Books / Saral Samudrik Shastra — Face Reading

2. Saral Samudrik Shastra — पंचांगुली देवी

पंचांगुली देवी

हाथ मनुष्य का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है। यह कल्याण की चरम सीमा को धारण करने वाला है, अर्थात् हाथ से ही इस संसार में धन-सम्पत्ति तथा शोभा-श्री प्राप्त की जाती है। इस हाथ की पांचों अंगुलियां अधिष्ठात्री देवियां हैं जो साक्षात् इन्द्र की शक्तियां हैं।

हस्तेन पाणिग्रहणं पूजाभोजनशान्तयः। साध्या विपक्षविध्वंसप्रमुखाः सकलाः क्रियाः।।

[चित्र: श्री पंचागुली महादेवी]

श्री पंचागुली महादेवी


हाथ ही समस्त कर्मों का साधन है। इसके द्वारा ही संसार के धर्म के पालन के लिए विवाह किया जाता है। इसी से पूजा, यज्ञ, दान, भोजन, शान्ति तथा शत्रुनाश किया जाता है। अतः यह हाथ सभी क्रियाओं का कारण है। इन सब क्रियाओं के लिए भी हाथ में अंगुलियों का होना परम आवश्यक है। यही कारण है कि हाथ की अंगुलियों को महादेवी कहा गया है ।

इसीलिए हस्तशास्त्र के ग्रंथों में पंचागुली महादेवी की उपासना का विधान है। इसकी सिद्धि प्राप्त करने पर हस्तरेखा विद्वान निश्चय ही सफल भविष्यवक्ता बन जाता है। यहां पर पंचागुली महादेवी की सिद्धि का विधान दे रहे हैं जिससे साधक लाभान्वित हो सकेगा।

श्री पंचागुली यंत्र