Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

58. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — स्त्रीकव्यादिलक्षण

स्त्रीकव्यादिलक्षण

मध्यं स्त्रियास्तिवलिनाथविरोमशं च वृत्तौ घनावविषमौ कठिनावुरस्यौ। रोमापवर्जितमुरो मृदु चाङ्नानां ग्रीवा च कम्बुनिचितार्थसुखानि धत्ते ॥ ६ ॥ यदि मध्यभाग त्रियलीयुक रोमरहित हो, दोनों स्तन बने, समान तथा कड़ै हो, वन्तःस्थल कोमल तथा रोमहीन हो, ग्रीचा (बींच) शंख के समान हो, तो वह नारी धनवनी और सुखी होनी है॥ ६ ॥