50. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — मनुजसत्लक्षण
मनुजसत्लक्षण
मर्त्यसत्त्वसंयुतो गीतभूषणत्रियः। संविभागशीलवान्नित्यमेव मानवः ॥१६।। जिसका स्वभाव मनुष्य के समान हो तो वह माणी गानेवाला व भूपणों का प्यान करनेहारा व भलीभांति विभागवान् होकर सदैव शीलवान् रहता है ॥ १६ ॥