Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

4. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — रोमलक्षण

रोमलक्षण

रोमेकैकं कूपके पार्थिवानां दे द्वे ज्ञेये परिडतश्रोत्रियाणाम्। त्र्याध्यैर्निस्स्वा मानवा दुःखभाजःकेशाश्रैवं निन्दिताः पूजिताश्र॥६। जिनके रोम कूप में एक २ रोमा होवे तो वे प्राणी राजा होते हैं व जिनके रोमकरपों में दो२ रोमा होवें तो वे प्राणी पसडत व वेदपाठी होते हैं व जिनके रोमकूपों में तीन २ व चार २ रोमा होवें तो वे मनुष्य धनरहित होकर दुःखभागी होते हैं ऐसे ही जिनके मस्तक में केश ' वाल) होवें तो वे प्राणणी त्रैलोक्यपूजित व निन्दित होते हैं ॥ ६॥