37. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — स्वरलक्षण
स्वरलक्षण
गर्दभजर्जररूक्षस्वराश्च धनसौख्यसंत्यक्राः ॥६६॥ जिसका शब्द हाथी, चैल, रथसमूह, भेरी, मृदंग, सिंह और मेघ के समान हो तो वह प्राशी राजा होता है और जिसका शब्द (कएठध्वनि ) गद्हे के समान व जर्जर होकर रूखा हो ो वह पाखी धन व सुखों से रहित होता है॥ ६६ ।।