20. Saral Samudrik Shastra — 8. Female Native
8. Female Native
स्त्री की 21 मुख्य जातियां होती हैं, जिनका वर्णन संक्षेप में नीचे की पंक्तियों में स्पष्ट किया जाता है।
1. पद्मिनी — ऐसी स्त्री दया और स्नेह रखने वाली, चित्त को मोहित करने वाली, हंस के समान चलने वाली तथा माता-पिता की सेवा करने वाली होती है। इसके शरीर से कमल के समान सुगंध निकलती है। वह सुन्दर, सामने वाले को प्रभावित करने वाली तथा पति सेवा में लीन रहती है। इसके नाक, कान तथा होंठ छोटे होते हैं। शंख के समान गर्दन और कमल के समान चेहरा होता है। ऐसी स्त्री सौभाग्यवती, कम सन्तान उत्पन्न करने वाली और पतिव्रता होती है।
2. चित्रणी— ऐसी स्त्रियां पतिव्रता और सब पर स्नेह करने वाली होती हैं। श्रृंगार आदि में उनकी रुचि रहती है। ये ज्यादा परिश्रम नहीं करतीं, पर बुद्धिमान होती हैं। इनका मस्तिष्क गोल तथा नेत्र चंचल होते हैं। इनकी चाल हाथी के समान, स्वर मोर के समान होता है। ऐसी स्त्रियां कोमल अंगों वाली तथा लज्जा रखने वाली होती हैं। ऐसी स्त्रियां नृत्य, प्रेम तथा सुन्दरता से पति को प्रसन्न रखने वाली होती हैं।
3. हस्तिनी— ये पुरुष के मनोनुकूल होती हैं तथा इनमें भोग की इच्छा विशेष होती है। इनका शरीर मोटा और थोड़ा बहुत आलस से भरा हुआ होता है। इनमें लज्जा, धर्म आदि कम होता है। इनकी कपोल, नासिका, कान और गर्दन मोटी होती है। आंखें छोटी और पीली होती हैं। होंठ मोटे और लम्बे होते हैं ये अपने पति से सन्तुष्ट नहीं होती तथा पति के अलावा अन्य पुरुषों से सम्बन्ध बनाने को लालायित रहती हैं।
4. शंखिनी— ये लम्बी होती हैं तथा इनके चलते समय पृथ्वी पर आवाज होती है। ये अपने कूल्हे हिला कर चलती हैं। इनकी आंखें टेढ़ी और शरीर बेडौल
होता है। इनमें क्रोध की भावना अधिक होती है तथा प्रत्येक क्षण भोग की इच्छा बनी रहती है। इनका मन दुष्ट होता है तथा मादक द्रव्यों का सेवन इन्हें रुचिकर लगता है। ये दुराचारिणी तथा पर-पुरुष में रत रहती हैं।
5. सङ्घिनी— ये सरल स्वभाव वाली तथा डरपोक होती हैं। ऐसी स्त्रियां हंसमुख और लज्जायुक्त होती हैं। उनकी बोली कोमल होती है तथा प्रत्येक दृष्टि से पति को प्रसन्न करने की कला इन्हें आती है।
6. मैत्रायणि— ये सुन्दर, रूपवती, गौर-वर्ण, अभिनय के साथ काम करने वाली होती हैं, पर उन्हें पति दुष्ट या कमजोर मिलते हैं। इस वजह से इनका गृहस्थ जीवन ज्यादा सुखमय नहीं होता। इनके रूप को देखकर प्रत्येक पुरुष मोहित हो जाता है। ये पुरुष से दूर रहती हैं।
7. कलहकारिणी— ऐसी स्त्री की भौंहें हमेशा चढ़ी हुई रहती हैं। इसके दांत ऊंचे-नीचे तथा भैंस के समान शरीर होता है। रास्ते में चलते समय इसके पैरों से धूल उड़ती रहती है। यह द्वेष रखने वाली तथा धोखे से पति को मारने वाली होती हैं। यह किसी भी प्रकार से परपुरुष से सम्बन्ध जोड़ने में ही अपनी चतुराई समझती हैं।
8. गृहस्थिनी— ऐसी स्त्री आदर्श रूप से घर को चलाने वाली होती है तथा पति में ही अनुरक्त रहती है। न तो यह अधिक बोलती है न किसी को धोखा देती है। न यह पर पुरुषों को चाहती है और न अधिक बनी ठनी रहती है। कुकर्मों से दूर रहने वाली यह स्त्री अपने दोनों पक्षों का नाम ऊँचा उठाती है।
9. आतुरा— ऐसी स्त्री प्रत्येक कार्य को तुर्त-फुर्त करने में विश्वास रखती है। यह साधारण रूप रंग वाली स्त्री पति से प्रेम करने वाली होती है, तो कभी पति से भयंकर लड़ाई भी कर लेती है। इस स्त्री को समझना अत्यन्त कठिन होता है।
10. भयातुर— यह गौर वर्ण, नाजुक, लज्जा से सिकुड़ सिमट कर बात करने वाली तथा थोड़ी-थोड़ी बातों से डरने वाली है। यह कभी अकेली नहीं रहती है। यह सबसे प्रेम करने वाली, मधुर भाषण करने वाली तथा अपने धर्म को
निभाने वाली होती है।
11. डाकिनी— यह हंसकर बातें करने वाली तथा धोखा देने में चतुर होती है। इसके नेत्र लाल होते हैं। ऊपर से यह बहुत प्यार दिखाती है, पर निकट से यह लालची तथा धोखा देने वाली होती है। इससे प्रेम करना और सांप से प्रेम करना बराबर होता है। इसका पति इसकी बदनामी से हर समय दुखी रहता है।
12. हंसिनी— यह सुखी तथा समझदार होती है। इसकी चाल हंस के समान मनमोहक होती है। यह सत्य बोलने वाली तथा रति के समान सुन्दर होती है। यह मधुर प्रीति करने वाली होती है। ऐसी स्त्रियां सौभाग्यशाली पुरुषों को ही मिलती हैं।
13. बहुबंशिनी— ऐसी स्त्री गेहुएं रंग वाली तथा पूरी तरह से गृहस्थ धर्म को निभाने वाली होती है। यह असत्य नहीं बोलती तथा पति सेवा में ही प्रसन्न रहती है। समाज में इसका सम्मान होता है।
14. कृपणी— ऐसी स्त्री निर्लज्ज, कमजोर शरीर वाली तथा कंजूस होती है। यह थोड़े बहुत रूप में बदनाम होती है तथा किसी से भी किसी भी प्रकार की बात करने में इसको शर्म नहीं आती। यह धन अथवा भोग के लिए किसी भी पुरुष के साथ चरित्र नष्ट करने को तैयार हो जाती है।
15. घातिनी— यह स्त्री चालाक तथा दूसरों को धोखा देने में होशियार होती है। प्रकट में यह प्रेम जताती है, परन्तु इसके हृदय में जहर भरा हुआ रहता है। यह कुशल धोखा देने वाली होती है तथा बात-बात पर असत्य भाषण करती है।
16. प्रेमिणी— यह सुन्दर, प्रेम को निभाने वाली तथा पतिप्रिय होती है। यह हमेशा मन्द-मन्द मुस्कराती रहती है तथा जो भी इसकी भलाई करता है, उस पर यह सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार रहती है। इसके केश लम्बे, सुन्दर तथा चेहरा आकर्षक होता है।
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- जिसकी ध्वनि मोर के समान हो, उसका धनी पुरुष से विवाह होता है।
- फटी सी आवाज रखने वाली स्त्री दुखी होती है।
- घरघराहट सी आवाज वाली स्त्री दुखी होती है।
विशेष तथ्य (स्त्रियों के लिए)
- लम्बी और काली पुतली लिए हुए जिस स्त्री की आंख हो, वह श्रेष्ठ होती है।
- छोटे-छोटे और काले बालों वाली पलकें जिस स्त्री के हों, वह स्त्री सौभाग्यशाली होती है।
- हरिण के समान नैन वाली स्त्री शुभ लक्षण वाली मानी गई है।
- गोल या बिल्ली की तरह आंख रखने स्त्री कुटिल होती है।
- जिस स्त्री की दोनों आंखें पीली होती हैं, वह कामातुर होती है।
- जिस स्त्री के दोनों नेत्र लालिमा लिए हों, वह पर-पुरुष के साथ विचरण की इच्छा वाली होती है।
- जिस स्त्री के नेत्र जल से भरे हुए होते हैं, वे शुभ कहलाते हैं।
- जो स्त्री देखते समय आंख फाड़ती हो, वह कुटिल स्वभाव की होती है।
- पुरुष के समान आंख वाली या धंसे हुए नेत्र वाली स्त्री चंचल होती है।
- जो स्त्री बात करते समय बाईं आंख दबाती है, वह व्यभिचारिणी होती है।
- जो बात करते समय दाहिनी आंख दबाती हो, वह कम सन्तान वाली होती है।
- कमाणीदार भौहें रखने वाली स्त्री शुभ मानी गई है।
- खुरदरे बालों वाली भौहें अशुभ होती हैं।
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जिन स्त्रियों की भौंहें न हों, वे निर्धन होती हैं।
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जिनकी भौंहें मोटी हों, वे पर-पुरुष की इच्छा रखती हैं।
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जिस स्त्री के भौंहों के बाल बड़े-बड़े हों, वह सन्तान-हीन होती हैं।
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जिस स्त्री के बाएं गाल पर मस्सा या तिल होता है, वे श्रेष्ठ कही जाती हैं।
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कण्ठ पर तिल हो, उसके पहला पुत्र होता है।
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जिसके नख सुन्दर हों, वह दयालु होती है।
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जिसके नेत्र लम्बे चौड़े हों तथा चौड़ी छाती एवं पतली कमर हो, वह समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करती है।
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जिस स्त्री की लम्बी और पतली उंगलियां हों, वह दीर्घायु होती है।
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जिस स्त्री के गले में तीन रेखाएं दिखाई दें, वह ऐश्वर्यशालिनी होती है।
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जिस स्त्री के होंठ लम्बे और मोटे हों, वह पति को धोखा देने वाली होती है।
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जिस स्त्री के नख तथा होंठ कालापन लिए हुए हों, उसका चरित्र उज्जवल नहीं होता।
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सोते समय जिस स्त्री के मुंह से लार टपकती हो, वह कुलटा होती है।
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जिस स्त्री के हंसते समय गालों में गड्ढे पड़ते हों और नेत्र घूमते हों, वह व्यभिचारिणी होती है।
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बहुत छोटे मुंह वाली स्त्री पति को धोखा देती है।
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बहुत लम्बे मुंह वाली स्त्री निर्धन होती है।
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जो स्त्री सोते समय दांत पीसती हो, वह लक्ष्मीहीन होती है।
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जिस स्त्री के नेत्र छोटे हों, वह शुभ लक्षण वाली नहीं मानी जाती।
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जिस स्त्री का सिर समान तथा गोल हो, वह दीर्घायु होती है।
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जिस स्त्री के ललाट में चार रेखाएं होती हैं, वह सौभाग्यशाली होती है।
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जिस स्त्री के ललाट में तीन रेखाएं हों, वह दीर्घायु होती है।
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एक रेखा वाली स्त्री शुभ नहीं कहलाती।
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जिन स्त्रियों के तलवे चिकने, कोमल तथा समान हों, वे सुख उठाती हैं।
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रूखे और कठोर तलवे वाली स्त्री दुर्भाग्यवान होती है।
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जिस स्त्रियों के चलते समय थप-थप की आवाज आती है, वे मूर्ख होती हैं।
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जिनके पैरों में शंख, कमल, ध्वजा या मछली का चिन्ह हो, वे धनवान से शादी करती हैं।
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जिस स्त्री के चरण में पूरी उर्ध्व रेखा हो, वह अखण्ड भोग करती है।
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जिस स्त्री के पैर का अंगूठा मांसलयुक्त तथा गोल हो, वह भोग कारक होती है।
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यदि अंगूठा चपटा और टेढ़ा-मेढ़ा हो, वह सौभाग्य का नाश करता है।
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जिस स्त्री के पैर का अंगूठा लम्बा होता है, वह दुर्भाग्यशालिनी होती है।
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जिस स्त्री के पैर की उंगलियां कोमल तथा जुड़ी हुई हों, तो वे शुभ फल प्राप्त करने वाली होती हैं।
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जिस स्त्री के पैर की उंगलियां लम्बी होती हैं, वे दुराचारिणी होती हैं।
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यदि पैर की उंगलियां पतली हों, तो वे धनहीन होती हैं।
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टेढ़ी उंगलियों वाली स्त्री कुटिल होती है।
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चपटी उंगलियों वाली स्त्री नौकर के समान जीवन व्यतीत करने वाली
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अंगुल का होना शुभ है।
- यदि स्तन कठोर, गोल तथा दृढ़ हों , तो वे शुभ हैं।
- यदि स्तन मोटे तथा सूखे हों, तो वे दुख देने वाले होते हैं।
- यदि स्त्री का दाहिना स्तन ऊंचा हो, तो सौभाग्यशाली होती है।
- जिस स्त्री के दोनों स्तन दबे हुए हों, वह कुलटा होती है।
- जिस स्त्री के स्तनों के अग्रभाग काले तथा गोल हों, वह शुभ माना गया है।
- जिस स्त्री की हंसुली मोटी हो, तो वह ऐश्वर्य भोगी होती है।
- जिसकी हंसुली ढाली हो, तो वह स्त्री दरिद्र होती है।
- यदि स्त्री के कंधे झुके हुए न हों, तो शुभ है।
- यदि स्त्री के कंधे टेढ़े मोटे और बाल युक्त हों, तो वह विधवा होती है।
- यदि आगे को कुछ झुके हुए और मजबूत हों, तो वह आनन्द करती है।
- यदि उसकी भुजाएं कोमल तथा सीधी और रोम रहित हों, तो यह शुभ माना गया है।
- यदि भुजाएं बालों से युक्त हों, तो वह विधवा होती है।
- जिन स्त्रियों की भुजाएं छोटी हों, वे दुख उठाती हैं।
- यदि हथेली लाल तथा छिद्र रहित हो, तो वह सौभाग्यशालिनी होती है।
- यदि हथेली बहुत-सी नसों वाली या बहुत अधिक रेखाओं वाली हो, तो दरिद्री होती है।
- यदि नख लाल और उभरे हुए हों, तो शुभ है।
- पीले नख दरिद्रता के सूचक हैं।
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नखों पर सफेद बिन्दु कुलटा का संकेत करते हैं।
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जिसकी पीठ झुकी हुई हो वह दुख उठाने वाली होती है।
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जिस स्त्री की पीठ में बहुत अधिक बाल हों, तो वह विधवा होती है।
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सीधी दृष्टि वाली स्त्री पुण्यवान होती है।
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जिस स्त्री की दृष्टि नीचे की ओर झुकी हुई हो, वह अपराधिनी होती है।
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यदि दोनों आंखें अधिक निकट हों, तो वह स्त्री धोखा देने वाली तथा कम बुद्धि की होती है।
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जिसकी आंखें बहुत दूर हों, तो वह स्त्री ज्ञानी होती है।
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यदि ललाट में तिल हो, तो वह जीवन भर आनन्द उठाती है।
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यदि हृदय पर तिल हो, तो वह सौभाग्यदायक होता है।
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जिस स्त्री के दाहिने स्तन पर तिल हो, तो वह अधिक कन्याएं पैदा करने वाली होती है।
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यदि बायें स्तन पर लाल तिल हो, तो वह विधवा होती है।
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जिसकी नाक के अग्रभाग में लाल तिल हो, तो वह पति की प्रिय होती है।
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जिसकी नाक के आगे के भाग में काला तिल हो, तो वह दुराचारिणी होती है।
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जिसकी नाभि के नीचे तिल हो, तो वह शुभ है।
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जिसके बायें हाथ में तिल हो, तो वह सौभाग्यशाली होती है।
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जिसके गाल, होंठ, हाथ, कान या गले पर तिल हो, तो वह जीवन भर सुख पाती है।
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