Books / isbn 979-8-88572-483-8

1. isbn 979-8-88572-483-8

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विषय-सूची

वैदिक परंपरा, समस्त रहस्यमयी योगिक शक्तियों का मूल स्रोत

वैदिक भारत में त्रिनेत्र जागरण

अवतार के त्रिनेत्र जागरण का अनुभव

त्रिनेत्र के रहस्य

त्रिनेत्र जागरण के शक्तिशाली प्रभाव

त्रिनेत्र की शक्तियों का विज्ञान रूप में प्रदर्शन

यूएसए में प्राचीन वैदिक विज्ञान की लोकप्रियता का प्रबंधन

विश्व याला, प्रदर्शन एवं लाभान्वित करने हेतु

त्रिनेत्र जागरण या थिर्ड आई अवेकening℠ में दीक्षा

त्रिनेत्र जागरण के गहन सत्य

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

इनर अवेकनिंग*, जहाँ अवतार त्रिनेत्र जागृत करते हैं

त्रिनेत्र जागरण के अनुभव

आपके जागरण का अगला चरण

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अवतार व महाँसिद्धों के सिद्ध योगी

परम पूज्य परमहंस नित्यानंद जी, नित्यानंद ध्यानपीठम एवं नित्यानंद गुरुकुल के दूरदर्शी संस्थापक हैं जो अद्वितीय महासिद्धियों से सवसम्पन्न एक प्रबुद्ध युवा योगी हैं। वह आज सनातन हिंदू धर्म की स्पष्ट, विधिमान्य, अराजनैतिक वाणी के रूप में आराधित हैं और विश्व में लाखों लोगों द्वारा परम चेतना का जीवित अवतार स्वरुप पूजे जाते हैं। वह हिंदुत्व के सबसे प्राचीन संगठन - श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी (पीठ) के महामंडलेश्वर (प्रमुख) हैं। वह हिंदू दार्शनिक विचारों को प्रभावित करने वाली एक शक्तिशाली वाणी के रूप में सुवैग गति से उभर रहे हैं। परमहंस नित्यानंद एक आध्यात्मिक चिकित्सक, एक ऋषि, यूट्यूब ऑरेकल, एक सफल लेखक और अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक-आध्यात्मिक संस्थान के आध्यात्मिक प्रमुख हैं। वह 5000 वर्ष पूर्व के प्रबुद्ध योगिक गुरुओं की परंपरा के उत्तराधिकारी हैं, जो गुरु दक्षिण भारत में अरुणाचल पवित्र पर्वत पर रहते हैं। परमहंस नित्यानंद गुप्त योग विज्ञान के महासिद्ध हैं जिनका लक्ष्य हमारी महान कुंडलिनी ऊर्जा का जागरण करना है, जो हमारी अपनी उच्चतम क्षमता है। धरती लोक पर एक दुर्लभ ऊर्जा के प्रकटन में, वह हजारों लाखों लोगों की कुंडलिनी जाग्रत कर रहे हैं, जो कई बार विश्व के दूर भागों में बैठे होते हैं; केवल एक दृष्टि माल या स्पर्श से अथवा अपने हाथ के संकेत से। धरती की चेतना के उद्धार के उद्देश्य से, वह व्यक्तियों एवं समाजों की उच्च संभावना को जाग्रत करने हेतु कार्यरत हैं - जिससे की मानवता पूण्ल, शक्त, आनन्द और अद्वितीय भाव से जीवन अनुभव करें।

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भूमरत्न गिरिशिला पर ध्यानस्थ तरुण स्वामी नित्यानंदजी का तिरुवनामलाई, भारत स्थित पवित्र अरुणाचल पर्वत से समायोग अवस्था का दुर्लभ चित्र

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अवतार के

दिव्येल जागरण का अनुभव

"१२ वर्ष की अवस्था में मेरे आत्मबोध के अनुभव के समय, मेरे स्वतः ही दिव्येल जागृत हुए। तब अन्तर एवं बाह्य आकाश की सीमायें खण्डित हो गयीं। मेरा प्रथम अनुभव यह था कि मैं अपने आस पास सब कुछ देख पा रहा था, मेरे ऊपर, मेरे नीचे, चारो ओर, संपूर्ण 360 डिग्री, दसो दिशाओं में, सब कुछ!"

बंद नेत्रों से, मैं अपने चारो ओर सभी दिशाओं में देख सक्ता था। मैने अनुभव किया कि गिरि चट्टान की सतह जिसमें मैं बैठा था, और मेरे शरीर की त्वचा, दोनों मुझे समान रूप से धारण कर रहे हैं; मैं दोनों में समान रूप में जीवित हूँ । वायु, मंद हवा, अस्त होता हुआ सूर्य, उदय होता हुआ चन्द्रमा, संपूर्ण अरुणाचल गिरिपंक्त, समस्त पेड़, पीपे वृक्ष, सबकुछ अति जीवित हो गए थे ।

अगले क्षण ही, मैने अनुभव किया कि मे न केवल देख सक्ता हूँ बल्कि, मैं उन सभको स्वयं में अनुभव कर सक्ता हूँ। मुझे संपूर्ण रूप से ज्ञात था कि मैं ही सारी सृष्टि की आदि अनाहत अनुभूति हूँ । 'चलना' या 'न चलना' जिसे आप 'निकर' या 'दूर' कहते हैं, यह सब धारणायें लुप्त हो गयी । मैने स्वयं को असुरक्षित नही बल्कि शक्तिशाली अनुभव किया।

उन वृक्षों एवं पेड़ पौधों की छोटी से छोटी गतिविधि मेरी गतिविधि थी, और ब्रह्माण्ड के केन्द्र की सर्वोच्च स्थिति मेरी स्थिरथा थी ।

आज, दिव्येल जागरण की दीक्षा से आप मेरे गुरुकुल के बच्चों को और हजारों जन को इस दिव्य दृष्टि को शक्ति का प्रदर्शन करते देख सकतें हैं।

~ परमहंस नित्यानंदजी

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तिनेत्ल जागरण के पवित्र विज्ञान का पुनरोद्बार

अब, तिनेत्ल जागरण या Third Eye Awakening℠ के इस दुर्लभ एवं पवित्र विज्ञान को मानवता के परम शुभलाभ एवं चेतना विकास हेतु अवतार परम पुज्य परमहंस नित्यानन्द जी द्वारा कृपा स्वरुप दिया जा रहा है। चेतनापूर्वक अवतरित, वें एक सिद्ध पुरुष हैँ जो योगियों के योगी हैं। वें सभी रहस्यमयी सिद्धियों से युक्त हैं और अति गहन योगिक अवस्थाओं को धारण करते हैं जो काल, आकाश एवं वस्तु के परे हैं। वें इस महान तिनेत्ल जागरण के विज्ञान और अन्य बहुत से अध्यात्मिक विज्ञानो को दीक्षा के माध्यम से भेंट दे रहे हैं। परमहंस नित्यानन्द विश्व को अनुभविक आत्मप्रमाण और अध्यात्मिक एवं प्राकृतिक रूप में दे रहे हैं की आपकी उद्यतम संभावनाओं को जागृत करना और स्वयं की वास्तविकता का सृजन करना — यह हर व्यक्ति के लिये यर्थात संभव है और केवल कुछ लोगो के लिये सीमित नहीं। केवल एक अवतार, जो कि परमचेतना के मूर्तिमान स्वरुप है, वें आध्यात्मिक कोशों को सरलता से मानवता को प्राप्त करा सकते हैं। इन दिव्य विज्ञानो को बहुत कम समय में अधिक लोग अपने दिनचर्यों में अभ्यास करके उत्तम जीवन लाभ पा सकते हैं।

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त्रिनेत्र के रहस्य

त्रिनेत्र क्या है?

त्रिनेत्र, मनुष्य के लिए उपलब्ध असाधारण शक्तियों में से सबसे अधिक विचार विमर्शित, वादविवादित और तब भी गलत समझी गई सिद्धि के विषयों में से एक है।

संस्कृत में, ‘त्रिनेत्र’ या ‘तीसरे नेत्र’ को अनेक नामों से अभिशब्दित किया जाता है - त्रिनेत्र, चक्षु, आज्ञा चक्र, महानाड़ी, भ्रूमध्य, तपः लोक, शिव लोक इत्यादि।

त्रिनेत्र एक आन्तरिक अंग, सूक्ष्म या अशारीरिक अंग है, जो सभी मनुष्यों में युक्त है। इसे ‘त्रिनेत्र’ कहते हैं क्योंकि जिस क्षण यह जागृत और सक्रिय होता है, उस समय आप अपने दोनों शारीरिक नेत्रों के बिना भी उनकी दृष्टि से परे देखने में समर्थ होंगे।

त्रिनेत्र जागरण की दीक्षा का एक हेतु, स्पष्ट प्रभाव यह है कि - नेत्रों में पट्टी बांधकर भी अथवा दोनों नेत्रों को बंद करके पढ़ पाना या देख पाना ।

त्रिनेत्र जागरण मात्र एक गूढ़ योगिक प्रक्रिया नहीं है। इसका सीधा प्रभाव आपके शारीरिक स्तर पर भी पड़ सकता है।

यह स्पष्ट है कि यह न केवल रहस्यमय पथ और आध्यात्मिक अनुभवों के अन्वेषण करने में आपकी सहायता कर सकता है, बल्कि बहुत सारे असाधारण विषयों एवं वस्तुओं को आपके दैनिक जीवन में घटित करवाता है ।

त्रिनेत्र, ब्रह्माण्ड को आज्ञा पर चलाने का नियंतरण केंद्र

त्रिनेत्र, जिसे ‘आज्ञा चक्र’ या नियंत्रण केंद्र कहते हैं, भ्रुकुटी के मध्य स्थित सर्वोच्च शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है।

‘आज्ञा’ का अर्थ ‘नियंत्रण’ और ‘चक्र’ का अर्थ ‘पहिया’ होता है। आज्ञा चक्र को ‘चक्र राज’ कहते हैं, क्योंकि आपके शरीर के सभी विभिन्न ऊर्जा केंद्र इसी चक्र के द्वारा नियंत्रित होते हैं।

‘आज्ञा’ योगिक शक्तियों को नियंत्रित करने की इच्छा शक्ति का अधिष्ठान (आसन) है जैसे सूक्ष्म दृष्टि, दूर संवेदी और प्राकृतिक शक्तियों पर नियंत्रण एवं अन्ततः अदृक की अनभूति ।

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चक्र: हमारे जीवन कल्याण और आत्म जागरण के मण्डल

चक्र: हमारे जीवन कल्याण और आत्म जागरण के मण्डल

चक्र हमारे जीव-प्रणाली (bio-system) के सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र हैं। वे चेतना के विभिन्न स्तरों के क्षेत्रों के प्रतिरूप हैं, जो कि घूमते हुए चक्र अथवा विभिन्न संख्या में कमलों की पंखुड़ियों के रूप में द्रशित होते हैं ।

चक्रों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता है; वे हमारे सूक्ष्म शरीर में हमारी रीढ़ की हड्डी की लंबाई पर स्थित होते हैं।

हमारे शरीर में सात प्रमुख चक्र होते हैं, जो कि मूलाधार (आधार चक्र), स्वाधिष्ठान (त्रिक चक्र), मणिपूरक (नाभि चक्र), अनाहत (हृदय चक्र), विशुद्धि (कंठ चक्र), आज्ञा (भ्रुकुटी चक्र) एवं सहस्रार (शीर्ष चक्र) हैं।

चक्र शरीर में प्राण, जीवन ऊर्जा को भरने के लिए उत्तरदायी हैं। वे बिल्कुल उन बैट्रीज़ की तरह कार्य करते हैं जिनमें यह ऊर्जा एकत्र होती है और इसे शरीर के चारों और वितरित करती है।

चक्र शरीर की महत्वपूर्ण ग्रंथियों के कार्य को प्रभावित करते हैं। वे शरीर में अच्छी जैन ऊर्जा प्रवाहित करके और अवांछित जैन ऊर्जा को नष्ट करके नलिका विहीन अन्तःस्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) एवं लसिका प्रणाली (lymphatic system) पर परस्पर प्रभाव डालते हैं ।

वे शरीर की गैंग्लिया तंत्रिका (गैन्ग्लिया) से जुड़े होते हैं और तंत्रिका के कार्यों को प्रभावित करते हैं ।

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तिनेल जागरण के शक्तिशाली प्रभाव

शारीरिक नेलों के बिना पढ़ना

विनेल जागरण या Third Eye Awakening℠ की सबसे अधिक प्रत्यक्ष अभिव्यक्तियों में से एक है, शारीरिक नेत्रों का प्रयोग न करके ‘आज्ञा चक्र’ का प्रयोग करके पढ़ने की योग्यता। विश्वभर में ऐसे हजारों सफल प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां पढ़ना, चित्रकला और रंग पहचान, आकार और वस्तुओं की पहचान करना- यह सब दोनों नेत्रों पर पट्टी बांध कर संभव है।

यह प्रदर्शन हमारे शरीर का एकमात्र हष्ट संवेद अंग (visual sensory organ) के रूप में दो नेलों की वास्तविक भूमिका के बारे में हमारी समझ में क्रांतिकारी बदलाव लाते हैं। ये लिनेल पढ़ने की और शारीरिक नेलों द्वारा पढ़ने की प्रक्रियाओं की भिन्नता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।

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नेत्र पर पट्टी बांधकर पढ़ने के समय क्या होता है?

साधारण पठन (शारीरिक नेलों से पढ़ना) एक तीन-चरण की प्रक्रिया है:

१. शारीरिक नेल लिखे हुए शब्दों को इन्द्रियों द्वारा समझते हैं।

२. शब्दों की सूचना हष्ट्य तंतिका के माध्यम से मस्तिष्क को भेजी जाती है।

३. मस्तिष्क शब्द को अपनी सीमित बुद्धि से बोध करता है।

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लिनेल से पठन (शारीरिक नेलों को बंद करके) के केवल दो-चरण होते हैं:

१. लिनेल शब्द को समझता और बोध करता है।

२. यह बोध सीधे मस्तिष्क को भेजा जाता है।

अतः मस्तिष्क, शारीरिक नेलों की सहायता के बिना अपनी अलौकिक अन्तर्दर्शन की शक्ति से सीधे शब्दों को ‘देखता’ और ‘पढ़ता’ है।

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सम्पूर्ण मस्तिष्क का उत्त्प्रेरण

नेत्र बंद करके पढ़ने के समय, संपूर्ण हष्ट्य मार्ग एवं मस्तिष्क (नेत्रों को छोड़ कर) सम्बद्ध एवं सक्रिय होते हैं, जिससे प्रमाणित होता है कि वास्तव में यह ‘दर्शन’ की प्रक्रिया है, न कि मस्तिष्क की अन्य क्रिया।

लिनेल इन्द्रियों में से किसी की इन्द्रिया का कार्य कर सकते हैं। यह अद्भुत प्रक्रिया निर्भर करती है कि प्रक्रिया के समय मस्तिष्क को क्या भाग सक्रिय हुआ है। तो हम मान मस्तिष्क के श्रवण सम्बन्धित भाग को सक्रिय करके बंद कान से भी सुन सकते हैं। इसे एफ. एम. आर. आई. और पी. ई. टी. स्कैन द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

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मस्तिष्क सक्रिय हो जाता है। यह मध्य मस्तिष्क सक्रियकरण नहीं है। नित्यानंद गुरुकुल℠ के दीक्षित विद्यार्थी संपूर्ण मस्तिष्क सक्रियकरण का अनुभव कर रहे हैं, इसके परिणामस्वरूप उन्हें उच्च स्तर के IQ (बुद्धि लब्धि), उच्च भावनात्मक स्थिरता, विलक्षण बुद्धिमत्ता प्राप्त होती है। यह सब कुछ युवा पीढ़ी के लिए अपने चरम पर पहुंचता है।

आज के आधुनिक समाज में बालक एवं युवा मोटापा, अवसाद, थकान और वोरियत, भ्रम, भय, इंटरनेट की लत, हिंसा आदि का सामना कर रहे हैं। तिनेल जागरण इन सभी समस्याओं का समाधान करने में सहायक बन सकता है। नई पीढ़ी अपने सामने आने वाली इन सभी विकृत समस्याओं से मुक्ति पा सकती है और बच्चे अपनी उच्च संभावना को हर्ष और दूरदर्शिता जैसी स्पष्टता से देखना प्रारम्भ कर सकते हैं।

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तिनेल की शक्तियों का विज्ञान रूप में प्रदर्शन

समय आ गया है कि हम गुरुकुल बनायें, वैदिक विश्वविद्यालयों का निर्माण करें - सर्वजपील, शारदापीठ, नालन्दा, तक्षशिला एवं नैमिषारण्य जैसे विद्यालय जहाँ ज्ञान का संचारण शिक्षक के शब्दों व क्रिया कलापों से विद्यार्थी के शब्दों व क्रिया कलापों तक नही होता था। शिक्षक संचारण शिक्षक की जैव-चेतना से विद्यार्थी की जैव-चेतना मे होना चाहिए। इन्ही सबका प्रदर्शन भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धती को पुनर्जीवित करके करेंगे और सम्पूर्ण संसार को अपित करेंगे। मेरे गुरुकुल के बालक गुलाब के बात करते हैं और उनके काँटों को गिरवाते हैं, पत्तों पर पिट्ठी बांध कर पढ़ते हैं, वे वर्षो करवाते हैं, इत्यादि, यह सब सिद्धियाँ भारतीय शिक्षा का केवल एक भाग हैं। हर वैदिक विज्ञान का अध्ययन होना चाहिए, उसे उपयोगकर्ता के अनुकूल सरल बनाकर विश्व के सामने प्रदर्शित करना चाहिए। हम अनुभव के आधार पर इन कार्य प्रणालियो को विश्व के समक्ष प्रदर्शित करेंगे। वास्तविक भारतीय शिक्षा प्रणाली का ध्येय है सत्यों का प्रदर्शन करना और अनुभव को वस्तुओं में प्राण श्वसित करना.... ~ परमहंस नित्यानन्द

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मीडिया में उत्साह यह समाचार तुरंत अनेक अमेरिकी मीडिया द्वारा उठाया गया,, 200 मीडिया घरों ने जैसे समाचार पत्रों, टीवी और वेबसाइटों और प्रिंट मीडिया ने अगले दो सप्ताह तक इस प्रेस विज्ञप्ति के समाचार का प्रकाशन जारी रखा। नित्यानंद गुरुкуль के छात्रों के दिव्यल जागरण (थ्रू आयोर्स अवकानिंग) प्रदर्शंन के बारे में प्रिंट मीडिया और टीवी चैनल वेबसाइटों में किए गए प्रेस विज्ञप्ति के कुछ उद्धारण।

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Girl, 9, reads, plays games blindfolded at Vedic Temple in Montclair By Grace Wong, Shiloh Vision Daily Bulletin posted: September 6th, 7:40 PM EST updated on 6th at 7:40 PM EST 6 COMMENTS MONTCLAIR >> A small girl wearing a traditional dress with gold embroidery stood up with two candles placed at eye level. She was then blindfolded with a soft cotton mask, sat serene amidst clap and amazement while handsfree. Writer on a chair wrote two lines for her. Yogamaatha (The 9-year-old North Carolina's spiritual jewel) handed business cards, books and words written on a small whiteboard for her to read, and to the audience's amazement, she read them all.

Daily Bulletin Spirituality News Sports Entertainment Lifestyle Obituaries Opinion Special Reports

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3 KIDS AMAZE WITH BLINDFOLD READING

India Journal Home Editorial India India America US News Events Advertising About Us Contact Us Archives

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Nine-Year-Old Reads Blindfolded at Business Advocacy Summit On May 13, Nithyananda Yoga Foundation organized a live demonstration of powers of a youngster's yogic power learned through meditation and initiation at Special Holistic School established by Sri Nithyananda Swami in Bangalore, India. Yogamaatha, a nine-year-old girl from North Carolina, stunned an audience of more than 50 high profile professionals attending the 2015 Business Advocacy Summit at Capitol Hill in Washington D.C. by reading fluently - blindfolded. In a demonstration that lasted three hours, Yogamaatha was able to read aloud entire sections from news articles, business cards and other content supplied by the audience at a speed comparable to a nine-year-old reading with open eyes. Double blindfolds and eye pads were used on Yogamaatha to ensure that the readings were foolproof and credible. In attendance were professionals from all over the US, including Pumima Vora, Founder and CEO of National US Indian Chamber of Commerce, and Dr. Ritu Carpenter Soni, Director of Sleep Lab, New York, as well as doctors, medical researchers, bankers, investors and government officials.

13 WTHR.com INDIANA'S NEWS LEADER

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Nine-Year-Old Reads Blindfolded at Business Advocacy Summit Posted: May 23, 2015 11:49PM IST On May 13, Nithyananda Yoga Foundation organized a live demonstration of powers of a youngster's yogic power learned through meditation and initiation at Special Holistic School established by Sri Nithyananda Swami in Bangalore, India. Yogamaatha, a nine-year-old girl from North Carolina, stunned an audience of more than 50 high profile professionals attending the 2015 Business Advocacy Summit at Capitol Hill in Washington D.C. by reading fluently - blindfolded. In a demonstration that lasted three hours, Yogamaatha was able to read aloud entire sections from news articles, business cards and other content supplied by the audience at a speed comparable to a nine-year-old reading with open eyes. Double blindfolds and eye pads were used on Yogamaatha to ensure that the readings were foolproof and credible. In attendance were professionals from all over the US, including Pumima Vora, Founder and CEO of National US Indian Chamber of Commerce, and Dr. Ritu Carpenter Soni, Director of Sleep Lab, New York, as well as doctors, medical researchers, bankers, investors and government officials.

FOX8 WVUE New Orleans

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नेत्रों पर पट्टी बाँध कर पढ़ना - आगे क्या है?

8 जून, 2015 लॉस एंजिल्स और नॉर्थ केरोलाइना से तीन युवा बच्चों ने नेत्रों पर पट्टी बाँधकर पढ़ने की अपनी क्षमता के प्रदर्शन के साथ ग्रेटर लॉस एंजिल्स (मोंटक्लेयर, कोरोना, एनाहेम, नॉरवॉक के नगरों) के सभी दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। प्रत्येक बच्चे ने दर्शकों द्वारा सवाल पूछने की प्रक्रिया के समय बातचीत करते हुए गंभीर रूप से अपनी योग शक्ति को अभिव्यक्त किया। दर्शकों को प्रश्न पूछने एवं स्वयं जांच करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। यद्यपि अन्दर आते समय किसी के मन में कोई संदेह था, वे शक्तियों के अभिव्यक्ति देखकर चकित होकर बाहर गये, और संसार पर इन शक्तियों के विश्व पर विशाल प्रभावों की संभावना से आकृष्ट हो गए। तीन बच्चों ने भारत के एक प्रबुद्ध गुरु परमहंस नित्यानंद जी द्वारा थर्ड आई अवेकानिंग℠ की दीक्षा के माध्यम से इन शक्तियों को प्राप्त किया। दो बच्चों, केशव (6 वर्ष) और ईशा (9 वर्ष), तारानाथी, भारत में पिछले मई में बच्चों के 21 दिवसीय योग एवं ध्यान कार्यक्रम इनर अवेकानिंग® की दीक्षा प्राप्त की, यह कार्यक्रम वयस्कों एवं बच्चों दोनों के लिए था। केवल यह बच्चे अकेले नहीं हैं - दुनिया भर से सैकड़ों बच्चों जिन्होंने नित्यानंद गुरुकुल℠ की शिक्षा ग्रहण की है या इनर अवेकानिंग® कार्यक्रम भारत में भाग लिया है, वे सभी अलग-अलग स्तरों में आंखों पर पट्टी बाँधकर आकार और रंग देखने, आंखों पर पट्टी बाँधकर पढ़ने में और खेलने में सक्षम, इस शक्ति की अभिव्यक्ति कर रहे हैं। नेत्रों पर पट्टी बाँध कर पढ़ना, रंगों की पहचान, आकृतियों की पहचान इत्यादि का लाइव जागरण के माध्यम से प्रदर्शन - यू.एस.ए. याला में शो बिज इंडिया में प्रसारण में किया गया।

लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया

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चिकित्सा एवं वैज्ञानिक समुदाय उत्साहपूर्ण एवं चकित

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बच्चों द्वारा प्रदर्शन एवं न्‍येल विश्‍ोषज्ञ डा. मुरली कृष्‍णा द्वारा परीक्षण, चेन्‍नई, भारत

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डा. श्रीनिवास राव, अरिगवाल आई हास्पिटल के साथ विचार विमर्श करते हुए, चेन्‍नई, भारत

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वाशिंगटन डी.सी. अमेरिका याला के समय नेत्रहीनों का कोलंबिया स्कूल में प्रदर्शन

नित्यानंद गुरुकुलSM की टीम अलग-अलग शहरों में चिकित्सा संस्थानो और स्कूलों का याला कर इस गहन गूढ़ वैदिक विज्ञान जो वैज्ञानिक तथ्यों से परे है, का प्रदर्शन एवं प्रसार करने हेतु सक्रिय रूप से भ्रमण करती है। इन यालाओं को चिकित्सा चमत्कार का पता लगाने के लिए और मानवता के लिए अनंत लाभ अनुसंधान के लिए चिकित्सा समुदाय को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है। कई चिकित्सा विशेषज्ञ अब परमहंस नित्यानंद द्वारा दिक्षित किये गए योगिक बच्चों द्वारा वि‍नेल की शक्तियों के सजीव प्रदर्शन को देख रहे हैं। विने‍ल जागरण के विज्ञान ने भारत एवं विश्वभर की चिकित्सा विरादरी को दंग एवं आश्चर्यचकित कर दिया है, अधिक संख्या में चिकित्सक एवं चिकित्सा व्यवसायी इस अपार्वलित क्षेत्र में होने वाली आगे के अनुसंधानों की सहायता अथवा उसका दायित्व लेने के लिए उत्सुक हैं, जैसे कि: ● चेन्‍नई, भारत में विश्‍व प्रसिद्ध नेल विश्‍ोषज्ञ अस्पाताल, शंकर नेलालय इस विज्ञान को नेत्रहीनों के लाभ के लिये हमारे साथ काम कर रहा है। ● NIMHANS, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्‍थ्‍य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बेंगलूरु, भारत एक विश्व स्तर का मस्तिष्‍क अनुसंधान संगठन - मानवता की मदद एवं नए अवसरों को पहचान करने के लिए, अनुसंधान को आगे बढ़ाने में हमारे साथ काम कर रहे हैं।

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ऊपर: बच्‍चों द्वारा प्रदर्शन एवं शंकर नेलालय आई हास्पिटल के न्‍येल विश्‍ोषज्ञ डाक्‍टरों द्वारा परीक्षण, चेन्‍नई, भारत

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दाये: हिंदू मिशन हास्पिटल में डाक्टरों के साथ विचार विमर्श करते हुए, चेन्‍नई, भारत

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बाये: डा. ए.वी. श्रीनिवासन, न्यूरो फिजिशियन, इमेरिटस प्रोफेसर डा. एम.जी.आर. मेडिकल विश्वविद्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए, चेन्‍नई, भारत

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Below : at NIMHANS National Institute of Mental Health and Neurosciences, India

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गूगल कार्यालय में प्रदर्शन, बैंगलोर, भारत

कानूनी पेशेवरों के सामने प्रदर्शन, बंगलौर, भारत

चिकित्सकों के प्रत्यक्ष, बनसंकरी, सेन्ट्रल, बेग्लुरु

चेन्नई

बाबाजी विश्व योग दर्शन, चेन्नई, भारत

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फ़ेडरेशन औफ़ इण्डो अमेरिकन असोसिएशन्स, यू.एस.ए ने लेनल प्रदर्शन को देखा व प्रशंसा की

अगस्त २०, २०१५ लॉस एंजिल्स, सीए (पीआर वेब)

फ़ेडरेशन औफ़ इण्डो अमेरिकन असोसिएशन्स औफ़ लॉस एंजिल्स (FIA) और युनैटेड फ़ेडरेशन औफ़ इण्डो-अमेरिकन असोसिएशन ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया (UFICA) के सदस्यों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारत के स्वतंतत्रता दिवस को मनाने के लिए, आर्टेसिया, कैलिफ़ोर्निया में आज हज़ारों लोग एकत्र हुए।

कार्यक्रम की आकर्षक मुख्य घटना ने हर किसी को विम्सित कर दिया: दो बच्चों, ईशा और केशव यानामंद्रा, दर्शकों द्वारा लिखित पुस्तकों, और नोटों को सहजता से पढ़ने की अपनी "अलौकिक" शक्तियों का प्रदर्शन अपनी आँखों पर पट्टी बांध कर किया। इन बच्चों ने लेनल जागरण (थर्ड आई अवेकनिंग℠) की दीक्षा एवं ध्यान के माध्यम से इस क्षमता को प्राप्त किया जो उन्हें सीधे अपने प्रबुद्ध गुरु, एवं लोकप्रिय आध्यात्मिक हिंदू संत परम पूज्य स्वामी परमहंस नित्यानंद से प्राप्त हुई है। बच्चों ने यह दीक्षा वाराणसी, भारत, में पिछले मई में Inner Awakening के 21 दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्राप्त की। वीआईपी मेहमानों - कैलिफ़ोर्निया सीनेटर टोनी मेडोज़ा और विधानसभा सदस्य क्रिस्टिना गासिया ने सजीव प्रदर्शन की शुरुआत करने के पहले स्वयं नीलों को पट्टी से बांध कर सत्यापित किया । सारे दर्शक, नेता, मेज़बान, आयोजक, संचालक और हज़ारों की संख्या में उपस्थित दर्शक बच्चों की विशेष क्षमता से बहुत प्रभवित थे।

भव्य उत्सव का समापन एक विशेष पुरस्कार समारोह के साथ हुआ जहाँ परम पूज्य स्वामी परमहंस नित्यानंद, सीनेटर मेंडोज़ा द्वारा सनातन हिंदू धर्म के पुनरुद्धार एवं उनके संरक्षण के लिए पुरस्कार से सम्मानित किये गये।

नित्यानंद गुरुकुल℠ के बच्चों द्वारा इसी तरह के प्रदर्शन और बच्चों के लिए इनर अवेकनिंग कार्यक्रम बैंगलूर, सिएटल, लॉस एंजिल्स, सैन जोस, सेंट्रल टेक्सास, कोलंबस, ह्यूस्टन, शेलोंट, न्यूयॉर्क, सिडनी, मुंबई, बैंगलोर सहित अमेरिका और दुनिया भर के सभी शहरों में आयोजित हो रहे हैं।

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कैलिफ़ोर्निया के सीनेटर मेंडोज़ा परम पूज्य स्वामी नित्यानंद को सनातन हिंदू धर्म के पुनरुद्धार हेतु उनके समर्थन के लिए सम्मानित करते हुए। नित्यानंद संप्रदाय के संन्यासी ने इस पुरस्कार को स्वीकार किया।

U.S. NRI Association Honors Spiritual Guru H.H. Paramahamsa Nithyananda as Thousands Celebrate India's Independence Day in Artesia, California

© PRweb - August 20, 2015

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फ़ेडरेशन औफ़ इण्डो-अमेरिकन असोसिएशन के हजारो जन के समक्ष वैदिक नेल शक्तियों का सजीव प्रदर्शन

नित्यानन्द गुरुकुलSM की एक विद्यार्थी, माँ महेश्वरा विनेल जागरण की शक्तियों का प्रदर्शन ३५०० दर्शकों के समक्ष एफआईएए (फ़ेडरेशन औफ़ इण्डो अमेरिकन असोसिएशन) के वार्षिक भारत महोत्सव, 22 अगस्त 2015 में ओहियो में आयोजित किया गया। एफआईएए के अध्यक्ष नील पटेल प्रदर्शन के समय उपस्थित थे।

FIA के वार्षिक भारत महोत्सव में विशाल समुदाय के सामने मा महेश्वरा।

FIA अध्यक्ष और ओहियो कोलंबस बिजनेसमैन नील पटेल आँखों पर पट्टी बाहर का परीक्षण करते हुए।

बूथ पर सवालों का जवाब!

कोलंबस शेरिफ जैक स्कॉट नेल्स एंव बंधी पट्टी का परीक्षण करते हुए।

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प्रदर्शन कैनडा याला

वैनकूवर वैदिक सांस्कृतिक केंद्र, वैनकूवर, कैनडा में लिनेल शक्तियों का सजीव प्रदर्शन

टोरंटो

टोरंटो में आंखों पर पट्टी बांध कर लिनेल से पठन का प्रदर्शन

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परम पूज्य परमहंस नित्यानंद और श्री अशोक सिंघल, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में नित्यानंद गुरुकुल के बच्चों द्वारा लिखे गए जागरण से पढ़ने का प्रदर्शन

परम पूज्य परमहंस नित्यानंद और श्री अशोक सिंघल, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में नित्यानंद गुरुकुल के बच्चों द्वारा लिखे गए जागरण से पढ़ने का प्रदर्शन

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डॉन बॉस्को ग्रुप ऑफ़ इन्स्टिट्यूशन के अध्यक्ष के सामने प्रदर्शन, बेंगलुरु, भारत

डॉन बॉस्को ग्रुप ऑफ़ इन्स्टिट्यूशन के अध्यक्ष के सामने प्रदर्शन, बेंगलुरु, भारत

जय गोपाल गरोड़िया हिंदू विद्यालय स्कूल के छात्रों और अध्यक्ष वेदांतम जी के समक्ष प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

जय गोपाल गरोड़िया हिंदू विद्यालय स्कूल के छात्रों और अध्यक्ष वेदांतम जी के समक्ष प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

ला कैटलैन जूनियर कॉलेज के सचिव एस राजगोपाल के समक्ष प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

ला कैटलैन जूनियर कॉलेज के सचिव एस राजगोपाल के समक्ष प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

प्रदर्शन विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों में चिकित्सा, शैक्षिक और वैज्ञानिक समुदाय - शिक्षा, प्रशिक्षण और पूर्वानुमान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इस उभरते विज्ञान के पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानने के लिए अति उत्साहित है । विभिन्न क्षेत्रों के कुछ प्रतिनिधि इस विज्ञान के आगे होने वाले अनुसंधान से विश्व लाभ का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं।

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इंजीनियरिंग धनलक्ष्मी कॉलेज मे कर्मचारियों एवं छात्रों के लिए प्रदर्शन चेन्नई, भारत

इंजीनियरिंग धनलक्ष्मी कॉलेज मे कर्मचारियों एवं छात्रों के लिए प्रदर्शन चेन्नई, भारत

वेंकटेश्वर मैटिकुलेशन स्कूल में प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

वेंकटेश्वर मैटिकुलेशन स्कूल में प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

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नव पीडी के दिव्य नेल खोलने के पथ पर

इस विज्ञान एवं इसके लाभ को समाज के लिए नि:शक्त वर्गों तक पहुंचाने की एक पहल के तहत, नित्यानंद गुरुुल के छालों एवं अध्यापकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों, नेलहीन व शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के स्कूलों में, शैक्षिक संस्थानों और जरुरतमंदों को शिक्षा सक्सिडी की पेशकश वाले स्कूलों में लिनेल जागरण के प्रदर्शन एवं नि:शुल्क प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

हष्टिहीनों के रुक्म स्कूल में आचार्य राकुमजी के समक्ष प्रदर्शन एवं चर्चा

कम्युनिटी स्कूल, चेन्नई

पुनामल्ली कॉलिज, चेन्नई, भारत में प्रदर्शन

बीजीसी स्कूल में प्रदर्शन, बनान्दुर, बेंगलुरु डीटी, भारत

कल्लुगोपाहल्ली गवर्नमेंट स्कूल, बेंगलुरु डीटी, भारत

गरोडिया हिंदू विद्यालय स्कूल, चेन्नई

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समाज को वैदिक विज्ञानों से अवगत कराना

श्रीमती चंद्रलेखा, सेवानिवृत्त, भारतीय आई.ए.एस अधिकारी, के सामने प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

एलेक्लॉन भारत, चेन्नई मे

शिवशंकर बाबा की साथ, चेन्नई, भारत

सुशील हरि स्कूल के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के सामने, चेन्नई, भारत

Before an IAS Officer, Chennai, India

कॉलंबस, ओहायो मे प्रदर्शन

होटल अतिथि में, पॉन्डिचेरी, भारत

उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति वल्लीनाय़गम को प्रदर्शन, चेन्नई, भारत

सिद्ध कौन्फ़रेन्स, चेन्नई, भारत

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लिनेल जागरण या थिर्ड आई अवेकनिंग℠ में दीक्षा

'मंत्र हस्तों' या परम सत्य के हस्ताओं ने अपनी दोनों भ्रुकुटियों के बीच स्थित 'भूमध्य' में चेतना का अधिष्ठान (आसन) को जागृत किया है। भूमध्य, लौकिक ब्राऊजिंग का केंद्र है जहां से उन्होंने मंत्रों या पवित्र अक्षरों के दिव्य दर्शन कर आत्मिक अनुभव प्राप्त किए। लिनेल जागरण या थिर्ड आई अवेकनिंग℠ के विज्ञान के ऋषि या मंत्र दृष्टा के रूप में, परमहंस नित्यानन्द जी विश्व में सभी आयर्वर्ग एवं पृथ्वभूमि के हजारों लोगों को लिनेल जागरण में दीक्षा प्रदान कर रहे हैं। विशेष रूप से १४ वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए, दीक्षा शीघ्र ही अभिव्यक्ति बनती है। यह पहले कभी नहीं हुआ कि वैदिक विद्याएं, लिनेल और कुण्डलिनी जागरण के सरूप में आधुनिक विश्व के लिए इतनी सरल बनाई गयी। प्राचीन काल में योगीजन जिन आध्यात्मिक शक्तियों की अनुभूति करने की जिज्ञासा से अपने कई जीवनकाल तपस्या में समर्पित करते थे, आज वही शुद्ध विज्ञान परमहंस नित्यानन्द जी विभिन्न ध्यान कार्यक्रमों में उपहार स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।

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दीक्षा का विज्ञान

दीक्षा एक अत्यंत गोपनीय विधि है, लेकिन यह 'एन्टेनागलमेन्ट' के वैज्ञानिक सिद्धांत से कुछ हद तक वर्णित की जा सकती है। 'एन्टेनागलमेन्ट' शब्द का उपयोग परिमाण सिद्धांत (क्वांटम थ्योरी) में किया जाता है - यह वर्णन करता है कि ऊर्जा-वस्तु के कण किस प्रकार एक दूसरे से पूर्वनिर्धारित रूप से परस्पर प्रभावित होते हैं, चाहे वे कितने भी दूर स्थित हो। इसका अर्थ यह है कि इन में से किसी एक कण की स्थिति और कर्म दूसरे कणो की स्थिति और कर्म को प्रभावित करते है। लिनेल जागरण, आध्यात्मिक चिकित्सा, कुंडलिनी जागरण, उत्तोलन, टेलिपोर्टेशन, मृतरूपण और निराहार (भोजन के परे जीना) की प्रक्रियाओं के पीछे 'एन्टेनागलमेन्ट' का सिद्धांत है। एक प्रबुद्ध गुरु में दूसरों को अपनी उपस्थिति का सूक्ष्म दबाव के द्वारा स्वयं के उच्च स्तर में दूसरों को ऊपर उठाने की शक्ति होती है। जब प्राप्तकर्ता का मन शांत, विचार-रहित मन वाले व्यक्ति के संपर्क में आता है तो 'एन्टेनागलमेन्ट' की वही प्रक्रिया घटित होती है और प्राप्तकर्ता भी विचार मुक्त हो जाते हैं। जब प्राप्तकर्ता मानसिक रूप से ऊर्जा स्रोत से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए तैयार होता है तब जागरण की घटना सर्वाधिक प्रभावशाली रूप से घटित होती है। दीक्षा के समय, 'एन्टेनागलमेन्ट' प्राप्तकर्ता की जैव-स्मृति (bio-memory) में व्याप्त हो जाता है। इस कारण दीक्षा के स्थाई शारीरिक एवं मानसिक प्रभाव होते है।

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दीक्षा एवं कुण्डलिनी जागरण

नित्यानन्द विश्वविद्यालय में किये गए शोधों से पता चला है कि दीक्षा के परिणाम स्वरुप कुण्डलिनी, हमारी स्वयं की उच्च अन्तः शक्ति का जागरण सहज रूप से होता है। तंतिका विज्ञान (neuroscience) में हुए शोधों से ज्ञात हुआ है कि दीक्षा हमारे शरीर और मस्तिष्क को कुण्डलिनी शक्ति से भर देती है। जब कुण्डलिनी रीढ़ की हड्डी (मेरुदण्ड) में सुप्रज्ञा नाड़ी (ब्रह्माण्डीय ऊर्जा की मुख्य नाली) द्वारा ऊपर उठती है, यह मस्तिष्क वक्र प्रतिष्ठित करती है जो मस्तिष्क के उन गैर-यान्त्रिक सुप्त भागों को जागृत करता है जिनका हमने पहले कभी उपयोग नहीं किया है। सम्वद्धता बढते हुए स्तर के साथ, सम्पूर्ण मस्तिष्क जीवित हो जाता है, चेतना शक्ति के सबसे बड़े सुचालक के रूप में परिवर्तित हो जाता है जो हमे - आरोग्य, सशक्त बनाकर जीवन परिपूर्ण करता है। हमारे अन्दर जागरुकता के बढ़े हुए स्तर, उच्च बौद्धिकता, अधिक रचनात्मकता, आनन्द और स्वास्थ्य तीव्र गति से अभिव्यक्त होने लग जाते हैं। जब कुण्डलिनी 'आज्ञा चक्र' को स्पर्श करती है, तब यह लिनेल दृष्टि, उत्तोलन, मृतरूपण और निराहार जैसी असाधारण क्षमताओं को जागृत करती है। "लिनेल जागरण मान आपकी साधारण आवश्यकताएं जैसे स्वास्थ्य, धन आदि का ही नहीं, यह जीवन के सम्पूर्ण नए आयामों को जगत करता है। आपकी कुंडलिनी शक्ति जागृत होकर आपकी नाक और भृकुटी के मध्य ऊर्जित होती है - इसी बिंदु पर लिनेल स्थित होता है और उसकी अनुभूति होती है।" ~ परमहंस नित्यानन्द

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थिर्ड आई अवेकनिंग या तिनेत जागरण के लाभ

Research findings based on information pulled from program participants. Finds are subjective in nature. - 36 -

बुद्धि में वृद्धि आ इ क्यू आत्मविश्वास व रचनात्मकता थिर्ड आई अवेकनिंग भावनात्मक स्थिरता स्मरण शक्ति

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उच्च स्तर की बौद्धिक जागृति (बुद्धि लाभ में तीव्र गति से वृद्धि) तेज, प्रभावशाली स्मरण शक्ति उच्च भावनात्मक स्थिरता अन्तः आत्मविश्वास परिस्कृत रचनात्मकता

मानवता के लिए अकल्पनीय लाभ सामूहिक तिनेल जागरण दृष्टि के प्रभाव और विस्तार मन की सोच से परे है। उदाहरण के लिए, तिनेल जाग्रत नेतहीन व्यक्तियों को कुछ पढ़ने के लिए बैलेंस्ड का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी। तिनेल जागृत डॉक्टरों को अपने रोगियों की बीमारी की वास्तविकता समझने के लिए केवल स्कैन और एक्स-रे पर भरोसा करने की जरुरत नहीं होगी।

एक्स-रे हष्टि दूरदर्शन के हष्टि थिर्ड आई अवेकनिंग अतहष्टि में वृद्धि काल चक्र को भेदन

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उच्चस्तरीय तिनेल जागरण के लाभ अतहष्टि और पूर्वाभास की परिस्कृत शक्ति आर पार देखने की शक्ति (X-ray vision) छिपे हुए लेखन को पढ़ने की क्षमता बहुत दूर से पढ़ने की क्षमता भूत एवं भविष्य की घटनाओं को जानने की क्षमता

नेताओं पर पर्दा बांध देखना तिनेल जागरण के केवल प्रारंभिक और ह्रश्यमान प्रभावों में से एक है। जागरण के गहरे स्तर के साथ, यह तंत्र और आकाश दोनों में प्रवेश करना संभव हो जाता है। किसी भी आसन्न आपदा, सुनामी से लेकर आतंकवादी हमलों तक को जागृत लोगों द्वारा समय से पहले देखा जा सकेगा।

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लिनेल जागरण के गहन सत्य

आपके नेलों और इन्द्रियों को क्या प्रबुद्ध करता है?

कभी आपने विचार किया हैं कि वह क्या शक्ति है जो हमारी इन्द्रियों को प्रबुद्ध करती है, जो हमारे नेलों को देखने योग्य बनाती है, जिससे हम स्वप्न भी देख पाते हैं?

केनोपनिषद में, एक जिज्ञासु अपने गुरु से पुछता है - "किसकी इच्छा से मन अपने लक्ष्य या वस्तुओं की ओर जाता है - केनेप्ति पत्ति प्रेपितं मनः ? किस दिव्य शक्ति के द्वारा निर्देशित, चक्षु (नेल) और श्रोत (कान) अपने कृत्यों में कार्यरत है? - चक्षुः श्रोत्रं कषो देवो युनक्ति ।"

संदरता से, गुरु रहस्य बताते हैं - "चेतना कर्णो के कर्ण है, मन के मन है, वाणी की वाक शक्ति है, नेलों के नेल - चक्षू है जो दिव्य दृष्टि की शक्ति है। धीर प्रबुद्ध जन स्वयं को इन्द्रियों से मुक्त कर, इस क्षणिक अस्यायी जगत से ऊपर उठकर शाश्वत हो जाते हैं, अमृतः भवन्ति ।"

लाखों जन की चेतना के जागरण करतां, परमहंस नित्यानन्द जी दिव्य नेल की शक्ति के रहस्य को बताते हैं:

सुनिए: जिस प्रकार आपके दो नेल हैं, उसी प्रकार आपमें एक तीसरी संभावना है जिससे आप पूरे विश्व को, पूरे ब्रह्मांड को अनुभव कर सकते हैं, न केवल देखने के माध्यम से ।

लिनेल माल देखने के कार्य हेतु नही है। इनसे हम सुन, स्पर्श, अनुभव, कार्य भी कर सकते हैं, अतः लिनेल एक नई शक्तिशाली संभावना है। यह लिनेल कहलाता है क्योंकि जिस क्षण में यह सक्रिय होता है सबसे पहले आपमें यह होता है कि - आप अपने शारीरिक अंगों के परे देख और सुन सकते हैं।

आप संपूर्ण जीवन को उच्च आयामों में देखना, अनुभव करना प्रारंभ करते हैं। आपकी कुंडलिनी शक्ति उच्च स्तर पर रहना प्रारंभ कर देती है, अतः यह आपको सदैव 'पूर्णता' के उच्च स्तरो और उत्तम स्वास्थ्य में रखता है, और आपकी उत्तम संभावनाएँ प्रकट होती है।

आज्ञा या लिनेल: लौकिक विचारण का केन्द्र (cosmic browsing center)

जीवन देखने के साथ प्रारम्भ होता है। चाहे आप नेलहीन हो या आपके भौतिक नेल हो, आप अपने अन्तः नेलों से देखते रहते हैं।

लिनेल दृष्टि अन्य कुछ नहीं बल्कि 'चेतनापूर्ण दृष्टि' है! यह आपके मस्तिष्क के गैर-यांतिक भागों को सक्रिय करती है। इस कारण आप असाधारण शक्तियाँ जैसे दुरश्रवन, मृतरूपणा, पदार्थीकरण एवं दिव्य दृष्टि का अनुभव करने लगते हैं।

लिनेल ब्रह्मांड के द्वार की तरह है। लिनेल के माध्यम से आप ब्रह्मांड से कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं। उसी प्रकार, आप लिनेल की सहायता से ब्रह्मांड में कुछ भी निर्देश भेज सकते हैं।

ब्रह्मांड में जो कुछ भी लिनेल के माध्यम से भेजा जाता है उसका अनुभव तत्काल ही होता है।

लिनेल माल भ्रूमों का केन्द्र (brow center) नहीं है; यह विचारण का केन्द्र (browsing center) भी है! ठीक उसी प्रकार जैसे इन्टरनेट ब्राउज़िंग सेन्टर से आप इन्टरनेट की दुनिया में से कुछ भी डाउनलोड या अपलोड करते हैं, लिनेल के माध्यम से भी आप ब्रह्मांड से कुछ भी डाउनलोड या अपलोड कर सकते हैं। यह ब्रह्मांडीय विचारण केन्द्र है।

कोई भी 'आकाशीय अभिलेख' जिसमें ब्रह्मांड में भूत, वर्तमान एवं भविष्य में घटित हर घटना की छाप अंकित होती है, जो आकाशीय मंडल में संग्रहीत होते हैं, उस व्यक्ति द्वारा डाउनलोड किये जा सकते हैं जिसका लिनेल जागरण उचित दीक्षा के द्वारा होता है।

लिनेल दृष्टि 'चेतनापूर्ण दृष्टि' है

अब हम लिनेल जागरण के गूढ सत्यों को समझते हैं। सुनिए: आपका जीवन देखने के अलावा और कुछ नहीं है। देखना ही आपका जीवन है।

यदि आप नेलों के माध्यम से कुछ देख सकते हैं, तो आप अपने भौतिक शरीर के द्वारा इसका अनुभव कर सकते हैं।

यदि आप अपने मन के माध्यम से कुछ देख सकते हैं, तो आप अपने मानसिक शरीर के द्वारा उसका अनुभव एवं उसको समझ सकते हैं।

यदि आप अपनी भीतरी अन्तर आकाश या अपनी चेतना के द्वारा कुछ देख सकते हैं, तो आप इसके स्वामी के रूप में इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या लिनेल दृष्टि एक वास्तविक आध्यात्मिक शक्ति है?

लिनेल दृष्टि स्पष्ट रूप से एक सिद्घि, एक दिव्य शक्ति है, जो आपको एक अवतार द्वारा लिनेल जागरण की दीक्षा से और उचित प्रक्रिया करने से प्राप्त होती है। यह कोई राह चलता जादू नहीं है। यह हजारों लाखों लोगों में उत्पन्न किया जा सकता है। इसमें कुछ भी छल नहीं होता है। इसके कोई जादुई नहीं है। यह शुद्ध आध्यात्मिक शक्ति है, गूढ़ विज्ञान है।

क्योंकि आपके पास ब्रह्माण्ड को नियमित करने की चाबी है, आप वह सब कुछ प्राप्त करने में सक्षम होंगे जो आप जीवन में अपेक्षा रखते हैं, चाहे वह धन अथवा शारीरिक आराम, सफलता अथवा आत्मबोध, क्योंकि ब्रह्माण्ड आपकी इच्छाओं का सम्मान करेगा।

शिव ने देवी को विद्या प्रदान की थी। मैंने इन तकनीकों को प्रयोग किया है और उन्हें आधुनिक मन और शरीर के अनुकूल परिवर्तित किया है, जिससे की आपका सुरक्षित और प्राकृतिक जागरण हो, सबसे सरल रूप से। अतः यह तकनीक पूर्णतः सुरक्षित है और इनके कोई नकारात्मक दुष्प्रभाव नही है। इनका केवल एक ही प्रभाव आप अनुभव करेंगे - आनंद, बुद्धि, शक्ति और आत्मज्ञान।

क्या लिनेल जागरण एक जादू है या एक विज्ञान?

जब कोई अनुभव सफलतापूर्वक बार बार एक ही परिणाम देता है तो इसे विज्ञान कहते हैं, जादू नहीं। हजारों बच्चे एवं वयस्क आज लिनेल जागरण के विज्ञान का यहीं सफलतापूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं:

नित्यानंद गुरुкуль SM

नित्यानंद बाल विद्यालय

कल्पतरु: वयस्कों के लिए पूरा दिन अभिव्यक्ति कार्यक्रम

एन- मेमोरी: बच्चों के लिए पूरा दिन स्मृति कार्यक्रम

इनर अवेकनिंग: वयस्कों और बच्चों के लिए 21 दिन का परिवर्तनकारी कार्यक्रम

क्या लिनेल जागरण सदैव के लिए होता है?

हाँ। एक बार आपका लिनेल जागृत हो जाये, यह स्थाई होता है। यदि आपने पहले लिनेल जागरण को पहले अनुभव किया है, परन्तु कुछ समय बाद यह अनुभव होना बंद हो जाये, तो सम्भावनाये कि आपका भौतिक कभी भी लिनेल जागरण नही हुये थे।

मेरे दिनचर्या के जीवन में लिनेल जागरण किस प्रकार उपयोगी होता है?

लिनेल जागरण से आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में परिवर्तन देखेंगे। यह आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करेगा। यह आपको आपकी शारीरिक अथवा मानसिक पीड़ा को समझने में सहायक होगा और आपके शरीर को पुनः स्वास्थ्य बनाएगा, क्योंकि लिनेल अंतरजाल एवं इच्छा शक्ति का केंद्र है।

यह आपको अच्छे समबन्ध रखने में मदद करेगा, क्योंकि आप व्यक्तित्व को जानेंगे उसके व्यवहार को नही। आप लोगों को सुनने की स्थिति में लाकर उनसे बात करने में समर्थ होंगे और उन्हें पूर्णता प्राप्त करने में सहायता करेंगे।

आप सरलता से वह कुछ भी प्राप्त करने में समर्थ होंगे जो आप लोगों से चाहते हैं।

क्या लिनेल जागरण किसी प्रकार से असुरक्षित हो सकता है?

अन्य प्रक्रियाओं की भांति, यदि आप स्वयं ही इस तकनीक का प्रयास करते हैं या किसी अयोग्य व्यक्ति जिसका स्वयं का लिनेल जागरण नही हुआ है उसके निर्देशन में लिनेल जागरण संकट से भरा हो सकता है। इसके बुरे प्रभाव भी पड़ सकते हैं। अतः सदैव उसी प्रबुद्ध व्यक्तित्व के निर्देशन में लिनेल जागरण करें जो इस विज्ञान में महासिद्ध हो।

जो वैदिक परम्परा में योगम रुद्र हैं वह सबसे सुरक्षित हैं, क्योंकि यह इस ज्ञान के मूल स्त्रोत वैदिक परम्परा में से ली गयी है। मैंने व्यक्तिगत रूप से इन तकनीकों का प्रयोग किया है और अनुभव किया है, यह पूरी तरह से वैदिक परम्परा द्वारा प्रमाणित है। वे शिव आगम से ली गयी है - जो भगवान

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लिनल के जागरण में सहायक अभ्यास

भारत में नियमित जीवन में, लोग निरन्तर लिनल पर कार्य करते हैं। कुमकुम (ललाट पर लगाई जाने वाली परिष्कृत हल्दी) या पवित्र भस्म को लगाना लिनल पर कार्य करने की एक तकनीक है; निरन्तर आपका ध्यान लिनल पर रहेगा। लिनल के लिए ध्यान भोजन है। यदि आप लिनल पर ध्यान देना प्रारम्भ करते हैं, तो यह जागृत हो जाएगा। यह ऊर्जा की अभिव्यक्ति करना प्रारंभ कर देगा।

तकनीक आरामदायक सुखद आसन में अपने सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को एक सीधी रेखा में रख कर बैठें। शांत हो जाएं और कुछ गहरी सांस लें। चरण १ (खुले नेत्रों के साथ) अपनी भ्रुकुटी के बीच के स्थान में अपना ध्यान केन्द्रित करें। विकल्पना करें कि आपके लिनल खुले हुए हैं; आप लिनल के द्वारा ही देख रहे हैं। यह पहली बार थोड़ा कठिन लग सकता है, लेकिन कुछ ही मिनटों में आप यह करने लगेंगे। ५ मिनट चरण २ (बंद नेत्रों से) अपने नेत्रों को बंद करें और एक तीत्र सुनहरे प्रकाश को आकार के आपके शरीर में प्रवेश करने की विकल्पना करें। प्रकाश आपके शीर्ष में प्रवेश कर रहा है और आपके लिनल पर केन्द्रित हो रहा है, क्रियाशील, उज्जोमान और सक्रिय हो रहा है। ३ मिनट चरण ३ (खुले नेत्रों के साथ) अब, खुले नेत्रों के साथ, अपने लिनलों से मेरे लिनलों को देखें - उस लाल बिंदु पर जहाँ कुमकुम है। लिनल के माध्यम से, मेरे लिनलों पर ध्यानपूर्वक देखते रहें। विकल्पना करें कि आपके भ्रुकुटी के मध्य में एक लाल रंग का छेद है और तीव्रता से मेरे लिनलों को देखें। चरण ४ आराम करें। अपने नेत्रों को बंद करें। यदि आप चाहें तो आप जहाँ भी बैठे हों, वहाँ आराम कर सकते हैं।

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लिनेल जागरण के अनुभव

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"जब मैं आंखों पर पट्टी बांध कर पढ़ती हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि मानो सब कुछ सिर्फ एक चित्त की तरह आ रहा है। यह आता है और चला जाता है। जैसे कि एक चित्त को कैसे देखती हूं, कभी एक चित्त की तरह या कभी उस तरह जैसे कि सामान्य रूप से दो आंखों के साथ अपने चारों ओर देखती हूं। सबसे पहले जब यह आता है तो आपको आत्मविश्वास होना चाहिए। उसी आत्मविश्वास से यह आपको सभी वस्तुओं के लिये लाभप्रद होगा। मेरे लिए एक इच्छा और एक संकल्प के बीच कोई अंतर नहीं है। उदाहरण के लिए, जब मुझे एक खिलौना चाहिए होता है तो मैं इसकी इच्छा करती हूं और खिलौना तुरंत आ जाता है।" ~ योगमाता, 9 वर्षीय लिनेल की शक्तियां व्यक्त करती हुई

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"स्वामीजी के द्वारा मेरे लिनेल जागृत होने के बाद, मैं आंखों पर पट्टी बांध कर आराम से पढ़ सकती हूं। सबसे आश्रर्यजनक बात यह है कि मैं तमिल और गुजराती जैसी भाषाओं को भी पढ़ सकती हूं, जो कि सामान्य रूप से मैं पढ़ना नहीं जानती! इन अनुभवों के बाद, मुझे लगता है कि मुझमें बहुत बदलाव आ गया है।" ~ माँ प्रज्ञान, बैंगलुरु, भारत नित्यानंद गुरुкуль की छात्रा

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"दीक्षा के बाद मैं मंच पर गयी और मैं चौंक गयी थी कि मैंने स्वामीजी के ठीक सामने कुछ शब्द पढ़े। और यह केवल मैं नहीं थी! उस दिन स्वामीजी के द्वारा लगभग 600 लोगों के लिनेल जागृत हुए थे। यह अकल्पनीय है कि स्वामीजी हमारे प्राचीन रहस्यमय विज्ञान के पुनरुद्धार के लिए और दुनिया के लिए क्या कर रहे हैं।" ~ पूर्णिमा (माँ नित्य देवी), सिंगापुर शिवोहम इनर अवेकनिंग कार्यक्रम की प्रतिभागी, मई 2015

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"योगमाता मुझे हर दिन दिखाती है कि किस व्यक्ति पर विश्वास करने और यह जानने कि आप सब कुछ कर सकते हैं का क्या अर्थ है। वास्तव में कुछ भी संभव है। उसका जीवन का सामना करने का हष्टिकोण बहुत सुंदर और प्रेरणादायक है। वह बहुत बुद्धि और परिपक्वता को व्यक्त करती है। दीक्षा के बाद वह नए विषयों को बहुत जल्दी जानने में सक्षम है। हमें ज्ञात था कि जब हमने गुरुकुल में उसका प्रवेश कराया, स्वामीजी उसे एक उत्तम एवं सफल मानव बनाने की शिक्षा देंगे, पर हम कभी इन शक्तियों की अपेक्षा ही नहीं कर सकते थे।" ~ माँ शिवज्ञान, योगमाता की माता

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"यह सब भीड़ के बीच एक स्पष्ट, तीव्र अनुभूति के साथ शुरू हुआ जिससे पूरे शरीर में एक हल्कापन सा अनुभव होने लगा। जिस क्षण स्वामीजी ने दीक्षा प्रारंभ की उसी समय एक शांत तीव्र ऊर्जा की अनुभूति हुई। यह बीते हुए समय के साथ और अधिक गहरा होता चahie गया। यह एक शक्तिशाली अनुभव बन गया, और कुछ ही मिनटों का यह वहाँ शरीर का अनुभव (ओबीई) 40 मिनट तक मैंने अच्छी तरह अनुभव किया। मैंने कभी आशा ही नहीं की थी कि ऐसा होगा!" ~ शक्तिवेल, मुंबई, भारत शिवोहम इनर अवेकनिंग कार्यक्रम के प्रतिभागी, मई 2015

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"स्वामीजी की दीक्षा के बाद, मैं आकृति और अक्षरों को पहचान करने में सक्षम हूं। मैं एक आलेख कलाकार हूं, और मैं आंखों पर पट्टी बांध कर चित्रकारी कर सभी कलाकृति सही स्थान में हैं, यह देखकर आंनद ले रही हूं!" ~ एन-मेरी कासू, फ्रान्स, शिवोहम इनर अवेकनिंग कार्यक्रम की प्रतिभागी, मई 2015

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21 दिवसीय इनर अवेकनिंग कार्यक्रम के लिये एक चलनापूर्ण संकल्प ले, अपने और अपने बच्चों के लिये। महादेव, शिव की पवित्र नगरी, वाराणसी में अपने लिनेल जागरण की दीक्षा प्राप्त करें। जागृत आत्माओं की नगरी में जागरण का अनुभव करें। अपने जीवन का उद्धार और अपने भविष्य को पुनःलिखने की शक्ति प्राप्त करें। अपने संकल्प के लिये परमहंस नित्यानन्द से आशीर्वाद प्राप्त करें।

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नित्यानान्द गुरुकुल के विद्यार्थी, शिक्षक एवं स्वयं-सेवक इस समय भारत, अमेरिका, कैनेडा, मलेशिया, सिंगापुर और दुबई आदि के चुने हुए नगरों में श्रमण कर रहे हैं।

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नित्यानान्द गुरुकुल एवं नित्यानान्द संघ के लिनेlत जागृत बालकों द्वारा प्रदर्शंन। 8 से १४ वर्ष के सभी बच्चों को आचार्यों द्वारा नि:शुल्क प्रशिक्षण। वयस्कों को अनुरोध पर नि:शुल्क प्रशिक्षण। तत्काल एवं स्पष्ट दिखाई देने वाले परिणाम (१४ वर्ष से कम आयु के बच्चों में १ दिन में)। अपने नि:शुल्क प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण को आज ही बुक करें।

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हम Third Eye Awakening के प्रशिक्षण की सफलता सबके लिये सुनिश्चित करने के लिये हर संभव प्रयास कर रहे हैं, इस विज्ञान को विकसित कर और अधिक अनुसन्धानों द्वारा। तथापि कृपया ध्यान दें कि हर व्यक्ति के लिये परिणाम प्राकृतिक रूप से भिन्न हो सकते हैं, यह उनकी व्यक्तिगत क्षमता एवं तैयारी पर निर्भर करता है।

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