101. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — कर्णलक्षण
कर्णलक्षण
लम्बौ कर्णो शुभावर्तौं सुखदौ च शुभप्रदौ। शष्कुलीरहितौ निन्दौ शिरालौ कुटिलौ कृशौ ॥ १७॥ जिसके कान लम्बे होकर शुभदायक घेर से प्रतीत हों तो उस स्त्री को सुखद होकर बड़े शुभदायक होते हैं और जिसके कान शष्कुली (कुचियों) से रहित, नसोंवाले व टेढ़े होकर पतले प्रतीत हों तो उन स्त्रियों के लिये निन्दनीय होते हैं ॥ १७॥