57. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — नितम्बनामिलक्षण
नितम्बनामिलक्षण
विस्तीर्णमांसोपचितो नितम्बो गुरुश्च धत्ते रसनाकलापम्। नाभिर्गभीश विपुलाङ्गनानां प्रदत्िणावर्तगता प्रशस्ता ॥५।। यदि स्त्रियों का नितम्ब (कटिपश्चान्भाग) चौढ़ा, मांसल और बड़ा हो तो वह करधनी से शोमित होता है। यदि नारियों की नाभि गंभीर, विपुल और पदत्षिखावर्त हो तो वह प्रशस्त होती है।। ५ ।