82. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — कुक्षिलक्षण
कुक्षिलक्षण
उन्नतेन बलीभाजा सावर्तेनापि कुक्षिणा। वन्ध्या प्रत्रजिता दासी क्रमाद्योषा भवेदिह।।४७।। जिसकी कोखि आ्र्रवर्त समेत होकर ऊंची हो तो वह स्त्री बन्ध्या (वांझ) होती है व जिसकी कोखि ढीले खालवाली हो तो वह स्त्री संन्यासिनी होती है और जिसकी कोखि प्रावर्त समेत पतीत हो तो वह स्त्री दासी होती है॥ ४७॥