Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

29. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — गात्रगंभीरादिलक्षण

गात्रगंभीरादिलक्षण

त्रिषु विपुलो गम्भीरस्त्रिष्वेव षडुन्नतश्चतुर्हस्वः। पूर्वार्धः। सपसु रक्ो राजा पञ्चसु दीर्घश्च सूक्ष्मश्च ॥ दद ॥ जिसकी देह के तीन स्थानों में चौड़ा हो व तीन स्थानों में गहरा हो व छः स्थानों में ऊंचा होकर चार स्थानों में हस्व हो व सात स्थानों में लाल व पांच स्थानों में दीर्घ व क्ष्म हो तो वह पाणी राजा होता है॥। ८ ॥ नाभ्यादीनां लक्षएमाह- नाभिःस्वरं सत्त्वमिति प्रदिष्टं गम्भीरमेतत्त्रितयं नराणाम्। उरो ललाटं वदनं च पुंसां विस्तीर्णमेतत्न्रितयं प्रशस्तम् ॥८६ ॥ जिनकी नाभि, स्वर व शक्ति ये तीनों गंभीर हों तो वे पुरुष भाग्यवाले होते हैं और जिनके वक्ष:स्थल, ललाट व मुख ये तीनों विस्तार वाले हों तो उन माशियों के लिये ुभदायक होते हैं ॥ ८६ ॥