Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

47. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — महीजलस्वरभावलक्षण

महीजलस्वरभावलक्षण

महीस्वभावः शुभपुष्पगन्धः संभोगवान् सुश्वसनः स्थिरश्च। तोयस्वभावो बहुतोयपायी प्रियाभिलाषी रसभोजनश्च॥ १३॥ जिसका स्वभाव पृथ्वी का सा हो तो उस प्राणी के शरीर में उत्तम फूल के समान गन्ध आाती है और वह बड़ा भोगवान् व अच्छी श्वासवाला होकर स्थिर रहता है व जिस का स्वभाव जल के समान हो तो वह पाणणी बहुत से जलको पीता व प्यारे की अभि- लापा करता हुआ रसों को खाता है ॥ १३ ॥