Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

16. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — ग्रीवालक्षण

ग्रीवालक्षण

चिपिटग्रीवो निःस्वः शुष्का सशिरा च यस्य वा गीवा। महिपग्रीवः शूरः शस्त्रान्तो वृषसमग्रीवः॥ ३५॥ जिसकी ग्रीवा (घींच) चपटी हो या जिसकी ग्रीवा नसों से व्याप्त होकर सूखी हो तो वह प्राणी निर्धन होता है व जिसकी ग्रीवा भैंसा के समान हो तो वह भाखी सरमा होता है और जिसकी ग्रीवा बैल के समान हो तो वह पाणी शस्त्राघात से मौत को पाता है।। ३५ ॥। कम्बुग्रीवो राजा प्रलम्बकरठः प्रभक्षणो भवति। पृष्ठमभग्नमरोमशमर्थवतामशुभदमतोऽन्यत् ॥३६॥ जिसकी ग्रीवा शंख के समान (तीनरेखा से अझ्कित) हो तो वह प्राणी राजा होता ब जिसका कएठ लम्बा हो तो वह प्राणी बहुभोजी होता है और जिनकी पीठ अभर होकर रोमों से हीन हो तो वे पाणी अर्थशाली होते हैं और इससे अन्यभाँति पीठ तो माखियों को अशुभदायक होती है। ३६ ॥