79. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — भगभाल लक्षण
भगभाल लक्षण
भगस्य भालं जघनं विस्तीर्ण तुङ्गमांसलम्। मृदुलं मृदुलोमाढ्यं दक्षिणावर्तमीडितम् ॥४२॥। वामावर्त च निर्मास भुग्न वैवव्यसूचकम्। संकटं स्थपुटं रूक्षं जघनं दुःखदं तथा॥४३॥ भगका ऊपरी भाग जघनदेश चौड़ा, ऊंचा, मांसल, कोमल तथा नरम रोमों से सं होकर दहिनावर्त प्रतीत हो तो शुभदायक होता है और जो जघनदेश वामावर्त व निम होकर टेढा प्रतीत हो तो वह विधवापने को सूचित करता है और जो जयनदेश सक व गहरा होकर रूखा प्रतीत हो तो वह स्रियों को दुःखदायक होता है ॥ ४२।४३।