16. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — स्कन्धलक्षण
स्कन्धलक्षण
निर्मासौ रोमचितौ भग्नावल्पौ च निर्धनस्यांसौ। विपुलावप्युन्नतौ सुश्लिष्टौ सौख्यवीर्यवताम्॥। ३६॥ जिसके दोनों कन्धे मांसरहित, रोमों से व्याप्त व भग्न होकर छोटे हों वह निर्धन होता है। जिनके कन्धे चौड़े व ऊँचे होकर भली भाँति भरे हों वे पराक्रमी सुखी होते हैं।। २ह॥