Books / Saral Samudrik Shastra — Face Reading

12. Saral Samudrik Shastra — ललाट एवं ललाट रेखायें

ललाट एवं ललाट रेखायें

सामान्य भाषा में सिर के अग्र भाग को ललाट कहते हैं। ललाट की आकृति और उस पर पायी जाने वाली रेखाओं के संबंध में अनेक ग्रन्थों में वर्णित है। ललाट व रेखाओं से जातक की बौद्धिक क्षमता, ज्ञान, विचार, साहस, व्यवहार आदि के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।

निःस्वा विषम भालेन दुःखिता ज्वर जर्जराः। परकर्म करा नित्यं प्राप्यन्ते वध वन्धनम।।

(सामुद्रिक शास्त्र)

जिस जातक का ललाट नीचा हो, अविकसित हो, ऐसा जातक जीवन में ज्वर से पीड़ित होता है तथा निम्न कोटि का कार्य करने वाला होता है एवं जीवन में सफलता और सम्मान से वंचित होता है।

ललाटेनार्ध चन्द्रेण भवन्ति पृथ्वीश्वराः। विपुलेन ललाटेन महानरपतिः स्मृतः।। श्लक्ष्णेन तु ललाटेन नरो धर्मरतस्तथा।

(भविष्यपुराण)

जिस जातक का ललाट अर्ध चन्द्राकार होता है तथा उन्नत एवं फैला होता है, वह जातक भूमि और सम्पत्ति का स्वामी होता है तथा ऐसे जातक सुखी होते हैं। यदि ऐसे जातक का ललाट चिकनाई युक्त होवे तो जातक में धर्म कार्य करने की रुचि बढ़ जाती है।

  • जिस जातक के ललाट पर हंसते समय भौंहों के बीच दो खड़ी रेखा स्पष्ट हो जाय तो ऐसे जातक अच्छे गुणों से सम्पन्न होते हैं तथा सुख भोगते हैं।
  • जिस जातक का ललाट बहुत नीचा हो साथ ही ललाट में नसें उभरी हों तो ऐसे जातक दुःखी, और पापी होते हैं।
  • जिस जातक के ललाट में त्रिशूल वज्र या धनुष का चिन्ह हो तो ऐसे जातक को उच्च पदों वाली स्त्रियां पसंद करती हैं।

  • जिस जातक के ललाट पर नीली नसों के उभरने से तिलक जैसा चिन्ह प्रतीत हो तथा साथ ही ललाट का आकार अर्धचन्द्र सा हो तो जातक सुखी और धनवान होता है ।
  • जिस जातक की ललाट रेखायें न दिखती हों तथा ढलवा और चिकना हो परन्तु उत्तेजना के समय ये नसें दिखती हों, ऐसा जातक अति बुद्धिमान जातक होता है ।
  • जिस जातक का ललाट नीचा हो तथा रुखा हो, ऐसे जातक हिंसक प्रवृति एवं क्रूर कर्म करने वाले होते हैं । ऐसे जातक सुख से वंचित होते हैं तथा संघर्षमय जीवन बिताते हैं ।
  • जिस जातक का ललाट नाक के बराबर ऊँचा तथा नाक की लम्बाई से दुगुना चौड़ा तथा कनपटी विकसित हो तो ऐसे जातक श्रेष्ठ माने गये हैं ।

ललाट पर ग्रहों के चिन्ह तथा स्थान

  1. सूर्य — इसका चिन्ह मध्य बिन्दु युक्त वृत्त का चिन्ह होता है । इसका स्थान दाहिने नेत्र में रहता है ।
  2. चन्द्र — धनुष के आकार का इसका चिन्ह होता है । बाएं नेत्र में इसका निवास होता है ।
  3. मंगल — तीन शाखाओं वाला मंगल का चिन्ह सिर के ऊपरी भाग पर दिखाई देता है ।
  4. बुध — एक खड़ी रेखा पर तिरछी रेखा जैसा चिन्ह बुध का होता है । यह मुंह पर वास करता है ।
  5. गुरु — दो के समान चिन्ह गुरु का होता है । इसका निवास दाहिने कान पर होता है ।
  6. शुक्र — धन के चिन्ह के चारों ओर गोलाकार हो ऐसा चिन्ह शुक्र का होता है यह भौंहों के बीच में होता है ।

  1. शनि — ईकार के समान इसका चिन्ह होता है इसका निवास बाएं कान पर रहता है।

ललाट रेखा फल

ऊपर ललाट पर सात रेखाओं का वर्णन पीछे की पंक्तियों में किया जा चुका है। अधिक सूक्ष्मता से विचार करने पर ज्ञात होता है कि दाहिने नेत्र के ऊपरी भाग में छोटी-सी रेखा होती है, वह सूर्य की रेखा कहलाती है। इसी प्रकार बाएं नेत्र के ऊपरी भाग में चन्द्र की रेखा मानी जाती है। भौंहों के बीच में शुक्र की रेखा तथा नासिका के अग्रभाग में विद्वान् लोग बुध की रेखा मानते हैं।

  1. यदि गुरु रेखा में शाखाएं निकलती हों, तो वह व्यक्ति असत्य भाषी तथा दुष्ट होता है।
  2. यदि गुरु और मंगल की रेखाएं बीच में टूटी हुई हों, तो उसके पास निरन्तर धन का अभाव रहता है।
  3. यदि शनि व मंगल की रेखाएं टूटी हुई हों तथा गुरु की रेखा नीचे की तरफ झुकी हुई हो, तो वह सौभाग्यशाली एवं धनवान होता है।
  4. यदि शनि और गुरु की रेखाएं धनुष के आकार की हों, तो वह व्यक्ति दुष्ट स्वभाव वाला होता है।
  5. यदि शनि की रेखा बहुत अधिक गहरी और झुकी हुई हो, तो वह हत्यारा होता है।
  6. यदि शनि रेखा बहुत अधिक लम्बी और गहरी हो, तो पर-स्त्री से सम्पर्क होता है।
  7. शनि रेखा टेढ़ी होने से व्यसनी बनाती है।
  8. यदि मंगल रेखा सर्पाकार हो, तो वह हत्यारा होता है।
  9. यदि ललाट में चार रेखाएं हों, तो वह सच्चरित्र तथा बुद्धिमान होता है।

  1. यदि गुरू की रेखा सर्पाकार हो, तो वह व्यक्ति लोभी होता है।

  2. जिसके ललाट में तीन रेखाएं सीधी, सरल और स्पष्ट हों, वह व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है।

  3. यदि गुरु और शनि की रेखाएं परस्पर मिल गई हों तो उसकी मृत्यु फांसी से होती है।

  4. जिसके ललाट में बहुत अधिक रेखाएं टूटी-फूटी हों, तो वह व्यक्ति दुर्भाग्यशाली एवं रोगी होता है।

  5. यदि शनि की रेखा टेढ़ी हो, तो वह व्यसनी होता है।

  6. यदि सूर्य रेखा छोटी और शुक्र रेखा लम्बी हो तो वह व्यक्ति सच्चरित्र चतुर और सौभाग्यशाली होता है।

  7. यदि सूर्य की रेखा धनुष के आकार की और शुक्र की रेखा बीच में से कटी हुई हो, तो वह नम्र रसज्ञ और धनी होता है।

  8. यदि शनि और गुरु की रेखाएं ऊपरी भाग में अर्द्ध चन्द्राकार हों, तो वह व्यक्ति बहुत अधिक सौभाग्यशाली होता है।

  9. यदि ललाट में सर्प के आकृति की एक ही रेखा हो, तो वह बलवान होता है।

  10. यदि दोनों भौंहों के बीच में त्रिशूल का चिन्ह होता है तो जीवन में उसका निश्चय ही अंग-भंग होता है।

  11. यदि सूर्य रेखा बीच में कटी हुई हो तो वह क्रोधी, कामी तथा झगड़ालू होता है।

  12. यदि शनि रेखा लम्बी हो तथा मंगल की रेखा सर्पाकार हो, तो वह धर्मात्मा, दयालु और उच्च समाज में रहने वाला होता है।

  13. यदि शनि और गुरु की रेखा सर्पाकार हो, तो वह धूर्त स्वभाव वाला होता है। यदि सर्पाकार गुरु की रेखा शनि रेखा के पास पहुँचे हो तो वह कलहप्रिय


होता है।

  1. यदि गुरु की रेखा लम्बी और लचीली हो, तो वह सुन्दर और सौभाग्यशाली माना जाता है।

  2. यदि मंगल की रेखा झुकी हुई हो तथा शुक्र रेखा दाहिनी ओर कटी हुई हो, तो वह अभिमानी, क्रोधी तथा पर-स्त्री-सेवी होता है।

  3. यदि शनि तथा गुरु की रेखाएं धनुष के आकार की हो तो वह व्यक्ति पराक्रमी होता है।

  4. यदि शनि रेखा गहरी हो तथा दोनों भौंहों के बीच में अधिक बाल हो, तो वह एक से अधिक विवाह का इच्छुक तथा सम्पत्तिशाली होता है।

  5. यदि शनि रेखा पतली और गुरु रेखा मोटी तथा लम्बी हो, तो वह व्यक्ति घातक होता है।

अभ्यास प्रश्नावली

  1. ललाट पर रेखाओं के प्रभाव को लिखें ?
  2. ललाट रेखाओं के नाम लिखें ?
  3. ललाट पर शनि रेखा के बारे में आप क्या जानते हैं ?
  4. ललाट पर बुध और शुक्र रेखा दोषी होने पर जातक पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
  5. ललाट पर एक भी रेखा न होने पर भविष्यवाणी कैसे की जा सकती है ?

अध्याय-3