14. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — ग्रीवालक्षण
ग्रीवालक्षण
चिपिटग्रीवो निःस्वः शुष्का सशिरा च यस्य वा ग्रीवा। महिषग्रीवः शूरः शस्त्रान्तो वृपसमग्रीवः ॥३६॥ जिसकी गर्दन चपटी या नसों से व्याप्त होकर सूखी हो वह निर्धन होता है। जिसकी गर्दन भेंसे के समान हो वह सूरमा होता है। जिसकी गर्दन वैल के समान हो उसकी शस्त्राघात से मौत होती है ॥ ३६॥ कम्बुग्रीवो राजा प्रलम्बकराठः प्रभक्षणो भवति। पृष्ठमभग्नमरोमशमर्थवतामशुभदमतोऽन्यत् ॥३७॥ जिसकी गर्दन शंख के समान (तीनरेखा से अङ्कित) हो वह राजा होता है। जिसका कएठ लम्बा हो वह बहुमोगी होता है। जिनकी पीठ अभग्न होकर रोमहीन हो। वे अर्थशाली होने हैं। इससे अन्यभाँति पीठ अशुभदायक होती है॥ ३७ ॥