Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

32. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — छायालक्षण

छायालक्षण

छाया शुभाशुभफलानि निवेदयन्ती लक्ष्या मनुष्यपशुपक्षिषु लक्षणज्ञैः। तेजोगुणान्वहिरपि प्रविकाशयन्ती दीपप्रभा स्फटिकरत्नघटस्थितैव॥ ६३ ।। छाया कान्ति या शरीर की शोभा शुभ व अशुभ फलों को निवेदन करती है इसलि लक्षणज्ञाता विद्वानों को मनुष्य, पशु व पक्षियों में उसको लखना चाहिये जोकि वाह भी तेज व गुणों को प्रकाशती है जैसे कि स्फटिक रत्नों के बने घड़े में टिकी हुई दीपव की मभा होती है ।। ६३ ।।