Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

46. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — वानरादिमुखलक्षण

वानरादिमुखलक्षण

वानरमहिषवराहाजतुल्यवदना: सुतार्थसुखभाजः। गर्दभकरभग्रतिमैर्धुखैः शरीररैच निःस्वमुखाः॥८॥ जिनके मुख वानर, भैंसा, शुकर और वकरे के समान हों तो वे मारी पुत्रवान् धनवान होकर सुखभागी होते हैं व जिनके मुख और शरीर गदहे व ऊंट के समान ह तो वे पारणी दरिद्री होकर दुःखी बने रहते हैं॥। ८ ॥ शरीरांगुल प्रमाणमाह- अष्टशतं षष्मवतिः परिमाणं चतुरशीतिरिति पुंसाम। उत्तमसमहीनानामङ्गुलसंख्यास्व्रमानेन ॥ ६ ॥ जिनका शरीर अपने अंगुल परिमाण से एकसौ आठ १०८ अंगुल ऊंचा हो तो माणी उत्तम होते हैं व जिनका शरीर ६६ छानवे अंगुल ऊंचा हो तो वे भाणी मध्य होते हैं व जिनका शरीर चौरासी ४ अ्रंगुल ऊंचा हो तो वे पाखी अधम होते हैं॥ ६ भारार्धतनुः सुखभाक तुलितोऽतो दुःखभाग्भवत्यूनः। भारोतीवाढ्यानामध्यर्द्धः सर्वधरणीशः॥१०॥ १ "भार: स्याद्विशतिस्तुला इत्यमरः" इस प्रमाण से वीस तुला का भार होताहै अ्र्थव दोहज़ार पल या आठ हज़ार तोले का भार कहाता है श्थवा श5 मन का होता है। पूर्वार्धः। जिसका शरीर तौलने में आधाभार यानी एकमन हो तो वह प्राणी सुखभागी होता है व जिसका शरीर तौलने में आधेभार से भी कम हो तो वह प्राणी दुःखभागी होता है व जिसका शरीर तौलने में एकभार यानी दोमन हो तो वह प्राणी 'धनाव्य' होता है और जिसका शरीर तौलने में डेढ़भार यानी तीनमन हो तो वह प्राणी सारी पृथ्वी का स्वामी होता है॥ १० ॥ मानवर्पपमाणमाह- विंशतिवर्णा नारी पुरुषः खलु पञ्चविंशतिभिर्दैः। अर्हति मानोन्मानं जीवितभागे चतुर्थे वा ॥ ११।। जिस समय नारी वीसवर्ष की हो और पुरुष पच्चीसवर्ष का हो तो मान व उन्मान के योग्य होता है यानी उच्चता व वज़न का फल कहना चाहिये अथवा वायु के चौथे भाग में उच्चता व वज़न को जानकर फलादेश कहना चाहिये ॥ ११ ॥ भूजलशिख्यनिलाम्बरसुरनररक्षःपिशाचकतिरश्चाम्। सत्त्वेन भवति पुरुषो लक्षणमेतद्रवत्येषाम् ॥१२॥ पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, देवता, मनुष्य, राक्षस, पिशाच और पशु इन्हों के स्वभाव के समान स्वभाववाला पुरुप हो तो इन्हों के ये लक्षण होते हैं उनका आगे विवरण करते हैं ।। १२॥