Books / Saral Samudrik Shastra — Face Reading

17. Saral Samudrik Shastra — 6. Legs

6. Legs

प्राचीन शास्त्रकारों एवं आचार्यों ने पांव के 20 भेद माने हैं और सबको पांच श्रेणियों में बांटा गया है:—

  1. सर्वोत्तम 2. उत्तम 3. मध्यम 4. अधम 5. निकृष्ट

1. सर्वोत्तम— जिनका रंग कमल के समान लाल हो, तलवे कोमल हों, नाखून का रंग तांबे के समान हो, उंगलियां परस्पर सटी हुई हों तथा उनका ऊपरी भाग कछुए की पीठ की तरह उन्नत हो व नसें दिखाई नहीं दें, ऐसे पैरों में पसीना नहीं आता है, गुल्फ छिपे रहते हैं, एड़ियां सुन्दर तथा ऊपरी भाग में उष्णता बनी रहती है।

ऐसे पांव वाले जातक राजा, विपुल ऐश्वर्यवान, धनवान, गुणवान, यशस्वी, सौभाग्यशाली, दीर्घायु तथा सुखी जीवन व्यतीत करने वाले महापुरूष माने गये हैं एवं इनकी सभी आकांक्षाएं पूर्ण होती हैं।

2. उत्तम— उंगलियां लम्बी तथा परस्पर मिली हुई, नाखून सामान्यतः लम्बे तथा त्वचा कोमल होती है शेष सभी गुण सर्वोत्तम वाले ही होते हैं। ऐसे पांव वाले व्यक्ति नीतिज्ञ, कार्यकुशल, तीक्ष्ण बुद्धि, अच्छी सलाह देने वाले, साहित्य प्रेमी, यशस्वी, धनी, यात्राप्रिय माने गये हैं।

3. मध्यम— पांव के तलवे कोमल तथा गेरूए रंग के, नाखून सर्पाकार तथा हल्के गुलाबी, गेरूआ अथवा पीले रंग के होते हैं तथा उन पर नसें सामान्य रूप से उभरी रहती हैं, उंगलियों पर बहुत ही सामान्य बाल होते हैं। ऐसे जातक परिश्रमी, व्यवहार कुशल, निर्भीक, दूरदर्शी, विद्वान, गणित तथा विज्ञान में रुचि रखने वाले, साहित्यिक, पारिवारिक चिन्ताओं से ग्रस्त तथा एक


सीमित-क्षेत्र में यश तथा सम्मान प्राप्त करने वाले होते हैं। उंगलियां कुछ मिली हुई तथा कुछ फैली हुई होती हैं।

4. अधम— पांव के तलवे कुछ भूरापन लिए हुए श्वेत रंग के होते हैं, त्वचा कठोर, रूखी तथा ठण्डी होती है एवं उंगलियां चौड़ी होती है उनके ऊपर बाल उगे होते हैं। नाखून चपटे, लम्बे अथवा अधिक चौड़े होते हैं और पैर में पसीना आता है। गुल्फ बाहर की ओर निकला रहता है। नाखून का रंग पीला या सफेद होता है। ऐसे व्यक्ति कुल के अभिमान में डूबे रहने वाले, सुविधाओं के विशेष प्रेमी, परिश्रम द्वारा भाग्योन्नति की इच्छा रखने वाले, कामुक प्रवृति तथा दरिद्री माने जाते हैं।

5. निकृष्ट— पांव के तलवे का रंग मिट्टी के रंग जैसा, ऐड़ी मोटी तथा जगह जगह से फटी हुई त्वचा स्पर्श से कठोर, ऊपरी भाग पर नसें उभरी हुई। उंगलियां टेढ़ी मेढ़ी तथा उन पर अधिक बाल उगे हुए गुल्फ बाहर की ओर निकले हुए, नाखून छोटे, चपटे, नाखूनों का रंग कालापन या नीलापन लिए हुए होते हैं। ऐसे पांव वाला जातक बीमारियों से ग्रस्त एवं रोगी रहने वाला, दरिद्री, ज्यादातर अधिक समय तक घर से दूर रहने वाला, मिथ्याभिमानी, क्रोधी निश्चिन्त, तथा कुसंगति में रहने वाला माना गया है।

विद्वानों के अनुसार पांवों के शुभ-अशुभ लक्षण निम्न है:—

  1. मांसलयुक्त कछुए की पीठ की तरह उन्नत तथा नस विहीन पांव श्रेष्ठ माना गया है।
  2. कमल पुष्प की तरह गुलाबी रंग के तथा मुलायम पांव शुभ माने जाते हैं।
  3. पांवों की उंगलियों का आपस में एक दूसरे से मिले हुए होना, नाखून सुन्दर होना, एड़ियां मांसल तथा गोलाई लिए हुए हो तथा गुल्फ की हड्डियों का दबा रहना शुभ लक्षण माना जाता है।
  4. पांवों में पसीना आना, टखनों की हड्डियों का अधिक निकला रहना तथा पांव

के ऊपरी भाग पर नसों का दिखाई देना अशुभ लक्षण माना जाता है।

  1. जिसके पांव के तलवे का रंग पीला हो वह कामी तथा व्यभिचारी माना गया है।

  2. जिसके पांव की उंगलियों के नाखून नीलापन अथवा सफेदी लिए हो तथा रूखे हो तो ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट भोगते हैं।

  3. जिनके पांव बीच में कुछ अधिक उठे हुए हों वे ज्यादा यात्रा करते हैं।

  4. जिनके पांव का रंग जली हुई मिट्टी के रंग जैसा हो वे पाप कर्म तथा हिंसक स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग हत्या तक कर सकते हैं।

  5. जिनके पांवों के तलवे में रेखाएं न हो जो कठोर, फटे हुए अथवा रूखे हों ऐसे व्यक्ति दुखी रहते हैं।

  6. जिनके पांवों के तलवे मांस रहित प्रतीत हों वे व्यक्ति रोगी रहते हैं।

  7. जिनके पांवों के तलवे का मध्य भाग उठा हुआ हो वे यात्रा प्रेमी माने गए हैं।

  8. पांव की उंगलियों के नाखून सूप के समान फैले हुए लम्बे, टेढ़े अथवा श्वेत रंग के हों तो वे दरिद्र माने गए हैं।

  9. पांव के तलवे में पाई जाने वाली रेखा सरल, सुन्दर, स्पष्ट, निर्दोष तथा ऐड़ी से तर्जनी तक गई हो ऐसा व्यक्ति परम ऐश्वर्य शाली माना जाता है।

  10. पांव में अंकुश के समान रेखा हो वह जीवन पर्यन्त सुखों को भोगता है।

  11. पांव के तलवे में ध्वजा, कमल, वज्र, तलवार, शंख, छत्र, धनुष, बाण, चामर, कुण्डल, सर्प, आदि के चिन्ह स्पष्ट हो वे भाग्यशाली माने जाते हैं। यदि ये चिन्ह अस्पष्ट हो तो जीवन के उत्तरार्ध में और यदि इन चिन्हों को किसी अन्य रेखा द्वारा काटा गया हो तो उत्तरार्ध में फल मिलता है।

पांव के अंगूठे के बारे में सामुद्र तिलक में लिखा है:—


पांव का अंगूठा यदि सर्प के फण के समान गोल आकृति वाला, उन्नत तथा मांसलयुक्त हो तो वह शुभ माना जाता है। यदि अंगुठे पर नसें दिखती हो, वह बहुत छोटा हो या बहुत बड़ा हो टेढा अथवा चपटा हो वह अशुभ होता है।

पांव के अंगुठे के बारे में अन्य विद्वानों का मत है:—

  1. पांव का अंगूठा यदि गोल, ताम्रवर्ण नख वाला तथा लालिमा लिए हुए हो तो ऐसे व्यक्ति राज्याधिकार (ऐश्वर्य) प्राप्त करते हैं।
  2. चपटे फटे तथा टूटे अंगूठे वाला व्यक्ति निन्दित होता है।
  3. टेढ़े, रूखे और अधिक छोटे अंगूठे वाला व्यक्ति क्लेशमय जीवन यापन करता है।