43. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — स्निग्धलक्षण
स्निग्धलक्षण
स्नेहः पञ्चसु लक्ष्यो वाग्जिह्वादन्तनेत्रनखसंस्थः। सुतधनसौभाग्ययुताः स्निग्धैस्तैनिर्धनारूक्षैः॥ ५ ॥ पाँच स्थानों में स्निग्धता देखना चाहिये जोकि वाक्य, जिद्वा, दन्त, नेत्र और नखों में रहती है जिनके पांचों स्थानों में स्निग्धता प्रतीत हो तो वे प्राणी पुत्रवान् व धनवान् होकर सौभाग्यशाली होते हैं और जिन के पाँचो स्थानों में रूक्षता लक्षित हो तो वे प्राणी निर्धनी होते हैं॥। ५ ॥ सामुद्रिकशास्त्रस्य