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6. Saral Samudrik Shastra — मुखाकृति पर तिल और उनका प्रभाव

मुखाकृति पर तिल और उनका प्रभाव

  1. यदि चेहरे पर दाहिने भाग में लाल या काला तिल हो, तो वह व्यक्ति यशस्वी, धनवान तथा सुखी होता है।
  2. यदि शुक्र रेखा के बाईं ओर काला तिल या लाल तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति कामी या पर स्त्री-गामी होता है।
  3. यदि चन्द्र रेखा के दाहिनी ओर तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति समाज में यशस्वी होता है और आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है।
  4. यदि मंगल रेखा के मध्य में तिल हो, तो वह सन्तानहीन होता है। यहां पर दोनों तिलों का एक ही फल समझना चाहिए।
  5. यदि सूर्य रेखा के दाहिनी ओर तिल हो, तो वह व्यक्ति जमीन जायदाद आदि से लाभ उठाता है।
  6. यदि गुरु रेखा पर ललाट के मध्य में काला या लाल तिल, हो, तो वह व्यक्ति बुद्धिमान और चतुर होता है।
  7. यदि गुरु रेखा के दाहिनी ओर तिल हो, तो वह उन्नति करने वाले होते हैं। यहां पर लाल तिल का भी यही फल है।
  8. यदि चन्द्र रेखा पर लाल या काला तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति अल्पायु होता है और उसे गुप्त रोग होते हैं।
  9. यदि नीचे के होठ पर तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति निर्धन होता है तथा जीवन भर गरीबी में दिन व्यतीत करता है। ऊपर के होंठ पर शुभ माना गया है।
  10. यदि बायें कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिन्ह हो, तो वे व्यक्ति दीर्घायु पर कमजोर शरीर के होते हैं।
  11. यदि सूर्य रेखा के बाईं ओर तिल हो, तो उसका गृहस्थ जीवन समस्या-प्रधान बना रहेगा।

  1. यदि नासिका के मध्य भाग में तिल हो, तो वह व्यक्ति यात्रा करने वाला तथा दुष्ट स्वभाव वाला होता है।

  2. यदि चन्द्र रेखा के बाईं ओर लाल या काले तिल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति दूसरों को तकलीफ देने वाला होता है।

  3. यदि ललाट की दाहिनी कनपटी पर तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति प्रेमी, समृद्ध तथा सुखपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाला होता है।

  4. यदि ऊपर के होठ पर तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक विलासी और काम पिपासु होता है।

  5. यदि बायें गाल पर तिल का चिन्ह हो, तो उसके जीवन में धन का अभाव रहता है, परन्तु उसका गृहस्थ जीवन सामान्यतः सुखमय रहता है।

  6. यदि ललाट में शुक्र रेखा के ऊपर लाल या काला तिल हो, तो वह व्यक्ति भौतिक दृष्टि से पूर्ण सुखी व सम्पन्न होता है।

  7. यदि सूर्य रेखा के मध्य में तिल हो, तो वह व्यक्ति वैभव सम्पन्न सुखी तथा यशस्वी होता है।

  8. यदि बुध रेखा के बाईं ओर काला या लाल तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति डरपोक, कायर तथा अपना काम स्वयं बिगाड़ने वाला माना जाता है।

  9. यदि ठोड़ी पर तिल हो, तो वह व्यक्ति अपने काम में ही लगा रहने वाला होता है तथा लगभग स्वार्थी होता है।

  10. यदि दाहिने कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिन्ह हो, तो वे व्यक्ति सरल स्वभाव के तथा युवावस्था में पूर्ण उन्नति करने वाले होते हैं।

  11. यदि दाहिने कान के पास तिल हो, तो ये व्यक्ति साहसी होते हैं।

  12. यदि शनि रेखा के मध्य में या उसके नीचे तिल हो, तो वह डरपोक होता है। लाल तिल होने पर भी यही फल पाया जाता है।

  13. यदि दाहिने भाग के भौंह के पास में तिल हो, तो इनकी आंखें कमजोर


होती हैं।

  1. यदि दाहिने गाल पर तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान तथा उन्नति करने वाला होता है।

  2. यदि काला तिल शनि रेखा के बाई ओर हो, तो वह व्यक्ति जीवन में कई यात्राओं से धन कमाता है।

  3. यदि गर्दन पर तिल हो, तो वे व्यक्ति-बुद्धिमान होते हैं तथा अपने प्रयत्नों से धन संचय करते हैं।

  4. यदि दाहिनी आंख के नीचे तिल का चिन्ह हो, तो वे समृद्ध तथा सुखी होते हैं।

  5. यदि बुध रेखा के दाहिनी ओर काला या लाल तिल हो, तो वह व्यक्ति सफल व्यापारी होता है।

  6. यदि नासिका के बाएं भाग पर तिल हो, तो बहुत अधिक प्रयत्न करने के बाद सफलता प्राप्त होती है।

  7. यदि बाएं नेत्र की भौंहों के पास में तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति एकान्तवासी तथा सामान्य जीवन निर्वाह करने वाला होता है।

  8. यदि दोनों भौंहों के बीच में तिल का चिन्ह हो, तो ये दीर्घायु धार्मिक तथा उदार हृदय के होते हैं।

  9. यदि दाहिनी हथेली पर लाल तिल का चिन्ह होता है, तो वह धनवान होता है।

  10. यदि बाएं हाथ में तिल होता है, तो वह बुद्धिमानी से व्यय करने वाला होता है।

ललाट, नाशिका, मुख

ललाट क्षेत्र का विकास जातक की मानसिक, बौद्धिक एवं सात्विक शक्ति का सूचक है। नाशिका क्षेत्र जातक के भौतिक, व्यावहारिक एवं राजसिक प्रवृत्तियों


का सूचक है। मुख क्षेत्र जातक की जैविक वासनात्मक एवं मानसिक इच्छाओं का सूचक है। जिस जातक का ललाट और नाशिका क्षेत्र उन्नत तथा विस्तृत होता है, वह बुद्धिमान, ज्ञानवान, विचारशील, व्यावहारिक चतुर तथा साहसी तथा सफल होता है। जिस जातक का मुख क्षेत्र विस्तृत होता है, वह गंभीर, चालाक, चतुर, धूर्त, विचारवान, कामी और स्थिति को पहचानने वाला होता है ऐसे जातक अधिक स्वार्थी होते हैं। ये आवश्यकता पड़ने पर असत्य एवं अन्याय का भी सहारा लेने से पीछे नहीं हटते। यदि किसी जातक के नासिका क्षेत्र की अपेक्षा मुख क्षेत्र अधिक विकसित होगा तो व्यक्ति कामुक, वासनायुक्त, असभ्य, एवं हिंसक होगा। यदि नासिका क्षेत्र मुख क्षेत्र से अधिक विकसित हो तो जातक, जल्दबाज, स्पष्टवक्ता, मनमौजी संरक्षक एवं न्यायप्रिय होगा।

मुखाकृति

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार भिन्न-2 मुखाकृति के जातक का भिन्न-2 स्वभाव और गुण पाया जाता है। मुख्यतः यह आकृति पांच प्रकार की मानी गयी है, 1. वर्गाकार मुखाकृति, 2. उल्टे घड़े के समान मुखाकृति , 3. वृत्ताकार ,4. सूर्पाकार, 5. अण्डाकार। यदि जातक की मुखाकृति का ठीक-ठीक अध्ययन किया जाय तो यह जाना जा सकता है कि जातक का स्वभाव एवं गुण कैसा है।


1. वर्गाकार मुखाकृति

वर्गाकार मुखाकृति के जातक, पृथ्वी तत्व प्रधान होते हैं। यदि ऐसे जातक के मुखाकृति पर चारों ओर से चतुष्कोण खींचा जाय तो ऐसे जातक की मुखाकृति चतुष्कोण में पूरी तरह फिट हो जाती है। वर्गाकार मुखाकृति के जातक का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा होता है तथा इनकी शरीर सुडौल होती है साथ ही इनमें शक्ति भी अधिक पायी जाती है। ऐसे जातक व्यवहार कुशल, उद्यमी, और उद्योगशील होते हैं। व्यवहार कुशल अधिक होने के कारण इन्हें भौतिक साधनों का सुख मिलता है। यदि वर्गाकार मुखाकृति के जातक में पृथ्वी तत्व की अधिकता होती है तो इनमें हठ, आलस्य, विलासिता आदि की अधिकता होती है तथा अपने कार्यों के कारण बाद में दु:खी होते हैं। ऐसे जातक आसानी से अन्य के प्रभाव में नहीं आते हैं, और न ही अपने सिद्धान्त को आसानी से बदलते हैं।

वर्गाकार मुखाकृति के स्त्री जातक का शरीर स्थूल एवं भारी होता है तथा इनकी चाल धीमी और मतवाली होती है। ऐसी स्त्रियाँ कर्मठ व्यवहार कुशल तथा मनमौजी होती हैं, अगर इनमें पृथ्वी तत्व की अधिकता होती है तो चरित्र की दृष्टि से दुर्बल होती हैं।


2. घड़े के समान मुखाकृति

ऐसे जातक को ध्यान केन्द्रित करके देखा जाय तो ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे शरीर पर गर्दन सहित उल्टा घड़ा रखा गया हो। ऐसे जातक आकाश तत्व से प्रभावित होते हैं, दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि इनमें आकाश तत्व की अधिकता होती है। उल्टे घड़े के समान मुखाकृति वाले जातक के चेहरे पर अद्भुत कान्ति एवं आंखों में विशेष तेज पाया जाता है। ऐसे जातक हृदय के मनमानी, महत्वाकांक्षी, स्वाभिमानी, आदर्शविचार, एकान्तप्रिय, तेजस्वी, आध्यात्मवादी एवं असाधारण प्रकृति के होते हैं। ऐसे जातक स्वतः के कार्य क्षेत्र में सफल होते हैं तथा उच्च पद पर आसीन होते हैं। ये जातक ऐसा कार्य करना पसंद करते हैं जिससे समाज का भला हो।


3. वृत्ताकार मुखाकृति

वृत्ताकार मुखाकृति के जातक जल तत्व से प्रभावित होते हैं, यदि इनके मुखाकृति का चित्र एक गोले में फिट किया जाय तो वह आसानी से फिट हो जाता है। वृत्ताकार मुखाकृति के जातक का गाल, मांसल से भरा हुआ एवं चिकना होता है, इनका शरीर स्थूल तथा उदर लम्बा होता है। ऐसे जातक कल्पनाशील, भावुक, स्वप्नदर्शी, प्रसन्नचित्त, मिलनसार एवं संवेदनशील होते हैं। वृत्ताकार मुखाकृति के जातक अधिक परिश्रम में पीछे हट जाते हैं तथा आराम करना अधिक पसंद करते हैं। यदि ऐसे जातक में जल तत्व की अधिकता होती है तो संघर्ष से दूर भागते हैं और निराशावादी होते हैं।

वृत्ताकार मुखाकृति वाले स्त्री जातक श्रृंगारप्रिय, पतिव्रता, चंचल, स्नेही, उदार होती हैं। यदि वृत्ताकार मुखाकृति की स्त्री जातक में जल तत्व की अधिकता होगी तो वह दुर्बल निराश एवं रोग ग्रस्त होगी।


Try a different topic. When something seems like it might not be safe or appropriate for you, I draw the line.


5. अण्डाकार मुखाकृति

अण्डाकार मुखाकृति का जातक वायु तत्व प्रधान जातक होता है, ऐसे जातक का ललाट विशाल होता है। ऐसे जातक का कद सामान्य, गाल चिकने और लुभावने होते हैं तथा इनकी आंखें खूबसूरत होती हैं। अण्डाकार मुखाकृति के जातक स्वच्छन्द, साहसी, आशावादी, तथा तर्कपूर्ण बातें करने वाले होते हैं। इनमें हमेशा ज्ञान की जिज्ञासा होती है ये आनंद की खोज शान्ति की चाह करते हुए प्रगति की राह पर चलते हैं। यदि ऐसे जातक के चेहरे का निचला भाग पुष्ट हो तो प्रेम और सौंदर्य का इच्छा, काम पिपासा, व्यर्थ के आचरण की वृद्धि होगी। यदि ललाट का भाग कुछ संकुचित होगा (उल्टे अण्डे की तरह) तो उनकी बुद्धि का विकास कम होगा , ऐसे लोग हास्य, व्यंगप्रिय, मनमौजी तथा सामान्य स्वभाव के होते हैं। यदि चेहरे के निचले भाग में वायु तत्व की प्रधानता होगी तो जातक असत्यवादी, अस्वस्थ एवं स्वभाव से चिड़चिड़े होंगे। अण्डाकार मुखाकृति की स्त्री जातक सामान्य होती हैं, तथा थोड़े से प्रयत्न से अच्छी जीवन साथी सिद्ध हो सकती हैं।


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