Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

41. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — अस्थिशुक्रसारलक्षण

अस्थिशुक्रसारलक्षण

स्थूलास्थिरस्थिसारो वलवान् विद्यान्तगः सुरूपश्च। बहुगुरुशुक्राः सुभगा विद्वांसो रूपवन्तश्च ॥ ३।। जिसके शरीर की हड्डियाँ मोटी हों तो उस भाी में अस्थि का सार जानना चाहिये और वह पाणी वलवान् व विद्यावान होकर बड़े रूपवाला होता है और जिनके शरीर में शुक्र व सुरु अधिक हो तो उन माशियों में शुक्रसार जानना चाहिये और वे प्राणी सौभाग्यशाली व विद्वान् होकर रूपवान होते हैं ॥ ३॥