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अथ ह वै स्वयंभूर्बह्मा प्रजाः सृजानीति कामकामो जायते कामेश्वरो वैश्रवणः ॥
atha ha vai svayaṃbhūrbahmā prajāḥ sṛjānīti kāmakāmo jāyate kāmeśvaro vaiśravaṇaḥ ॥
एक बार स्वयंभू भगवान् ब्रह्माजी के मन में यह आकांक्षा प्रादुर्भूत हुई कि “मैं प्रजा का सृजन करूँ”। उसी सृष्टि क्रम में कामेश्वर (रुद्र) एवं वैश्रवण की उत्पत्ति हुई ॥