48. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — अरग्निवायुस्त्रभावलक्षण
अरग्निवायुस्त्रभावलक्षण
अग्निप्रकृत्या चपलोतितीक्ष्णश्चराडः क्षुधालुर्बहुभोजनश्च। वायोः स्वभावेन चलः कृशश्च क्षिप्रं च कोपस्य वशं प्रयाति॥१४॥ जिसका स्वभाव अरप्रग्नि के समान हो तो वह प्राणी चपल व बड़ा तीखा व कोपी तथा क्षुधावान् होकर बहुत से भोजनों को करता है व जिसका स्वभाव वायु के समान सामुद्रिकशास्त्रस्य हो तो वह पराणी चंचलबुद्धिवाला व दुवला होकर बेगही कोप के वश में आकर म हो जाता है॥ १४ ।।