18. Saral Samudrik Shastra — महिलाओं के पैरों का लक्षण
महिलाओं के पैरों का लक्षण
- समस्त अंगुलियां समान लंबाई की हों और अच्छी तरह पुष्ट हों तथा एक दूसरे से मिली हुई हों तो वे श्रेष्ठ फल देने वाली होती हैं।
- पैर की चारों अंगुलियां छोटी हों और अलग-अलग फैली हुई हों, तो उस हालत में किसी की नौकरी या शारीरिक मेहनत करती हुई जीवन यापन करेगी।
- कनिष्ठा अंगुली चलते समय जमीन को स्पर्श न करे तो वह शीघ्र विधवा होवे या दु:खी जीवन होगा।
- तीसरी और अंतिम दोनों अंगुलियां अधिक छोटी हों तो वह पति का सुख नहीं प्राप्त होता।
- अंगूठे के साथ शेष चारों अंगुलियां गोल, नरम और सुन्दरता से उठी हुई हो तो शुभ लक्षण है। ये चारों अंगुलियां छोटी और पतली न हों। चपटी होने से अधिक परिश्रम होता है।
- लंबी अंगुलियों वाली स्त्री कुलटा कही गई है फैली हुई अंगुलियां दरिद्रिणी का संकेत देती है।
- एक अंगुली दूसरी अंगुली पर चढ़ी हो तो 'हत्वा बहून् पतिन्परः' के आधार पर अपने पति के लिए षडयंत्र करती है और अशुभ कही गयी है।
- जिस स्त्री के पांव की तर्जनी बड़ी हो वह स्वच्छन्द कामचारणी कही गई है।
- मध्यमा अंगुली सामान्य से अधिक बड़ी हो तो वह दुर्भगा होती है। उसके साथ किसी पुरुष का विवाह बड़ी समझदारी से करना चाहिए।
- यदि पैर की तीसरी अंगुली छोटी हो तो कलह करने वाली जानो। वह अंगुली यदि चलते समय जमीन की फर्श को स्पर्श न करे तो 'खादतेसा
पतिद्वयं अर्थात् अशुभ है।
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राह में चलते समय स्त्री के पैर से मिट्टी उड़े तो उसके घर में आने के बाद से कई परिवार नष्ट होंगे। वह परिवार के लिए अशुभ होगी और सुखी भी होवे तो मध्यमा के लंबी होने पर प्रतिष्ठा भंग होकर अपयश मिले।
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कभी-कभी कनिष्ठा छोटी होकर गोल मटोल सी ही रहे, तो बचपन में दुःख हो, ऐसा सामुद्रिक में है।
अभ्यास प्रश्नावली
- पांव के लक्षणों के बारे में लिखें।
- अच्छी महिलाओं के पैरों का लक्षण बताएं।
- राजयोग वाले जातक का पैर कैसा होता है?
- दुर्भाग्यशाली जातक के पैरों का लक्षण लिखें।
अध्याय— 7