Books / Saral Samudrik Shastra — Face Reading

10. Saral Samudrik Shastra — 3. मंगल रेखा

3. मंगल रेखा

ललाट पर पायी जाने वाली मंगल रेखा से जातक में — साहस, कार्य–सफलता, कायरता, आक्रोश, राजसेवा आदि के बारे में जाना जाता है।

  1. ललाट पर पायी जाने वाली मंगल रेखा यदि टुकड़ों में बंटी हुई अथवा खण्डित होगी तो जातक में साहस की कमी होगी एवं गुप्त शत्रु का सामना होगा।

  2. जिस जातक के ललाट पर मंगल रेखा की शाखायें सूर्य रेखा की ओर जाती है अथवा सूर्य रेखा को काटती हैं तो जातक को आर्थिक परेशानी का सामना करना होता है।

  3. यदि मंगल रेखा ललाट के मध्य में हो तथा छोटी हो तो ऐसे जातक को भी आर्थिक परेशानी का सामना करना होता है।

  4. यदि मंगल रेखा से सूर्य रेखा की ओर एक सीधी शाखा एवं एक वक्री शाखा जाती है तो जातक को शीघ्र ही अच्छी नौकरी या नये व्यवसाय की ओर उन्मुख करती है और लाभ दिलाती है।


  1. मंगल रेखा लम्बी और निर्दोष हो तथा मोटी हो तो जातक को बलवान, सैनिक, साहसिक प्रवृत्ति का बनाती है। खण्डित मंगल रेखा से व्यक्ति झगड़ालू एवं क्रोधी स्वभाव का होता है।

  2. मंगल रेखा सर्पाकार हो साथ ही शनि रेखा सर्पाकार हो एवं दोनों के मध्य में वज्र का निशान हो, ऐसे जातक का मस्तिष्क प्रभावित होता है तथा वह निराश होकर आत्म हत्या को आतुर होता है।

  3. मंगल रेखा टेढ़ी हो, खण्डित हो, दोषपूर्ण हो, तो वह जातक अधिकांश कार्यों में असफल रहता है एवं उसके कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है।

  4. सीधी व स्पष्ट मंगल रेखा होने से जातक सभी कार्यों में सफल होता है क्योंकि उसमें साहस की अधिकता होती है।

  5. मंगल एवं शनि रेखा बीच में टूटी हो, गुरु रेखा दोनों के बीच में झुकी हो तो ऐसा जातक धनी, दूरदर्शी एवं सौभाग्यशाली होता है यदि शनि और गुरु रेखा खण्डित होकर आपस में मिलेंगी तो अशुभ है ऐसी स्थिति में जातक स्वयं अपना जीवन बरबाद करता है।


There are a lot of things we can talk about, but that's not one of them. What else is on your mind?


4. सूर्य रेखा

ललाट पर पायी जाने वाली सूर्य रेखा से जातक में — धन, सम्पत्ति, ऐश्वर्य, सम्मान, प्रलोभन, खर्चीला स्वभाव, बौद्धिक क्षमता आदि के बारे में जाना जाता है।

सूर्य रेखा लम्बी एवं निर्दोष होना शुभ माना जाता है। चेहरा विज्ञान में सूर्य रेखा देखकर जातक के जीवन में धन, सम्पत्ति, ऐश्वर्य, सम्मान, प्रलोभन, कार्य, खर्चीला, स्वभाव, बौद्धिक क्षमता आदि के बारे में जाना जा सकता है ये रेखा दाहिनी आंख के भौंह के ऊपर पायी जाती है। कभी-कभी इस रेखा की लम्बाई अधिक होने से चन्द्र रेखा में मिल जाती है तथा अधिक छोटी होने पर चन्द्र रेखा से दूर रहती है।

  1. जिस जातक के ललाट पर सूर्य रेखा स्पष्ट एवं पूर्ण हो तो ऐसे जातक धन सम्पत्ति से सम्पन्न होते हैं तथा इनकी बौद्धिक क्षमता अच्छी होती है। यदि सूर्य रेखा दोषी हो, खण्डित हो तो जातक में लोभ की भावना बढ़ जाती है वह अधिक लालची और स्वार्थी बन जाता है इस रेखा के अभाव में व्यक्ति ऐश्वर्य और सम्मान से वंचित रह जाता है।

  2. ललाट पर सूर्य रेखा कुछ गोलाई में हो तो जातक स्पष्ट बोलने वाला तथा कार्यों को सोच विचार कर करने वाला होता है और कार्यों में सफलता भी प्राप्त करता है।


  1. सूर्य रेखा दोष पूर्ण या खण्डित होने से व्यक्ति में कंजूसी की भावना बढ़ जाती है तथा बौद्धिक क्षमता को भी प्रभाव पड़ता है।

  2. जिस जातक के ललाट पर शनि क्षेत्र में अर्ध चन्द्राकार कई रेखायें होंगी, साथ ही गुरु एवं मंगल रेखा लम्बी एवं सर्पाकार होगी। ऐसे जातक दुःखी, भयभीत, चिंतित एवं चंचल हृदय के स्वामी होते हैं। ऐसे जातक को पानी से सावधान रहना चाहिए क्योंकि शनि क्षेत्र में चन्द्राकार कई रेखा होने से जल द्वारा हानि होती है।

  3. शनि रेखा अपने निचले भाग में टूटी हुई हो तथा सीधी हो। गुरु रेखा पर बाई ओर धनुषाकार चिन्ह हो। मंगल रेखा शाखायुक्त हो। सूर्य रेखा सर्पाकार हो। शुक्र रेखा अपने ऊपरी भाग में गहरी तथा बीच में कटी हो तो ऐसे जातक गुणवान, विद्वान, दानी, धर्मात्मा, उपदेशक, यशस्वी तथा यात्रा प्रेमी होते हैं।

  4. शनि रेखा गहरी हो गुरु रेखा छोटी मंगल रेखा गहरी तथा पतली हो। सूर्य रेखा झुकी हो एवं दो रेखाओं से कटी हो, तो वह जातक कामी, क्रोधी, कलहप्रिय, झगड़ालू एवं हथियार से चोट खाता है।


5. चन्द्र रेखा

ललाट पर पायी जाने वाली चन्द्र रेखा से जातक में कल्पना, विचार शक्ति, यात्रा, प्रेम, बौद्धिक चंचलता, मनोभावना, आदि के बारे में जाना जाता है।

  1. चन्द्र रेखा उत्तम तथा पूर्ण होने से जातक में कल्पना शीलता, देशाटन भावना, तथा बौद्धिक चंचलता की वृद्धि होती है।
  2. चन्द्र रेखा दोषपूर्ण अथवा खण्डित होने से जातक की बौद्धिक क्षमता को प्रभावित करके उसे मंद बुद्धि वाला बनाती हैं चन्द्र रेखा खण्डित होने से जातक सत्यवादी नहीं होता है तथा देशाटन में बाधायें आती है।
  3. यदि जातक के ललाट पर चन्द्र रेखा का अभाव हो तथा ललाट पर एक ही रेखा हो और वह धनुषाकार हो, तो जातक में यात्रा करने की भावना अधिक पायी जाती है। ऐसे जातक का स्वभाव अच्छा नहीं होता तथा बुरे कार्यों की चेष्टा करता है ऐसे जातक का अधम स्वभाव माना जाता है।
  4. स्पष्ट तथा गोलाई युक्त चन्द्र रेखा जातक में अच्छे विचार उत्पन्न करती है तथा यात्रायें अधिक करवाती है। ऐसे जातक की विचार शक्ति और प्रेम भावना अच्छी होती है।
  5. ललाट पर चन्द्र रेखा का अभाव हो तथा अन्य रेखायें छोटी-छोटी होने से जातक में अच्छे बुरे दोनों गुण पाये जाते हैं तथा ऐसे जातक दीर्घायु नहीं होते हैं।