Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

5. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — जानुलक्षण

जानुलक्षण

निर्मांसजानुर्प्रियते प्रवासे सौभाग्यमल्पैःप्रथितैर्दरिद्राः । स्त्रीनिर्जिताश्रापि भवन्ति निम्नै राज्यं समांसैश्र महद्विरायुः॥१०॥ जिसके बुटुनू मांस से रहित होवें तो वह पाी परदेश में मरता है व जिसके घुटुनू अल्प मांसवाले होवें तो वह माणी सौभाग्यशाली होता है व जिनके बुटनू चौड़े होवें तो वे पाी दरिद्री होते हैं व जिनके घुटुनू गहरे होवें तो वे पाणी स्रियों से जीते हुए होते हैं व जिनके बुटुनू मांसल होते हैं वे राज्य को पाते हैं व जिनके बुटुनू बड़े भारी होते हैं वे दीर्घायु कहाते हैं ॥ १० ॥