38. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — सप्तसारलक्षण
सप्तसारलक्षण
सप्त भवन्ति च सारा मेदो मज्जात्वगस्थिशक्ाणि। रुधिरं मांसं चेति प्राणभृतां तत्समानफलम्॥ १००॥ मेदा, मज्जा, त्वचा, अस्थि, शुक्र, रुधिर और मांस ये सात माशियों के शरीर सारपदार्थ हैं उन्हींके समान फल को कहै ॥ १०० ॥