Books / Saral Samudrik Shastra — Face Reading

9. Saral Samudrik Shastra — 1. शनि रेखा

1. शनि रेखा

ललाट पर पायी जाने वाली शनि रेखा से जातक में — निश्चय भावना, समझ उदासीनता, दूरदर्शिता, गंभीरता खिन्नता, आदि बातों को जाना जाता है।

  1. जिस जातक के ललाट पर दाहिनी ओर शनि रेखा से एक छोटी रेखा ऊपर की ओर जाय तो जातक को निकट भविष्य में कुछ परेशानियों का सामना करना होता है।

  2. यदि शनि रेखा से एक छोटी रेखा बाईं आंख के ऊपर की ओर जाये तो जातक की स्त्री झगड़ालू और चंचल प्रवृत्ति की होती है।

  3. बाईं आंख के ऊपर शनि रेखा से निकल कर एक छोटी रेखा बालों तक जाती है तो ऐसे जातक की स्त्री हस्तिनी जाति की होती है।

  4. शनि रेखा पर दाहिनी आंख के ऊपर अंग्रेजी वर्णाक्षर V की तरह हो तथा बाईं ओर तीन छोटी रेखायें मिलकर U का आकार बनायें तो जातक को अनेक तरह की परेशानियों का सामना होता है।


  1. शनि रेखा केशों के समीप हो तथा अखण्ड हो साथ ही सीधी हो तो जातक की बौद्धिक क्षमता अच्छी होती है।

  2. शनि रेखा टेढ़ी या खण्डित होने से जातक उदासीन, शिकायती एवं चिड़चिड़े स्वभाव का होता है।

  3. शनि रेखा पर नीचे की ओर त्रिभुज होने से वह जातक धर्म परिवर्तन करता है अथवा अन्य जाति में विवाह करता है।

  4. शनि रेखा से आकर एक टेढ़ी रेखा गुरु रेखा को काटे तथा सूर्य रेखा के ऊपर से जाती हुई छोटी रेखा से पुनः गुरु रेखा कटने पर जातक को साधना के क्षेत्र में लाभ दिलाता है।

  5. शनि रेखा बार-बार खण्डित हो, गुरु रेखा छोटी हो, मंगल रेखा दोषपूर्ण हो, सूर्य व चन्द्र रेखा अच्छी हो तो जातक को सामान्य कहा जायेगा साथ ही जातक का स्वभाव चंचल और यदा-कदा परेशानी का सामना होगा।


  1. शनि रेखा लम्बी सीधी और अखण्ड होने से जातक निश्चय भावना वाला, बौद्धिक विचार वाला, समझदार, दूरदर्शी और गम्भीर होता है।

  2. शनि रेखा कई बार खण्डित हो, गुरु रेखा लम्बी तथा सीधी हो, मंगल रेखा बीच में कटी हो, सूर्य रेखा धनुषाकार हो, शुक्र रेखा बीच से कटी हो तो वह जातक सत्य भाषी सरल, विनम्र सबका प्रिय, नेता, आदि होता है।

  3. शनि और गुरु रेखा पर अर्ध चन्द्राकार का निशान हो तथा सूर्य या चन्द्र रेखा परस्पर मिली हो तो वह परम् सौभाग्यशाली माना जाता है।

  4. शनि रेखा बीच में कटी हो तथा टेढ़ी हो, गुरु रेखा बीच से टेढ़ी हो तथा दांये भाग में कटी हो, मंगल तथा सूर्य रेखा दांयी ओर सर्पाकार हो।

  5. शनि रेखा छोटी हो, गुरु रेखा बीच में खण्डित हो, मंगल रेखा लम्बी और टेढ़ी हो साथ ही एक ओर अधिक झुकी हो, शुक्र रेखा बीच से खण्डित हो साथ ही दायी ओर एक रेखा उसे काटती हो, तो ऐसा जातक अभिमानी, क्रोधी, मित्रों द्वारा तिरस्कृत, व्यभिचारी, कामातुर आदि अवगुणों वाला होता है।


  1. शनि रेखा गहरी तथा टेढ़ी हो, गुरु रेखा लम्बी हो तथा दोनों ओर झुकी हो, सूर्य रेखा बीच में खण्डित हो, तो जातक सुन्दर, सुखी, उदार, विद्वान्, यशस्वी, धर्मात्मा तथा भाई बन्धुओं का सम्माननीय होता हैं।

  2. शनि और गुरु रेखा ऊपर की ओर चन्द्राकार हो, शनि रेखा छोटी हो, दोनों भौहें परस्पर मिली हों ऐसा जातक, धनी, असत्य भाषी, कामातुर और व्यभिचारी होता है।

  3. शनि रेखा धनुषाकार हो, गुरु रेखा सर्पाकार हो, मंगल रेखा लम्बी हो, सूर्य रेखा शाखा युक्त हो, शुक्र रेखा बीच में कटी हो, वह जातक, पराक्रमी, लोभी, अशान्त तथा असफल जीवन वाला होता है।

  4. शनि रेखा लम्बी हो, गुरु रेखा सर्पाकार हो, वह जातक अपनी पत्नी से भय और कष्ट पाता है।

  5. शनि रेखा सीधी हो तथा बीच में दो रेखाओं द्वारा काटी जाय, मंगल व गुरु रेखा बीच में खण्डित हो, ऐसे जातक की सम्पत्ति को खतरा होता है।


  1. दायीं आंख के ऊपर शनि रेखा पर V का निशान होने से आर्थिक नुकसानों का सामना होता है।

  2. शनि रेखा पर ऊपर की ओर तथा शुक्र रेखा से नीचे की ओर जाती हुई दो-दो रेखायें होने से कर्ज लेना पड़ता है।

  3. शनि रेखा पर एक सर्पाकार एक आड़ी रेखा ऊपर की ओर जाये तो जातक की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।


2. गुरु रेखा

ललाट पर पायी जाने वाली गुरु रेखा से जातक में – भक्ष्याभक्ष्य (खान-पान) ईमानदारी, नैतिकता, नियम-संयम, साफ-सफाई, भेद-भावन, अध्यात्म, आत्मचिंतन, ज्ञान, श्रद्धा, भक्ति, उपासना, आदि के बारे में जाना जाता है।

  1. जिस जातक के ललाट पर गुरु रेखा पर नीचे की ओर एक या दोनों ओर एक घुमावदार रेखा होगी तो जातक को स्वास्थ्य की परेशानी का संकेत देती है।

  2. गुरु रेखा मध्य में नीचे की ओर V आकार में घूमकर पुनः सीधी होकर आगे बढ़ जाये तो ऐसा जातक स्वतः के जीवन काल में अधिकाधिक धन खर्च करता है।

  3. गुरु रेखा दो भागों में बंटने से जातक को आर्थिक संकटों का सामना होता है तथा उसके मन में अशान्ति होती है।

  4. गुरु रेखा अखण्ड तथा स्पष्ट होने से जातक को ईमानदार, संयमी, ज्ञानी और उपासक बनाती है।


  1. गुरु रेखा टेढ़ी हो, खण्डित हो तो जातक में अनियमितता तथा भक्ष्याभक्ष्य का भेद भाव नहीं होता।

  2. गुरु रेखा के नीचे सूर्य रेखा के ऊपर यदि त्रिभुज का निशान बने तो जातक दैवीय शक्ति प्राप्त करता है।

  3. सूर्य क्षेत्र के ऊपर गुरु रेखा को एक अन्य छोटी, सर्पाकार रेखा काटे तो जातक महान सिद्धि प्राप्त करता है। ऐसे जातक का गृहस्थ जीवन असफल होता है।

  4. गुरु रेखा पर सूर्य रेखा की ओर एक वृत्त बने तो ऐसा जातक सांसारिक दु:खों का शिकार और भ्रमित होता है।

  5. गुरु रेखा छोटी हो, मंगल रेखा गहरी हो शनि रेखा टेढ़ी एवं निचले भाग में टूटी हो सूर्य रेखा बीच से खण्डित और टेढ़ी हो तो ऐसा जातक मूर्ख, उपद्रवी, ठग, मनमौजी, कठोर स्वभाव, तथा झगड़ालू होगा।