26. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — हसितलक्षण
हसितलक्षण
हसितं शुभदमकम्पं सनिमीलितलोचनं च पापस्य। हृष्टस्य हसितमसकृत्सोन्मादस्यासकृत्पान्ते॥७८॥ जिनके हँसने में शरीर कांपता न हो तो उन माशियों के लिये शुभदायक होता और जिसके हँसने में आाँखैं मूंद जावें तो वह प्राणी पापी होता है व जिसका हँस वारंवार हो तो वह पराणी हर्पित (सुखी) होता है और जो सारी कथा को सुनक आख़िरी में वारंवार हँसता है तो वह माणी उन्मादी (पागल) होता है॥। ७८॥ पूर्वार्धः। ललाटरेखालक्षएमाह- तिस्रो रेखाः शतजीविनां ललाटायताः स्थिता यदि ताः। चतसृभिरनीशत्वं नवतिश्चायुःसपञ्चाब्दा॥७६।। जिनके ललाट में यदि तीन रेखा चौड़ी होकर स्थित हों तो वे पाणी सौवर्ष पर्यन्त जीते हैं और जिनके ललाट में चार रेखा हों तो वे माणी राजपदवी को पाकर पञ्चानवे वर्ष जीते हैं॥ ७६ ॥ विच्छिन्नाभिश्चागम्यागामिनो नवतिरप्यरेखेण। केशान्तोपगताभी रेखाभिरशीतिवर्षायुः ॥८०॥ जिनके ललाट में रेखा छिन्न भिन्न होकर प्रतीत हों तो वे पाणी अगम्या रमणी में गमन करते हैं व जिनके कपाल में रेखा न हों तो वे प्राणी नब्बे वर्ष जीते हैं व जिनके कपाल में रेखायें यदि केशों ( वालों) के समीपतक पहुँच गई हों तो वे पाी अ्स्सी वर्ष पर्यन्त जीते हैं॥ ८० ॥ पञ्चभिरायुःसप्ततिरेकाग्रावस्थिताभिरपि षष्टिः। बहुरेखेण शतार्द्ध चत्वारिंशच्च वक्रामिः॥८१॥। जिनके कपाल में पांच रेखा हों तो वे पाणी सत्तर वर्ष जीते हैं व जिनके कपाल में रेखा एकाग्रावस्थित हों तो वे पाणी साठि वर्ष जीते हैं व जिनके कपाल में बहुतसी रेखा हो तो वे पाणी पचास वर्ष जीते हैं व जिनके कपाल में रेखा टेढ़ी हों तो वे प्राणी चालीस वर्ष की आयु पाते हैं । ८१ ।। त्रिंशद्दूलग्नाभिर्विशतिकश्चैव वामवक्राभिः। क्षुद्राभि: स्वल्पायुर्न्यूनाभिश्रान्तरे कल्प्यम् ॥ ८२ ॥ जिनके ललाट में रेखायें यदि भौंहों में मिली हों तो वे प्राणी तीसवर्ष जीते हैं व जिनके ललाट में रखायें वायें तरफ़ टेढ़ी हों तो वे प्राणी वीस वर्ष जीते हैं व जिनके कपाल में रेखायें बड़ी छोटी २ हों तो वे माणी स्वल्पायु होते हैं और जिनके कपाल में रेखा कम हों तो उन माणियों की अल्पायु की कल्पना करना चाहिये॥ ८२॥