Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

21. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — जिह्ातांलुलक्षण

जिह्ातांलुलक्षण

जिह्वा रक्ा दीर्घाश्लक्ष्णा सुसमा च भोगिनां जेया। श्वेता कृष्णा परुषा निर्द्रव्याणं तथा तालुँ. ॥।५७॥ जिनकी जीभ लाल, लम्बी व पतली होकर भलीभाँति समान हो तो उन माखियों को भोगी जानना चाहिये यानी ऐसे प्राी भोगी होते हैं और जिनकी जीभ सफ़ेद या १ द्वात्रिशद्दशनो राजा भोगीस्यादेकहीनकः । त्रिशद्दन्ताः स्युः सुखिनो विनैकेन सुदुःखि- नः ॥ दन्तास्तु विकटा यस्य नीचवन्नीचकर्मकृत। प्रगल्भो दन्तुरः सत्यं देशान्तररतो भवेत्॥ दुःस्त्रितैर्विकृतैरूक्षैर्दन्तमूषिकसत्निमैः । सौभाग्यं मिलितैर्दन्तैर्विद्यावान्दन्तुरः पुनः ॥ कदा- चिद्दन्तुरोमूर्ख: कदाचिल्लोमशोऽसुखी॥ २ यस्य जिद्धा भवेदीर्घा नासाय्रं लेढि सर्वदा। योगी भवति निर्वाणः पृथ्वीं भ्रमति सर्वदा॥ जिह्वेप्टमिष्टभोक्त्री स्याच्छोणा मृद्ी तथासिता। दुःखाय मध्यसंकीर्णा पुरोभागसुविस्तरा॥ कृष्णजिह्वा भवैद्यस्य स नरो दुःखभाजनः । यः स्पृशेजिह्वया नासां सभवेत्पापकारकः ॥ स्थूलजिह्वा क्ररजिह्वा स नरोऽमृतभाषितः । श्वेतजिह्वा नरा ये च तेप्याचारविवर्जिताः ॥ रक़जिह्वा भवद्यस्य विद्यां लक्ष्मी स चाप्नयात्॥ ३ कृष्णतालु नरा ये तु भवन्ति कुलनाशकाः । पद्मपत्रसमस्तालुः सं नरो भूपतिर्भवेत्॥ श्वरेततालु नरा ये तु धनवन्तो भवन्ति हि। रकतालु नरा ये तु धनाढ्या मानवाधिणा: ॥ पूर्वार्धः । काली होकर कर्कश हो तो वे प्राखी निर्धन होते हैं वैसेही जिनका तालु लाल, लम्ब व कोमल होकर समान हो तो वे पाणी भोगी होते हैं और जिनका तालु सफ़ेद या काला होकर खरखरा हो तो वे माणणी धनहीन होते हैं॥ ५७ ॥