Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

25. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — रुदितलक्षण

रुदितलक्षण

रुदितमदीनमनश्ुस्निग्धं च शुभावहं मनुष्याणाम। रूक्षं दीनं प्रचुराश्रु चैव न शुभग्रदं पुंसाम॥७७॥। जिनका रोना दीनता रित वं अध्रुपातविहीन होकर प्यारा हो तो उन माशिय को शुभदायक होता है व जिनका रोना रूखा व दीनतासूचक होकर बड़े आ्ँसुवों वाल हो तो उन प्राणियों को शुभदायक नहीं होता है॥ ७७॥