51. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — रक्ष:पिशाचलक्षण
रक्ष:पिशाचलक्षण
तीक्ष्णप्रकोप: खलचेष्टितश्र पापश् सत्त्वेन निशाचराणाम। पिशाचसत्त्वश्रपलो मलाक्को बहुपलापी च समुल्वपाङः॥१७॥ जिसका स्वभाव राक्षसों के समान हो तो वह मागी तीिे कोपवाला व खलों समान चेट्टारखनेहारा होकर पापी होता है व जिसका स्वभाव पिशाच के समान हो वहं प्राणी चपल, मैला व वकवादी होकर बड़े डीलडौलवाला होता है॥ १७ ॥