Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

36. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — छायादेवतालक्षण

छायादेवतालक्षण

छोया: क्रमेण कुजलाग्न्यनिलाम्बरोत्थाः केचिद्दन्ति दश ताश्च यथानुपूर्व्वाः। सूर्याब्जनाभपुरुहूतयमोडुपानां तुल्यास्तु लक्षणफलैरिति तत्समानाः ॥६८ ॥ पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश इन तत्वों से उपजी हुई क्रम से पांच छाया हैं उन को कितेक आचार्यों ने यथानुपूर्वी दश कहा है सूर्य, विषणु, इन्द्र, यमराज और चन्द्रमा ये ५ पूर्वोक्क छायाओं के ५ देवता हैं उन्हीं के तुल्य छाया हैं लक्षण व फलों से प्राणी उन्हींके समान होते हैं यानी जिस भाखी में जिस तत्त्व की छाया के लक्षण व फल घटित हों उन्हींके समान प्राणियों को लक्षण व फल वतलाना चाहिये॥ है८॥