना, ईर्ष्या और हिंसा होता है। इस तरह का प्रेम न ही देने वाले, नही लेने वाले को बदलता है। भावनात्मक प्रेम हृदय द्वारा व्यक्त होता है, और वह और अधिक शुद्ध अभिव्यक्ति है प्रेम की। यहां बल सौदेबाजी पर नहीं संपर्क पर है। यह प्रेम विश्वास करता है और अधिक चाहत के बिना ही देता है। इस प्रेम में जो भी परेशानियां पैदा होतीं वह प्रेम द्वारा ही सुलझा लिया जाता है। इस प्रकार के प्रेम में देने वाले को बहुत ज्यादा बदल देती है। जब प्रेम की अभिव्यक्ति अन्तात्मा से होती है, तो देने और लेने का सवाल ही नहीं उठता; तब केवल प्रेम को फैलाना होता है। यह प्रेम अपने साथ किसी तरह के दर्द या परेशानी को नहीं लाता, क्योंकि यह दूसरों पर निर्भर नहीं है। इसे तो किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं होती, यह तो केवल एक चमक है, छलकने का अहसास। इस तरह का प्रेम सुन्दर तरीके से दोनों ही पाने वाले और देने वाले को बदल देती है।

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Content: जब प्रेम बुद्धि के मध्य फैलता है तो सही तरह से 'प्यार में पड़ना' कहते हैं! जब यह भावनाओं के मध्य फैलता है, हम उसे 'प्यार में उठना' कह सकते हैं। जब यह अन्तात्मा में फैलता है, तो उसका नतीजा 'प्यार में उड़ना' होता है! एक ही प्रकार का प्यार जो नाम के अनुरूप आपको उड़ने के लिए पंख देता है। प्र. साधारण प्रेम किस तरह से दैवीय प्रेम से अलग है? क्या यह दोनों ही एक ही तलाश की अभिव्यक्तियां हैं? मैं कह सकता हूं कि प्रेम दो तरह के हैं - बांट कर प्रेम और दैवीय प्रेम ! साधारण प्रेम बांटता है, दैवीय प्रेम जोड़ता है। साधारण प्रेम दीवारों का अनुभव करता है, दैवीय प्रेम दीवारों को नहीं पहचानता है। परंतु यहां, यह एक ही तलाश की अभिव्यक्तियां हैं। इन दोनों तरह के प्रेम के प्रकार में अंतर नहीं है, परंतु स्तर में है। जब साधारण प्रेम बुद्धि से अन्तात्मा की ओर जाता है, तब यह दैवीय प्रेम की गुण्वत्ता की ओर जाता है। प्र. परंतु हमारे दैनिक रिश्तों में, क्या हमेशा ही कुछ तत्त्व अधिकार की भावना और ईर्ष्या इत्यादि के नहीं होंगे? नहीं। यदि यह किसी रिश्ते में रहते हैं, तो यह प्यार का रिश्ता बिल्कुल नहीं होता है; यह केवल अहं की तुष्टि करने वाला खेल है जिसमें प्यार का स्वांग रचा जाता है। यदि आप

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Content: प्यार करते हैं तो अधिकार की भावना नहीं रख सकते-और इसका ठीक उलटा केवल सम्पत्ति पर कोई अधिकार कर सकता है अन्तरात्मा को अधिकार में लेने की कोशिश करने की हिम्मत कोई कैसे कर सकता है ? उसका प्रयास भी उर्जा को पदार्थ में बदल देना है। यह उस व्यक्ति के प्रति गहरा अनादर जाहिर करती है। तब आप उस व्यक्ति से अपना रिश्ता कैसे जोड़ सकते हैं या कैसे उम्मीद करें कि वह पुरुष / महिला आपसे रिश्ता जोड़े? इसके कोई मायने नहीं कि वह कितनी अच्छी तरह छिपा है, अन्तरात्मा इस अनादर के रैयों को अनुभव कर लेती है। इसीलिए जिसका रिश्ता अधिकार जताने वाले इंसान से हुआ हो वह जल्द या देर से आजाद होने की कोशिश करेगा। ईर्ष्या तो, बिल्कुल प्रेम के विपरीत है। ईर्ष्या, प्रेम, विश्वास और इमानदारी को दूसरों पर थोपने की कोशिश करती है। यह दूसरों से उन उपहारों को छीनने की कोशिश करती है जो केवल राजी खुशी दिया जा सके। ईर्ष्या और प्रेम एक साथ कैसे रह सकते हैं? अधिकार की भावना और ईर्ष्या दोनों ही मूलतः भय से पैदा होती है। अहंम डरपोक है! वह डरता है कहीं उसकी शक्ति दूसरों के आगे न खो जाए। इसीलिए वह दूसरे को पिंजरे में बंद करना चाहता है। वह वफादारी का करार चाहता है, जिसका नवीनीकरण प्रतिदिन हो। इसका आक्रमण का संपूर्ण दिखावा गहराई बैठ चुके डर पर पर्दा डालने के लिए किया गया केवल एक नाटक है दूसरी तरफ, प्रेम, भय को नहीं जानता। वह इतना पूर्ण विश्वास में होता है कि भय का अनुभव ही नहीं कर सकता। प्रेम प्रश्न नहीं करता, वह वफादारी की मांग भी नहीं करता। वह केवल समर्पण करता है।

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Content: जब दो इंसान सच्चे प्यार में बंधे होते हैं, तो वह एक दूसरे को समर्पण नहीं करते, वह दोनों तो प्यार के सर्वोच्च अनुभव को समर्पित हैं। आपका प्रेम करना ही अपने आप में पूर्ण आश्वासन है। किसी और प्रतिभूति या जमानत की कोई आवश्यकता नहीं है। सच्चाई में, प्यार विश्वास करता है अगर विश्वास का उलंधन हो तो भी। उसे और कोई रास्ता नहीं आता। किसी दूसरी तरह से प्रतिक्रिया करने का अर्थ है दूसरों की खुशियों को बरबाद करना, और जो सच्चा प्यार करता है वह ऐसा कभी भी सहन नहीं कर सकता! प्यार ईर्ष्या और अधिकार की भावना की भाषा नहीं जानता। प्यार के रिश्ते में इनको लाना निश्चित तरीका है प्यार को मार डालने का। सावधान रहें! प्र. बिना अधिकार की भावना के, निष्ठा के लिये बाध्यता जैसी बातों से, क्या रिश्तों का पतन जिसे ‘मुक्त प्रेम’ या ‘यौन मुक्तता’ कहते हैं में नहीं होगा? नहीं। इसके विपरीत, इसका ठीक उलटा होता है। अधिकार की भावना के अस्तित्व का परिणाम भी यौन मुक्तता है। जब प्रेम बुद्धि के द्वारा लिया और दिया जाता है, तो उसका परिणाम गहरा असंतोष होता है। चाहे आप उसे कितना भी दबाना चाहें, यौन मुक्तता तब तक उभरकर सामने आती रहेगी जब तक लोग बेहतरीन सौदे की तलाश करते रहेंगे। इस तरह का प्रेम कभी भी आध्यात्मिकता या केवल सुंदरता की ओर ऊंची उड़ान नहीं भर सकता; इसका परिणाम केवल चतुराई, शोषण और कुंठा में हो सकता है। जब प्रेम भावना द्वारा निर्दिष्ट होता है, तब कोई अपने साथी के साथ ही पूर्णता का

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Content: अहसास अनुभव कर सकता है। अब किसी भी प्रकार के संतोष के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। 'यौन मुक्तता' का मुक्तता गायब, हो जाता है, केवल 'यौन' रहता है। अंततः जब प्रेम अन्तात्मा से निकलता है, तो 'यौन शब्द' स्वतः ही गायब हो जाता है। तब कोई अपने साथी के बिना ही पूर्ण तृप्ति का अनुभव करता है। ऐसी संपूर्ण आत्म-पर्याप्ता होती है कि यौन इच्छा कि पूर्ती की कोई आवश्यकता नही पड़ती। प्र. किस तरह से यौन मुक्तता जैसी संपूर्ण 'शारीरिक' घटना को बुद्धि नियंत्रित करती है? कौन कहता है यौन इच्छा शारीरिक घटना है? यदि प्यार या यौन इच्छा केवल शरीर द्वारा ही व्यक्त होती, तो आप जब चाहते इससे बाहर निकल जाते। यह तो जब मन द्वारा व्यक्त होता है तो समस्या प्रारंभ होती है! देखा जाय तो प्रायः नब्बे प्रतिशत यौन क्रिया मस्तिष्क से संबंधित है। यह सही है! कितने लोग यौन क्रिया की परम अनुभव को प्राप्त कर पाते हैं असली सहभागी से ज्यादा सुन्दर की कल्पना किये बिना ? इसका अर्थ है यौन इच्छा पूरी तरह मानसिक क्रिया है। यदि आप एक मानसिक खेल के बिना ही उत्कर्ष पर पहुंच सकते हैं, स्वयं और अपने साथी के साथ, आप यौन इच्छा से मुक्त हो जाएंगे। प्र. आध्यात्म सीखने वालों के लिए क्या सांसारिक प्रेम त्यागना आवश्यक है ? आपको सांसारिकता त्यागने की आवश्यकता है, प्रेम को नहीं !

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Content: जिसे हम साधारणत: 'सांसारिक प्रेम' कहते हैं वह प्रेम लगाव, अधिकार की भावना, ईष्यां और स्वार्थपरता द्वारा कलंकित है। समझ एवं संवेदना को प्रेम में लाएं। अज्ञानता और अपेक्ष की अशुद्धता को साफ करें। जो बचता है वह सच्चा प्यार है। इस तरह के प्रेम से, आप 'सांसारिक' रिश्तों को पवित्र आध्यात्मिक अभ्यास में बदल सकते हैं। प्र. क्या आप हमें 'प्रेम गणनात्मक है' 'प्रेम मात्रा नहीं है' के विषय में बता रहे थे। जब प्यार गिने-चुने तरीके से दिया जाता है, तो वह साधारण और सीमित मात्रा में व्यक्त होता है, उन सबसे सुरक्षित रहने के लिए उन चुने हुए कुछ लोगों को जो ग्रहणशील हों से बचाने के लिये। इस प्रकार का प्रेम अपने साथ अपेक्षा, दर्द और निराशा को भी लाता है। परंतु प्रेम जब आपके अन्तात्मा का गुण बन जाता है, तो यह सूर्य की किरणों की तरह छटा बिखेरता है, इस बात की चिंता न करते हुए कि कौन इसे ग्रहण कर रहा है या इसका आदान प्रदान कर रहा है। इस तरह के प्रेम से अन्तात्मा के खिलने की अभिव्यक्ति होती है। यह समान रूप से सब में फैलती है, और बिना किसी सवाल के एवं बिना किसी शर्त के सबको स्वीकार करती है।

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Content: प्र. हम साधारणतः कहते हैं कि दैवियता की ओर जाने वाले मार्ग पर अकेले ही चलना पड़ता है। पर क्या यह संभव है कि दो इंसान प्रेम के माध्यम से एक साथ चल सकें ? दैवियता की ओर जाने वाला मार्ग बहुत ही व्यक्तिगत है। कुछ दूरी तक तो, आप एक साथ चल सकते हैं। वह मार्ग को और सुंदर बनाता है जब उसे अपने प्रियजन के साथ बाँटे। परंतु कुछ देर बाद, एक वक्त आएगा जब आप स्वयं समझ जाएंगे कि इस हद के बाद, प्रत्येक व्यक्ति को अकेले ही कदम बढ़ाना पड़ता है। प्रत्येक व्यक्ति अनूठा है, और इसी तरह हर एक का मार्ग भी। जब यह आभास हो जाएगा, एक साथ चलने की आवश्यकता भी स्वेच्छा से छूट जाएगी। अंततः दैवियता की ओर अंतिम उड़ान हमेशा बिल्कुल अकेले ही भरना पड़ता है! प्र. क्या प्रेम का अर्थ है दूसरे व्यक्ति को उसी रूप में स्वीकार करना जैसा वह है, उसकी गलतियों और कमियों के साथ ? यह शब्द, 'दूसरे व्यक्ति को वैसे ही स्वीकार करना जैसा वह है, उसकी सारी गलतियों के साथ ...... ' एक तरह का दोषरोपण करती है, है की नहीं? 'दूसरे व्यक्ति का स्वागत करना जैसा वह आपके सामने है' प्रेम के और करीब होगा! संपूर्ण अस्तित्व आपको ईश्वर का उपहार है। अनुकम्पा और विनम्रता के साथ उसे स्वीकार करें।

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Content: प्र. क्या प्रेम अहं की तुष्टि करने वाला भी हो सकता है ? हां- जब वह बुद्धि से पैदा होता है। वास्तव में, अधिकतर लोग किसी रिश्ते में या तो शोषण करते हैं या उनका शोषण होता है। आजकल हम जिसे प्रेम और नफरत का रिश्ता कहते हैं उसका संपूर्ण आधार अहं है। अधिकतर 'प्रेम' के रिश्ते इस राह पर चलकर खत्म हो जाते हैं क्योंकि आपका साथी एक सीमा के बाद आपके अहं की मांग को पूरा करने से अस्वीकार करता है (या असमर्थ होता है)। प्रेम में डूबे रहने का दावा करने वाले लोगों के आहत अहं की शिकायत आप सुनते हैं: 'वह कभी नहीं सुनती!', 'वह मेरा सम्मान नहीं करता', 'वह मेरी आवश्यकताओं को नहीं समझती', वगैरह, वगैरह। यह और कुछ नहीं बल्कि चोट खाए अहं की सिसकियां हैं। याद रखे, अहं संघर्ष पर फलता-फूलता है। संघर्ष अलगाव की भावना का प्रारंभ करता है, 'मैं और तुम की भावना जगाता है' जिसमें अहं अपने आपको बलशाली महसूस करे। जब आपको नया नया प्यार होता है तो आप स्वंह ही सुंदरता के अनुभव के आगे समर्पण करने को तैयार हो जाते हैं। अहं को जबदरस्ती किया जाता है कि वह सक्रिय सहयोग न कर सके। परंतु जब प्रेम बुद्धि द्वारा आता है, वह अधिक देर तक इस 'ऊंचाई' को संभार नहीं सकता। जितनी जल्दी रिश्ता परिचित हो जाता है, अहं वार करता है, संघर्ष की स्थितियों को बनाता हुआ जो उसके जीवित रहने के लिए आवश्यक है। प्यार और नफरत भरा रिश्ता केवल हुमानी लगावों तक ही सीमित नहीं है।

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Content: अभिभावक और संतानों में स्थायी अहंम का युद्ध चलता रहता है, अभिभावक अपने बच्चों के द्वारा अपना दूसरा जीवन जीना चाहते हैं, और बच्चे का अह्म् उसकी अपनी स्वतंत्रता पर हुए आरोपण के खिलाफ विरोध करता है। यदि आप अपने रिश्ते में इन लक्षणों को पहचानने लगें, तो वक्त आ गया है आप समझ जाएं कि जो आप अनुभव कर रहे हैं वह प्यार नहीं है। जैसा कि वह कहते हैं, सच्चे प्यार में कुछ विपरीत नहीं होता। जो कुछ भी हो, वह नफरत में नहीं बदल सकता। वास्तव में जो आप तलाश रहे हैं वह है स्वयं का बेहतर अनुभव, जो दूसरे व्यक्ति की उपस्थिति, अस्थायी रूप से पूरा कर रही है। सावधान हों! प्र. मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं जिस प्यार का अनुभव कर रहा हूँ वह सच्चा प्रेम है कि नहीं? प्रेम हमेशा सत्य होता है, भ्रम कभी नहीं। देखना होता है कि क्या गलत भावना को आपने प्रेम समझ लिया है! प्यार वह है किसी को कुछ भी नष्ट नहीं कर सकता – विशेषकर वास्तविकता से! यदि मधुमास के खत्म होते ही वह खिड़की से उड़ जाए, वह प्यार नहीं है। यदि प्यार इसलिए कम हो जाता है क्योंकि आपके साथी का वजन बढ़ गया है या उसे जयंती याद न रहा हो, तो वह प्यार नहीं है। अगर विश्वास हमेशा बना रहता है, जब साथी विश्वास के लायक न हो तब भी—वह प्यार हो सकता है। आपको कैसे पता चलेगा कि किसी के लिए आप जो महसूस करते हैं वह सच्चा प्यार है? इसका परीक्षण करें।

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Content: क्या केवल उस व्यक्ति की उपस्थिति से आप खुशी से भर उठते हैं, शांति के साथ, क्या आपको स्वयं में और ज्यादा केन्द्रित महसूस कराता है ? क्या आप दोनों खामोशी के साथ एक साथ बैठना पसंद करते हैं, विचारों के आदान-प्रदान का अनुभव करते हुए जो शब्दों से परे हो? जो भी हो, आपको कभी भी उस व्यक्ति को खोने का डर न सताए ? क्या चुनौती एवं चिंताओं ने आपके प्यार को और अधिक निखरने में मदद की है? क्या उस व्यक्ति को प्यार करने का ख्याल आपको स्वाभाविकः ही आता है- जैसे कि और कोई रास्ता न हो ? यह प्यार का सत्य है। वास्तव में, प्यार इस डर को जानता ही नहीं है कि हो सकता है सब कुछ भ्रम हो। तो जब आप प्यार करें, तो ऐसे करें जैसे कि वही एकमात्र सत्य है और अगर कभी ऐसा पल आए जब आपको लगे कि यह सब भ्रम है, इसका साधारण सा मतलब होता है कि प्यार खत्म हो चुका है और अब वक्त आ गया है कि आप आगे बढ़ जाएं। प्र. यदि रिश्ते में कोई अनबन हो, तो कोशिश करते रहना चाहिए या आगे बढ़ जाना चाहिए? अच्छा सवाल है। प्यार सबसे खतरनाक मार्ग है।

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Content: जिन लोगों में बहुत हिम्मत होती है वही उस राह पर चलते हैं। इस राह में किसी भी मोड़ पर आपको, बहुत सी खुशी, बहुत सा दर्द, अत्यधिक सुंदरता, बहुत ज्यादा संघर्ष और अत्यधिक समझ के लिए तैयार रहना पड़ेगा। हाँ, हर रिश्ते में संघर्ष होना अवश्यमभावी है, क्योंकि हर व्यक्ति अपने आप में अनूठा होता है, और कोई भी दो व्यक्तित्व ऐसे नहीं होते जिनका सामंजस्य इतनी अच्छी तरह बैठे कि उसमें कोई दरार न रह जाए। यदि झगड़ा होता है, तो उसे इस डर से दबा न दें कि कहीं रिश्ता ही न खत्म हो जाए। इसके विपरीत, इसे अनदेखा करना भी ऐसा ही होगा। झगड़े को होने दें। उसका परीक्षण करें। देखें कि आप उससे क्या सीख सकते हैं। क्या वह आपके अंदर कुछ पनपने से हो रहा है क्योंकि आप गुप्त रूप से कुछ स्वीकार करने को राजी नहीं हैं? किसी बहुत घनिष्ठ रिश्ते में ही आप स्वयं को आविष्कार कर सकते हैं। आपका साथी एक परत की तरह है जो आपके स्वाभाविक स्वभाव को प्रतिबिम्बित करता है। किसमें इतनी हिम्मत होगी कि आपके बदतर दोषों की ओर इतनी स्पष्टता के साथ इशारा कर सके! तो अपने झगड़े की प्रकृति का परीक्षण करें। याद रखें हर रिश्ते में एक वक्त होता है साथ रहने का और एक वक्त होता है आगे बढ़ने का। आप किस तरह का प्यार बांंटना चाहेंगे ? क्या आप वास्तव में, सच में, निश्चित रूप से प्यार करते हैं ? क्या आप लोग दोनों एक दूसरे से गहराई से सम्बद्ध हैं, अन्तरात्मा से अन्तरात्मा ?

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Content: कारण और बहस न खोजें, इस प्रक्रिया को बौद्धिकता का जामा न पहनाएं- बस प्रश्नों को अन्दर की ओर मोड़ें संपूर्ण ईमानदारी और सच्चाई के साथ। उत्तर अपने आप निकल आएगा। यदि आपका जवाब हाँ है, तो समझ जाएं कि झगड़े का विषय रिश्ते में उठे महज बुलबुले हैं। यह अहम् द्वारा बनाई गई स्थितियां हैं निस्वार्थ भावना के, समर्पण के अहसास जो प्रेम से आती है का विरोध करती है। प्रेम एवं लगाव के साथ भी, धीरे-धीरे इन स्थितियों से अवगत हों। जो जवाब आप सुन रहे हैं वह अगर न हो, तब हो सकता है आगे बढ़ने का समय आ गया है। किसी ऐसे रिश्ते में जहां अन्तरात्मा से अन्तरात्मा के रिश्ते की सच्चाई न हो धार्मिक दुरोपयोग है, आप दोनों के लिए अनुचित। प्यार, आपके लिए, कहीं और भी हो सकता है। उसकी तलाश न करें; संभावना के लिए बस खुले रहें। इसी बीच, झगड़े को रिश्ता खत्म करने न दें, आप दोनों को बरबाद करने न दें। कोई भी इसके योग्य नहीं है। स्वीकार करें कि वह व्यक्ति आपके लिए नहीं था बिना किसी रोष व कटुता के आगे बढ़ जाएं। प्यार करने की अपनी क्षमता को नष्ट न करें। अपने में कटुता आने पर स्वयं ही अधिक कष्ट पाएंगे, और प्यार में आपकी आस्था को नष्ट करेंगे और यह किसी के साथ घटन वाली सबसे खतरनाक बात है।

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Content: प्र. हमेशा ही प्रेम और दर्द एक साथ क्यों चलते हैं? यह सारे प्रश्न एक ही दिशा की ओर इशारा करते हैं। जब वहाँ पर गणना है, प्रेम का परिणाम दर्द होना ही है। हम जो नहीं समझते हैं वह यह है कि हम दूसरे व्यक्ति की ओर मुड़ते हैं किसी कमी को पूरा करने के लिए, कुछ अधूरेपन जो हम अपने आप में अनुभव करते हैं। जब तक दूसरा व्यक्ति हमारे अहम को सहारा देकर हमें संपूर्ण बनाता है, रिश्ता प्यार का होता है। परंतु एक वक्त आता है जब दूसरा व्यक्ति हमारे अहम की ओर देखभाल नहीं कर सकता, न ही उसका बोझ सहन कर सकता है। जब अहम दूसरे व्यक्ति के सहारे से वंचित होता है, तब कमी, असुरक्षा एवं डर की दबी हुई भावनाएँ पुनः अप्रतिबंधित हो जाती हैं। स्पष्ट हों: रिश्ते दर्द का कारण नहीं बनते, वह तो दबे हुए दर्द को बाहर लाता है जो आपमें पहले से ही है। जब तक आप अपने को संपूर्ण बनाने और आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए बाहरी स्रोतों की ओर देखेंगे, ऐसा होता ही रहेगा। अपने आप में संपूर्ण बनने की कोशिश करें, अपने आप में केंद्रित हों। इस पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें कि आप रिश्ते को क्या दे सकते हैं, बजाए इसके कि आप इससे क्या ले सकते हैं। प्यार का पहला पाठ है, प्यार न मांगना। इस तरह से या उस तरह से, हम

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Content: सभी ध्यान की भूख मांग रहे हैं, प्यार की भूख मांग रहे हैं। जब आप स्वयं ही प्यार के भिखारी हैं, तब आप दूसरों को प्यार कैसे दे सकते हैं? चिंता न करें कि आपका प्यार लौटाया जा रहा है या नहीं। प्यार सौदा नहीं है, यह एक उपहार है। जब प्रेम किसी के अन्तःत्मा से निकलता है, तो वह 'सही व्यक्ति' या सही स्थान या सही समय के लिए नहीं रुकता। वह इसकी भी परवाह नहीं करता कि प्रेम के बदले में प्रेम मिल रहा है या नहीं। आप प्रेम से इतने भरे होते हैं कि उस अनुभव को बांटने की बाध्यता को महसूस करते हैं, जैसे कि बादल की आवश्यकता है बारिश को बांटना, या फूल का अपनी सुगंध को बांटना। इस तरह का प्रेम दोनों पर आशीर्वाद बरसाती है, देने वाले पर और लेने वाले पर। जब दोनों साथी प्रेम 'मांगने' की धुवता से प्रेम 'देने' की धुवता की ओर बढ़ेंगे, तब आप दर्द से परे जा सकते हैं। प्र. क्या गुरु के साथ प्रेम में पड़ना भी 'गिरना' है? हां और नहीं। साधारण 'प्रेम में पड़ना' रूप का लगाव है। गुरु के साथ, यह मात्र एक प्राथमिक कदम है रूप से परे जाने की ओर। सामान्यतः जब आप प्यार में पड़ते हैं, आप कई तरीकों से गिरते हैं - क्योंकि अधिकार की भावना, ईर्ष्या, आधिपत्य, गुस्सा जरूर इसका पीछा करेंगे। प्रेमी एक दूसरे के साथ

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Content: लुका-छिपी का छोटा सा खेल खेलते हैं। यद्यपि हर किसी को अपने आपको संपूर्ण महसूस करने के लिए दूसरे की आवश्यकता पड़ती है, अहं भी अपने पर दूसरे के प्रभुत्व पर नाराज होती है। यह नाराजगी दूसरे पर गुप्त शारीरिक या मानसिक हिंसा के रूप में अपने को व्यक्त करती है।

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Content: गुरु के साथ, भी यही प्रेम और यही डर बना रहता है- लेकिन वहां पर कोई समझौता नहीं है। आपको पूरी तरह से गिरना होगा- दिमाग से समर्पण और हृदय से समर्पण! गुरु संपूर्ण प्रेम देते हैं और पूर्ण समर्पण चाहते हैं। प्रेम और समर्पण दोनों का अर्थ है अहं की निश्चित मौत।

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Content: जब आप गुरु के पास आते हैं, तो धोखा और प्रभुत्व का खेल नहीं खेल सकते जो कि आपके अहं को जिंदा रखने के लिए इतना आवश्यक है। यह आपके अहं की अंतिम मौत।

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Content: परिशिष्ट

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Content: एक योगी का मस्तिष्क क्या सभी जीवन एक ही ब्रह्माण्ड स्रोत से निकलते हैं ? हम सभी जिन तरीकों से जुड़े हैं क्या वह मस्तिष्क की समझ के लिए ज्यादा गहरी है ? क्या वास्तव में मस्तिष्क-शून्यता की अवस्था जैसा कुछ है? स्वामीजी वैज्ञानिकों के उस दल के साथ जिन्होंने उनके विज्ञान को चुनौती देने वाले तांत्रिका विज्ञान तंत्र के अनुभवों को संचालित किया।

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Content: परिशिष्ट मानवता के लिए स्थाई महत्व जैसे विषयों पर शताब्दियों से विज्ञान और आध्यात्मिकता में युद्ध होता आ रहा है। यद्यपि आध्यात्मिक गुरु हमेशा कहते आए हैं कि शून्यता की अवस्था ही 'असली' तथ्य है, और हम सभी के लिए एक अनुभव करने योग्य लक्ष्य है, स्वाभाविक तौर पर वैज्ञानिक समूह इस बात को बिना किसी ठोस सबूत के मानने को तैयार नहीं हैं। पहली बार हमारी शताब्दी में, विज्ञान को आशापूर्ण तरीके से स्वाभाविक से अधिक (सुपरनॉर्मल) और अस्वाभाविक (पैरानॉर्मल) की कुंजी गहन चिकित्सकीय साक्ष्य के साथ मिल गई है, जो यह समझाती है कि आध्यात्मिक रूप से बहुत अधिक विकसित व्यक्ति को क्यों कुछ 'शक्तियाँ' मिलती हैं बाकी सब जिसका सपना ही देख सकते हैं। मार्च २००४ में, इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का जवाब पाने की आशा के लिए, आक्लाहोमा (यू एस ए) के तंत्रिका विज्ञानियों के विशेषज्ञों के दल ने स्वामीजी के विज्ञान को चुनौती देता तंत्रिका विज्ञान तंत्र पर अग्रणी एवं विस्तृत वैज्ञानिक शोध किए। आने वाले पृष्ठों में प्रस्तुत, दल के प्राथमिक शोध विवरण, की गहरी समबद्धता केवल विश्व के चिकित्सकीय बिरादरी के साथ ही नहीं है, परन्तु उन सबके लिए है जो झिझकते हुए भी यहीं प्रश्न पूछते ओ रहे हैं- कौन विश्वास करता है और फिर भी कौन विश्वास नहीं करता है, कौन जानता है और फिर भी नहीं जानता है-पूर्ण मानवता के लिए, इस मार्ग रहित मार्ग जो जीवन है पर साहसिक काम करने वाले साथी के लिए।

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Content: माइंड मैटर्स का कॉलम टीम एक योगी का मस्तिष्क आर. मुरली कृष्ण, एम.डी. अध्यक्ष सीओओ, इंटेग्रिस मेंटल हेल्थ एण्ड जेम्स एल. हॉल, जूनियर सेंटर फॉर माइंड, बॉन्डी एण्ड स्पिरिट का विवरण परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी एक छरहरे, स्वस्थ दिखने वाले युवा पुरुष हैं जिनके बाल कंधे तक लंबे और काले हैं। सुंदर एवं नम्र होने के साथ साथ स्वामीजी खुले तौर तरीकों के स्वामी हैं। उत्सुकता का खजाना लिए हुए वह किसी भी साधारण अमरीकी कॉलेज के छात्र प्रतीत होते हैं। अमरीकी कॉलेज छात्रों और स्वामीजी में यह अंतर है कि छात्र भगवा वस्त्र नहीं पहनते, न ही भगवा पगड़ी बांधते हैं, उन्हें आध्यात्म का आलोक का अनुभव नहीं हुआ है और न ही दुनिया के हर कोने में बसे सैकड़ों लोगों ने छात्रों को शिक्षक, दुखों को हरने वाला और योगी का दर्जा दिया है। एक योगी? स्वामीजी इसी नाम से जाने जाते हैं और यह बुरा नाम नहीं है उनके लिए। लोकप्रिय संस्कृति बताती है कि योगियों का ईश्वर के साथ सीधा संपर्क होता है। यह समझा जाता है कि न समझ पाने वाले या न नापे जा सकने वाले माध्यमों के द्वारा ही योगियों की पहुंच अंतिम वास्तविकता या सच तक होती है। एक योगी की तस्वीर खींचें, आप देखेंगे कि ऐसे व्यक्ति परम सुख से पूर्ण होते हैं, इनमें उच्च विचार और तह तक पहुंचने की योग्यता जैसे जन्मजात गुण होते हैं जो कि दूसरे लोगों के पास नहीं होते। समझा जाता है कि योगी की उपस्थिति से दूसरों को शांति का अनुभव होता है और

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Content: वह स्वस्थ रहते हैं। यह दक्षिण भारत के २७ वर्षीय स्वामी का सही वर्णन है। प्रतिवर्ष उनके पास हजारों लोग परंपरागत चिकित्सा पढ़हते से निराश होकर अपने व्याधि एवं रोगों से छुटकारा पाने के लिए आते हैं। स्वामीजी की पृष्ठभूमि भी उनको एक योगी का आभास देती है। उन्होंने अपना घर तरुण अवस्था में छोड़ा, उन्होंने संपूर्ण भारत में आश्रमों का दौरा किया, अपने को दर्शन शास्त्र में विलीन किया, विदेश से पढ़े और ध्यान की कला को पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया। हाल ही में स्वामीजी जब अपनी विश्व यात्रा के दौरान ओकलाहोमा शहर में रुके थे, तो मैने उनसे पूछा कि क्या आधुनिक चिकित्सा की नवीनतम तकनीक के सहारे ध्यान करते वक्त उनके मस्तिष्क की जांच सकता हूं। मेरा लक्ष्य रहस्यमयी परिस्थिति के दौरान जो कुछ भी घट रहा है उसे समझना, नापना व रहस्यों से परदा हटाना था। स्वामी जो यह समझते हैं कि ध्यान का आधार विज्ञान है प्रसन्नता पूर्वक राजी हुए। जिन प्रक्रियाओं से स्वामी गुजरे उसका संचालन ओकलाहोमा शहर के कुछ सबसे अच्छे एवं सबसे अधिक अनुभवी चिकित्सकों, तकनीक विज्ञान मनोवैज्ञा- निक एवं शोधार्ताओं द्वारा किया गया इन चिकित्सकों ने उन पर भी उसी तकनीक का प्रयोग किया जिसका इस्तेमाल दूसरे रोगियों पर नियमित रूप से किया जाता था। जब उन्होंने अपनी तकनीक से निकाले गए चित्रों को देखा तो वे स्वयं ही समझ गए क्या स्वाभाविक है और क्या अस्वाभाविक। स्वामी के परिक्षणों का परिणाम? निश्चित रूप से स्वाभाविक नहीं थे।

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Content: दिमाग के कार्य कलापों का चित्र लेना स्वामी के दिमाग में झांकने का पहला मौका हमें पोजीट्रॉन एमिसनटोमोग्राफी (पी.ई.टी.) की मदद से मिला। परम्परागत निदान सूचक तकनीकें जो शारीरिक बनावट और शरीर रचना के चित्र पेश करती हैं जैसे-एक्स-रे, सीटी स्कैन या एम आर आई से हटकर, पी ई टी मस्तिष्क के क्रिया कलापों का एक चित्र कोषिका के उपापचयी क्रिया के द्वारा प्रस्तुत करती है। शर्करा (ग्लूकोज) की तरह एक द्रव्य को रेडियो एक्टिव पी ई टी ट्रेसर से जोड़ा जाता है। फिर पी ई टी स्कैन परिवर्तनशील सक्रिय मस्तिष्क के क्षेत्रों का चित्र किसी भी निर्धारित समय के अंदर दे देता है। स्वामी के प्रकरण में, औषधि योजनाबद्ध तरीके से सतर्क एवं चेतन अवस्था में मस्तिष्क के उच्च सक्रिय क्षेत्रों को खोजने के लिए दिया गया, ध्यान की प्रारंभिक अवस्था में एवं गहन ध्यान के दौरान। पी ई टी चित्रण परीक्षण (स्कैन टेस्ट) के परिणाम स्तब्ध कर देने वाले थे। शुरुआत में, स्वामी के भेजे का बाहर निकले हुए भाग की क्रिया ध्यान की प्रारंभिक अवस्था में भी अद्भुत रूप से सक्रिय था। सक्रियता का स्तर किसी आम इंसान के दिमाग की तुलना में कई गुना अधिक था। ललाट

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Content: परिशिष्ट के नीचे के बाहर निकले हुए भाग को बुद्धिमता, सतर्कता, ज्ञान एवं विचार शक्ति से जोड़ा जाता है। उसके बाद जब हम लोगों ने स्वामी को गहन ध्यान की अवस्था में जाने के लिए कहा, तो वहां दो और आश्चर्यजनक निष्कर्ष सामने आए। पहले, स्वामी के मस्तिष्क का मुख्य अर्धवृत्त ९०% से अधिक बंद था। ऐसा लग रहा था जैसे स्वामी का दिमाग बोरिया बिस्तर बांधकर छुट्टी पर गया है। यह शांत एवं स्थिर, पूर्ण रूप से शांतिपूर्वक था ............... और यह स्वामी स्वेच्छापूर्वक कर रहे थे। गहन ध्यान के दौरान द्वितीय अदभुत पहलू –मध्यम ललाट की हड्डी के क्षेत्र का निचला हिस्सा आश्चर्यजनक रूप से आलोकित था। यह क्षेत्र प्रसिद्ध स्थान रहस्यपूर्ण ‘तीसरे नेत्र’ से लगभग मिलता-जुलता है। बाद में जब हमने स्वामी से पूछा कि मध्यम ललाटीय क्षेत्र का निचला हिस्सा जब आलोकित हो रहा था तो वह क्या कर रहे थे, उन्होंने कहा कि वह अपना तीसरा नेत्र खोल रहे थे। ब्रह्माण्ड एवं भीतरी ज्ञान दोनों से संबंधित और स्पष्टता व शांति का स्थान समझे जाने वाले तीसरे नेत्र को आत्मा का स्थल माना जाता है। क्या हमें संकेत मिल रहे थे कि गहन ध्यान मस्तिष्क के उस क्षेत्र को खोल सकता है जो दैवीय शक्ति के साथ आदान प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है एवं स्वयं अथवा सृष्टि के रहस्यों में गहराई से झांकता है। मुझे विश्वास है कि पी ई टी स्कैन से जिसे मैं मस्तिष्क का ‘डी-स्पॉट’ कहता हूँ

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Content: जाहिर होता है। यदि आप समझते हैं कि ‘डी-स्पॉट’ का डी डिलाइट (प्रसन्नता), डिवाइन (दैवीयता) या डोपामाइन (वह रसायन जिससे हमारा शरीर आनंद का अनुभव करता है) के लिए है, तो प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि ध्यान इन्हें स्फूर्ति प्रदान कर सकता है। मस्तिष्क की लहरों को नापना स्वामी के मस्तिष्क में झांकने के लिए हम लोगों ने जिस दूसरी प्रक्रिया को अपनाया उसे क्रांटिटेटिव इलेक्ट्रोएनसिफेलोग्राफी या क्यू ई ई जी कहते हैं। क्यू ई ई जी मस्तिष्क के इलेक्टिकल पैटर्न्स (बनावट) को नापता है। बनावट जिन्हें आमतौर पर मस्तिष्क की लहरें कहते हैं। मस्तिष्क के लहरों की चार पडिटियां हैं, प्रत्येक की गति अलग है, और हर पडटी मस्तिष्क की विभिन्न अवस्था से संबंधित है। उदाहरण के लिए, बीटा मस्तिष्क की लहरें छोटी और तेज गति की होती है एवं मस्तिष्क के सजग, सर्तक अवस्था से जुड़ी है। अल्फा मस्तिष्क की लहरें धीमी और बड़ी तथा आनंद के अहसास से जुड़ी है। थीटा लहरें सच्चेत अवस्था का प्रतिनिनिधित्व करती हैं जो नींद के नजदीक है; वह अवस्था जिसमें संक्षिप्त विचारों को छोड़कर शांति व सुकून का अहसास हो। एक दिन के अंदर, अधिकतर व्यक्ति मस्तिष्क की चारों प्रकार के लहरों का अनुभव करेंगे। यद्यपि एक पडटी से दूसरे पडटी में बढ़ना, उनके काबू में आसानी से नहीं होगा। यद्यपि स्वामी के क्यू ई ई जी से पता चलता है उनका अपने मस्तिष्क के लहरों पर पूर्ण नियंत्रण है। गहन ध्यान के दौरान, उनका मस्तिष्क एक अवस्था से दूसरी अवस्था में

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Content: आसानी से दौड़ रहा था जैसे कि एक हुनरमंद पियानो बजाने वाले की उंगलियां पियानो पर दौड़ती हैं। इसमें किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं थी, न ही पीछे की ओर मुड़ना, केवल लगातार, तरल का बदलाव एक प्रकार के मस्तिष्क की लहर से दूसरे प्रकार में हो रहा था। लग रहा था कि क्यू ई ई जी में पांचों मस्तिष्क के लहरों की पडिटियां रंगीन हो गई हैं, जैसे कि स्वामी इंद्रधनुष में तैर रहे थे! निष्कर्ष मस्तिष्क शरीर का सबसे जटिल अंग है, उसमें १०० अरब से अधिक न्यूरॉन्स होते हैं, प्रत्येक न्यूरॉन रसायनिक एवं वैद्युतिक संयोज से १०,००० अन्य न्यूरॉन पैदा करता है। इसकवी सूचना को विधिवत् संचारित करने की शुद्ध क्षमता चकित कर देने वाला है। प्रशंसनीय बात यह है कि जटिलता के कारण स्वामी को अपने मस्तिष्क की क्रियाओं को व्यवस्थित करने में अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। स्वामी का मस्तिष्क—उनके विचार, भावनाएं, तर्क करने की शक्ति—उनके दिमाग को नियंत्रित करती है। वह द्रव्य की भांति अस्थिर और आसान तरीके से, मस्तिष्क के कायों को बदल सकती है और मस्तिष्क की लहरों में परिवर्तन कर सकती है। योगी के मस्तिष्क की जो यात्रा हमने की थी उससे जवाबों का हल निकलने के स्थान पर शोध के लिए रहस्यमय प्रश्न सामने आने लगे। लोगों के जीवन में संतुलन एवं शांति लाने के लिए क्या हमारे पास कोई तकनीक है जिससे हम सीख और पढ़ा सकते हैं?

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Content: क्या हम आरोग्य होने की दिशा में आह्वान कर सकते हैं या विशेष प्रशिक्षण द्वारा निरामयता की चाल को तेज कर सकते हैं? क्या हम ऐसी तकनीकें सीख सकते हैं जो कि दर्द को नियंत्रण में रखने की अनुमति दे या व्याधि के मार्ग को बदल सके? जिसे मैं "डी-स्पॉट" कहता हूं क्या हम उसे कायान्वित करना सीख सकते हैं, जिससे लगातार हमारा संपर्क प्रसन्नता या दैवीयता से बना रहे? स्वामी पर हुए हमारे शोध के परिणाम मस्तिष्क के शोध पर विश्व की पुस्तकों में नए पृष्ठ हैं। मानव मस्तिष्क मानव शरीर के घावों को भरने के लिए उसका चुनाव करता है इस बात के लगातार संकेत मिलते रहे हैं। अब हम उस संभावना की ओर देख रहे हैं जो लोगों को निरामय रखने की क्षमता सिखाती है और हासिल कराती है, यह मानवता के लिए वृहद लाभ की घटना होगी। गति को बदलने की संभावना और कई रोगों जैसे- हृदय रोग, कैंसर, गठिया, शराब के अधिक सेवन से होने वाली व्याधियों की बढ़त को रोकना संभव लगने लगा है। स्वामी सेतु हैं अदृश्य, रहस्यवादी पुरातन दुनिया एवं आधुनिक विज्ञान और अविश्वास के प्रत्यक्ष दुनिया के बीच में जैसे-जैसे मस्तिष्क का शोध विस्तृत आधार पर बढ़ता जा रहा है और जैसे ही हम आगे के शोध के लिए रहस्यमय तथ्यों को विज्ञान के क्षेत्र के तहत लाएंगे, हम आशा एवं स्वास्थ्य के मार्ग में लंबे कदम भरते नजर आएंगे।

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Content: परम सुख का स्थान आश्रम ध्यानपीठम के सारे कार्य-कलापों का केंद्र बिदादी का आश्रम है, बंगलुर शहर से ३५ किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। बंगलुर भारत की सॉफ्टवेयर राजधानी और एशिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर है। प्रथम धारणा भीड़ भरे बंगलौर-मैसूर हाइवे पर, बिदादी शहर के लगभग दो कि.मी. बाद ध्यानपीठम का साइनबोर्ड बायीं ओर इशारा करता है आश्रम की ओर जाते हुए पत्तों से भरे टेड़े-मेढ़े मार्ग की ओर। नीचे पहाड़ियों में छिपा हुआ यह १६ एकड़ जमीन पर फैला है, आश्रम स्वामीजी की आधुनिक सुविधाओं के साथ पारम्परिक सद्भावना की दृष्टि को जीवंत बना रही है। सामान्य परन्तु कार्य योग्य इमारतें परिदृश्य में इधर- उधर बिखरी पड़ी हैं। यह सोचना बहुत मुश्किल है कि यही शांत मनुष्यों का संगठित संघ ध्यानपीठम का मुख्यालय है जहां से तीन महादेशों में फैली दक्षिणामूर्ति की मूर्ति अन्तर्राष्ट्रीय गतिविधियां संचालित होती हैं।

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Content: पवित्र बरगद का पेड़ एवं प्रभु

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Content: मार्ग में स्थित बांटने के निशान से (एक रास्ता जाता है) प्रशासनिक एवं निवास स्थान की ओर, और दूसरा जाता है पवित्र बरगद के पेड़ की ओर), पर्यटक इस प्रसिद्ध लॉफ़िंग टेम्पल के ग्राम्य रूपरेखा की खोज कर सकते हैं, जहां पर स्वामीजी अंतरंग साक्षात्कार देते हैं व आश्रमवासियों के लिए कक्षाएं लेते हैं। इस क्षेत्र में आश्रमवासियों व रोगियों के आवास की व्यवस्था है, एक किचन कम डाइनिंग हॉल (रसोई के साथ खाने का कमरा), आउटडोर डाइनिंग स्पेसेस (बाहर खाना खाने के स्थान), आश्रम ऑफ़िस (आश्रम का कार्यालय) व आनंद गंधा (स्वामीजी का साधारण कुटीर) है। उस मार्ग पर थोड़ी दूर चलने पर, बांस के झाड़ एवं हरे खेतों के बाद ही पर्यटकों को 300 साल पुराने पवित्र बरगद के पेड़ के दर्शन होते हैं। पवित्र बरगद प्रभू दक्षिणामूर्ति की मूर्ति के ऊपर छतरी की भांति फैलकर उन्हें छाया प्रदान करता है, जिन्हें आदि गुरु (सबसे पहला गुरु) कहा जाता है। प्रभू दक्षिणामूर्ति स्वामीजी के सामने प्रकट हुए और तब से आश्रम पथ प्रदर्शक के रूप में पूजे जाते हैं, पवित्र बरगद के पेड़ निरामय ऊर्जा से गुंजायमान एक स्थान को घेरता कुछ मिनट इस पेड़ के नीचे बिताने से तुरंत ही कोशिकाओं को आराम पहुचता है और आत्मा क्रियाशील बनती है। बरगद के पेड़ के रास्ते पर ही आनंद सभा, सामूहिक सभा के इस्तेमाल के लिए ध्यान का बड़ा कमरा। आरोग्य करने वाले यहां मिलते हैं और उच्च स्तरीय ध्यान के पाट्यक्रम होते हैं, जिससे कि प्रतिभागियों

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Content: आश्रम के जीवन का एक दिन

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Content: को आश्रम के जीवन का अनुभव हो। पास ही में आनंद गैलिरिया है जहां आश्रम साहित्य की पुस्तकें, ऑडियो एवं वीडियो व ध्यान के दौरान प्रयोग की जाने वाली वस्तुएं मिलती हैं। परिशिष्ट

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Content: आज की तारीख़ में, स्वामीजी की उपस्थिति में आश्रम में आठ से अस्सी की उम्र वाले पचास से अधिक आश्रमवासी रहते व सीखते हैं। आश्रमवासियों के लिए दिन सूर्योदय से पहले शुरू होता है, पवित्र बरगद के पेड़ के नीचे प्रभू दक्षिणामूर्ति की गुरु पूजा की जाती है। इसके बाद तुरन्त ही ध्यान का सत्र होता है, उसके बाद आश्रमवासी अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में लग जाते हैं।

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Content: एक एस पी प्रतिभागी आनंद दर्शन ग्रहण करते हुए जब स्वामीजी आश्रम में होते हैं, वह दो घंटे हर सुबह दर्शन एवं आरोग्य करने के लिए उपलब्ध होते हैं अन्यथा, निरामयता उन आश्रमवासियों द्वारा किया जाता है जिन्होंने आनंद सभा में प्रतिदिन की आनंद हीलर्स की शुरुआत की। आस-पास निरामयता के गांव के जरुरतमंद एवं बीमार लोग एवं शहर के लोग प्रतिदिन आश्रम में मदद एवंसुविधा के लिए आते हैं। एक सामूहिक कार्यक्रम प्रगति पर

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Content: साधारण सात्विक भोजन (शाकाहारी भोजन जो आध्यात्मिक अभ्यास के दौरान शरीर को सहारा देता है) दिन में तीन बार आश्रम के दोस्ताना खाने के कमरे में परोसा

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Content: जाता है, जहां पर स्वामीजी के प्रवचन एवं कीर्तन (दैवीय संगीत) पूरे दिन बजते रहते हैं। सांझ को, आनंद सभा में भगवान नटराज (शिव का नृत्य करता हुआ रुप) का साधारण परंतु आकर्षक आरती होती है। इसके तुरंत बाद स्वामीजी का टेप किया हुआ प्रवचन, ध्यान का सत्र एवं भजन का गायन (दैवीय गायन) होता है। कभी-कभी दिन का अंत स्वामीजी के मनपसंद कीर्तन के साथ एक घंटे के नृत्य द्वारा होता है। ध्यानपीठम् : आज और कल भारत में ध्यानपीठम् के कार्य-कलापों में प्रतिदिन निरामय करना, मुफ्त निरामय शिविर, सप्ताह के अंत में होने वाली कार्यशाला एएसपी (आनंद स्पूरणा कार्यक्रम) जो ध्यान द्वारा चक्र को स्वस्थ रखता है, ध्यान सत्संग (शहरी एवं ग्रामीण समुदाय के लिए सामूहिक ध्यान कार्यक्रम), ज्ञान दान (स्कूल एवं कालेजों में युवाओं के लिए लगे ध्यान के शिविर) एवं उद्योगपतियों के लिए उत्साहदकता तथा तनाव को दूर करने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। ध्यानपीठम् के विदेशों के केंद्र ध्यान तथा आनंदपूर्ण जीवन के संदेश को तेजी से फैला रहे हैं, जीवन परम सुख पाठ्यक्रम (एएसपी से भिन्न) का आचायों द्वारा संचालन किया जाता है जिनको स्वयं स्वामीजी ने प्रशिक्षण दिया है। कई प्रोत्साहक परियोजनाएं प्रारम्भ होने वाली हैं, जिसमें युवाओं के लिए न्यू एज गुरुकुल (शिक्षा का स्थान), एक नया ध्यान का कमरा जहां से कमल के फूलों से भरे प्राकृतिक तालाब को ऊपर से अच्छी तरह देखा जा सके, आस-पास के गांवों के लिए चलता फिरता चिकित्सकीय सेवा एवं बिदादी में संपूर्ण और कई तरह की विशेषता ध्यान से युक्त नि:शुल्क चिकित्सालय शामिल हैं।

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Content: ध्यानपीठम् के मील के पत्थर रंभ होने के दो साल के भीतर ही, ध्यानपीठम् एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था में बदल चूका है जिसके कार्य-कलाप तीन महाद्वीपों में फैल चुके हैं। यह चमत्कार आज समुदाय को आश्चर्यजनक सकारात्मक अंशदान करते हुए किया गया है। ध्यानपीठम् जीवंत और आनंददायक कल के लिए मानवता को जगाने की दृष्टि का सावधानी से पोषण कर रहा है। एक नजर हमारे कुछ महत्वपूर्ण मील के पत्थरों पर : ● ११० से अधिक आनंद स्पुरन कार्यक्रम या ए एस पीस (ध्यान और आura चक्र और निरामयता पर कार्यशाला) व्यक्तिगत रूप से स्वामीजी द्वारा संचालित। ● सैकड़ों ने नित्यानंद आनंद कार्यक्रम के उन्नत स्तर में भाग लिया, और नये नाम दिये गये जो उन्हें आध्यात्मिक मार्ग दिखाती है। ● बंगलूर के आश्रम में ५० आश्रमवासी रहते हैं और शिक्षा ग्रहण करते हैं। इनमें से सात पुरुष और चार स्त्रियां संन्यास में दीक्षित हो चुके हैं। ● आनंद हीलिंग के द्वारा माइग्रेन से कैंसर जैसे हजारों कष्ट पाने वाले रोगी ठीक हो गए हैं। आज की तारीख में ७५,००० से अधिक लोगों ने स्वामीजी से सीधा हीलिंग टच (ठीक होने वाला स्पर्श) पाया है।

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Content: विश्व भर में ३०० के एवं निरामयता के केंद्र हैं, और ७०० आनंद हीलर काम कर रहे हैं, जिनमें १०० ऐलोपैथी डॉक्टर शामिल हैं।

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Content: ज्ञान दान योजना के तहत ८२ हजार छात्र व युवा वयस्क ध्यान के लिए आ चुके हैं।

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Content: ७० से अधिक ध्यान सत्त्संग (सामूहिक ध्यान कार्यक्रम) एवं स्वामीजी द्वारा व्यक्तिगत रूप से संचालित १०० मुफ्त व्याख्यान जिसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया।

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Content: आज की तारीख में १००० से अधिक घरों एवं कार्यालयों में स्वामीजी ने श्रमण किया, ऊर्जा बनाया और आशीर्वाद दिया।

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Content: ३० से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन चार भाषाओं में हुआ। आज की तारीख में १०० ऑडियो टेप, ऑडियो एवं वीडियो सीडी निकली है।

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Content: सैकड़ों आनंद सेवक आश्रमवासियों के साथ मिलकर अपने क्षेत्रों में सत्त्संग एवं पाठयक्रों की व्यवस्था करते हैं, निरामय एवं ध्यान केंद्र चलाते हैं और मुफ्त निरामय शिविरों का संचालन करते हैं।

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Content: हमारे प्रकाशन

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Content: अंग्रेजी में नाम

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Content: द फॉर्मलेस इन फॉर्म

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Content: स्वामीजी के चित्रों द्वारा प्रदर्शित जीवनी

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Content: द गॉसिप ऑफ नित्यानंद

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Content: स्वामीजी के सबसे स्मरणीय कथनों का संग्रह

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Content: अ स्मॉल स्टोरी

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Content: स्वामीजी की सबसे अधिक पसंद की गई नीति कथाएं

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Content: फ्रॉम पेन टू ब्लिस

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Content: स्वामीजी की गहरी पहुंच से

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Content: फ्रॉम वेरिंग टू वंडरिंग

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Content: स्वामीजी की गहरी पहुंच से

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Content: क्वेश्चेन + स्वामीजी = आंसर!

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Content: आपके प्रश्नों का उत्तर

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Content: द सिम्पल ट्रुथ, स्ट्रेटअवे!

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Content: स्वामीजी द्वारा एक सार्वजनिक सम्बोधन

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Content: इज स्पिरिचूअलिटी रेलिवेंट इन आवर टाइम प्रेस से स्पष्ट वार्ता ओम मति पदयम हम गुरु के निकट आने के २७ तरीके डिस्कवरिंग लव स्वामीजी की गहरी पहुँच से आनन्द हीलिंग : योर शार्टकट टू गॉड निरामय नौसीखिए के लिए परिचय अ गारलैंड ऑफ मेमोरीज भक्तों का स्वामीजी के साथ बिताए हुए वक्त की स्मृतियाँ ओपन द डोर ........ लेट दी ब्रीज इन आनन्ददायक जीवन के उपकरण अनकॉमन् आनर्स फू कॉमन कशचेन स्वामीजी द्वारा दिए गये व्याखानों का संकलन मेडिटेशन इन फॉर यू ध्यान के विज्ञान और कला का परिचय

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Content: स्वामीजी ऐज वी नो हिम गुरु की उपस्थिति में न भूलने वाले पल आई हू आई जीवन, ध्यान एवं परमसुख पर यू एस ए में हुए सम्बोधन इन्टैडेड इन्स्पीरेशन आज की पीढ़ी के लिए व्यावहारिक ज्ञान फ्रॉम पीक टू पीक स्वामीजी के साथ हिमालय की आकर्षक यात्रा तमिल में नाम नित्यानंद : ओरु अरिमुगम स्वामीजी का परिचय कशवाई थीरा ......... काटरू वाराट्टम आनन्द दायक जीवन के उपकरण नानातितम थीरावूकल ज्ञान से अनुभव के परिवर्तन को बनाते रहना येन पडा पूजाई अपने घर में दैवीयता का अनुभव करें

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Content: पडा पूजाइन महात्वम्अपने घर को ऊर्जा क्षेत्र में बदलेंमानम् कडानडा निलाईतन्त्रिका विज्ञान तंत्र को चुनौती देता स्वामीजी के विज्ञान पर अमेरिकी डॉक्टरों का शोध विवरणतंत्र ध्यानम्एग्यारह मिनट की आसानी से अभ्यास करने वाली ध्यान की तकनीकेंपरमहंसारिन ग्रान मोजिकालस्वामीजी के सबसे लोकप्रिय कथनकात्रिन सूबादुस्कलकविता के रूप में स्वामीजी द्वारा कही गई बातों का संग्रहमानादाई थीरा ............ मागालची पोंगाद्रमआपके दैनिक जीवन में चक्र विज्ञान का उपयोगऊडिरुम सारागुगलस्वामीजी की वार्ता का संकलनएमीयथियिन मुजाक्कमसामूहिक ध्यान शिविर (सत्संग) में अपने विचार प्रकट करते हुए स्वामीजी

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Content: परिशिष्टसागुम कालाईउन्नत-स्तर की ध्यान की तकनीकेंउडल-ग्रानातिन थीयरऊर्जा के तीनों स्तरों को ऊर्जावान बनाने के लिए ध्यान की तकनीकेंपडिप्पु-थडाईकरकाले पडिकरकल आसकूनगतनशिक्षा संबंधी प्रदर्शन एवं सफलता को बढ़ाने के लिए प्रभावशाली कुंजीध्यानम्घ्यान की कला और विज्ञान का परिचयहिलाइनज्नारकाले युवाओं से बातें करते स्वामीजीअनुविनामुम परमहंसारुदनस्वामीजी के शिष्य अपने जीवन में हुए बदलाव के अनुभवों को बांटते हुएवाजविन रहस्यागलपरम्परा के पीछे विज्ञानस्वर्गम उनाब्कूलेइत्याग करें और उदारवादी बनें

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Content: कन्नड़ में नाम जीवन गंगाः दुक्खविन्दा ........ आनन्दाक्के दुख से परम सुख की ओर जाना चिंतेपिहां ........ आरामाक्के अपने जीवन से 'चिंता' शब्द हटा दें! बागीलू थेरे ........ थांगाली ओलागे बीसाली! आनंद दायक जीवन के उपकरण ध्यानपीठम् से भी उपलब्ध ऑडियो कैसेट्स, ऑडियो एण्ड वीडियो सीडी

  • स्वामीजी टॉक्स
  • मंत्रास (होलिंग चैन्ट्स)
  • म्यूजिक ध्यान व दैनिक प्रयोग के लिए ऊर्जावान वस्तु एवं सहायक उपकरण
  • लाल चंदन लकड़ी की मालाएं (रोसरीज-जप की माला)
  • स्वामीजी पेंडेंट (हार)

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Content: परिशिष्ट

  • रुद्राक्ष पेंडेंट (पवित्र मनका)
  • कंगन एवं बाली
  • विभूति (पवित्र राख)
  • कुमकुम (सिंदूर)
  • टी शर्ट, साड़ी एवं शालें
  • तस्वीरें
  • टेबल क्लॉक
  • की-चेन
  • यंत्र (ऊर्जा का मानसित्र)
  • ध्यान के लिए चटाई
  • चैंटिंग बॉक्स (मंत्र जाप का बक्सा)
  • कैलेंडर ऑर्डर करने के लिए, अधिक जानकारी के लिए www.nithyananda.org

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Content: निरामय एवं ध्यान के पाठयक्रम आनंद स्परणा कार्यक्रम (ए एस पी) दो दिवसीय कार्यशाला जो शक्तिशाली ध्यान की तकनीकों से हमारे शरीर में स्थित सात बड़े चक्र (ऊर्जा क्षेत्र) के शोधन और कार्यान्वयन पर केंद्रित हैं। आनंद ध्यान योग जीवन को पूर्णता के साथ, तनाव रहित व आनंदपूर्वक जीने के उपायों का परिचय। स्वामीजी से व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षण प्राप्त आचार्य व्यावहारिक ध्यान की तकनीकों की मदद से उनके दैनिक जीवन में आध्यात्मिकता को जोड़ने के लिए मार्ग दिखाएंगे। शक्ति स्परणा कार्यक्रम (एस एस पी) एक दिवसीय ध्यान शिविर जिसमें तीन पिंडों (भौतिक, सूक्ष्म एंव कारण संबंधी) का परिचय प्रतिभागियों को मिलेगा और दैनिक जीवन के लिए ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा का जुगाड़ करने में मदद होगी। नित्यानंद स्परणा कार्यक्रम (एन एस पी) स्वामीजी द्वारा व्यक्तिगत रूप से संचालित एक चार दिवसीय उन्नत स्तर पाठ्यक्रम, और यह उन्हीं के लिए खुला है जिन्होंने ए एस पी पूर्ण कर लिया है। इनसे प्रतिभागी सातों पिंडों पर गहन मार्ग दर्शन के ध्यान सत्र एवं प्रशिक्षण के सत्र के द्वारा इन पर कार्य करेंगे।

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Content: परिशिष्ट नित्य आध्यात्मिक उपचार चुने हुए सच्चे / ईमानदार सीखने वाले जिन्होंने कम से कम दो ए एस पी (अथवा एन एस पी) पूर्ण कर लिया हो व्यक्तिगत रूप से स्वामी जी द्वारा आनंद निरामय की शिक्षा पाएंगे। माइग्रेन से कैंसर तक ठीक करने वाले स्वामीजी के स्वस्थ रखने वाली ऊर्जा का सीधा मार्ग बन जाते हैं ये निरामय की शिक्षा पाने वाले। विश्व भर के हमारे कुछ केंद्र अपने निकटतम ध्यानपीठम् केंद्र में निम्न वस्तुओं के लिए आएं: मुफ्त आनंद निरामय सेवा शारीरिक और मानसिक व्याधियों के लिए पुस्तकें एवं साहित्य स्वामीजी के व्याख्यान, ध्यान, निरामय मंत्र एवं ऑडियों टेप पर संगीत, ऑडियो एवं वीडियो सीडी ध्यान एवं दैनिक प्रयोग के लिए शक्तिदायक उत्पाद एवं सहायक सामग्री स्वामीजी की दिनचर्या एवं आने वाले पाठ्यक्रमों व गतिविधियों के विषय में सूचना पखवाडे का सतसंग (प्रार्थना सभा) लाइफ ब्लिस कार्यक्रम जो दुनिया भर में आचार्यों द्वारा संचालित किया जाता है ब्राजील महेशका / राजागोपाल रुआ गोमस कारनीरो, १४१/सी ओ बी ०१ आरओ डी जेनेरिों आर जे , ब्राजील- सी ई पी २२०७१-११०

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Content: भारत बंगलूर मां नित्यानंद प्रियमी (चित्र नारंग) ९, नार्थ पार्क रोड, कुमार पार्क ईस्ट, बंगलूर ५६००८० कर्नाटक, भारत। दूरभाष : +९१-८०-२२६६०८२३ मां आनंद हास्य (श्रीमती लता राजइयाह) ४०, ४ींह मेन, श्रीव स्टेज, बी ई एम, एल लेआउट, राजाराजेश्वरी नगर, बंगलूर-५६००३९. दूरभाष : +९१-८०-८५०२७०७७ मां नित्य योगी (श्रीमती नलीनी राजन्ना) १७४, डीफेंस कॉलोनी, 1st क्रॉस एच ए एल IInd स्टेज, बंगलूर -५६००३८ दूरभाष : +९१-८०-५२८३२८४९ मां आनंद बंधू (श्रीमती प्रभा) ३६०, 7th मेन, एच ए एल IInd स्टेज, इंदिरा नगर, बंगलूर-५६००३८. दूरभाष : +९१-८०-५२५४३७८ मां आनंद शक्ति (वह्ली मुथैय्या) 'रेशम' ३४, आर. एम. विलास एक्सटेशन, सदाशिव नगर, बंगलूर-५६००८०. दूरभाष : +९१-८०-३३६१०९००

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Content: मां नित्या दीपाक्षी श्रीमती बीजी शंकर १७५ /१, फ्लोर, १ क्रॉस, ५जी मेन, डीफेंस कॉलोनी, एच ए एल ११ स्टेज, बंगलूर-५६००३८. दूरभाष : +९१-८०-५२९२०८१ चेन्नई अपोलो हॉस्पीटल ध्यानापीठम मेडीटेशन / हीलिंग सेंटर, न.२१, ग्रीमस् लेन, चेन्नई-६००००६ दूरभाष : +९१-९४-२८२९३३३३/ २८२९०२०० मां नित्य मुक्ता रत्न (आर. अन्नपू) श्री आनंद समर्पण (वी आर रामनाथन) 'श्री पुरम' १/२८३, श्री पुरम स्ट्रीट, थोरइपक्कम चेन्नई ६०००९६, तमिलनाडू, भारत, दूरभाष : +९१-९४-२४९६१९३९ श्रीमती आर उमायल २४, अरुणाचलम रोड., कोटूरपुरम, चेन्नई ६०००८५ दूरभाष: +९१-९४-२४९७०८५५ श्री राजामानिकम. एस सी-४, प्रवीन्स विराजा २५ (ओल्ड ५१) वल்லूवर सालाई, जयनगर अरुमबक्कम चेन्नई ६००१०६, तमिलनाडू, भारत. दूरभाष : २४७५५८९१,मो. ३३०२७५५१

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Content: श्री वासुदेवन ए एच शैव स्ट्रीट, नं.२०४ अन्नानगर, चेन्नई-६०००४० दूरभाष : +९१-४४-२६२१५१०४. मो. ९४४४१९२५५४ कोयम्बतूर श्री कानागासा बाई ३, यूनाइटेड नगर, शुगर्केन इन्स्टीट्यूट पोस्ट, कोयम्बतूर-६४१००७ दूरभाष : +९१-४२२-२५४२२७८३ मो. ०४२२३१२३००६ श्री कन्डास्वामी २५, पालानीसामी लेआउट, थडगम रोड, आर एम परम कोयम्बतूर-६४१००२ दूरभाष: +९१-४२२-२४३२९२६ श्री - श्रीमती वेलायुथम, श्री - श्रीमती चिदम्बरम वी विजया पथिपाकम, १९ राजा स्ट्रीट, कोयम्बतूर-६४१००९ दूरभाष : +९१-४२२-२३९४६१४, मो. ९८४२२९४६१४ स्वामी आनन्द अमृत (डवामी अमृत यात्री) ३४६, भरथियार रोड, पी एम एफ हॉस्पीटल के पास, न्यू सिद्दापुर, कोयम्बतूर-६४१०४४. दूरभाष : मो. ९८४२२५३१२४ इरोड श्री पी रामानाथम १६, करुप्पन्ना स्वामी कोइल स्ट्रीट, 1st फ्लोर सुरम्पट्टी रोड, एरोड ६३८००९ दूरभाष : +९१-४२४-२२७५१२५/ २२६३१८०, मो. ९८४३१७३५३५

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Content: गुडियाथम श्री किरुबनन्थम, नं.१४, सेभेंगी न्यू स्ट्रीट, कम्माचियाम्मन् पेठ, गुडियाथम-६३२६०२ दूरभाष : +९१-४१७१-२२३०७८ मो. ९५४३४९०७१० कराईकुडी श्री नारायनन् एस एल एन एस, नारायन विलास, १२२, मेनामेना स्ट्रीट, कराईकुडी-६३०००१ दूरभाष : +९१-४५६५-२३८३९३, मो. ९४४३१२८३९३ कोलार श्रीमती एस उमादेवी, शंकरा विद्यालय, आर टी ओ के सामने, केलार - ५६३१०१ दूरभाष : ९५५१२-२२०४५९/ +९१-८१५२-२५०४५९ मुम्बई मां नित्य रागा (श्रीमती माला श्रीधर) ४४, भागीरथी, अफगान चर्च, कोलाबा, मुम्बई, ४००००५ दूरभाष : +९१-२२-२२१७६३१२ मो. ९८२०४०४३१ मां नित्य अनुपमा मो. ९८२१०८१२१३ श्री सुरेश उबिराय, श्रीमती यशोधरा उबिराय, ५, गोल्डनबीच सोसाइटी, रुद्या पार्क, गांधी ग्राम रोड, जुहू, मुम्बई-४०००४९ दूरभाष : +९१-२२-२६५०१८३३ मो. ९८०४६३२४६७ / ९८०३५१३७१७

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Content: मैसूर सी आर हनुमंथ, एफ ४, चामुंडी एपार्टमेंट्स, खखपव क्रॉस, लक्ष्मीपुरम, मैसूर - ५७०००४ doorbhash : +९१-८२१-२३३६७०५ मो. ९८४०७५७३५५

मा नित्य सामन्त प्रभा (गीमती भारगवी) ५५१/एन, इन्द्रप्रस्थ, न्यू कानूनाराजा उर्स रोड, कुवेम्पूनगर, मैसूर - ५७००२३ मो. ९८८६१८८१५५

मां नित्य आनंदी (गीमती मीना नरसिम्हा,) ५२९, ३रे मेन रोड, अन्नाहल्ली लेआउट, (वसदर्थ लेआउट के पास,) मैसूर - ५७०००७ doorbhash : +९१-८२१-२४७३२२५ मो. ९४८२७५२२५

श्री डोराइस्वामी १२३३, ८th मेन, ६th क्रॉस, विजय नगर १st स्टेज, मैसूर -५७००१७ doorbhash : +९१-८२१-२४१६०६५ मो. ९३४२१८६३४९

नामाक्कल

श्री त्यागराजन आर ३५, कामराजर नगर, पट्टनम रोड, रसिपुरम नामाक्कल-६३७४०८ doorbhash : +९१-४२८८-२२४७७०

श्री जी अनबूगनपति २५ एफ, वेंगमेडू, वेलूर, नामाक्कल जिला- ६३८१८२ doorbhash : +९१-४२८८-२२००५२

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Content: श्री डाँ चैतीरन एस ओ, १/२०० प्रिया गार्डनस्, थुम्मन कुरीची पी ४, नानजप्पा मुदालियर स्ट्रीट, ओ, नामक्कल जिला -६३७००३ doorbhash: +९१-४२८८-२२६८३७ मो. ९४४२३८८४३७

श्री आनंद मुदाती, ५७/२२, सालेम रोड, तिरुचेनगोड, नामाक्कल जिला-६३७२११, doorbhash : +९१-४२८८-२५२८३८

श्री वैद्यालिंगम व्यागम कुमारेसापुरम, तिरुचेनगोड-६३७२११ नामाक्कल जिला doorbhash : +९१-४२८८-२३३४३८

पांडिचेरी श्री मुरुगायन ३, मिडल स्ट्रीट, कुरुम्बापेठ, पांडिचेरी-६०५००९ doorbhash : +९१-४१३-२२७४९३५ मो. ९४४३२८७५०४

श्री मनोहरन टी एन, नानजप्पा मुदालियर स्ट्रीट, तिरुचेनगोड-६३७२११, नामाक्कल जिला doorbhash: +९१-४२८८-२९२७३९

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Content: पुडुकोट्टाई श्री आनंद भैरव (न चिन्नीआह) मां नित्य भैरवी (गीमती सी आदाईकम्माई) १०८, निजाम कॉलोनी, पुडुकोट्टई-६२२००१ दूरभाष : +९१-४३२२-२३२४४८/२६५८५९, मो. ९८४२४२२८१

श्री आनंद युक्ता (ए. धर्मराज प्राबु) श्रीमती रामामीरथम ५४९८/१, ए डी आर अपार्टमेंट, मरयंडापुरम, १st स्ट्रीट, पुडुकोट्टई-६२२००१ दूरभाष : +९१-४३२२-२२६१५९ मो. ९८४२४२६३९

सालेम श्री के आलागूमोहन ३०७, अरविंद ऑप्टिकल्स, विश्वनाथ थिएटर, अत्तूर (पी ओ), सालेम जिला- ६३६१०२ दूरभाष : +९१-४२७२-२६२८८७, मो. ९४४३३९२४३८

श्री एन बालाकृष्ण साई ६०, कुत्री वैद्यार स्ट्रीट, सालेम-६३६००१ दूरभाष : +९१-४२७-२२६१७३१६

श्री पी एन कान्डास्वामी ७७, जे, कावेरी एवेन्यू, अमष्टानंथा कुडियर, एम. डी. एस नगर, हौसथ्यमपट्टी, सालेम-६३६०१६ दूरभाष : +९१-४२७-२३१३६०, ५५०१४०९

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Content: श्री ए.वी. प्रकाशम (डेसिडेस) २६, मारियम्मन् स्ट्रीट, अम्मापेठ, सालेम - ६३६००३ (ऑफिस) कुमार शर्ट्स् १४२, १st आगराहरम, सालेम-६३६००१ दूरभाष : +९१-४२७-२२४१६३२ डॉ राजनधिरन डॉ देविका राजनधिरन २२,रंगस्वामी स्ट्रीट, रानीपेठ, अत्तूर-६३६१०२, सालेम जिला दूरभाष : +९१-४२८२-२४१२३३

श्री डी सेनथिल कुमार ९४, ग्रीन वेस रोड, फेयर लैंड्स सालेम दूरभाष : +९१-४२७-२४४७३२६

श्री एम.एस. पी. सुब्रह्मण्यम 'श्रीलक्ष्मी' , २ बी, सारदा कॉलेज रोड, सालेम-६३६००७ दूरभाष : +९१-४२६- २३१३७९५, २३१२९६९

तिरुवननामलाई श्री गोपाल टी एस.टी. एम. एस बस ओनर, ४०, लक्ष्मीपुरम गांधी नगर, तिरुवननामलाई-६०६६०२ दूरभाष : +९१-४१७५-२५३२९६ मो. ९४४३३२२६८५

श्री मनी ए आर ११९, कमाची अम्मन कोइल स्ट्रीट, तिरुवननामलाई-६२६६०१ दूरभाष :+४१७५७२२२७२२ मो. ९४४३३२७२२

श्री अरुणाचलम ए ७७, अनाकट्टी स्ट्रीट, वेल्लोर-६३६००१ दूरभाष : +९१-४१७५-२३९४८५

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Content: श्री जयकुमार पी पी वी संगीता इन्हम थेन्टाल नगर, वेंगीकाल, तिरुवन्नामलाई-६०६६०४ distance: +९१-४३७५-२२२८१७ / २२३३७८१ मो. ९९४३२३३१८१ येरकोड श्रीमती माधवी कान्नप्पन मेरीलैण्डस् एस्टेट, पट्टीपली -६३६६०, येरकोड, सालेम जिला distance :+ ९१-४२८१-२२२३५० / २२२३११ मदर एस पी गीताराज हाउस ऑफ़ पीस, राम रोड, येरकोड, सालेम जिला distance : + ९१-४२८१-२२२२६२ त्रिची श्री शेख मुहम्मद ए ५, २nd फ़्लोर, टी ए बी कॉम्प्लेक्स कैन्टोनमेंट, त्रिची distance : +९१-४३१-२४१०२३ मलेशिया मा नित्य श्री कमला श्री नित्य श्रद्धा सैम पेरियास्वामी न. ४११, ब्लॉक १८, सेक्शन ६, ४०००० शाह आलम, सेलांगोर, मलेशिया distance: ०३-५५१९६१०४, ०१६-३९६५१७८ श्री कामतचिनाथन १६, रमन जेवल हाउस, ६१st स्ट्रीट, कल्कुजी, त्रिची-६२००२० distance :+९१-४३१-२३०२५७, मो. + ९१-४३१-३११००७६

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Content: एस. यनुसागर के. अरुमुगम पी. मनिमरन न. ११, पेरसियारन नाहकोडा, तामाम तेलुक एयर टावर बटरवर्थ, पेनांग, मलेशिया डॉ. एल वेलायुधम ११, जालान इपोह, ५१२०० कालालामपुर, मलेशिया distance : ०६०३-८०४१२६११ [email protected] सिंगापुर डॉ. आर. करुनानिथी २८ किम्ब्रिज रोड, सिंगापुर-२१९७०९ distance : ६३९२४३१७ [email protected] यू एस ए कैलिफोर्निया मा आनंद मीरा सुभद्रा सुब्रह्मनियन १५ एच बेलफ्लावर स्ट्रोट, लोवरमार, सी ए ९४५५१ distance : ९२५-७६३-६८०९ [email protected]

Content: श्री सोमा रामास्वामी ब्लॉक २०७, ०२-०८, चूआ चू कांग सेंचुरल, सिंगापुर-६८०२०७ distance : ९८३२८६४२ वी. वेंकटासालाम ब्लॉक १९, ६८-५१, टेक वी लेन, सिंगापुर-६८००१९ distance : ६७६०३१५९

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Content: मां आनंद प्रभा शर्मिला मैककैलोर श्री नित्य प्रभा डगलस मैककैलोर ५७८८ रिबचेस्टर सीटी सैन जोस, सी ए-९५१२३ दूरभाष : ४०८-२२७-९६४५ [email protected]

मां आनंद समर्पण (umMm सुब्रमनियम) ४८१६ मिशन सिएलो कोर्ट, फ्रेमोंट, सी ए ९४५३९, दूरभाष :५१०-६६८-१७५०(आर), ५१०-४००-२४०१ (ओ) [email protected]

मां आनंद स्वभाव (श्रावित्री रामभातला) श्री नित्य स्वभाव (वमलाकर रामभातला) १२१० रैंचो रोड अक्राडिया, सी ए ९१००६ दूरभाष : ६२६-३५५-५८००, ३२३-४९७-८९८४

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Content: परिशिष्ट

मां नित्य शांता (तैम ड्रोंग) ५९११ साउथव्यू डी आर. सैन जोस, सी ए ९५१२८ दूरभाष : ४०८-२८१-१२८० [email protected]

मां सस्थानानंद (ठंकजम सुब्रमनियन) ४८९६२२, नैम्पेको स्ट्रीट, फ्रेमोंट, सी ए - ९४५३९ दूरभाष:५१०-२२६-१८१७, [email protected]

श्री आनंद ज्योति (अदिल दलाल) ३१४० रुबिनो डी आर.२०९ सैन जोस, सी ए-९५१२५ दूरभाष:४०८-५९४-०७२८ [email protected]

श्री आनंद प्राण (शुकुन्तन सुब्रमणियन) १३७० कालाबाजान बी एल dr S>r # 2 सैंटा क्लारा, सी ए ९५०५१ दूरभाष : ४०८-२४९-५०९० [email protected]

श्री नित्य योगी (ग्वीन पॉला) १५०० नौरमैन ऐवेन्यू ६२०१ सैंटा क्लारा, सी ए ९५०५४ दूरभाष : ४०८-३९४-७७३८ [email protected]

मैरीलैंड मीना । कृष्णा सोमान्ची १२११९ बेक्स ड्राइव बोवी, एम डी २०७२१ दूरभाष:३०१-४६४-२११७ [email protected] [email protected]

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Content: मिसौरी अखिला बलराम १२५५५ सनसेट डी आर., सेंट लूइस, एम ओ ६३१२८ दूरभाष:३१४-८४९-६७६० [email protected] डॉग बिंगाले ४०५ डिकी बॉटमस रोड., यूरेका, एम ओ ६३०२५ दूरभाष : ३१४-४३५-३३४६ [email protected] न्यू जर्सी मां आनंद सनाथन (तमा चौधरी) ७ वर्नॉन रोड मॉन्क्लियर एन जे-०७७४३ दूरभाष:७३२-१७२-२४२७ [email protected] मा आनंद तुरिया (वीना शिनाय) १ रोज सिटी, माल्बोरो, एन जे, ०७७४६ दूरभाष : ७३२-३०८-३९५४ [email protected] मा नित्य सनातन (सेलेन डाइटरली) ६१ सेन्टर स्ट्रीट, क्लिन्टन, एन जे-०८८०९ दूरभाष : ९०८-७३५-४७०९ ओहाओ ऐलन तिरुपैथी ५६४९ हाथावे सी टी, डबलिन, ओ एच ४३०१७ दूरभाष : ६१४-९७५-५९५८ $[email protected]

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Content: अंजुला । हैरी जैकसन ६७०२ विनराइट डी आर., डबलिन, ओ एच - ४३०१६ दूरभाष : ६१४-८७३-४४८५ [email protected] अरुण मल्ला २४४४ कार्नवॉल सीटी., पॉवेल, ओ एच ४३०६५ दूरभाष : ६१४-७६१-२४४४ [email protected] ओंक्लाहोमा मा आनंद राम (चॉ. विजया मालपानी) श्री आनंद राम (चॉ. रवि के मालपानी) ११६१७, कीनस टाउन रोड, ओक्लाहोमा सिटी, ओ के७३११६ दूरभाष : ४०५-८४३-२७७० [email protected] मा नित्य स्वरूपा प्रेमी (ससमिथा रामाकृष्णन) ७५० रिजक्रेस्ट सीटी. एपार्टमेंट १५३८ नॉर्मैन, ओ के - ७३०७२ दूरभाष : ४०५-५१४-३५५८ [email protected] डूबी पौटर १८४५ एन डब्लू ११जी स्ट्रीट.#४ ओ के सिटी, ओ के - ७३१०६ दूरभाष : ४०५-५२४-०९५५ [email protected] श्री आनंद क्राइस्ट (tmo लॉंग) १८४५ एन डब्लू ११जी स्ट्रीट#4 ओ के सिटी, ओ के - ७३१०६ दूरभाष : ४०५-८२६-७३८४ [email protected]

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Content: श्री नित्य क्राइस्ट जैन माइकल १४२२ एस. वेस्टर्न स्टिलवॉटर, ओ के - ७४०७४ दूरभाष : ४०५-६२४-०७७८ [email protected] फिलेडेलफिया अरुना शिनाय २५ मिल लेन फ्रेजर, पी ए - १९३५५ दूरभाष : ६१०-६४४-७१८४ [email protected] निधी चौधरी ३५०० पॉवेलटन ऐवेन्यू एपार्टमेंट ए १०२, फिलेडेलफिया, पी ए १९१०४, दूरभाष : २६७-२४१-५०३४ [email protected]

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Content: परिशिष्ट सामान्य प्रश्नों के आसामान्य उत्तर स्वामीजी के विचारों का सत्त है । इसका विषय खुशियों की सर्वव्यापी जिज्ञासा, टूटते रिश्तों के कारण से लेकर आज के युग में आधात्मिकता की सही प्रासंगिकता तक है। वार्तालाप का यह संग्रह, स्वामीजी के अनोखे ढंग पर आधारित है। यह केवल हमारे व्यक्तिगত आशाओं और संघर्षों को प्रतिबिम्बित नहीं करता है, परंतु उन शक्तियों की ओर भी संकेत करता है जो आज विश्व समुदाय का रूप लेती जा रही है। नित्यानंद (स्वामीजी) इस शताब्दी के आधात्मिक गुरु हैं। वह ध्यान की शक्ति से दुनिया को निरामय बनाने के लक्ष्य की ओर चल पड़े है। स्वामीजी द्वारा समस्त विश्व में चलाये जाने वाले अभियान, ध्यानपीठम, भारत में बंगलूर के निकट बिदादी में स्थित है। यद्यपि स्वामीजी हमेशा भ्रमण करते रहते हैं, विश्व के लोगों कोआध्यात्मिकता एवं आनंदपूर्ण जीवन जीने का अपना संदेश सुनाते हुए/ www.dhyanapeetam.org / [email protected]

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Content: श्री आनंद पार्थना (श्री राम विश्नाथन) १८२ / ११बी एवरग्रीन रोड, एडिसन, एन जे ०८८३७, यू एस ए दूरभाष : ७३२-६२३-४१११ [email protected] श्री नित्य साहस (श्रीकृष्णा घाडियाराम) १८७३ मार्क ट्रेन स्ट्रीट पालो एल्टो, सी ए ९४३०३ दूरभाष : ६५०-३८०-१८९० [email protected] मां आनंद तुरिया (वीणा शिनाय). १ रोज सी टी मार्लबोरो एन जे ०७७४६ दूरभाष : ७३२-३०८-३९५४ [email protected] मां नित्य प्रेमांजली (सुमन कृष्णन) ११ सूटी एवेन्यू पिसकेटावे एन जे- ०८५४ दूरभाष : ७३२-३१०-४६०६ [email protected] ओहायो मां विरुपानंद (अंजुला जैक्सन) श्री श्रद्धानंद (हरी जैक्सन) ६७०२ विनराइट ड्राइव डबलिन ओ एच ४३०१६ दूरभाष : ६१४-८७३-४४८५ [email protected]

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Content: मां नित्य प्रेम मधु (विजया राव) ८१४६ समरहाउस डी आर ११ सूटी एवेन्यू दूरभाष : ६१४-८७३१०१९, ६१४-६१७-९३४६ [email protected] ओकलाहोमा मां आनंद राम (विजया एल मालपानी) १६१७ कीनसटाउन रोड ओकलाहोमा सिटी ओ के ७३११६ दूरभाष : ४०५-८४३-०२७० [email protected] मां आनंद ग्लोरिया (डूबी पाउटर) १८४१ लॉन हिल ११थ ओकलाहोमा सिटी ओ के ७३१०६ दूरभाष : ४०५-५२४-०९५५ [email protected] मां प्रभानंद (रॉबिन जैकब्स) १०६०५ एन मैकार्थर बुलेवाई ओकलाहोमा सिटी, ओ के ७३१६२ दूरभाष : ४०५-४७४-२२३६ [email protected] मां आनंद निर्मल (भानू पटेल) १००८ मैनर हिल डी आर नौरमान, ओ के ७३०७२ दूरभाष : ४०५-४४७-१५६९ [email protected] श्री नित्य क्राइस्ट (जैन मिशेल) १४२२ रान वेस्टरन /स्टिल वाटर ओ के ७४०७४ दूरभाष : ४०५-६२४-०७७८ [email protected]

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Content: श्री आनन्द क्राइस्ट (जो लॉंग) १८०५ एन. डब्लू ११वीं #४४ ओकलाहोमा सिटी, ओ के ७३११६ दूरभाष : ४०५-८२६-७३८४ [email protected] श्री आनन्द राम (रवि के मालपानी) १६११७ क्वीन्सटाउन रोड ओकलाहोमा सिटी, ओ के ७३११६ दूरभाष : ४०५-८४३-२७३० [email protected] टेक्सस अखिला लक्ष्मीनारायणन् ८१४ डॉल स्ट्रीट # २५२ इरविंग, टी एक्स - ७५०३९ ४६९-७७४-५७०५ [email protected] शान्ति पाई एण्ड सुगुना शर्मा [email protected]/ thesharmafamily @ comcast.net वॉशिंगटन श्री नित्य शक्ति सागर (राजेश केसरला) ६६१५ १९वीं पी एल. एन ई रेडमंड डब्लू ए ९८०५२ दूरभाष : ४२५-७०३-६००१ [email protected] मां आनन्द मातृश्री (कविता गद्दम) १५३०१ एन ई १०th स्ट्रीट, # डी-१०८ बेलव्यू, डब्लू ए ९८००७ दूरभाष : ४२५-७४६-०७०८ [email protected]

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Content: श्री आनन्द अर्पणन (कानन अय्यर) २५१० २३८th सी टी एन ई सम्मामिश डब्लू ए ९८०७४-५४८० दूरभाष : ४२५-५०३-१४७१ [email protected] आनन्द सुप्रती (सोमव्या रामदास) १०९०१ एवनडेल रोड एन ई बी १०६ रेडमंड, डब्लू ए ९८०५२ दूरभाष : ४२५-५५८-३८०६ [email protected] श्री नित्य पावानन् (कृष्णा जनध्याला) एस ई ८२०, सनी मीड वे पुलमैन, डब्लू ए ९९१६३-२४२९ दूरभाष : ५०९-३३४-६०८९ [email protected] मां आनन्द समता (करुणा नाकामूरा) ३५१९ एन ई १३५th स्‍ट्रीट सीटल, डब्लू ए ९८१२५ २०६-३६४-३७७४, २०६-३८३-४०८३ [email protected] श्री नित्य सत्यबान (विवेक चन्द्रहसन) २०१५, १२th सी टी एन ई ईसाकूयाह, डब्लू ए ९८०२९ दूरभाष : ४२५-३६९-२५१६ [email protected] आनन्द निवेदन माई (आनन्दी चन्द्रहसन) २०१५ १२th सी टी एन ई ईसाकूयाह, डब्लू ए ९८०२९ दूरभाष : ४२५-३६९-२५१६ [email protected]

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Content: श्री नित्य ओमकार (कृष्णा चल्ला) १५३०१ एन ई १०th स्ट्रीट, ऍप-१०८, बेलव्यू, डब्लू ए- ९८००७ doorbhash : ४२५-७४६-०७०८ [email protected] मां आनंद सौन्दर्य (हेमाली पटेल) ९०००, ८th ऐवेन्यू एप १२१३, सीटल डब्लू ए-९८१०४ doorbhash : २०६-३९०-२४०७ [email protected] श्री नित्य सत्यज्योति (विनय भारद्वाज) १५०७, ५th ऐवेन्यू एन ऍप सीटल डब्लू ए ९८१०९ २०६-९५३-६८८९ [email protected] आनंद श्री प्रसाद (लता लक्ष्मी नारायनन) २४१२१ एस ई ३३ं सी टी सम्मामिश डब्लू ए- ९८०७४ doorbhash : ४२५-८९१-०३३४ [email protected] श्री नित्य शालीन (राज कृष्णन) ४०१५ २४३rd पी एल एस ई इस्साकूयाह, डब्लू ए ९८०२९ doorbhash : २०६-४८४-३८५६ [email protected] श्री आनंद मंगल (नागराज तंगुतुरु) ३८४९ क्लाहानी डी आर. एस ई, ६०९-२०४, इस्साकूयाह डब्लू ए. ९८०२९ doorbhash : ४२५-९९६-०५१५ [email protected]

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Content: मां आनंद समता (करुणा नाकामूरा) ३५१९ एन ई १३५th स्ट्रीट सीटल, डब्लू ए ९८१२५ doorbhash : २०६-३६४-३७७४ [email protected] श्री नित्य साधक (श्री रमन नरसिम्हन) १०९०१ एवनेडेल रोड एन ई, बी १०६, रेडमंड, डब्लू ए - ९८०५२ doorbhash : ४२५-५५८-३८०६ [email protected] मां आनंद सौभाग्य ऊषा अमनचरला ४७१८ १४३rd स्ट्रीट एस ई सोहोमिश, डब्लू ए ९८२९६-७६४८ doorbhash : ४२५-७५०-५७१८ [email protected] मां आनंद तनमयी (माधुरी सुसुरला) १५५०१ एन ई १०th स्ट्रीट एपार्टमेंट # एफ २१० बेलव्यू- डब्लू ए-९८००७ doorbhash : ४२५-९४१९-१९६X [email protected] मां आनंद प्रसूना (इयासवरी जोइसा) २६०८, १८९th स्ट्रीट एस ई बोयथेल, डब्लू ए ९८०१२-६९५४ doorbhash : ४२५ - ४८१-३९६० [email protected] मां आनंद प्रेमांजलि (गायत्री तंगुतुरु) ३८४९ क्लाहानी डी आर. एस. ई ६०९२०४ इस्साकूयाह डब्लू ए ९८०२९ doorbhash : ४२५-९९६-०५१५ [email protected]

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Content: शोभना चीमाकुर्ती ६६१५ १९४th पी एल एन ई रेडमंड डबलू ए ९८०५२ दूरभाष : ४२५-५५८-७५२४ [email protected] रविंदर वप्पुला १४७११, एन ई ४०th पी एल

एस-१०८

बेलव्यू डबलू ए- ९८००७ दूरभाष : ४२५-४९७-१५०८ [email protected]

Content: कनाडा वैंक्यूवर श्री नित्य प्रेरित (मार्टिन विलियम्स), २११ टेमारैक रोड उत्तर वैंक्यूवर बी सी, वी ७ एन १ एस३ दूरभाष : ६०४-९८५-२११८ [email protected] दक्षिण अमरीका ब्राज़ील मल्लिका राजगोपाल [email protected] राम राजगोपाल [email protected]

Content: क्या सभी लोग ध्यान लगाना सीख सकते हैं? आपको ध्यान सीखने की आवश्यकता नहीं है। आप तो ध्यानी हैं ही! अपनी जिंदगी के उस पल को याद करिये जब आपने चरम सौंदर्य का अनुभव किया। अचानक ही सूरज एक पहाड के पीछे से उगता है, या पहाड़ी का नाम अपने बहन सीला संगीत सुना हो। ऐसे ही किसी पल में आप पूरी तरह स्थिर हो जाते हैं, बिल्कुल स्तब्ध! क्या हमने ऐसे पलों का अनुभव नहीं किया है? इसी पल को ध्यान कहते हैं। परमहंस श्री नित्यानंद (स्वामीजी) इस शताब्दी के आध्यात्मिक गुरु हैं। वह ध्यान की शक्ति से दुनिया को निरामय बनाने के लक्ष्य की ओर चल पड़े है। स्वामीजी द्वारा समस्त विश्व में चलाये जाने वाले अभियान, ध्यानपीठम्, भारत में बंगलूर के निकट बिदादी में स्थित है। यद्यपि स्वामीजी हमेशा भ्रमण करते रहते हैं, विश्व के लोगों कोआध्यात्मिकता एवं आनंदपूर्ण जीवन जीने का अपना संदेश सुनाते हुए। www.dhyanapeetam.org

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