Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

33. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — पृथ्वीछायालक्षण

पृथ्वीछायालक्षण

स्निग्धद्विजत्वङ्नखरोमकेशच्छाया सुगन्धा च महीसमुत्था। तुष्ट्यर्थलाभाभ्युदयान्करोति धर्मस्य चाहन्यहनि प्रवृत्तिम् ॥६४।। यदि दाँत, खाल, नह, रोम और केश ये चिकने होकर सुगन्धित हों तो पृथ्वीतत्त्व रे उपजी छाया (शरीर की शोभा) जानना चाहिये वह प्राखियों के लिये सन्तोप, धन लाभ और ऐश्वर्य को करती है और दिन दिन में धर्म की पवटत्ति कराती है यानी अ्स्थि मांस, नख, खाल और लोम ये पृथ्वी के गुण हैं यदि सुगन्धित पुरुप हो तो बुधनट पृथ्वीकी छाया मानना चाहिये ॥। ६४ ॥