Books / Saral Samudrik Shastra — Face Reading

13. Saral Samudrik Shastra — 3. Effect of Hairs on Human Body

3. Effect of Hairs on Human Body

यदि स्त्रियों की त्वचा का बाहरी भाग रूखा, सिलवट पड़ा हुआ, दबा हुआ, शिरा में दिखाई देने वाला और केशों वाला कर पृष्ठ स्त्रियों के होता है तो ऐसा माना जाता है कि उसका वैधव्य योग है। पुरुष के लिए भी ऐसा होना अशुभ है। अधिक केश होने से तो वह दरिद्र सूचक है पर शारीरिक काम कर सकता है।

महिला के हाथों पर बाल होने से पाश्चात्य मत वालों का कहना है कि वह स्त्री दुष्टा और लड़ाकू होती है। पुरुष के होने से वह आक्रोश प्रकृति का होता है।

अंगूठे के ऊपर केश का होना वे अच्छा बतलाते हैं।

अंगुली के तीसरे पोर के पीछे बालों का होना पुरुष को कठोर बनाता है।

दूसरे और तीसरे दोनों अंतिम पोरों पर रहने से व्यक्ति सबका प्रियपात्र होता है।

ब्रिटेन और अमेरिकन लेखक तीसरी पोर पर बालों के होने को कठोरता का सूचक बताते हैं। 'हार्ड टास्क मास्टर' ने कहा है, पृष्ठ भाग पर बिल्कुल ही बाल न हों तो डरपोक और पुरुषत्वहीन होता है।

थोड़े बाल और कहीं कहीं पर बाल होना मतलबी और दूरदर्शिता का सूचक बताया है।

एक लेखक ने अंगूठे पर स्थित बालों वाले व्यक्ति के बारे में यह कहा है कि इस प्रकार का व्यक्ति कोई नई चीज खोज करता है तथा उसमें पैतृक गुणों की प्रधानता के साथ-साथ प्रतिभा भी रहती है।

नरम और मुलायम बाल स्त्रियोचित नाजुकता के परिचायक हैं। ऐसे पुरुष स्त्रीतुल्य काम, साज-सज्जा, चाल-ढाल वाले होते हैं। वह व्यक्ति भावुक,


काल्पनिक और प्रेमी सा व्यवहार करता है। ऐसा बाल जो कड़ा हो तथा रूखा एवं कड़ा हो तो व्यक्ति भी कड़ा, रूखा और निर्दयी होता है।

अधिक बालों वाला व्यक्ति पंडित और गुणी होता देखा गया है।

बिना केशों वाला व्यक्ति अधिक धनी, सुखी अथवा दरिद्र होता है।

'खल्वाट् क्वचिदपि दरिद्रोः'

शरीर पर, बाहु पर जहां रोम होते हैं वे सिर के बालों से भिन्न होते हैं। यदि कांख में रोम अधिक हों तो व्यक्ति दुःखी होता है।

हृदय पर रोम वाला व्यक्ति दयालु होता है, रोम से रहित व्यक्ति को शास्त्रकार 'दुःखी' कहता है।


अन्य लक्षण

प्राचीन भारतीय सामुद्रिक शास्त्र में मनुष्यों के अंगों के बारे में विवेचन किया गया है, हस्तरेखा विशेषज्ञ को सामुद्रिक शास्त्र का अध्ययन भी आवश्यक होता है। सामुद्रिक ज्ञान होने से भविष्यवाणी करने में सहयोग मिलता है सामुद्रिक शास्त्र का व्यवहारिक विवेचन इस प्रकार है।

  • बेचैनी से एक दूसरे से हाथ रगड़ने वाले व्यक्ति किंकर्तव्य-विमूढ़, हतोत्साह और स्वभाव से अमीर होते हैं।
  • कुहनी पर मुड़े हुए हाथ आत्मगर्व, प्रपंच और दूसरों के प्रति हेय भावना रखने वाले होते हैं।
  • अंगूठे के जोड़ पर यव का चिह्न बुद्धि और सम्पत्तिवान पुरुषों के होते हैं।
  • पांच से ज्यादा उंगलियों वाला व्यक्ति दरिद्र और याचक होता है।
  • नसयुक्त टेढ़े पृष्ठभाग वाला व्यक्ति दरिद्र होता है।
  • छोटी ग्रीवा श्रेष्ठ व्यक्ति की होती हैं।
  • टेढ़ी ग्रीवा चुगलखोर व्यक्ति की होती हैं।
  • चौड़ा मुंह दुर्भाग्य का सूचक हैं।
  • लम्बी ग्रीवा अधिक भोजन वाले व्यक्तियों की होती हैं।
  • स्त्रियों के समान मुख संतानहीनों का होता हैं।
  • चौकोर मुंह धोखेबाज, मायावी व्यक्तियों का होता है।
  • छोटे मुंह वाले व्यक्ति कंजूस कहे जा सकते हैं।
  • गुलाबी होठ प्रतिभावानों के होते हैं।
  • मोटे होठ प्रफुल्ल व्यक्तियों के होते हैं।

  • लम्बाई लिए होठ कामी के होते हैं।
  • छोटे होंठ भीरु (डरपोक) के होते हैं।
  • रुखे, पतले और कुरूप होठ धनहीन दुःखी व्यक्तियों के होते हैं।
  • ललाट पर पांच रेखायें शतजीवी की होती है।
  • चार रेखायें अस्सी वर्ष की आयु बतलाती है।
  • तीन रेखायें सत्तर की आयु की सूचक है।
  • मोर, बिल्ली अथवा शेर जैसी चाल वाले व्यक्ति भाग्यवान होते हैं।
  • हंस, हाथी और बैल की तरह चलने वाले व्यक्ति निरन्तर धर्म, अर्थादि कार्यों में तत्पर होते हैं।
  • गीदड़, ऊंट और खरगोश जैसी चाल वाले समाज में सम्मान खो बैठते हैं।

अभ्यास प्रश्नावली

  1. जातक के शरीर पर अधिक बाल होने से क्या प्रभाव पड़ता है ?
  2. जातक के शरीर पर पायेजाने वाले शुभाशुभ लक्षण के बारे में लिखें ?
  3. आखों की दोनों भौहें परस्पर जुड़ी होने से क्या होता है ?

अध्याय—4