20. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — चितुकाधरलक्षण
चितुकाधरलक्षण
अतिकृशदीघैश्चिबुकैननिर्द्रव्या मांसलैर्धनोपेताः। जिनकी चिवुक (दाढ़ी) बहुत पतली या लम्बी हो तो वे पाी दरिद्री होते हैं व जिनकी चिवुक मांसल हो यानी मांस से भरी हो तो वे प्राणी धनवान् होते हैं एवं जिनके अधर कुंदरू के समान होकर टेढ़े न हों तो वे प्राणी पृथ्वीपाल होते हैं और जिनके अधर पतले हों तो वे प्ाणी निर्घनी होते हैं॥ ५५ ॥ स्निग्धा घनाश्र दर्शना: सुतीक्ष्णदंष्ट्रास्समाश्र शुभाः ॥५६॥ जिनके ओठ स्फुटित, विखसिडित और विवर्ण होकर रूखे हों तो वे प्राणी धनहीन होते हैं और जिनके दाँत बड़ी तीखी दाढ़ोंवाले, चिकने व सघन होकर समान हों तो वे उन प्राशियों के लिये शुभसूचक होते हैं॥ ५६॥