102. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — ललाटलक्षण
ललाटलक्षण
भाल: शिराविरहितो निर्लोमार्घेन्दुसन्निमः। अनिम्नस्त्रयङ्गलो नार्या: सौभाग्यारोग्यकारणम् ॥१८॥ व्यक्कस्वस्तिकरेखं च ललाटं राज्यसम्पदे। प्रलम्बं मस्तकं यस्या देवरं हन्ति सा धुवम् ॥ १६ ॥ रोमशेन शिरालेन प्रांशना रोमिणी मता॥ २० ॥ जिसका भाल नसों से रहित व लोमों से हीन आधे चन्द्रमा के समान तथा गहिरा न होकर तीन अंगुलवाला प्रतीत हो तो उस स्त्री के लिये सौभाग्य व आरोग्य का का- रख होता है व जिसका ललाट प्रकटित त्रिकोण रेखावाला प्रतीत हो तो राज्यसंपदा के लिये होता है व जिसका मत्था लम्बा प्रतीत हो तो वह स्त्री निश्चयकर देवर को मारती है और जिसका भाल रोमोंवाला तथा नसोंवाला होकर ऊंचासा प्रतीत हो तो वह स्त्री रोगिणी मानी जाती है।। १८ । २० ।।