80. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — वस्तिलक्षण
वस्तिलक्षण
बस्तिः प्रशस्ता विपुला मृद्धी स्तोकसमुन्नता। रोमशा च शिराला च रेखाङ्का नैव शोभना।। ४ ॥ जिसकी पेटू त्रिशाल व कोमल होकर कुछेक ऊंची प्रतीत हो तो शुभदायक होती और जो पेढू रोमों व नसों से व्याप्त होकर रेखाओं से अंकित हो तो वह शुभदायकन होती है।। ४४।। पूर्वार्धः।