1. Pancha Brahma Upanishad
Text
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अथ पैप्पलादो भगवान्भो किमादौ किं जातमिति । सद्यो जातमिति किं भगव इति। अघोर इति । किं भगव इति। वामदेव इति । किं वा पुनरिमे भगव इति । तत्पुरुष इति । किं वा पुनरिमे भगव इति। सर्वेषां दिव्यानां प्रेरयिता ईशान इति । ईशानो भूतभव्यस्य सर्वेषां देवयोनिनाम्॥
atha paippalādo bhagavānbho kimādau kiṃ jātamiti । sadyo jātamiti kiṃ bhagava iti। aghora iti । kiṃ bhagava iti। vāmadeva iti । kiṃ vā punarime bhagava iti । tatpuruṣa iti । kiṃ vā punarime bhagava iti। sarveṣāṃ divyānāṃ prerayitā īśāna iti । īśāno bhūtabhavyasya sarveṣāṃ devayoninām॥
एक बार शाकल के द्वारा पूछने पर कि सर्वप्रथम क्या उत्पन्न हुआ? पैप्पलाद ने उत्तर देते हुए कहा-सर्वप्रथम ‘सद्योजात’ नामक ब्रह्म का आविर्भाव हुआ। शाकल ने पूछा-इसके अतिरिक्त क्या और भी कोई अन्य भेद है? पैप्पलाद जी ने कहा- ‘हाँ, ‘अघोर’ है। शाकल ने फिर प्रश्न किया कि क्या और भी अन्य भेद है? पैणलाद ने उत्तर दिया- ‘वामदेव । शाकल ने पुनः पूछा- क्या यही भेद हैं?’ पैप्पलाद जी ने कहा ‘नहीं, ‘तत्पुरुष’ नामक एक और भी भेद है। शाकल ने पुनः प्रश्न किया- अच्छा तो क्या यही चार भेद है? पैप्पलाद ओ ने कहा नहीं, सभी देवों को प्रेरित करने वाला ‘ईशान’ नामक एक भेद और है। यह सभी भूत, भविष्यत् एवं समस्त देवयोनियों का शासक है॥