49. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — आकाशस्वभावलक्षण
आकाशस्वभावलक्षण
खप्रकृतिर्निपुणो वित्ृतास्यः शब्दगतौ कुशलः शुषिराङ्गः। त्यागयुतः पुरुषो मृदुकोपः स्नेहरतश्च भवेत्मुरसत्वः।। १५॥ जिसका स्वभाव आ्रकाश के समान हो तो वह प्राणी निपुण व बगरे मुखवात तथा शब्दशास्त्र में कुशली होकर शरीर में गड़हे का रखनेवाला होता है और जिसक स्वभाव देवता के समान हो तो वह प्राणी दानशाली व अल्पक्रोधी होकर प्रेम: परायण रहता है॥ १५ ॥