13. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — चूचकलक्षण
चूचकलक्षण
सुभगा भवन्त्यनुद्बद्धचूचका निर्धना विषमदीघैः । पीनोपचितनिमग्नैः क्षितिपतयश्चूचकैः सुखिनः ॥३१॥ जिनकी चूचियों की ढेपुनी ऊंची न हों तो वे गाणणी सौभाग्यशाली होते हैं व जिन की चूचियों की ढेपुनी विपम होकर दीर्घ हों तो वे प्राणी निर्धनी होते हैं और जिनकी चूचियों की ढेपुनी स्थूल व ऊंची होकर निमग्न हों तो वे प्राणी राजा होकर सुस्त्री रहते हैं ॥ ३१ ॥