Books / isbn 979-8-88572-167-7

1. isbn 979-8-88572-167-7

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Content: 'डळीळोंरशळूं को ळपपरोंश ळपोंशश्रथशळसशपलश ंहरी जशशी ंं गुरीश रपव िहरी रोौं शीर्षी ंी वरळशू रर्लींळींळशी.'

Content: Ebook ISBN: 979-8-88572-167-7

Content: PUBLISHED BY NITYANANDA VEDIC SCIENCES UNIVERSITY PRESS

Content: A division of Nityananda Vedic Sciences University, USA

Content: — परमहंस नित्यानंद —

Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

Content: SPIRITUALITY RELEVANT IN OUR LIFE IS

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Content: सारा विश्व के आनन्द समाजियों और नित्यानन्द आश्रम के स्वामीगणों को दिया हुआ प्रवचन

Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

Content: नितत्यानंद वैदिक साइन्सस् यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित

Content: नित्यानंद वैदिक साइन्सस् यूनिवर्सिटी यू.एस.ए. का एक विभाग

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Content: Ebook ISBN: 979-8-88572-167-7

Content: नित्यानंद वैदिक साइन्सेस यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित नित्यानंद वैदिक साइन्सेस यूनिवर्सिटी विभाग, यूएसए॥

Content: सर्वाधिकार...२००७

Content: प्रथम संस्करण: .............. २००७

Content: आईएसबीएन १३: ९७८-९-९३४३६४-३०-७

Content: आईएसबीएन १०: ९-९३४३६४-३०-८

Content: सर्वाधिकार सुरक्षित।इस प्रकाशन का कोई भी अंश पुनः प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, न किसी और रूप या माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है, इलेक्ट्रोनिक, मैकेनिकल, फोटोकॉपी, रिकॉर्डिंग्स या कोई भी तरीका हो। इसके लिये प्रकाशक की लिखित अनुमति की जरूरत होगी।

Content: यदि आप इस पुस्तक में से कोई सूचना अपने लिये लें तो आपके कृत्य के लिये लेखक या प्रकाशक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

Content: इस पुस्तक की बिक्री से आने वाली राशि खैराती कार्य के लिये जायेगी।

Content: भारत में मुद्रक आदित्य मुद्रक, बंगलौर. फोन: ८०२६६०६७७६

Content: "आध्यात्मिकता हर समय में और हर युग में प्रासंगिक है।

Content: ध्यान मनोपी और योगियों द्वारा अभ्यास की जाने वाली व्यक्तिगत कला नहीं है। हममें से प्रत्येक के लिए इसका व्यावहारिक लाभ है,

Content: इसका सम्बन्ध हमारी उम्र, संस्कृति या धर्म से नहीं है।

Content: ध्यान न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक खुशहाली को बढ़ाता है, यह हमारे आपसी रिश्ते को और बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है।

Content: विशेषकर, यह हमें हमारे दैवीय स्वभाव के निकट लाती है जिसे हम भूल चुके हैं।"

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Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

Content: ... प्र. आज के समाज में ध्यान के क्या लाभ हैं ?

Content: किसी भी समय या युग में, प्रत्येक मानव के जीवन की क्या आवश्यकताएं हैं?

Content: शक्ति एवं स्वस्थ प्रसन्न शरीर मन एवं चित्त। शरीर की शक्ति (शरीर बल) हमें शारीरिक रोगों से मुक्त रखती है और शरीर को बनाए रखने में मदद करती है ताकि वह दैनिक कार्यों का निर्वाह बिना किसी परेशानी के कर सके।

Content: मन की शक्ति (मनोबल) मस्तिष्क को शांत और संतुलित बनाए रखती है और जीवन को पूरी तरह और आनंदपूर्ण तरीके से जीने में मदद करती है।

Content: चित्त की शक्ति (आत्मबल) हमें इन दोनों से परे ले जाती है; आत्मबल के साथ संवेदना का अनुभव पनपता है, त्याग की भावना समाज के काम आने लायक बनाती है। यद्यपि पहले दोनों अनिवार्य हैं किसी व्यक्ति की बराबर खुशहाली के लिए तथापि, आत्मबल अनिवार्य है समाज और मानवता की एवम् स्वयं की खुशहाली के लिए।

Content: शारीरिक बल के साथ मनुष्य समाज में एक ठग, झगड़ा फसाद करने वाला, परेशान करने वाला बन सकता है। अगर उसके पास आत्मबल के ब्रह्म शारीरिक बल और मानसिक बल है तो वह धूर्त और खतरनाक बन जाता है। वह एक अपराधी बन सकता है, समाज के लिए एक खतरा बन सकता है। जब एक व्यक्ति में तीनों बलों का सम्मिश्रण होता है तो ही वह एक संपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में निखरता है। वह

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Content: जिस समाज में रहता है वह दुनिया के लिए भी अनुकरणीय बन जाता है। ध्यान ही वह एकमात्र चाबी है जो इन सारे बलों को खोल सकती है। यह तो अब सर्वविदित है कि ध्यान शरीर पर चमत्कार कर सकती है। ध्यान द्वारा कई रोग पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं जैसे उच्च रक्त चाप, मधुमेह इत्यादि बहुत सारी बीमारियां। बहु‍तों को किसी भी प्रकार के दर्द में लाभ का अनुभव हो चुका है; बौद्धिक वर्ग भी इस पर सहमति जताता है।

Content: ध्यान आपको चक्रों की सफाई करने में मदद करता है। जैसा कि आप जानते हैं, चक्र हमारे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। जब इन चक्रों की गतिविधियां एक ही सुर में बंधी होंगी, केवल तभी आपको शारीरिक खुशहाली का अनुभव होगा। ध्यान आपके चक्रों पर कार्य करता है, चक्रों की सफाई करने में मदद करता है, उनके कार्यों को सही ताल मेल के साथ सम्पूर्ण करता है, शरीर और दिमाग को रोगों से मुक्त रखने में मदद करता है।

Content: मानसिक स्तर पर, ध्यान मन को खिन्नता से मुक्त रखता है। यह अधिक, मस्तिष्क की स्पष्टता को पाने में मदद करता है, और व्यक्त‍िगत रूप में एवं परिवार व समाज के अंग के रूप में हमारे जीवन को अधिक सम्पूर्णता तथा संतोष के अहसास के साथ जीने के लिए हमारा पथ-प्रदर्शक बनता है। ध्यान हमारी ऊर्जा और समय का संपूर्ण उपयोग करने में मदद करती है, स्वभावतः ही हमें भौतिक सुखों के अनेक साधन भी प्राप्त होते हैं। इसी

Content: तरहसे, आत्मशक्ति को बाहर लाने में और शांति का गहरा अहसास बनाने में ध्यान मदद करती है। जब आनंद हमारे भीतर खिलने लगता है, तो स्वभावतः ही हम उसे समाज में फैलाना चाहते हैं। यदि हम स्वयं ही दयनीय मनःस्थिति में होंगे, तो समाज के किसी काम कैसे आएंगे? ध्यान ही वह रास्ता है जो हमें तीनों शक्ति देता है।

Content: तो ध्यान शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर लाभ पहुंचाती है। यह पारिवारिक जीवन और सामजिक जीवन को उत्तम बनाता है, और अंततः आध्यात्मिक जीवन की ओर ले जाती है। यह सदियों से आत्मज्ञानी गुरुओं द्वारा एकत्रित ज्ञान संपदा है।

Content: ... प्र. बहुत लोग आपके पास केवल स्वास्थ्य के लिए आते हैं, ध्यान के लिए नहीं।

Content: बिल्कुल सही! निरामयता मेरा परिचय पत्र (विजिटिंग कार्ड) है। मेरा असली संदेश है ध्यान। जब मैं कहता हूं ध्यान आपको पूर्णता तक ले जा सकता है, मुझे आवश्यकता है- या आपको आवश्यकता है - कुछ प्रमाणों की, क्या मैं सही हूं? इसीलिए मैं निरामयता को बढ़ावा देता हूं। जब लोग निरामयता के चमत्कार को देखते हैं तो हमारी ओर आकर्षित होते हैं, तब वह इस मार्ग के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं। क्या आप सोचते हैं कि इसके बिना उन्हें आध्यात्मिक जीवन की ओर खींचना आसान है? निरामयता के लिए जो हजारों लोग आते हैं उनमें से यदि मुट्ठी भर भी अपने

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Content: व्यक्तिगत जीवन में ध्यान और अध्यात्म की ओर मुड़ते हैं तो भी मेरा उद्देश्य पूरा हो जाता है और यह हो रहा है, हर जगह हो रहा है।

Content: ...प्र. बहुत से गुरु ध्यान विधि बता रहे हैं, आपकी ध्यान तकनीक में विशेष क्या है?

Content: मैं नहीं समझता कि किसी विशेष तकनीक को खास बनाकर बढ़ावा देने की आवश्यकता है। मैं ध्यान के सिद्धांतों को बढ़ावा देता हूं। अगर अधिक से अधिक लोग मुझे सुनने के बाद ध्यान के अभ्यास की प्रेरणा पाते हैं तो अपने आप में काफी है, यह एक अच्छा संकेत है। यह कोई भी प्रक्रिया हो सकती है जिसमें उन्हें सहजता महसूस हो।

Content: परंतु यदि आप मेरे तकनीकों के बारे में पूछ रहे हैं तो कह सकते हैं कि, यह अपने भीतरी ऊर्जाओं को संतुलित रखने का उपाय है। एक ऊर्जा है जो ब्रह्मांड में व्याप्त होती है, ग्रहों, सूर्य और चंद्रमाओं को कार्यान्वित करती है। हम भी उसी ऊर्जा के अंग हैं, परंतु इससे रिश्ता खो चुके हैं। यह तकनीक ब्रह्मांड की शक्ति के साथ सुर मिलाने में मदद करती है। जितना हम एक होते हैं इस शक्ति से उतना ही हम अपने शरीर, मन और आत्मा में सहज सरल हो जाते हैं।

Content: ...प्र. यहां इतने सारे ध्यान की तकनीकें हैं, हमें उलझन हो जाती है। सभी दल अपने तकनीक को बढ़ावा देने की कोशिश करता है। हमें कैसे पता

Content: चलेगा हमारे लिए कौन सी तकनीक सही है ?

Content: मैं तो यही सलाह दूंगा कि जितनी तकनीकें सीखने को मिलती हैं। सभी को आजमाकर देखने की कोशिश करें। सभी को कुछ तकनीकें आजमानी चाहिए, कम से कम ४-५ तकनीक। देखें जो भी प्रचार करता है उसके अंदर सत्य की झलक होती है - उसके बिना बाहर आना और गुरु बनना असंभव है। परंतु विभिन्न गुरु एक ही सत्य को विभिन्न प्रकारों से व्यक्त करते हैं। अलग अलग व्यक्तियों की मानसिक प्रस्तुति अलग अलग होती है। कुछ लोगों का सुर ताल किसी गुरु के साथ ठीक बैठता है अन्य गुरु की तुलना में।

Content: तो तकनीकों को आजमाने की कोशिश करें और देखें: जिस तकनीक से आपको सबसे अधिक अपने अंदर की शांति और सबसे अधिक स्पष्टता मिलेगी, उसका अनुसरण करें और बाकी भूल जाएं।

Content: ... प्र. दुनिया में इतनी सारी तकलीफें हैं जिनका हल नहीं निकाला गया है। आध्यात्मिकता उन्हें कैसे हल कर देगी ?

Content: जो भी परेशानी हो, आपको उसे हल करने की शुरुआत करनी पड़ेगी। दृढ़ता व आस्था रखें, यह पहला कदम है।

Content: ... प्र. परंतु मेरा मतलब व्यक्तिगत परेशानियों से नहीं है, बड़े-बड़े सामजिक परेशानियों का क्या ?

Content: आध्यात्मिकता कोई व्यक्तिगत वस्तु नहीं है। इसका निश्चित प्रभाव सामजिक

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Content: स्तर पर भी होता है। आध्यात्मिकता केवल ध्यान नहीं है, यह संवेदना भी है, यह ह की सेवा है।

Content: स म टी ज

Content: विवेकानंद बड़ी ही खूबसूरती से कहते हैं: "आत्मनो मोक्षार्थम् जगत् हिताय च" ":धपि हम आलोकित अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं, मानवता की सेवा के लिए इसका उपयोग करना ही वास्तव में आध्यात्मिकता है।"

Content: नहीं तो यह आधी अधूरी आध्यात्मिकता होगी, जो कि भगवान के अस्तित्व पर संदेह करने से भी अधिक नुकसान पहुंचाती है।

Content: ... प्र. क्या आध्यात्मिकता का अर्थ है इच्छाओं का न होना ?

Content: नहीं, इसको देखने का यह गलत नजरिया है। मेरे अनुभवों के अनुसार, इच्छाओं को दबा देने से बेहतर होगा, अपनी भीतरी ऊर्जा का बेहतर उपयोग करें, ताकि आप उन्हें पूरा कर सकें।

Content: ...प्र. परंतु आज के आधुनिक जीवन में, बहुत सारी इच्छाएं हैं, बहुत सारी आशाएं। हम इसे कम कैसे करें ?

Content: इच्छाओं को कम करने का मतलब है जीवन की समृद्धि को कम करना। मैंने जैसा कहा, सबसे महत्वपूर्ण बात है अपने अंदर उस ऊर्जा को पैदा करना जो इच्छाओं को पूरा करती है। इच्छा होना कुछ भी गलत नहीं है। परंतु उसको पूरा करने के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी होगी।

Content: वह भौतिक इच्छाएं हैं, यदि आप बेंज कार खरीदना चाहते हैं, तो भी कुछ गलत नहीं है। ध्यान आपको भौतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए शक्ति देता है।

Content: ... प्र. परंतु आप कैसे अपने इच्छाओं को बढ़ाते जाएंगे, संतुष्ट और इटच्छा- रहित जीवन जीने की जगह ?

Content: कभी भी संतुष्ट जीवन और आध्यात्मिक जीवन को एक समान न समझें। सतही तौर पर सत्व और तमस दोनों एक जैसे ही लग सकते हैं। क्या आप सोचते हैं कि जो साधारण कपड़े पहनकर जमीन पर बिछाई चटाई पर बैठता हो वह अधिक सात्विक और संतुष्ट होगा ? यह तो केवल बाहरी स्वरूप हो सकता है। वह बहुत साधारण भी हो सकता है क्योंकि उसके पास शक्ति नहीं है, वह केवल उसी से करेगा जो उसके पास है। हार मानकर बैठ जाना और संतोष एक समान नहीं है, यचपि ऐसा दिखता है।

Content: ... प्र. परंतु यदि आपके पास जो कुछ भी है उसी से आपका मस्तिष्क स्वभावतः संतुष्ट हो तो ?

Content: इस तरह का मस्तिष्क आध्यात्मिकता का सहायक उत्पादन है, यह आपको

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Content: आध्यात्मिकता की ओर नहीं ले जा सकता है। आप संतुष्टि का भाव थोपकर इसे अध्यात्म का माध्यम नहीं बना सकते, जब कि लोग सदैव यही सिखाने का प्रयत्न करते हैं।

Content: लोग हमेशा आपको संतुष्ट होना सीखने के लिए कहते हैं। यह बात स्पष्ट रूप से समझ लें, आप संतुष्ट होना नहीं सीख सकते, संतुष्टि का भाव आप प्राप्त नहीं कर सकते। संतुष्टि आपके भीतर स्वतः ही पैदा होगी आध्यात्मिकता, ध्यान के स्वाभाविक परिणाम के रूप में। ध्यान के द्वारा, जीवन से आपको गहरा संतोष मिलेगा, जो आपके पास जितना भी है उसी में संतुष्ट होने की अनुमति देता है।

Content: ... प्र. दूसरे स्वामियों की तुलना में, आप बहुत युवा हैं। क्या आप इसे असुविधाजनक मानते हैं?

Content: कुछ भी सुविधाजनक या असुविधाजनक नहीं है। अंततः मैं लोगों को जो कुछ भी दे सकता हूं लोग उसी में दिलचस्पी लेते हैं। इन सब बातों से कोई भी प्रभावित नहीं होता। हाँ, जहाँ तक आध्यात्मिकता का सवाल है, साधारण "जीवन के अनुभव" मायने नहीं रखते।

Content: देखिये, अनुभव दो प्रकार के होते हैं - अनुभव और अनुभूति। अनुभव जीवन भर एकत्रित किया जाता है। यह उस सीखने जैसा है कि आग जलती है जो सीखा जाता है, जीवन भर सैकड़ों तरह के आग का परीक्षण करने के बाद। पहले आप

Content: लकड़ी के आग को स्पर्श करेंगे और पाएंगे कि वह जलता है, उसके बाद आप गैस लाइट का स्पर्श करेंगे और पाएंगे कि वह जलता है, उसके बाद आप तेल के लैम्प पर हाथ आजमाते हैं और फिर माचिस- और अंत में जब आप यह समझते हैं कि आग हमेशा ही जलता है, तब तक आपके श्मशान घाट जाने का समय हो जाता है! यह अनुभव है। मेरा अनुभव है अनुभूति। यह तब होता है जब आप पहली बार आग का स्पर्श करते ही सीख जाते हैं: कि सभी आग एक जैसे हैं, सभी इच्छाएं, ऐसी ही हैं। इस छलांग को आध्यात्मिकता कहते हैं। यदि आप अनुभव के द्वारा आते हैं तो पूरी जिंदगी बुद्धिमान बनने में गुजार जाती है। अनुभूति को बुद्धिमता की आवश्यकता है, आयु की नहीं। तो उम्र मेरे लिए न सुविधाजनक है न असुविधाजनक- यह ऐसा ही है, बस!

Content: ... प्र. संपूर्ण विश्व में ध्यान के द्वारा सामाजिक रूप से बुरा काम करने वालों को सुधारने का प्रयास हो रहा है जैसे जेल इत्यादि में। क्या आप इन प्रयासों से सहमत हैं?

Content: अवश्य ही हमें ऐसी प्रयास निश्चित रूप से करने चाहिए। यह सब स्थान नकारात्मकता के केन्द्र बन चुके हैं। जिस तरह विश्वविद्यालय सातक बनाते हैं या मठ आध्यात्मिक व्यक्ति बनाते हैं, उसी तरह जेल इन प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अपराधियों के लिए बड़े. बड़े प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले संस्था बन गए हैं बजाए इसके की अपराधियों को सुधार जाए।

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Content: ध्यान इस क्षेत्र में निश्चित रूप से बहुत कुछ कर सकता है- क्योंकि अंततः बदलाव उस आदमी के अंदर से ही आना है। इससे पहले कि आप समाज में बदलाव देखें, हर व्यक्ति के अंदर बदलाव आना चाहिए, हर क्षमतावान अपराधी के अंदर। ध्यान केवल अलग-अलग इंसान को ही नहीं बदल सकता है बल्कि समाज में अत्यंत अपराध दर को भी घटा सकता है।

Content: ... प्र. पाप और पुण्य क्या है ?

Content: जो भी आपको प्रेम और खुशी से भर देती है, आपके व्यक्तित्व को विकसित करती है, जो भी आपको प्रेम और संवेदना का अहसास कराए, वही पुण्य है। जो भी आपको दूसरों से अलग करती है, और दुखी एवं उदासी का अहसास कराती है, वही पाप है। खुशी आपका स्वाभाविक स्वभाव है। जो भी आपको इससे दूर ले जाती है, स्वपी़डन रति करने वाला बनाती हो या परपी़डन रति, जिससे भी आपको अपने लिए या दूसरों के लिए अफसोस हो, वही पाप है।

Content: ... प्र. आध्यात्मिक विषयों में, क्या हमें दूसरों की धारणा की चिंता करनी चाहिए या नहीं ?

Content: जब तक हम दूसरे के लिए सरदर्द नहीं बनते, जब तक हम उनके जीवन की गतिविधियों

Content: में टांग नहीं अड़ाते तब तक हमें दूसरों के धारणाओं की कोई परवाह नहीं करनी चाहिए।

Content: ... प्र. जो आत्मज्ञानी हो जाते हैं वह संस्था क्यों बना लेते हैं ?

Content: एक समय ऐसा था, जब यह रास्ता अकेले चलने के लिए ही बनाया गया था। आज, मैं समझता हूं यह मेरी जिम्मेदारी है कि आनंद और लाभों को सब में फैलाऊं। अवश्य ही आप कह सकते हैं, कि यह वास्तविक आध्यात्मिकता नहीं है। मेरे गहरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर, मैं आपको केवल इतना बता सकता हूं कि, जैसे विवेकानंद कहते थे, वास्तविक आध्यात्मिकता केवल आलोकित अवस्था पा लेना ही नहीं है, बल्कि उसके लाभों को सब में फैलाना है! इस जन्म को मैंने इसी काम के लिए चुना है! इसके लिए जो भी आवश्यक है-यहां तक कि संस्था भी- मुझे बनाए रखना है।

Content: ... प्र. क्या आध्यात्मिक परम्परा आज भी प्रासंगिक है ?

Content: यह हर समय प्रासंगिक ही है। बिना आध्यात्मिक परम्परा के आज हमारा देश कहां पर होगा ? हजारों सालों से वह हमारी संपूर्ण संस्कृति का रखवाला बना हुआ है- संस्कृत और धार्मिक ग्रंथ, भरतनाट्यम से लेकर कालाचारा तक, आयुर्वेद से लेकर सिद्धा तक, धर्म से लेकर आध्यात्मिकता तक, पुर्वजों से मिली इस विरासत की रक्षा मुट्ठी भर कुछ लोग कर रहे हैं!

Content: भागवत के अनुसार, पृथ्वी का अस्तित्व ही आत्मज्ञानियों से टिका हुआ है।

Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

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Content: उन्होंने अपने जीवन को उसमें डालकर इस कला और विज्ञान की रक्षा की है। आज सभ्यता के पास जो कुछ भी है, संस्कृति के नाम पर आप जिसका मजा लेते हैं वह उनका ही दिया हुआ उपहार है। हमारी शताब्दी में भी, अकलंकित रूप में उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी उन्हीं की है, और निरंतरता को बनाए रखने की भी। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Content: ... प्र. परंतु भगवा वस्त्र पहने हुए कुछ लोगों के गलत कामों की वजह से, उनका नाम कलंकित हुआ है ................

Content: मुझे आपसे एक सवाल पूछना है जब हर्षद मेहता- मुंबई शेयर-बाजार घपला आपको याद है ? जब हर्षद मेहता ने देश को अरबों का धोखा दिया था, उसने कमीज़ और पतलून पहनी थी। क्या इसका मतलब है कि कमीज़ और पतलून पहना हर शख्स हर्षद मेहता है?

Content: अगर आप ऐसा सोचते भी हैं तो क्या यह उस तरह के कपड़े पहनने वालों की गल्ती है, या आपकी समझ में गल्ती है ? ऐसे वाक्ये हुए हैं जहां सैकड़ों नकली डॉक्टरों को जनता को धोखा देने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है। तो क्या आप अब प्रत्येक डॉक्टर को शक की निगाह से देखते हैं? क्या आपने डॉक्टर के पास जाना छोड़ दिया है ?

Content: बाहर आइए !

Content: पुराने तर्क भूल जाएं। यह तो केवल भागने के रास्ते हैं। आपकी अज्ञानता के कारण आध्यात्मिक गुरु कुछ नहीं खोते हैं। अगर आप मुझे चूक जाते हैं, तो आप मुझे खो देंगे

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Content: बस।

Content: हर क्षेत्र में धोखे होंगे, संपूर्ण बिरादरी को धोखेबाज घोषित करने से पहले अपनी बुद्धिमता का प्रयोग करें, परीक्षण करें और ठीक प्रकार से चुनें। इस मिथ्या धारणा के कारण सच्चे गुरु भी नहीं पहचाने जाते । देखिये कितने सारे सफाई के काम मुझे करने हैं- आपकी मिथ्या धारणा , को छांटकर अलग करता है, आपके पूर्वग्रहों को निकालता है, आपको प्रमाण देने हैं आदि आदि। मुझे पहले अपने को प्रमाणित करना है

Content: इससे पहले कि मैं आपका परिचय नए धर्म से करवा सकूं, जो आध्यात्मिकता है। यह बदलाव क्रमश: है, परंतु यह होना आवश्यक है। आध्यात्मिक व्यक्तित्व की हमारी धारणा को बदलना ही होगा। नहीं तो गुरुओं को जबरदस्ती अपना ध्यान दूसरे देशों की ओर मोड़ना होगा जहां के लोग खुले दिमाग से उनके संदेशों को ग्रहण करने के लिए तैयार हैं। यह भारतीय समाज में गिरावट की निशानी होगी।

Content: देखें आप लोग पत्रकार हैं। तो आप इस संदेश को समाज तक पहुंचाएंगे। इससे पहले कि आप ऐसा करें, मैं चाहता हूं कि मैं जो भी कहूं उसके बारे में आपकी बिल्कुल स्पष्ट धारणा हो। मैं जानना चाहता हूं कि आप इन उत्तरों से सहमत हुए या नहीं। अगर नहीं, तो सवाल करें। कृपया सवाल करें।

Content: एक बात यही खुली सोच रखें। अपने पूर्वग्रहों और पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष के साथ

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Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

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Content: न आएं।

Content: ठीक है, तो आप सहमत हैं?

Content: ... प्र. (एक पत्रकार): नहीं, मैं सहमत नहीं हूं। मैंने एक बार एक गुरु के सामने समर्पण किया था परंतु वह चल नही पाया ............

Content: क्या आपने सचमुच समर्पण किया था।

Content: पत्रकार: अपनी तरफ से मैंने समर्पण करने की पूरी कोशिश की थी। एक बात आपको समझने की आवश्यकता है। जब आप कहते हैं आपने समर्पण करने की बहुत कोशिश की, इसका मतलब है समर्पण हुआ नहीं था। अगर वास्तव में समर्पण हुआ होता तो, यह सवाल, यह संदेह पैदा ही नहीं होता। यह उलझन और पाखण्ड को छुपाने का रास्ता है।

Content: हम अपने दिमाग में धर्म के बारे में सुन्दर सोच रखते हैं, पर अपने व्यावहारिक जीवन को जैसे हम चाहते वैसे गुजारते हैं। धर्म वह है जिसके साथ जीवन भर सुर मिलाया जाए, यह आंशिक मनोरंजन नहीं है।

Content: वास्तविकता यह है कि, जैसी जिंदगी हम गुजारते हैं, वही हमारा सच्चा धर्म है। वह धन हो सकता है, वह शक्ति हो सकती है, वह कामुकता हो सकती है। वही आपका धर्म है, इसीलिए आप अपनी पूरी जिंदगी इसी विचारधारा के अनुसार बिता देते हैं!

Content: क्या आप समझ गये ? कोशिश करें और पता लगाएं कि आपका वास्तविक धर्म क्या है।

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Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

Content: अपनी विचारधारा और जीवन को अलग रखना पाखण्ड है। आप राजी खुशी जिसे अपना धर्म मानते हों अपने जीवन में उसका पालन पूरी तरह से करें।

Content: ... प्र. पत्रकार: परंतु इस गुरु में मेरी पूरी आस्था भी है। फिर भी ...... देखिये, मैंने आपसे कहा कि, धर्म वह नहीं है जो आस्था ही रह जाए, वह आपके जीवन में घुल मिल जाना चाहिए। धर्म और जीवन को अलग-अलग रखना एक प्रकार का भ्रम है।

Content: पाखण्ड हमारे अस्तित्व पर राज करने लगता है। यदि आप विश्वास करते हैं कि जीवन जीने का एक निश्चित तरीका है या एक निश्चित विचारधारा सही है, तो अपनी जिंदगी को उस तरह ढालने के लिए राजी हो जाएं। नहीं तो, आप जिसे सच समझते हैं उसकी तलाश करें। जो आपका जीवन नहीं बदलती है वह आपके लिए सच नहीं है। अगर कुछ सच है तो उसका एक हल्का सा स्पर्श भी आपकी जिंदगी बदल सकता है। यदि वह आपको अन्दर से नहीं बदलता है, तो उसे जाने दें। उसे थामे रखकर शिकायत न करें। वह विचारधारा आपके लिए सही नहीं थी, बस।

Content: ... प्र. सत्तर के दशक तक, बहुत सी आध्यात्मिक संस्थाएं संस्कृति के स्थानों, धर्म, मंदिर, पवित्र ग्रंथ इत्यादि का रख-रखाव बहुत अच्छी तरह कर रही थी। परंतु अब इसमें गिरावट आई है यह बाहरी हस्तक्षेप से हुआ है या किसी और वजह से ?

Content: जब से ईश्वर के अस्तित्व पर शक करने वालों ने समाज पर अपनी पकड़ बना ली

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Content: है, तब से आध्यात्मिक संस्थाओं के लिए काम करने वाले लोगों की संख्या में बहुत कमी आई है। तंत्र की त्रुटि को हटाने के बजाए, संपूर्ण तंत्र ही बर्बाद हो चुका है। अंततः यह स्वयं समाज के लिए एक दुखद घटना है, समाज इसे नहीं समझ पा रहा है।

Content: मैं जो कुछ भी कह रहा हूं उसकी वास्तविकता को समझने की कोशिश करें। आप इस सोच को अपने लेख में जगह देते हैं या नहीं, अपने जीवन में इनको शामिल करने की कोशिश करें। लोगों में इस सोच को फैलाने के लिए अपने कलम का प्रयोग करें। यह आपका विशेष अधिकार भी है और कर्तव्य भी।

Content: ... प्र. हम विभिन्न गुरुओं द्वारा किए गए चमत्कारों की कहानियां सुनते हैं, जैसे भविष्यवाणी करना। यह कैसे होता है ?

Content: मुझे एक उदाहरण देने दें। मान लें कि आप भीड़ भरे सड़क के किनारे खड़े हैं। अपने दोनों तरफ देखें। आप वाहनों की गति विधि को कहें तो दो सौ मीटर तक देख सकते हैं।

Content: अब मान लें कि आप पास वाले मकान की छत पर चढ़े हैं। क्या आप वाहनों की गतिविधि को अधिक दूरी तक नहीं देख सकते ?

Content: इसी तरह से, साधारण व्यक्ति अपने भूतकाल एवं भविष्यकाल को एक सीमित तरीके से देख सकता है। उच्चस्तरीय चेतना (जो आलोकित अवस्था के बाद आती है) दोनों भूतकाल व भविष्यकाल में बहुत दूर तक देख सकती है। यह एक साधारण बात है। सच

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Content: हमेशा साधारण होता है। केवल साधारण मस्तिष्क इन बातों को पूरी तरह समझ नहीं पाता, इसलिए यह आपको चमत्कार जैसा लगता है। ज्ञानी एवं ज्ञानशक्ति के पास समय एवं स्थान की कोई सीमा नहीं है। इसी तरीके से मेरे कितने मरीजों का इलाज उन देशों में होता है जिसका दौरा मैंने किया ही नहीं। संपूर्ण विश्व में, जिन लोगों ने मुझे कभी देखा ही नहीं, वह भी ध्यान के दौरान मेरी छवि देखते हैं।

Content: ... प्र. आत्मज्ञानी गुरु कर्मकांडों को भी बढ़ावा क्यों देते हैं ?

Content: इंसान के सामने जब महान सत्य को साधारण तरीके से पेश किया जाता है तो वह इंसान के लिए मुसीबत बन जाता है, वह इसे अस्वीकार करता है। वह केवल जटिल कर्मकांडों को ही समझता है क्योंकि मस्तिष्क जटिल है और इसे जटिल अवस्था ही भाता है।

Content: यदि मैं किसी व्यक्ति से केवल आधे घंटे तक शांत बैठकर ध्यान करने के लिए कहता हूं तो वह नहीं कर सकता। परंतु यदि मैं किसी को एक मंदिर की एक सौ आठ बार प्रदक्षिणा (चक्कर लगाना) करने के लिए कहता हूं, तो वह खुशी - खुशी राजी हो जाता है। जटिल चीजों को करने में अहं की संतुष्टि ज्यादा होती है।

Content: परंतु ज्ञानी गुरुओं का संबंध तरीके से नहीं होता, उनका संबंध परिणामों से होता है। जब आप कर्मकांडों को निभाने में व्यस्त होंगे, आपका दिमाग उसी ओर लगा रहेगा। इस समय आपकी अन्तरात्मा मेरे सामने खुली रहती है, और मैं जो आपको देना चाहता हूं दे सकता हूं। यह एक सूक्ष्म तकनीक है। मस्तिष्क जो सवाल

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Content: करता है, मस्तिष्क जो विरोध करता है, उसको किसी दूसरे गतिविधि में व्यस्त रखा जाए। तब मेरे असली संदेश को आपमें विलीन होने की संभावना बन जाती है। कम से कम इस तरीके से, अगर मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकूं, अगर मैं उन्हें लाभ पहुंचा सकूं, तो ऐसा ही हो। ध्यान में प्रवेश करने के लिए पूर्णतः विकसित मस्तिष्क की आवश्यकता होती है। पूरे समाज के व्यस्कता स्तर को उठाने की आवश्यकता है। लेकिन यह हो रहा है। धीमी गति से पर निश्चित रूप से, दुनिया में चारों ओर एक सूक्ष्म बदलाव हो रहा है।

Content: हां तो मुझे लगता है कि समय खत्म हो रहा है। अंतिम प्रश्न लें!

Content: ... प्र. आज की पीढ़ी के लिए क्या ध्यान एक व्यावहारिक विकल्प मार्ग है?

Content: हां अवश्य। विशेषकर आज के समाज में, जहां तनाव इतना ज्यादा है, पारिवारिक रिश्ते टूट रहे हैं, ध्यान एक प्रचंड बदलाव ला सकता है और इसको करने के लिए ज्यादा मेहनत और समय की आवश्यकता नहीं पड़ती। आजकल सभी लोग आध्यात्म के विषय में चिंता करने में बहुत व्यस्त हैं, मैं समझ सकता हूं! परंतु प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा ध्यान के लिए निकालें- कोई भी ध्यान अच्छा है, यह आवश्यक नहीं कि आप उन्हीं तकनीकों का प्रयोग करें जो मैं आपको बताता हूं। उसी का अनुसरण करें जो आप पर सबसे ठीक बैठे, जिससे आपका सुर मिल जाए। आप एक बदलाव अवश्य महसूस करेंगे,

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Content: क्या आध्यात्मिकता आज के समय में प्रासंगिक है ?

Content: केवल अपने जीवन में ही नहीं, परंतु उन तरीकों में भी जिनके द्वारा आप दूसरों तक पहुंचते हैं और समाज में एक निश्चित बदलाव लाते हैं।

Content: धन्यवाद।

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Content: आज परमहंस नित्यानंद का व्यक्तित्व दुनिया भर के लाखों लोगों के लिये एक प्रेरणा है । उन्होंने अपने सच्चे अनुभव के आधार पर परमानंद प्राप्ति को तकनीक बनायी और हर व्यक्त के लिये भेंट की ।

Content: उनकी पद्धति हमें शारीरिक और मानसिक दृष्टि से स्वस्थ गहरी आध्यात्मिक शक्ति देती है । विश्व के लाखों लोगों ने उनकी तकनीक से थोड़े समय में आभूत परिवर्तन का अनुभव किया है ।

Content: वे ऐसे साधन देते हैं जिनसे बुद्धि या प्रतिभा के द्वारा नहीं बल्कि अंतरदृष्टि और अभिज्ञता द्वारा सक्रिय और रचनात्मक जीवन जीने का निर्देश मिलता है । वे बाह्य संसार में श्रेष्ठता तथा आंतरिक संसार में आलोक लाने की राह एक साथ दिखाते हैं । उनके कार्यक्रम व्यक्ति को सहज रूप से भजन - प्रार्थना में लीन होना सिखाते हैं ।

Content: परमहंस नित्यानंद कहते हैं, ‘इस भौतिक संसार सफलता की मास्ट कुंजी ध्यान - है । वह तुम्हारे आंतरिक जगत् में गहरी संतोष देती है ।’ उनके ध्यान - के कार्यक्रम में जो शक्तिशाली तकनीक और प्रणाली होती है, वह व्यक्ति की चेतना को थोड़े समय में ही पुष्टित और प्रस्फुटित होने में मदद करती है ।

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Content: परमहंस नित्यानंद संसार भर के वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्तव्य के साथ काम करके वैज्ञानिक सामग्री के आधार पर रहस्यमय घटनाओं को लिपिबद्ध करते हैं। वे स्वयं अपनी स्नात्यविक व्यवस्था से चिकित्सा विज्ञान के जगत को कुतूहल से भर देते हैं। इस सारे आश्चर्यजनक अवलोकन के बार वैज्ञानिकों को लगता है कि दिल की बीमारी, कैंसर, जोड़ों का दर्द, शराब का नशा आदि की बीमारियों का अनुपात, उनका बढ़ना आदि की स्थिति को बदलने की संभावना हो सकती है।

Content: लाइफब्ीस फाउंडेशन संपूर्ण विश्व में फैला नित्यानंद का वह आंदोलन है जो ध्यान और परिवर्तन के लिये है। इसकी स्थापना २००३ में हुई। तब से अब तक तेंतीस देशों के एक हज़ार केन्द्रों में यह संस्था व्यक्ति को बदल कर मानवता के जीवन में बदलाव ला रही है।

Content: नित्यानंद मेडिटेशन अकादमी (एन एम ए) संसार भर में आध्यात्मिक प्रयोगशालाओं की तरह कार्य करती है, जहाँ आंतरिक विकास गहरा है और बाहरी विकास एक सहज परिणाम है। ये अकादमीयाँ पवित्र वटवृक्ष, विडडी आश्रम, भारत जैसी जगह और स्थान के रुप में देखी जाती हैं, जहाँ ध्यान से

Content: हैदराबाद आश्रम, भारत में भरपूर आध्यात्मिकता देते हैं, जहाँ भौतिक और आध्यात्मिक संसार एक हो जाते हैं और परमानंद पूर्ण जीवन का सृजन करते हैं; जहाँ चेतना की गहराई से सक्रिय बुद्धि निकलती है।

Content: कोलंबस आश्रम, ओहियो, यू एस ए

Content: दुनिया भर की बहुतसी अकादमियों में अनेकों योजनायें विकसित हो रही हैं, कई नई अकादमियों की भी स्थापना हो रही है, जिससे फैली हुई मानवता की विभिन्न क्षेत्रों में सेवा की जा सके।

Content: संस्था द्वारा विश्व भर में विभिन्न प्रकार के भजन-प्रार्थना कार्यक्रम किये जाते हैं तथा सामाजिक सेवायें भी की जाती हैं।

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Content: रोगहर व्यवस्था द्वारा नित्य हीलिंग लोगों को मुफ्त में दिया जा रहा है। युवाओं को मुफ्त शिक्षा, कला और संस्कृति के लिये प्रोत्साहन, सत्संग, व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम, मुफ्त डॉक्टर कैंप, आँखों के ऑपरेशन आदि की

Content: आनंदखेड़े मंदिर की सुविधा दी जाती है।

Content: भारत में आवासीय आध्यात्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक वर्ष के लिये आवासीय गुरुकुल व्यवस्था की गयी है जिससे विश्व भर के बच्चों को गुरुकुल के ढंग से विद्या दी जाये ।

Content: सालोम आश्रम, भारत में और भी बहुत प्रकार की सेवायें उपलब्ध करवायी गयीं है और की जा रही हैं।

Content: नित्य धीर सेवा सेना (एन डी एस एस) के आनंद सेवकों के स्वयं सेवक दल में दुनिया भर के युवक आ रहे हैं। समर्पित स्वयंसेवकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वे बड़े उत्साह के साथ इस मिशन को सहयोग दे

Content: लॉस ऐंजेलेस आश्रम, यूएसए.

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Content: संपर्क करहें:

Content: यू एस ए:

Content: नित्यानंद ध्यानयीठम्

Content: ९२८ हंटिंग्टन डी आर, दारते, लॉस ऐंजेलेस सी ए ९१०१०, यूएसए

Content: फोन: ९१-६२५९८००

Content: ईमेल: [email protected]

Content: यू आर एल: www.lifebliss.org, www.lifeblissgalleria.com [email protected]

Content: भारत:

Content: नित्यानंद ध्यानयीठम्

Content: नित्यानंद पुरी, कल्लूगोफहल्ली, मैसूर रोड, बैंगलोर - ५६२१०९, कर्नाटक, भारत

Content: फोन: ९१ +८० ६५५९ ९८४४ / २७२० २०८४

Content: फैक्स: ९१ +८० २७२८८२०७

Content: ईमेल: [email protected]

Content: यू आर एल: www.dhyanapeetam.org

Content: विश्व भर के अन्य आश्रमों और केन्द्रों के लिये भेंट करें

Content: www.dhyanapeetam.org

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Content: निश्चित रूप से पढने योग्य पुस्तकें :

Content: श्र सरल सत्य - सीधा और प्रत्यक्ष

Content: श्र प्रेम की समझ

Content: श्र चिंता से उत्सुकता तक

Content: श्र आपके प्रश्नों का समाधान

Content: श्र पीड़ा से आनन्द तक

Content: श्र निश्चित समाधान (ग्यारेंटीड सोलुशन्स)

Content: श्र ध्यान के विधियाँ आप के लिए

Content: www.nithyananda.org

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