Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

81. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — नाभिलक्षण

नाभिलक्षण

गम्भीरा दक्षिणावर्ता नाभी स्यात्सुखसंपदे। वामावर्ता समुत्ताना व्यक्रगन्थिर्न शोभना॥ ४५ ॥ सूते सुतान्बहून्नारी पृथुकुक्षि: सुखास्पदम्। क्षितीशं जनयेतपुत्रं मराडूकामेन कुक्षिणा॥ ४६। जो नाभि गहरी होकर रोमों या रेखाओं से दहिनावर्त प्रतीत हो तो वह सुख व संपदा के लिये होती है और जो नाभि बहुत ऊंची होकर वामावर्त प्रतीत हो व जिसका ध्यभाग मकट में दीखता हो तो वह शुभदायक नहीं होती है और जिसकी कोखि विशाल होकर चौड़ीसी प्रतीत हो तो वह स्त्री बहुत से पुत्रों को पैदा करती है और जिसकी कोखि मेंढक के उदरसमान प्रतीत हो तो वह स्त्री सुखधाम, पृथ्वीपालक पुत्र को उपजाती है॥ ४५ । ४६ ॥